विधायी प्रक्रिया और विधेयकों के प्रकार: धन विधेयक
संसद की विधायी प्रक्रिया पर परीक्षा नोट्स: विधेयकों के प्रकार, तीन वाचन, अनुच्छेद 110 का धन विधेयक, संयुक्त बैठक, राष्ट्रपति की स्वीकृति और विधेयकों का व्यतीत होना।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

संसद का पहला कार्य कानून बनाना है, और संविधान यह तय करता है कि कोई प्रस्ताव अधिनियम बनने से पहले किस मार्ग से गुजरेगा। अनुच्छेद 107 से 122 तक इसी विधायी प्रक्रिया से संबंधित हैं। विधेयक केवल एक प्रारूप प्रस्ताव है; वह अधिनियम तब बनता है जब दोनों सदन उसे समान रूप में पारित कर दें और राष्ट्रपति स्वीकृति दे दें। परीक्षक इस अध्याय पर हर वर्ष प्रश्न पूछते हैं, क्योंकि विधेयक के प्रकार के अनुसार नियम बहुत बदल जाते हैं, और जो अभ्यर्थी धन विधेयक तथा वित्त विधेयक में अंतर नहीं कर पाता, वह सरल अंक गँवा देता है।
विधेयकों का वर्गीकरण
विधेयकों का वर्गीकरण दो आधारों पर होता है। प्रस्तुत करने वाले के आधार पर विधेयक सरकारी विधेयक होता है, जिसे मंत्री प्रस्तुत करता है, अथवा गैर-सरकारी सदस्य का विधेयक, जिसे कोई अन्य सदस्य एक माह की सूचना देकर प्रस्तुत करता है। विषय-वस्तु के आधार पर चार प्रकार होते हैं: अनुच्छेद 107 के अंतर्गत साधारण विधेयक, अनुच्छेद 110 के अंतर्गत धन विधेयक, अनुच्छेद 117 के अंतर्गत वित्त विधेयक तथा अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन विधेयक।
| विधेयक का प्रकार | अनुच्छेद | कहाँ प्रस्तुत | राज्यसभा की शक्ति | संयुक्त बैठक |
|---|---|---|---|---|
| साधारण विधेयक | 107 | किसी भी सदन में | पूर्ण: पारित, संशोधित या अस्वीकृत | हाँ |
| धन विधेयक | 110 | केवल लोकसभा में, राष्ट्रपति की सिफारिश पर | केवल सिफारिश, 14 दिन में | नहीं |
| वित्त विधेयक, प्रथम श्रेणी | 117(1) | केवल लोकसभा में, राष्ट्रपति की सिफारिश पर | साधारण विधेयक के समान पूर्ण | हाँ |
| वित्त विधेयक, द्वितीय श्रेणी | 117(3) | किसी भी सदन में | साधारण विधेयक के समान पूर्ण | हाँ |
| संविधान संशोधन विधेयक | 368 | किसी भी सदन में | समान: विशेष बहुमत से पारित करना अनिवार्य | नहीं |
साधारण विधेयक के तीन वाचन
प्रत्येक साधारण विधेयक हर सदन में तीन वाचनों से गुजरता है। प्रथम वाचन में प्रभारी सदस्य विधेयक प्रस्तुत करने की अनुमति माँगता है, विधेयक का नाम तथा उद्देश्य पढ़े जाते हैं, कोई चर्चा नहीं होती और विधेयक राजपत्र में प्रकाशित होता है। द्वितीय वाचन सबसे लंबा चरण है और इसके तीन भाग हैं: विधेयक के सिद्धांत पर सामान्य चर्चा, समिति अवस्था जिसमें प्रवर या संयुक्त समिति खंड-दर-खंड परीक्षण कर प्रतिवेदन देती है, तथा विचारण अवस्था जिसमें सदन स्वयं प्रत्येक खंड और प्रस्तावित संशोधनों पर मतदान करता है। तृतीय वाचन में सदन संपूर्ण विधेयक पर मतदान करता है और केवल शाब्दिक या औपचारिक संशोधन स्वीकार्य होते हैं। इसके बाद विधेयक दूसरे सदन में जाता है, जो उसे पारित कर सकता है, संशोधनों के साथ पारित कर सकता है, अस्वीकार कर सकता है, अथवा उस पर कोई निर्णय न लेकर रोक सकता है।
अनुच्छेद 110 का धन विधेयक
कोई विधेयक धन विधेयक तभी है जब वह केवल इन विषयों से संबंधित हो: किसी कर का अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन; संघ द्वारा उधार लेना; संचित निधि या आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा तथा उनमें धन जमा करना या निकालना; संचित निधि से धन का विनियोग; संचित निधि पर भारित व्यय की घोषणा; तथा संचित निधि या भारत के लोक लेखे के धन की प्राप्ति और लेखा परीक्षा। लोकसभा अध्यक्ष प्रमाणित करते हैं कि विधेयक धन विधेयक है या नहीं, और उनका यह प्रमाणपत्र