बिहार में पंचायती राज और नगरीय निकाय: स्तर, अनुच्छेद और प्रश्न
बिहार में पंचायती राज और नगरीय निकायों पर नोट्स: 73वाँ और 74वाँ संशोधन, तीन स्तर, ग्राम कचहरी, महिला आरक्षण, राज्य निर्वाचन आयोग तथा नगर निगम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

स्थानीय स्वशासन भारतीय संघीय व्यवस्था का तीसरा स्तर है और बिहार में यह गाँवों की पंचायतों तथा शहरों के नगरीय निकायों के माध्यम से लगभग हर घर तक पहुँचता है। 1992 के 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों ने इन दोनों को संविधान में स्थान दिया और राज्य इन्हें बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 तथा बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के द्वारा चलाता है। बीपीएससी, बीएसएससी, बिहार पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय से वही बातें पूछते हैं: स्तर और उनके पदाधिकारियों के नाम, भाग 9 और भाग 9क के अनुच्छेद, विषयों की दो अनुसूचियाँ, तथा वे दो विशेषताएँ जो बिहार को अलग करती हैं — ग्राम कचहरी और महिलाओं के लिए आधे पदों का आरक्षण।
पंचायती राज संविधान तक कैसे पहुँचा
नीति निदेशक तत्वों में आने वाला अनुच्छेद 40 राज्य से कहता है कि वह ग्राम पंचायतों को स्वशासन की इकाई के रूप में संगठित करे। 1957 की बलवंत राय मेहता समिति ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की त्रिस्तरीय व्यवस्था की सिफारिश की; राजस्थान ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में इसका उद्घाटन किया और उसी वर्ष आंध्र प्रदेश ने भी इसे अपनाया। 1977 की अशोक मेहता समिति ने दो स्तर उचित माने, 1985 की जी. वी. के. राव समिति ने प्रखंड को नियोजन की इकाई बनाने की बात कही और 1986 की एल. एम. सिंघवी समिति ने पहली बार पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की माँग की। 1989 का 64वाँ संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित हो गया परंतु राज्यसभा में गिर गया। इसके बाद 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने भाग 9, अनुच्छेद 243 से 243-O, तथा 29 विषयों वाली ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी और यह 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ, जिसे अब राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है। 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने भाग 9क, अनुच्छेद 243-P से 243-ZG, तथा 18 विषयों वाली बारहवीं अनुसूची जोड़ी और यह 1 जून 1993 से लागू हुआ। बिहार का अनुभव पुराना है: 1947 में उसका अपना पंचायत राज अधिनियम बना, 1993 में संशोधन के अनुरूप नया अधिनियम आया और उसके स्थान पर बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 लागू हुआ, जो आज की व्यवस्था का आधार है।
तीन स्तर और गाँव की अदालत
| निकाय | स्तर | प्रमुख | उप-प्रमुख |
|---|---|---|---|
| ग्राम पंचायत | गाँव | मुखिया | उप-मुखिया |
| ग्राम कचहरी | गाँव, न्यायिक | सरपंच | उप-सरपंच |
| पंचायत समिति | प्रखंड | प्रमुख | उप-प्रमुख |
| जिला परिषद | जिला | अध्यक्ष | उपाध्यक्ष |
बिहार में पंचायत चुनाव एक ही बार में छह प्रकार के पद भरता है: ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्य और मुखिया, ग्राम कचहरी के पंच और सरपंच, पंचायत समिति के सदस्य तथा जिला परिषद के सदस्य। मुखिया और सरपंच का निर्वाचन पंचायत के मतदाता सीधे करते हैं, इसलिए प्रश्नपत्रों में दोनों को प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रमुख कहा जाता है; प्रमुख और अध्यक्ष का चुनाव पंचायत समिति तथा जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य अपने बीच से करते हैं और उप-पदों का भी इसी प्रकार। अनुच्छेद 243-E के अनुसार प्रत्येक स्तर का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव पूरा कराना आवश्यक है, और समय से पहले विघटित निकाय का पुनर्गठन केवल शेष अवधि के लिए होता है, इसलिए विघटन के बाद चुनी गई पंचायत को पूरे पाँच वर्ष नहीं मिलते।
