मध्य प्रदेश में पंचायती राज और नगरीय निकाय: संपूर्ण नोट्स
मध्य प्रदेश के स्थानीय स्वशासन पर नोट्स: 1993 का अधिनियम, जनपद एवं जिला पंचायत, ग्राम स्वराज, पेसा, नगर पालिक निगम तथा परीक्षा के महत्वपूर्ण अनुच्छेद।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

जब पंचायती राज को संविधान में स्थान मिला तो सबसे पहले कदम बढ़ाने वाला राज्य मध्य प्रदेश था। 1992 के 73वें और 74वें संशोधन अधिनियमों ने पंचायतों तथा नगरपालिकाओं को संवैधानिक निकाय बनाया और मध्य प्रदेश ने 1993 में अपना अधिनियम पारित कर 1994 में पंचायत चुनाव कराए — नए भाग 9 के अंतर्गत पंचायतों का गठन करने वाला देश का पहला राज्य। आज यह व्यवस्था मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 से चलती है, जबकि नगर मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 तथा मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 के अंतर्गत आते हैं। एमपीपीएससी, एमपी पुलिस, पटवारी और एसएससी के प्रश्नपत्र तीनों स्तरों के नाम, पदाधिकारी, अनुच्छेद तथा इस राज्य की दो विशेष सुधार-व्यवस्थाएँ — ग्राम स्वराज और वापस बुलाने का अधिकार — पूछते हैं।
संवैधानिक ढाँचा
नीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 40 राज्य से ग्राम पंचायतों को संगठित करने को कहता है और 1957 की बलवंत राय मेहता समिति ने वह त्रिस्तरीय ढाँचा दिया जिसका उद्घाटन राजस्थान ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में किया। 1986 की एल. एम. सिंघवी समिति ने संवैधानिक दर्जे की माँग की, 1989 का 64वाँ संशोधन विधेयक राज्यसभा में गिर गया, और अंततः 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने भाग 9, अनुच्छेद 243 से 243-O, तथा 29 विषयों वाली ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी; यह 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ, जो अब राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है। 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने भाग 9क, अनुच्छेद 243-P से 243-ZG, तथा 18 विषयों वाली बारहवीं अनुसूची जोड़ी और यह 1 जून 1993 से लागू हुआ। दोनों ने हर राज्य के लिए तीन बातें अनिवार्य कीं — बीस लाख से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में त्रिस्तरीय ढाँचा, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष पर चुनाव, तथा अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए स्थानों का आरक्षण।
मध्य प्रदेश के तीन स्तर
| निकाय | स्तर | प्रमुख | चयन का तरीका |
|---|---|---|---|
| ग्राम पंचायत | गाँव | सरपंच | पंचायत के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन |
| जनपद पंचायत | विकासखंड या जनपद | अध्यक्ष | जनपद पंचायत के निर्वाचित सदस्यों द्वारा |
| जिला पंचायत | जिला | अध्यक्ष | जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्यों द्वारा |
परीक्षा में नाम ही निर्णायक होते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश जहाँ पंचायत समिति तथा जिला परिषद कहते हैं, वहाँ मध्य प्रदेश जनपद पंचायत और जिला पंचायत कहता है; बिहार जहाँ गाँव के प्रमुख को मुखिया कहता है, वहाँ मध्य प्रदेश सरपंच कहता है। वार्डों के पंच और ग्राम पंचायत का सरपंच मतदाताओं द्वारा सीधे चुने जाते हैं; उप-सरपंच का चुनाव पंच अपने बीच से करते हैं तथा जनपद और जिला पंचायत के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव उनके निर्वाचित सदस्य करते हैं। राज्य में पंचायत चुनाव दलीय चिह्नों के बिना लड़े जाते हैं। अनुच्छेद 243-E के अनुसार प्रत्येक स्तर का कार्यकाल पाँच वर्ष है, कार्यकाल समाप्त होने से पहले नया चुनाव पूरा होना चाहिए, और समय से पहले विघटन के बाद पुनर्गठित पंचायत केवल शेष अवधि के लिए कार्य करती है, नए पाँच वर्ष के लिए नहीं।
