राज्यपाल और राज्य कार्यपालिका: अनुच्छेद और शक्तियाँ
राज्यपाल और राज्य कार्यपालिका के पूर्ण नोट्स: अनुच्छेद 153 से 167, नियुक्ति और कार्यकाल, अध्यादेश तथा क्षमादान शक्ति, विवेकाधिकार, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और संघ तथा राज्य सरकार के बीच पहली कड़ी है। संविधान का भाग VI, अनुच्छेद 153 से 167 तक, राज्य कार्यपालिका का ढाँचा देता है: राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद और महाधिवक्ता। यह अध्याय परीक्षाओं में हर वर्ष आता है, क्योंकि इसमें निश्चित नियम और विवेकाधिकार दोनों हैं, और इसके अनुच्छेद राष्ट्रपति से जुड़े अनुच्छेदों से मिलते-जुलते होने के कारण भ्रम पैदा करते हैं।
राज्यपाल का पद
अनुच्छेद 153 कहता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। सातवें संविधान संशोधन, 1956 ने जोड़ा कि एक ही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित करता है, जिसे वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से प्रयोग करता है। अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है; उसका निर्वाचन न प्रत्यक्ष होता है, न अप्रत्यक्ष। अनुच्छेद 156 पाँच वर्ष का कार्यकाल देता है, परंतु राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, इसलिए यह कार्यकाल सुरक्षित नहीं है; त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित होता है। अनुच्छेद 157 केवल दो योग्यताएँ रखता है: व्यक्ति भारत का नागरिक हो और उसने 35 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो। अनुच्छेद 158 राज्यपाल को संसद या किसी राज्य विधानमंडल का सदस्य होने तथा कोई लाभ का पद धारण करने से रोकता है; उसकी उपलब्धियाँ राज्य की संचित निधि पर भारित होती हैं और कार्यकाल में घटाई नहीं जा सकतीं। अनुच्छेद 159 के अंतर्गत शपथ उस राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश दिलाता है, और उसकी अनुपस्थिति में उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश।
राज्यपाल की शक्तियाँ
राज्यपाल की शक्तियाँ कार्यपालिका, विधायी, वित्तीय और न्यायिक हैं। वह मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रियों, अनुच्छेद 165 के अंतर्गत महाधिवक्ता तथा राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करता है। अनुच्छेद 168 के अनुसार राज्य विधानमंडल में राज्यपाल और एक या दो सदन होते हैं, इसलिए वह अनुच्छेद 174 के अंतर्गत सदन को आहूत, सत्रावसान और विघटित करता है तथा अनुच्छेद 176 के अंतर्गत अभिभाषण देता है। अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद के एक-छठे सदस्य वह साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा के विशेषज्ञों में से मनोनीत करता है। अनुच्छेद 200 विधेयक पर चार विकल्प देता है: अनुमति देना, अनुमति रोकना, धन विधेयक के अतिरिक्त विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाना, या राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखना। अनुच्छेद 213 उसे सदन के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है। वित्तीय रूप से, धन विधेयक विधानसभा में उसकी सिफारिश पर ही पुरःस्थापित हो सकता है और राज्य का बजट उसके नाम से सदन में रखा जाता है। अनुच्छेद 161 उसे क्षमा, प्रविलंबन, विराम और परिहार की शक्ति देता है। उसकी न्यायिक शक्ति राष्ट्रपति से संकुचित है: वह मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकता, यद्यपि उसे निलंबित, कम या लघुकृत कर सकता है, और सैन्य न्यायालय के दंडादेश पर उसका कोई अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद
अनुच्छेद 163 कहता है कि राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी, सिवाय उन विषयों के जिनमें वह विवेक से कार्य करता है। अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है। मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, परंतु मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, और यही उसके टिके रहने की असली कसौटी है। इक्यानबेवें संविधान संशोधन, 2003 ने अनुच्छेद 164(1क) जोड़ा: मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और बारह से कम नहीं होगी। अनुच्छेद 164(1) का परंतुक छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा में जनजातीय कल्याण मंत्री रखना अनिवार्य करता है। अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री का कर्तव्य बताता है कि वह राज्य के प्रशासन की जानकारी राज्यपाल को दे।
विवेकाधिकार और व्यवहार
