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GK नोट्सभारतीय राजव्यवस्थामहत्वपूर्ण सामाजिक कानून: महिलाओं, बच्चों और कमज़ोर वर्गों से जुड़े अधिनियम

भारत के महत्वपूर्ण सामाजिक कानून: अधिनियम, अनुच्छेद और प्रश्न

भारत के सामाजिक कानूनों पर परीक्षा नोट्स: महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों और दिव्यांगजनों के अधिनियम, उनके वर्ष, मुख्य प्रावधान तथा संबंधित अनुच्छेद।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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भारत के महत्वपूर्ण सामाजिक कानून: अधिनियम, अनुच्छेद और प्रश्न — GK24 title card
भारत के महत्वपूर्ण सामाजिक कानून: अधिनियम, अनुच्छेद और प्रश्न — GK24 title card

सामाजिक विधान भारतीय कानून का वह भाग है जो उन वर्गों की रक्षा करता है जिन्हें समाज और बाज़ार ने परंपरागत रूप से असमान व्यवहार दिया है: महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां, दिव्यांगजन, बंधुआ मज़दूर और अत्यंत निर्धन लोग। ये अधिनियम दया नहीं, बल्कि संविधान के वादों को कानूनी शक्ति देने का साधन हैं। परीक्षाओं में यह भाग निश्चित और अधिक अंक देने वाला माना जाता है, क्योंकि प्रत्येक अधिनियम का वर्ष, नोडल मंत्रालय, परिभाषा और दंड एक पंक्ति में पूछा जा सकता है।

सामाजिक विधान का संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समता देता है और अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं तथा बच्चों के लिए विशेष उपबंध बनाने की स्पष्ट अनुमति देता है; इसी कारण केवल महिलाओं को लाभ देने वाला कानून भेदभाव नहीं माना जाता। अनुच्छेद 15(4) और 16(4) सामाजिक तथा शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए विशेष उपबंध तथा आरक्षण की अनुमति देते हैं। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है। संविधान के छियासीवें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 21क छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाता है। अनुच्छेद 23 मानव के दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध करता है तथा अनुच्छेद 24 चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों और संकटपूर्ण कामों में लगाने पर रोक लगाता है। नीति निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 39(ङ) और 39(च) श्रमिकों तथा बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, अनुच्छेद 42 काम की न्यायसंगत दशाएं और प्रसूति सहायता मांगता है, अनुच्छेद 45 बाल्यावस्था देखरेख की बात करता है, अनुच्छेद 46 कमज़ोर वर्गों के हित बढ़ाने का दायित्व देता है और अनुच्छेद 47 पोषण स्तर ऊंचा करने को राज्य का कर्तव्य बताता है। नीचे दिया हर प्रमुख अधिनियम इनमें से किसी एक अनुच्छेद को लागू करता है, और यही जोड़ी याद रखना सबसे लाभकारी है।

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानून

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 दहेज देने और लेने दोनों पर रोक लगाता है तथा दहेज को विवाह के संबंध में मांगी गई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के रूप में परिभाषित करता है। सती निवारण अधिनियम, 1987 सती के महिमामंडन को दंडनीय बनाता है। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 एक सिविल कानून है: यह शारीरिक, लैंगिक, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक दुर्व्यवहार को मान्यता देता है, पीड़ित महिला को साझा गृहस्थी में रहने का अधिकार देता है, तथा संरक्षण अधिकारी का पद और संरक्षण, निवास, धन संबंधी व अभिरक्षा आदेश जैसे उपाय बनाता है। कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 यानी पॉश अधिनियम उच्चतम न्यायालय के 1997 के विशाखा दिशानिर्देशों को कानून का रूप देता है; दस या अधिक कर्मचारियों वाले हर कार्यस्थल पर आंतरिक समिति अनिवार्य है, ज़िला स्तर पर स्थानीय समिति बैठती है और आंतरिक समिति की पीठासीन अधिकारी वरिष्ठ महिला कर्मचारी होनी चाहिए। गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 लिंग चयन तथा भ्रूण के लिंग बताने पर प्रतिबंध लगाता है। प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 में 2017 के संशोधन ने पहले दो बच्चों के लिए सवेतन प्रसूति अवकाश बारह से छब्बीस सप्ताह किया और पचास या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान में शिशु गृह अनिवार्य किया। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 ने 1929 के बाल विवाह निरोधक अधिनियम यानी शारदा अधिनियम का स्थान लिया और विवाह की कानूनी आयु महिलाओं के लिए अठारह तथा पुरुषों के लिए इक्कीस वर्ष बनाए रखी।

