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GK नोट्सभारतीय राजव्यवस्थासंसद में वित्तीय प्रक्रिया

संसद में वित्तीय प्रक्रिया: बजट, निधियां और अनुदान

संसद की वित्तीय प्रक्रिया के नोट्स: भारत की तीन निधियां, अनुच्छेद 112 से 117, भारित व्यय, अनुदान मांगें, कटौती प्रस्ताव, धन विधेयक और लेखापरीक्षा।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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संसद में वित्तीय प्रक्रिया: बजट, निधियां और अनुदान — GK24 title card
संसद में वित्तीय प्रक्रिया: बजट, निधियां और अनुदान — GK24 title card

संघ की तिजोरी पर नियंत्रण संसद का है। कार्यपालिका कर लगाने या व्यय करने का प्रस्ताव कर सकती है, परंतु जब तक विधायिका विधि द्वारा अनुमति न दे, वह एक रुपया भी न वसूल सकती है और न खर्च कर सकती है। अनुच्छेद 265 कहता है कि विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया या वसूला जाएगा, और अनुच्छेद 266 कहता है कि विधि के अनुसार ही भारत की संचित निधि से धन निकाला जाएगा। अनुच्छेद 112 से आरंभ होने वाला अध्याय इस सिद्धांत को एक कार्य-सारणी में बदल देता है: बजट, अनुदान मांगों पर मतदान, विनियोग विधेयक, वित्त विधेयक और वर्ष बीतने के बाद नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा लेखापरीक्षा। परीक्षकों को यह अध्याय प्रिय है, क्योंकि इसका प्रत्येक चरण किसी एक अनुच्छेद और किसी निश्चित दिन-संख्या से जुड़ा है।

भारत की तीन निधियां

संघ का समस्त लोक धन तीन निधियों में से किसी एक में रहता है और प्रत्येक से धन निकालने के नियम भिन्न हैं।

निधिअनुच्छेदइसमें क्या जमा होता हैधन कैसे निकलता है
भारत की संचित निधि266(1)समस्त राजस्व, उठाए गए ऋण तथा ऋणों की वापसी से प्राप्त धनकेवल विधि द्वारा किए गए विनियोग के अधीन
भारत का लोक लेखा266(2)भविष्य निधि, लघु बचत, जमा तथा न्यास में रखा गया धनकार्यपालिका की कार्रवाई से; संसदीय विनियोग आवश्यक नहीं
भारत की आकस्मिकता निधि267(1)राष्ट्रपति के व्ययनाधीन रखी गई अग्रदाय राशिअप्रत्याशित व्यय के लिए राष्ट्रपति द्वारा अग्रिम, जिसकी बाद में संसद से प्रतिपूर्ति

आकस्मिकता निधि राष्ट्रपति की ओर से वित्त सचिव के पास रहती है और इसकी राशि संसद विधि द्वारा नियत करती है, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया है। राज्यों में भी अनुच्छेद 266 तथा 267(2) के अधीन वही तीन निधियां होती हैं।

बजट और उसके छह चरण

संविधान में बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण कहा गया है। अनुच्छेद 112 के अनुसार राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण दोनों सदनों के समक्ष रखवाता है। वर्ष 2017 से बजट 1 फरवरी को प्रस्तुत होता है, पृथक रेल बजट इसी में मिला दिया गया है और व्यय का योजना तथा गैर-योजना विभाजन समाप्त कर दिया गया है। बजट छह चरणों से गुजरता है।

  1. वित्त मंत्री के भाषण के साथ बजट प्रस्तुत करना।
  2. दोनों सदनों में समग्र बजट पर सामान्य चर्चा; कोई प्रस्ताव नहीं रखा जाता।
  3. विभाग-संबंधित स्थायी समितियों द्वारा संबंधित मंत्रालयों की मांगों की जांच और सदन को प्रतिवेदन।
  4. अनुदान मांगों पर मतदान, केवल लोक सभा में।
  5. विनियोग विधेयक पारित करना।
  6. वित्त विधेयक पारित करना, जो कर प्रस्तावों को विधिक रूप देता है।

