भारत के मुख्य न्यायाधीशों की सूची: कार्यकाल और अनुच्छेद
भारत के मुख्य न्यायाधीशों पर परीक्षा नोट्स: पहले और वर्तमान धारक, सबसे लंबा तथा सबसे छोटा कार्यकाल, अनुच्छेद 124 से 128, रिकॉर्ड और प्रमुख तथ्य।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत का मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय का प्रमुख होता है और उसके माध्यम से देश की सम्पूर्ण न्याय व्यवस्था का शीर्ष अधिकारी होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में यह अध्याय दो तरह से पूछा जाता है। पहला तरीका संविधान का नियम है - मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है, पद किस आयु तक रहता है, पद कैसे रिक्त होता है। दूसरा तरीका पदधारियों की सूची से एक नाम है - पहला मुख्य न्यायाधीश, सबसे लंबे कार्यकाल वाला, सबसे छोटे कार्यकाल वाला, वह जो राष्ट्रपति के पद पर कार्य कर चुका, और वह पिता-पुत्र जोड़ी जो दोनों इस पद तक पहुँची। यह सूची 26 जनवरी 1950 से शुरू होती है, जिस दिन भारत का फेडरल कोर्ट उच्चतम न्यायालय में बदला। अब तक तिरेपन न्यायाधीश इस पद पर रहे हैं, और हर नाम के साथ एक पहचान याद रखना पर्याप्त है।
संविधान में यह पद
अनुच्छेद 124 उच्चतम न्यायालय की स्थापना करता है और उसके न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान देता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है। 1950 से चली आ रही परंपरा के अनुसार उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को यह पद दिया जाता है और निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश अपने उत्तराधिकारी की सिफारिश करता है। यह परंपरा दो बार तोड़ी गई - 1973 में जब न्यायमूर्ति ए. एन. राय को तीन वरिष्ठ साथियों से ऊपर नियुक्त किया गया, और 1977 में जब न्यायमूर्ति एम. एच. बेग ने न्यायमूर्ति एच. आर. खन्ना का अधिक्रमण किया। अनुच्छेद 124(2) के अनुसार उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश पैंसठ वर्ष की आयु तक पद पर रहता है और राष्ट्रपति को लिखकर त्यागपत्र दे सकता है। पद से हटाना केवल राष्ट्रपति के आदेश से संभव है, जो संसद के प्रत्येक सदन के समावेदन के बाद दिया जाता है; वह समावेदन उसी सत्र में उस सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए, और आधार सिद्ध कदाचार या असमर्थता ही हो सकता है। अनुच्छेद 126 राष्ट्रपति को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की शक्ति देता है जब पद रिक्त हो या धारक कर्तव्य निभाने में असमर्थ हो। अनुच्छेद 127 तदर्थ न्यायाधीशों का और अनुच्छेद 128 सेवानिवृत्त न्यायाधीश को पुनः बैठाने का प्रावधान है, दोनों में भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर। न्यायाधीशों के वेतन भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं, इसलिए संसद में उन पर मतदान नहीं होता।
मुख्य न्यायाधीश के कार्य
मुख्य न्यायाधीश रोस्टर का स्वामी होता है, अर्थात वह तय करता है कि कौन सा मामला किस पीठ के समक्ष जाएगा और संविधान पीठों का गठन करता है। वह उस कॉलेजियम का प्रमुख होता है जो उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों और स्थानांतरण की सिफारिश करता है। अनुच्छेद 60 के अंतर्गत वह भारत के राष्ट्रपति को तथा उपराष्ट्रपति को पद की शपथ दिलाता है। अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति सलाह मांगते समय उससे परामर्श करता है, और वह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का पदेन मुख्य संरक्षक होता है।
आरंभिक मुख्य न्यायाधीश
न्यायमूर्ति हरिलाल जेकिसुनदास कनिया भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश थे, 26 जनवरी 1950 से 6 नवंबर 1951 को पद पर ही उनके निधन तक। उनके बाद दूसरे मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. पतंजलि शास्त्री और तीसरे न्यायमूर्ति मेहरचंद महाजन बने; महाजन इससे पहले जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री रह चुके थे। चौथे मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिजन कुमार मुखर्जी और पाँचवें न्यायमूर्ति सुधी रंजन दास थे, जिनका तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल पहले दशक का सबसे लंबा था। छठे मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा के समय उच्चतम न्यायालय ने अपने आरंभिक संवैधानिक सिद्धांत गढ़ने शुरू किए।