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानून

अधिनियमवर्षमुख्य प्रावधान
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम2015किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समितियां; जघन्य अपराध में 16 से 18 वर्ष के किशोर पर प्रारंभिक आकलन के बाद वयस्क के रूप में मुकदमा संभव
लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम201218 वर्ष से कम आयु के हर बालक के लिए लिंग-निरपेक्ष कानून; विशेष न्यायालय और बाल हितैषी प्रक्रिया
बाल और किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम1986, संशोधन 201614 वर्ष से कम आयु के बच्चों के काम पर पूर्ण रोक; 14 से 18 वर्ष के किशोर संकटपूर्ण व्यवसायों में वर्जित
बालकों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम20096 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार; निजी गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश कक्षा की 25 प्रतिशत सीटें वंचित वर्ग के लिए
बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम2005राष्ट्रीय और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों की स्थापना

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य कमज़ोर वर्गों के कानून

नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 पहले अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम था और 1976 में इसका नाम बदला गया; यह किसी भी रूप में अस्पृश्यता के आचरण को दंडनीय बनाता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 विशिष्ट अत्याचारों की सूची देता है, विशेष न्यायालय तथा विशेष लोक अभियोजक उपलब्ध कराता है और अपने परिभाषित अपराधों में अग्रिम जमानत पर रोक लगाता है। बंधुआ मज़दूरी प्रथा (उत्सादन) अधिनियम, 1976 बंधुआ मज़दूरी समाप्त करता है और मज़दूर को ऋण से मुक्त करता है, जिससे अनुच्छेद 23 लागू होता है। अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 व्यक्तिगत तथा सामुदायिक वन अधिकार देता है, जिसमें दावे की शुरुआत ग्राम सभा से होती है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 ने 1995 के अधिनियम का स्थान लिया, मान्यता प्राप्त दिव्यांगताओं की संख्या इक्कीस की, सरकारी पदों में चार प्रतिशत आरक्षण तथा सरकारी सहायता प्राप्त उच्च शिक्षा में पांच प्रतिशत सीटें आरक्षित कीं।

सामान्य कल्याणकारी कानून

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 ग्रामीण आबादी के पचहत्तर प्रतिशत और शहरी आबादी के पचास प्रतिशत तक को रियायती अनाज देता है, प्राथमिकता वाले परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किलोग्राम तथा अंत्योदय अन्न योजना में प्रति परिवार पैंतीस किलोग्राम, और यह अपेक्षा करता है कि राशन कार्ड के लिए अठारह वर्ष या अधिक आयु की सबसे बड़ी महिला को परिवार का मुखिया माना जाए। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 माता-पिता के भरण-पोषण को भरण-पोषण अधिकरण के समक्ष प्रवर्तनीय कानूनी कर्तव्य बनाता है। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 ने अग्रिम निर्देश को मान्यता दी और आत्महत्या के प्रयास को अपराध मानना समाप्त किया। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 शिक्षा, रोज़गार और स्वास्थ्य सेवा में भेदभाव पर रोक लगाता है। मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 ने तलाक-ए-बिद्दत के उच्चारण को शून्य और दंडनीय बनाया।

इन कानूनों को लागू करने वाली संस्थाएं

इस क्षेत्र की निगरानी संवैधानिक और सांविधिक निकाय करते हैं: अनुच्छेद 338 के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, अनुच्छेद 338क के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, अनुच्छेद 338ख के अंतर्गत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, तथा सांविधिक राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग। दैनिक कार्य ज़िला मजिस्ट्रेट, संरक्षण अधिकारी, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समितियां और विशेष न्यायालय करते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