ग्राम सभा और ग्राम स्वराज
अनुच्छेद 243-A ग्राम सभा को गाँव की निर्वाचक सूची में दर्ज समस्त व्यक्तियों का निकाय बताता है और उसकी शक्तियाँ राज्य विधि पर छोड़ता है। मध्य प्रदेश ने इसी स्वतंत्रता का उपयोग 2001 में किया, जब ग्राम स्वराज व्यवस्था लागू हुई और ग्राम पंचायत के स्थान पर ग्राम सभा गाँव के निर्णयों का केंद्र बनी। इसके अंतर्गत गाँव में ग्राम सभा की विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि संबंधी समितियाँ होती हैं तथा अनाज, श्रम, सामग्री और नकद के योगदान से बना ग्राम कोष होता है। ग्राम सभा वार्षिक योजना स्वीकृत करती है, कल्याणकारी योजनाओं के हितग्राही चुनती है और कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण करती है, जबकि ग्राम पंचायत उसके निर्णयों को कार्यरूप देती है। इसी कारण राज्य के अधिनियम का नाम भी पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम कर दिया गया।
अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा
मध्य प्रदेश का बड़ा भाग जनजातीय है और पाँचवीं अनुसूची में आता है। वहाँ भाग 9 स्वतः लागू नहीं होता; पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996, जिसे पेसा कहा जाता है, उसे संशोधनों के साथ विस्तारित करता है। अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा सर्वोच्च है — वह परंपरा और रूढ़ि की रक्षा करती है, योजनाओं तथा हितग्राही सूची का अनुमोदन करती है, भूमि अधिग्रहण या विस्थापन से पहले उससे परामर्श अनिवार्य है, वह छोटे जलाशयों और लघु वनोपज का प्रबंधन करती है तथा गौण खनिज पट्टों और स्थानीय मदिरा विक्रय के नियंत्रण में उसकी राय ली जाती है। मध्य प्रदेश ने अपने अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा लागू करने के लिए नियम बनाए हैं और यह अधिनियम एमपीपीएससी का स्थायी प्रश्न है।
निर्वाचन, आरक्षण और वापस बुलाने का अधिकार
अनुच्छेद 243-K पंचायत चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग को देता है, जिसका प्रमुख राज्यपाल द्वारा नियुक्त राज्य निर्वाचन आयुक्त होता है, और अनुच्छेद 243-ZA नगरपालिका चुनावों के लिए यही व्यवस्था करता है; अतः ये चुनाव मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, भारत निर्वाचन आयोग नहीं। अनुच्छेद 243-F चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष रखता है। अनुच्छेद 243-D पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में और महिलाओं के लिए कम से कम एक तिहाई स्थान तथा अध्यक्ष पद आरक्षित करता है; मध्य प्रदेश ने अपनी पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं का हिस्सा बढ़ाकर आधा कर दिया है। यह राज्य इस बात के लिए भी जाना जाता है कि उसने मतदाताओं को स्थानीय निकाय के प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रमुख को कार्यकाल पूरा होने से पहले वापस बुलाने का अधिकार सबसे पहले दिया, जो उस समय किसी अन्य राज्य में नहीं था।
मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय
| निकाय | क्षेत्र का प्रकार | निर्वाचित प्रमुख |
|---|---|---|
| नगर पालिक निगम | बृहत्तर नगरीय क्षेत्र | महापौर, नगर के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचित |
| नगर पालिका परिषद | लघु नगरीय क्षेत्र | अध्यक्ष |
| नगर परिषद | संक्रमणशील क्षेत्र | अध्यक्ष |
