मानवाधिकार आयोग: गठन, शक्तियाँ और परीक्षा प्रश्न
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और भारत के अधिकार आयोगों के पूरे नोट्स: 1993 का अधिनियम, 2019 के बाद गठन, नियुक्ति, कार्यकाल, शक्तियाँ, सीमाएँ और राज्य आयोग।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

हर वर्ष 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अपना स्थापना दिवस मनाता है और वर्ष भर राज्यों की राजधानियों में जाकर खुली सुनवाई करता है, जैसी हाल में बिहार में हुई। इन सुनवाइयों के पीछे एक ही कानून है—मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993—और आयोगों का एक परिवार, जिसे परीक्षाएं एक ही अध्याय मानती हैं: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग तथा महिला, बाल और अल्पसंख्यक अधिकारों के आयोग। इस अध्याय में सबसे अधिक अंक उस छात्र को मिलते हैं जो संविधान द्वारा बनाए गए निकायों और संसद के साधारण कानून से बने निकायों में अंतर कर सके, क्योंकि यही अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है।
भारत में मानवाधिकार आयोग क्यों बना
मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को अपनाई थी, इसी कारण यह तिथि मानवाधिकार दिवस है। सन 1991 में पेरिस में हुई एक कार्यशाला ने वे मानक तय किए जो किसी राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था में होने चाहिए, और इन पेरिस सिद्धांतों का समर्थन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1993 में किया—उसी वर्ष वियना में मानव अधिकारों पर विश्व सम्मेलन हुआ था। भारत ने सितंबर 1993 में अध्यादेश लाकर उत्तर दिया, जो मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 बना, और 12 अक्टूबर 1993 को आयोग गठित हुआ। इसके पहले अध्यक्ष भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र थे। आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में है।
अधिनियम में मानव अधिकार की परिभाषा
धारा 2(1)(घ) के अनुसार मानव अधिकार का अर्थ है व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समता और प्रतिष्ठा से जुड़े वे अधिकार जो संविधान द्वारा प्रत्याभूत हैं या अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निहित हैं और भारत के न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं। यहाँ प्रसंविदाओं का अर्थ 1966 की नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा तथा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा है। यह परिभाषा केवल भाग तीन से व्यापक है, और परीक्षक इसी बिंदु को जाँचते हैं।
2019 के संशोधन के बाद गठन
मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने आयोग का ढांचा बदल दिया। अब अध्यक्ष वह व्यक्ति हो सकता है जो भारत का मुख्य न्यायाधीश रहा हो अथवा उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो; पहले केवल पूर्व मुख्य न्यायाधीश ही पात्र था। पूर्णकालिक सदस्यों में उच्चतम न्यायालय का एक वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश, किसी उच्च न्यायालय का एक वर्तमान या पूर्व मुख्य न्यायाधीश, तथा मानवाधिकारों का ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले तीन सदस्य होते हैं, जिनमें कम से कम एक महिला होनी चाहिए।
| पद | कौन हो सकता है |
|---|---|
| अध्यक्ष | भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश |
| सदस्य | उच्चतम न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश |
| सदस्य | उच्च न्यायालय के वर्तमान या पूर्व मुख्य न्यायाधीश |
| तीन सदस्य | मानवाधिकारों का ज्ञान; कम से कम एक महिला |
| पदेन सदस्य | अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला और पिछड़ा वर्ग आयोगों तथा एनसीपीसीआर के अध्यक्ष और दिव्यांगजन के मुख्य आयुक्त |
| महासचिव | आयोग का मुख्य कार्यपालक अधिकारी |
नियुक्ति, कार्यकाल और हटाना
अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति छह सदस्यीय समिति की सिफारिश पर करते हैं: प्रधानमंत्री इसके प्रमुख होते हैं, और इसमें लोक सभा के अध्यक्ष, राज्य सभा के उपसभापति, दोनों सदनों के विपक्ष के नेता तथा केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं। वर्तमान न्यायाधीश की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श अनिवार्य है। सन 2019 के संशोधन ने कार्यकाल पाँच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष या सत्तर वर्ष की आयु, जो पहले हो, कर दिया, और पुनर्नियुक्ति की अनुमति दी। हटाना जानबूझकर कठिन रखा गया है: सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर राष्ट्रपति अध्यक्ष या सदस्य को तभी हटा सकते हैं जब मामला उच्चतम न्यायालय को भेजा जाए और न्यायालय जाँच के बाद यह आधार सही बताए।