इस विषय से परीक्षक तीन बातें पूछते हैं: अधिनियम का वर्ष, किस पुराने अधिनियम का स्थान उसने लिया, और वह किस संवैधानिक अनुच्छेद को लागू करता है। सबसे सामान्य भ्रम बाल श्रम के लिए 1986 और 2016, बाल विवाह के लिए 1929 और 2006, दिव्यांग अधिकारों के लिए 1995 और 2016, तथा किशोर न्याय के लिए 2000 और 2015 की जोड़ियों में होता है। अनुच्छेद 23 को बंधुआ मज़दूरी, अनुच्छेद 24 को बाल श्रम, अनुच्छेद 17 को नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम और अनुच्छेद 21क को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के साथ याद रखें। शिक्षा का अधिकार अधिनियम तथा खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर कथन आधारित प्रश्न बार-बार आते हैं, और 25 प्रतिशत सीटें, 6 से 14 वर्ष की आयु तथा प्रति माह 5 किलोग्राम अनाज सबसे अधिक पूछे जाने वाले आंकड़े हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

दहेज प्रतिषेध अधिनियम1961; दहेज देने और लेने दोनों पर रोक
घरेलू हिंसा अधिनियम2005; संरक्षण अधिकारी और निवास आदेश वाला सिविल कानून
पॉश अधिनियम2013; 1997 के विशाखा दिशानिर्देशों पर आधारित; 10 या अधिक कर्मचारियों पर आंतरिक समिति
पॉक्सो अधिनियम2012; 18 वर्ष से कम आयु के हर बालक की रक्षा; विशेष न्यायालय
किशोर न्याय अधिनियम2015; 2000 के अधिनियम का स्थान; किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति
शिक्षा का अधिकार अधिनियम2009; आयु 6 से 14 वर्ष; निजी गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें
शिक्षा के अधिकार का अनुच्छेदअनुच्छेद 21क, छियासीवें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया
अनुसूचित जाति-जनजाति कानूनअनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
बंधुआ मज़दूरीबंधुआ मज़दूरी प्रथा (उत्सादन) अधिनियम, 1976; अनुच्छेद 23 को लागू करता है
दिव्यांग अधिकारदिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016; 21 दिव्यांगताएं; 4 प्रतिशत नौकरी आरक्षण
प्रसूति अवकाशप्रसूति प्रसुविधा (संशोधन) अधिनियम, 2017 द्वारा 12 से 26 सप्ताह
वरिष्ठ नागरिकमाता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007; भरण-पोषण अधिकरण
बाल विवाहबाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006; 1929 के शारदा अधिनियम का स्थान
अस्पृश्यता कानूननागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955; 1976 में नाम बदला; अनुच्छेद 17 लागू करता है

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 23 Oct 2019, Shift 2मध्यम

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?

  1. A.यह अधिनियम संपूर्ण भारत पर लागू था
  2. B.इस अधिनियम को खाद्य का अधिकार अधिनियम भी कहा जाता है।
  3. C.अधिनियम में प्रावधान था कि राशन कार्ड जारी करने के प्रयोजन से परिवार की 18 वर्ष या अधिक आयु की महिला परिवार की मुखिया होगी।
  4. D.यह अधिनियम वर्ष 2015 में लागू किया गया था
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. यह अधिनियम वर्ष 2015 में लागू किया गया था

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम संसद द्वारा पारित होकर 2013 में अधिसूचित हुआ था, 2015 में नहीं; इसलिए D ही असत्य कथन है और प्रश्न के अनुसार वही उत्तर है।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · Shift 3कठिन

सूची I में दिए अधिनियमों का सूची II में दिए उनके अधिनियमन वर्ष से मिलान कीजिए।
सूची I: 1. कर्मचारी राज्य बीमा (संशोधन) अधिनियम, 2. समान पारिश्रमिक अधिनियम, 3. न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, 4. ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम
सूची II: (क) 1948, (ख) 1970, (ग) 2010, (घ) 1976

