संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद: भागवार सूची
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों के सम्पूर्ण नोट्स: भागों की व्यवस्था, अधिकार, कर्तव्य, संवैधानिक पद, वित्त, आपातकाल और संशोधन के अनुच्छेद क्रमांक।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

सामान्य ज्ञान के लगभग हर प्रश्नपत्र में एक प्रश्न इस रूप में आता है कि संविधान का कौन सा अनुच्छेद किससे संबंधित है। परीक्षक कानून की समझ नहीं जाँच रहा होता, वह यह देखता है कि अभ्यर्थी ने अनुच्छेदों के क्रमांक क्रम से याद किए हैं या नहीं। इस नोट में अनुच्छेदों को उसी क्रम में रखा गया है जिसमें संविधान स्वयं उन्हें रखता है, भाग दर भाग, जिससे ठीक अनुच्छेद भूल जाने पर भी क्रमांक को उसके विषय से जोड़ा जा सके।
संविधान की व्यवस्था कैसी है
भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत हुआ और 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। अंगीकरण के समय इसमें 22 भागों में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं, और यही इसे किसी भी संप्रभु देश का सबसे लंबा लिखित संविधान बनाता है। बाद के संशोधनों ने पुराने अनुच्छेदों की संख्या बदले बिना नए भाग और अनुसूचियाँ जोड़ीं: नया प्रावधान अक्षर के साथ जोड़ा जाता है, इसीलिए अनुच्छेद 21क अनुच्छेद 21 और 22 के बीच आता है और अनुच्छेद 51क मूल कर्तव्यों का अध्याय खोलता है। अनुसूचियाँ अब बारह हैं, जिनमें बारहवीं अनुसूची नगरपालिकाओं के लिए 74वें संशोधन से जोड़ी गई। भाग 7, जो पूर्ववर्ती भाग-ख राज्यों से संबंधित था, 1956 के सातवें संशोधन से निरसित कर दिया गया।
चार समूहों से ही अधिकांश प्रश्न बनते हैं: अधिकारों का अध्याय, पदों का अध्याय, वित्त का अध्याय और आपातकाल का अध्याय। जो अभ्यर्थी हर समूह का पहला अनुच्छेद पक्का कर ले, वह बीच का कोई भी क्रमांक अपनी जगह रख सकता है।
अधिकार, नीति-निर्देश और कर्तव्य
भाग 3 अनुच्छेद 12 से 35 तक चलता है और इसमें मूल अधिकार हैं। अनुच्छेद 12 राज्य की परिभाषा देता है, अनुच्छेद 13 मूल अधिकारों से असंगत किसी भी विधि को शून्य करता है, और अधिकार स्वयं अनुच्छेद 14 से विधि के समक्ष समता के साथ आरंभ होते हैं। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है, अनुच्छेद 19 छह स्वतंत्रताएँ गिनाता है, अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है, और अनुच्छेद 32 उपचार के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है, जिसे डॉ भीमराव आंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा था। भाग 4, अनुच्छेद 36 से 51, में नीति-निर्देशक तत्त्व हैं जो न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं: अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों की बात करता है, अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता की, और अनुच्छेद 50 कार्यपालिका से न्यायपालिका के पृथक्करण की। अनुच्छेद 51क, जो 1976 के 42वें संशोधन द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़ा गया, मूल कर्तव्यों की सूची देता है।
संविधान जिन पदों का सृजन करता है
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 52 | भारत का राष्ट्रपति |
| 61 | राष्ट्रपति पर महाभियोग |
| 72 | राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति |
| 76 | भारत का महान्यायवादी |
| 79 | संसद का गठन |
| 93 | लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष |
| 110 | धन विधेयक की परिभाषा |
| 123 | राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति |
| 124 | उच्चतम न्यायालय की स्थापना |
| 148 | भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक |
| 153 | राज्यों के राज्यपाल |
| 213 | राज्यपाल की अध्यादेश शक्ति |
| 214 | राज्यों के उच्च न्यायालय |
| 226 | उच्च न्यायालयों की रिट शक्ति |