आयोग क्या कर सकता है और क्या नहीं
आयोग स्वप्रेरणा से, याचिका पर, या न्यायालय के निर्देश पर जाँच कर सकता है। जाँच के दौरान उसे दीवानी न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त हैं—गवाहों को बुलाना, दस्तावेज मँगाना और शपथपत्र पर साक्ष्य लेना—और उसका अपना अन्वेषण दल भी है। किंतु उसके आदेश सिफारिश मात्र हैं। कथित उल्लंघन के एक वर्ष बाद की शिकायत पर वह जाँच नहीं कर सकता। सशस्त्र बलों के मामले में वह केवल केंद्र सरकार से रिपोर्ट मँगा सकता है और सिफारिश कर सकता है, तथा सरकार को तीन माह में की गई कार्रवाई बतानी होती है। आयोग की वार्षिक रिपोर्ट कार्रवाई ज्ञापन के साथ संसद के समक्ष रखी जाती है।
राज्य आयोग और मानवाधिकार न्यायालय
राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष वह होता है जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो, और वह राज्य सूची तथा समवर्ती सूची के विषयों को देखता है। अधिनियम की धारा 30 प्रत्येक जिले में मानवाधिकार न्यायालय की अनुमति देती है, जिसमें राज्य सरकार मानवाधिकार उल्लंघन से उत्पन्न अपराधों के शीघ्र विचारण के लिए सत्र न्यायालय अधिसूचित करती है।
महिला, बाल और अल्पसंख्यक आयोग
| आयोग | किससे बना | प्रकृति |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग | मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 | सांविधिक |
| राष्ट्रीय महिला आयोग | राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 | सांविधिक |
| एनसीपीसीआर | बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 | सांविधिक |
| राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग | राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 | सांविधिक |
| एनसीएससी / एनसीएसटी / एनसीबीसी | अनुच्छेद 338, 338क और 338ख | संवैधानिक |
राष्ट्रीय महिला आयोग ने 1992 में कार्य आरंभ किया और जयंती पटनायक इसकी पहली अध्यक्ष थीं; इसमें एक अध्यक्ष, पाँच सदस्य और एक सदस्य-सचिव होते हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग 2007 में बना, इसमें एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं जिनमें कम से कम दो महिलाएँ होती हैं, और यह अठारह वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को बालक मानता है; यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी करता है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की जड़ 1978 के सरकारी संकल्प से बने अल्पसंख्यक आयोग में है और यह 1992 में सांविधिक बना; सन 2014 में जैन समुदाय को अधिसूचित अल्पसंख्यकों में जोड़ा गया, जिससे मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी के साथ यह सूची छह की हो गई। इन सभी आयोगों का कार्यकाल तीन वर्ष है और शक्तियाँ सिफारिशी हैं, इसीलिए यह प्रश्न कि कौन निकाय अपना आदेश स्वयं लागू करा सकता है, उत्तर में सदैव न्यायालय लाता है, आयोग नहीं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से चार बातें पूछी जाती हैं: सांविधिक और संवैधानिक निकायों का अंतर, जिसमें राज्य मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग सांविधिक उत्तर के रूप में और अनुच्छेद 338, 338क, 338ख संवैधानिक उत्तर के रूप में आते हैं; आयोग का कार्यकाल, जो 2019 में पाँच वर्ष से तीन वर्ष हो गया, इसलिए पुरानी पुस्तकें भ्रमित करती हैं; प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति, न कि राष्ट्रपति या मुख्य न्यायाधीश; और आयोग की सीमाएँ, अर्थात एक वर्ष की रोक, सिफारिशी निष्कर्ष तथा सशस्त्र बलों की विशेष प्रक्रिया। तिथियाँ समूह में पूछी जाती हैं—1948 की 10 दिसंबर, 1991 के पेरिस सिद्धांत और 1993 की 12 अक्टूबर।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मूल अधिनियम | मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 |
|---|---|
| एनएचआरसी का गठन | 12 अक्टूबर 1993; मुख्यालय नई दिल्ली |
| पहले अध्यक्ष | न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र |
| कार्यकाल | तीन वर्ष या सत्तर वर्ष की आयु, जो पहले हो (2019 संशोधन) |