अंतिम होता है; उसे किसी न्यायालय में या किसी सदन में चुनौती नहीं दी जा सकती। धन विधेयक केवल लोकसभा में, केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर प्रस्तुत होता है। राज्यसभा को उसे चौदह दिन के भीतर सिफारिशों के साथ लौटाना होता है, जिन्हें लोकसभा मानने या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है; यदि राज्यसभा उसे अधिक समय तक रोके रखे तो विधेयक उस रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है जिस रूप में लोकसभा ने उसे पारित किया था। धन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं होती, और राष्ट्रपति उसे पुनर्विचार के लिए नहीं लौटा सकते, क्योंकि वह उनकी ही सिफारिश पर प्रस्तुत हुआ था। यह विशेष प्रक्रिया अनुच्छेद 109 में दी गई है।
वित्त विधेयक
अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत प्रथम श्रेणी के वित्त विधेयक में अनुच्छेद 110 का कोई विषय अन्य सामान्य विषयों के साथ सम्मिलित होता है। प्रस्तुतीकरण में वह धन विधेयक जैसा है, अर्थात केवल लोकसभा में राष्ट्रपति की सिफारिश पर, परंतु शेष सभी बातों में साधारण विधेयक जैसा: राज्यसभा उसे संशोधित या अस्वीकार कर सकती है और संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है। अनुच्छेद 117(3) के अंतर्गत द्वितीय श्रेणी के वित्त विधेयक में संचित निधि से व्यय अंतर्ग्रस्त होता है परंतु अनुच्छेद 110 का कोई विषय नहीं होता। वह किसी भी सदन में प्रस्तुत हो सकता है, प्रस्तुतीकरण के लिए सिफारिश आवश्यक नहीं, परंतु किसी सदन द्वारा उसे पारित करने से पहले राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक है।
संविधान संशोधन विधेयक
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत ऐसा विधेयक किसी भी सदन में आरंभ हो सकता है, उसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक नहीं, और उसे प्रत्येक सदन में अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित होना चाहिए, अर्थात उस सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत। संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है, इसलिए प्रत्येक सदन को स्वयं उसे पारित करना होता है। संघीय ढाँचे से जुड़े संशोधन, जैसे राष्ट्रपति का निर्वाचन, विधायी शक्तियों का वितरण, अथवा उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय से संबंधित उपबंध, कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थित भी होने चाहिए। 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 ने संविधान संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति की स्वीकृति को अनिवार्य बना दिया।
संयुक्त बैठक और गतिरोध
अनुच्छेद 108 दोनों सदनों के बीच साधारण विधेयक या वित्त विधेयक पर उत्पन्न गतिरोध का समाधान देता है: यदि दूसरा सदन विधेयक अस्वीकार कर दे, संशोधनों पर दोनों सदनों में अंतिम असहमति हो जाए, अथवा छह मास से अधिक बीत जाने पर भी दूसरा सदन विधेयक पारित न करे, तो राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकते हैं। संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं, राज्यसभा के सभापति नहीं; अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष और उनके बाद राज्यसभा के उपसभापति पीठासीन होते हैं। लोकसभा बड़ा सदन है, इसलिए संयुक्त बैठक व्यवहार में उसी के मत के अनुकूल होती है। संयुक्त बैठकें 1961 में दहेज प्रतिषेध विधेयक, 1978 में बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक तथा 2002 में आतंकवाद निवारण विधेयक पर हुई हैं।
राष्ट्रपति की स्वीकृति
