राजनीतिक दल और चुनाव सुधार: कानून, वाद और प्रश्न
राजनीतिक दलों और चुनाव सुधारों के पूरे नोट्स - धारा 29A, राष्ट्रीय तथा राज्यीय दल की शर्तें, 1968 का चिह्न आदेश, दलबदल कानून और प्रमुख निर्णय।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

राजनीतिक दलों का उल्लेख संविधान के मूल पाठ में नहीं है, फिर भी भारतीय लोकतंत्र का कोई काम उनके बिना नहीं चलता। वे उम्मीदवार तय करते हैं, घोषणापत्र बनाते हैं, मतदाता को संगठित करते हैं, सरकार बनाते हैं और विपक्ष में बैठते हैं। कानून उन तक तीन रास्तों से पहुँचता है - लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951, अनुच्छेद 324 से शक्ति पाने वाला भारत निर्वाचन आयोग, और दलबदल को दंडित करने वाली दसवीं अनुसूची। चुनाव सुधार इसी दलीय प्रतिस्पर्धा को स्वतंत्र, निष्पक्ष और ईमानदार बनाने का लगातार चलने वाला प्रयास है। परीक्षक इस अध्याय को पसंद करते हैं, क्योंकि इसका हर तथ्य एक तिथि, एक धारा, एक अनुसूची या एक वाद का नाम है।
दलों का पंजीकरण और दलीय व्यवस्था
भारत में बहुदलीय व्यवस्था है, जिसमें राष्ट्रीय दल, राज्यीय दल और बड़ी संख्या में पंजीकृत पर गैर-मान्यता प्राप्त दल आते हैं। कोई दल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में पंजीकृत होता है, और आवेदन में संविधान, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र तथा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा की घोषणा देना अनिवार्य है। पंजीकरण से कर में छूट मिलती है और आगे मान्यता मिलने पर एक समान चुनाव चिह्न का अधिकार भी। इसी अधिनियम की धारा 29C के अनुसार दल को बीस हजार रुपये से अधिक के चंदे की सूचना देनी होती है, और आयोग ऐसा नाम अस्वीकार कर सकता है जो धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाए या किसी मौजूदा दल की नकल हो।
राष्ट्रीय और राज्यीय दल की मान्यता
मान्यता चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के अंतर्गत दी जाती है, और इसी से किसी दल को पूरे देश या पूरे राज्य में आरक्षित चिह्न मिलता है।
| स्थिति | मुख्य शर्तें (कोई एक पूरी होना पर्याप्त) |
|---|---|
| राष्ट्रीय दल | चार या अधिक राज्यों में छह प्रतिशत वैध मत और चार लोकसभा सीटें; या कम से कम तीन राज्यों से लोकसभा की दो प्रतिशत सीटें; या चार या अधिक राज्यों में राज्यीय दल की मान्यता |
| राज्यीय दल | विधानसभा चुनाव में छह प्रतिशत वैध मत और दो सीटें; या राज्य में लोकसभा चुनाव में छह प्रतिशत मत और एक सीट; या विधानसभा की तीन प्रतिशत सीटें अथवा तीन सीटें, जो अधिक हो; या राज्य को मिली प्रत्येक पच्चीस लोकसभा सीटों में से एक सीट; या राज्य में आठ प्रतिशत वैध मत |
टूटे हुए गुटों के बीच नाम और चिह्न का विवाद आयोग आदेश के पैरा 15 के अंतर्गत तय करता है, और सादिक अली बनाम भारत निर्वाचन आयोग (1971) में उच्चतम न्यायालय ने उद्देश्य, संगठन और विधायी शक्ति की तीन कसौटियों वाली इस पद्धति को सही ठहराया।
दसवीं अनुसूची और दलबदल
संविधान (बावनवाँ संशोधन) अधिनियम 1985 ने दसवीं अनुसूची जोड़ी, जो उस विधायक या सांसद को निरर्हित करती है जो अपने दल की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दे या दल के व्हिप के विरुद्ध मत दे। निर्णय अध्यक्ष या सभापति करते हैं, और किहोतो होलोहन बनाम जाचिल्हू (1992) में तय हुआ कि यह निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में है। संविधान (इक्यानवेवाँ संशोधन) अधिनियम 2003 ने एक-तिहाई सदस्यों के विभाजन को मिलने वाली छूट हटा दी, इसलिए अब केवल दो-तिहाई का विलय ही बचाव है; इसी संशोधन ने मंत्रिपरिषद का आकार सदन की शक्ति के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित किया।
