राजस्थान पंचायती राज और राज्य आयोग: परीक्षा नोट्स
राजस्थान में पंचायती राज तथा राज्य आयोगों के परीक्षा नोट्स: नागौर 1959, 73वां संशोधन, 1994 का अधिनियम, तीन स्तर, चुनाव, ग्राम सभा, आरपीएससी और लोकायुक्त।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत में स्थानीय स्वशासन की कहानी में राजस्थान का स्थान स्थायी है, क्योंकि पंचायती राज की शुरुआत यहीं से हुई। यही एक तथ्य इस विषय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है, और इसके चारों ओर उतने ही निश्चित तथ्य बैठते हैं: वह समिति जिसकी रिपोर्ट से यह व्यवस्था आई, वह संशोधन जिसने पंचायतों को संविधान में स्थान दिया, तीनों स्तर और उनके अध्यक्षों के पद नाम, तथा वे आयोग जिनके माध्यम से राज्य भर्ती, चुनाव, मानव अधिकार और शिकायत का कार्य चलाता है।
राजस्थान में पंचायती राज की शुरुआत
स्वतंत्रता के बाद 1952 के समुदाय विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय प्रसार सेवा ने दिखाया कि जन भागीदारी के बिना ग्रामीण विकास की योजनाएं विफल हो जाती हैं। इसलिए 1957 में रिपोर्ट देने वाली बलवंत राय मेहता समिति ने गांव, खंड तथा जिला स्तर पर निर्वाचित निकायों के तीन स्तरीय ढांचे से लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सिफारिश की। राजस्थान ने इस पर सबसे पहले अमल किया। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में देश में पंचायती राज का उद्घाटन किया, और उसी वर्ष 1 नवंबर को आंध्र प्रदेश ने इसे अपनाया। राज्य में ग्राम पंचायतों के लिए 1953 का राजस्थान पंचायत अधिनियम पहले से था, और 1959 के राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम से दोनों ऊपरी स्तर बने।
73वां संशोधन और 1994 का अधिनियम
तीन दशक तक पंचायतें राज्य सरकारों की इच्छा पर निर्भर रहीं और अनेक राज्यों में चुनाव ही नहीं हुए। 1992 के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम ने भाग नौ, अनुच्छेद 243 से 243ओ तथा ग्यारहवीं अनुसूची जोड़कर यह स्थिति बदली, जिसमें पंचायतों को सौंपे जा सकने वाले 29 विषय दिए गए हैं। यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ, जो अब राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है। राजस्थान ने 1994 के राजस्थान पंचायती राज अधिनियम और 1996 के नियमों से अपना कानून इसके अनुरूप किया, और तब से तीनों स्तरों के चुनाव नियमित रूप से पांच वर्ष के निश्चित कार्यकाल के लिए होते हैं।
राजस्थान के तीन स्तर
| स्तर | क्षेत्र | अध्यक्ष और उपाध्यक्ष | प्रमुख अधिकारी |
|---|---|---|---|
| ग्राम पंचायत | एक गांव या गांवों का समूह | सरपंच और उपसरपंच | ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत सचिव |
| पंचायत समिति | पंचायत समिति अर्थात खंड | प्रधान और उपप्रधान | विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी |
| जिला परिषद | जिला | प्रमुख और उपप्रमुख | मुख्य कार्यकारी अधिकारी |
ग्राम पंचायत से नीचे कोई निर्वाचित निकाय नहीं है, परंतु राज्य प्रत्येक वार्ड के मतदाताओं की वार्ड सभा की व्यवस्था करता है, और जिले से ऊपर अनुच्छेद 243जेडडी से बनी जिला योजना समिति जिले के ग्रामीण तथा नगरीय निकायों की योजनाओं को एक साथ जोड़ती है।
चुनाव, आरक्षण और कार्यकाल
- तीनों स्तरों के चुनाव राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, जिसकी व्यवस्था अनुच्छेद 243के में है और जिसके राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं।
- प्रत्येक स्तर का कार्यकाल पांच वर्ष है और चुनाव कार्यकाल समाप्त होने से पहले पूरा होना चाहिए; समय से पूर्व भंग निकाय शेष अवधि के लिए ही पुनर्गठित होता है।
- चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है, वार्ड के मतदाता अपना पंच चुनते हैं, जबकि सरपंच का चुनाव पूरी ग्राम पंचायत के मतदाता सीधे करते हैं।
- प्रधान और प्रमुख का चुनाव सीधे नहीं होता; उन्हें पंचायत समिति तथा जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य अपने में से चुनते हैं।
- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात में स्थान आरक्षित होते हैं, पिछड़े वर्गों के लिए राज्य कानून के अनुसार, तथा राजस्थान में आधे स्थान और सरपंच, प्रधान एवं प्रमुख के आधे पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
ग्राम सभा
अनुच्छेद 243ए ग्राम सभा को संवैधानिक मान्यता देता है। यह सदस्यों की समिति नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत क्षेत्र के गांव या गांवों की निर्वाचक सूची में दर्ज सभी व्यक्तियों का निकाय है, इसलिए प्रत्येक वयस्क मतदाता इसका सदस्य है। यह निश्चित तिथियों पर बैठती है, वार्षिक लेखे तथा अंकेक्षण रिपोर्ट पर विचार करती है, पंचायत की योजनाएं और कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों की सूची स्वीकृत करती है, और कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण करती है। राजस्थान में ग्राम सभा के पास वास्तविक काम रहा है, क्योंकि स्थानीय खर्च के अभिलेख मांगने की परंपरा यहां पुरानी है: 1996 में मजदूर किसान शक्ति संगठन ने ब्यावर में जो आंदोलन चलाया वह पंचायत स्तर के लेखों से ही उठा, और राजस्थान ने 2005 के केंद्रीय अधिनियम से पांच वर्ष पहले, वर्ष 2000 में, अपना सूचना का अधिकार कानून बनाया।
राज्य के आयोग
| निकाय | आधार | कार्य और मुख्यालय |
|---|---|---|
| राजस्थान लोक सेवा आयोग | अनुच्छेद 315, गठन 1949 में | राज्य सेवाओं में भर्ती; मुख्यालय अजमेर |
| राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 243के तथा 243जेडए | पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव |
| राजस्थान राज्य वित्त आयोग | अनुच्छेद 243आई तथा 243वाई | हर पांच वर्ष में गठन, स्थानीय निकायों के लिए करों में हिस्से की सिफारिश |
| राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग | मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 | मानव अधिकार उल्लंघन की जांच; मुख्यालय जयपुर |
| राजस्थान राज्य सूचना आयोग | सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 | सूचना संबंधी अपील और शिकायतें; मुख्यालय जयपुर |
| राजस्थान राज्य महिला आयोग | राज्य विधान | महिलाओं के अधिकारों की रक्षा |
| राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग | बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 | बाल अधिकार, शिक्षा का अधिकार सहित |
| राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग | राज्य विधान | पिछड़े वर्गों की सूची में सम्मिलन के दावों की जांच |
| राजस्थान लोकायुक्त | राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 | मंत्रियों तथा लोक सेवकों के विरुद्ध आरोपों की जांच |
इन निकायों के दो बिंदु स्वयं परीक्षा योग्य हैं। लोक सेवा आयोग के सदस्यों तथा राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, और राज्य निर्वाचन आयुक्त को यह संरक्षण मिला है कि उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जा सकता है, जिससे स्थानीय चुनाव तत्कालीन सरकार के हाथ में नहीं रहते। मानव अधिकार, महिला, बाल अधिकार तथा पिछड़ा वर्ग आयोग सिफारिशी निकाय हैं: वे जांच करते हैं, अभिलेख बुलाते हैं और सरकार को सलाह देते हैं, न्यायालय की तरह बाध्यकारी आदेश नहीं देते।
इस विषय को कैसे दोहराएं
चार तिथियां क्रम से याद करें: बलवंत राय मेहता रिपोर्ट के लिए 1957, नागौर के लिए 1959, संशोधन के लिए 1992 और उसके प्रवर्तन के लिए 1993, तथा राजस्थान अधिनियम के लिए 1994। फिर पदों की सीढ़ी स्थिर करें, सरपंच, प्रधान और प्रमुख अपने अधिकारियों के साथ, और अनुच्छेद एक पंक्ति में रखें: ग्राम सभा के लिए 243ए, राज्य वित्त आयोग के लिए 243आई, राज्य निर्वाचन आयोग के लिए 243के और जिला योजना समिति के लिए 243जेडडी।
परीक्षा की दृष्टि से
