राजभाषा और विशेष प्रावधान: अनुच्छेद 343 से 371J
संविधान के भाग 17 पर पूरे नोट्स: अनुच्छेद 343 से 351, राजभाषा अधिनियम 1963, आठवीं अनुसूची के संशोधन और भाग 21 के राज्यों से जुड़े विशेष प्रावधान।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

संविधान का भाग 17, अर्थात अनुच्छेद 343 से 351, उस प्रश्न का उत्तर देता है जिस पर संविधान सभा में तीन वर्ष बहस चली थी कि संघ का कामकाज किस भाषा में होगा। भाग 21, अर्थात अनुच्छेद 369 से 392, में अलग-अलग राज्यों के लिए लिखे गए विशेष प्रावधान हैं। परीक्षाओं में दोनों से अनुच्छेद-संख्या वाले प्रश्न बनते हैं, इसलिए हर अनुच्छेद और उसका विषय जोड़े के रूप में याद रखना चाहिए।
अनुच्छेद 343 और 344: संघ की भाषा
अनुच्छेद 343(1) देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा बनाता है और अंकों के लिए भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप निर्धारित करता है। अनुच्छेद 343(2) ने संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष तक, अर्थात 25 जनवरी 1965 तक, अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति दी थी। अनुच्छेद 343(3) संसद को यह शक्ति देता है कि वह विधि द्वारा उस अवधि के बाद भी अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखे, और संसद ने राजभाषा अधिनियम 1963 बनाकर ऐसा किया, जिसमें 1967 में संशोधन हुआ और अंग्रेजी बिना किसी समय-सीमा के सहभाषा बनी रही। शब्दावली ध्यान से पढ़ें: संविधान हिंदी को संघ की राजभाषा कहता है, राष्ट्रभाषा शब्द का प्रयोग किसी भी भाषा के लिए नहीं करता।
अनुच्छेद 344(1) के अनुसार राष्ट्रपति संविधान के प्रारंभ से पांच वर्ष और फिर दस वर्ष पूरे होने पर राजभाषा आयोग गठित करेंगे। पहला आयोग 1955 में बी. जी. खेर की अध्यक्षता में बना। अनुच्छेद 344(4) में संसद की एक समिति का प्रावधान है जिसमें तीस सदस्य होते हैं, बीस लोक सभा से और दस राज्य सभा से; 1957 की यह समिति गोविंद बल्लभ पंत की अध्यक्षता में बनी थी।
अनुच्छेद 345 से 347: राज्यों की भाषाएं
- अनुच्छेद 345: राज्य का विधानमंडल राज्य में प्रयोग होने वाली किसी एक या अधिक भाषाओं अथवा हिंदी को उस राज्य की राजभाषा के रूप में अपना सकता है; जब तक वह ऐसा न करे, राज्य के प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी चलती रहेगी।
- अनुच्छेद 346: संघ के लिए प्राधिकृत भाषा ही एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच तथा राज्य और संघ के बीच पत्राचार की भाषा होगी; दो या अधिक राज्य आपस में हिंदी के प्रयोग पर सहमत हो सकते हैं।
- अनुच्छेद 347: मांग किए जाने पर राष्ट्रपति यह निर्देश दे सकते हैं कि राज्य की जनसंख्या के पर्याप्त भाग द्वारा बोली जाने वाली किसी भाषा को उस राज्य में या उसके किसी भाग में सरकारी मान्यता दी जाए।
अनुच्छेद 348 और 349: न्यायालयों और विधियों की भाषा
अनुच्छेद 348(1) कहता है कि जब तक संसद अन्यथा उपबंध न करे, उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय की सभी कार्यवाहियां तथा विधेयकों, अधिनियमों, अध्यादेशों, आदेशों, नियमों और विनियमों के प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी में होंगे। अनुच्छेद 348(2) राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से यह अधिकार देता है कि वे उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में हिंदी या राज्य की राजभाषा के प्रयोग को प्राधिकृत करें, परंतु निर्णय, डिक्री और आदेश तब भी अंग्रेजी में ही रहेंगे, जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे। राजस्थान ने 1950, उत्तर प्रदेश ने 1969, मध्य प्रदेश ने 1971 और बिहार ने 1972 में यह अनुमति प्राप्त की थी। अनुच्छेद 349 के अनुसार प्रारंभ से पंद्रह वर्ष तक न्यायालयों की भाषा बदलने वाला विधेयक संसद में राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी से ही पुरःस्थापित किया जा सकता था।
