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GK नोट्सभारतीय राजव्यवस्थासंसदीय प्रक्रियाएं: प्रश्नकाल, शून्यकाल और प्रस्ताव

संसदीय प्रक्रियाएं: प्रश्नकाल, शून्यकाल और प्रस्ताव

परीक्षा के लिए संसदीय प्रक्रियाओं के नोट्स: प्रश्नकाल और प्रश्नों के चार प्रकार, 1962 से शून्यकाल, स्थगन, अविश्वास, निंदा तथा कटौती प्रस्ताव और गणपूर्ति।

लेखक · प्रकाशित · 6 मिनट

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संसदीय प्रक्रियाएं: प्रश्नकाल, शून्यकाल और प्रस्ताव — GK24 title card
संसदीय प्रक्रियाएं: प्रश्नकाल, शून्यकाल और प्रस्ताव — GK24 title card

संसद का काम केवल कानून बनाना नहीं है। जिस भी दिन सदन बैठता है, वह कार्यपालिका से प्रश्न पूछता है, उसकी आलोचना करता है और उस पर निगरानी रखता है। इस काम के लिए प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम प्रत्येक सदस्य को कुछ साधन देते हैं, जिन्हें संसदीय प्रक्रियाएं या संसदीय उपाय कहा जाता है। इनमें से कुछ, जैसे प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, नियमों में लिखे हुए हैं; कुछ अन्य, जैसे शून्यकाल, व्यवहार से विकसित हुए और नियमों में उनका कोई उल्लेख नहीं है। परीक्षक इस अध्याय पर हर वर्ष लौटते हैं, क्योंकि इसके तथ्य ठीक-ठीक निश्चित हैं और बदलते नहीं: कौन सा उपाय किस सदन का है, उसे कितने सदस्यों का समर्थन चाहिए और सदन को उस पर कितना समय देना होता है।

प्रश्नकाल

प्रश्नकाल सदन की प्रत्येक बैठक का पहला घंटा होता है, सामान्यतः पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक, और यह किसी निजी सदस्य के हाथ में उत्तरदायित्व लागू कराने का सबसे तीखा हथियार है। सदस्य किसी मंत्री से उसके प्रभार के अंतर्गत लोक प्रशासन के किसी भी विषय पर प्रश्न पूछ सकता है और मंत्री उत्तर देने के लिए बाध्य है। प्रश्न पूछना सदस्य का अधिकार है; नियम केवल यह तय करते हैं कि वह कैसे पूछा जाए। प्रश्न चार प्रकार के होते हैं, और पहले दो का अंतर प्रश्नपत्र बनाने वालों का प्रिय विषय है।

प्रश्न का प्रकारउत्तर कैसे मिलता हैपूरक प्रश्नलोकसभा में दैनिक सीमा
तारांकित प्रश्न, तारे के चिह्न से अंकितसदन में मौखिक रूप सेपूछे जा सकते हैं20
अतारांकित प्रश्नलिखित रूप में, सदन की मेज पर रखा जाता हैनहीं पूछे जा सकते230
अल्प सूचना प्रश्नमौखिक रूप से, अत्यावश्यक लोक महत्व के विषय परपूछे जा सकते हैंकोई निश्चित सीमा नहीं
निजी सदस्य से प्रश्नउसी सदस्य द्वारा, जब विषय उसके प्रभार का विधेयक या कार्य होपूछे जा सकते हैंकोई निश्चित सीमा नहीं

प्रश्न के लिए सामान्य सूचना अवधि दस स्पष्ट दिन की है; अल्प सूचना प्रश्न वह है जो इससे कम सूचना पर पूछा जाए, और वह तभी लिया जाता है जब मंत्री सहमत हो और अध्यक्ष उसे स्वीकार करे।

शून्यकाल

शून्यकाल प्रश्नकाल समाप्त होते ही, लगभग दोपहर 12 बजे आरंभ होता है और दिन के सूचीबद्ध कार्य के आरंभ होने तक चलता है। यह भारतीय संसदीय व्यवहार की अपनी देन है और 1962 से प्रचलन में है। यही एकमात्र प्रसिद्ध उपाय है जिसका प्रक्रिया नियमों में कोई उल्लेख नहीं है, इसीलिए इसे अनौपचारिक उपाय कहा जाता है। इसका महत्व यह है कि सदस्य बिना पूर्व सूचना कोई विषय उठा सकता है, जबकि प्रत्येक दूसरा उपाय पूर्व सूचना मांगता है; इसलिए सुबह की खबर उसी दिन सदन के पटल तक पहुंच सकती है। चूंकि इसके कोई नियम नहीं हैं, इसकी कोई निश्चित अवधि भी नहीं है और पीठासीन अधिकारी ही तय करता है कि किसे सुना जाएगा।