परीक्षा में पूछे जाने वाले रिकॉर्ड
| रिकॉर्ड | मुख्य न्यायाधीश | विवरण |
|---|---|---|
| पहले मुख्य न्यायाधीश | एच. जे. कनिया | 26 जनवरी 1950 से 6 नवंबर 1951; पद पर ही निधन |
| सबसे लंबा कार्यकाल | वाई. वी. चंद्रचूड़ | 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985, लगभग सात वर्ष चार माह |
| सबसे छोटा कार्यकाल | के. एन. सिंह | 25 नवंबर से 12 दिसंबर 1991, सत्रह दिन |
| राष्ट्रपति पद पर कार्य किया | एम. हिदायतुल्लाह | 20 जुलाई से 24 अगस्त 1969; पहले मुस्लिम मुख्य न्यायाधीश, बाद में उपराष्ट्रपति |
| अनुसूचित जाति से पहले मुख्य न्यायाधीश | के. जी. बालकृष्णन | जनवरी 2007 से मई 2010 तक पद पर |
| एकमात्र पिता-पुत्र | वाई. वी. और डी. वाई. चंद्रचूड़ | पुत्र भारत के पचासवें मुख्य न्यायाधीश रहे |
| चाचा-भतीजा | एच. जे. कनिया और एम. एच. कनिया | पद के पहले और तेईसवें धारक |
अब तक कोई महिला भारत की मुख्य न्यायाधीश नहीं बनी है। 1989 में नियुक्त न्यायमूर्ति एम. फातिमा बीवी उच्चतम न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश थीं, और न्यायमूर्ति लीला सेठ किसी उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं।
हाल के मुख्य न्यायाधीश
| मुख्य न्यायाधीश | पद ग्रहण | पद त्याग |
|---|---|---|
| डी. वाई. चंद्रचूड़ | 9 नवंबर 2022 | 10 नवंबर 2024 |
| संजीव खन्ना | 11 नवंबर 2024 | 13 मई 2025 |
| भूषण रामकृष्ण गवई | 14 मई 2025 | 23 नवंबर 2025 |
| सूर्य कांत | 24 नवंबर 2025 | 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्ति नियत |
न्यायमूर्ति सूर्य कांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में हुआ, वे 24 मई 2019 को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत हुए और 24 नवंबर 2025 को भारत के तिरेपनवें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इक्यावनवें मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एच. आर. खन्ना के भतीजे हैं, जिन्हें 1976 के एडीएम जबलपुर मामले में एकमात्र असहमति के लिए याद किया जाता है।
इस सूची को कैसे दोहराएं
तिरेपन नाम और तारीखें रटने की कोशिश न करें। पहले अनुच्छेद 124 से 128 तक के नियम याद करें, क्योंकि अधिकांश प्रश्न वहीं से आते हैं। इसके बाद ऊपर की तालिका के सात रिकॉर्ड, चार हाल के पदधारी उनके पद ग्रहण वर्ष के साथ, और पहले छह नाम क्रम में पक्के कर लें। इतने से अध्याय का लगभग हर प्रश्न हल हो जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न दो परिवारों में आते हैं। संविधान से पूछा जाता है कि मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है, सेवानिवृत्ति आयु पैंसठ वर्ष, और अनुच्छेद 126, 127 तथा 128 के अंक, जो लगभग हमेशा आपस में उलट-पुलट कर दिए जाते हैं। सूची से बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य हैं पहला मुख्य न्यायाधीश, सबसे लंबा और सबसे छोटा कार्यकाल, राष्ट्रपति पद पर हिदायतुल्लाह, तथा चंद्रचूड़ पिता-पुत्र। दो जाल बार-बार आते हैं। पहला उच्चतम न्यायालय के पैंसठ वर्ष और अनुच्छेद 217 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के बासठ वर्ष का जोड़ा है। दूसरा कनिया जोड़ी है, जिसे पिता-पुत्र बताकर रखा जाता है जबकि वे चाचा-भतीजा थे। समसामयिकी खंड वर्तमान धारक और शपथ की तारीख पूछता है, इसलिए नवीनतम नाम, तारीख और क्रम संख्या तैयार रखें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पहले मुख्य न्यायाधीश | न्यायमूर्ति एच. जे. कनिया, 26 जनवरी 1950 से 6 नवंबर 1951 |
|---|---|