अनुच्छेद 350, 350क, 350ख और 351
- अनुच्छेद 350: कोई भी व्यक्ति संघ या राज्य के किसी अधिकारी को अपनी शिकायत के निवारण के लिए संघ में प्रयुक्त किसी भी भाषा में आवेदन दे सकता है।
- अनुच्छेद 350क: भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के बच्चों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा; यह सातवें संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर जोड़ा गया।
- अनुच्छेद 350ख: राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के लिए विशेष अधिकारी, यह भी सातवें संशोधन अधिनियम 1956 से जुड़ा; वह भाषाई संरक्षणों से जुड़े विषयों की जांच करता है और राष्ट्रपति को रिपोर्ट देता है, जो उसे संसद के समक्ष रखवाते हैं और संबंधित राज्य को भेजते हैं।
- अनुच्छेद 351: संघ को निर्देश कि वह हिंदी के प्रसार को बढ़ाए और उसे ऐसा विकसित करे कि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके; इसके लिए हिंदुस्तानी तथा आठवीं अनुसूची की भाषाओं के रूपों और शैली को आत्मसात किया जाए और शब्दावली के लिए मुख्यतः संस्कृत से शब्द लिए जाएं।
आठवीं अनुसूची
| चरण | वर्ष | जोड़ी गई भाषाएं |
|---|---|---|
| मूल अनुसूची | 1950 | चौदह भाषाएं, जिनमें संस्कृत और उर्दू भी |
| 21वां संशोधन | 1967 | सिंधी |
| 71वां संशोधन | 1992 | कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली |
| 92वां संशोधन | 2003 | बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली |
इस प्रकार अनुसूची में अब बाईस भाषाएं हैं। यह अनुसूची अनुच्छेद 344(1) के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आयोग के सदस्य इन्हीं भाषाओं के प्रतिनिधि होते हैं, और अनुच्छेद 351 के लिए भी। आठवीं अनुसूची में स्थान मिलना न तो संघ की राजभाषा का दर्जा है और न शास्त्रीय भाषा का दर्जा, जो सरकार अलग से देती है; शास्त्रीय भाषा का दर्जा सबसे पहले 2004 में तमिल को मिला, उसके बाद संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया को, और यह सूची बाद में और बढ़ाई गई है।
भाग 21: राज्यों के लिए विशेष प्रावधान
| अनुच्छेद | राज्य | विषय |
|---|---|---|
| 371 | महाराष्ट्र और गुजरात | विदर्भ, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र और कच्छ के लिए विकास बोर्ड |
| 371क | नागालैंड | नागा रूढ़िजन्य विधि; विधि-व्यवस्था पर राज्यपाल का विशेष उत्तरदायित्व (13वां संशोधन, 1962) |
| 371ख | असम | जनजातीय क्षेत्रों के लिए विधानसभा की समिति (22वां संशोधन, 1969) |
| 371ग | मणिपुर | विधानसभा की पर्वतीय क्षेत्र समिति (27वां संशोधन, 1971) |
| 371घ और 371ङ | आंध्र प्रदेश और तेलंगाना | रोजगार और शिक्षा में समान अवसर, प्रशासनिक अधिकरण तथा एक केंद्रीय विश्वविद्यालय (32वां संशोधन, 1973) |
| 371च | सिक्किम | राज्य के रूप में विलय से जुड़े प्रावधान (36वां संशोधन, 1975) |
| 371छ | मिजोरम | मिजो रूढ़िजन्य विधि और सामाजिक प्रथाएं (53वां संशोधन, 1986) |
| 371ज | अरुणाचल प्रदेश | विधि-व्यवस्था पर राज्यपाल का विशेष उत्तरदायित्व (55वां संशोधन, 1986) |
| 371झ | गोवा | कम से कम तीस सदस्यों की विधानसभा (56वां संशोधन, 1987) |
| 371ञ | कर्नाटक | हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए विकास बोर्ड (98वां संशोधन, 2012) |