| 280 | वित्त आयोग |
| 324 | भारत निर्वाचन आयोग |
वित्त, आपातकाल और संशोधन
अनुच्छेद 112 के अनुसार वार्षिक वित्तीय विवरण, अर्थात बजट, संसद के समक्ष रखा जाना आवश्यक है। अनुच्छेद 266 भारत की संचित निधि बनाता है, अनुच्छेद 267 आकस्मिकता निधि, और अनुच्छेद 280 वह वित्त आयोग जो करों में राज्यों के हिस्से की सिफारिश करता है। तीनों आपातकाल अलग-अलग अनुच्छेदों में हैं और परीक्षा में इनसे अधिक भ्रम किसी समूह में नहीं होता: अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल है, अनुच्छेद 356 राज्य में राष्ट्रपति शासन, और अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल। अनुच्छेद 365 संघ को यह अधिकार देता है कि राज्य द्वारा संघ के निर्देशों का पालन न करना संवैधानिक तंत्र की विफलता माना जाए। अनुच्छेद 368 स्वयं संविधान के संशोधन की प्रक्रिया बताता है।
विशेष स्थितियों के अनुच्छेद
अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्यिक नदी जल विवादों के न्यायनिर्णयन की व्यवस्था करने और उन्हें न्यायालयों के क्षेत्राधिकार से बाहर रखने की शक्ति देता है, इसीलिए कावेरी और कृष्णा के मामले न्यायालय नहीं, जल अधिकरण तय करते हैं। अनुच्छेद 263 अंतर-राज्य परिषद की व्यवस्था करता है। अनुच्छेद 300क, जिसे 1978 के 44वें संशोधन ने भाग 3 से हटाकर रखा, संपत्ति को मूल अधिकार नहीं, विधिक अधिकार बनाता है। अनुच्छेद 312 अखिल भारतीय सेवाओं की व्यवस्था करता है, अनुच्छेद 315 लोक सेवा आयोगों की, और अनुच्छेद 326 लोकसभा तथा विधानसभाओं के निर्वाचन का आधार वयस्क मताधिकार तय करता है। अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा बनाता है।
क्रमांक कैसे याद रखें
पहले सीमा-अनुच्छेद याद कीजिए: 12 से अधिकार आरंभ, 36 से नीति-निर्देशक तत्त्व, 52 से संघ की कार्यपालिका, 79 से संसद, 124 से न्यायपालिका, 153 से राज्य की कार्यपालिका, 352 से आपातकालीन उपबंध। इसके बाद अक्षर वाले अनुच्छेद याद कीजिए, क्योंकि जोड़ा गया अनुच्छेद लगभग सदैव छिपा हुआ संशोधन प्रश्न होता है: शिक्षा के लिए 21क 86वें संशोधन से, पर्यावरण के लिए 48क और कर्तव्यों के लिए 51क 42वें संशोधन से, तथा संपत्ति के लिए 300क 44वें संशोधन से।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला, अनुच्छेद से विषय: समान नागरिक संहिता किस अनुच्छेद में है, उत्तर 44, और भटकाने के लिए उसी भाग 4 के 42, 43 तथा 45 दिए जाते हैं। दूसरा, विषय से भाग: अनुच्छेद 32 भाग 3 में है, जहाँ सबसे आम गलत उत्तर भाग 4 होता है। तीसरा, अक्षर वाले अनुच्छेद और उनका संशोधन: 21क के साथ 86वाँ, 51क तथा 48क के साथ 42वाँ, 300क के साथ 44वाँ। जाल तीन हैं: आपातकाल की तिकड़ी 352, 356 और 360; अध्यादेश की जोड़ी 123 राष्ट्रपति और 213 राज्यपाल; तथा रिट की जोड़ी 32 उच्चतम न्यायालय और 226 उच्च न्यायालय।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अंगीकरण के समय अनुच्छेद | 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ |
|---|---|
| मूल अधिकार | अनुच्छेद 12 से 35 (भाग 3) |
| नीति-निर्देशक तत्त्व | अनुच्छेद 36 से 51 (भाग 4) |
| मूल कर्तव्य | अनुच्छेद 51क (42वाँ संशोधन, 1976) |
| शिक्षा का अधिकार | अनुच्छेद 21क (86वाँ संशोधन, 2002) |
| समान नागरिक संहिता | अनुच्छेद 44 |
| धन विधेयक | अनुच्छेद 110 |
| बजट | अनुच्छेद 112, वार्षिक वित्तीय विवरण |
| वित्त आयोग | अनुच्छेद 280 |
| निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 324 |
| राष्ट्रीय आपातकाल | अनुच्छेद 352 |
| राष्ट्रपति शासन | अनुच्छेद 356 |
| वित्तीय आपातकाल | अनुच्छेद 360 |
| संशोधन प्रक्रिया | अनुच्छेद 368 |
| अंतर-राज्यिक जल विवाद | अनुच्छेद 262 |
| संपत्ति का अधिकार | अनुच्छेद 300क (44वाँ संशोधन, 1978) |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 किस भाग में आता है?