  1. A.1 - घ, 2 - ख, 3 - क, 4 - ग
  2. B.1 - ख, 2 - क, 3 - घ, 4 - ग
  3. C.1 - ग, 2 - घ, 3 - क, 4 - ख
  4. D.1 - ग, 2 - क, 3 - घ, 4 - ख
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1 - ग, 2 - घ, 3 - क, 4 - ख

कर्मचारी राज्य बीमा (संशोधन) अधिनियम 2010 का है, इसलिए 1 का मिलान (ग) से होता है। समान पारिश्रमिक अधिनियम, जो समान कार्य के लिए पुरुष और महिला को असमान वेतन देने पर रोक लगाता है, 1976 में पारित हुआ, इसलिए 2 का मिलान (घ) से होता है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 7 Sept 2021, Shift 2कठिन

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का कौन सा अध्याय विद्यालयों और अध्यापकों के दायित्वों का उपबंध करता है?

  1. A.IV
  2. B.V
  3. C.III
  4. D.II
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. IV

बालकों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 सात अध्यायों में बंटा है और अध्याय IV का शीर्षक 'विद्यालयों और अध्यापकों के दायित्व' है।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · DSSSB Special Educator 2014 (TGT)_Set Aआसान

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार बालकों का किसी विशेष कक्षा में प्रवेश किस आधार पर प्रस्तावित किया गया है?

  1. A.बालक की योग्यता
  2. B.बालक की आयु
  3. C.बालक की सामाजिक-आर्थिक स्थिति
  4. D.माता-पिता की शिक्षा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बालक की आयु

बालकों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 कहता है कि छह वर्ष से अधिक आयु का वह बालक, जिसका किसी विद्यालय में प्रवेश नहीं हुआ या जो प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं कर सका, उसे अपनी आयु के अनुरूप कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा और साथ में विशेष…

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 13 Jan 2023, Shift 4मध्यम

किस संविधान संशोधन द्वारा 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की गई?

  1. A.82वां
  2. B.85वां
  3. C.83वां
  4. D.86वां
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 86वां

संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 ने अनुच्छेद 21क जोड़ा, जिससे छह से चौदह वर्ष के प्रत्येक बालक के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा मूल अधिकार बन गई।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद चौदह वर्ष से कम आयु के बालकों को कारखानों, खानों और अन्य संकटपूर्ण कार्यों में नियोजित करने पर रोक लगाता है?

  1. A.अनुच्छेद 21
  2. B.अनुच्छेद 23
  3. C.अनुच्छेद 24
  4. D.अनुच्छेद 29
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 24

अनुच्छेद 24 कहता है कि चौदह वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा और किसी अन्य संकटपूर्ण नियोजन में नहीं लगाया जाएगा।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम किस वर्ष अधिनियमित हुआ?

  1. A.2009
  2. B.2012
  3. C.2015
  4. D.2019
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2012

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 एक विशेष और लिंग-निरपेक्ष कानून है, जो अठारह वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को लैंगिक हमले, लैंगिक उत्पीड़न और अश्लील सामग्री से बचाता है।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत जघन्य अपराध में प्रारंभिक आकलन के बाद किस आयु वर्ग के किशोर पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाया जा सकता है?

  1. A.14 से 16 वर्ष
  2. B.16 से 18 वर्ष
  3. C.12 से 14 वर्ष
  4. D.18 से 21 वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 16 से 18 वर्ष

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 किशोर न्याय बोर्ड को अनुमति देता है कि वह उस बालक का प्रारंभिक आकलन करे जिसने सोलह वर्ष पूरे कर लिए हैं और जिस पर जघन्य अपराध का आरोप है, अर्थात ऐसा अपराध जिसमें सात वर्ष या अधिक कारावास का दंड…

Q9.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 ने उच्चतम न्यायालय के किस मामले में दिए दिशानिर्देशों को कानूनी रूप दिया?