जम्मू और कश्मीर से जुड़ा अनुच्छेद 370 अगस्त 2019 में निष्प्रभावी कर दिया गया और राज्य को जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख नामक दो संघ राज्यक्षेत्रों में पुनर्गठित किया गया। इसी भाग के अनुच्छेद 369, 372 और 392 क्रमशः राज्य सूची के विषयों पर संसद की अस्थायी शक्ति, विद्यमान विधियों के बने रहने और कठिनाइयों को दूर करने की राष्ट्रपति की शक्ति से संबंधित हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन तरह के प्रश्न बनते हैं। पहला, सीधा अनुच्छेद मिलान: 343 संघ की राजभाषा, 344 आयोग और समिति, 345 राज्य की भाषा, 348 न्यायालयों की भाषा, 350क मातृभाषा में शिक्षा, 350ख विशेष अधिकारी, 351 हिंदी का विकास। दूसरा, आठवीं अनुसूची में भाषा जोड़ने वाला संशोधन, जिसमें 21वां (सिंधी), 71वां (कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली) और 92वां (बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली) आपस में बदलकर विकल्प बनाए जाते हैं। तीसरा, 371 श्रृंखला का राज्यों से मिलान, जिसमें 371क नागालैंड और 371छ मिजोरम सबसे पसंदीदा जोड़ी है। मुख्य भूलें हैं हिंदी को राष्ट्रभाषा कह देना, उच्च न्यायालय के निर्णयों के लिए अंग्रेजी की अनिवार्यता भूल जाना और 1963 के अधिनियम को 1967 के संशोधन से मिला देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भाग और अनुच्छेद | भाग 17, अनुच्छेद 343 से 351 |
|---|---|
| संघ की राजभाषा | देवनागरी लिपि में हिंदी, अनुच्छेद 343(1) |
| अंग्रेजी की पंद्रह वर्ष की अवधि | 25 जनवरी 1965 को समाप्त, अनुच्छेद 343(2) |
| अंग्रेजी जारी रखने वाला अधिनियम | राजभाषा अधिनियम 1963, संशोधन 1967 |
| पहला राजभाषा आयोग | 1955, अध्यक्ष बी. जी. खेर |
| संसद की समिति | तीस सदस्य: बीस लोक सभा और दस राज्य सभा, अनुच्छेद 344(4) |
| न्यायालयों की भाषा | अंग्रेजी, अनुच्छेद 348(1) |
| मातृभाषा में शिक्षा | अनुच्छेद 350क, सातवां संशोधन अधिनियम 1956 |
| भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी | अनुच्छेद 350ख, नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा |
| हिंदी की शब्दावली | मुख्यतः संस्कृत से, अनुच्छेद 351 |
| आठवीं अनुसूची की भाषाएं | 1950 में चौदह, 92वें संशोधन 2003 के बाद बाईस |
| नागालैंड और मिजोरम | अनुच्छेद 371क (1962) और 371छ (1986) |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 343 किससे संबंधित है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.संघ की राजभाषा
- C.राज्यपाल का विशेष अभिभाषण
- D.संसद का गठन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, संघ की राजभाषा है। अनुच्छेद 343 संविधान के भाग 17 का पहला अनुच्छेद है और इसके खंड (1) में कहा गया है कि संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी तथा सरकारी प्रयोजनों के लिए अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा। खंड (2) ने 26 जनवरी 1950 से पंद्रह वर्ष तक अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति दी और खंड (3) ने संसद को उसके बाद भी अंग्रेजी जारी रखने की शक्ति दी, जिसका प्रयोग राजभाषा अधिनियम 1963 बनाकर किया गया। विकल्प A गलत है क्योंकि राष्ट्रपति से संबंधित अनुच्छेद 52 से 62 हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि राज्यपाल का विशेष अभिभाषण अनुच्छेद 176 में है, जो संसद के लिए अनुच्छेद 87 के समान है। विकल्प D गलत है क्योंकि संसद का गठन अनुच्छेद 79 में दिया गया है, जिसके अनुसार संसद में राष्ट्रपति और दोनों सदन होते हैं।
भारतीय संविधान के किस भाग में राजभाषा से संबंधित उपबंध हैं?
