अनुच्छेद 370: विशेष दर्जा, निरसन और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन
अनुच्छेद 370 के परीक्षोपयोगी नोट्स: विलय-पत्र, अनुच्छेद 35क, 5 अगस्त 2019 के आदेश, पुनर्गठन अधिनियम, दो केंद्र-शासित प्रदेश और 2023 का सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 लगभग सत्तर वर्षों तक तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को एक विशेष संवैधानिक स्थिति देता रहा। 5 अगस्त 2019 को इसके प्रभाव को समाप्त करना और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के द्वारा राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों में बाँटना देश के राजनीतिक नक्शे का बड़ा बदलाव था। इसलिए पुराना प्रावधान और नई व्यवस्था, दोनों सामान्य अध्ययन के पर्चों में नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इन नोट्स में 1947 का विलय, अनुच्छेद 370 की वास्तविक व्यवस्था, अनुच्छेद 35क, 2019 के आदेश और अधिनियम, दोनों केंद्र-शासित प्रदेश तथा दिसंबर 2023 का सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय
अगस्त 1947 में जब ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ, जम्मू-कश्मीर की रियासत पर डोगरा वंश के महाराजा हरि सिंह का शासन था। पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावरों के कश्मीर घाटी में घुसने के बाद उन्होंने 26 अक्टूबर 1947 को विलय-पत्र (इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन) पर हस्ताक्षर किए और गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने अगले दिन उसे स्वीकार किया। अन्य रियासतों के विलय-पत्रों की तरह इसने रक्षा, विदेशी मामले और संचार संघ को सौंपे और शेष संबंध बाद में तय करने के लिए छोड़ दिए। संविधान सभा में एन. गोपालस्वामी अय्यंगार द्वारा प्रस्तुत मसौदे का अनुच्छेद 306क ही अंगीकृत संविधान में अनुच्छेद 370 बना।
अनुच्छेद 370 की व्यवस्था
अनुच्छेद 370 संविधान के भाग 21 में था, जिसका शीर्षक अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध है, और इसका स्वयं का सीमांत शीर्षक जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध था। इसकी व्यवस्था के चार अंग थे।
- अनुच्छेद 1, जो भारत का नाम और राज्यक्षेत्र बताता है, तथा स्वयं अनुच्छेद 370 राज्य पर सीधे लागू होते थे; शेष संविधान स्वयं लागू नहीं होता था।
- संसद विलय-पत्र में सौंपे गए विषयों पर कानून बना सकती थी; संघ सूची के अन्य विषयों पर केवल राज्य सरकार की सहमति से।
- संविधान के अन्य उपबंध राज्य पर अनुच्छेद 370(1)(घ) के अंतर्गत राष्ट्रपति के आदेश से, उसी सहमति के साथ, लागू किए जा सकते थे।
- अनुच्छेद 370(3) के अनुसार राष्ट्रपति, राज्य की संविधान सभा की सिफारिश पर, लोक अधिसूचना द्वारा यह घोषित कर सकते थे कि अनुच्छेद प्रवर्तन में नहीं रहेगा।
अनुच्छेद 35क और राज्य का अपना संविधान
संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू होना) आदेश, 1954 ने संविधान का बड़ा भाग राज्य पर लागू किया और भाग 3 में अनुच्छेद 35क जोड़ा। अनुच्छेद 35क उन राज्य कानूनों की रक्षा करता था जो स्थायी निवासी की परिभाषा देते थे और उन्हें अचल संपत्ति, राज्य सेवा, छात्रवृत्ति तथा बसावट के विशेष अधिकार देते थे; इन कानूनों को मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती थी। राज्य का अपना संविधान भी था, जिसे उसकी संविधान सभा ने 17 नवंबर 1956 को अंगीकृत किया और जो 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ; उसी दिन वह सभा भंग हो गई। राज्य का अलग झंडा था, विधानसभा का कार्यकाल छह वर्ष का था, और भारतीय दंड संहिता के स्थान पर रणबीर दंड संहिता लागू थी।