अनुच्छेद 111 के अंतर्गत दोनों सदनों से पारित विधेयक पर राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं: स्वीकृति देना, स्वीकृति रोक लेना जो आत्यंतिक वीटो है, अथवा साधारण विधेयक को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटाना जो अनुवर्ती वीटो है। यदि सदन लौटाए गए विधेयक को संशोधन सहित या रहित पुनः पारित कर दें, तो राष्ट्रपति को स्वीकृति देनी ही पड़ती है। धन विधेयक लौटाया नहीं जा सकता। निर्णय के लिए कोई समय-सीमा नियत न होने के कारण राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनिश्चित काल तक रोक सकते हैं, जैसा 1986 में भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक के साथ हुआ; इसे जेबी वीटो कहते हैं। राज्य के विधेयक पर राज्यपाल अनुच्छेद 200 के अंतर्गत कार्य करते हैं और उसे राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख सकते हैं, जिस पर राष्ट्रपति अनुच्छेद 201 के अंतर्गत निर्णय लेते हैं।
विधेयकों का व्यतीत होना
सदन के सत्रावसान से विधेयक व्यतीत नहीं होते, परंतु लोकसभा के विघटन से कई विधेयक समाप्त हो जाते हैं। लोकसभा में लंबित विधेयक व्यतीत हो जाता है, और लोकसभा से पारित परंतु राज्यसभा में लंबित विधेयक भी व्यतीत हो जाता है। राज्यसभा में लंबित वह विधेयक जिसे लोकसभा ने पारित नहीं किया है, व्यतीत नहीं होता। दोनों सदनों से पारित और राष्ट्रपति की स्वीकृति की प्रतीक्षा में पड़ा विधेयक, राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटाया गया विधेयक, तथा वह विधेयक जिसके लिए राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक की अधिसूचना जारी कर दी है, भी व्यतीत नहीं होते।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षक अनुच्छेद संख्याओं और विधेयकों के भेद पर प्रश्न बनाते हैं। सर्वाधिक पूछे जाने वाले प्रश्न हैं: धन विधेयक की परिभाषा किस अनुच्छेद में है (110), उसे कौन प्रमाणित करता है (लोकसभा अध्यक्ष), राज्यसभा उसे कितने दिन रोक सकती है (14 दिन), संयुक्त बैठक किस अनुच्छेद में है (108) और उसकी अध्यक्षता कौन करता है (लोकसभा अध्यक्ष)। सामान्य भ्रम वित्त विधेयक को लेकर होता है: प्रथम श्रेणी का वित्त विधेयक प्रस्तुतीकरण में धन विधेयक जैसा परंतु पारण में साधारण विधेयक जैसा है, अतः राज्यसभा उस पर शक्तिहीन नहीं है। दूसरा जाल संयुक्त बैठक है, जो धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक दोनों पर वर्जित है। यूपीएससी तथा राज्य परीक्षाओं के कथन-आधारित प्रश्न व्यतीत होने के नियमों पर आते हैं, जहाँ विघटन के बाद बचा रहने वाला एकमात्र विधेयक वही है जो राज्यसभा में लंबित है और लोकसभा से पारित नहीं हुआ।
महत्वपूर्ण तथ्य
| विधायी प्रक्रिया | संविधान के अनुच्छेद 107 से 122 |
|---|---|
| धन विधेयक की परिभाषा | अनुच्छेद 110 |
| धन विधेयक की विशेष प्रक्रिया | अनुच्छेद 109 |
| वित्त विधेयक | अनुच्छेद 117; प्रथम श्रेणी 117(1) और द्वितीय श्रेणी 117(3) |
| संयुक्त बैठक | अनुच्छेद 108; राष्ट्रपति बुलाते हैं, अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं |
| विधेयकों पर राष्ट्रपति की स्वीकृति | अनुच्छेद 111 |
| धन विधेयक पर राज्यसभा की समय-सीमा | 14 दिन |
| संयुक्त बैठक से पहले गतिरोध की अवधि | दूसरे सदन के पास छह मास से अधिक |
| संविधान संशोधन विधेयक | अनुच्छेद 368; प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत, संयुक्त बैठक नहीं |
| प्रथम संयुक्त बैठक | 1961, दहेज प्रतिषेध विधेयक पर |
| जेबी वीटो | भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक, 1986 |
| संशोधन पर स्वीकृति अनिवार्य | 24वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद धन विधेयक की परिभाषा देता है?