- A.भाग 2
- B.भाग 1
- C.भाग 3
- D.भाग 4
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, भाग 3 है। अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार है और यह भाग 3 में आता है, जो मूल अधिकारों का अध्याय है और अनुच्छेद 12 से 35 तक चलता है। अनुच्छेद 32 के अंतर्गत नागरिक मूल अधिकार के प्रवर्तन के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय जा सकता है और न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण तथा अधिकार-पृच्छा रिट जारी कर सकता है। डॉ भीमराव आंबेडकर ने इसी अनुच्छेद को संविधान की आत्मा कहा था। विकल्प A गलत है क्योंकि भाग 2 नागरिकता से संबंधित है, अनुच्छेद 5 से 11। विकल्प B गलत है क्योंकि भाग 1 संघ और उसके राज्यक्षेत्र से संबंधित है, अनुच्छेद 1 से 4, जिसमें नए राज्यों का निर्माण भी आता है। विकल्प D गलत है क्योंकि भाग 4 में नीति-निर्देशक तत्त्व हैं, अनुच्छेद 36 से 51, जो किसी न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं।
भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद धन विधेयक की परिभाषा देता है?
- A.अनुच्छेद 114
- B.अनुच्छेद 112
- C.अनुच्छेद 116
- D.अनुच्छेद 110
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, अनुच्छेद 110 है। अनुच्छेद 110 धन विधेयक की परिभाषा देता है, अर्थात वह विधेयक जो केवल कर लगाने या समाप्त करने, भारत सरकार द्वारा उधार लेने, भारत की संचित निधि या आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, और संचित निधि से धन के विनियोग जैसे विषयों से संबंधित हो। धन विधेयक केवल लोकसभा में और राष्ट्रपति की सिफारिश से ही पुरःस्थापित किया जा सकता है, तथा कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस पर लोकसभा अध्यक्ष का प्रमाणन अंतिम होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 114 विनियोग विधेयक से संबंधित है, जो संचित निधि से धन निकालने की अनुमति देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण यानी बजट की व्यवस्था करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 116 लेखानुदान, प्रत्यायानुदान और अपवादानुदान से संबंधित है।
संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का निर्देश देता है?
- A.अनुच्छेद 42
- B.अनुच्छेद 43
- C.अनुच्छेद 44
- D.अनुच्छेद 45
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 44 है। अनुच्छेद 44 भाग 4 का नीति-निर्देशक तत्त्व है और कहता है कि राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा। प्रत्येक नीति-निर्देशक तत्त्व की तरह यह किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है, फिर भी उच्चतम न्यायालय ने व्यक्तिगत विधि के कई निर्णयों में इसका उल्लेख किया है। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 42 काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाओं तथा प्रसूति सहायता का उपबंध करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 43 कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी और काम की उचित दशाओं की बात करता है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों का कुटीर उद्योग भी शामिल है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 45, 86वें संशोधन के बाद, छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक देखरेख और शिक्षा का निर्देश देता है।
भारतीय नागरिकों के मूल कर्तव्य संविधान के किस अनुच्छेद में दिए गए हैं?