5 अगस्त 2019 के दो कदम
5 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति ने संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू होना) आदेश, 2019 जारी किया, जिसने 1954 के आदेश का अधिक्रमण करते हुए पूरा भारतीय संविधान राज्य पर लागू कर दिया और इसी के साथ अनुच्छेद 35क भी समाप्त हो गया। उसी दिन संसद में यह सांविधिक संकल्प रखा गया कि अनुच्छेद 370 के सभी खंड प्रवर्तन में न रहें। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक राज्यसभा में 5 अगस्त और लोकसभा में 6 अगस्त 2019 को पारित हुआ तथा 9 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। अधिनियम जिस नियत दिन से प्रभावी हुआ वह 31 अक्टूबर 2019 था, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है।
दो केंद्र-शासित प्रदेश
अधिनियम ने राज्य को दो भागों में बाँटा: जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश, जिसमें विधानसभा है, और लद्दाख केंद्र-शासित प्रदेश, जिसमें विधानमंडल नहीं है और जो लेह तथा कारगिल दो जिलों से बनाया गया। गिरीश चंद्र मुर्मू जम्मू-कश्मीर के और राधा कृष्ण माथुर लद्दाख के पहले उपराज्यपाल बने; दोनों ने 31 अक्टूबर 2019 को पदभार संभाला। इस प्रकार उस दिन से भारत में अट्ठाईस राज्य और नौ केंद्र-शासित प्रदेश हुए, और 26 जनवरी 2020 को दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव के विलय के बाद केंद्र-शासित प्रदेश आठ रह गए। जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश में पुलिस और लोक व्यवस्था उपराज्यपाल के माध्यम से संघ के पास हैं, जबकि भूमि निर्वाचित सरकार के पास है, जो दिल्ली की व्यवस्था के उलट है। न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले परिसीमन आयोग ने, जिसका अंतिम आदेश मई 2022 में आया, नब्बे विधानसभा सीटें तय कीं, जिनमें तैंतालीस जम्मू संभाग और सैंतालीस कश्मीर संभाग में हैं, नौ सीटें अनुसूचित जनजातियों और सात अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित कीं, तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों के लिए चौबीस सीटें रिक्त छोड़ीं। विधानसभा चुनाव सितंबर-अक्टूबर 2024 में हुए, जो 2014 के बाद पहले चुनाव थे।
| विषय | 5 अगस्त 2019 से पहले | 31 अक्टूबर 2019 के बाद |
|---|---|---|
| स्थिति | अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त राज्य | दो केंद्र-शासित प्रदेश |
| संविधान | अपना संविधान और राज्य ध्वज | केवल भारत का संविधान |
| निवासी | अनुच्छेद 35क से संरक्षित स्थायी निवासी | अनुच्छेद 35क समाप्त |
| दंड विधि | रणबीर दंड संहिता | केंद्रीय दंड विधियाँ |
| विधानसभा कार्यकाल | छह वर्ष | पाँच वर्ष |
2023 का सर्वोच्च न्यायालय निर्णय
इन री: आर्टिकल 370 ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन मामले में 11 दिसंबर 2023 को मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने राष्ट्रपति के आदेश और अनुच्छेद 370 के निरसन को वैध ठहराया। न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 370 संक्रमणकाल के लिए एक अस्थायी उपबंध था; भारत में विलय के बाद जम्मू-कश्मीर के पास आंतरिक संप्रभुता का कोई अंश शेष नहीं रहा; राज्य की संविधान सभा के भंग होने के बाद भी अनुच्छेद 370(3) की शक्ति बनी रही; और लद्दाख को केंद्र-शासित प्रदेश बनाना वैध था। न्यायालय ने यह निर्देश भी दिया कि जम्मू-कश्मीर को यथाशीघ्र राज्य का दर्जा लौटाया जाए और विधानसभा चुनाव 30 सितंबर 2024 तक कराए जाएँ।