अब तक हुए सुधार
- संविधान (इकसठवाँ संशोधन) अधिनियम 1988 ने मताधिकार की आयु इक्कीस से घटाकर अठारह वर्ष की।
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का पहला प्रयोग 1982 में केरल की परवूर विधानसभा सीट पर हुआ और 2004 तक पूरे देश में हो गया; इसके बाद वीवीपैट की पर्ची जुड़ी।
- मतदाता फोटो पहचान पत्र 1993 में मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन के समय शुरू हुआ।
- भारत संघ बनाम एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (2002) ने उम्मीदवार के लिए आपराधिक मामलों, संपत्ति और शिक्षा की घोषणा अनिवार्य की, जो अब धारा 33A के अंतर्गत प्रपत्र 26 के शपथपत्र में दी जाती है।
- लिली थॉमस बनाम भारत संघ (2013) ने अपील दाखिल करके निरर्हता टालने की प्रथा समाप्त की, इसलिए दोषसिद्धि पर निरर्हता तुरंत लागू होती है।
- इनमें से कोई नहीं (नोटा) का विकल्प पीयूसीएल बनाम भारत संघ (2013) से आया।
- 2009 में जोड़ी गई धारा 126A आयोग द्वारा अधिसूचित अवधि में एग्जिट पोल के प्रकाशन पर रोक लगाती है।
- उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना को अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत मतदाता के सूचना के अधिकार का उल्लंघन मानते हुए रद्द कर दिया।
समितियाँ और लंबित माँगें
1975 की तारकुंडे समिति, 1990 की दिनेश गोस्वामी समिति, अपराध और राजनीति के गठजोड़ पर 1993 की वोहरा समिति, चुनावों में आंशिक राजकीय वित्त पोषण पर 1998 की इंद्रजीत गुप्त समिति, तथा विधि आयोग की एक सौ सत्तरवीं और दो सौ पचपनवीं रिपोर्ट - सभी ने सुधार पर लिखा है। उनकी मुख्य लंबित माँगें हैं - चुनावों का राजकीय वित्त पोषण, दलों में आंतरिक लोकतंत्र और लेखा परीक्षा, गंभीर अपराधों में आरोप तय हो जाने पर चुनाव लड़ने पर रोक, छद्म विज्ञापन और पेड न्यूज पर अंकुश, बूथवार मतदान छिपाने के लिए टोटलाइजर, और लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव एक साथ कराना।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से चार तरह के प्रश्न बनते हैं। पहला, कानूनी आधार - आयोग के लिए अनुच्छेद 324, पंजीकरण के लिए धारा 29A, चिह्न के लिए 1968 का आदेश और दलबदल के लिए दसवीं अनुसूची; प्रश्न इन्हें आपस में बदलकर पूछता है। दूसरा, मान्यता का गणित, जिसमें राष्ट्रीय दल की छह प्रतिशत मत और चार लोकसभा सीटों की शर्त को राज्यीय दल की छह प्रतिशत मत और दो सीटों की शर्त के सामने रखा जाता है। तीसरा, संशोधन और उनके वर्ष - मुख्यतः 1985 का बावनवाँ, 1988 का इकसठवाँ और 2003 का इक्यानवेवाँ। चौथा, वाद और उससे जुड़ा सुधार, जिसमें किहोतो होलोहन, सादिक अली, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स निर्णय, लिली थॉमस और नोटा वाद विकल्पों में घुमाए जाते हैं। समितियाँ अध्यक्ष के नाम और वर्ष के जोड़े में पूछी जाती हैं, इसलिए तारकुंडे 1975, दिनेश गोस्वामी 1990, वोहरा 1993 और इंद्रजीत गुप्त 1998 को जोड़े में याद करें। राष्ट्रीय दलों की वर्तमान सूची का अनुमान न लगाएँ, क्योंकि वह बदलती रहती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| निर्वाचन आयोग का गठन | 25 जनवरी 1950, जो अब राष्ट्रीय मतदाता दिवस है |
|---|---|