- A.अनुच्छेद 109
- B.अनुच्छेद 110
- C.अनुच्छेद 112
- D.अनुच्छेद 117
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व्याख्या
सही उत्तर B, अनुच्छेद 110 है। अनुच्छेद 110 उन विषयों की सूची देता है जिनसे कोई विधेयक धन विधेयक बनता है: कराधान, संघ द्वारा उधार लेना, संचित निधि तथा आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, संचित निधि से धन का विनियोग, उस निधि पर भारित व्यय की घोषणा, तथा उस निधि के धन की प्राप्ति या लेखा परीक्षा। विधेयक धन विधेयक तभी है जब वह इनके अतिरिक्त किसी विषय से संबंधित न हो। A, अनुच्छेद 109, गलत है क्योंकि वह परिभाषा नहीं देता, बल्कि धन विधेयक की विशेष प्रक्रिया बताता है, जिसमें केवल लोकसभा में प्रस्तुतीकरण और राज्यसभा पर चौदह दिन की सीमा सम्मिलित है। C, अनुच्छेद 112, गलत है क्योंकि वह वार्षिक वित्तीय विवरण अर्थात बजट से संबंधित है। D, अनुच्छेद 117, गलत है क्योंकि वह वित्त विधेयकों को नियंत्रित करता है, जिनमें अनुच्छेद 110 का विषय अन्य सामान्य विषयों के साथ होता है।
किसका प्रमाणपत्र अंतिम रूप से तय करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.वित्त मंत्री
- C.लोकसभा अध्यक्ष
- D.राज्यसभा के सभापति
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व्याख्या
सही उत्तर C, लोकसभा अध्यक्ष है। अनुच्छेद 110(3) कहता है कि यदि यह प्रश्न उठे कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा, और अनुच्छेद 110(4) के अनुसार विधेयक राज्यसभा को भेजते समय या स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करते समय अध्यक्ष उस पर प्रमाणपत्र पृष्ठांकित करते हैं। इस प्रमाणपत्र को किसी न्यायालय या किसी सदन में चुनौती नहीं दी जा सकती। A, राष्ट्रपति, गलत है क्योंकि वे केवल धन विधेयक के प्रस्तुतीकरण की सिफारिश करते हैं और बाद में स्वीकृति देते हैं। B, वित्त मंत्री, गलत है क्योंकि मंत्री केवल विधेयक प्रस्तुत करता है; वर्गीकरण पीठासीन अधिकारी करता है, सरकार नहीं। D, राज्यसभा के सभापति, गलत है क्योंकि वर्गीकरण में राज्यसभा की कोई भूमिका नहीं, और इसी कारण अध्यक्ष का प्रमाणपत्र अंतिम माना गया है।
राज्यसभा को धन विधेयक लोकसभा को कितने दिनों के भीतर लौटाना होता है?