सामान्य स्थिति में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है, जैसा उच्चतम न्यायालय ने शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1974) में कहा। उसका विवेकाधिकार कुछ स्थितियों में बना रहता है: किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति, सदन का विश्वास खो चुके मंत्रिमंडल को हटाना, अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, और विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना। कुछ राज्यपालों की विशेष जिम्मेदारियाँ हैं: अनुच्छेद 371क के अंतर्गत नागालैंड में विधि-व्यवस्था, अनुच्छेद 371(2) के अंतर्गत विदर्भ और मराठवाड़ा के विकास बोर्ड, तथा छठी अनुसूची के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन।
परीक्षा के तथ्य
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| 153 | प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल |
| 155 | राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति |
| 157 | भारत का नागरिक, 35 वर्ष आयु |
| 161 | राज्यपाल की क्षमादान शक्ति |
| 164(1क) | मंत्री: 15 प्रतिशत सीमा, न्यूनतम 12 |
| 165 | राज्य का महाधिवक्ता |
| 200 | विधेयकों पर अनुमति |
| 213 | अध्यादेश जारी करने की शक्ति |
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्नपत्र सबसे पहले अनुच्छेद संख्याएँ पूछते हैं: 153, 155, 156, 157, 159, 161, 163, 164, 165, 200 और 213। पसंदीदा जाल हैं अनुच्छेद 123 और 213 की अदला-बदली, अनुच्छेद 72 और 161 का भ्रम, शपथ दिलाने वाले के रूप में उच्च न्यायालय के स्थान पर भारत का मुख्य न्यायाधीश बताना, और यह भूल जाना कि राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकता। कथन आधारित प्रश्न पूछते हैं कि राज्यपाल निर्वाचित है या नहीं, उसका कार्यकाल निश्चित है या नहीं, और उसका विवेकाधिकार कहाँ बचा रहता है। 15 प्रतिशत की सीमा तथा 12 मंत्रियों का न्यूनतम, और जनजातीय कल्याण मंत्री वाले चार राज्य लगभग हर वर्ष पूछे जाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भाग और अनुच्छेद | भाग VI, अनुच्छेद 153 से 167 (राज्य कार्यपालिका) |
|---|---|
| नियुक्ति | अनुच्छेद 155 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा |
| योग्यताएँ | भारत का नागरिक, 35 वर्ष की आयु (अनुच्छेद 157) |
| शपथ | उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश दिलाता है (अनुच्छेद 159) |
| कार्यकाल | पाँच वर्ष, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (अनुच्छेद 156) |
| क्षमादान शक्ति | अनुच्छेद 161; मृत्युदंड की क्षमा नहीं, सैन्य न्यायालय पर अधिकार नहीं |
| मंत्री | विधानसभा के अधिकतम 15 प्रतिशत, न्यूनतम 12 (अनुच्छेद 164(1क)) |
| अध्यादेश | अनुच्छेद 213, सदन के समवेत होने के छह सप्ताह बाद समाप्त |
| महाधिवक्ता | अनुच्छेद 165 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा नियुक्त |
| विधेयकों पर अनुमति | अनुच्छेद 200: अनुमति, रोकना, लौटाना या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से किस राज्य में विधान परिषद है?
- A.झारखंड
- B.कर्नाटक
- C.ओडिशा
- D.गुजरात
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कर्नाटक
व्याख्या
सही उत्तर B, कर्नाटक है। अनुच्छेद 168 कहता है कि राज्य विधानमंडल में राज्यपाल तथा एक या दो सदन होते हैं। जहाँ दो सदन हैं, वहाँ उच्च सदन विधान परिषद कहलाता है, और कर्नाटक उन थोड़े राज्यों में है जिन्होंने इसे बनाए रखा है। अनुच्छेद 169 संसद को यह शक्ति देता है कि किसी राज्य की विधानसभा विशेष बहुमत से संकल्प पारित करे तो वह परिषद का सृजन या उत्सादन कर सके, इसीलिए ऐसे राज्यों की सूची छोटी है और केवल विधि द्वारा बदलती है। विकल्प A, झारखंड में केवल विधानसभा है; विकल्प C, ओडिशा में भी केवल विधानसभा है, यद्यपि वहाँ परिषद के प्रस्ताव पर चर्चा होती रही है; और विकल्प D, गुजरात में भी एक ही सदन है। अनुच्छेद 171 के अनुसार परिषद के एक-छठे सदस्य राज्यपाल साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा के विशेषज्ञों में से मनोनीत करता है, और यही इस अध्याय का राज्य कार्यपालिका से संबंध है।
निम्नलिखित में से किन राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल है? 1. आंध्र प्रदेश 2. तेलंगाना 3. बिहार 4. उत्तर प्रदेश। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A.केवल 1
- B.केवल 1, 2 और 3
- C.केवल 3 और 4
- D.1, 2, 3 और 4
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1, 2, 3 और 4
व्याख्या