भाग 21 के अन्य विशेष उपबंध
भाग 21 केवल अनुच्छेद 370 तक सीमित नहीं है। अनुच्छेद 371 और उसके बाद के अनुच्छेद अन्य राज्यों के लिए विशेष उपबंध देते हैं, और परीक्षक इन्हें अनुच्छेद 370 के साथ मिलान वाले प्रश्नों में रखते हैं: नगालैंड के लिए 371क, असम के लिए 371ख, मणिपुर के लिए 371ग, आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के लिए 371घ, सिक्किम के लिए 371च, मिजोरम के लिए 371छ, अरुणाचल प्रदेश के लिए 371ज और हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए 371झ। अनुच्छेद 370 के विपरीत ये उपबंध आज भी प्रवर्तन में हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षक तिथियों और संख्याओं पर टिके रहते हैं: अनुच्छेद 370 किस भाग में था, विलय-पत्र की तिथि, स्थायी निवासियों से जुड़ा अनुच्छेद, 31 अक्टूबर 2019 का नियत दिन, किस केंद्र-शासित प्रदेश को विधानसभा नहीं मिली, और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का वर्ष। कथन आधारित प्रश्नों में दो जाल हैं। पहला, 5 अगस्त 2019 (राष्ट्रपति का आदेश), 9 अगस्त (स्वीकृति) और 31 अक्टूबर (प्रवर्तन) का अंतर। दूसरा, अनुच्छेद 370 को अनुच्छेद 371 तथा उसके उप-अनुच्छेदों से मिला देना, जो नगालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और हैदराबाद-कर्नाटक के लिए आज भी प्रवर्तन में हैं। तीसरा पसंदीदा बिंदु दिल्ली से तुलना है: जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश में भूमि निर्वाचित सरकार के पास और पुलिस संघ के पास है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संविधान का भाग | भाग 21, अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध |
|---|---|
| विलय-पत्र | 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह द्वारा हस्ताक्षरित; 27 अक्टूबर 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा स्वीकृत |
| मसौदा तैयार किया | एन. गोपालस्वामी अय्यंगार ने, मसौदा संविधान के अनुच्छेद 306क के रूप में |
| स्थायी निवासी | अनुच्छेद 35क, 14 मई 1954 के राष्ट्रपति आदेश से जोड़ा गया |
| राज्य का संविधान | 17 नवंबर 1956 को अंगीकृत; 26 जनवरी 1957 को लागू |
| 2019 का राष्ट्रपति आदेश | संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू होना) आदेश, 2019, दिनांक 5 अगस्त 2019 |
| पुनर्गठन अधिनियम | 5 और 6 अगस्त 2019 को पारित; 9 अगस्त 2019 को स्वीकृति |
| नियत दिन | 31 अक्टूबर 2019 |
| विधानमंडल वाला केंद्र-शासित प्रदेश | जम्मू-कश्मीर; विधानसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष |
| विधानमंडल रहित केंद्र-शासित प्रदेश | लद्दाख, लेह और कारगिल जिलों के साथ |
| पहले उपराज्यपाल | गिरीश चंद्र मुर्मू (जम्मू-कश्मीर) और राधा कृष्ण माथुर (लद्दाख) |
| 2022 का परिसीमन | 90 सीटें: 43 जम्मू, 47 कश्मीर; 9 अनुसूचित जनजाति और 7 अनुसूचित जाति; पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों की 24 सीटें रिक्त |
| सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय | इन री: आर्टिकल 370, 11 दिसंबर 2023, मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की पीठ |
| राज्य ध्वज और दंड संहिता | अलग राज्य ध्वज और रणबीर दंड संहिता, दोनों 2019 में समाप्त |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 संविधान के किस भाग में रखा गया था?