- A.7 दिन
- B.14 दिन
- C.21 दिन
- D.30 दिन
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व्याख्या
सही उत्तर B, 14 दिन है। अनुच्छेद 109 के अंतर्गत लोकसभा से पारित धन विधेयक राज्यसभा को भेजा जाता है, जो उस पर केवल सिफारिशें कर सकती है और उसे चौदह दिन के भीतर लौटाना होता है। लोकसभा उन सिफारिशों को मानने या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है, और यदि राज्यसभा इस अवधि में विधेयक न लौटाए तो वह उसी रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है जिस रूप में लोकसभा ने उसे पारित किया था। A, 7 दिन, गलत है; प्रक्रिया के किसी चरण में यह अवधि नहीं आती। C, 21 दिन, गलत है, फिर भी अभ्यर्थी इसे अन्य संवैधानिक अवधियों से भ्रमित कर लेते हैं। D, 30 दिन, गलत है; इसे कभी-कभी अध्यादेश के अनुमोदन की छह सप्ताह की सीमा से मिला दिया जाता है। चौदह दिन का नियम इस अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला तथ्य है।
किसी विधेयक पर गतिरोध दूर करने के लिए दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
- A.अनुच्छेद 107
- B.अनुच्छेद 108
- C.अनुच्छेद 111
- D.अनुच्छेद 123
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, अनुच्छेद 108 है। अनुच्छेद 108 राष्ट्रपति को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने की शक्ति देता है, जब दूसरा सदन विधेयक अस्वीकार कर दे, संशोधनों पर दोनों सदनों में अंतिम असहमति हो जाए, अथवा छह मास से अधिक बीतने पर भी दूसरा सदन उसे पारित न करे। A, अनुच्छेद 107, गलत है क्योंकि वह केवल साधारण विधेयकों के प्रस्तुतीकरण और पारण की सामान्य व्यवस्था देता है। C, अनुच्छेद 111, गलत है क्योंकि वह दोनों सदनों से पारित विधेयक पर राष्ट्रपति की स्वीकृति से संबंधित है, जिसमें स्वीकृति देने, रोकने या साधारण विधेयक लौटाने की शक्ति है। D, अनुच्छेद 123, गलत है क्योंकि वह संसद के सत्र में न होने पर राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है, जो साधारण विधायी प्रक्रिया से बाहर की व्यवस्था है।
संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.राज्यसभा के सभापति
- C.लोकसभा अध्यक्ष
- D.उपस्थित सबसे वरिष्ठ सदस्य
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व्याख्या
सही उत्तर C, लोकसभा अध्यक्ष है। अनुच्छेद 108 के अंतर्गत संयुक्त बैठक राष्ट्रपति बुलाते हैं, परंतु उसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं; उनकी अनुपस्थिति में लोकसभा उपाध्यक्ष और दोनों की अनुपस्थिति में राज्यसभा के उपसभापति पीठासीन होते हैं, और यह क्रम संसद की प्रक्रिया के नियमों में स्पष्ट रूप से दिया गया है। A, राष्ट्रपति, गलत है क्योंकि राष्ट्रपति संसद के किसी सदन या संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते और केवल अनुच्छेद 86 या 87 के अंतर्गत सदनों को संबोधित करते हैं। B, राज्यसभा के सभापति, जान-बूझकर रखा गया भ्रमकारी विकल्प है: उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हुए भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते, यद्यपि राज्यसभा उस बैठक में सम्मिलित रहती है। D गलत है क्योंकि संविधान और प्रक्रिया नियम पीठासीन अधिकारियों का क्रम स्वयं नियत करते हैं और संयुक्त बैठक के लिए सदस्यों की वरिष्ठता पर कभी नहीं जाते। चूँकि लोकसभा बड़ा सदन है, संयुक्त बैठक में उसी का मत प्रभावी रहता है।
निम्नलिखित में से किसके लिए संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती?