प्रस्ताव और उनके मुख्य प्रकार

सदन में कोई भी विषय तब तक नहीं चर्चा में आ सकता जब तक कोई सदस्य उस पर प्रस्ताव न रखे और पीठासीन अधिकारी उसे स्वीकार न करे। प्रस्ताव तीन वर्गों में बंटे हैं: मूल प्रस्ताव, जो अपने आप में पूर्ण होता है, जैसे किसी न्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव; स्थानापन्न प्रस्ताव, जो मूल प्रस्ताव के स्थान पर रखा जाता है; और सहायक प्रस्ताव, जिसका अपना कोई अर्थ नहीं होता और जो मूल प्रस्ताव पर निर्भर रहता है। अभ्यर्थी को जिन प्रस्तावों में अंतर करना आना चाहिए, वे ये हैं।

प्रस्तावकहां रखा जा सकता हैआवश्यक समर्थनयाद रखने योग्य बात
स्थगन प्रस्तावकेवल लोकसभा50 सदस्यइसमें निंदा का तत्व होता है; चर्चा कम से कम दो घंटे तीस मिनट चलनी चाहिए
अविश्वास प्रस्तावकेवल लोकसभा50 सदस्यनियम 198 के अंतर्गत; कोई कारण बताना आवश्यक नहीं
निंदा प्रस्तावकेवल लोकसभाकोई निश्चित संख्या नहींकारण बताना अनिवार्य; पारित होने पर भी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना आवश्यक नहीं
विश्वास प्रस्तावलोकसभासरकार स्वयं रखती हैसदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए
धन्यवाद प्रस्तावदोनों सदनलागू नहींअनुच्छेद 87 के अंतर्गत राष्ट्रपति के अभिभाषण पर; इसकी पराजय सरकार की पराजय है
ध्यानाकर्षण प्रस्तावदोनों सदनलागू नहींभारतीय देन, 1954 से प्रचलित; मंत्री वक्तव्य देता है
विशेषाधिकार प्रस्तावदोनों सदनलागू नहींजब मंत्री तथ्य छिपाए या सदन को गलत तथ्य दे

अविश्वास, विश्वास और निंदा

अनुच्छेद 75 मंत्रिपरिषद को लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है, और अविश्वास प्रस्ताव वही साधन है जिससे यह उत्तरदायित्व लागू होता है। यह केवल लोकसभा में रखा जा सकता है, स्वीकार होने के लिए पचास सदस्यों का समर्थन चाहिए, और इसमें कोई कारण देने की आवश्यकता नहीं होती; यदि यह पारित हो जाए तो पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है। स्वतंत्र भारत में पहला अविश्वास प्रस्ताव अगस्त 1963 में आचार्य जे. बी. कृपलानी ने जवाहरलाल नेहरू की सरकार के विरुद्ध रखा था और वह गिर गया। निंदा प्रस्ताव इसका दुर्बल रूप है: इसमें निश्चित आरोप बताना पड़ता है, यह एक मंत्री, मंत्रियों के समूह या पूरी मंत्रिपरिषद के विरुद्ध हो सकता है, और पारित हो जाने पर भी सरकार त्यागपत्र देने के लिए बाध्य नहीं होती। विश्वास प्रस्ताव इन दोनों का उलटा रूप है, जिसे सरकार स्वयं तब रखती है जब उससे बहुमत सिद्ध करने को कहा जाता है।