भारित व्यय और मतदेय व्यय

अनुच्छेद 113 अनुमानों को दो भागों में बांटता है। भारत की संचित निधि पर भारित व्यय संसद के मतदान के लिए नहीं रखा जाता, यद्यपि कोई भी सदन उस पर चर्चा कर सकता है। शेष समस्त व्यय लोक सभा के समक्ष अनुदान मांगों के रूप में रखा जाता है और कोई मांग राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही रखी जा सकती है। लोक सभा मांग को स्वीकार कर सकती है, अस्वीकार कर सकती है या राशि घटा सकती है; राज्य सभा को अनुदानों पर मत देने का अधिकार ही नहीं है। संचित निधि पर भारित मुख्य मदें ये हैं।

  • राष्ट्रपति की उपलब्धियां, भत्ते तथा उनके कार्यालय का व्यय।
  • राज्य सभा के सभापति और उपसभापति तथा लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन-भत्ते।
  • भारत सरकार के ऋण भार, जिनमें ब्याज तथा निक्षेप निधि भार सम्मिलित हैं।
  • उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते तथा पेंशन और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की पेंशन।
  • नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक तथा संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन।
  • किसी न्यायालय या माध्यस्थम अधिकरण के निर्णय, डिक्री या पंचाट की तुष्टि के लिए अपेक्षित राशि।
  • कोई अन्य व्यय, जिसे संसद विधि द्वारा इस प्रकार भारित घोषित कर दे।

वार्षिक अनुदान के अतिरिक्त अनुदान

अनुदानअनुच्छेदकब प्रयोग होता है
अनुपूरक अनुदान115(1)(क)वर्ष के लिए दी गई राशि अपर्याप्त सिद्ध हो
अतिरिक्त अनुदान115(1)(क)बजट में न सोचा गया नया व्यय सामने आ जाए
अधिक्य अनुदान115(1)(ख)स्वीकृत से अधिक खर्च हो गया; वर्ष समाप्ति पर लोक लेखा समिति की जांच के बाद मतदान
लेखानुदान116(1)(क)विनियोग अधिनियम पारित होने तक व्यय चलाने के लिए अग्रिम अनुदान
प्रत्यानुदान116(1)(ख)भारत के संसाधनों पर ऐसी अप्रत्याशित मांग, जो बजट के ब्योरे में बताई न जा सके
अपवादानुदान116(1)(ग)ऐसा अनुदान, जो किसी वित्तीय वर्ष की वर्तमान सेवा का भाग न हो

कटौती प्रस्ताव और गिलोटिन

अनुदान मांग पर मतदान के समय लोक सभा का कोई सदस्य उसे घटाने के लिए कटौती प्रस्ताव रख सकता है। नीति कटौती में मांग की राशि घटाकर एक रुपया करने की प्रार्थना की जाती है और यह मांग के पीछे की नीति की अस्वीकृति है। मितव्ययिता कटौती में मितव्ययिता के हित में राशि को एक निश्चित रकम से घटाने को कहा जाता है। सांकेतिक कटौती में राशि को सौ रुपये से घटाने की मांग होती है और यह किसी विशेष शिकायत को उठाने का साधन है। कटौती प्रस्ताव केवल लोक सभा में रखा जा सकता है और यदि वह पारित हो जाए तो सरकार से त्यागपत्र की अपेक्षा की जाती है, क्योंकि इसका अर्थ है कि सदन ने धन देने से मना कर दिया। अध्यक्ष सदन के नेता से परामर्श करके मांगों के लिए दिन नियत करता है; अंतिम दिन वह गिलोटिन लगाकर शेष सभी मांगों को एक साथ मतदान के लिए रख देता है, चर्चा हुई हो या नहीं।