- A.राज्यसभा द्वारा अस्वीकृत साधारण विधेयक
- B.संविधान संशोधन विधेयक
- C.अनुच्छेद 117(1) का वित्त विधेयक
- D.वह साधारण विधेयक जिसके संशोधनों पर दोनों सदनों में अंतिम असहमति हो
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व्याख्या
सही उत्तर B, संविधान संशोधन विधेयक है। अनुच्छेद 368 के अनुसार प्रत्येक सदन को ऐसा विधेयक अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित करना होता है, और संविधान उसके लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं करता; धन विधेयक भी अनुच्छेद 108 के दायरे से बाहर है। A गलत है क्योंकि दूसरे सदन द्वारा साधारण विधेयक की अस्वीकृति अनुच्छेद 108 के उन तीन आधारों में से एक है जिन पर संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है। C गलत है क्योंकि प्रथम श्रेणी का वित्त विधेयक केवल लोकसभा में राष्ट्रपति की सिफारिश पर प्रस्तुत होने के बाद शेष सभी बातों में साधारण विधेयक है, अतः राज्यसभा उसे संशोधित या अस्वीकार कर सकती है और संयुक्त बैठक संभव है। D गलत है क्योंकि संशोधनों पर अंतिम असहमति अनुच्छेद 108 का दूसरा आधार है, और 1961 का दहेज प्रतिषेध विधेयक इसी प्रकार संयुक्त बैठक तक पहुँचा था।
भारतीय संसद के दोनों सदनों की पहली संयुक्त बैठक, जो 1961 में हुई, किस विधेयक को पारित करने के लिए बुलाई गई थी?
- A.बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक
- B.दहेज प्रतिषेध विधेयक
- C.आतंकवाद निवारण विधेयक
- D.हिंदू उत्तराधिकार विधेयक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, दहेज प्रतिषेध विधेयक है। इसके संशोधनों पर दोनों सदनों में असहमति हो गई थी, 1961 में संयुक्त बैठक बुलाई गई और यह विधेयक दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 बना। A गलत है क्योंकि बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक 1978 की दूसरी संयुक्त बैठक में पारित हुआ। C गलत है क्योंकि आतंकवाद निवारण विधेयक 2002 की तीसरी संयुक्त बैठक में पारित हुआ और पोटा कहलाया; तीनों में सबसे हाल का होने के कारण यह प्रिय भ्रमकारी विकल्प है। D गलत है क्योंकि हिंदू उत्तराधिकार विधेयक 1950 के दशक के हिंदू कोड विधान का भाग था और दोनों सदनों में किसी गतिरोध के बिना साधारण प्रक्रिया से पारित हुआ। 1961, 1978 और 2002 का क्रम याद रखने से अनुच्छेद 108 के अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।
विधेयक पर स्वीकृति देने, स्वीकृति रोकने अथवा उसे पुनर्विचार के लिए लौटाने की राष्ट्रपति की शक्ति किस अनुच्छेद में है?
- A.अनुच्छेद 110
- B.अनुच्छेद 111
- C.अनुच्छेद 200
- D.अनुच्छेद 368
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, अनुच्छेद 111 है। दोनों सदनों से विधेयक पारित होने पर वह राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत होता है, जो स्वीकृति दे सकते हैं, स्वीकृति रोक सकते हैं जो आत्यंतिक वीटो है, अथवा साधारण विधेयक को संदेश के साथ एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं जो अनुवर्ती वीटो है; सदन उसे पुनः पारित कर दें तो स्वीकृति देना अनिवार्य है। A, अनुच्छेद 110, गलत है क्योंकि वह केवल धन विधेयक की परिभाषा देता है। C, अनुच्छेद 200, गलत है क्योंकि वह राज्य के विधेयक पर राज्यपाल की समानांतर शक्ति से संबंधित है, जिसके अंतर्गत वे विधेयक राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित भी रख सकते हैं। D, अनुच्छेद 368, गलत है क्योंकि वह संविधान संशोधन की प्रक्रिया देता है; 1971 के 24वें संशोधन के बाद वहाँ राष्ट्रपति के पास कोई विकल्प नहीं और स्वीकृति देना अनिवार्य है।
निम्नलिखित में से कौन-सा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा संसद को पुनर्विचार के लिए नहीं लौटाया जा सकता?