- A.अनुच्छेद 48क
- B.अनुच्छेद 49
- C.अनुच्छेद 51क
- D.अनुच्छेद 50
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 51क है। मूल कर्तव्य अंगीकृत संविधान में नहीं थे। इन्हें 1976 के 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर नए भाग 4क में अनुच्छेद 51क के रूप में जोड़ा गया, और 2002 के 86वें संशोधन ने एक और कर्तव्य जोड़ा, अर्थात माता-पिता या संरक्षक का अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर देने का कर्तव्य। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 48क, जो भी 42वें संशोधन से जोड़ा गया, राज्य को पर्यावरण के संरक्षण तथा वन और वन्यजीव की रक्षा का निर्देश देता है; यह नागरिकों का कर्तव्य नहीं, नीति-निर्देशक तत्त्व है। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और स्थानों के संरक्षण की बात करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 50 कार्यपालिका से न्यायपालिका के पृथक्करण का निर्देश देता है।
संसद का सत्र न चलने पर भारत का राष्ट्रपति किस अनुच्छेद के अंतर्गत अध्यादेश जारी कर सकता है?
- A.अनुच्छेद 123
- B.अनुच्छेद 213
- C.अनुच्छेद 143
- D.अनुच्छेद 356
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, अनुच्छेद 123 है। अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि संसद के किसी सदन का सत्र न चलने पर वह अध्यादेश जारी करे, जिसका बल संसद के अधिनियम के समान होता है। अध्यादेश को पुनः समवेत होने पर दोनों सदनों के समक्ष रखना आवश्यक है और उस तारीख से छह सप्ताह बाद वह प्रवर्तन में नहीं रहता, यदि उससे पहले अनुमोदित न हो जाए। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 213 यही शक्ति राज्य के लिए राज्यपाल को देता है, और यही इस प्रश्न का सामान्य भटकाव है; 123 संघ के लिए और 213 राज्य के लिए याद रखना चाहिए। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को लोक महत्व के विधि या तथ्य के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की सलाह लेने देता है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 356 राज्य में राष्ट्रपति शासन से संबंधित है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 किस निकाय के गठन का उपबंध करता है?
- A.भारत निर्वाचन आयोग
- B.वित्त आयोग
- C.भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक
- D.संघ लोक सेवा आयोग
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, वित्त आयोग है। अनुच्छेद 280 के अनुसार राष्ट्रपति प्रत्येक पाँचवें वर्ष, या उससे पहले भी, एक वित्त आयोग का गठन करेगा जिसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होंगे। यह आयोग सिफारिश करता है कि करों की शुद्ध आय संघ और राज्यों के बीच कैसे बाँटी जाए, प्रत्येक राज्य का हिस्सा कैसे तय हो, और भारत की संचित निधि से राज्यों को कौन से सहायता अनुदान दिए जाएँ। विकल्प A गलत है क्योंकि निर्वाचन आयोग का सृजन अनुच्छेद 324 करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का उपबंध अनुच्छेद 148 में है और उसके कर्तव्य तथा शक्तियाँ अनुच्छेद 149 में हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 315 संघ और प्रत्येक राज्य के लिए लोक सेवा आयोग का उपबंध करता है।
संविधान का कौन सा अनुच्छेद वित्तीय आपातकाल की घोषणा से संबंधित है?
- A.अनुच्छेद 352
- B.अनुच्छेद 356
- C.अनुच्छेद 360
- D.अनुच्छेद 365
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 360 है। अनुच्छेद 360 राष्ट्रपति को वित्तीय आपातकाल की घोषणा करने देता है, यदि उसका यह समाधान हो जाए कि ऐसी स्थिति आ गई है जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग की वित्तीय स्थिरता अथवा प्रत्यय संकट में है। इसके प्रवर्तन में संघ राज्यों को वित्तीय औचित्य के निर्देश दे सकता है और लोक सेवकों के वेतन घटा सकता है, जिनमें उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भी शामिल हैं। भारत में वित्तीय आपातकाल अब तक कभी घोषित नहीं हुआ। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल है। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 356 राज्य में राष्ट्रपति शासन है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 365 केवल यह कहता है कि संघ के निर्देश का पालन न करना संवैधानिक तंत्र की विफलता माना जा सकता है।
शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21क के रूप में किस संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया?
