मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24
GK नोट्सभारतीय राजव्यवस्थाअंतर-राज्य संबंध और क्षेत्रीय परिषदें

अंतर-राज्य संबंध और क्षेत्रीय परिषदें: अनुच्छेद और प्रश्न

अंतर-राज्य संबंधों के पूर्ण नोट्स: अनुच्छेद 261 से 263, अंतर-राज्य परिषद, पांच क्षेत्रीय परिषदें, पूर्वोत्तर परिषद तथा नदी जल विवाद की व्यवस्था।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

Read in English
अंतर-राज्य संबंध और क्षेत्रीय परिषदें: अनुच्छेद और प्रश्न — GK24 title card
अंतर-राज्य संबंध और क्षेत्रीय परिषदें: अनुच्छेद और प्रश्न — GK24 title card

संघ व्यवस्था तभी चलती है जब उसकी इकाइयां आपस में निभा सकें। इसलिए संविधान केवल संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का बंटवारा करके नहीं रुकता; भाग 11 और भाग 13 यह भी बताते हैं कि राज्य एक-दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करेंगे, एक राज्य के सार्वजनिक अभिलेख और न्यायिक आदेश दूसरे राज्य में कैसे मान्य होंगे, नदी जल पर उनके झगड़े कैसे सुलझेंगे और वे किन मंचों पर साथ बैठेंगे। इन प्रावधानों के इर्द-गिर्द भारत सरकार ने अंतर-राज्य परिषद और क्षेत्रीय परिषदों जैसी सलाहकार संस्थाएं बनाई हैं। परीक्षाओं में यह अध्याय बार-बार आता है, क्योंकि इसका हर तथ्य एक अनुच्छेद संख्या, एक अधिनियम, एक वर्ष या सदस्य राज्यों की सूची है।

अनुच्छेद 261: पूर्ण विश्वास और विश्वसनीयता

अनुच्छेद 261 कहता है कि संघ तथा प्रत्येक राज्य के सार्वजनिक कार्यों, अभिलेखों और न्यायिक कार्यवाहियों को भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में पूर्ण विश्वास और विश्वसनीयता दी जाएगी। अर्थात एक राज्य में बना जन्म प्रमाण पत्र, भूमि अभिलेख या न्यायालय की डिक्री हर दूसरे राज्य में वैध साक्ष्य है। यही अनुच्छेद संसद को यह तय करने की शक्ति देता है कि ऐसे कार्यों और अभिलेखों को किस रीति से साबित किया जाएगा, और यह भी उपबंधित करता है कि भारत के किसी भाग के दीवानी न्यायालय का अंतिम निर्णय या आदेश देश में कहीं भी निष्पादित किया जा सकता है। यह उपबंध राज्यों को एक-दूसरे के लिए विदेश बनने से रोकता है।

अनुच्छेद 262: अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद

अनुच्छेद 262 संसद को यह शक्ति देता है कि वह विधि द्वारा अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के जल से संबंधित विवादों के न्यायनिर्णयन की व्यवस्था करे। इसका दूसरा खंड संसद को यह अधिकार देता है कि वह ऐसे विवाद में उच्चतम न्यायालय की भी अधिकारिता को वर्जित कर दे, जो अनुच्छेद 131 की सामान्य मूल अधिकारिता का दुर्लभ अपवाद है। संसद ने इस शक्ति से 1956 में दो अधिनियम बनाए: नदी बोर्ड अधिनियम, जिसके अंतर्गत केंद्र किसी नदी घाटी पर राज्यों को सलाह देने के लिए नदी बोर्ड बना सकता है, और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, जिसके अंतर्गत केंद्र संतुष्ट होने पर विवाद अधिकरण को सौंपता है। अधिकरण का अभिनिर्णय राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद पक्षकारों पर डिक्री की भांति बाध्यकारी होता है। कृष्णा, गोदावरी और नर्मदा के लिए 1969 में, रावी-ब्यास के लिए 1986 में, कावेरी के लिए 1990 में तथा महानदी के लिए 2018 में अधिकरण बने।

अनुच्छेद 263: अंतर-राज्य परिषद

अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को आदेश द्वारा अंतर-राज्य परिषद की स्थापना की शक्ति देता है, जिसका कर्तव्य राज्यों के बीच विवादों की जांच और उन पर सलाह देना, साझा हित के विषयों का अन्वेषण और विचार-विमर्श करना तथा नीति और कार्य में बेहतर समन्वय के लिए सिफारिश करना है। सरकारिया आयोग की रिपोर्ट पर 1990 में राष्ट्रपति ने अंतर-राज्य परिषद गठित की। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं; सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्रों के मुख्यमंत्री, शेष संघ राज्यक्षेत्रों के प्रशासक तथा प्रधानमंत्री द्वारा नामित छह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री होते हैं। इसकी सिफारिशें सलाहकारी होती हैं। निरंतर परामर्श के लिए 1996 में परिषद की स्थायी समिति बनी, जिसके अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं।