सही उत्तर D, चारों है। द्विसदनीय राज्य विधानमंडल में विधानसभा और विधान परिषद दोनों होते हैं, और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार तथा उत्तर प्रदेश में दोनों सदन हैं। विकल्प A, B और C इसलिए गलत हैं कि इनमें से हर एक किसी ऐसे राज्य को छोड़ देता है जिसमें परिषद विद्यमान है। बिहार में परिषद स्वतंत्रता से पहले से है और उत्तर प्रदेश द्विसदनीय राज्यों में सबसे बड़ा है; आंध्र प्रदेश ने संसद के अधिनियम द्वारा अपनी परिषद पुनर्जीवित की, और तेलंगाना को 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होने पर परिषद मिली। इस व्यवस्था में राज्यपाल केंद्रीय है: अनुच्छेद 168 के अनुसार वह विधानमंडल का अंग है, अनुच्छेद 171 के अनुसार परिषद के एक-छठे सदस्य मनोनीत करता है, और अनुच्छेद 169 के अनुसार विधानसभा के विशेष बहुमत संकल्प तथा संसद की विधि के बिना कोई परिषद न बन सकती है, न समाप्त हो सकती है।
संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत राष्ट्रपति राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति करता है?
- A.अनुच्छेद 153
- B.अनुच्छेद 154
- C.अनुच्छेद 155
- D.अनुच्छेद 156
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 155
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 155 है। यह उपबंध करता है कि राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करेगा। यही एक पंक्ति दो तथ्य तय कर देती है जिन्हें परीक्षक पसंद करते हैं: यह पद नियुक्ति से भरा जाता है, किसी प्रकार के निर्वाचन से नहीं, और नियुक्ति करने वाला प्राधिकारी राष्ट्रपति है, जो संघ की मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है। विकल्प A, अनुच्छेद 153 केवल यह कहता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा, तथा 1956 के सातवें संशोधन द्वारा जोड़ा गया परंतुक एक व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल बनने देता है। विकल्प B, अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित करता है। विकल्प D, अनुच्छेद 156 कार्यकाल से संबंधित है: पाँच वर्ष, परंतु राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत, और त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित।
अनुच्छेद 157 के अनुसार राज्यपाल पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
- A.25 वर्ष
- B.30 वर्ष
- C.35 वर्ष
- D.40 वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 35 वर्ष
व्याख्या
सही उत्तर C, 35 वर्ष है। अनुच्छेद 157 इस पद के लिए केवल दो योग्यताएँ रखता है: व्यक्ति भारत का नागरिक हो और उसने पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर ली हो। यही आयु अनुच्छेद 58 के अंतर्गत राष्ट्रपति के लिए भी निर्धारित है, इसलिए दोनों को साथ याद रखना सरल है। विकल्प A, 25 वर्ष राज्य विधानसभा तथा लोकसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु है। विकल्प B, 30 वर्ष राज्यसभा तथा राज्य विधान परिषद की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु है। विकल्प D, 40 वर्ष इन पदों के लिए संविधान में कहीं भी आयु योग्यता नहीं है। अनुच्छेद 158 पद की शर्तें जोड़ता है: राज्यपाल संसद या किसी राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं हो सकता, कोई लाभ का पद धारण नहीं कर सकता, और उसकी उपलब्धियाँ राज्य की संचित निधि पर भारित होती हैं।
राज्य के राज्यपाल को पद की शपथ कौन दिलाता है?
- A.भारत का राष्ट्रपति
- B.भारत का मुख्य न्यायाधीश
- C.उस राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
- D.उस राज्य का मुख्यमंत्री
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. उस राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
व्याख्या
सही उत्तर C, उस राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश है। अनुच्छेद 159 कहता है कि पद की शपथ उस उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश दिलाएगा जिसकी अधिकारिता राज्य पर है, और उसकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय का उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश। विकल्प A गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति अनुच्छेद 155 के अंतर्गत राज्यपाल की नियुक्ति करता है, परंतु शपथ नहीं दिलाता। विकल्प B एक सामान्य भ्रम है: भारत का मुख्य न्यायाधीश अनुच्छेद 60 के अंतर्गत राष्ट्रपति को शपथ दिलाता है, राज्यपाल को नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि मुख्यमंत्री स्वयं अनुच्छेद 164 के अंतर्गत राज्यपाल से शपथ लेता है, अर्थात क्रम उल्टा है। यह जोड़ी याद रखें: राष्ट्रपति के लिए भारत का मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल के लिए उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, और मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों के लिए राज्यपाल।
मृत्युदंड के संबंध में अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल को कौन-सी शक्ति प्राप्त नहीं है?