  1. A.विशाखा बनाम राजस्थान राज्य
  2. B.मेनका गांधी बनाम भारत संघ
  3. C.मोहम्मद अहमद खान बनाम शाहबानो बेगम
  4. D.केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. विशाखा बनाम राजस्थान राज्य

वर्ष 1997 में इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने विशाखा दिशानिर्देश बनाए, जो कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न रोकने और उसका निवारण करने के नियोक्ता के कर्तव्य का पहला बाध्यकारी कथन था।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

प्रसूति प्रसुविधा (संशोधन) अधिनियम, 2017 ने पहले दो बच्चों के लिए सवेतन प्रसूति अवकाश बढ़ाकर कितने सप्ताह कर दिया?

  1. A.12 सप्ताह
  2. B.18 सप्ताह
  3. C.26 सप्ताह
  4. D.32 सप्ताह
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 26 सप्ताह

प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 में मूल रूप से बारह सप्ताह का सवेतन अवकाश था।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?

  1. A.1955
  2. B.1976
  3. C.1989
  4. D.1995
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1989

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 तीस जनवरी 1990 से प्रवर्तन में आया।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 ने किस पुराने कानून का स्थान लिया?

  1. A.बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 1929
  2. B.हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
  3. C.विशेष विवाह अधिनियम, 1954
  4. D.दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 1929

वह कानून केवल बाल विवाह कराने वालों को दंडित करके उसे रोकता था; बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 और आगे जाता है, ऐसे विवाह को उस पक्षकार के विकल्प पर शून्यकरणीय बनाता है जो विवाह के समय बालक था, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों और व्यादेश का प्रावधान करता है, तथा…

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में बच्चों को शिक्षा का अधिकार कौन सा अधिनियम देता है?

बालकों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, जो 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ। यह छह से चौदह वर्ष के बच्चों पर लागू होता है, प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक अनुत्तीर्ण करने और बोर्ड परीक्षा पर रोक लगाता है, तथा निजी गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों की प्रवेश कक्षा की पच्चीस प्रतिशत सीटें वंचित और कमज़ोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करता है। यह छियासीवें संशोधन से जुड़े अनुच्छेद 21क से निकलता है।

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 आपराधिक कानून है या सिविल?

यह मूलतः सिविल कानून है। यह पहले चरण में अपराध दंडित करने की अपेक्षा पीड़ित महिला को उपाय देता है। मजिस्ट्रेट संरक्षण, निवास, धन संबंधी और अभिरक्षा आदेश दे सकता है, और अधिनियम साझा गृहस्थी में रहने का अधिकार देता है। हालांकि संरक्षण आदेश का उल्लंघन आपराधिक अपराध है।

पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम में क्या अंतर है?

पॉक्सो, 2012 उस बालक की रक्षा करता है जो अठारह वर्ष से कम आयु का है और लैंगिक अपराध का शिकार हुआ है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 दो अन्य वर्गों से जुड़ा है: कानून से संघर्षरत बालक, जिसका मामला किशोर न्याय बोर्ड देखता है, और देखरेख तथा संरक्षण की आवश्यकता वाला बालक, जिसका मामला बाल कल्याण समिति देखती है।

भारत में बच्चे किस आयु से कानूनी रूप से काम कर सकते हैं?

चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चे किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में नहीं लगाए जा सकते; अपवाद केवल विद्यालय समय के बाद पारिवारिक उद्यम में सहायता और श्रव्य-दृश्य उद्योग में कलाकार का कार्य है। चौदह से अठारह वर्ष के किशोर काम कर सकते हैं, परंतु अधिनियम की अनुसूची में दिए संकटपूर्ण व्यवसायों और प्रक्रियाओं में नहीं।

कमज़ोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा कौन से आयोग करते हैं?

अनुच्छेद 338 के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, अनुच्छेद 338क के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और अनुच्छेद 338ख के अंतर्गत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संवैधानिक निकाय हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग संसद के अधिनियमों से बने सांविधिक निकाय हैं।

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