- A.भाग 18
- B.भाग 21
- C.भाग 15
- D.भाग 19
उत्तर देखें
अनुच्छेद 370 संविधान के भाग 21 का अनुच्छेद था, जिसका शीर्षक अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध है, और इसका सीमांत शीर्षक जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जम्मू-कश्मीर रियासत के विलय-पत्र पर महाराजा हरि सिंह ने किस तिथि को हस्ताक्षर किए?
- A.15 अगस्त 1947
- B.26 अक्टूबर 1947
- C.27 अक्टूबर 1948
- D.26 जनवरी 1950
उत्तर देखें
अक्टूबर 1947 के तीसरे सप्ताह में पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावर कश्मीर घाटी में घुस आए, जिसके बाद डोगरा वंश के महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए; गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने अगले दिन उसे स्वीकार किया और भारतीय सेना को श्रीनगर पहुँचाया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1954 के राष्ट्रपति के आदेश से जोड़ा गया वह कौन-सा अनुच्छेद था जो जम्मू-कश्मीर विधानमंडल को स्थायी निवासी परिभाषित करने और उन्हें विशेष अधिकार देने की शक्ति देता था?
- A.अनुच्छेद 35क
- B.अनुच्छेद 371क
- C.अनुच्छेद 35ख
- D.अनुच्छेद 370क
उत्तर देखें
राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 370(1)(घ) के अंतर्गत जारी संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू होना) आदेश, 1954 ने भाग 3 के अंत में अनुच्छेद 35क जोड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 अपने नियत दिन से प्रभावी हुआ। वह दिन कौन-सा था?
- A.5 अगस्त 2019
- B.9 अगस्त 2019
- C.31 अक्टूबर 2019
- D.26 जनवरी 2020
उत्तर देखें
अधिनियम में एक नियत दिन तय किया गया था जिस दिन जम्मू-कश्मीर राज्य समाप्त होकर दो केंद्र-शासित प्रदेश अस्तित्व में आते; संघ ने वह दिन 31 अक्टूबर 2019 अधिसूचित किया, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है और राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 से बने दो केंद्र-शासित प्रदेशों में से किसे विधानसभा नहीं दी गई?
- A.जम्मू-कश्मीर
- B.लद्दाख
- C.दोनों को
- D.किसी को नहीं
उत्तर देखें
अधिनियम ने लद्दाख केंद्र-शासित प्रदेश बिना विधानमंडल के बनाया, जिसका प्रशासन उपराज्यपाल करता है और जो लेह तथा कारगिल दो जिलों से बना; इसके पहले उपराज्यपाल राधा कृष्ण माथुर थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जम्मू-कश्मीर की अपनी संविधान सभा द्वारा बनाया गया राज्य का संविधान कब लागू हुआ?
- A.17 नवंबर 1956
- B.26 जनवरी 1957
- C.14 मई 1954
- D.26 जनवरी 1950
उत्तर देखें
जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा ने राज्य का संविधान 17 नवंबर 1956 को अंगीकृत किया और वह 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ, जिस दिन वह सभा स्वयं भंग हो गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 370(3) के अंतर्गत राष्ट्रपति यह घोषित कर सकते थे कि अनुच्छेद प्रवर्तन में नहीं रहेगा, किसकी सिफारिश पर?
- A.संसद के दोनों सदन
- B.राज्य के राज्यपाल
- C.राज्य की संविधान सभा
- D.भारत का सर्वोच्च न्यायालय
उत्तर देखें
अनुच्छेद 370(3) के परंतुक में कहा गया था कि राष्ट्रपति अनुच्छेद को समाप्त करने की लोक अधिसूचना केवल जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिश पर जारी कर सकते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 370 के प्रवर्तन में रहते हुए भारतीय संविधान के कौन-से उपबंध जम्मू-कश्मीर राज्य पर राज्य सरकार की सहमति के बिना सीधे लागू होते थे?