धन विधेयक, वित्तीय विधेयक और लेखापरीक्षा

अनुच्छेद 110 धन विधेयक की परिभाषा देता है और कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस पर लोक सभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। धन विधेयक केवल लोक सभा में, और राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही पुरःस्थापित किया जा सकता है। राज्य सभा उसमें न संशोधन कर सकती है और न उसे अस्वीकार कर सकती है; उसे चौदह दिन के भीतर सिफारिशों के साथ या उनके बिना विधेयक लौटाना होता है, जिन्हें लोक सभा मान या अनमान सकती है, और धन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं होती। अनुच्छेद 114 के अधीन संचित निधि से निकासी को प्राधिकृत करने वाले विनियोग विधेयक में ऐसा संशोधन नहीं हो सकता, जो भारित व्यय की राशि या गंतव्य बदल दे। वर्ष समाप्त होने पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक लेखाओं की लेखापरीक्षा करके राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देता है, जो अनुच्छेद 151 के अधीन उन्हें संसद के समक्ष रखवाता है। ये प्रतिवेदन तब लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति तथा सार्वजनिक उपक्रम समिति के पास जाते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न अनुच्छेद मिलान के रूप में आते हैं (112 बजट, 113 अनुदान मांग, 114 विनियोग विधेयक, 115 अनुपूरक अनुदान, 116 लेखानुदान, 117 वित्तीय विधेयक, 265 कराधान, 266 और 267 निधियां), भारित व्यय पर बेमेल पहचानने के रूप में, तथा तीनों कटौती प्रस्तावों की ठीक राशि पूछने के रूप में। सामान्य जाल हैं: लोक लेखा के लिए भी विनियोग आवश्यक मान लेना, राज्य सभा को अनुदान मांगों पर मत देने का अधिकार दे देना, लेखानुदान और प्रत्यानुदान में भ्रम, और राज्य सभा को धन विधेयक अस्वीकार करने की शक्ति मान लेना, जबकि उसके पास केवल चौदह दिन हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

संविधान में बजटवार्षिक वित्तीय विवरण, अनुच्छेद 112
भारत की संचित निधिअनुच्छेद 266(1); निकासी केवल विधि द्वारा विनियोग से
भारत का लोक लेखाअनुच्छेद 266(2); भुगतान कार्यपालिका की कार्रवाई से
भारत की आकस्मिकता निधिअनुच्छेद 267(1); अप्रत्याशित व्यय के लिए राष्ट्रपति द्वारा अग्रिम
अनुदान मांगेंअनुच्छेद 113; राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही, मतदान केवल लोक सभा में
विनियोग विधेयकअनुच्छेद 114; भारित व्यय संशोधन से नहीं बदला जा सकता
लेखानुदानअनुच्छेद 116(1)(क)
धन विधेयकअनुच्छेद 110; अध्यक्ष का निर्णय अंतिम; राज्य सभा 14 दिन में लौटाती है
नीति, मितव्ययिता और सांकेतिक कटौतीक्रमशः राशि एक रुपया, निश्चित रकम से कम, और सौ रुपये से कम
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनअनुच्छेद 151 के अधीन संसद में प्रस्तुत; लोक लेखा समिति जांच करती है
लोक लेखा समिति22 सदस्य: 15 लोक सभा से और 7 राज्य सभा से
प्राक्कलन समिति30 सदस्य, सभी लोक सभा से

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में संसद के दोनों सदनों के समक्ष किस अनुच्छेद के अधीन रखा जाता है?