- A.भाग 16
- B.भाग 17
- C.भाग 18
- D.भाग 19
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व्याख्या
सही उत्तर B, भाग 17 है। इस भाग का शीर्षक राजभाषा है और यह अनुच्छेद 343 से 351 तक फैला है, जिसमें चार अध्याय हैं: संघ की भाषा, प्रादेशिक भाषाएं, उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की भाषा, और विशेष निदेश। विकल्प A गलत है क्योंकि भाग 16 में अनुच्छेद 330 से 342 तक कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध हैं, जिनमें अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण आता है। विकल्प C गलत है क्योंकि भाग 18, अर्थात अनुच्छेद 352 से 360, आपात उपबंधों से संबंधित है। विकल्प D गलत है क्योंकि भाग 19, अनुच्छेद 361 से 367, में प्रकीर्ण उपबंध हैं, जैसे राष्ट्रपति और राज्यपालों को विधिक कार्यवाही से संरक्षण। इन चार भागों का क्रम याद रखने से ऐसे अनेक प्रश्न स्वयं हल हो जाते हैं।
सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
- A.पंद्रहवां संशोधन अधिनियम, 1963
- B.इक्कीसवां संशोधन अधिनियम, 1967
- C.इकहत्तरवां संशोधन अधिनियम, 1992
- D.बानवेवां संशोधन अधिनियम, 2003
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व्याख्या
सही उत्तर B, इक्कीसवां संशोधन अधिनियम 1967 है। संविधान लागू होने के बाद आठवीं अनुसूची में जोड़ी गई पहली भाषा सिंधी थी, जिससे मूल चौदह भाषाओं की सूची पंद्रह हो गई। विकल्प A गलत है क्योंकि 1963 का पंद्रहवां संशोधन उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से संबंधित था और उसने उनकी सेवानिवृत्ति आयु साठ से बासठ वर्ष की थी। विकल्प C गलत है क्योंकि 1992 के इकहत्तरवें संशोधन से तीन भाषाएं कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली जुड़ीं और सूची अठारह हो गई। विकल्प D गलत है क्योंकि 2003 के बानवेवें संशोधन से अंतिम चार भाषाएं बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जुड़ीं और सूची बाईस हो गई। चौदह, पंद्रह, अठारह और बाईस का यह क्रम याद रखना उपयोगी है, क्योंकि प्रश्न में संशोधन की जगह किसी चरण पर भाषाओं की संख्या भी पूछी जाती है।
बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को आठवीं अनुसूची में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
- A.इकहत्तरवां संशोधन अधिनियम, 1992
- B.छियासीवां संशोधन अधिनियम, 2002
- C.बानवेवां संशोधन अधिनियम, 2003
- D.सौवां संशोधन अधिनियम, 2015
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व्याख्या
सही उत्तर C, बानवेवां संशोधन अधिनियम 2003 है। इसी संशोधन से बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जोड़ी गईं और आठवीं अनुसूची बाईस भाषाओं तक पहुंची, जहां वह आज भी है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1992 के इकहत्तरवें संशोधन से कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली जोड़ी गई थीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 2002 के छियासीवें संशोधन ने अनुच्छेद 21क जोड़कर छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाया और अनुच्छेद 45 में संशोधन किया। विकल्प D गलत है क्योंकि 2015 के सौवें संशोधन ने बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा समझौते को लागू करने के लिए पहली अनुसूची में परिवर्तन किया। ध्यान रखें कि मैथिली बिहार की, डोगरी जम्मू की तथा बोडो और संथाली जनजातीय भाषाएं हैं, इसलिए प्रश्न में भाषा के स्थान पर राज्य भी पूछा जा सकता है।
भाषाई अल्पसंख्यकों से संबंधित कौन-से दो अनुच्छेद सातवें संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा जोड़े गए?