- A.अनुच्छेद 1 और 370
- B.अनुच्छेद 1 और 3
- C.अनुच्छेद 370 और 371
- D.अनुच्छेद 1, 3 और 370
उत्तर देखें
अनुच्छेद 370(1)(ग) के अनुसार अनुच्छेद 1, जो भारत को राज्यों का संघ घोषित करता है और पहली अनुसूची में उसका राज्यक्षेत्र गिनाता है, तथा स्वयं अनुच्छेद 370 राज्य पर लागू होते थे; शेष सब कुछ राज्य सरकार की सहमति से बने राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से ही पहुँच सकता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →जम्मू-कश्मीर के लिए गठित परिसीमन आयोग, जिसके 2022 के अंतिम आदेश ने नब्बे विधानसभा सीटें तय कीं, की अध्यक्षता किसने की?
- A.न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई
- B.न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ
- C.न्यायमूर्ति आर. सी. लाहोटी
- D.न्यायमूर्ति दीपक वर्मा
उत्तर देखें
सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश के रूप में उन्होंने मार्च 2020 में जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश के लिए गठित परिसीमन आयोग की अध्यक्षता की, जिसका अंतिम आदेश मई 2022 में आया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 के निरसन को किस माह और वर्ष के निर्णय में वैध ठहराया?
- A.अगस्त 2019
- B.मार्च 2020
- C.दिसंबर 2023
- D.जुलाई 2024
उत्तर देखें
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने इन री: आर्टिकल 370 ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन मामले का निर्णय 11 दिसंबर 2023 को दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या अनुच्छेद 370 एक अस्थायी उपबंध था?
हाँ। यह भाग 21 में था, जिसका शीर्षक अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध है, और इसका सीमांत शीर्षक इसे जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध कहता था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी 11 दिसंबर 2023 के निर्णय में यही कहा कि यह अनुच्छेद विलय से पूर्ण एकीकरण तक के संक्रमणकाल के लिए था।
अनुच्छेद 35क क्या करता था?
14 मई 1954 के राष्ट्रपति आदेश से जोड़ा गया अनुच्छेद 35क उन राज्य कानूनों की रक्षा करता था जो जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी परिभाषित करते थे और उन्हें अचल संपत्ति, राज्य सेवा, छात्रवृत्ति तथा बसावट के विशेष अधिकार देते थे; इन कानूनों को मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती थी। 5 अगस्त 2019 के आदेश के साथ यह समाप्त हो गया।
कितने केंद्र-शासित प्रदेश बने और किसमें विधानसभा है?
दो। जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश, जिसमें पाँच वर्ष के कार्यकाल वाली विधानसभा और मंत्रिपरिषद है, तथा लद्दाख केंद्र-शासित प्रदेश, जिसमें विधानमंडल नहीं है और जिसका प्रशासन उपराज्यपाल लेह तथा कारगिल जिलों के साथ करता है।
31 अक्टूबर 2019 के बाद भारत में कितने राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश थे?
अट्ठाईस राज्य और नौ केंद्र-शासित प्रदेश। 26 जनवरी 2020 को दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव को एक केंद्र-शासित प्रदेश में मिला देने के बाद केंद्र-शासित प्रदेशों की संख्या आठ रह गई।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य के दर्जे और चुनाव पर क्या निर्देश दिया?
11 दिसंबर 2023 के निर्णय में न्यायालय ने निर्देश दिया कि जम्मू-कश्मीर को यथाशीघ्र राज्य का दर्जा लौटाया जाए और विधानसभा चुनाव 30 सितंबर 2024 तक कराए जाएँ। विधानसभा चुनाव सितंबर-अक्टूबर 2024 में हुए, जो 2014 के बाद पहले चुनाव थे।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग 21, अनुच्छेद 370 तथा 371 से 371झ — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (अधिनियम संख्या 34, 2019) — इंडिया कोड, भारत सरकार
- इन री: आर्टिकल 370 ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन, 11 दिसंबर 2023 का निर्णय — भारत का सर्वोच्च न्यायालय
- भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार (कक्षा 11), संघवाद अध्याय — एनसीईआरटी





