संवैधानिक पद: शपथ, त्यागपत्र और हटाने की प्रक्रिया
भारत के संवैधानिक पदों की शपथ, त्यागपत्र और हटाने की प्रक्रिया पर परीक्षोपयोगी नोट्स: शपथ कौन दिलाता है, त्यागपत्र किसे जाता है और कौन-सा बहुमत चाहिए।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत के प्रत्येक संवैधानिक पद के बारे में परीक्षा में तीन बातें पूछी जाती हैं: पद की शपथ कौन दिलाता है, त्यागपत्र किसे संबोधित किया जाता है, और उस पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है। जब समाचार आता है कि राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद के किसी मंत्री का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया, तो उसके पीछे इसी अध्याय के नियम काम करते हैं। संविधान इन तीनों प्रश्नों का उत्तर पद के अनुसार अलग-अलग देता है और शपथ के प्रारूप तीसरी अनुसूची में छपे हैं, इसलिए उत्तर निश्चित पाठ हैं, किसी की राय नहीं। यही कारण है कि एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, रक्षा और राज्य परीक्षाएँ हर साल इस अध्याय से मिलान वाला प्रश्न पूछती हैं।
पद की शपथ: कौन किसे दिलाता है
शपथ या प्रतिज्ञान वह शर्त है जिसके बाद ही कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर कार्य आरंभ कर सकता है। संविधान स्वयं बताता है कि शपथ किसके समक्ष ली जाएगी।
| पद | शपथ दिलाने वाला | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भारत का राष्ट्रपति | भारत का मुख्य न्यायाधीश; उनकी अनुपस्थिति में उपलब्ध वरिष्ठतम उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश | अनुच्छेद 60 |
| उपराष्ट्रपति | राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति | अनुच्छेद 69 |
| राज्य का राज्यपाल | उस राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश; अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश | अनुच्छेद 159 |
| प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री | राष्ट्रपति | अनुच्छेद 75(4) |
| मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्री | राज्य का राज्यपाल | अनुच्छेद 164(3) |
| संसद सदस्य | राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति | अनुच्छेद 99 |
| राज्य विधानमंडल का सदस्य | राज्यपाल या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति | अनुच्छेद 188 |
| उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश | राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति | अनुच्छेद 124(6) |
| उच्च न्यायालय का न्यायाधीश | संबंधित राज्य का राज्यपाल | अनुच्छेद 219 |
| नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक | राष्ट्रपति | अनुच्छेद 148(2) |
- शपथ के प्रारूप तीसरी अनुसूची में दिए गए हैं; राष्ट्रपति और राज्यपाल की शपथ का प्रारूप अनुच्छेद 60 तथा 159 में ही लिखा है।
- केंद्र और राज्य के मंत्री दो शपथ लेते हैं, पद की और गोपनीयता की। राष्ट्रपति की शपथ में गोपनीयता का अंश नहीं है; केवल वही संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेते हैं।
- लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अलग से कोई शपथ नहीं लेते, क्योंकि वे सदन के सदस्य के रूप में शपथ ले चुके होते हैं। यही बात विधान परिषद के सभापति और उपसभापति पर भी लागू होती है।
- भारत के महान्यायवादी कोई शपथ नहीं लेते, क्योंकि वे संवैधानिक अर्थ में कार्यपालिका के सदस्य नहीं हैं।
- कोई व्यक्ति दोनों सदनों का सदस्य न होते हुए भी मंत्री बनाया जा सकता है, परंतु अनुच्छेद 75(5) के अनुसार उसे छह माह में सदस्यता लेनी होगी, अन्यथा मंत्री पद समाप्त हो जाता है।
त्यागपत्र: किसे संबोधित किया जाता है
त्यागपत्र तभी प्रभावी होता है जब वह संविधान द्वारा नामित प्राधिकारी को संबोधित हो। परीक्षा में कारण से अधिक ये जोड़े पूछे जाते हैं।
| पद | त्यागपत्र किसे | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| राष्ट्रपति | उपराष्ट्रपति, जो उसे तुरंत लोकसभा अध्यक्ष को सूचित करते हैं | अनुच्छेद 56(1)(क) |
| उपराष्ट्रपति | राष्ट्रपति | अनुच्छेद 67(क) |
| राज्यपाल | राष्ट्रपति | अनुच्छेद 156(2) |
| प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री | राष्ट्रपति | अनुच्छेद 75 |
| मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्री | राज्यपाल | अनुच्छेद 164 |
| लोकसभा अध्यक्ष | उपाध्यक्ष (और उपाध्यक्ष, अध्यक्ष को) | अनुच्छेद 94(ख) |
| राज्यसभा उपसभापति | राज्यसभा सभापति | अनुच्छेद 90(ख) |
| लोकसभा / राज्यसभा सदस्य | क्रमशः अध्यक्ष / सभापति | अनुच्छेद 101(3)(ख) |
| विधानसभा / विधान परिषद सदस्य | क्रमशः अध्यक्ष / सभापति | अनुच्छेद 190(3)(ख) |
| उच्चतम या उच्च न्यायालय का न्यायाधीश | राष्ट्रपति | अनुच्छेद 124(2)(क), 217(1)(क) |
| सीएजी, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्य | राष्ट्रपति | अनुच्छेद 148(1), 324, 316(2) |
| राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्य | राज्यपाल | अनुच्छेद 316(2) |
पद से हटाना: महाभियोग और अन्य प्रक्रियाएँ
संविधान में महाभियोग शब्द केवल राष्ट्रपति के लिए प्रयुक्त हुआ है। अन्य सभी पदों की अपनी-अपनी प्रक्रिया और अलग बहुमत है।
- राष्ट्रपति (अनुच्छेद 61): संविधान के अतिक्रमण के आधार पर हटाया जाता है। आरोप किसी भी सदन में लाया जा सकता है, जिसके लिए सदन के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर सहित 14 दिन की सूचना आवश्यक है, और प्रस्ताव उस सदन की कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए। इसके बाद दूसरा सदन आरोप की जाँच करता है और उसे भी अपनी कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई बहुमत से पारित करना होता है। मनोनीत सदस्य इसमें भाग लेते हैं, जबकि राष्ट्रपति के निर्वाचन में उनका मत नहीं होता; राज्य विधानमंडलों की इसमें कोई भूमिका नहीं होती।
- उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 67(ख)): राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव तथा लोकसभा की सहमति से हटाया जाता है; 14 दिन की सूचना आवश्यक है। संविधान में इसका कोई आधार नहीं बताया गया।
- उच्चतम तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (अनुच्छेद 124(4), 217(1)(ख), 218): सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर, एक ही सत्र में दोनों सदनों के समावेदन के बाद राष्ट्रपति के आदेश से हटाए जाते हैं। प्रत्येक सदन में प्रस्ताव कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए। जाँच न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968 के अनुसार होती है।
- सीएजी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह, उसी रीति और उसी आधार पर हटाए जाते हैं (अनुच्छेद 148(1) और 324(5))। अन्य निर्वाचन आयुक्त तथा प्रादेशिक आयुक्त केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर हटाए जा सकते हैं।
- संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य (अनुच्छेद 317): कदाचार के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाए जाते हैं, परंतु तभी जब राष्ट्रपति के निर्देश पर उच्चतम न्यायालय जाँच कर हटाने की सलाह दे।
- राज्यपाल (अनुच्छेद 156(1)): राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, इसलिए न कोई आधार और न कोई प्रक्रिया दी गई है। सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष है, उनका स्थानांतरण या पुनर्नियुक्ति हो सकती है, और वे उत्तराधिकारी के पदग्रहण तक बने रहते हैं।
- मंत्री: राष्ट्रपति या राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं और प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की सलाह पर हटाए जाते हैं। मंत्रिपरिषद लोकप्रिय सदन के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद हट जाती है।
- अध्यक्ष और उपाध्यक्ष (अनुच्छेद 94(ग) और 96): 14 दिन की सूचना के बाद सदन के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाए जाते हैं। ऐसे प्रस्ताव पर विचार के समय अध्यक्ष सदन में उपस्थित रह सकते हैं, पर पीठासीन नहीं हो सकते।
याद रखने योग्य बहुमत और सूचना अवधि
- कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई विशेष बहुमत: राष्ट्रपति के महाभियोग के दोनों चरण।
- कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वालों का दो-तिहाई: न्यायाधीश को हटाने का समावेदन।
- तत्कालीन समस्त सदस्यों का बहुमत: उपराष्ट्रपति, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति को हटाना।
- चौदह दिन की सूचना: राष्ट्रपति का महाभियोग, उपराष्ट्रपति को हटाना तथा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को हटाना।
- कोई निर्धारित प्रक्रिया नहीं: राज्यपाल, जो राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षा में यह अध्याय मिलान वाले एक पंक्ति के प्रश्न के रूप में आता है: शपथ कौन दिलाता है, त्यागपत्र किसे जाता है, और किस पद के लिए कौन-सा बहुमत चाहिए। सबसे आम जाल हैं: राज्यपाल की शपथ में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश रख देना, राष्ट्रपति का त्यागपत्र उपराष्ट्रपति के बजाय लोकसभा अध्यक्ष को बता देना, अनुच्छेद 61 के दो-तिहाई बहुमत को अनुच्छेद 124(4) के दोहरे बहुमत से मिला देना, और यह भूल जाना कि अध्यक्ष अलग शपथ नहीं लेते तथा राज्यपाल को हटाने की कोई प्रक्रिया ही नहीं है। अनुच्छेद 56, 60, 61, 67, 94, 124(4), 148, 156, 164 और 317 को पद के साथ याद रखें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| राष्ट्रपति की शपथ | भारत के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं; प्रारूप अनुच्छेद 60 में ही |
|---|---|
| राष्ट्रपति का त्यागपत्र | उपराष्ट्रपति को संबोधित, अनुच्छेद 56(1)(क) |
| राष्ट्रपति पर महाभियोग | अनुच्छेद 61, संविधान के अतिक्रमण पर, दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई |
| महाभियोग की सूचना | 14 दिन, सदन के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर सहित |
| उपराष्ट्रपति को हटाना | अनुच्छेद 67(ख): राज्यसभा का प्रस्ताव, तत्कालीन समस्त सदस्यों का बहुमत, लोकसभा की सहमति |
| राज्यपाल की शपथ | उस राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, अनुच्छेद 159 |
| राज्यपाल का कार्यकाल | पाँच वर्ष, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत, अनुच्छेद 156 |
| न्यायाधीश को हटाने का आधार | सिद्ध कदाचार या असमर्थता, अनुच्छेद 124(4) और 217(1)(ख) |
| न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम | 1968, न्यायाधीश को हटाने की जाँच प्रक्रिया |
| सीएजी और सीईसी | उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाए जाते हैं, अनुच्छेद 148(1) और 324(5) |
| यूपीएससी सदस्य | उच्चतम न्यायालय की जाँच के बाद राष्ट्रपति द्वारा, अनुच्छेद 317 |
| शपथ के प्रारूप | संविधान की तीसरी अनुसूची |
| राज्य में न्यूनतम मंत्री | मुख्यमंत्री सहित बारह, अनुच्छेद 164(1क), 91वाँ संशोधन, 2003 |
| अध्यक्ष का त्यागपत्र | उपाध्यक्ष को संबोधित, अनुच्छेद 94(ख) |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्यपाल की पदावधि से संबंधित है?
- A.156
- B.161
- C.165
- D.152
उत्तर देखें
अनुच्छेद 156 राज्यपाल की पदावधि से संबंधित है: खंड (1) के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, खंड (2) उन्हें राष्ट्रपति को संबोधित लेख द्वारा त्यागपत्र देने की अनुमति देता है, और खंड (3) उनका सामान्य कार्यकाल पदग्रहण की तिथि से पाँच वर्ष निर्धारित करता है, जबकि…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र निम्नलिखित में से किसे संबोधित करते हैं?
- A.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- B.भारत के उपराष्ट्रपति
- C.लोकसभा अध्यक्ष
- D.भारत के प्रधानमंत्री
उत्तर देखें
अनुच्छेद 56(1)(क) के अनुसार राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकते हैं, और उपराष्ट्रपति ऐसे त्यागपत्र की सूचना तुरंत लोकसभा अध्यक्ष को देंगे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के राष्ट्रपति को पद की शपथ कौन दिलाता है?
- A.भारत के उपराष्ट्रपति
- B.लोकसभा अध्यक्ष
- C.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- D.निर्वतमान राष्ट्रपति
उत्तर देखें
अनुच्छेद 60 राष्ट्रपति की शपथ का प्रारूप देता है और यह अपेक्षा करता है कि शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति में ली जाए, तथा उनकी अनुपस्थिति में उच्चतम न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश की उपस्थिति में।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी राज्य के राज्यपाल को पद की शपथ निम्नलिखित में से कौन दिलाता है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- C.उस राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- D.राज्य के मुख्यमंत्री
उत्तर देखें
अनुच्छेद 159 के अनुसार प्रत्येक राज्यपाल अपना पद ग्रहण करने से पहले उस राज्य के संबंध में अधिकारिता रखने वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, या उनकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश, की उपस्थिति में शपथ लेंगे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया संविधान के किस अनुच्छेद में दी गई है?
- A.अनुच्छेद 56
- B.अनुच्छेद 61
- C.अनुच्छेद 62
- D.अनुच्छेद 71
उत्तर देखें
अनुच्छेद 61 संविधान के अतिक्रमण के आधार पर राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया देता है: आरोप किसी भी सदन में लाया जा सकता है, जिसके लिए उस सदन के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर सहित चौदह दिन की सूचना आवश्यक है, और प्रस्ताव उस सदन की कुल सदस्य…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के उपराष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव किस सदन में और कितनी सूचना के बाद लाया जा सकता है?
- A.लोकसभा में, 14 दिन की सूचना पर
- B.राज्यसभा में, 14 दिन की सूचना पर
- C.किसी भी सदन में, 7 दिन की सूचना पर
- D.दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में, 30 दिन की सूचना पर
उत्तर देखें
अनुच्छेद 67(ख) के अनुसार उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव तथा लोकसभा की सहमति से हटाया जा सकता है, और ऐसा प्रस्ताव कम से कम चौदह दिन की सूचना के बिना नहीं लाया जा सकता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए राष्ट्रपति को भेजे जाने वाले समावेदन को प्रत्येक सदन में किस बहुमत का समर्थन चाहिए?
- A.उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत
- B.सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत
- C.सदन की कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई बहुमत
- D.उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों का तीन-चौथाई बहुमत
उत्तर देखें
अनुच्छेद 124(4) के अनुसार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को राष्ट्रपति के आदेश से केवल तब हटाया जा सकता है जब संसद के प्रत्येक सदन का समावेदन, जिसे उस सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत का समर्थन…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक को पद से हटाने की प्रक्रिया किसके समान है?
- A.किसी राज्य के राज्यपाल
- B.उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश
- C.भारत के महान्यायवादी
- D.केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य
उत्तर देखें
अनुच्छेद 148(1) के अनुसार नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक को उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जाएगा जिन पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अर्थात सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर अनुच्छेद 124(4) के विशेष बहुमत से पारित समावेदन द्वारा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की न्यूनतम संख्या कितनी हो सकती है?
- A.10
- B.12
- C.13
- D.14
उत्तर देखें
अनुच्छेद 164(1क), जो 2003 के इक्यानबेवें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़ा गया, कहता है कि किसी राज्य की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, तथा यह संख्या बारह से कम नहीं होगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लोकसभा अध्यक्ष अपना त्यागपत्र निम्नलिखित में से किसे देते हैं?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत के प्रधानमंत्री
- C.लोकसभा के उपाध्यक्ष
- D.भारत के मुख्य न्यायाधीश
उत्तर देखें
अनुच्छेद 94(ख) के अनुसार अध्यक्ष अपने हस्ताक्षर सहित उपाध्यक्ष को संबोधित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकते हैं, और उपाध्यक्ष अध्यक्ष को संबोधित लेख द्वारा त्यागपत्र देते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के प्रधानमंत्री को पद की शपथ कौन दिलाता है?
राष्ट्रपति, अनुच्छेद 75(4) के अंतर्गत प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों को पद तथा गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं, जिसका प्रारूप तीसरी अनुसूची में दिया गया है।
उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश अपना त्यागपत्र किसे देता है?
भारत के राष्ट्रपति को, अनुच्छेद 124(2)(क) के अंतर्गत अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा। उच्च न्यायालय का न्यायाधीश भी अनुच्छेद 217(1)(क) के अंतर्गत राष्ट्रपति को ही त्यागपत्र देता है।
क्या राज्यपाल पर महाभियोग लगाया जा सकता है?
नहीं। महाभियोग की व्यवस्था केवल राष्ट्रपति के लिए अनुच्छेद 61 में है। राज्यपाल अनुच्छेद 156(1) के अंतर्गत राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, इसलिए उन्हें बिना कोई आधार या प्रक्रिया बताए हटाया या स्थानांतरित किया जा सकता है।
क्या लोकसभा अध्यक्ष अलग से शपथ लेते हैं?
नहीं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अनुच्छेद 99 के अंतर्गत सदन के सदस्य के रूप में शपथ ले चुके होते हैं, और संविधान उनके पद के लिए कोई अलग शपथ निर्धारित नहीं करता।
उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए कौन-सा बहुमत आवश्यक है?
राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव, जिस पर लोकसभा की सहमति हो, और उसके लिए कम से कम चौदह दिन की सूचना आवश्यक है (अनुच्छेद 67(ख))।
संवैधानिक पदों की शपथ के प्रारूप कहाँ दिए गए हैं?
संविधान की तीसरी अनुसूची में, जिसमें मंत्रियों, विधानमंडल के सदस्यों, न्यायाधीशों तथा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की शपथ के प्रारूप हैं। राष्ट्रपति और राज्यपाल के प्रारूप अनुच्छेद 60 और 159 में हैं।
स्रोत
- भारत का संविधान, अनुच्छेद 56, 60, 61, 67, 94, 124, 148, 156, 164, 317 तथा तीसरी अनुसूची — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (कक्षा 11), कार्यपालिका और न्यायपालिका अध्याय — एनसीईआरटी