  1. A.अनुच्छेद 110
  2. B.अनुच्छेद 112
  3. C.अनुच्छेद 114
  4. D.अनुच्छेद 117
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 112

व्याख्या

सही उत्तर B, अनुच्छेद 112 है। अनुच्छेद 112 के अनुसार राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाएगा, और संविधान इस विवरण को वार्षिक वित्तीय विवरण कहता है; बोलचाल में यही बजट है। A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 110 केवल धन विधेयक की परिभाषा देता है और उन छह विषयों को गिनाता है जिनसे धन विधेयक संबंधित हो सकता है; बजट सदनों में रखने की बात वहां नहीं है। C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 114 विनियोग विधेयक से संबंधित है, अर्थात उस विधि से जिसके द्वारा अनुदान स्वीकृत होने के बाद संचित निधि से धन निकाला जाता है। D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 117 में वित्तीय विधेयकों के विशेष उपबंध हैं, मुख्यतः यह कि वे राष्ट्रपति की सिफारिश पर लोक सभा में पुरःस्थापित होते हैं।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

निम्नलिखित में से कौन भारत की संचित निधि पर भारित व्यय नहीं है?

  1. A.उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और पेंशन
  2. B.भारत सरकार के ऋण भार
  3. C.प्रधानमंत्री का वेतन और भत्ते
  4. D.नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का वेतन और पेंशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्रधानमंत्री का वेतन और भत्ते

व्याख्या

सही उत्तर C, प्रधानमंत्री का वेतन और भत्ते है। प्रधानमंत्री को भी अन्य मंत्रियों की तरह मतदेय व्यय से वेतन मिलता है, इसलिए यह राशि उस अनुदान मांग में आती है जिसे लोक सभा घटा या अस्वीकार कर सकती है; यह भारित व्यय नहीं है। A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 112(3) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, भत्तों और पेंशन को स्पष्ट रूप से संचित निधि पर भारित करता है, जिससे न्यायपालिका वार्षिक मतदान पर निर्भर न रहे। B गलत है, क्योंकि ब्याज, निक्षेप निधि भार तथा ऋण जुटाने और चुकाने का व्यय भारित है, क्योंकि राष्ट्र की साख को प्रतिवर्ष मतदान पर नहीं छोड़ा जा सकता। D गलत है, क्योंकि नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का वेतन, भत्ते और पेंशन भी भारित हैं, जो सरकार के ही लेखों की जांच करने वाले अधिकारी की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

लोक सभा से भेजे गए धन विधेयक को राज्य सभा को कितने दिनों के भीतर लौटाना होता है?

  1. A.7 दिन
  2. B.14 दिन
  3. C.21 दिन
  4. D.30 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 14 दिन

व्याख्या

सही उत्तर B, 14 दिन है। अनुच्छेद 109 के अनुसार लोक सभा द्वारा पारित धन विधेयक राज्य सभा के पास जाता है, जिसे उसे चौदह दिन के भीतर सिफारिशों के साथ या उनके बिना लौटाना होता है; यदि वह उस अवधि में न लौटाया जाए तो विधेयक उसी रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है जिस रूप में लोक सभा ने उसे पारित किया था। लोक सभा राज्य सभा की किसी भी सिफारिश को मानने या छोड़ने के लिए स्वतंत्र है। A गलत है, क्योंकि किसी विधेयक का कोई वित्तीय चरण सात दिन का नहीं है। C गलत है, क्योंकि इक्कीस दिन की अवधि धन विधेयक से संबंधित नहीं है। D गलत है, क्योंकि तीस दिन भी धन विधेयक की संवैधानिक अवधि नहीं है; अभ्यर्थी कभी-कभी इसे उन छह मासों से मिला देते हैं, जिन तक राज्य सभा साधारण विधेयक रोक सकती है।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

लोक सभा में सांकेतिक कटौती प्रस्ताव में अनुदान मांग की राशि के बारे में क्या प्रार्थना की जाती है?