ग्राम सभा और ग्राम कचहरी
अनुच्छेद 243-A ग्राम सभा को पंचायत क्षेत्र के किसी गाँव की निर्वाचक सूची में दर्ज व्यक्तियों के निकाय के रूप में परिभाषित करता है और उसकी शक्तियाँ तय करने का कार्य राज्य विधानमंडल पर छोड़ता है। बिहार में ग्राम सभा वार्षिक योजना और कल्याणकारी योजनाओं की लाभुक सूची स्वीकृत करती है तथा कराए गए कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण करती है। ग्राम कचहरी बिहार की अपनी संस्था है — सरपंच और निर्वाचित पंचों की ग्राम स्तरीय पीठ, जो ग्रामीणों के छोटे विवाद निपटाती है; न्याय मित्र और न्याय सचिव कानून तथा अभिलेख में उसकी सहायता करते हैं। अधिनियम में गिनाए गए छोटे मामलों में वह अर्थदंड लगा सकती है, गंभीर अपराध नियमित न्यायालयों में जाते हैं, और इस प्रकार वह जिला न्यायालयों का स्थान लेने के बजाय उनका बोझ घटाती है।
निर्वाचन, आरक्षण और महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत
अनुच्छेद 243-K पंचायत चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग को देता है, जिसका प्रमुख राज्यपाल द्वारा नियुक्त राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है; अतः बिहार में पंचायत चुनाव बिहार राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, भारत निर्वाचन आयोग नहीं। राज्य निर्वाचन आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है। अनुच्छेद 243-F चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष रखता है, जबकि लोकसभा और विधानसभा के लिए यह 25 वर्ष है। अनुच्छेद 243-D अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में तथा महिलाओं के लिए कुल स्थानों के कम से कम एक तिहाई स्थान आरक्षित करता है, जिसमें अध्यक्ष पदों का एक तिहाई भी शामिल है। बिहार इस न्यूनतम सीमा से बहुत आगे गया: 2006 के पंचायत चुनावों से उसने महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत स्थान और अध्यक्ष पद आरक्षित किए और ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना; वह अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए भी स्थान आरक्षित करता है।
कार्य, वित्त और अंकेक्षण
अनुच्छेद 243-G विधानमंडल को अधिकार देता है कि वह ग्यारहवीं अनुसूची के विषय पंचायतों को सौंपे — पेयजल, सड़क और प्राथमिक शिक्षा से लेकर गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण विद्युतीकरण तक। अनुच्छेद 243-H राज्य को यह अधिकार देता है कि वह पंचायत को कर लगाने तथा वसूलने के लिए प्राधिकृत करे और राज्य की संचित निधि से सहायता अनुदान दे। अनुच्छेद 243-I राज्यपाल से अपेक्षा करता है कि वह प्रत्येक पाँच वर्ष पर राज्य वित्त आयोग गठित करे, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करे और राज्य के करों में उनके हिस्से की सिफारिश करे; अनुच्छेद 243-Y नगरपालिकाओं के लिए यही कार्य करता है। अनुच्छेद 243-J लेखाओं का अंकेक्षण राज्य विधि पर छोड़ता है और अनुच्छेद 243-ZD जिले की पंचायतों तथा नगरपालिकाओं की योजनाओं को समेकित करने के लिए जिला योजना समिति का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 243-O निर्वाचन संबंधी मामलों, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन सहित, में न्यायालयों के हस्तक्षेप को वर्जित करता है।
बिहार के नगरीय निकाय
| निकाय | क्षेत्र का प्रकार | प्रमुख |
|---|---|---|
| नगर पंचायत | संक्रमणशील क्षेत्र, गाँव से नगर बनता क्षेत्र | मुख्य पार्षद |
| नगर परिषद | लघु नगरीय क्षेत्र | मुख्य पार्षद |
| नगर निगम | बृहत्तर नगरीय क्षेत्र | महापौर |