- A.साधारण विधेयक
- B.धन विधेयक
- C.गैर-सरकारी सदस्य का विधेयक
- D.अनुच्छेद 117(3) का वित्त विधेयक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, धन विधेयक है। धन विधेयक लोकसभा में केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर प्रस्तुत होता है, अर्थात सरकार ने उस प्रस्ताव पर राष्ट्रपति की सहमति पहले ही प्राप्त कर ली होती है; इसलिए अनुच्छेद 111 राष्ट्रपति को उस पर केवल स्वीकृति देने या रोकने की शक्ति देता है, लौटाने की नहीं। A गलत है क्योंकि साधारण विधेयक ही वह विधेयक है जिसे राष्ट्रपति संदेश के साथ एक बार लौटा सकते हैं और सदन उसे संशोधन सहित या रहित पुनः पारित कर सकते हैं। C गलत है क्योंकि गैर-सरकारी सदस्य का विधेयक केवल प्रस्तुतकर्ता के आधार पर भिन्न होता है; यदि वह साधारण विधेयक है तो लौटाया जा सकता है। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 117(3) के द्वितीय श्रेणी के वित्त विधेयक में केवल संचित निधि से व्यय अंतर्ग्रस्त होता है और स्वीकृति के लिए वह साधारण विधेयक माना जाता है।
लोकसभा के विघटन पर निम्नलिखित में से कौन-सा विधेयक व्यतीत नहीं होता?
- A.लोकसभा में लंबित विधेयक
- B.लोकसभा से पारित परंतु राज्यसभा में लंबित विधेयक
- C.राज्यसभा में लंबित वह विधेयक जिसे लोकसभा ने पारित नहीं किया है
- D.लोकसभा से पारित और राज्यसभा द्वारा संशोधनों के साथ लौटाया गया विधेयक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C है। राज्यसभा स्थायी सदन है जिसका विघटन कभी नहीं होता, इसलिए वहाँ आरंभ हुआ और लोकसभा से अब तक पारित न हुआ विधेयक लोकसभा के विघटन के बाद भी राज्यसभा में जीवित रहता है। A गलत है क्योंकि लोकसभा में लंबित विधेयक उस सदन के साथ ही समाप्त हो जाता है। B गलत है क्योंकि लोकसभा से पारित परंतु राज्यसभा के निर्णय की प्रतीक्षा में पड़ा विधेयक भी व्यतीत हो जाता है, क्योंकि विघटित सदन की सहमति अब उपलब्ध नहीं है। D गलत है क्योंकि राज्यसभा द्वारा संशोधनों के साथ लौटाने पर वह विधेयक पुनः लोकसभा के समक्ष आ जाता है, और विघटित सदन के समक्ष लंबित विधेयक व्यतीत हो जाता है। स्वीकृति की प्रतीक्षा वाले विधेयक, राष्ट्रपति द्वारा लौटाए गए विधेयक और संयुक्त बैठक अधिसूचित विधेयक व्यतीत नहीं होते।
संसद में धन विधेयक प्रस्तुत किया जा सकता है
- A.किसी भी सदन में, किसी भी सदस्य द्वारा
- B.केवल लोकसभा में, राष्ट्रपति की सिफारिश पर
- C.केवल राज्यसभा में, लोकसभा अध्यक्ष की सिफारिश पर
- D.किसी भी सदन में, वित्त मंत्री की सिफारिश पर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। अनुच्छेद 109 तथा अनुच्छेद 117(1) के अनुसार धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत हो सकता है, और अनुच्छेद 110(1) के अनुसार वह केवल राष्ट्रपति की सिफारिश पर प्रस्तुत होता है; वह सदैव मंत्री द्वारा प्रस्तुत सरकारी विधेयक होता है। A दोनों दृष्टियों से गलत है: राज्यसभा प्रस्तुतीकरण के स्तर पर धन विधेयक नहीं ले सकती, और गैर-सरकारी सदस्य उसे प्रस्तुत नहीं कर सकता। C गलत है क्योंकि किसी भी धन संबंधी विषय के लिए राज्यसभा आरंभिक सदन नहीं है, और अध्यक्ष का कार्य विधेयक को प्रमाणित करना है, उसके प्रस्तुतीकरण की सिफारिश करना नहीं। D गलत है क्योंकि सिफारिश राष्ट्रपति की होनी चाहिए, जो मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं; वित्त मंत्री विधेयक प्रस्तुत करते हैं, परंतु उनकी सिफारिश का कोई संवैधानिक स्थान नहीं है।
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन विधेयक को प्रत्येक सदन में किस बहुमत से पारित होना चाहिए?