- A.क्षमा
- B.लघुकरण
- C.परिहार
- D.प्रविलंबन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्षमा
व्याख्या
सही उत्तर A, क्षमा है। अनुच्छेद 161 राज्यपाल को उन विषयों से संबंधित मामलों में क्षमा, प्रविलंबन, विराम और परिहार देने तथा दंडादेश को निलंबित, परिहृत या लघुकृत करने की शक्ति देता है जिन पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति विस्तृत है। स्थापित व्याख्या यह है कि मृत्युदंड को क्षमा करने की शक्ति अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति के पास है, राज्यपाल के पास नहीं। विकल्प B, C और D मृत्युदंड की स्थिति में भी उसे प्राप्त हैं: विकल्प B का लघुकरण दंड के स्थान पर हल्का दंड रखता है, जैसे मृत्युदंड के बदले आजीवन कारावास; विकल्प C का परिहार दंड की मात्रा घटाता है, उसका स्वरूप नहीं बदलता; और विकल्प D का प्रविलंबन निष्पादन को कुछ समय के लिए रोक देता है। दो और सीमाएँ याद रखने योग्य हैं: सैन्य न्यायालय के दंडादेश पर राज्यपाल का कोई अधिकार नहीं है, और वह शक्ति भी राष्ट्रपति के पास है।
किस संविधान संशोधन ने राज्य मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा की सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक न होने की सीमा तय की?
- A.42वाँ संशोधन, 1976
- B.73वाँ संशोधन, 1992
- C.91वाँ संशोधन, 2003
- D.97वाँ संशोधन, 2011
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 91वाँ संशोधन, 2003
व्याख्या
सही उत्तर C, 91वाँ संशोधन, 2003 है। इसने अनुच्छेद 164(1क) जोड़ा, जिसके अनुसार मुख्यमंत्री सहित राज्य के मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, तथा न्यूनतम सीमा बारह मंत्रियों की है। इसी संशोधन ने अनुच्छेद 75(1क) द्वारा संघ की मंत्रिपरिषद पर भी ऐसी ही सीमा लगाई और दलबदल विरोधी कानून को कठोर किया। विकल्प A, 1976 का 42वाँ संशोधन मंत्रिपरिषद की सलाह को राष्ट्रपति पर बाध्यकारी बनाता है और उद्देशिका में शब्द जोड़ता है, परंतु ऐसी कोई सीमा नहीं रखता। विकल्प B, 1992 का 73वाँ संशोधन पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देता है। विकल्प D, 2011 का 97वाँ संशोधन सहकारी समितियों से संबंधित है। पंद्रह प्रतिशत के नियम का उद्देश्य विधायकों को संतुष्ट रखने के लिए बनाए जाने वाले विशाल मंत्रिमंडलों को रोकना था।
अनुच्छेद 164(1) का परंतुक किन राज्यों में जनजातीय कल्याण मंत्री रखना अनिवार्य करता है?
- A.असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा
- B.छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा
- C.नागालैंड, मणिपुर, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश
- D.राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा
व्याख्या
सही उत्तर B, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा है। अनुच्छेद 164(1) का परंतुक इन राज्यों में जनजातीय कल्याण का प्रभार रखने वाला मंत्री अनिवार्य करता है, जो अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के कल्याण अथवा किसी अन्य कार्य का प्रभार भी रख सकता है। मूल सूची में बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा थे; वर्ष 2000 में झारखंड और छत्तीसगढ़ के गठन पर परंतुक संशोधित हुआ और बाद में बिहार इससे हटा दिया गया। विकल्प A उन राज्यों के नाम देता है जिनके जनजातीय क्षेत्र छठी अनुसूची के अंतर्गत प्रशासित होते हैं, जहाँ राज्यपाल की विशेष जिम्मेदारियाँ हैं, परंतु वह अलग प्रावधान है। विकल्प C भाग XXI के विशेष उपबंधों वाले राज्य हैं, जैसे नागालैंड के लिए अनुच्छेद 371क। विकल्प D के लिए संविधान में ऐसी कोई अपेक्षा नहीं है। परीक्षक इसे अनुच्छेद 164(1क) और अनुच्छेद 164(4) के साथ जोड़कर पूछते हैं।
राज्य का राज्यपाल संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत अध्यादेश जारी कर सकता है?
