भारत में नागरिकता: अनुच्छेद 5 से 11 और अधिनियम 1955
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारतीय नागरिकता के पूरे नोट्स: अनुच्छेद 5 से 11, नागरिकता अधिनियम 1955, प्राप्ति और समाप्ति, ओसीआई कार्ड तथा सभी संशोधन।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

नागरिकता किसी राज्य की पूर्ण विधिक सदस्यता है। नागरिक को संविधान द्वारा दिए गए सभी अधिकार मिलते हैं, जिनमें वे अधिकार भी शामिल हैं जो केवल नागरिकों के लिए आरक्षित हैं, जबकि विदेशी को केवल वे अधिकार मिलते हैं जो सब व्यक्तियों को उपलब्ध हैं। संविधान नागरिकता का विषय भाग दो, अनुच्छेद 5 से 11 में रखता है, किंतु वह कोई स्थायी विधि नहीं बनाता; वह केवल यह तय करता है कि 26 जनवरी 1950 को संविधान के प्रारंभ पर कौन नागरिक था और शेष कार्य संसद को सौंप देता है। नागरिकता, देशीयकरण और विदेशी संघ सूची के विषय हैं, इसलिए इन पर केवल संसद विधि बना सकती है और उसने नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया है। छोटे संवैधानिक अध्याय और बहुत संशोधित अधिनियम का यही मेल इस अध्याय को परीक्षा का प्रिय विषय बनाता है।
संवैधानिक उपबंध: अनुच्छेद 5 से 11
| अनुच्छेद | उपबंध |
|---|---|
| 5 | संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता: भारत में अधिवासित वह व्यक्ति जो भारत में जन्मा हो, या जिसके माता या पिता भारत में जन्मे हों, या जो 26 जनवरी 1950 से पूर्व कम से कम पाँच वर्ष भारत में सामान्यतः निवासी रहा हो। |
| 6 | पाकिस्तान से भारत आए प्रवासियों की नागरिकता के अधिकार। |
| 7 | पाकिस्तान गए और पुनर्वास अनुज्ञा पत्र पर लौट आए व्यक्तियों की नागरिकता। |
| 8 | विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों की नागरिकता, भारतीय दूतावास में पंजीकरण द्वारा। |
| 9 | जो व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता ले लेता है, वह भारत का नागरिक नहीं रहता। |
| 10 | संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन नागरिकता के अधिकारों का बना रहना। |
| 11 | संसद को विधि द्वारा नागरिकता के अधिकार का विनियमन करने की शक्ति। |
अधिनियम 1955 के अंतर्गत नागरिकता की प्राप्ति
अधिनियम नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके देता है।
- जन्म से: 26 जनवरी 1950 को या उसके पश्चात किंतु 1 जुलाई 1987 से पूर्व भारत में जन्मा व्यक्ति माता-पिता की राष्ट्रीयता चाहे जो हो, जन्म से नागरिक है। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म पर माता या पिता में से एक का जन्म के समय भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। 3 दिसंबर 2004 को या उसके बाद जन्म पर दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों, या एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो।
- वंश से: भारत के बाहर जन्मा व्यक्ति नागरिक हो सकता है यदि जन्म के समय माता या पिता भारतीय नागरिक थे, और निर्धारित अवधि में भारतीय वाणिज्य दूतावास में पंजीकरण करा लिया जाए।
- पंजीकरण से: भारत में सात वर्ष से सामान्यतः निवासी भारतीय मूल के व्यक्ति, भारतीय नागरिक के विदेशी जीवनसाथी जो सात वर्ष से निवासी हो, तथा भारतीय नागरिकों के अवयस्क बच्चों के लिए।