वे चर्चाएं जिनमें कोई प्रस्ताव नहीं होता

तीन उपाय सदन को किसी विषय पर चर्चा की अनुमति देते हैं, जिनमें कोई प्रस्ताव मतदान के लिए नहीं रखा जाता। आधे घंटे की चर्चा उस विषय पर होती है जो पर्याप्त लोक महत्व का हो और जिस पर सदन में पहले किसी प्रश्न का उत्तर दिया गया हो; अध्यक्ष इसके लिए सप्ताह में तीन बैठकें नियत करता है। अल्पकालिक चर्चा, जिसे दो घंटे की चर्चा भी कहते हैं, 1953 से प्रचलित है और लोकसभा नियमों के नियम 193 के अंतर्गत होती है; अध्यक्ष इसके लिए सप्ताह में दो बैठकें नियत करता है। दोनों में न औपचारिक प्रस्ताव होता है और न मत विभाजन, इसलिए सदन निर्णय लिए बिना अपनी राय दर्ज कर देता है। तीसरा उपाय उल्लेख है: जो विषय किसी और नियम में नहीं बैठता, वह राज्यसभा में विशेष उल्लेख के रूप में और लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत उल्लेख के रूप में उठाया जाता है।

याद रखने योग्य अन्य उपाय

व्यवस्था का प्रश्न तब उठाया जाता है जब सदस्य को लगे कि कार्यवाही नियमों या संविधान के अनुसार नहीं चल रही है। यह दो कारणों से असाधारण है: यह सदन के चल रहे कार्य को रोक देता है, और इस पर कोई वाद-विवाद नहीं होता, क्योंकि इसे केवल पीठासीन अधिकारी तय करता है। अनुच्छेद 100(3) के अनुसार गणपूर्ति सदन के कुल सदस्यों का दसवां भाग है, जिसमें पीठासीन अधिकारी भी गिना जाता है; गणपूर्ति न होने पर बैठक स्थगित करनी पड़ती है। कटौती प्रस्ताव अनुदान मांगों के विरुद्ध रखे जाते हैं और तीन प्रकार के होते हैं: नीति कटौती में मांग की राशि घटाकर एक रुपया करने की बात होती है, मितव्ययिता कटौती में एक निश्चित राशि से कमी मांगी जाती है, और सांकेतिक कटौती में किसी विशेष शिकायत को उठाने के लिए सौ रुपये की कमी मांगी जाती है। जब मांगों के लिए नियत समय समाप्त हो जाता है, अध्यक्ष गिलोटिन का प्रयोग करता है और शेष सभी मांगों को एक साथ मतदान के लिए रख देता है, चाहे उन पर चर्चा हुई हो या न हुई हो। अंत में, प्रत्येक संकल्प एक मूल प्रस्ताव होता है, और अनेक प्रस्तावों के विपरीत संकल्प पर सदन में मतदान अनिवार्य है।

परीक्षा की दृष्टि से

परीक्षक ठीक-ठीक संख्याएं और यह पूछते हैं कि कौन सा उपाय किस सदन का है। सबसे आम प्रश्न हैं: प्रश्नकाल कब होता है, किस प्रश्न पर पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं, 20 और 230 की दैनिक सीमा, शून्यकाल का वर्ष (1962) और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का वर्ष (1954), स्थगन तथा अविश्वास प्रस्ताव के लिए 50 सदस्य, दो घंटे तीस मिनट की चर्चा, अविश्वास प्रस्ताव का नियम 198 और अल्पकालिक चर्चा का नियम 193। तीन जाल हमेशा रहते हैं: लोकसभा की 20 तारांकित प्रश्नों की सीमा को राज्यसभा की 15 से बदल देना; निंदा प्रस्ताव को त्यागपत्र के लिए बाध्यकारी मान लेना, जो केवल अविश्वास प्रस्ताव करता है; और राज्यसभा सदस्य को स्थगन प्रस्ताव दे देना, जो केवल लोकसभा का है। यूपीएससी और राज्य परीक्षाओं के कथन आधारित प्रश्न आमतौर पर शून्यकाल के नियमों में न होने को तीन कटौती प्रस्तावों के साथ जोड़ते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्नकालबैठक का पहला घंटा, सामान्यतः पूर्वाह्न 11 से दोपहर 12 बजे तक
लोकसभा में प्रतिदिन तारांकित प्रश्न20 (राज्यसभा में 15)
लोकसभा में प्रतिदिन अतारांकित प्रश्न230 (राज्यसभा में 160)
प्रश्न के लिए सामान्य सूचना अवधिदस स्पष्ट दिन
शून्यकाल1962 से प्रचलित; प्रक्रिया नियमों में उल्लेख नहीं
ध्यानाकर्षण प्रस्तावभारतीय देन, 1954 से प्रचलित
अल्पकालिक चर्चालोकसभा नियमों का नियम 193; 1953 से प्रचलित; सप्ताह में दो बैठकें
आधे घंटे की चर्चासप्ताह में तीन बैठकें, उस विषय पर जिसका उत्तर सदन में पहले दिया गया हो
स्थगन प्रस्तावकेवल लोकसभा; 50 सदस्य; कम से कम दो घंटे तीस मिनट की चर्चा
अविश्वास प्रस्तावनियम 198, केवल लोकसभा; 50 सदस्य; कारण बताना आवश्यक नहीं
पहला अविश्वास प्रस्तावअगस्त 1963, आचार्य जे. बी. कृपलानी द्वारा नेहरू सरकार के विरुद्ध
धन्यवाद प्रस्तावअनुच्छेद 87 के अंतर्गत राष्ट्रपति के अभिभाषण पर
अन्य नियमों से बाहर के विषय का उल्लेखराज्यसभा में विशेष उल्लेख; लोकसभा में नियम 377
कटौती प्रस्तावनीति कटौती एक रुपया, मितव्ययिता कटौती निश्चित राशि, सांकेतिक कटौती सौ रुपये
गणपूर्तिसदन के कुल सदस्यों का दसवां भाग, अनुच्छेद 100(3)