- A.अनुच्छेद 123
- B.अनुच्छेद 200
- C.अनुच्छेद 213
- D.अनुच्छेद 356
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 213
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 213 है। यह राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने देता है जब राज्य विधानमंडल, अथवा दो सदन होने पर कोई एक सदन, सत्र में न हो और उसका समाधान हो जाए कि ऐसी परिस्थितियाँ हैं जिनमें तुरंत कार्रवाई आवश्यक है। ऐसे अध्यादेश की शक्ति विधानमंडल के अधिनियम के समान होती है, परंतु सदन के पुनः समवेत होने पर उसे सदन के समक्ष रखना पड़ता है और वह उस तारीख से छह सप्ताह में समाप्त हो जाता है, जब तक पहले अनुमोदित न हो जाए। विकल्प A, अनुच्छेद 123 संघ स्तर पर राष्ट्रपति की यही शक्ति है, और दोनों संख्याओं की अदला-बदली इस प्रश्न की सबसे आम भूल है। विकल्प B, अनुच्छेद 200 विधेयकों पर अनुमति से संबंधित है। विकल्प D, अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति शासन से संबंधित है, जो राज्यपाल के प्रतिवेदन के बाद आता है।
राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल किस अनुच्छेद के अंतर्गत करता है?
- A.अनुच्छेद 76
- B.अनुच्छेद 163
- C.अनुच्छेद 165
- D.अनुच्छेद 167
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 165
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 165 है। राज्यपाल ऐसे व्यक्ति को महाधिवक्ता नियुक्त करता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखता हो; महाधिवक्ता राज्य सरकार को विधिक विषयों पर सलाह देता है, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और ऐसा पारिश्रमिक पाता है जो राज्यपाल निर्धारित करे। अनुच्छेद 177 उसे राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार देता है, यद्यपि वह मत नहीं दे सकता। विकल्प A, अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी के लिए संगत उपबंध है, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश होने की योग्यता रखता हो। विकल्प B, अनुच्छेद 163 मंत्रिपरिषद द्वारा राज्यपाल को सहायता और सलाह का उपबंध करता है। विकल्प D, अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के कर्तव्यों की सूची देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राज्यपाल निर्वाचित होता है या नियुक्त?
नियुक्त। अनुच्छेद 155 कहता है कि राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है। संविधान सभा ने निर्वाचित राज्यपाल का विचार अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि निर्वाचित प्रमुख मुख्यमंत्री के सामने प्रतिद्वंद्वी सत्ता केंद्र बन जाता।
राज्यपाल का कार्यकाल कितना होता है?
अनुच्छेद 156 पद ग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष देता है, परंतु वही अनुच्छेद कहता है कि वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, इसलिए पाँच वर्ष अधिकतम सीमा है, गारंटी नहीं। उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक वह पद पर बना रहता है और त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित करता है।
क्या राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा कर सकता है?
नहीं। अनुच्छेद 161 के अंतर्गत वह प्रविलंबन, विराम और परिहार दे सकता है तथा मृत्युदंड को निलंबित, परिहृत या लघुकृत कर सकता है, परंतु मृत्युदंड को क्षमा करने की शक्ति अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति के पास है। सैन्य न्यायालय के दंडादेश पर भी उसका अधिकार नहीं है।
राज्यपाल अपने विवेक से कब कार्य करता है?
मुख्यतः तब जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत न हो और मुख्यमंत्री चुनना हो, जब मंत्रिमंडल सदन का विश्वास खो दे, जब अनुच्छेद 200 के अंतर्गत विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखा जाए, और जब वह अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति को प्रतिवेदन भेजे। अनुच्छेद 163 उसके समाधान को अंतिम बनाता है।
किसी राज्य में कितने मंत्री हो सकते हैं?
अनुच्छेद 164(1क), जो 2003 के 91वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया, मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद को विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित करता है, और बारह मंत्रियों का न्यूनतम तय करता है ताकि छोटे राज्यों में कार्यशील मंत्रिमंडल बन सके।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग VI: राज्य — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (कक्षा XI), अध्याय 5 — एनसीईआरटी