- देशीयकरण से: अच्छे चरित्र वाले विदेशी को, जिसे सामान्यतः बारह वर्ष भारत में निवास या सरकारी सेवा करनी होती है, पूर्व नागरिकता त्यागनी होती है और निष्ठा की शपथ लेनी होती है।
- भूभाग के अधिग्रहण से: जब कोई नया भूभाग भारत का अंग बनता है, तब भारत सरकार अधिसूचना द्वारा बताती है कि कौन व्यक्ति नागरिक होंगे, जैसा पांडिचेरी, गोवा, दमन और दीव तथा सिक्किम के लिए किया गया।
नागरिकता की समाप्ति
- परित्याग स्वैच्छिक कार्य है: वयस्क नागरिक घोषणा करके भारतीय नागरिकता छोड़ देता है, और उसके अवयस्क बच्चे भी नागरिकता खो देते हैं, किंतु वयस्क होने पर उसे फिर प्राप्त कर सकते हैं।
- पर्यवसान स्वतः होता है, जब नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ले लेता है; इसी कारण भारत में दोहरी नागरिकता नहीं है।
- वंचन केंद्र सरकार का अनिवार्य आदेश है, जो पंजीकरण या देशीयकरण से बने नागरिक के विरुद्ध छल से नागरिकता प्राप्त करने, संविधान के प्रति अनिष्ठा, युद्धकाल में शत्रु से व्यापार, पंजीकरण के पाँच वर्ष के भीतर दो वर्ष के कारावास, अथवा लगातार सात वर्ष भारत के बाहर निवास के आधार पर दिया जा सकता है।
एकल नागरिकता और केवल नागरिकों के अधिकार
अमेरिका के विपरीत भारत में एकल नागरिकता है, जो ब्रिटिश व्यवहार से ली गई है: केवल भारत की नागरिकता है, किसी राज्य की अलग नागरिकता नहीं, इसलिए प्रत्येक नागरिक को देश के हर भाग में समान अधिकार प्राप्त हैं। कुछ अधिकार केवल नागरिकों को मिलते हैं: अनुच्छेद 15 और 16 के अंतर्गत भेदभाव के विरुद्ध तथा लोक नियोजन का अधिकार, अनुच्छेद 19 की स्वतंत्रताएँ, अनुच्छेद 29 और 30 के सांस्कृतिक तथा शिक्षा संबंधी अधिकार, मत देने और चुनाव लड़ने का अधिकार, तथा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा महान्यायवादी के पदों की पात्रता।
प्रवासी भारतीय नागरिक और संशोधन
ओसीआई यानी प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड, जो 2005 में आरंभ हुआ, भारतीय मूल के विदेशी नागरिक को आजीवन वीजा और अधिकांश आर्थिक मामलों में अनिवासी भारतीय के समान दर्जा देता है, किंतु यह नागरिकता नहीं है: ओसीआई कार्डधारक मत नहीं दे सकता, संवैधानिक पद धारण नहीं कर सकता और कृषि भूमि नहीं खरीद सकता। अलग से चल रहा भारतीय मूल के व्यक्ति का कार्ड 2015 में ओसीआई में मिला दिया गया। अधिनियम में कई संशोधन हुए: 1986 के संशोधन ने 1 जुलाई 1987 से जन्म से नागरिकता का नियम बदला; 1992 ने माता के माध्यम से वंश से नागरिकता की अनुमति दी; 2003 ने अवैध प्रवासी की अवधारणा और राष्ट्रीय रजिस्टर का उपबंध जोड़ा; 2005 ने ओसीआई योजना दी; 2015 ने पीआईओ को ओसीआई में मिलाया; और नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश तथा पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई व्यक्तियों को, जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए, नागरिकता के लिए पात्र बनाया और उनके देशीयकरण की अवधि ग्यारह वर्ष से घटाकर पाँच वर्ष कर दी; इसके नियम 2024 में अधिसूचित हुए।