अनुच्छेद 243-Q ये तीन प्रकार की नगरपालिकाएँ उपलब्ध कराता है और राज्यपाल किसी क्षेत्र की जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व, स्थानीय प्रशासन के लिए प्राप्त राजस्व, गैर-कृषि कार्यों में रोजगार का प्रतिशत तथा आर्थिक महत्व देखकर तय करता है कि उसे कौन सा दर्जा मिलेगा। बिहार में ये निकाय बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के अंतर्गत कार्य करते हैं, जिसने पुराने नगरपालिका कानूनों का स्थान लिया; राज्य का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नगरीय निकाय पटना नगर निगम है, जिसकी स्थापना पटना नगर निगम अधिनियम, 1951 के अंतर्गत हुई। नगर निगम का निर्वाचित प्रमुख महापौर और छोटे निकायों का मुख्य पार्षद होता है, जबकि कार्यपालक प्रमुख अधिकारी होता है — निगम में नगर आयुक्त और अन्य निकायों में कार्यपालक पदाधिकारी। अनुच्छेद 243-S तीन लाख या अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिका में वार्ड समितियाँ अनिवार्य करता है और अनुच्छेद 243-ZE दस लाख या अधिक जनसंख्या वाले महानगरीय क्षेत्र के लिए महानगर योजना समिति का प्रावधान करता है। नगरपालिका चुनाव भी अनुच्छेद 243-ZA के अंतर्गत उसी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जाते हैं, कार्यकाल अनुच्छेद 243-U के अनुसार पाँच वर्ष का है, और अनुच्छेद 243-W विधानमंडल को बारहवीं अनुसूची के अठारह विषय सौंपने की शक्ति देता है, जिनमें नगर नियोजन, जलापूर्ति, मलिन बस्ती सुधार, अग्निशमन सेवा और वधशालाओं का विनियमन शामिल हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
बीपीएससी, बीएसएससी, बिहार पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय को चार तरह से पूछते हैं। पहला, तिथियाँ और संख्याएँ — 1957 बलवंत राय मेहता, 2 अक्टूबर 1959 नागौर, 1986 एल. एम. सिंघवी, 24 अप्रैल 1993 तथा 1 जून 1993 के दो संशोधन, ग्यारहवीं अनुसूची के 29 और बारहवीं के 18 विषय। दूसरा, पदाधिकारी — ग्राम पंचायत का मुखिया, ग्राम कचहरी का सरपंच, पंचायत समिति का प्रमुख, जिला परिषद का अध्यक्ष, नगर निगम का महापौर तथा नगर परिषद और नगर पंचायत का मुख्य पार्षद, और कार्यपालक प्रमुख के रूप में नगर आयुक्त। तीसरा, अनुच्छेद — 243-A ग्राम सभा, 243-D आरक्षण, 243-E पाँच वर्ष का कार्यकाल, 243-F 21 वर्ष की आयु, 243-G कार्य, 243-I और 243-Y वित्त आयोग, 243-K तथा 243-ZA चुनाव, 243-Q नगरपालिका के प्रकार और 243-ZD जिला योजना समिति। चौथा, बिहार से जुड़े तथ्य — ग्राम कचहरी, एक ही चुनाव में भरे जाने वाले छह पद और 2006 से महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण। सामान्य जाल हैं — राज्य निर्वाचन आयोग के स्थान पर भारत निर्वाचन आयोग, मुखिया के स्थान पर सरपंच और दोनों अनुसूचियों की अदला-बदली।
महत्वपूर्ण तथ्य
| 73वाँ संशोधन लागू | 24 अप्रैल 1993, राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस |
|---|---|
| 74वाँ संशोधन लागू | 1 जून 1993 |
| जोड़े गए भाग | भाग 9, अनुच्छेद 243 से 243-O; भाग 9क, अनुच्छेद 243-P से 243-ZG |
| जोड़ी गई अनुसूचियाँ | ग्यारहवीं अनुसूची, 29 विषय; बारहवीं अनुसूची, 18 विषय |
| पंचायत कानून | बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 |
| नगरीय कानून | बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 |
| गाँव का प्रमुख | मुखिया, उप-मुखिया सहित |
| गाँव की अदालत | ग्राम कचहरी, प्रमुख सरपंच |
| प्रखंड स्तर | पंचायत समिति, प्रमुख के नेतृत्व में |
| जिला स्तर | जिला परिषद, अध्यक्ष के नेतृत्व में |
| एक चुनाव में पद | छह — वार्ड सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य |
| महिला आरक्षण | 2006 के पंचायत चुनाव से 50 प्रतिशत, देश में पहला राज्य |
| न्यूनतम आयु | 21 वर्ष, अनुच्छेद 243-F |
| कार्यकाल | प्रत्येक स्तर का पाँच वर्ष, अनुच्छेद 243-E |
| चुनाव कराने वाली संस्था | बिहार राज्य निर्वाचन आयोग, अनुच्छेद 243-K और 243-ZA |
| सबसे पुराना नगरीय निकाय | पटना नगर निगम, पटना नगर निगम अधिनियम, 1951 के अंतर्गत |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
पंचायती राज संस्थाओं को संविधान में स्थान देने वाला 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम किस तिथि से लागू हुआ?