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

भारतीय संसद में प्रश्नकाल सामान्यतः बैठक के किस भाग में होता है?

  1. A.बैठक का अंतिम घंटा
  2. B.बैठक का पहला घंटा
  3. C.भोजनावकाश के तुरंत बाद का घंटा
  4. D.दिन भर के लिए सदन स्थगित होने से पहले का घंटा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बैठक का पहला घंटा

व्याख्या

सही उत्तर B, बैठक का पहला घंटा है। प्रश्नकाल प्रत्येक सदन की प्रत्येक बैठक का पहला घंटा होता है, सामान्यतः पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक, और यह प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों में दिया गया है। इस घंटे में सदस्य मंत्रियों से उनके प्रभार के लोक प्रशासन संबंधी विषयों पर प्रश्न पूछते हैं और मंत्री उत्तर देने के लिए बाध्य होता है। A, अंतिम घंटा, गलत है क्योंकि बैठक का अंतिम भाग सूचीबद्ध विधायी या वित्तीय कार्य के लिए होता है, प्रश्नों के लिए नहीं। C गलत है क्योंकि प्रश्नकाल के बाद का समय शून्यकाल होता है और अवकाश के बाद वही कार्य होता है जो दिन की सूची में है; कोई उपाय भोजनावकाश से जुड़ा नहीं है। D गलत है क्योंकि स्थगन से पहले कोई घंटा प्रश्नों के लिए आरक्षित नहीं होता; प्रश्नकाल बीत जाने पर प्रश्न केवल अल्प सूचना प्रश्न के रूप में लिए जा सकते हैं, जिसे अध्यक्ष विशेष रूप से स्वीकार करे।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

भारतीय संसद में शून्यकाल किस वर्ष से प्रचलन में है?

  1. A.1952
  2. B.1954
  3. C.1962
  4. D.1977
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1962

व्याख्या

सही उत्तर C, 1962 है। शून्यकाल संसदीय प्रक्रिया में भारत की अपनी देन है और 1962 से प्रचलन में है। यह प्रश्नकाल के तुरंत बाद, लगभग दोपहर 12 बजे आरंभ होता है और दिन के सूचीबद्ध कार्य के आरंभ होने तक चलता है, तथा इसमें सदस्य बिना पूर्व सूचना कोई विषय उठा सकता है, जबकि हर दूसरा उपाय पूर्व सूचना मांगता है। परीक्षा में सबसे अधिक पूछी जाने वाली बात यह है कि इसका प्रक्रिया नियमों में कोई उल्लेख नहीं है, इसलिए यह अनौपचारिक उपाय है। A, 1952, गलत है क्योंकि उस वर्ष संविधान के अंतर्गत निर्वाचित संसद की पहली बैठक हुई थी, शून्यकाल आरंभ नहीं हुआ था। B, 1954, गलत है क्योंकि उस वर्ष से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रचलन में आया, जो एक अलग भारतीय देन है। D, 1977, गलत है; इस प्रकार का कोई उपाय उस वर्ष से नहीं है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

लोकसभा में तारांकित प्रश्न के बारे में कौन सा कथन सही है?