सबसे पहले यही पूछा जाता है कि पंचायती राज की शुरुआत राजस्थान में, नागौर में, 2 अक्टूबर 1959 को हुई, जिसमें आंध्र प्रदेश सामान्य भ्रामक विकल्प रहता है। इसके बाद पद नाम आते हैं: कौन अधिकारी किस स्तर का प्रमुख है, और निर्वाचित अध्यक्ष तथा नियुक्त अधिकारी का अंतर, जहां प्रधान और विकास अधिकारी को विकल्पों में आपस में बदल दिया जाता है। अनुच्छेद समूह में पूछे जाते हैं, इसलिए 243ए, 243आई, 243के और 243जेडडी को अलग-अलग याद रखें, तथा ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषयों को नगरपालिकाओं की बारहवीं अनुसूची के 18 विषयों से अलग रखें। आयोगों में राजस्थान लोक सेवा आयोग का अजमेर मुख्यालय और लोकायुक्त का वर्ष 1973 सबसे अधिक पूछे जाते हैं, साथ ही यह नियम कि राज्य निर्वाचन आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही हटाया जा सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पंचायती राज वाला पहला राज्य | राजस्थान, 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में उद्घाटन |
|---|---|
| उद्घाटन किसने किया | प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू |
| दूसरा राज्य | आंध्र प्रदेश, 1 नवंबर 1959 |
| संबंधित समिति | बलवंत राय मेहता समिति, 1957 की रिपोर्ट |
| संविधान संशोधन | 73वां संशोधन अधिनियम, 1992; भाग नौ, अनुच्छेद 243 से 243ओ |
| प्रवर्तन तिथि | 24 अप्रैल 1993, राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस |
| ग्यारहवीं अनुसूची | पंचायतों के लिए 29 विषय |
| राज्य का कानून | राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 तथा 1996 के नियम |
| तीनों स्तरों के प्रमुख | सरपंच, प्रधान और प्रमुख |
| प्रमुख अधिकारी | ग्राम विकास अधिकारी, विकास अधिकारी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी |
| कार्यकाल | प्रत्येक स्तर के लिए पांच वर्ष |
| चुनाव की न्यूनतम आयु | 21 वर्ष |
| ग्राम सभा | अनुच्छेद 243ए; पंचायत क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाता |
| राज्य निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 243के; आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा |
| राजस्थान लोक सेवा आयोग | मुख्यालय अजमेर, गठन 1949 में |
| राजस्थान लोकायुक्त | राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत में पंचायती राज का पहली बार उद्घाटन 2 अक्टूबर 1959 को किस स्थान पर हुआ?
- A.नागौर, राजस्थान
- B.जयपुर, राजस्थान
- C.शादनगर, आंध्र प्रदेश
- D.वर्धा, महाराष्ट्र
उत्तर देखें
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिश पर अमल करते हुए 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में पंचायती राज का उद्घाटन किया, और इस प्रकार राजस्थान स्थानीय स्वशासन की तीन स्तरीय व्यवस्था आरंभ करने वाला भारत का पहला राज्य बना।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पंचायती राज के तीन स्तरीय ढांचे की सिफारिश किस समिति ने की थी?
- A.अशोक मेहता समिति
- B.बलवंत राय मेहता समिति
- C.एल. एम. सिंघवी समिति
- D.जी. वी. के. राव समिति
उत्तर देखें
समुदाय विकास कार्यक्रम के कामकाज का अध्ययन करने के बाद 1957 में रिपोर्ट देने वाली इस समिति ने कहा कि जन भागीदारी के बिना ग्रामीण विकास सफल नहीं हो सकता, और गांव की पंचायत, खंड की पंचायत समिति तथा जिले की जिला परिषद, इन तीन स्तरों के निर्वाचित निकायों से…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस संविधान संशोधन अधिनियम ने पंचायतों को भारत के संविधान में स्थान दिया?
- A.42वां संशोधन
- B.44वां संशोधन
- C.73वां संशोधन
- D.74वां संशोधन
उत्तर देखें
1992 के 73वें संविधान संशोधन अधिनियम ने भाग नौ में अनुच्छेद 243 से 243ओ तथा ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी, जिससे नियमित चुनाव, आरक्षण और पांच वर्ष का निश्चित कार्यकाल राज्यों पर बाध्यकारी हो गया, और यह 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ, जो अब राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों को सौंपे जा सकने वाले कितने विषय हैं?