अनुच्छेद 243-Q ये तीन श्रेणियाँ देता है और राज्यपाल किसी क्षेत्र की जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व, स्थानीय प्रशासन के लिए प्राप्त राजस्व, गैर-कृषि कार्यों में रोजगार का प्रतिशत तथा आर्थिक महत्व देखकर श्रेणी तय करता है। मध्य प्रदेश में नगर पालिक निगम 1956 के अधिनियम से और छोटे निकाय 1961 के नगर पालिका अधिनियम से चलते हैं; महापौर निर्वाचित प्रमुख होता है और राज्य का अधिकारी नगर निगम आयुक्त कार्यपालक प्रमुख। अनुच्छेद 243-S तीन लाख या अधिक जनसंख्या पर वार्ड समितियाँ और अनुच्छेद 243-ZE दस लाख या अधिक जनसंख्या वाले महानगरीय क्षेत्र के लिए महानगर योजना समिति अनिवार्य करता है। अनुच्छेद 243-W विधानमंडल को बारहवीं अनुसूची के अठारह विषय सौंपने की शक्ति देता है और अनुच्छेद 243-ZD जिला योजना समिति का प्रावधान करता है, जो जिले की पंचायतों तथा नगरपालिकाओं की योजनाओं को समेकित करती है। वित्त की व्यवस्था भी कार्यों जैसी है — पंचायत करों के लिए अनुच्छेद 243-H, नगरपालिका करों के लिए अनुच्छेद 243-X तथा अनुच्छेद 243-I और 243-Y के अंतर्गत प्रत्येक पाँच वर्ष पर राज्य वित्त आयोग।
परीक्षा की दृष्टि से
एमपीपीएससी, एमपी पुलिस, पटवारी, व्यापम और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय को चार दिशाओं से पूछते हैं। पहला, मध्य प्रदेश के अपने नाम — गाँव के लिए सरपंच, विकासखंड के लिए जनपद पंचायत और जिले के लिए जिला पंचायत, जबकि अन्य राज्यों में पंचायत समिति तथा जिला परिषद चलते हैं। दूसरा, राज्य की उपलब्धियाँ — भाग 9 के अंतर्गत 1994 के पहले चुनाव, 2001 का ग्राम स्वराज और स्थानीय निकाय के प्रमुख को वापस बुलाने का अधिकार। तीसरा, अनुच्छेद — 243-A ग्राम सभा, 243-D आरक्षण, 243-E कार्यकाल, 243-F 21 वर्ष, 243-G और ग्यारहवीं अनुसूची, 243-I तथा 243-Y वित्त आयोग, 243-K और 243-ZA चुनाव, 243-Q नगरपालिका के प्रकार, 243-W और बारहवीं अनुसूची, 243-ZD जिला योजना तथा 243-ZE महानगर योजना। चौथा, पेसा 1996 और अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की शक्तियाँ, जो इतनी बड़ी जनजातीय जनसंख्या वाले राज्य में विशेष महत्व रखती हैं। जाल हैं — राज्य निर्वाचन आयोग के स्थान पर भारत निर्वाचन आयोग, 73वें संशोधन के पहले राज्य के रूप में 1959 का राजस्थान, विघटन के बाद पुनर्गठित पंचायत को पूरे पाँच वर्ष बताना और दोनों अनुसूचियों की अदला-बदली।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भाग 9 के अंतर्गत पहला राज्य | मध्य प्रदेश, 1994 में पंचायत चुनाव |
|---|---|
| राज्य का पंचायत कानून | मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 |
| ग्राम स्तर | ग्राम पंचायत, प्रत्यक्ष निर्वाचित सरपंच |
| विकासखंड स्तर | जनपद पंचायत, अध्यक्ष के नेतृत्व में |
| जिला स्तर | जिला पंचायत, अध्यक्ष के नेतृत्व में |
| ग्राम स्वराज | 2001 में लागू; ग्राम सभा की समितियाँ और ग्राम कोष |
| अनुसूचित क्षेत्र | पेसा, पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 |
| निगम का कानून | मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 |
| परिषद का कानून | मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 |
| निगम का प्रमुख | महापौर, प्रत्यक्ष निर्वाचित; कार्यपालक प्रमुख नगर निगम आयुक्त |
| वापस बुलाने का अधिकार | स्थानीय निकायों में सबसे पहले मध्य प्रदेश ने दिया |
| न्यूनतम आयु | 21 वर्ष, अनुच्छेद 243-F |
| कार्यकाल | प्रत्येक स्तर का पाँच वर्ष, अनुच्छेद 243-E |
| चुनाव कराने वाली संस्था | मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, अनुच्छेद 243-K और 243-ZA |
| जिला नियोजन | अनुच्छेद 243-ZD के अंतर्गत जिला योजना समिति |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
73वें संविधान संशोधन के अंतर्गत पंचायतों का गठन और पंचायत चुनाव कराने वाला देश का पहला राज्य कौन सा था?