- A.42वाँ संशोधन
- B.44वाँ संशोधन
- C.86वाँ संशोधन
- D.93वाँ संशोधन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 86वाँ संशोधन है। 2002 के 86वें संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 21क जोड़ा, जो छह से चौदह वर्ष की आयु के प्रत्येक बालक के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाता है। इसी संशोधन ने अनुच्छेद 45 को छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक देखरेख और शिक्षा के रूप में नया रूप दिया तथा अनुच्छेद 51क में माता-पिता का शिक्षा देने का कर्तव्य जोड़ा। विकल्प A गलत है क्योंकि 1976 के 42वें संशोधन ने मूल कर्तव्य, उद्देशिका में समाजवादी तथा धर्मनिरपेक्ष शब्द, और अनुच्छेद 39क, 43क एवं 48क जोड़े। विकल्प B गलत है क्योंकि 1978 के 44वें संशोधन ने संपत्ति के अधिकार को भाग 3 से हटाकर अनुच्छेद 300क में रखा। विकल्प D गलत है क्योंकि 2005 के 93वें संशोधन ने अनुच्छेद 15 के खंड 5 द्वारा शिक्षा संस्थाओं में आरक्षण को सक्षम बनाया।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 368 किस विषय से संबंधित है?
- A.संविधान संशोधन की प्रक्रिया
- B.आपातकालीन उपबंध
- C.संघ की राजभाषा
- D.संसद के निर्वाचन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, संविधान संशोधन की प्रक्रिया है। भाग 20 का अनुच्छेद 368 संसद को संविधान संशोधन की शक्ति देता है और प्रक्रिया बताता है: विधेयक किसी भी सदन में पुरःस्थापित हो सकता है, प्रत्येक सदन में उसकी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए, और संघीय विषयों को छूने वाले कुछ संशोधनों का आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थन भी आवश्यक है। केशवानंद भारती मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस शक्ति से संविधान के आधारभूत ढाँचे को नष्ट नहीं किया जा सकता। विकल्प B गलत है क्योंकि आपातकालीन उपबंध भाग 18 के अनुच्छेद 352 से 360 हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि संघ की राजभाषा भाग 17 का अनुच्छेद 343 है। विकल्प D गलत है क्योंकि निर्वाचन भाग 15 के अनुच्छेद 324 से 329 में हैं।
संविधान का कौन सा अनुच्छेद संसद को अंतर-राज्यिक नदियों के जल से जुड़े विवादों के न्यायनिर्णयन की व्यवस्था करने की शक्ति देता है?
- A.अनुच्छेद 262
- B.अनुच्छेद 263
- C.अनुच्छेद 131
- D.अनुच्छेद 143
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, अनुच्छेद 262 है। अनुच्छेद 262 संसद को यह शक्ति देता है कि वह अंतर-राज्यिक नदी या नदी घाटी के जल के उपयोग, बँटवारे या नियंत्रण से जुड़े किसी विवाद या परिवाद के न्यायनिर्णयन के लिए विधि बनाए, और इसके खंड 2 के अनुसार संसद उच्चतम न्यायालय तथा अन्य किसी न्यायालय का क्षेत्राधिकार ऐसे विवाद में वर्जित कर सकती है। इसी शक्ति से संसद ने अंतर-राज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 बनाया, जिसके अधिकरण कावेरी, कृष्णा और रावी-ब्यास जैसे विवाद तय करते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 263 सामान्य हित के विषयों पर विचार के लिए अंतर-राज्य परिषद का उपबंध करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 131 संघ और राज्यों के विवादों में उच्चतम न्यायालय का आरंभिक क्षेत्राधिकार है, जिसे जल विवादों के लिए अनुच्छेद 262 बाहर रखता है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 143 उच्चतम न्यायालय का सलाहकारी क्षेत्राधिकार है।
अनुच्छेद 324 के अंतर्गत संसद और राज्य विधानमंडलों के निर्वाचन का अधीक्षण, निदेशन तथा नियंत्रण किस प्राधिकारी में निहित है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत निर्वाचन आयोग
- C.भारत की संसद
- D.भारत का उच्चतम न्यायालय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, भारत निर्वाचन आयोग है। अनुच्छेद 324 निर्वाचक नामावली तैयार करने तथा संसद, राज्य विधानमंडलों और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के पदों के सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण निर्वाचन आयोग में निहित करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि राष्ट्रपति केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति करता है, निर्वाचन नहीं कराता। विकल्प C गलत है क्योंकि संसद निर्वाचन विधि बनाती है, जैसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, परंतु निर्वाचन नहीं कराती। विकल्प D गलत है क्योंकि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से जुड़े विवाद उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 71 के अंतर्गत सुनता है, जबकि संसद तथा विधानसभा सीटों की निर्वाचन याचिकाएँ पहले उच्च न्यायालय जाती हैं; न्यायालय मतदान का अधीक्षण नहीं करते, वे केवल निर्वाचन से उत्पन्न विवादों का निर्णय करते हैं। परीक्षा में अनुच्छेद 324 के साथ अनुच्छेद 325, 326 और 329 भी पूछे जाते हैं।
संविधान का कौन सा अनुच्छेद अस्पृश्यता का अंत करता है और किसी भी रूप में उसके आचरण का निषेध करता है?