| चयन समिति के प्रमुख | प्रधानमंत्री; कुल छह सदस्य |
| हटाने की प्रक्रिया | उच्चतम न्यायालय की जाँच और रिपोर्ट के बाद राष्ट्रपति द्वारा |
| जाँच की परिसीमा | कथित उल्लंघन से एक वर्ष |
| सशस्त्र बल | केवल केंद्र सरकार से रिपोर्ट; कार्रवाई तीन माह में बतानी होगी |
| मानवाधिकार न्यायालय | धारा 30; प्रत्येक जिले में अधिसूचित सत्र न्यायालय |
| एनसीडब्ल्यू अधिनियम | राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990; पहली अध्यक्ष जयंती पटनायक |
| एनसीपीसीआर अधिनियम | बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 |
| एनसीएम अधिनियम | राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992; 2014 के बाद छह अधिसूचित समुदाय |
| संवैधानिक आयोग | अनुसूचित जाति (अनुच्छेद 338), अनुसूचित जनजाति (338क), पिछड़ा वर्ग (338ख) |
| मानव अधिकार की परिभाषा | धारा 2(1)(घ); 1966 की दो अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाएँ |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से कौन भारत का गैर-संवैधानिक निकाय है?
- A.वित्त आयोग
- B.राज्य मानवाधिकार आयोग
- C.संघ लोक सेवा आयोग
- D.निर्वाचन आयोग
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, राज्य मानवाधिकार आयोग है। राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अध्याय पाँच से बनता है, जो संसद का साधारण कानून है, इसलिए यह सांविधिक निकाय है, संवैधानिक नहीं; संसद उसी अधिनियम में संशोधन करके इसे समाप्त कर सकती है। विकल्प A गलत है क्योंकि वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित होता है और राष्ट्रपति को प्रत्येक पाँचवें वर्ष इसका गठन करना होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग अनुच्छेद 315 से बनता है और उसके सदस्यों की सेवा शर्तें अनुच्छेद 316 से 323 तक संरक्षित हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि भारत निर्वाचन आयोग का अस्तित्व अनुच्छेद 324 से है, जो उसे निर्वाचनों का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण देता है। इस प्रश्न का जाल यही है कि चारों को आयोग कहा जाता है; अंतर केवल उनकी शक्ति के स्रोत से होता है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल कितना होता है?
- A.3 वर्ष
- B.4 वर्ष
- C.5 वर्ष
- D.6 वर्ष
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व्याख्या
सही उत्तर A, तीन वर्ष है। मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पाँच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष या सत्तर वर्ष की आयु, जो पहले हो, कर दिया और उन्हें पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र भी बना दिया। विकल्प C, पाँच वर्ष, सन 2019 के संशोधन से पहले सही उत्तर था और इस प्रश्न का सबसे बड़ा जाल है, क्योंकि पुरानी पुस्तकें अब भी वही आंकड़ा देती हैं। विकल्प B और D, चार और छह वर्ष, इस पद का कार्यकाल कभी नहीं रहे; छह वर्ष राज्य सभा के सदस्य के कार्यकाल से जुड़ा है और चार वर्ष किसी भी अधिकार आयोग से नहीं। इस जोड़ी को याद रखें—पद के लिए तीन वर्ष और अध्यक्ष के लिए सत्तर वर्ष की आयु सीमा।
भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किस कानून के अंतर्गत गठित किया गया था?
- A.मानवाधिकार आयोग अधिनियम, 1991
- B.मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
- C.सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955
- D.जाँच आयोग अधिनियम, 1952
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 है। यह कानून सितंबर 1993 में अध्यादेश के रूप में आया और 12 अक्टूबर 1993 को आयोग गठित हुआ, जिसके पहले अध्यक्ष भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र थे। विकल्प A गलत है क्योंकि सन 1991 का कोई मानवाधिकार आयोग अधिनियम नहीं है; वह वर्ष केवल पेरिस की उस कार्यशाला के लिए याद किया जाता है जिसने पेरिस सिद्धांत बनाए। विकल्प C गलत है क्योंकि सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 वस्तुतः अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम का बदला हुआ नाम है और अस्पृश्यता के आचरण को दंडित करता है, कोई आयोग नहीं बनाता। विकल्प D गलत है क्योंकि जाँच आयोग अधिनियम, 1952 के अंतर्गत सरकार किसी निश्चित लोक महत्व के विषय पर एक बार का जाँच आयोग नियुक्त करती है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का स्थापना दिवस किस तिथि को मनाया जाता है?