| दलों का पंजीकरण | लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A |
| चंदे की सूचना | धारा 29C, बीस हजार रुपये से अधिक के चंदे पर |
| चुनाव चिह्न | चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 |
| दल के विभाजन या विलय का विवाद | चिह्न आदेश के पैरा 15 के अंतर्गत आयोग द्वारा; सादिक अली वाद, 1971 |
| दलबदल विरोधी कानून | दसवीं अनुसूची, बावनवाँ संशोधन अधिनियम 1985 |
| विभाजन की छूट समाप्त | इक्यानवेवाँ संशोधन अधिनियम 2003; केवल दो-तिहाई विलय सुरक्षित |
| अठारह वर्ष की मतदान आयु | इकसठवाँ संशोधन अधिनियम 1988, मार्च 1989 से प्रभावी |
| ईवीएम का पहला प्रयोग | 1982, परवूर विधानसभा क्षेत्र, केरल |
| मतदाता फोटो पहचान पत्र | 1993 में मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन के समय शुरू |
| उम्मीदवारों द्वारा प्रकटन | भारत संघ बनाम एडीआर, 2002; धारा 33A और प्रपत्र 26 |
| नोटा | पीयूसीएल बनाम भारत संघ, 2013 |
| एग्जिट पोल | 2009 में जोड़ी गई धारा 126A, अधिसूचित अवधि में प्रकाशन पर रोक |
| चुनावी बॉन्ड | फरवरी 2024 में उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द |
| जमानत राशि | लोकसभा के लिए पच्चीस हजार और विधानसभा के लिए दस हजार रुपये, अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आधी |
| चुनाव याचिका | लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अंतर्गत उच्च न्यायालय में, अपील उच्चतम न्यायालय में |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
संविधान का कौन-सा अनुच्छेद चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण भारत निर्वाचन आयोग को देता है?
- A.अनुच्छेद 324
- B.अनुच्छेद 326
- C.अनुच्छेद 329
- D.अनुच्छेद 330
उत्तर देखें
अनुच्छेद 324 निर्वाचक नामावली तैयार कराने तथा संसद, राज्य विधानमंडलों और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के पदों के सभी चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण भारत निर्वाचन आयोग को सौंपता है, और जब किसी स्थिति पर कानून चुप हो तो आयोग इसी अनुच्छेद के आधार पर कार्य करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हाथी किस भारतीय राजनीतिक दल का चुनाव चिह्न है?
- A.नेशनल कांग्रेस पार्टी
- B.भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
- C.बहुजन समाज पार्टी
- D.राष्ट्रीय जनता दल
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हाथी बहुजन समाज पार्टी का आरक्षित चुनाव चिह्न है, जिसकी स्थापना कांशीराम ने 1984 में की थी; चूँकि असम और सिक्किम में एक अन्य दल भी हाथी का प्रयोग करता है, इसलिए निर्वाचन आयोग शेष देश में यह चिह्न बहुजन समाज पार्टी को आवंटित करता है - यही बात बताती…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में मताधिकार की आयु इक्कीस वर्ष से घटाकर अठारह वर्ष किस संविधान संशोधन द्वारा की गई?
- A.चौवालीसवाँ संशोधन
- B.बावनवाँ संशोधन
- C.इकसठवाँ संशोधन
- D.तिहत्तरवाँ संशोधन
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संविधान (इकसठवाँ संशोधन) अधिनियम 1988 ने अनुच्छेद 326 में संशोधन कर मतदाता की अर्हक आयु इक्कीस वर्ष से अठारह वर्ष की, और यह मार्च 1989 से प्रभावी हुआ, इसलिए 1989 का आम चुनाव पहला चुनाव था जिसमें अठारह वर्ष के युवाओं ने मत दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दलबदल विरोधी कानून भारत के संविधान की किस अनुसूची में है?