- A.राजस्थान
- B.मध्य प्रदेश
- C.कर्नाटक
- D.आंध्र प्रदेश
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73वाँ संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ और राज्यों को अपने कानून भाग 9 के अनुरूप बनाने के लिए एक वर्ष मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्य प्रदेश में विकासखंड स्तर की पंचायत को किस नाम से जाना जाता है?
- A.पंचायत समिति
- B.जनपद पंचायत
- C.तालुका पंचायत
- D.मंडल परिषद
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मध्य प्रदेश में पंचायती राज का मध्यवर्ती स्तर जनपद पंचायत है, जो विकासखंड के लिए गठित होती है; इसका प्रमुख अध्यक्ष होता है, जिसे उसके निर्वाचित सदस्य चुनते हैं, और उपाध्यक्ष उसका सहयोगी होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रमुख को क्या कहा जाता है?
- A.मुखिया
- B.सरपंच
- C.प्रधान
- D.अध्यक्ष
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मध्य प्रदेश में पंचायत क्षेत्र के मतदाता वार्डों के पंचों के साथ सरपंच का निर्वाचन सीधे करते हैं और फिर पंच अपने बीच से उप-सरपंच चुनते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ग्राम सभा को गाँव के निर्णयों का केंद्र बनाने वाली ग्राम स्वराज व्यवस्था मध्य प्रदेश में किस वर्ष लागू हुई?
- A.1994
- B.1997
- C.2001
- D.2006
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मध्य प्रदेश ने 2001 में ग्राम स्वराज व्यवस्था लागू की, जिसमें ग्राम सभा को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि की अपनी समितियाँ तथा अनाज, श्रम, सामग्री और नकद के योगदान से बना ग्राम कोष मिला; इसी के अनुरूप राज्य के अधिनियम का नाम भी मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम…
पूरी व्याख्या पढ़ें →जिला योजना समिति का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है?
- A.अनुच्छेद 243ZA
- B.अनुच्छेद 243ZD
- C.अनुच्छेद 243ZE
- D.अनुच्छेद 243Y
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74वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 243ZD प्रत्येक राज्य से अपेक्षा करता है कि वह हर जिले में जिला योजना समिति गठित करे, जो जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा बनाई गई योजनाओं को समेकित करे तथा पूरे जिले के लिए प्रारूप विकास योजना तैयार करे; इसके कम से कम…
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्य प्रदेश में पंचायती राज वर्तमान में किस अधिनियम से संचालित होता है?
- A.मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956
- B.मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961
- C.मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993
- D.मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 2006
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राज्य ने 73वें संशोधन के अनुपालन में यह कानून 1993 में पारित किया, इसी के अंतर्गत 1994 में चुनाव कराए और ग्राम सभा को गाँव की सरकार का केंद्र बनाने वाले सुधार के बाद इसके नाम में ग्राम स्वराज जोड़ा गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्य प्रदेश में नगर पालिक निगम (नगर निगम) का गठन किस अधिनियम के अंतर्गत होता है?
- A.मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956
- B.मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961
- C.मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1993
- D.मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 2007
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बृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर पालिक निगम इसी 1956 के अधिनियम के अंतर्गत गठित होता है — वही वर्ष जिसमें मध्य प्रदेश राज्य बना; इसका निर्वाचित प्रमुख महापौर और कार्यपालक प्रमुख नगर निगम आयुक्त होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्य प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू पेसा अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
- A.1992
- B.1993
- C.1996
- D.2006
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संविधान का भाग 9 पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होता, इसलिए संसद ने 1996 में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम पारित किया, जो जनजातीय परंपरा की रक्षा करने वाले संशोधनों के साथ उसका विस्तार करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 243F के अनुसार पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
- A.18 वर्ष
- B.21 वर्ष
- C.25 वर्ष
- D.30 वर्ष
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अनुच्छेद 243F कहता है कि जो व्यक्ति राज्य विधानमंडल का सदस्य होने के लिए अर्ह नहीं है वह पंचायत के लिए निरर्हित होगा, परंतु साथ ही यह भी कहता है कि इक्कीस वर्ष की आयु पूरी कर चुके व्यक्ति को केवल पच्चीस वर्ष से कम आयु के कारण निरर्हित नहीं…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 243E के अनुसार पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले विघटित पंचायत का पुनर्गठन कितनी अवधि के लिए होता है?