- A.10 दिसंबर
- B.12 अक्टूबर
- C.26 नवंबर
- D.28 सितंबर
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व्याख्या
सही उत्तर B, 12 अक्टूबर है, क्योंकि आयोग का गठन 1993 में इसी तिथि को हुआ था। विकल्प A, 10 दिसंबर, मानवाधिकार दिवस है, जो 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है; छात्र इन दोनों तिथियों में लगातार भ्रमित होते हैं, इसलिए जोड़ी बनाकर याद रखें। विकल्प C, 26 नवंबर, संविधान दिवस है, जब 1949 में संविधान सभा ने संविधान अंगीकृत किया। विकल्प D, 28 सितंबर, उस अध्यादेश की तिथि के निकट है जो अधिनियम से पहले आया था, किंतु आयोग के अस्तित्व में आने की तिथि नहीं है। इस तथ्य को इस क्रम में पकड़ें—1948 में 10 दिसंबर को घोषणा, 1991 में पेरिस सिद्धांत, और 1993 में 12 अक्टूबर को अधिनियम तथा आयोग।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की सिफारिश करने वाली समिति का प्रमुख कौन होता है?
- A.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- B.भारत के राष्ट्रपति
- C.प्रधानमंत्री
- D.केंद्रीय गृह मंत्री
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, प्रधानमंत्री है। चयन समिति में छह सदस्य होते हैं—प्रधानमंत्री इसके प्रमुख, लोक सभा के अध्यक्ष, राज्य सभा के उपसभापति, लोक सभा और राज्य सभा में विपक्ष के नेता तथा केंद्रीय गृह मंत्री; इसकी सिफारिश पर राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं। विकल्प A गलत है, यद्यपि जब उच्चतम न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति होनी हो तो भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श अनिवार्य है। विकल्प B गलत है क्योंकि राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं, सिफारिश नहीं; यही व्यवस्था लोकपाल और केंद्रीय सूचना आयुक्त की नियुक्ति में भी दिखती है। विकल्प D गलत है क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री समिति के सदस्य हैं, उसके प्रमुख नहीं। ध्यान रखें कि समिति में विपक्ष के दोनों नेताओं का होना इस नियुक्ति को दलगत राजनीति से दूर रखने के लिए है, और यही ढाँचा केंद्रीय सूचना आयोग तथा लोकपाल में भी दिखता है, इसलिए परीक्षा में तीनों की समितियाँ एक साथ पूछी जाती हैं।
कथित उल्लंघन के कितने समय के भीतर शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुँचनी चाहिए, जिससे वह जाँच कर सके?