- A.उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत
- B.सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वालों का दो-तिहाई बहुमत
- C.सदन की कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई बहुमत
- D.दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में कुल सदस्य संख्या का बहुमत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। अनुच्छेद 368 के विशेष बहुमत की दो शर्तें साथ-साथ पूरी होनी चाहिए: सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत, तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत। A गलत है क्योंकि उपस्थित सदस्यों का साधारण बहुमत केवल साधारण विधेयकों तथा अनुच्छेद 3 के अंतर्गत नए राज्यों के निर्माण जैसे कुछ संवैधानिक विषयों के लिए पर्याप्त है। C गलत है क्योंकि दो-तिहाई की गणना उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों पर होती है, कुल सदस्य संख्या पर नहीं, और यही सबसे सामान्य भूल है। D गलत है क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक पर दोनों सदन कभी एक साथ नहीं बैठते; अनुच्छेद 108 उस पर लागू नहीं होता, अतः प्रत्येक सदन को अलग-अलग विशेष बहुमत जुटाना पड़ता है और कुछ संशोधनों के लिए आधे राज्यों का अनुसमर्थन भी आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, यह कौन तय करता है?
अनुच्छेद 110(4) के अंतर्गत लोकसभा अध्यक्ष किसी विधेयक को धन विधेयक प्रमाणित करते हैं। यह प्रमाणपत्र अंतिम है: इसे किसी न्यायालय में, किसी सदन में अथवा राष्ट्रपति के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती।
क्या राज्यसभा धन विधेयक अस्वीकार कर सकती है?
नहीं। राज्यसभा धन विधेयक पर केवल सिफारिशें कर सकती है और उसे 14 दिन के भीतर लौटाना होता है। लोकसभा उन सिफारिशों को मान भी सकती है और अस्वीकार भी कर सकती है, और यदि राज्यसभा समय पर विधेयक न लौटाए तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
धन विधेयक और वित्त विधेयक में क्या अंतर है?
धन विधेयक केवल अनुच्छेद 110 में गिनाए विषयों से संबंधित होता है। प्रथम श्रेणी के वित्त विधेयक में ऐसा कोई विषय अन्य सामान्य विषयों के साथ होता है, अतः वह धन विधेयक की तरह प्रस्तुत होता है परंतु उस पर राज्यसभा की पूर्ण शक्ति रहती है; द्वितीय श्रेणी के वित्त विधेयक में केवल संचित निधि से व्यय अंतर्ग्रस्त होता है और वह किसी भी सदन में आरंभ हो सकता है।
क्या संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है?
नहीं। अनुच्छेद 108 केवल साधारण और वित्त विधेयकों पर लागू होता है। अनुच्छेद 368 का संविधान संशोधन विधेयक प्रत्येक सदन को अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित करना होता है, और धन विधेयक भी संयुक्त बैठक के दायरे से बाहर है।
किसी सदन में विधेयक के कितने वाचन होते हैं?
तीन। प्रथम वाचन प्रस्तुतीकरण और प्रकाशन का है, द्वितीय वाचन में सामान्य चर्चा, समिति अवस्था तथा खंड-दर-खंड विचारण होता है, और तृतीय वाचन में संपूर्ण विधेयक पर मतदान होता है।
लोकसभा के विघटन पर लंबित विधेयकों का क्या होता है?
लोकसभा में लंबित विधेयक व्यतीत हो जाता है, और लोकसभा से पारित परंतु राज्यसभा में लंबित विधेयक भी व्यतीत हो जाता है। राज्यसभा में लंबित वह विधेयक जिसे लोकसभा ने पारित नहीं किया, राष्ट्रपति की स्वीकृति की प्रतीक्षा में पड़ा विधेयक, तथा जिसके लिए संयुक्त बैठक अधिसूचित हो चुकी है, व्यतीत नहीं होते।
स्रोत
- भारत का संविधान, अनुच्छेद 107 से 122: विधायी प्रक्रिया — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (कक्षा 11), अध्याय 5: विधायिका — एनसीईआरटी
- लोकसभा में प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम, विधान संबंधी अध्याय — लोकसभा सचिवालय