  1. A.इसका उत्तर लिखित में दिया जाता है और पूरक प्रश्न नहीं पूछे जा सकते
  2. B.इसका उत्तर मौखिक रूप से दिया जाता है और पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं
  3. C.इसका उत्तर केवल कोई निजी सदस्य देता है
  4. D.इसे स्वीकार कराने के लिए पचास सदस्यों का समर्थन आवश्यक है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इसका उत्तर मौखिक रूप से दिया जाता है और पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं

व्याख्या

सही उत्तर B, इसका उत्तर मौखिक रूप से दिया जाता है और पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं है। तारांकित प्रश्न तारे के चिह्न से अंकित होता है, मंत्री सदन के पटल पर उसका उत्तर देता है, और उत्तर मौखिक होने के कारण सदस्य उसके बाद पूरक प्रश्न पूछ सकते हैं। लोकसभा में एक दिन में अधिकतम बीस तारांकित प्रश्न रखे जा सकते हैं। A गलत है क्योंकि लिखित उत्तर और पूरक प्रश्नों का निषेध अतारांकित प्रश्न की पहचान है, जिसकी लोकसभा में दैनिक सीमा दो सौ तीस है। C गलत है क्योंकि निजी सदस्य से प्रश्न एक अलग श्रेणी है, जो तभी स्वीकार होती है जब विषय कोई विधेयक या उस सदस्य के प्रभार का कार्य हो। D गलत है क्योंकि पचास सदस्यों के समर्थन की शर्त स्थगन प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव पर लागू होती है, किसी प्रकार के प्रश्न पर नहीं।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

लोकसभा में एक दिन में मौखिक उत्तर के लिए अधिकतम कितने तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध किए जा सकते हैं?

  1. A.10
  2. B.15
  3. C.20
  4. D.230
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 20

व्याख्या

सही उत्तर C, 20 है। नियमों के अनुसार लोकसभा में किसी एक दिन मौखिक उत्तर के लिए अधिकतम बीस तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध किए जा सकते हैं, और यह लॉटरी से तय होता है कि किन सदस्यों के प्रश्नों को स्थान मिलेगा। B, 15, लोकसभा के लिए गलत है, किंतु राज्यसभा में यही सीमा है, इसीलिए यह इस प्रश्न का सबसे आम जाल है। D, 230, गलत है क्योंकि यह लोकसभा में एक दिन में सूचीबद्ध किए जा सकने वाले अतारांकित प्रश्नों की अधिकतम संख्या है, जिनका उत्तर लिखित होता है; राज्यसभा में यह सीमा एक सौ साठ है। A, 10, सीमा के रूप में गलत है, पर प्रश्न के लिए सामान्य सूचना अवधि दस स्पष्ट दिन है, और अभ्यर्थी सूचना अवधि को दैनिक सीमा समझ लेते हैं। ध्यान रखें कि यह सीमा केवल सूचीबद्ध प्रश्नों पर लागू होती है, पूरक प्रश्नों की संख्या पर नहीं, जिसे पीठासीन अधिकारी समय के अनुसार तय करता है।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संसद में स्थगन प्रस्ताव किस सदन में रखा जा सकता है?

  1. A.केवल लोकसभा में
  2. B.केवल राज्यसभा में
  3. C.किसी भी सदन में
  4. D.दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल लोकसभा में

व्याख्या

सही उत्तर A, केवल लोकसभा में है। स्थगन प्रस्ताव केवल लोकसभा में स्वीकार होता है, क्योंकि इसमें सरकार के विरुद्ध निंदा का तत्व होता है और अनुच्छेद 75 की सामूहिक उत्तरदायित्व की व्यवस्था के कारण मंत्रिपरिषद की निंदा केवल लोकसभा कर सकती है। यह सदन का ध्यान अत्यावश्यक लोक महत्व के किसी निश्चित विषय की ओर खींचता है, इसके लिए पचास सदस्यों का समर्थन चाहिए, और स्वीकार हो जाने पर इस पर चर्चा कम से कम दो घंटे तीस मिनट चलनी चाहिए। B गलत है क्योंकि राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव का प्रावधान ही नहीं है; वहां सदस्य ऐसा विषय विशेष उल्लेख या ध्यानाकर्षण सूचना से उठाता है। C इसी कारण गलत है। D गलत है क्योंकि संयुक्त बैठक अनुच्छेद 108 के अंतर्गत केवल किसी विधेयक पर गतिरोध दूर करने के लिए बुलाई जाती है और वहां इस प्रकार का प्रस्ताव नहीं लिया जाता।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

लोकसभा में स्वीकृत स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कम से कम कितनी देर चलनी चाहिए?