- A.पाँच वर्ष के नए कार्यकाल के लिए
- B.केवल उस शेष अवधि के लिए जिसके लिए विघटित पंचायत बनी रहती
- C.छह माह की निश्चित अवधि के लिए
- D.एक वर्ष की निश्चित अवधि के लिए
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अनुच्छेद 243E प्रत्येक पंचायत को उसकी पहली बैठक की तिथि से पाँच वर्ष का कार्यकाल देता है, प्रवृत्त विधि के अंतर्गत उसे पहले विघटित करने की अनुमति देता है और विघटन के छह माह के भीतर चुनाव पूरा कराना अनिवार्य करता है; किंतु ऐसे चुनाव से गठित पंचायत केवल उसी…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मध्य प्रदेश को 73वें संशोधन के अंतर्गत पहला राज्य क्यों कहा जाता है?
संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ और राज्यों को एक वर्ष में अपने कानून भाग 9 के अनुरूप बनाने थे। मध्य प्रदेश ने 1993 में अपना पंचायत राज अधिनियम पारित किया और 1994 में पंचायत चुनाव पूरे कराए, जबकि किसी अन्य राज्य ने नए भाग के अंतर्गत पंचायतें गठित नहीं की थीं। राजस्थान 1959 में पहला था, परंतु वह संशोधन से बहुत पहले की बात है।
मध्य प्रदेश में पंचायती राज के तीन स्तरों के नाम क्या हैं?
गाँव में ग्राम पंचायत, जिसका प्रमुख प्रत्यक्ष निर्वाचित सरपंच होता है; विकासखंड के लिए जनपद पंचायत, जिसका अध्यक्ष उसके सदस्य चुनते हैं; और जिले के लिए जिला पंचायत, जिसका प्रमुख भी अध्यक्ष कहलाता है। पंचायत समिति तथा जिला परिषद शब्द अन्य राज्यों के हैं और प्रायः गलत विकल्प के रूप में आते हैं।
मध्य प्रदेश की ग्राम स्वराज व्यवस्था क्या है?
2001 का वह सुधार, जिसने ग्राम पंचायत के स्थान पर गाँव के समस्त मतदाताओं की सभा अर्थात ग्राम सभा को गाँव की सरकार का केंद्र बनाया। ग्राम सभा को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि की अपनी समितियाँ तथा अनाज, श्रम, सामग्री और नकद से बना ग्राम कोष मिला, और राज्य के अधिनियम का नाम भी पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम कर दिया गया।
क्या पेसा मध्य प्रदेश पर लागू होता है?
हाँ। भाग 9 पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होता और मध्य प्रदेश में बड़े अनुसूचित क्षेत्र हैं, इसलिए वहाँ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 लागू होता है। इन क्षेत्रों में ग्राम सभा परंपरा की रक्षा करती है, योजनाओं और हितग्राही सूची का अनुमोदन करती है, भूमि अधिग्रहण से पहले परामर्श पाती है तथा लघु वनोपज, छोटे जलाशयों और गौण खनिजों पर उसकी राय ली जाती है।
मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय किन कानूनों से चलते हैं?
नगर निगमों के लिए मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 तथा नगर पालिका परिषदों और नगर परिषदों के लिए मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961। तीनों का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 243-Q है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल जनसंख्या, घनत्व, राजस्व, गैर-कृषि रोजगार और आर्थिक महत्व देखकर श्रेणी तय करता है।
मध्य प्रदेश में नगर निगम का कार्यपालक प्रमुख कौन होता है?
नगर निगम आयुक्त, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी होता है और प्रशासन चलाकर निगम के निर्णयों को कार्यरूप देता है। महापौर निर्वाचित राजनीतिक प्रमुख होता है, जिसे नगर के मतदाता सीधे चुनते हैं और जो निगम की अध्यक्षता करता है। प्रश्नपत्र प्रायः इन्हीं दोनों पदों को आमने-सामने रखते हैं।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग 9: पंचायत, अनुच्छेद 243 से 243-O तथा ग्यारहवीं अनुसूची — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान, भाग 9क: नगरपालिकाएँ, अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तथा बारहवीं अनुसूची — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 — इंडिया कोड, विधायी विभाग
- मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 — इंडिया कोड, विधायी विभाग
- मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 — इंडिया कोड, विधायी विभाग