क्षेत्रीय परिषदें और पूर्वोत्तर परिषद

क्षेत्रीय परिषदें सांविधिक हैं, संवैधानिक नहीं। इन्हें राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 ने बनाया, जिससे भाषायी पुनर्गठन के बाद उभरे तीव्र क्षेत्रवाद को रोका जाए और नियोजन, सीमा प्रश्नों, भाषायी अल्पसंख्यकों तथा अंतर-राज्यीय परिवहन पर सहयोग की आदत बने। प्रत्येक परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं, तथा किसी सदस्य राज्य का मुख्यमंत्री प्रतिवर्ष चक्रानुक्रम से उपाध्यक्ष बनता है। हर राज्य अपने मुख्यमंत्री और दो अन्य मंत्री भेजता है, और नीति आयोग का एक नामनिर्देशित सदस्य तथा मुख्य सचिव सलाहकार की भूमिका में रहते हैं।

क्षेत्रीय परिषदसदस्य राज्य और संघ राज्यक्षेत्रमुख्यालय
उत्तरीहरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाखनई दिल्ली
मध्यउत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़प्रयागराज
पूर्वीबिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशाकोलकाता
पश्चिमीगुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीवमुंबई
दक्षिणीआंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरीचेन्नई

पूर्वोत्तर राज्यों को इस योजना से बाहर रखा गया और उनके लिए पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971 द्वारा अलग निकाय बना, जिसका मुख्यालय शिलांग है। सिक्किम को 2002 में इसमें जोड़ा गया। 2018 के संशोधन के बाद पूर्वोत्तर परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री और उपाध्यक्ष पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री हैं।

अंतर-राज्यीय व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता

भाग 13 भारत को एक आर्थिक इकाई बनाता है। अनुच्छेद 301 घोषित करता है कि भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और समागम स्वतंत्र होगा। अनुच्छेद 302 संसद को लोकहित में निर्बंधन लगाने देता है, जबकि अनुच्छेद 303 संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों को किसी एक राज्य को दूसरे पर वरीयता देने से रोकता है, केवल माल की कमी से निपटने के लिए संसद ऐसा कर सकती है। अनुच्छेद 304 राज्य को दूसरे राज्यों से आयातित माल पर कर लगाने की अनुमति तभी देता है जब वह वैसे ही स्थानीय माल पर समान कर लगाए, और व्यापार पर निर्बंधन केवल राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी से लगाया जा सकता है। अनुच्छेद 307 संसद को इन उपबंधों के प्रयोजनों के लिए प्राधिकारी नियुक्त करने की शक्ति देता है।

इन संबंधों का अध्ययन करने वाले आयोग

वर्तमान व्यवस्था को तीन निकायों ने आकार दिया। प्रशासनिक सुधार आयोग ने 1960 के दशक में एम. सी. सीतलवाड़ के नेतृत्व में अध्ययन दल बनाया। 1983 में न्यायमूर्ति आर. एस. सरकारिया की अध्यक्षता में गठित सरकारिया आयोग ने 1988 में रिपोर्ट दी और स्थायी अंतर-राज्य परिषद की सिफारिश की। 2007 में न्यायमूर्ति एम. एम. पुंछी की अध्यक्षता में गठित पुंछी आयोग ने 2010 में रिपोर्ट दी और परिषद को विवाद सुलझाने में बड़ी भूमिका देने का सुझाव दिया।

परीक्षा की दृष्टि से

परीक्षक सबसे पहले अनुच्छेद संख्या पूछते हैं: 261 पूर्ण विश्वास और विश्वसनीयता, 262 जल विवाद, 263 अंतर-राज्य परिषद तथा 301 व्यापार की स्वतंत्रता। दूसरा पसंदीदा भाग क्षेत्रीय परिषदें हैं, जहां सामान्य भ्रम तीन हैं: इन्हें सांविधिक के बजाय संवैधानिक बताना, अध्यक्ष के रूप में गृह मंत्री के स्थान पर प्रधानमंत्री लिखना, और किसी राज्य को गलत क्षेत्र में रखना, जिसमें महाराष्ट्र या गोवा को दक्षिणी परिषद में दिखाना सबसे आम है। यह भी याद रखें कि पूर्वोत्तर परिषद क्षेत्रीय परिषद नहीं है और 1971 के अधिनियम पर आधारित है, 1990 की अंतर-राज्य परिषद सरकारिया आयोग के बाद बनी, तथा 1956 के अधिनियम के अधिकरण का अभिनिर्णय राज्यों पर डिक्री की भांति बाध्यकारी है।