| नियुक्ति | अनुच्छेद 124 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा, हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र से |
| सेवानिवृत्ति आयु | 65 वर्ष, अनुच्छेद 124(2) |
| कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश | अनुच्छेद 126 |
| सबसे लंबा कार्यकाल | न्यायमूर्ति वाई. वी. चंद्रचूड़, लगभग सात वर्ष चार माह |
| सबसे छोटा कार्यकाल | न्यायमूर्ति के. एन. सिंह, 1991 में सत्रह दिन |
| राष्ट्रपति पद पर कार्य | न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्लाह, 1969 |
| पचासवें मुख्य न्यायाधीश | न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, नवंबर 2022 से नवंबर 2024 |
| तिरेपनवें मुख्य न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सूर्य कांत, 24 नवंबर 2025 को शपथ |
| राष्ट्रपति को शपथ | भारत का मुख्य न्यायाधीश दिलाता है, अनुच्छेद 60 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
संविधान लागू होने के बाद भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
- A.एम. पतंजलि शास्त्री
- B.हरिलाल जेकिसुनदास कनिया
- C.मेहरचंद महाजन
- D.बिजन कुमार मुखर्जी
उत्तर देखें
26 जनवरी 1950 को जब भारत का फेडरल कोर्ट उच्चतम न्यायालय बना, तब फेडरल कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति एच. जे. कनिया भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश बने।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है?
- A.अनुच्छेद 124
- B.अनुच्छेद 126
- C.अनुच्छेद 127
- D.अनुच्छेद 131
उत्तर देखें
अनुच्छेद 124 भारत के उच्चतम न्यायालय की स्थापना करता है और कहता है कि मुख्य न्यायाधीश सहित इस न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र से नियुक्त किया जाएगा; अनुच्छेद 124(2) सेवानिवृत्ति की आयु पैंसठ वर्ष तय करता है और अनुच्छेद 124(4) पद से हटाने…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के किस मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रपति के पद पर भी कार्य किया?
- A.एस. एम. सीकरी
- B.ए. एन. राय
- C.एम. हिदायतुल्लाह
- D.के. सुब्बा राव
उत्तर देखें
न्यायमूर्ति मोहम्मद हिदायतुल्लाह, जो 1968 से 1970 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे, 20 जुलाई से 24 अगस्त 1969 तक भारत के राष्ट्रपति के पद पर कार्य करते रहे; यह अवधि राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन और वी. वी. गिरि के निर्वाचन के बीच की थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल किसका रहा?
- A.वाई. वी. चंद्रचूड़
- B.डी. वाई. चंद्रचूड़
- C.ए. एन. राय
- D.एस. आर. दास
उत्तर देखें
न्यायमूर्ति यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे, अर्थात लगभग सात वर्ष चार माह, जो इस पद पर किसी भी धारक का सबसे लंबा कार्यकाल है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के किस मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल इस पद पर सबसे छोटा रहा?
- A.के. एन. सिंह
- B.एम. एच. कनिया
- C.एल. एम. शर्मा
- D.कमल नारायण सिन्हा
उत्तर देखें
न्यायमूर्ति कमल नारायण सिंह केवल सत्रह दिन, 25 नवंबर से 12 दिसंबर 1991 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे, जो इस पद के इतिहास का सबसे छोटा कार्यकाल है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संविधान के अनुसार भारत के राष्ट्रपति को पद की शपथ कौन दिलाता है?
- A.लोक सभा का अध्यक्ष
- B.भारत का उपराष्ट्रपति
- C.भारत का मुख्य न्यायाधीश
- D.भारत का प्रधानमंत्री
उत्तर देखें
अनुच्छेद 60 राष्ट्रपति की शपथ का प्रारूप देता है और कहता है कि यह शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति में ली जाएगी, और उनकी अनुपस्थिति में उच्चतम न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश की उपस्थिति में।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मुख्य न्यायाधीश सहित भारत के उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश किस आयु तक पद पर रहता है?