- A.2 अक्टूबर 1959
- B.24 अप्रैल 1993
- C.1 जून 1993
- D.26 जनवरी 1950
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73वाँ संशोधन अधिनियम संसद ने 1992 में पारित किया और यह 24 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुआ; इसी कारण प्रत्येक वर्ष यह दिन राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार में ग्राम पंचायत का प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रमुख किस नाम से जाना जाता है?
- A.सरपंच
- B.प्रमुख
- C.मुखिया
- D.अध्यक्ष
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बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के अंतर्गत ग्राम पंचायत का प्रमुख मुखिया होता है, जिसका निर्वाचन पंचायत क्षेत्र के समस्त मतदाता सीधे करते हैं; उप-मुखिया का चुनाव निर्वाचित वार्ड सदस्य अपने बीच से करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार में छोटे विवाद निपटाने वाली ग्राम स्तरीय पीठ ग्राम कचहरी का प्रमुख कौन होता है?
- A.मुखिया
- B.सरपंच
- C.न्याय मित्र
- D.पंचायत सचिव
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ग्राम कचहरी बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की विशेषता है और यह प्रत्यक्ष निर्वाचित सरपंच तथा निर्वाचित पंचों की पीठ होती है; यह ग्रामीणों के छोटे विवादों का निपटारा करती है और अधिनियम में गिनाए गए मामलों में अर्थदंड लगा सकती है, जबकि गंभीर अपराध नियमित न्यायालयों में जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →गाँव के समस्त पंजीकृत मतदाताओं के निकाय ग्राम सभा का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है?
- A.अनुच्छेद 243
- B.अनुच्छेद 243A
- C.अनुच्छेद 243D
- D.अनुच्छेद 243G
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73वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 243A कहता है कि ग्राम सभा ग्राम स्तर पर ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कार्यों का निर्वहन करेगी जो राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा उपबंधित करे; अर्थात निकाय संवैधानिक है परंतु उसकी शक्तियाँ राज्य विधि तय करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में, जिसके विषय पंचायतों को सौंपे जा सकते हैं, कितने विषय सूचीबद्ध हैं?
- A.18
- B.22
- C.29
- D.31
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ग्यारहवीं अनुसूची 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ी गई और इसमें 29 विषय हैं, जिनमें कृषि, भूमि सुधार, लघु सिंचाई, पशुपालन, ग्रामीण आवास, पेयजल, सड़क, ग्रामीण विद्युतीकरण, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम, प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय, बाजार तथा मेले और सार्वजनिक वितरण प्रणाली शामिल हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार ने किस पंचायत चुनाव से महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत स्थान आरक्षित किए और ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना?
- A.2001
- B.2006
- C.2011
- D.2016
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बिहार ने अपने पंचायत कानून में संशोधन कर 2006 के पंचायत चुनाव में पचास प्रतिशत स्थान तथा मुखिया, सरपंच, प्रमुख और अध्यक्ष के पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार में पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव कौन कराता है?
- A.भारत निर्वाचन आयोग
- B.बिहार राज्य निर्वाचन आयोग
- C.बिहार का पंचायती राज विभाग
- D.पटना उच्च न्यायालय
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पंचायतों के लिए अनुच्छेद 243K और नगरपालिकाओं के लिए अनुच्छेद 243ZA निर्वाचक सूची तैयार कराने तथा इन चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग को देते हैं, जिसमें राज्यपाल द्वारा नियुक्त राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 243Q के अंतर्गत नगर पंचायत का गठन किस प्रकार के क्षेत्र के लिए किया जाता है?
- A.संक्रमणशील क्षेत्र, अर्थात ग्रामीण से नगरीय बनते क्षेत्र
- B.लघु नगरीय क्षेत्र
- C.बृहत्तर नगरीय क्षेत्र
- D.दस लाख से अधिक जनसंख्या वाला महानगरीय क्षेत्र
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अनुच्छेद 243Q तीन प्रकार की नगरपालिकाएँ देता है — संक्रमणशील क्षेत्र यानी ग्रामीण से नगरीय बनते क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघु नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद और बृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संविधान की बारहवीं अनुसूची, जिसके विषय नगरपालिकाओं को सौंपे जा सकते हैं, में कितने विषय हैं?