महत्वपूर्ण तथ्य

पूर्ण विश्वास और विश्वसनीयता उपबंधअनुच्छेद 261
अंतर-राज्यीय नदी जल विवादअनुच्छेद 262
अंतर-राज्य परिषदअनुच्छेद 263; गठन 1990
अंतर-राज्य परिषद के अध्यक्षप्रधानमंत्री
अनुच्छेद 262 के अंतर्गत कानूननदी बोर्ड अधिनियम, 1956 और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956
क्षेत्रीय परिषदों का आधारराज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956
क्षेत्रीय परिषदों की संख्यापांच: उत्तरी, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी
क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्षकेंद्रीय गृह मंत्री
पूर्वोत्तर परिषदपूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971; मुख्यालय शिलांग
व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रताअनुच्छेद 301
अंतर-राज्य परिषद की सिफारिश करने वाला आयोगसरकारिया आयोग (1983 से 1988)
अंतर-राज्य परिषद की स्थायी समिति1996 में गठित, अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

राष्ट्रपति संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत अंतर-राज्य परिषद की स्थापना कर सकते हैं?

  1. A.अनुच्छेद 261
  2. B.अनुच्छेद 262
  3. C.अनुच्छेद 263
  4. D.अनुच्छेद 280
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 263

अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को आदेश द्वारा अंतर-राज्य परिषद की स्थापना की शक्ति देता है, यदि उन्हें प्रतीत हो कि इससे लोकहित सधेगा, और यह परिषद के कर्तव्य भी गिनाता है: राज्यों के बीच विवादों की जांच और सलाह, संघ और राज्यों के साझा हित के विषयों का अन्वेषण और विचार-विमर्श…

Q2.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

भारत में क्षेत्रीय परिषदों का गठन निम्नलिखित में से किसके द्वारा किया गया?

  1. A.अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राष्ट्रपति के आदेश से
  2. B.राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 से
  3. C.संविधान की सातवीं अनुसूची से
  4. D.योजना आयोग के संकल्प से
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 से

पांचों क्षेत्रीय परिषदें इसी अधिनियम से बनीं, जिसने राज्यों का भाषायी आधार पर पुनर्गठन भी किया, इसलिए ये संवैधानिक नहीं बल्कि सांविधिक निकाय हैं।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

पांचों क्षेत्रीय परिषदों में से प्रत्येक के अध्यक्ष कौन होते हैं?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.केंद्रीय गृह मंत्री
  3. C.क्षेत्र के वरिष्ठतम राज्यपाल
  4. D.क्षेत्र के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केंद्रीय गृह मंत्री

राज्य पुनर्गठन अधिनियम केंद्रीय गृह मंत्री को पांचों क्षेत्रीय परिषदों का साझा अध्यक्ष बनाता है, जिससे किसी क्षेत्र के राज्य और केंद्र एक ही पीठासीन अधिकारी के नीचे बैठें।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

निम्नलिखित में से कौन दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद का सदस्य नहीं है?

  1. A.केरल
  2. B.कर्नाटक
  3. C.महाराष्ट्र
  4. D.पुडुचेरी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. महाराष्ट्र

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु तथा संघ राज्यक्षेत्र पुडुचेरी शामिल हैं और इसका मुख्यालय चेन्नई है।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

संघ और राज्यों के सार्वजनिक कार्यों, अभिलेखों तथा न्यायिक कार्यवाहियों को भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में पूर्ण विश्वास और विश्वसनीयता किस अनुच्छेद के अंतर्गत दी जाती है?

  1. A.अनुच्छेद 256
  2. B.अनुच्छेद 261
  3. C.अनुच्छेद 301
  4. D.अनुच्छेद 131
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 261

यह अनुच्छेद संघ तथा प्रत्येक राज्य के सार्वजनिक कार्यों, अभिलेखों और न्यायिक कार्यवाहियों को पूरे भारत में वैध और साक्ष्य-योग्य बनाता है, और घोषित करता है कि भारत के किसी भाग के दीवानी न्यायालय के अंतिम निर्णय और आदेश देश में कहीं भी निष्पादित किए जा सकते हैं।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

1990 में गठित अंतर-राज्य परिषद किस आयोग की सिफारिश पर बनी थी?