  1. A.एक घंटा
  2. B.दो घंटे
  3. C.दो घंटे तीस मिनट
  4. D.तीन घंटे
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. दो घंटे तीस मिनट

व्याख्या

सही उत्तर C, दो घंटे तीस मिनट है। नियमों में यह व्यवस्था है कि अध्यक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर लिए जाने पर सदन को उस पर कम से कम दो घंटे तीस मिनट की चर्चा देनी होगी, जिससे वह विषय, जो सूचीबद्ध कार्य स्थगित कराने योग्य गंभीर माना गया, वास्तव में परखा जाए। A, एक घंटा, गलत है, हालांकि इसे आधे घंटे की चर्चा से मिला दिया जाता है, जो पूर्णतः भिन्न उपाय है और तीस मिनट की होती है। B, दो घंटे, गलत है और इस प्रश्न का जाल है: नियम 193 के अंतर्गत अल्पकालिक चर्चा को लोकप्रिय भाषा में दो घंटे की चर्चा कहा जाता है और अभ्यर्थी उसकी अवधि स्थगन प्रस्ताव पर लगा देते हैं। D, तीन घंटे, गलत है; किसी नियम में इन उपायों के लिए तीन घंटे की न्यूनतम अवधि नहीं है।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव किस नियम के अंतर्गत रखा जाता है?

  1. A.नियम 176
  2. B.नियम 193
  3. C.नियम 198
  4. D.नियम 377
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. नियम 198

व्याख्या

सही उत्तर C, नियम 198 है। मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 198 के अंतर्गत रखा जाता है। इसे स्वीकार कराने के लिए पचास सदस्यों का समर्थन चाहिए, इसमें कोई कारण नहीं बताया जाता, और यह पारित हो जाने पर पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, क्योंकि अनुच्छेद 75 मंत्रिपरिषद को लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है। A, नियम 176, लोकसभा के लिए गलत है; यह राज्यसभा में अल्पकालिक चर्चा का नियम है। B, नियम 193, गलत है क्योंकि यह लोकसभा में अल्पकालिक चर्चा का नियम है, जिसमें न औपचारिक प्रस्ताव होता है और न मतदान। D, नियम 377, गलत है क्योंकि इसके अंतर्गत लोकसभा में वह विषय उठाया जाता है जो किसी और नियम में नहीं आता। ध्यान रखें कि नियम की संख्या नियमावली की है, संविधान के अनुच्छेद की नहीं; संविधान में अविश्वास प्रस्ताव का नाम से कोई उल्लेख नहीं है।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

स्वतंत्रता के बाद लोकसभा में पहला अविश्वास प्रस्ताव किसने रखा था?

  1. A.आचार्य जे. बी. कृपलानी
  2. B.राम मनोहर लोहिया
  3. C.अटल बिहारी वाजपेयी
  4. D.सी. राजगोपालाचारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आचार्य जे. बी. कृपलानी

व्याख्या

सही उत्तर A, आचार्य जे. बी. कृपलानी है। स्वतंत्रता के बाद लोकसभा में पहला अविश्वास प्रस्ताव अगस्त 1963 में आचार्य जे. बी. कृपलानी ने जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के विरुद्ध रखा था, 1962 के युद्ध के बाद बने वातावरण में, और वह प्रस्ताव गिर गया। B गलत है क्योंकि राम मनोहर लोहिया उस दौर में सरकार के सबसे तीखे आलोचकों में थे, पर पहला ऐसा प्रस्ताव उन्होंने नहीं रखा। C गलत है क्योंकि अटल बिहारी वाजपेयी लोकसभा में बाद में आए और उन्हें 1999 में विश्वास प्रस्ताव पर गिरी सरकार के लिए याद किया जाता है, जो सरकार द्वारा स्वयं रखा जाने वाला भिन्न उपाय है। D गलत है क्योंकि सी. राजगोपालाचारी कभी लोकसभा के सदस्य नहीं रहे; वे गवर्नर जनरल रहे और बाद में संसद के बाहर रहकर स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

अविश्वास प्रस्ताव की तुलना में निंदा प्रस्ताव की विशिष्ट पहचान कौन सी है?