  1. A.उसे घटाकर एक रुपया कर दिया जाए
  2. B.उसे सौ रुपये से घटा दिया जाए
  3. C.मितव्ययिता के हित में उसे एक निश्चित रकम से घटा दिया जाए
  4. D.उसे पूरी तरह वापस ले लिया जाए
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उसे सौ रुपये से घटा दिया जाए

व्याख्या

सही उत्तर B, उसे सौ रुपये से घटा दिया जाए है। सांकेतिक कटौती भारत सरकार के उत्तरदायित्व के क्षेत्र की किसी विशेष शिकायत को उठाने के लिए रखी जाती है और उसका रूप यही होता है कि मांग की राशि सौ रुपये से घटा दी जाए; यह रकम प्रतीकात्मक है और उद्देश्य वह चर्चा है जो इससे अनिवार्य हो जाती है। A गलत है, क्योंकि मांग को घटाकर एक रुपया करना नीति कटौती है, जो मांग के पीछे की नीति की अस्वीकृति है। C गलत है, क्योंकि मितव्ययिता के लिए निश्चित रकम से कटौती मितव्ययिता कटौती है, जिसमें सदस्य सुझाता है कि वही काम कम व्यय में हो सकता है। D गलत है, क्योंकि कोई कटौती प्रस्ताव मांग वापस लेने की प्रार्थना नहीं करता; लोक सभा मांग को मतदान में गिराकर अस्वीकार कर सकती है, पर वह अस्वीकृति है, कटौती प्रस्ताव नहीं।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

भारत की आकस्मिकता निधि किसके व्ययनाधीन रखी जाती है?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.लोक सभा अध्यक्ष
  3. C.भारत के राष्ट्रपति
  4. D.नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारत के राष्ट्रपति

व्याख्या

सही उत्तर C, भारत के राष्ट्रपति है। अनुच्छेद 267(1) संसद को विधि द्वारा अग्रदाय के रूप में भारत की आकस्मिकता निधि स्थापित करने की शक्ति देता है, जो राष्ट्रपति के व्ययनाधीन रखी जाती है और जिससे वह संसद के प्राधिकार की प्रतीक्षा में अप्रत्याशित व्यय के लिए अग्रिम दे सकता है; यह निधि उनकी ओर से वित्त सचिव के पास रहती है और संसद द्वारा धन स्वीकृत होने पर इसकी प्रतिपूर्ति हो जाती है। A गलत है, क्योंकि प्रधानमंत्री के पास भारत की किसी निधि की पृथक संवैधानिक अभिरक्षा नहीं है। B गलत है, क्योंकि अध्यक्ष लोक सभा की अध्यक्षता करता है और धन विधेयक प्रमाणित करता है, किंतु कोई निधि नहीं रखता। D गलत है, क्योंकि नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक व्यय हो जाने के बाद लेखापरीक्षा करता है और उसे जानबूझकर धन की अभिरक्षा तथा स्वीकृति से दूर रखा गया है।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय कौन करता है?

  1. A.भारत के राष्ट्रपति
  2. B.लोक सभा के अध्यक्ष
  3. C.वित्त मंत्री
  4. D.राज्य सभा के सभापति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लोक सभा के अध्यक्ष

व्याख्या

सही उत्तर B, लोक सभा के अध्यक्ष है। अनुच्छेद 110(3) कहता है कि यदि यह प्रश्न उठे कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो लोक सभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा, और वही विधेयक को राज्य सभा भेजते समय तथा राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करते समय इस रूप में प्रमाणित करता है। A गलत है, क्योंकि धन विधेयक पुरःस्थापित करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक है, पर वर्गीकरण उनका काम नहीं है। C गलत है, क्योंकि वित्त मंत्री वित्तीय विधेयक प्रस्तुत करता और उसका बचाव करता है, किंतु विधेयक का स्वरूप तय करना उसका अधिकार नहीं है। D गलत है, क्योंकि सभापति उस सदन की अध्यक्षता करता है जिसका धन विधेयक में सबसे कम हस्तक्षेप है; उसे प्रमाणन की शक्ति देना लोक सभा की वित्तीय सर्वोच्चता के उद्देश्य को ही समाप्त कर देता।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

अनुच्छेद 115(1)(ख) के अधीन अधिक्य अनुदान पर लोक सभा मतदान किस निकाय की जांच के बाद करती है?