- A.11
- B.12
- C.18
- D.29
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बारहवीं अनुसूची 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ी गई और इसमें 18 विषय हैं जो राज्य विधानमंडल अनुच्छेद 243W के अंतर्गत नगरपालिकाओं को सौंप सकता है; इनमें नगर नियोजन, भूमि उपयोग का विनियमन, जलापूर्ति, लोक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, मलिन बस्ती सुधार, नगरीय गरीबी उन्मूलन, अग्निशमन सेवा, कब्रिस्तान तथा वधशालाओं और…
पूरी व्याख्या पढ़ें →पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए राज्यपाल प्रत्येक पाँच वर्ष पर राज्य वित्त आयोग का गठन किस अनुच्छेद के अंतर्गत करता है?
- A.अनुच्छेद 243G
- B.अनुच्छेद 243H
- C.अनुच्छेद 243I
- D.अनुच्छेद 243K
उत्तर देखें
अनुच्छेद 243I राज्यपाल से अपेक्षा करता है कि वह प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर वित्त आयोग गठित करे, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करे और सिफारिश करे कि राज्य के कर, शुल्क, पथकर और फीस पंचायतों के साथ किस प्रकार बाँटे जाएँ, उन्हें कौन से सहायता अनुदान…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार में मुखिया और सरपंच में क्या अंतर है?
दोनों का निर्वाचन एक ही पंचायत क्षेत्र के मतदाता सीधे करते हैं, परंतु वे अलग-अलग निकायों के प्रमुख हैं। मुखिया ग्राम पंचायत का प्रमुख है, जो विकास कार्य कराती है और योजनाओं की राशि खर्च करती है। सरपंच ग्राम कचहरी का प्रमुख है, जो निर्वाचित पंचों के साथ गाँव के छोटे विवाद निपटाती है। अधिकांश अन्य राज्यों में सरपंच का अर्थ ग्राम पंचायत का प्रमुख ही होता है, इसलिए यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है।
बिहार में पंचायती राज किस अधिनियम से चलता है?
बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 से। बिहार में 1947 में ही अपना पंचायत राज अधिनियम बना था और 73वें संशोधन के अनुपालन में 1993 में नया अधिनियम आया; 2006 के अधिनियम ने उसका स्थान लिया, महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण लागू किया और ग्राम कचहरी को गाँव के न्यायिक अंग के रूप में बनाए रखा।
बिहार को महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण देने वाला पहला राज्य क्यों कहा जाता है?
अनुच्छेद 243-D केवल एक तिहाई स्थान और अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने की अपेक्षा करता है। बिहार ने 2006 के पंचायत चुनाव के लिए इसे बढ़ाकर आधा कर दिया, जिसमें वार्ड सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद के स्थान शामिल थे। ऐसा करने वाला वह देश का पहला राज्य था और बाद में कई राज्यों ने इसका अनुसरण किया।
बिहार में पंचायत और नगरपालिका चुनाव कौन कराता है?
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग, जो पंचायतों के लिए अनुच्छेद 243-K तथा नगरपालिकाओं के लिए अनुच्छेद 243-ZA के अंतर्गत बना है। इसके राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है और उसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए निर्धारित रीति और आधारों पर ही हटाया जा सकता है। इन चुनावों में भारत निर्वाचन आयोग की कोई भूमिका नहीं होती।
बिहार में नगरीय निकाय कितने प्रकार के हैं?
अनुच्छेद 243-Q के अनुसार तीन प्रकार के — ग्रामीण से नगरीय बनते संक्रमणशील क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघु नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद और बृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम। राज्यपाल जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व, राजस्व, गैर-कृषि रोजगार के प्रतिशत और आर्थिक महत्व को देखकर श्रेणी तय करता है।
पंचायतों और नगरपालिकाओं के विषय किन अनुसूचियों में हैं?
ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के 29 विषय हैं और उसे अनुच्छेद 243-G के साथ पढ़ा जाता है; बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के 18 विषय हैं और उसे अनुच्छेद 243-W के साथ पढ़ा जाता है। दोनों 1992 में जोड़ी गईं और कोई विषय स्थानीय निकाय को तभी मिलता है जब राज्य विधानमंडल उसे सौंपने वाला कानून बनाए।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग 9: पंचायत, अनुच्छेद 243 से 243-O तथा ग्यारहवीं अनुसूची — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान, भाग 9क: नगरपालिकाएँ, अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तथा बारहवीं अनुसूची — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 — इंडिया कोड, विधायी विभाग
- बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 — इंडिया कोड, विधायी विभाग