- A.नौवीं अनुसूची
- B.दसवीं अनुसूची
- C.ग्यारहवीं अनुसूची
- D.बारहवीं अनुसूची
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दसवीं अनुसूची 1985 के बावनवें संशोधन द्वारा जोड़ी गई और यह उस सांसद या विधायक को निरर्हित करती है जो जिस दल के टिकट पर जीता है उसकी सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दे, अथवा दल के निर्देश के विरुद्ध मत दे या मतदान से अनुपस्थित रहे; ऐसी याचिका पर निर्णय…
पूरी व्याख्या पढ़ें →लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की किस धारा के अंतर्गत कोई राजनीतिक दल भारत निर्वाचन आयोग में पंजीकृत होता है?
- A.धारा 29A
- B.धारा 33A
- C.धारा 123
- D.धारा 8
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लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A ही वह प्रावधान है जिसके अंतर्गत नागरिकों का कोई संगम या निकाय राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण के लिए निर्वाचन आयोग को आवेदन करता है, और आवेदन में संविधान, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र तथा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के प्रति सच्ची…
पूरी व्याख्या पढ़ें →मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को आरक्षित चुनाव चिह्न किस वर्ष के आदेश के अंतर्गत आवंटित किए जाते हैं?
- A.1951
- B.1961
- C.1968
- D.1989
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चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 निर्वाचन आयोग ने अनुच्छेद 324 तथा निर्वाचन संचालन नियमों के अंतर्गत जारी किया था, और यही आदेश राष्ट्रीय तथा राज्यीय दलों की मान्यता, उनके लिए चिह्न का आरक्षण, अन्य उम्मीदवारों के लिए मुक्त चिह्नों की सूची, और पैरा 15 के अंतर्गत किसी मान्यता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →मतपत्र पर इनमें से कोई नहीं (नोटा) का विकल्प उच्चतम न्यायालय के किस वाद के निर्णय के बाद दिया गया?
- A.किहोतो होलोहन बनाम जाचिल्हू
- B.पीयूसीएल बनाम भारत संघ
- C.सादिक अली बनाम भारत निर्वाचन आयोग
- D.लिली थॉमस बनाम भारत संघ
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2013 के इस निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने माना कि सभी उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा मत की गोपनीयता का अंग है, और आयोग को इनमें से कोई नहीं का बटन देने का निर्देश दिया; आयोग ने उसी वर्ष हुए विधानसभा चुनावों से इसका प्रयोग शुरू…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस समिति ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को वस्तु रूप में चुनावों के आंशिक राजकीय वित्त पोषण की सिफारिश की थी?
- A.तारकुंडे समिति
- B.दिनेश गोस्वामी समिति
- C.इंद्रजीत गुप्त समिति
- D.वोहरा समिति
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इस समिति ने 1998 में चुनावों के राजकीय वित्त पोषण पर रिपोर्ट दी और सिफारिश की कि वित्त पोषण आंशिक हो, नकद के स्थान पर वस्तु रूप में दिया जाए और केवल मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय तथा राज्यीय दलों तक सीमित रहे; उसने यह चेतावनी भी दी कि सार्वजनिक वित्त की…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का पहला प्रयोग 1982 में किस राज्य की एक विधानसभा सीट पर हुआ था?
- A.केरल
- B.कर्नाटक
- C.राजस्थान
- D.गोवा
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मशीन का पहला प्रयोग 1982 में केरल की परवूर विधानसभा सीट के उपचुनाव में हुआ और वह भी केवल कुछ मतदान केंद्रों पर; वैधानिक आधार न होने के कारण इस प्रयोग को चुनौती मिली, फिर संसद ने 1989 में कानून में संशोधन कर मशीन की अनुमति दी, और 2004 के…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना की स्मृति में राष्ट्रीय मतदाता दिवस किस तिथि को मनाया जाता है?
- A.26 जनवरी
- B.25 जनवरी
- C.15 जनवरी
- D.1 जनवरी
उत्तर देखें
भारत निर्वाचन आयोग का गठन 25 जनवरी 1950 को हुआ था, यानी संविधान लागू होने से एक दिन पहले, और 2011 से यह दिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य अठारह वर्ष पूरे करने वाले युवाओं का नाम नामावली में जोड़ना और उन्हें मतदाता फोटो…
पूरी व्याख्या पढ़ें →लोकसभा चुनाव लड़ने वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को कितनी जमानत राशि जमा करनी होती है?