- A.18
- B.21
- C.29
- D.31
उत्तर देखें
73वें संशोधन द्वारा जोड़ी गई ग्यारहवीं अनुसूची में उन उनतीस विषयों की सूची है जो राज्य अपनी पंचायतों को सौंप सकता है, जैसे कृषि, लघु सिंचाई और ग्रामीण आवास से लेकर पेयजल, प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली; इन विषयों के साथ निधि और कर्मचारी भी सौंपे जाएं, यही…
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान में पंचायत समिति के निर्वाचित प्रमुख को क्या कहा जाता है?
- A.सरपंच
- B.प्रधान
- C.प्रमुख
- D.विकास अधिकारी
उत्तर देखें
पंचायत समिति मध्य अर्थात खंड स्तर का निकाय है, और उसके निर्वाचित सदस्य अपने में से एक को प्रधान चुनते हैं, जिसके साथ उपप्रधान उपाध्यक्ष होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान में पंचायत समिति का मुख्य कार्यकारी अधिकारी कौन होता है?
- A.जिला कलेक्टर
- B.विकास अधिकारी
- C.ग्राम विकास अधिकारी
- D.उपप्रधान
उत्तर देखें
विकास अधिकारी, जिसे सामान्य प्रशासन में खंड विकास अधिकारी कहा जाता है, पंचायत समिति में तैनात वह सरकारी अधिकारी है जो उसके प्रस्ताव लागू करता है, खंड की विकास योजनाएं चलाता है तथा उसके कर्मचारी और लेखे देखता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान की पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कौन कराता है?
- A.भारत निर्वाचन आयोग
- B.राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग
- C.राजस्थान लोक सेवा आयोग
- D.राज्य का पंचायती राज विभाग
उत्तर देखें
अनुच्छेद 243के प्रत्येक राज्य में एक राज्य निर्वाचन आयोग की अपेक्षा करता है, जिसका प्रमुख राज्यपाल द्वारा नियुक्त राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है और जो निर्वाचक सूचियों की तैयारी तथा पंचायतों के सभी चुनावों का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण करता है; अनुच्छेद 243जेडए यही व्यवस्था नगरीय चुनावों पर लागू करता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए राज्य वित्त आयोग के गठन की व्यवस्था संविधान के किस अनुच्छेद में है?
- A.अनुच्छेद 243ए
- B.अनुच्छेद 243आई
- C.अनुच्छेद 243के
- D.अनुच्छेद 243जेडडी
उत्तर देखें
यह राज्यपाल से अपेक्षा करता है कि प्रत्येक पांच वर्ष में एक राज्य वित्त आयोग गठित किया जाए, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करे और सिफारिश करे कि राज्य के कर, शुल्क, पथकर तथा फीस उनके साथ किस प्रकार बांटे जाएं और उन्हें कौन से सहायता अनुदान मिलें।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संविधान के अनुच्छेद 243ए में मान्यता प्राप्त ग्राम सभा किससे बनती है?
- A.ग्राम पंचायत के सभी निर्वाचित सदस्यों से
- B.पंचायत क्षेत्र के गांवों की निर्वाचक सूची में दर्ज सभी व्यक्तियों से
- C.केवल सरपंच और वार्ड पंचों से
- D.गांव के अठारह वर्ष से ऊपर के सभी निवासियों से, चाहे वे पंजीकृत हों या न हों
उत्तर देखें
ग्राम सभा मतदाताओं का सामान्य निकाय है, प्रतिनिधियों की समिति नहीं, इसीलिए उसे गांव स्तर पर विधानमंडल के समतुल्य कहा जाता है; वह वार्षिक लेखे तथा अंकेक्षण रिपोर्ट पर विचार करती है, योजनाएं और लाभार्थी सूचियां स्वीकृत करती है और कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान लोक सेवा आयोग का मुख्यालय कहां है?