  1. A.प्राक्कलन समिति
  2. B.लोक लेखा समिति
  3. C.सार्वजनिक उपक्रम समिति
  4. D.कार्य मंत्रणा समिति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लोक लेखा समिति

व्याख्या

सही उत्तर B, लोक लेखा समिति है। अधिक्य अनुदान तब मांगा जाता है जब किसी वित्तीय वर्ष में किसी सेवा पर स्वीकृत राशि से अधिक धन वास्तव में खर्च हो गया हो; यह मांग वर्ष बीतने के बाद होती है और परंपरा के अनुसार लोक लेखा समिति पहले उस अधिक्य की जांच करके उसके नियमितीकरण की सिफारिश करती है, तब लोक सभा मतदान करती है। A गलत है, क्योंकि प्राक्कलन समिति आगे की ओर देखती है और अनुमानों में मितव्ययिता के सुझाव देती है, बीते अधिक व्यय का नियमितीकरण नहीं करती। C गलत है, क्योंकि सार्वजनिक उपक्रम समिति स्वयं को सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिवेदनों और लेखों तक सीमित रखती है। D गलत है, क्योंकि कार्य मंत्रणा समिति केवल सदन में सरकारी कार्य के लिए समय आवंटित करती है और उसकी कोई वित्तीय जांच भूमिका नहीं है।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

भारतीय संसदीय व्यवहार में गिलोटिन का अर्थ क्या है?

  1. A.नियत अंतिम दिन अध्यक्ष द्वारा शेष सभी अनुदान मांगों को मतदान के लिए रख देना
  2. B.राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाना
  3. C.कार्यकाल पूरा होने से पहले लोक सभा का विघटन
  4. D.किसी सदस्य का शेष सत्र के लिए निलंबन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नियत अंतिम दिन अध्यक्ष द्वारा शेष सभी अनुदान मांगों को मतदान के लिए रख देना

व्याख्या

सही उत्तर A है। अध्यक्ष सदन के नेता से परामर्श करके अनुदान मांगों के लिए उपलब्ध दिनों की संख्या नियत करता है और उनमें से अंतिम दिन शेष सभी मांगें एक साथ मतदान के लिए रख दी जाती हैं, उन पर चर्चा हुई हो या नहीं। समय के आधार पर चर्चा समाप्त करने की इस प्रक्रिया को गिलोटिन कहते हैं और व्यवहार में बजट का बड़ा भाग इसी से पारित होता है। B गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 111 के अधीन पुनर्विचार के लिए लौटाना साधारण विधेयक पर लागू होता है और उसे गिलोटिन कभी नहीं कहा जाता। C गलत है, क्योंकि लोक सभा का समय-पूर्व विघटन मंत्रिपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति करता है और वह बिल्कुल भिन्न विषय है। D गलत है, क्योंकि किसी सदस्य का निलंबन प्रक्रिया नियमों के अधीन पीठ द्वारा उठाया गया अनुशासनात्मक कदम है, वित्तीय कार्य निपटाने का साधन नहीं।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

यह उपबंध किस अनुच्छेद में है कि विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया या वसूला जाएगा?

  1. A.अनुच्छेद 245
  2. B.अनुच्छेद 265
  3. C.अनुच्छेद 280
  4. D.अनुच्छेद 300क
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 265

व्याख्या

सही उत्तर B, अनुच्छेद 265 है। यह एक ही वाक्य में कहता है कि विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया या वसूला जाएगा, और इसी कारण बजट के प्रत्येक कर प्रस्ताव को वित्त विधेयक के माध्यम से अधिनियमित करना पड़ता है, तब ही नागरिक से धन मांगा जा सकता है। A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 245 संसद तथा राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों के विस्तार से, अर्थात विधायन की क्षेत्रीय परिधि से संबंधित है। C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 280 वित्त आयोग का उपबंध करता है, जो संघ और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है। D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 300क कहता है कि किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा, जो चवालीसवें संशोधन से जोड़ा गया संपत्ति संबंधी उपबंध है और कराधान के अनुच्छेद से अक्सर मिला दिया जाता है।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

संसद की लोक लेखा समिति में कुल कितने सदस्य होते हैं?