- A.दस हजार रुपये
- B.पच्चीस हजार रुपये
- C.पाँच हजार रुपये
- D.पचास हजार रुपये
उत्तर देखें
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 34 लोकसभा उम्मीदवार के लिए जमानत राशि पच्चीस हजार रुपये तय करती है, और अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार को इसका आधा देना होता है; यदि उम्मीदवार वैध मतों के छठे भाग से अधिक मत न पाए तो राशि जब्त हो जाती…
पूरी व्याख्या पढ़ें →उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक मानते हुए किस वर्ष रद्द किया?
- A.2017
- B.2018
- C.2024
- D.2021
उत्तर देखें
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिकाओं पर संविधान पीठ ने फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया और कहा कि दलों को मिलने वाला गुमनाम कॉर्पोरेट चंदा अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत मतदाता के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करता है तथा कंपनियों को असीमित चंदे की अनुमति…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या संविधान में राजनीतिक दलों का उल्लेख है?
मूल संविधान में नहीं था। दल संवैधानिक पाठ में 1985 में आए, जब बावनवें संशोधन ने दसवीं अनुसूची जोड़ी, जिसमें उस दल की चर्चा है जिसके टिकट पर सदस्य चुना गया और दल के निर्देश की भी। उनका पंजीकरण और मान्यता लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 तथा 1968 के चिह्न आदेश पर आधारित है।
पंजीकृत दल और मान्यता प्राप्त दल में क्या अंतर है?
हर दल धारा 29A के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में पंजीकृत होता है, जिससे कर में छूट और चुनाव लड़ने का अधिकार मिलता है। मान्यता इससे आगे का दर्जा है, जो 1968 के चिह्न आदेश के अंतर्गत मत या सीट की सीमा पार करने पर राष्ट्रीय या राज्यीय दल को मिलता है और जिससे आरक्षित चिह्न, लोक प्रसारक पर नि:शुल्क प्रसारण समय तथा स्टार प्रचारकों की सूची में स्थान मिलता है।
दलबदल करने वाले सदस्य को तुरंत निरर्हित किया जा सकता है?
दसवीं अनुसूची निरर्हता का प्रावधान करती है, पर निर्णय सदन के अध्यक्ष या सभापति का होता है और अनुसूची में कोई समय सीमा नहीं लिखी है। किहोतो होलोहन बनाम जाचिल्हू ने 1992 में तय किया कि यह निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में है, और ऐसी याचिकाओं पर लंबी देरी ही सुधार की स्थायी माँग है।
उम्मीदवार की जमानत राशि का क्या होता है?
यदि उम्मीदवार चुन लिया जाए, निर्धारित समय में नाम वापस ले ले, या वैध मतों के छठे भाग से अधिक मत पाए तो राशि लौटा दी जाती है; अन्यथा सरकार के पास जब्त हो जाती है। राशि लोकसभा के लिए पच्चीस हजार और विधानसभा के लिए दस हजार रुपये है, तथा अनुसूचित जाति या जनजाति के उम्मीदवार के लिए दोनों की आधी।
भारत में निर्वाचित प्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार है?
सांसदों और विधायकों के लिए वापस बुलाने का अधिकार नहीं है। कुछ राज्य अपने कानूनों के अंतर्गत नगरीय निकायों या पंचायतों के सदस्यों को वापस बुलाने की व्यवस्था देते हैं। सामान्य रूप से ऐसे अधिकार के प्रस्ताव पर बहस हुई है, पर उसे स्वीकार नहीं किया गया, मुख्यतः दुरुपयोग के खतरे और बार-बार चुनाव के खर्च के कारण।
स्रोत
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 — इंडिया कोड, भारत सरकार
- भारत का संविधान, अनुच्छेद 324 और दसवीं अनुसूची — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 — भारत निर्वाचन आयोग