  1. A.यह केवल राज्यसभा में रखा जा सकता है
  2. B.इसमें आधार बनने वाले कारण बताना अनिवार्य है
  3. C.इसके लिए एक सौ सदस्यों का समर्थन आवश्यक है
  4. D.यह पारित होने पर मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इसमें आधार बनने वाले कारण बताना अनिवार्य है

व्याख्या

सही उत्तर B, इसमें आधार बनने वाले कारण बताना अनिवार्य है है। निंदा प्रस्ताव में उस मंत्री या मंत्रियों के विरुद्ध निश्चित आरोप बताना पड़ता है जिनका वह नाम लेता है, जबकि अविश्वास प्रस्ताव में कोई आधार बताना आवश्यक नहीं। निंदा प्रस्ताव किसी एक मंत्री, मंत्रियों के समूह या पूरी मंत्रिपरिषद के विरुद्ध हो सकता है। A गलत है क्योंकि निंदा प्रस्ताव भी अविश्वास प्रस्ताव की तरह केवल लोकसभा में रखा जाता है। C गलत है क्योंकि एक सौ सदस्यों की कोई न्यूनतम शर्त कहीं नहीं है; याद रखने योग्य संख्या पचास है, जो स्थगन प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव पर लागू होती है। D गलत है, और यही दूसरी दिशा का मुख्य अंतर है: निंदा प्रस्ताव पारित होने पर मंत्रिपरिषद त्यागपत्र देने को बाध्य नहीं होती, जबकि अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर बाध्य होती है।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, जिसके द्वारा सदस्य किसी मंत्री का ध्यान अत्यावश्यक लोक महत्व के विषय की ओर खींचता है, भारतीय संसद में किस वर्ष से प्रचलित है?

  1. A.1950
  2. B.1954
  3. C.1962
  4. D.1971
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1954

व्याख्या

सही उत्तर B, 1954 है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव संसदीय प्रक्रिया में भारत की अपनी देन है और 1954 से प्रचलित है। सदस्य किसी मंत्री का ध्यान अत्यावश्यक लोक महत्व के विषय की ओर खींचता है और मंत्री उस पर वक्तव्य देता है, जिसके बाद सदस्य स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। शून्यकाल के विपरीत इसका उल्लेख प्रक्रिया नियमों में है, इसलिए यह औपचारिक उपाय है। A, 1950, गलत है; उस वर्ष संविधान लागू हुआ था, यह उपाय बाद में आया। C, 1962, गलत है क्योंकि उस वर्ष से शून्यकाल प्रचलित है, और ये दो भारतीय देनें विकल्पों में आमतौर पर आपस में बदल दी जाती हैं। D, 1971, गलत है; उस वर्ष से इस प्रकार का कोई उपाय नहीं है, हालांकि चौबीसवां संविधान संशोधन उसी वर्ष का है। ध्यान रखें कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दोनों सदनों में उपलब्ध है, जबकि स्थगन प्रस्ताव केवल लोकसभा में, और यही अंतर विकल्पों में जाल बनाता है।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

वह कटौती प्रस्ताव जिसमें किसी अनुदान मांग की राशि घटाकर एक रुपया करने की मांग की जाती है, क्या कहलाता है?

  1. A.नीति कटौती
  2. B.मितव्ययिता कटौती
  3. C.सांकेतिक कटौती
  4. D.गिलोटिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नीति कटौती

व्याख्या

सही उत्तर A, नीति कटौती है। नीति कटौती प्रस्ताव में मांग की राशि घटाकर एक रुपया करने की बात होती है, जिसका अर्थ उस मांग के पीछे की नीति को पूरी तरह अस्वीकार करना है, और प्रस्तावक वैकल्पिक नीति सुझा सकता है। B, मितव्ययिता कटौती, गलत है क्योंकि इसमें मांग को एक निश्चित राशि से घटाने की बात होती है, जो नीति को अस्वीकार किए बिना की जा सकने वाली बचत दर्शाती है। C, सांकेतिक कटौती, गलत है क्योंकि इसमें ठीक सौ रुपये की कमी मांगी जाती है और यह केवल भारत सरकार के क्षेत्र की किसी विशेष शिकायत को उठाने के लिए रखी जाती है। D, गिलोटिन, गलत है क्योंकि वह कटौती प्रस्ताव नहीं है: अनुदान मांगों के लिए नियत समय समाप्त होने पर अध्यक्ष इसी के द्वारा शेष सभी मांगों को एक साथ मतदान के लिए रख देता है, चाहे उन पर चर्चा हुई हो या नहीं।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संसद के किसी सदन की बैठक के गठन के लिए गणपूर्ति कितनी होती है?