- A.अनुच्छेद 343 और 344
- B.अनुच्छेद 345 और 347
- C.अनुच्छेद 350क और 350ख
- D.अनुच्छेद 351 और 352
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 350क और 350ख है। ये दोनों सातवें संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा जोड़े गए, जिसने राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर राज्यों का पुनर्गठन किया था। अनुच्छेद 350क राज्य से अपेक्षा करता है कि वह भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के बच्चों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा दे, और अनुच्छेद 350ख राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के लिए विशेष अधिकारी का प्रावधान करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 343 और 344 मूल संविधान का भाग हैं। विकल्प B भी इसी कारण गलत है, क्योंकि राज्यों की भाषाओं से जुड़े अनुच्छेद 345 से 347 प्रारंभ से ही थे। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 351 मूल है और आपात उद्घोषणा से जुड़ा अनुच्छेद 352 भाग 18 में है, जो 1956 में नहीं जोड़ा गया था।
अनुच्छेद 344(4) के अंतर्गत राजभाषा पर संसद की समिति में कितने सदस्य होते हैं?
- A.बीस सदस्य: पंद्रह लोक सभा से और पांच राज्य सभा से
- B.तीस सदस्य: बीस लोक सभा से और दस राज्य सभा से
- C.तीस सदस्य: दोनों सदनों से पंद्रह-पंद्रह
- D.इक्कीस सदस्य: चौदह लोक सभा से और सात राज्य सभा से
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, तीस सदस्य, बीस लोक सभा से और दस राज्य सभा से है। अनुच्छेद 344(4) में इस समिति का प्रावधान है, जो अनुच्छेद 344(1) के अंतर्गत गठित राजभाषा आयोग की सिफारिशों की जांच करती है और अपनी राय राष्ट्रपति को देती है। दोनों सदनों के बीच दो और एक का यह अनुपात संविधान में संयुक्त निकायों के लिए अपनाई गई सामान्य पद्धति है। विकल्प A में संख्या कम बताई गई है और वह कल्पित है। विकल्प C में कुल संख्या सही है पर सदनों का बंटवारा गलत है, और यही इस प्रश्न का सबसे आम जाल है। विकल्प D में दी गई इक्कीस सदस्यों की संरचना संसदीय स्थायी समितियों के ढांचे जैसी लगती है, परंतु अनुच्छेद 344 में ऐसा कुछ नहीं है। 1957 में बनी पहली समिति के अध्यक्ष गोविंद बल्लभ पंत थे और 1955 के आयोग के अध्यक्ष बी. जी. खेर थे।
अनुच्छेद 348(2) के अंतर्गत राज्यपाल उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में हिंदी के प्रयोग की अनुमति दे सकते हैं। इस शक्ति के बारे में कौन-सा कथन सही है?
- A.इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है और निर्णय, डिक्री तथा आदेश अंग्रेजी में ही रहेंगे
- B.इसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश की सहमति आवश्यक है और कुछ भी अपवर्जित नहीं है
- C.इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति आवश्यक है और यह निर्णयों पर भी लागू होती है
- D.इसके लिए राज्य विधानमंडल का संकल्प आवश्यक है और यह केवल रिट याचिकाओं पर लागू होती है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A है। अनुच्छेद 348(2) राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से यह अधिकार देता है कि वे उस राज्य में मुख्य पीठ रखने वाले उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में हिंदी या राज्य के सरकारी प्रयोजनों में प्रयुक्त किसी अन्य भाषा का प्रयोग प्राधिकृत करें। इस खंड में निर्णय, डिक्री और आदेश स्पष्ट रूप से अपवर्जित हैं, जो संसद द्वारा विधि बनाए जाने तक अंग्रेजी में ही रहेंगे। विकल्प B गलत है क्योंकि आवश्यक सहमति राष्ट्रपति की है, मुख्य न्यायाधीश की नहीं। विकल्प C में प्राधिकारी सही है पर अपवर्जन छोड़ दिया गया है, और परीक्षक ठीक यही अंतर जांचते हैं। विकल्प D एक कल्पित प्रक्रिया है, क्योंकि राज्य विधानमंडल के किसी संकल्प की आवश्यकता नहीं है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार ने यह अनुमति प्राप्त की है।
अनुच्छेद 351 के अनुसार हिंदी को अपनी शब्दावली मुख्यतः किस भाषा से लेनी चाहिए?