- A.अनुच्छेद 15
- B.अनुच्छेद 16
- C.अनुच्छेद 17
- D.अनुच्छेद 18
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 17 है। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है, किसी भी रूप में उसके आचरण का निषेध करता है, और घोषित करता है कि अस्पृश्यता से उत्पन्न किसी निर्योग्यता को लागू करना विधि के अनुसार दंडनीय अपराध होगा। संसद ने इसे प्रभावी बनाने के लिए नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 बनाया। यह अधिकार निरपेक्ष है और राज्य तथा निजी व्यक्तियों दोनों के विरुद्ध उपलब्ध है। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध करता है और स्त्रियों, बालकों तथा पिछड़े वर्गों के लिए विशेष उपबंध की अनुमति देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 16 लोक नियोजन में अवसर की समता देता है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत करता है, सैन्य तथा विद्या संबंधी विशिष्टियों को छोड़कर।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संविधान की आत्मा किस अनुच्छेद को कहा जाता है?
अनुच्छेद 32 को, जो संवैधानिक उपचारों का अधिकार है और नागरिक को मूल अधिकार के प्रवर्तन के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय जाने की शक्ति देता है। डॉ भीमराव आंबेडकर ने संविधान सभा में इसे संविधान की आत्मा कहा था, क्योंकि इसके बिना शेष अधिकार प्रवर्तनीय नहीं रह जाते।
अनुच्छेद 352, 356 और 360 में क्या अंतर है?
अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल है, जो युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर घोषित होता है। अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन है, जो तब लगाया जाता है जब राज्य का शासन संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल है, जिसकी घोषणा भारत में अब तक कभी नहीं हुई।
समान नागरिक संहिता का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
अनुच्छेद 44 में, जो भाग 4 का नीति-निर्देशक तत्त्व है और कहता है कि राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा। नीति-निर्देशक तत्त्व होने के कारण यह किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है।
संविधान में कितने अनुच्छेद और अनुसूचियाँ हैं?
1949 में अंगीकरण के समय 22 भागों में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं। संशोधनों ने 21क और 300क जैसे अक्षर वाले अनुच्छेद तथा नई अनुसूचियाँ जोड़ीं; अनुसूचियाँ अब बारह हैं, जिनमें अंतिम नगरपालिकाओं के लिए 74वें संशोधन से जोड़ी गई।
अध्यादेश जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद में है?
अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को संसद का सत्र न चलने पर अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है और अनुच्छेद 213 राज्यपाल को राज्य के लिए वही शक्ति देता है। अध्यादेश विधानमंडल के समक्ष रखना आवश्यक है और पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद वह प्रवर्तन में नहीं रहता।
अंतर-राज्यिक नदी जल विवाद किस अनुच्छेद के अंतर्गत आते हैं?
अनुच्छेद 262 के अंतर्गत। यह संसद को अंतर-राज्यिक नदी या नदी घाटी के जल के उपयोग और बँटवारे से जुड़े विवादों के न्यायनिर्णयन की विधि बनाने और उच्चतम न्यायालय तथा अन्य न्यायालयों का क्षेत्राधिकार वर्जित करने देता है, इसीलिए अंतर-राज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अधिकरण इन्हें तय करते हैं।
स्रोत
- भारत का संविधान (यथासंशोधित), भागों और अनुसूचियों सहित पूर्ण पाठ — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार, कक्षा 11, राजनीति विज्ञान — एनसीईआरटी
- अंतर-राज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 — जल शक्ति मंत्रालय