  1. A.पुंछी आयोग
  2. B.सरकारिया आयोग
  3. C.राजमन्नार समिति
  4. D.धर आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सरकारिया आयोग

केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए 1983 में न्यायमूर्ति आर. एस. सरकारिया की अध्यक्षता में गठित इस आयोग ने 1988 में रिपोर्ट दी और अनुच्छेद 263 के अंतर्गत स्थायी अंतर-राज्य परिषद पर बल दिया; परिषद 1990 में राष्ट्रपति के आदेश से बनी।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

पूर्वोत्तर परिषद का गठन किस अधिनियम के अंतर्गत किया गया था?

  1. A.राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956
  2. B.पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971
  3. C.पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1985
  4. D.संघ राज्यक्षेत्र शासन अधिनियम, 1963
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971

पूर्वोत्तर राज्यों को पांच क्षेत्रीय परिषदों में से किसी में नहीं रखा गया, इसलिए संसद ने इस अधिनियम से उनके लिए अलग निकाय बनाया, जिसका मुख्यालय शिलांग है; सिक्किम 2002 में इसका सदस्य बना।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संसद को अंतर-राज्यीय नदियों के जल से संबंधित विवादों के न्यायनिर्णयन की व्यवस्था करने की शक्ति देता है?

  1. A.अनुच्छेद 262
  2. B.अनुच्छेद 263
  3. C.अनुच्छेद 252
  4. D.अनुच्छेद 249
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अनुच्छेद 262

यह संसद को विधि द्वारा अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के जल संबंधी विवादों के न्यायनिर्णयन की व्यवस्था करने देता है, और इसका दूसरा खंड संसद को ऐसे विवाद में उच्चतम न्यायालय तथा प्रत्येक अन्य न्यायालय की अधिकारिता वर्जित करने देता है।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और समागम स्वतंत्र होगा, यह घोषणा किस अनुच्छेद में है?

  1. A.अनुच्छेद 19
  2. B.अनुच्छेद 301
  3. C.अनुच्छेद 304
  4. D.अनुच्छेद 307
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 301

यह संविधान के भाग 13 का आरंभ करता है और भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता घोषित करके देश को एक आर्थिक इकाई बनाता है, जो अनुच्छेद 302 से 305 तक अनुमत निर्बंधनों के अधीन है।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

अंतर-राज्य परिषद के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.इसकी सिफारिशें राज्यों पर बाध्यकारी होती हैं
  2. B.इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं
  3. C.इसकी स्थायी समिति 1996 में बनी और उसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं
  4. D.इसके सदस्य केवल राज्यों के मुख्यमंत्री होते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. इसकी स्थायी समिति 1996 में बनी और उसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं

केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर परामर्श के लिए 1996 में अंतर-राज्य परिषद की स्थायी समिति बनी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं, जबकि परिषद की अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या अंतर-राज्य परिषद संवैधानिक निकाय है?

हां। इसका गठन राष्ट्रपति के आदेश से होता है, परंतु यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 263 से आती है, इसलिए इसे संवैधानिक निकाय माना जाता है। इसके विपरीत क्षेत्रीय परिषदें राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 से बनी हैं और सांविधिक निकाय हैं।

क्षेत्रीय परिषदों के अध्यक्ष कौन होते हैं?

पांचों क्षेत्रीय परिषदों के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं। किसी एक सदस्य राज्य का मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष होता है और यह पद सदस्य राज्यों के बीच प्रतिवर्ष चक्रानुक्रम से बदलता है।

भारत में कितनी क्षेत्रीय परिषदें हैं?

पांच क्षेत्रीय परिषदें हैं: उत्तरी, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी। पूर्वोत्तर राज्य पूर्वोत्तर परिषद के अंतर्गत आते हैं, जो 1971 के अलग संसदीय अधिनियम से बनी है और क्षेत्रीय परिषदों में शामिल नहीं है।

कौन-सा अनुच्छेद नदी जल विवादों में उच्चतम न्यायालय को बाहर रखता है?

अनुच्छेद 262। इसका दूसरा खंड संसद को यह व्यवस्था करने देता है कि अंतर-राज्यीय नदी के जल विवाद में उच्चतम न्यायालय या कोई अन्य न्यायालय अधिकारिता का प्रयोग नहीं करेगा, और संसद ने अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 में ऐसा किया।

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में कौन-से राज्य आते हैं?

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु तथा संघ राज्यक्षेत्र पुडुचेरी। इसका मुख्यालय चेन्नई है। महाराष्ट्र और गोवा पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद के सदस्य हैं, जिसे परीक्षक भ्रमित करने वाले विकल्प के रूप में प्रयोग करते हैं।

स्रोत

  • भारत का संविधान, भाग 11 और भाग 13 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
  • अंतर-राज्य परिषद सचिवालय, गृह मंत्रालय — भारत सरकार
  • भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (कक्षा 11), अध्याय 7: संघवाद — एनसीईआरटी
सभी देखें