  1. A.15 सदस्य
  2. B.22 सदस्य
  3. C.30 सदस्य
  4. D.31 सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 22 सदस्य

व्याख्या

सही उत्तर B, 22 सदस्य है। लोक लेखा समिति में बाईस सदस्य होते हैं, पंद्रह लोक सभा द्वारा और सात राज्य सभा द्वारा एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से निर्वाचित किए जाते हैं, और इसका सभापति लोक सभा अध्यक्ष नियुक्त करता है; वर्ष 1967 से चली परंपरा के अनुसार सभापति विपक्ष से होता है। यह समिति नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के प्रतिवेदनों की जांच करती है, इसलिए इसे संसद की वित्तीय समितियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। A गलत है, क्योंकि पंद्रह केवल इस समिति में लोक सभा का हिस्सा है, पूरी सदस्य संख्या नहीं। C गलत है, क्योंकि तीस प्राक्कलन समिति की सदस्य संख्या है, जिसके सभी सदस्य लोक सभा से लिए जाते हैं और राज्य सभा से एक भी नहीं लिया जाता। D गलत है, क्योंकि इकतीस प्रत्येक विभाग-संबंधित स्थायी समिति की सदस्य संख्या है, जिसमें लोक सभा के इक्कीस और राज्य सभा के दस सदस्य होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बजट का संबंध संविधान के किस अनुच्छेद से है?

अनुच्छेद 112 से। इसमें बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण कहा गया है और राष्ट्रपति से अपेक्षा की गई है कि वह प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अनुमानित प्राप्तियों तथा व्यय का विवरण संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाए।

क्या राज्य सभा अनुदान मांगों पर मत दे सकती है?

नहीं। अनुच्छेद 113 के अनुसार अनुदान मांगें केवल लोक सभा के समक्ष रखी जाती हैं, जो उन्हें स्वीकार, अस्वीकार या कम कर सकती है। राज्य सभा बजट पर सामान्य चर्चा में भाग ले सकती है, परंतु अनुदानों पर उसका मत नहीं होता।

लेखानुदान और प्रत्यानुदान में क्या अंतर है?

अनुच्छेद 116(1)(क) का लेखानुदान विनियोग अधिनियम पारित होने तक सरकार का सामान्य कामकाज चलाने के लिए दिया गया अग्रिम अनुदान है। अनुच्छेद 116(1)(ख) का प्रत्यानुदान भारत के संसाधनों पर ऐसी अप्रत्याशित मांग पूरी करता है, जिसका परिमाण या अनिश्चित स्वरूप बजट के ब्योरे में बताया नहीं जा सकता।

संसद में गिलोटिन क्या है?

अनुदान मांगों के लिए नियत दिनों के अंतिम दिन अध्यक्ष शेष सभी मांगों को एक साथ मतदान के लिए रख देता है, चाहे उन पर चर्चा हुई हो या नहीं। समय समाप्त होने पर चर्चा बंद करने की इस प्रक्रिया को गिलोटिन कहते हैं।

भारत की संचित निधि पर कौन-सा व्यय भारित है?

राष्ट्रपति की उपलब्धियां, दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों के वेतन, भारत सरकार के ऋण भार, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन-पेंशन और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की पेंशन, सीएजी तथा संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के वेतन-पेंशन, न्यायालय की डिक्री की तुष्टि के लिए अपेक्षित राशि, और वह सब जिसे संसद विधि द्वारा भारित घोषित कर दे।

स्रोत

  • भारत का संविधान, अनुच्छेद 110 से 117 तथा 265 से 267 — विधि कार्य विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
  • लोक सभा में प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम — लोक सभा सचिवालय
  • भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (कक्षा 11), विधायिका अध्याय — एनसीईआरटी
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