  1. A.सदन के कुल सदस्यों का एक चौथाई
  2. B.सदन के कुल सदस्यों का दसवां भाग
  3. C.सदन के कुल सदस्यों का एक तिहाई
  4. D.सदन के पचास सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सदन के कुल सदस्यों का दसवां भाग

व्याख्या

सही उत्तर B, सदन के कुल सदस्यों का दसवां भाग है। संविधान का अनुच्छेद 100(3) कहता है कि संसद के किसी भी सदन की बैठक के गठन के लिए गणपूर्ति उस सदन के कुल सदस्यों का दसवां भाग होगी, और पीठासीन अधिकारी भी उसी दसवें भाग में गिना जाता है। गणपूर्ति न होने पर पीठासीन अधिकारी का कर्तव्य है कि वह सदन स्थगित कर दे या गणपूर्ति होने तक बैठक निलंबित रखे। A, एक चौथाई, और C, एक तिहाई, गलत हैं क्योंकि किसी प्रावधान में गणपूर्ति इन अंशों में नहीं है; एक तिहाई का संबंध अन्य विषयों से है, जैसे राज्यसभा के एक तिहाई सदस्यों का प्रत्येक दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होना। D, पचास सदस्य, गलत है क्योंकि पचास की संख्या लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार कराने के लिए चाहिए, बैठक की गणपूर्ति के लिए नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्नकाल और शून्यकाल में क्या अंतर है?

प्रश्नकाल बैठक का पहला घंटा है, इसकी व्यवस्था प्रक्रिया नियमों में है, और इसमें निर्धारित सूचना देकर केवल मंत्रियों से प्रश्न पूछे जाते हैं। शून्यकाल प्रश्नकाल समाप्त होने पर आरंभ होता है, 1962 से प्रचलित है, नियमों में इसका कोई उल्लेख नहीं है, और इसमें सदस्य बिना पूर्व सूचना कोई भी विषय उठा सकता है। एक औपचारिक और नियमबद्ध है, दूसरा अनौपचारिक और पीठासीन अधिकारी पर निर्भर।

स्थगन प्रस्ताव के लिए कितने सदस्यों का समर्थन आवश्यक है?

लोकसभा के पचास सदस्यों का। अध्यक्ष प्रस्ताव तभी स्वीकार करता है जब उसे यह समर्थन मिले, विषय निश्चित, तथ्यात्मक, अत्यावश्यक और लोक महत्व का हो, और उसमें केवल एक ऐसा मुद्दा हो जो किसी न्यायालय में विचाराधीन न हो। स्वीकार हो जाने पर सदन को उस पर कम से कम दो घंटे तीस मिनट चर्चा करनी होती है।

क्या अविश्वास प्रस्ताव राज्यसभा में रखा जा सकता है?

नहीं। अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में रखा जा सकता है, क्योंकि अनुच्छेद 75 मंत्रिपरिषद को केवल लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है। इसी कारण स्थगन प्रस्ताव और निंदा प्रस्ताव भी केवल लोकसभा तक सीमित हैं।

निंदा प्रस्ताव पारित होने पर सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है?

नहीं। निंदा प्रस्ताव सदन की अप्रसन्नता व्यक्त करता है और उसमें निश्चित आरोप बताना अनिवार्य है, पर उसके पारित होने पर मंत्रिपरिषद त्यागपत्र देने को बाध्य नहीं होती। केवल अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद को जाना पड़ता है।

संसदीय प्रक्रिया में गिलोटिन क्या है?

जब अनुदान मांगों पर चर्चा के लिए सदन द्वारा नियत समय समाप्त हो जाता है, तब अध्यक्ष शेष सभी मांगों को एक साथ मतदान के लिए रख देता है, चाहे उन पर चर्चा हुई हो या न हुई हो। इस उपाय को गिलोटिन कहते हैं और यह सुनिश्चित करता है कि बजट नियत समय में पारित हो जाए।

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