- A.हिंदुस्तानी
- B.फारसी और अरबी
- C.संस्कृत
- D.अंग्रेजी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, संस्कृत है। अनुच्छेद 351 संघ को निदेश देता है कि वह हिंदी भाषा के प्रसार को बढ़ाए और उसका इस प्रकार विकास करे कि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके। अनुच्छेद कहता है कि यह कार्य हिंदुस्तानी तथा आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं के रूप, शैली और पदों को आत्मसात करके किया जाए, और शब्दावली के लिए जहां आवश्यक या वांछनीय हो, मुख्यतः संस्कृत से और गौणतः अन्य भाषाओं से शब्द लिए जाएं। विकल्प A गलत है क्योंकि हिंदुस्तानी का उल्लेख रूप और शैली के लिए है, शब्दावली के लिए नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि फारसी और अरबी का नाम इस अनुच्छेद में नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 351 में अंग्रेजी का कोई स्थान नहीं है; उसकी भूमिका अनुच्छेद 343(3) और राजभाषा अधिनियम 1963 से आती है।
नागालैंड राज्य से संबंधित विशेष उपबंध संविधान के किस अनुच्छेद में है?
- A.अनुच्छेद 370
- B.अनुच्छेद 371क
- C.अनुच्छेद 371च
- D.अनुच्छेद 371छ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, अनुच्छेद 371क है। यह तेरहवें संशोधन अधिनियम 1962 द्वारा नागालैंड के राज्य बनने के समय जोड़ा गया था और यह नागा रूढ़िजन्य विधि तथा प्रक्रिया, भूमि और उसके संसाधनों के स्वामित्व और हस्तांतरण की रक्षा करता है तथा राज्य में विधि-व्यवस्था के लिए राज्यपाल को विशेष उत्तरदायित्व देता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर से जुड़ा अस्थायी उपबंध था, जिसे अगस्त 2019 में निष्प्रभावी कर दिया गया। विकल्प C गलत है क्योंकि छत्तीसवें संशोधन 1975 द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 371च सिक्किम के राज्य बनने से जुड़े उपबंध रखता है। विकल्प D गलत है क्योंकि तिरेपनवें संशोधन 1986 द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 371छ मिजोरम के लिए समान प्रावधान है और मिजो रूढ़िजन्य विधि तथा सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं की रक्षा करता है। विकल्पों में नागालैंड और मिजोरम की यही जोड़ी सबसे अधिक बदली जाती है।
अट्ठानवेवें संशोधन अधिनियम, 2012 द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 371ञ किस क्षेत्र के लिए विशेष विकास बोर्ड का प्रावधान करता है?
- A.महाराष्ट्र का विदर्भ
- B.कर्नाटक का हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र
- C.गुजरात का सौराष्ट्र
- D.असम का बोडोलैंड क्षेत्र
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, कर्नाटक का हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र है। अट्ठानवेवें संशोधन अधिनियम 2012 द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 371ञ इस पिछड़े क्षेत्र के लिए अलग विकास बोर्ड, तथा वहां के मूल निवासियों के लिए शिक्षा और राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण का प्रावंध करता है, और यह 371 श्रृंखला में सबसे नया जोड़ है। विकल्प A गलत है क्योंकि विदर्भ अनुच्छेद 371 के अंतर्गत आता है, जो महाराष्ट्र में विदर्भ और मराठवाड़ा के लिए विकास बोर्ड देता है। विकल्प C इसी कारण गलत है, क्योंकि सौराष्ट्र और कच्छ भी अनुच्छेद 371 में नामित गुजरात के क्षेत्र हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र छठी अनुसूची के अंतर्गत एक स्वायत्त परिषद है, भाग 21 के अंतर्गत नहीं, और भाग 21 में असम का विशेष उपबंध अनुच्छेद 371ख है, जो जनजातीय क्षेत्रों के लिए विधानसभा की समिति से संबंधित है।
संघ के सरकारी प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग किस विधि के कारण जारी है?