- A.छह माह
- B.एक वर्ष
- C.दो वर्ष
- D.तीन वर्ष
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, एक वर्ष है। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 आयोग को उस तिथि से एक वर्ष बीतने के बाद किसी मामले की जाँच से रोकता है जिस दिन मानवाधिकार उल्लंघन करने वाला कार्य किया गया बताया जाता है। विकल्प A, छह माह, वह सीमा है जिसे छात्र सेवा नियमों और विभागीय अपीलों से गलती से यहाँ ले आते हैं। विकल्प C और D, दो और तीन वर्ष, कानून की अनुमति से अधिक हैं; तीन वर्ष परिसीमा अधिनियम, 1963 के अंतर्गत दीवानी वाद की साधारण परिसीमा है, जो पूर्णतः भिन्न बात है। इस एक वर्ष की सीमा को आयोग की दो और सीमाओं के साथ याद रखें—उसके निष्कर्ष केवल सिफारिश हैं, और सशस्त्र बलों के मामले में वह केंद्र सरकार से रिपोर्ट मँगाने से आगे नहीं जा सकता।
सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
- A.अपने अन्वेषण दल से स्वयं जाँच कर सकता है
- B.केवल केंद्र सरकार से रिपोर्ट मँगाकर सिफारिश कर सकता है
- C.संबंधित अधिकारियों को बुलाकर दंड दे सकता है
- D.कोर्ट मार्शल को मामला फिर खोलने का निर्देश दे सकता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 19 सशस्त्र बलों के लिए विशेष प्रक्रिया रखती है: आयोग शिकायत पर आगे न बढ़े, या केंद्र सरकार से रिपोर्ट मँगाए, और रिपोर्ट मिलने पर अपनी सिफारिश दे; सरकार को तीन माह में की गई कार्रवाई आयोग को बतानी होती है। विकल्प A गलत है क्योंकि आयोग का अपना अन्वेषण दल, जिसका उपयोग वह साधारण शिकायतों में करता है, सशस्त्र बलों के विरुद्ध उपलब्ध नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि आयोग को किसी को भी दंड देने की शक्ति नहीं है, सशस्त्र बलों में हो या बाहर; वह अभियोजन या प्रतिकर की सिफारिश करता है और दंड न्यायालय देते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि अधिनियम का कोई उपबंध आयोग को कोर्ट मार्शल की कार्यवाही फिर खोलने की अनुमति नहीं देता।
निम्नलिखित में से कौन एक संवैधानिक निकाय है?
- A.राष्ट्रीय महिला आयोग
- B.राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग
- C.राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
- D.राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग
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व्याख्या
सही उत्तर C, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग है, जो संविधान के अनुच्छेद 338 पर आधारित है; अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के इसके साथी आयोग अनुच्छेद 338क और 338ख पर आधारित हैं, जिनमें अंतिम को 2018 में एक सौ दोवें संशोधन से जोड़ा गया। विकल्प A गलत है क्योंकि राष्ट्रीय महिला आयोग राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के अंतर्गत बना। विकल्प B गलत है क्योंकि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत बना और इसका पूर्ववर्ती 1978 के सरकारी संकल्प से बना था। विकल्प D गलत है क्योंकि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के अंतर्गत बना। केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के तीन आयोग ही संवैधानिक हैं। परीक्षा में यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है, इसलिए यह सूत्र याद रखें—जिस आयोग का आधार कोई अनुच्छेद है वह संवैधानिक है, और जिसका आधार संसद का साधारण अधिनियम है वह सांविधिक है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग किस वर्ष के अधिनियम के अंतर्गत गठित हुआ?
- A.1992
- B.2000
- C.2005
- D.2009
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2005 है, जो बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम का वर्ष है; इसके अंतर्गत राष्ट्रीय आयोग ने 2007 में कार्य आरंभ किया और बाद में राज्य आयोग बने। विकल्प A, 1992, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम का वर्ष है और पंचायतों तथा नगरपालिकाओं से जुड़े संवैधानिक संशोधनों का भी, इसलिए यह भरा-पूरा वर्ष है और लुभावना गलत उत्तर बनता है। विकल्प B, 2000, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम का वर्ष है, जो वर्तमान 2015 के कानून से पहले था, आयोग का नहीं। विकल्प D, 2009, निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम का वर्ष है, जिसके कार्यान्वयन की निगरानी यही आयोग करता है, इसीलिए यह वर्ष जाल के रूप में दिया जाता है। यह आयोग पॉक्सो अधिनियम, 2012 की निगरानी भी करता है।
जैन समुदाय को भारत के अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों की सूची में किस वर्ष जोड़ा गया?
- A.1993
- B.2006
- C.2014
- D.2019
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2014 है, जब जैन समुदाय को अल्पसंख्यक अधिसूचित किया गया और वह मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध तथा पारसी के साथ जुड़कर सूची को छह समुदायों की बना दिया। विकल्प A, 1993, वह वर्ष है जब 1992 के अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग वस्तुतः गठित हुआ, और यही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का वर्ष भी है, इसलिए यहाँ अनुमान लगाया जाता है। विकल्प B, 2006, वह वर्ष है जब अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय अलग मंत्रालय के रूप में बना, जो संबंधित किंतु भिन्न तथ्य है। विकल्प D, 2019, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम के उस संशोधन का वर्ष है जिसने आयोग का गठन और कार्यकाल बदला, अल्पसंख्यक सूची का नहीं। परीक्षा के लिए छह की संख्या और अधिसूचना का क्रम याद रखें। इसके अतिरिक्त यह भी याद रखें कि अल्पसंख्यक अधिसूचित करने की शक्ति राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2(ग) के अंतर्गत केंद्र सरकार के पास है, और इसी शक्ति का प्रयोग करके 2014 की अधिसूचना जारी हुई थी।
सिद्ध कदाचार के आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को राष्ट्रपति किसकी जाँच के बाद ही हटा सकते हैं?