- A.जयपुर
- B.जोधपुर
- C.अजमेर
- D.उदयपुर
उत्तर देखें
वर्ष 1949 में गठित और संविधान के अनुच्छेद 315 के अंतर्गत कार्य करने वाले राजस्थान लोक सेवा आयोग का मुख्यालय अजमेर में है, जहां से वह राज्य सेवाओं के लिए परीक्षाएं तथा साक्षात्कार आयोजित करता है, जिनमें राजस्थान प्रशासनिक सेवा और राज्य की शिक्षा एवं पुलिस सेवाएं शामिल हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान में लोकायुक्त संस्था किस वर्ष पारित अधिनियम से बनी?
- A.1949
- B.1973
- C.1993
- D.2005
उत्तर देखें
राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम 1973 में पारित हुआ, जिससे राजस्थान महाराष्ट्र के बाद यह पद स्थापित करने वाले आरंभिक राज्यों में आता है, और लोकायुक्त मंत्रियों तथा अन्य लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं पद के दुरुपयोग के आरोपों की जांच करते हुए राज्यपाल को रिपोर्ट देता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पंचायती राज निकायों के कार्यकाल के विषय में निम्नलिखित में से कौन कथन सही है?
- A.कार्यकाल चार वर्ष का है और राज्य सरकार उसे बढ़ा सकती है
- B.कार्यकाल पांच वर्ष का है, और समय से पूर्व भंग निकाय शेष अवधि के लिए ही पुनर्गठित होता है
- C.कार्यकाल छह वर्ष का है, जैसा राज्यसभा के लिए है
- D.कोई निश्चित कार्यकाल नहीं; चुनाव तब होते हैं जब राज्य सरकार तय करे
उत्तर देखें
अनुच्छेद 243ई प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल पांच वर्ष तय करता है, कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव पूरा कराने की अपेक्षा करता है, और यह व्यवस्था देता है कि समय से पूर्व भंग पंचायत के स्थान पर बना नया निकाय मूल पांच वर्ष की शेष अवधि तक ही पद पर…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में पंचायती राज सबसे पहले किस राज्य में और कहां आरंभ हुआ?
राजस्थान में। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1957 की बलवंत राय मेहता समिति रिपोर्ट पर अमल करते हुए 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में पंचायती राज का उद्घाटन किया। आंध्र प्रदेश 1 नवंबर 1959 को दूसरा राज्य बना, इसीलिए वह सामान्यतः गलत विकल्प के रूप में आता है।
राजस्थान में पंचायती राज के तीन स्तर कौन हैं और उनके प्रमुख कौन होते हैं?
गांव स्तर पर ग्राम पंचायत का प्रमुख सरपंच, खंड स्तर पर पंचायत समिति का प्रमुख प्रधान और जिला स्तर पर जिला परिषद का प्रमुख प्रमुख होता है। प्रत्येक के उपाध्यक्ष उपसरपंच, उपप्रधान और उपप्रमुख होते हैं, तथा प्रत्येक के साथ एक नियुक्त प्रमुख अधिकारी रहता है।
पंचायत समिति के प्रधान का चुनाव मतदाता सीधे करते हैं?
नहीं। मतदाता पंचायत समिति के सदस्य चुनते हैं, और वही निर्वाचित सदस्य अपने में से प्रधान तथा उपप्रधान चुनते हैं। जिला परिषद के प्रमुख के लिए भी यही अप्रत्यक्ष विधि है, जबकि सरपंच का चुनाव पूरी ग्राम पंचायत के मतदाता सीधे करते हैं।
राजस्थान में पंचायत चुनाव कौन कराता है?
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग, जिसकी व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 243के में है। इसके राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह तथा उन्हीं आधारों पर ही हटाया जा सकता है, जिससे स्थानीय चुनाव हस्तक्षेप से सुरक्षित रहते हैं।
राजस्थान लोक सेवा आयोग का मुख्यालय कहां है?
अजमेर में। आयोग का गठन 1949 में हुआ और यह संविधान के अनुच्छेद 315 के अंतर्गत कार्य करता है, जो राजस्थान की राज्य सेवाओं, जिनमें राजस्थान प्रशासनिक सेवा भी है, में भर्ती के लिए परीक्षाएं तथा साक्षात्कार आयोजित करता है।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग नौ तथा ग्यारहवीं अनुसूची — विधायी विभाग, भारत सरकार
- भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार, कक्षा ग्यारह राजनीति विज्ञान, स्थानीय शासन — एनसीईआरटी