- A.राजभाषा अधिनियम, 1963
- B.राजभाषा अधिनियम, 1955
- C.भाषा अधिनियम, 1965
- D.राजभाषा नियम, 1976
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, राजभाषा अधिनियम 1963 है। अनुच्छेद 343(2) ने अंग्रेजी को केवल पंद्रह वर्ष, अर्थात 25 जनवरी 1965 तक, की अनुमति दी थी और अनुच्छेद 343(3) ने उसे विधि द्वारा जारी रखने का कार्य संसद पर छोड़ दिया था। संसद ने 1963 में राजभाषा अधिनियम बनाया और 1967 के संशोधन से यह स्पष्ट हुआ कि संघ के सरकारी प्रयोजनों तथा संसद के कार्य के लिए अंग्रेजी हिंदी के साथ सहभाषा के रूप में तब तक बनी रहेगी जब तक हिंदी न अपनाने वाले प्रत्येक राज्य का विधानमंडल उसे समाप्त करने का संकल्प पारित न कर दे। विकल्प B गलत है क्योंकि 1955 में बी. जी. खेर की अध्यक्षता में पहला राजभाषा आयोग बना था, कोई अधिनियम नहीं। विकल्प C एक कल्पित नाम है। विकल्प D गलत है क्योंकि राजभाषा नियम 1976 इसी अधिनियम के अधीन बने अधीनस्थ नियम हैं, जो पत्राचार के लिए देश को क, ख और ग क्षेत्रों में बांटते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है?
नहीं। अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा कहता है और संविधान किसी भी भाषा के लिए राष्ट्रभाषा शब्द का प्रयोग नहीं करता। राजभाषा अधिनियम 1963 के अंतर्गत अंग्रेजी सहभाषा के रूप में बनी हुई है।
आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाएं हैं?
बाईस। 1950 में अनुसूची में चौदह भाषाएं थीं; 1967 में 21वें संशोधन से सिंधी, 1992 में 71वें संशोधन से कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली तथा 2003 में 92वें संशोधन से बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली जोड़ी गईं।
क्या उच्च न्यायालय हिंदी में निर्णय दे सकता है?
अनुच्छेद 348(2) के अंतर्गत राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में हिंदी या राज्य की भाषा के प्रयोग की अनुमति दे सकते हैं, परंतु निर्णय, डिक्री और आदेश तब तक अंग्रेजी में ही होंगे जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे।
नागालैंड से संबंधित विशेष प्रावधान कौन-सा अनुच्छेद है?
अनुच्छेद 371क, जो तेरहवें संशोधन अधिनियम 1962 द्वारा जोड़ा गया। यह नागा रूढ़िजन्य विधि और भूमि पर अधिकारों की रक्षा करता है तथा राज्य में विधि-व्यवस्था के लिए राज्यपाल को विशेष उत्तरदायित्व देता है।
अनुच्छेद 350क और 350ख किस संशोधन से जोड़े गए?
सातवें संशोधन अधिनियम 1956 से, जो राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर राज्यों के पुनर्गठन के समय पारित हुआ। अनुच्छेद 350क प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा और अनुच्छेद 350ख भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी का प्रावधान करता है।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग 17: राजभाषा, अनुच्छेद 343 से 351 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान, भाग 21: अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधान — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- राजभाषा से संबंधित संवैधानिक उपबंध — राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय