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, सीधा अनुच्छेद वाला प्रश्न: नागरिकता किस भाग और किन अनुच्छेदों में है, अनुच्छेद 9 या 11 क्या कहता है, और पाकिस्तान से आए प्रवासियों का उपबंध कौन सा है। दूसरा, अधिनियम वाला प्रश्न: प्राप्ति के पाँच और समाप्ति के तीन तरीके, पंजीकरण के लिए सात वर्ष तथा देशीयकरण के लिए बारह वर्ष की अवधि, और जन्म से नागरिकता की तीन तिथि अवधियाँ। तीसरा, संशोधन वाला प्रश्न: प्रत्येक संशोधन का वर्ष, 2015 में पीआईओ का ओसीआई में विलय, तथा 2019 के संशोधन की कट-ऑफ तिथि 31 दिसंबर 2014। सामान्य जाल हैं विवाह को प्राप्ति का अलग तरीका बताना, पर्यवसान और वंचन में भ्रम, ओसीआई कार्डधारक को नागरिक कहना, तथा अनुच्छेद 6 और 7 को आपस में बदल देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भाग और अनुच्छेद | भाग दो, अनुच्छेद 5 से 11 |
|---|---|
| विधायी शक्ति | अनुच्छेद 11; नागरिकता संघ सूची का विषय है |
| प्रवृत्त विधि | नागरिकता अधिनियम, 1955 |
| प्राप्ति के तरीके | जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण, भूभाग का अधिग्रहण |
| समाप्ति के तरीके | परित्याग, पर्यवसान, वंचन |
| पंजीकरण | भारतीय मूल के व्यक्ति या नागरिक के जीवनसाथी के लिए सात वर्ष का सामान्य निवास |
| देशीयकरण | सामान्यतः बारह वर्ष का निवास या सरकारी सेवा तथा निष्ठा की शपथ |
| अनुच्छेद 9 | स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता समाप्त; दोहरी नागरिकता नहीं |
| जन्म से नागरिकता | 26 जनवरी 1950 से 30 जून 1987 तक कोई शर्त नहीं; 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 तक एक भारतीय माता या पिता; 3 दिसंबर 2004 से कठोर नियम |
| ओसीआई | 2005 में आरंभ; 2015 में पीआईओ का विलय; मताधिकार, संवैधानिक पद और कृषि भूमि नहीं |
| सीएए 2019 | कट-ऑफ तिथि 31 दिसंबर 2014; निर्दिष्ट समुदायों के लिए देशीयकरण ग्यारह वर्ष से पाँच वर्ष |
| नागरिकता का प्रकार | एकल नागरिकता, ब्रिटिश संविधान से ली गई |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत के संविधान के किस भाग में नागरिकता से संबंधित उपबंध दिए गए हैं?
- A.भाग एक
- B.भाग दो
- C.भाग सात
- D.भाग नौ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भाग दो
व्याख्या
सही उत्तर B, भाग दो है। नागरिकता का विषय संविधान के भाग दो में है, जिसमें अनुच्छेद 5 से 11 तक सम्मिलित हैं। ये उपबंध तय करते हैं कि 26 जनवरी 1950 को संविधान के प्रारंभ पर कौन भारत का नागरिक बना, और अनुच्छेद 11 के माध्यम से नागरिकता की आगे की सारी विधि संसद के लिए छोड़ देते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि भाग एक में अनुच्छेद 1 से 4 हैं, जो संघ और उसके राज्यक्षेत्र, नए राज्यों के निर्माण तथा सीमाओं के परिवर्तन से संबंधित हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि भाग सात में मूलतः पहली अनुसूची के भाग ख के राज्यों से संबंधित अनुच्छेद 238 था, जिसे 1956 के सातवें संशोधन द्वारा निरसित कर दिया गया। विकल्प D गलत है क्योंकि भाग नौ पंचायतों से संबंधित है, जो 1992 के तिहत्तरवें संशोधन से जोड़ा गया, और भाग नौ क नगरपालिकाओं से संबंधित है। क्रम याद रखें: भाग एक राज्यक्षेत्र, भाग दो नागरिकता, भाग तीन मूल अधिकार।
भारतीय संविधान के कौन से अनुच्छेद नागरिकता से संबंधित हैं?
- A.अनुच्छेद 3 से 10
- B.अनुच्छेद 4 से 11
- C.अनुच्छेद 5 से 11
- D.अनुच्छेद 6 से 11
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 5 से 11
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 5 से 11 है। संविधान का भाग दो अनुच्छेद 5 से अनुच्छेद 11 तक चलता है। अनुच्छेद 5 संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता बताता है, अनुच्छेद 6 और 7 पाकिस्तान से आए तथा पाकिस्तान गए प्रवासियों से संबंधित हैं, अनुच्छेद 8 विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों से, अनुच्छेद 9 स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता लेने पर नागरिकता की समाप्ति से, अनुच्छेद 10 नागरिकता के अधिकारों के बने रहने से और अनुच्छेद 11 संसद की विधि बनाने की शक्ति से संबंधित है। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 3 और 4 भाग एक के हैं और नए राज्यों के निर्माण तथा अनुसूचियों में परिणामी परिवर्तन से संबंधित हैं। विकल्प B इसी कारण गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 4 नागरिकता अध्याय का अंग नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि वह अनुच्छेद 5 को छोड़ देता है, जो इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण आरंभिक उपबंध है।
भारतीय नागरिकता की प्राप्ति और समाप्ति को नियंत्रित करने वाला नागरिकता अधिनियम किस वर्ष बना?
- A.1950
- B.1952
- C.1955
- D.1962
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1955
व्याख्या
सही उत्तर C, 1955 है। संविधान केवल यह तय करता है कि 26 जनवरी 1950 को कौन नागरिक था, और अनुच्छेद 11 शेष कार्य संसद को सौंपता है, जिसने 1955 में नागरिकता अधिनियम बनाया। यह अधिनियम नागरिकता प्राप्त करने के पाँच और खोने के तीन तरीके बताता है, तथा इसमें 1986, 1992, 2003, 2005, 2015 और 2019 में संशोधन हुए हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 1950 संविधान के लागू होने का वर्ष है, अधिनियम का नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 1952 पहले आम चुनाव का वर्ष है, नागरिकता विधि का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1962 का नागरिकता विधि से कोई संबंध नहीं है; वह भारत-चीन युद्ध के लिए स्मरण किया जाता है। दोनों को जोड़ी में याद रखें: संविधान का भाग दो और नागरिकता अधिनियम, 1955।
संविधान का कौन सा अनुच्छेद संसद को विधि द्वारा नागरिकता के अधिकार का विनियमन करने की शक्ति देता है?
- A.अनुच्छेद 5
- B.अनुच्छेद 9
- C.अनुच्छेद 10
- D.अनुच्छेद 11
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अनुच्छेद 11
व्याख्या
सही उत्तर D, अनुच्छेद 11 है। अनुच्छेद 11 कहता है कि पूर्ववर्ती उपबंधों से संसद की वह शक्ति कम नहीं होती जिससे वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों पर उपबंध कर सके। इसी अनुच्छेद के बल पर नागरिकता अधिनियम, 1955 बना और उसमें संशोधन होते रहे हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 5 केवल यह तय करता है कि संविधान के प्रारंभ पर कौन नागरिक था, जिसके लिए अधिवास, भारत में जन्म, माता या पिता का भारत में जन्म अथवा पाँच वर्ष के सामान्य निवास की कसौटी रखी गई। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 9 कहता है कि स्वेच्छा से विदेशी राज्य की नागरिकता लेने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहता। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 10 केवल संसद द्वारा बनाई विधि के अधीन नागरिकता के अधिकारों को बनाए रखता है और इस प्रकार अनुच्छेद 11 पर ही आश्रित है।
नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का तरीका नहीं है?
- A.जन्म से
- B.वंश से
- C.पंजीकरण से
- D.विवाह से
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. विवाह से
व्याख्या
सही उत्तर D, विवाह से है। अधिनियम नागरिकता प्राप्त करने के ठीक पाँच तरीके बताता है: जन्म से, वंश से, पंजीकरण से, देशीयकरण से और भूभाग के अधिग्रहण से। किसी भारतीय नागरिक से विवाह स्वयं नागरिकता नहीं देता; नागरिक के विदेशी जीवनसाथी को भारत में सात वर्ष के सामान्य निवास के बाद पंजीकरण के मार्ग से आवेदन करना होता है, इसलिए विवाह को कभी अलग तरीका नहीं गिना जाता। विकल्प A उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि जन्म पहला तरीका है, जिसके लिए 26 जनवरी 1950 से आरंभ होने वाली तीन भिन्न तिथि अवधियाँ हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि वंश से उन व्यक्तियों को नागरिकता मिलती है जो भारत के बाहर किसी भारतीय माता या पिता से जन्मे हैं और जिनका पंजीकरण भारतीय वाणिज्य दूतावास में हुआ है। विकल्प C गलत है क्योंकि पंजीकरण का मार्ग भारतीय मूल के निवासी व्यक्तियों, नागरिकों के जीवनसाथियों तथा अवयस्क बच्चों के लिए है।
संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार जो व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, वह
- A.दोहरे नागरिक के रूप में भारतीय नागरिकता बनाए रखता है
- B.भारत का नागरिक नहीं रहता
- C.स्वतः प्रवासी भारतीय नागरिक बन जाता है
- D.संसद द्वारा विधि बनाए जाने तक नागरिक रहता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारत का नागरिक नहीं रहता
व्याख्या
सही उत्तर B, भारत का नागरिक नहीं रहता है। अनुच्छेद 9 कहता है कि जिस व्यक्ति ने स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर ली है, वह भारत का नागरिक नहीं है, और नागरिकता अधिनियम की धारा 9 इसी नियम को पर्यवसान का नाम देती है। यही भारत में दोहरी नागरिकता के निषेध का संवैधानिक आधार है। विकल्प A इसी कारण गलत है, क्योंकि दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है और व्यक्ति को एक चुनना पड़ता है। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड स्वतः नहीं मिलता; भारतीय मूल के व्यक्ति को आवेदन करना होता है, और वह कार्ड किसी भी स्थिति में आजीवन वीजा है, नागरिकता नहीं, इसलिए उससे मताधिकार या संवैधानिक पद नहीं मिलता। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 9 के अंतर्गत नागरिकता की यह समाप्ति स्वयं संविधान के बल से होती है और संसद की किसी विधि की प्रतीक्षा नहीं करती।
नागरिकता, देशीयकरण और विदेशी विषय सातवीं अनुसूची की किस सूची में रखे गए हैं?
- A.संघ सूची
- B.राज्य सूची
- C.समवर्ती सूची
- D.अनुसूची से बाहर अवशिष्ट विषय
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. संघ सूची
व्याख्या
सही उत्तर A, संघ सूची है। नागरिकता, देशीयकरण और विदेशी सातवीं अनुसूची की संघ सूची की एक प्रविष्टि हैं, इसलिए इन पर केवल संसद विधि बना सकती है; यही बात अनुच्छेद 11 से मेल खाती है और बताती है कि देश में एक ही केंद्रीय नागरिकता अधिनियम है और किसी राज्य की अलग नागरिकता विधि नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि राज्य सूची में लोक व्यवस्था, पुलिस, स्थानीय शासन, लोक स्वास्थ्य और कृषि जैसे विषय हैं, और कोई राज्य विधानमंडल नागरिकता दे या छीन नहीं सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि समवर्ती सूची में दंड विधि, विवाह और विवाह विच्छेद, शिक्षा तथा वन जैसे विषय हैं, जिन पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों विधि बना सकते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि नागरिकता स्पष्ट रूप से परिगणित विषय है, अतः अवशिष्ट विषय नहीं है; अवशिष्ट शक्तियाँ, जो संसद के पास ही हैं, केवल उन विषयों पर लागू होती हैं जो किसी सूची में नहीं हैं।
भारतीय मूल के व्यक्ति का कार्ड किस वर्ष प्रवासी भारतीय नागरिक योजना में मिला दिया गया?
- A.2003
- B.2005
- C.2015
- D.2019
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2015
व्याख्या
सही उत्तर C, 2015 है। नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2015 ने पुरानी भारतीय मूल के व्यक्ति कार्ड योजना को प्रवासी भारतीय नागरिक योजना में मिला दिया, जिससे पीआईओ कार्डधारक ओसीआई कार्डधारक माने गए और केवल एक ही श्रेणी बची। विकल्प A गलत है क्योंकि 2003 के संशोधन ने अवैध प्रवासी की अवधारणा दी और नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर का उपबंध किया, विलय नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 2005 में ओसीआई योजना स्वयं आरंभ हुई, जिससे भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को आजीवन वीजा और अधिकांश आर्थिक मामलों में अनिवासी भारतीय के समान दर्जा मिला, किंतु मताधिकार या संवैधानिक पद नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2019 का संशोधन अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह निर्दिष्ट समुदायों की पात्रता से संबंधित है, जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए थे।
नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पात्रता के लिए भारत में प्रवेश की कट-ऑफ तिथि क्या है?
- A.31 दिसंबर 2004
- B.31 दिसंबर 2014
- C.31 मार्च 2015
- D.31 दिसंबर 2019
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 31 दिसंबर 2014
व्याख्या
सही उत्तर B, 31 दिसंबर 2014 है। नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 कहता है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा ईसाई व्यक्ति, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आ गए, अवैध प्रवासी नहीं माने जाएंगे और नागरिकता के पात्र होंगे, तथा उनके देशीयकरण की अर्हता अवधि ग्यारह वर्ष से घटाकर पाँच वर्ष कर दी गई है। इसके अंतर्गत आवेदन के नियम 2024 में अधिसूचित हुए। विकल्प A गलत है क्योंकि 3 दिसंबर 2004 वह तिथि है जिससे जन्म से नागरिकता का कठोर नियम लागू होता है, जिसमें दोनों माता-पिता नागरिक हों या एक नागरिक और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। विकल्प C गलत है क्योंकि अधिनियम में ऐसी कोई तिथि नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2019 अधिनियम बनने का वर्ष है, प्रवेश की कट-ऑफ तिथि उससे पाँच वर्ष पहले की है।
भारतीय संविधान में एकल नागरिकता का विचार किस देश के संविधान से लिया गया है?
- A.अमेरिका
- B.ब्रिटेन
- C.कनाडा
- D.आयरलैंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ब्रिटेन
व्याख्या
सही उत्तर B, ब्रिटेन है। भारत ब्रिटिश व्यवहार के अनुसार एकल नागरिकता अपनाता है: केवल भारत की नागरिकता होती है, किसी राज्य की अलग नागरिकता नहीं, इसलिए प्रत्येक नागरिक को देश के हर भाग में समान अधिकार मिलते हैं। ब्रिटेन से भारत ने संसदीय शासन, विधि का शासन, एकल नागरिकता, विधायी प्रक्रिया और अध्यक्ष का पद भी लिया। विकल्प A गलत है क्योंकि अमेरिका में दोहरी नागरिकता होती है, संघ की और राज्य की; अमेरिका से भारत ने मूल अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन और महाभियोग की प्रक्रिया ली। विकल्प C गलत है क्योंकि कनाडा से भारत ने सशक्त केंद्र वाला संघ, संघ के पास अवशिष्ट शक्तियाँ और राज्यपालों की नियुक्ति ली। विकल्प D गलत है क्योंकि आयरलैंड से भारत ने नीति निदेशक तत्व, राज्यसभा में सदस्यों का नामनिर्देशन और राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति ली।
भारत में जन्मे व्यक्ति को जन्म से नागरिक होने के लिए माता या पिता में से एक का भारतीय नागरिक होना किस तिथि से आवश्यक हुआ?
- A.26 जनवरी 1950
- B.1 जुलाई 1987
- C.3 दिसंबर 2004
- D.31 दिसंबर 2014
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1 जुलाई 1987
व्याख्या
सही उत्तर B, 1 जुलाई 1987 है। 1986 के संशोधन ने जन्म से नागरिकता का नियम 1 जुलाई 1987 से बदल दिया: उस तिथि को या उसके बाद भारत में जन्मा व्यक्ति जन्म से नागरिक तभी है जब जन्म के समय उसके माता या पिता में से एक भारतीय नागरिक हो। विकल्प A गलत है क्योंकि 26 जनवरी 1950 से 30 जून 1987 तक केवल भारत में जन्म पर्याप्त था और माता-पिता की राष्ट्रीयता से कोई अंतर नहीं पड़ता था। विकल्प C गलत है क्योंकि 3 दिसंबर 2004 अगला और अधिक कठोर चरण है, जिसके अनुसार भारत में जन्मा व्यक्ति नागरिक तभी है जब उसके दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों, अथवा एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। विकल्प D गलत है क्योंकि 31 दिसंबर 2014, 2019 के संशोधन में प्रवेश की कट-ऑफ तिथि है और जन्म से नागरिकता से उसका कोई संबंध नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संविधान के कौन से अनुच्छेद नागरिकता से संबंधित हैं?
भाग दो में अनुच्छेद 5 से 11 तक। ये उपबंध तय करते हैं कि 26 जनवरी 1950 को संविधान के प्रारंभ पर कौन नागरिक था और आगे की विधि अनुच्छेद 11 के अंतर्गत संसद के लिए छोड़ देते हैं।
क्या कोई भारतीय दोहरी नागरिकता रख सकता है?
नहीं। संविधान के अनुच्छेद 9 और नागरिकता अधिनियम की धारा 9 के अनुसार जो नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ले लेता है, वह भारत का नागरिक नहीं रहता। ओसीआई कार्ड उसका विकल्प है, किंतु वह नागरिकता नहीं है।
भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके कौन से हैं?
जन्म से, वंश से, पंजीकरण से, देशीयकरण से और भूभाग के अधिग्रहण से। विवाह अलग तरीका नहीं है: भारतीय नागरिक का विदेशी जीवनसाथी सात वर्ष के सामान्य निवास के बाद पंजीकरण द्वारा नागरिकता लेता है।
नागरिकता के पर्यवसान और वंचन में क्या अंतर है?
पर्यवसान स्वतः होता है और नागरिक के स्वयं विदेशी नागरिकता लेने से होता है। वंचन केंद्र सरकार का अनिवार्य आदेश है, जो पंजीकरण या देशीयकरण से बने नागरिक के विरुद्ध छल, अनिष्ठा अथवा लंबे विदेशी निवास जैसे आधारों पर दिया जाता है।
प्रवासी भारतीय नागरिक कौन होता है?
भारतीय मूल का विदेशी नागरिक, अथवा किसी नागरिक या ओसीआई का विदेशी जीवनसाथी, जो ओसीआई कार्ड रखता है। इस कार्ड से आजीवन वीजा और अधिकांश आर्थिक मामलों में अनिवासी भारतीय के समान दर्जा मिलता है, किंतु मताधिकार, संवैधानिक पद और कृषि भूमि की खरीद नहीं।
नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 की कट-ऑफ तिथि क्या है?
31 दिसंबर 2014। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा ईसाई व्यक्ति, जो इस तिथि तक भारत आ गए, पात्र हैं और उनके देशीयकरण की अवधि ग्यारह के स्थान पर पाँच वर्ष है।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग दो: नागरिकता — इंडिया कोड, भारत सरकार
- नागरिकता अधिनियम, 1955 — इंडिया कोड, भारत सरकार
- गृह मंत्रालय, नागरिकता प्रभाग — गृह मंत्रालय