- A.संसद की एक समिति
- B.उच्चतम न्यायालय
- C.केंद्रीय सतर्कता आयोग
- D.केंद्रीय मंत्रिपरिषद
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, उच्चतम न्यायालय है। सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर राष्ट्रपति को मामला उच्चतम न्यायालय को भेजना होता है, और अध्यक्ष या सदस्य को तभी हटाया जा सकता है जब न्यायालय अपनी प्रक्रिया के अनुसार जाँच करके यह बताए कि आधार सही है। विकल्प A गलत है क्योंकि यहाँ संसद के समावेदन की आवश्यकता नहीं है; वह प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की है। विकल्प C गलत है क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग लोक सेवकों के भ्रष्टाचार की जाँच करता है और इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि मंत्रिपरिषद उस निकाय पर निर्णय नहीं दे सकती जिसे कार्यपालिका से स्वतंत्र रखा गया है। यही संरक्षण राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को भी मिलता है।
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में मानव अधिकार की परिभाषा किन अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों में सन्निहित अधिकारों की बात करती है?
- A.1949 की जेनेवा संधियाँ
- B.1966 की दो अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाएँ
- C.1998 का रोम संविधि
- D.1961 का वियना अभिसमय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 1966 की दो अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाएँ हैं, अर्थात नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा तथा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा। अधिनियम की धारा 2(1)(घ) मानव अधिकार को व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समता और प्रतिष्ठा से जुड़े उन अधिकारों के रूप में परिभाषित करती है जो संविधान द्वारा प्रत्याभूत हैं या इन प्रसंविदाओं में सन्निहित हैं और भारत के न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 1949 की जेनेवा संधियाँ सशस्त्र संघर्ष तथा युद्ध में घायलों, युद्धबंदियों और नागरिकों के व्यवहार से जुड़ी हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1998 के रोम संविधि से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय बना, जिसमें भारत सम्मिलित नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1961 का वियना अभिसमय राजनयिक संबंधों और उन्मुक्तियों का विषय है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग संवैधानिक निकाय है?
नहीं। यह मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 से बना सांविधिक निकाय है। केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के आयोग संवैधानिक हैं, जो अनुच्छेद 338, 338क और 338ख पर आधारित हैं। यही बिंदु इस अध्याय से सबसे अधिक पूछा जाता है।
अब एनएचआरसी के अध्यक्ष का कार्यकाल कितना है?
तीन वर्ष या सत्तर वर्ष की आयु, जो पहले हो। मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने इसे पाँच वर्ष से घटाया और पुनर्नियुक्ति की पात्रता दी। पुरानी अध्ययन सामग्री अब भी पाँच वर्ष लिखती है।
क्या आयोग दोषी अधिकारी को दंड दे सकता है?
नहीं। उसके निष्कर्ष सिफारिश हैं। वह अभियोजन, अनुशासनिक कार्रवाई या प्रतिकर की सिफारिश कर सकता है और उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय से निर्देश माँग सकता है, किंतु दंड केवल न्यायालय देता है।
एनएचआरसी का अध्यक्ष कौन बन सकता है?
वह व्यक्ति जो भारत का मुख्य न्यायाधीश रहा हो या उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो। सन 2019 के संशोधन से पहले केवल पूर्व मुख्य न्यायाधीश ही पात्र था।
भारत में कौन समुदाय अल्पसंख्यक अधिसूचित हैं?
मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन, जिनमें अंतिम को 2014 में जोड़ा गया; इस प्रकार छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जिनके हितों की देखरेख राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग करता है।
स्रोत
- मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 — विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
- मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 — विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
- राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 — विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
- भारत का संविधान, अनुच्छेद 338, 338क और 338ख — भारत सरकार