- A.बासठ वर्ष
- B.पैंसठ वर्ष
- C.सड़सठ वर्ष
- D.सत्तर वर्ष
उत्तर देखें
अनुच्छेद 124(2) कहता है कि उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद धारण करता है, और भारत का मुख्य न्यायाधीश उसी न्यायालय का न्यायाधीश होता है, इसलिए यही सीमा उस पर भी लागू होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय संविधान का अनुच्छेद 126 निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
- A.तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति
- B.भारत के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
- C.सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का उच्चतम न्यायालय में बैठना
- D.उच्च न्यायालयों के बीच न्यायाधीशों का स्थानांतरण
उत्तर देखें
अनुच्छेद 126 कहता है कि जब भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो, या जब मुख्य न्यायाधीश अनुपस्थिति या किसी अन्य कारण से अपने कर्तव्य निभाने में असमर्थ हो, तब उस न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से जिसे राष्ट्रपति नियुक्त करे, वह ये कर्तव्य निभाएगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के मुख्य न्यायाधीशों की कौन सी जोड़ी पिता और पुत्र थी?
- A.एच. जे. कनिया और एम. एच. कनिया
- B.वाई. वी. चंद्रचूड़ और डी. वाई. चंद्रचूड़
- C.एच. आर. खन्ना और संजीव खन्ना
- D.एस. आर. दास और बी. के. मुखर्जी
उत्तर देखें
न्यायमूर्ति वाई. वी. चंद्रचूड़ 1978 से 1985 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे और उनके पुत्र न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ नवंबर 2022 में भारत के पचासवें मुख्य न्यायाधीश बने; यह एकमात्र अवसर है जब पिता और पुत्र दोनों इस पद पर रहे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में किसने शपथ ली?
- A.न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई
- B.न्यायमूर्ति संजीव खन्ना
- C.न्यायमूर्ति सूर्य कांत
- D.न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
उत्तर देखें
भारत के उच्चतम न्यायालय के अनुसार न्यायमूर्ति सूर्य कांत 24 मई 2019 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बने और 24 नवंबर 2025 को भारत के तिरेपनवें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, तथा उनकी सेवानिवृत्ति 9 फरवरी 2027 को नियत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
न्यायमूर्ति हरिलाल जेकिसुनदास कनिया। वे भारत के फेडरल कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे और 26 जनवरी 1950 को भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश बने; 6 नवंबर 1951 को अपने निधन तक वे इस पद पर रहे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति किस अनुच्छेद में है?
अनुच्छेद 124 में। यह उच्चतम न्यायालय की स्थापना करता है और कहता है कि मुख्य न्यायाधीश सहित इस न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र से नियुक्त होता है। अनुच्छेद 124(2) सेवानिवृत्ति आयु पैंसठ वर्ष तय करता है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सबसे छोटा कार्यकाल किसका रहा?
न्यायमूर्ति कमल नारायण सिंह का, जो 25 नवंबर से 12 दिसंबर 1991 तक सत्रह दिन इस पद पर रहे। सबसे लंबा कार्यकाल न्यायमूर्ति वाई. वी. चंद्रचूड़ का था, फरवरी 1978 से जुलाई 1985 तक।
क्या कोई महिला भारत की मुख्य न्यायाधीश रही है?
अब तक कोई महिला इस पद पर नहीं रही। 1989 में नियुक्त न्यायमूर्ति एम. फातिमा बीवी भारत के उच्चतम न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश थीं, और न्यायमूर्ति लीला सेठ किसी उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं।
वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
न्यायमूर्ति सूर्य कांत। भारत के उच्चतम न्यायालय के अभिलेख के अनुसार उन्होंने 24 नवंबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और उनकी सेवानिवृत्ति 9 फरवरी 2027 को नियत है। वे 24 मई 2019 को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत हुए थे।
स्रोत
- मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायाधीश: माननीय न्यायमूर्ति सूर्य कांत, भारत के मुख्य न्यायाधीश — भारत का उच्चतम न्यायालय
- भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश — भारत का उच्चतम न्यायालय
- भारत का संविधान, अनुच्छेद 124 से 128 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय





