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GK नोट्सभारतीय राजव्यवस्थासंविधान के स्रोत और प्रमुख विशेषताएं

भारतीय संविधान के स्रोत और प्रमुख विशेषताएं

परीक्षा के लिए पूरे नोट्स: भारतीय संविधान के स्रोत, देशवार उधार ली गई विशेषताएं, और अर्धसंघीय ढांचे से इकहरी नागरिकता तक उसकी प्रमुख विशेषताएं।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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भारतीय संविधान के स्रोत और प्रमुख विशेषताएं — GK24 title card
भारतीय संविधान के स्रोत और प्रमुख विशेषताएं — GK24 title card

कोई संविधान शून्य से नहीं लिखा जाता। संविधान सभा के सदस्यों ने उस समय प्रचलित संविधान पढ़े, जो एक निर्धन, बहुल और नवस्वतंत्र देश के अनुकूल था उसे लिया, और हर उधार को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार बदला। इसी कारण हर सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र में प्रश्नों का एक समूह पूछता है कि कौन विशेषता किस देश से आई, और दूसरा समूह पूछता है कि पूरा दस्तावेज किन बातों से विशिष्ट बनता है। यह नोट दोनों रखता है: याद करने योग्य स्रोत सूची, और समझने योग्य प्रमुख विशेषताएं।

संविधान कैसे बना

संविधान सभा 1946 में कैबिनेट मिशन की योजना के अंतर्गत गठित हुई। उसकी पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, जिसमें उपस्थित सबसे वरिष्ठ सदस्य के रूप में सच्चिदानंद सिन्हा अध्यक्षता में बैठे, और 11 दिसंबर 1946 को राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए। जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव रखा और सभा ने उसे 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया; वही प्रस्ताव प्रस्तावना का आधार बना। अगस्त 1947 में बनी प्रारूप समिति, जिसके अध्यक्ष बी. आर. आंबेडकर थे, ने वह प्रारूप तैयार किया जिस पर सभा ने खंडवार बहस की। संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत हुआ, और यही तिथि प्रस्तावना में लिखी है, तथा उसका बड़ा भाग 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया, क्योंकि कांग्रेस 1930 से उसी दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाती आई थी। इस कार्य में दो वर्ष, ग्यारह माह और अठारह दिन लगे। अंगीकरण के समय संविधान में 22 भागों में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं, जिससे वह किसी भी संप्रभु देश का सबसे लंबा लिखित संविधान बना।

स्रोत, देश के अनुसार

सबसे बड़ा स्रोत कोई विदेशी संविधान नहीं, ब्रिटिश संसद का एक अधिनियम है। पाठ का लगभग दो-तिहाई भारत शासन अधिनियम, 1935 का अनुसरण करता है, जिससे संघीय योजना, राज्यपाल का पद, न्यायपालिका का ढांचा, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन उपबंध और प्रशासन का अधिकांश विवरण आया।

स्रोतउससे ली गई विशेषताएं
भारत शासन अधिनियम, 1935संघीय योजना, राज्यपाल का पद, न्यायपालिका, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन उपबंध, प्रशासनिक विवरण
ब्रिटेनसंसदीय शासन प्रणाली, विधि का शासन, विधायी प्रक्रिया, इकहरी नागरिकता, मंत्रिमंडल प्रणाली, विशेषाधिकार लेख, संसदीय विशेषाधिकार, द्विसदनीयता
संयुक्त राज्य अमेरिकामूल अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक पुनरावलोकन, राष्ट्रपति पर महाभियोग, न्यायाधीशों को हटाना, उपराष्ट्रपति का पद
आयरलैंडराज्य के नीति निदेशक तत्व, राज्यसभा में सदस्यों का नामनिर्देशन, राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति
कनाडामजबूत केंद्र वाला संघ, अवशिष्ट शक्तियां केंद्र के पास, राज्यपालों की नियुक्ति केंद्र द्वारा, उच्चतम न्यायालय का परामर्शी क्षेत्राधिकार
ऑस्ट्रेलियासमवर्ती सूची, व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता, दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
जर्मनी, वाइमर गणराज्यआपातकाल में मूल अधिकारों का निलंबन
सोवियत संघमूल कर्तव्य, तथा प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का आदर्श
फ्रांसगणतंत्र, तथा स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श
दक्षिण अफ्रीकासंविधान संशोधन की प्रक्रिया, तथा राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन
जापानअनुच्छेद 21 में विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया वाक्यांश

आलोचकों ने इसे उधार का थैला कहा। आंबेडकर का उत्तर था कि सौ वर्ष के संविधान निर्माण के बाद नया गढ़ने को बचा ही कम था, और कुछ भी भारतीय परिस्थितियों के अनुसार बदले बिना नहीं लिया गया।

प्रमुख विशेषताएं

  • विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान, क्योंकि वह संघ और राज्यों दोनों को एक ही दस्तावेज में समेटता है, अनुसूचित तथा जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन का विस्तृत प्रावधान करता है, और 1935 के अधिनियम का बड़ा भाग अपने में ले आया।
  • कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण। कुछ उपबंध साधारण बहुमत से संशोधित होते हैं, अधिकांश प्रत्येक सदन के विशेष बहुमत से, और संघीय संबंधों को छूने वाले विशेष बहुमत के साथ आधे राज्य विधानमंडलों की सहमति से।
  • रूप में संघीय, भावना में एकात्मक। दो स्तर की सरकार, सातवीं अनुसूची में शक्तियों का विभाजन और स्वतंत्र न्यायपालिका है, पर एक ही संविधान, इकहरी नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएं और आपातकालीन उपबंध भी हैं जो व्यवस्था को एकात्मक बना सकते हैं। इसी कारण विद्वान उसे अर्धसंघीय कहते हैं, और संविधान स्वयं संघ के स्थान पर राज्यों का संघ शब्द प्रयोग करता है।
  • संसदीय शासन प्रणाली केंद्र और राज्यों में, जहां वास्तविक कार्यपालिका विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी है और बहुमत रहने तक पद पर रहती है, तथा राज्याध्यक्ष नाममात्र का होता है।
  • संसदीय प्रभुत्व और न्यायिक सर्वोच्चता का संयोजन। संसद संविधान का बड़ा भाग संशोधित कर सकती है, पर उच्चतम न्यायालय किसी विधि को शून्य घोषित कर सकता है, और मूल ढांचा सिद्धांत के अंतर्गत संशोधन भी निरस्त हो सकता है।
  • एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका, जिसमें एक ही पदानुक्रम के शिखर पर उच्चतम न्यायालय है और वही केंद्रीय तथा राज्य विधियां दोनों लागू करता है।
  • मूल अधिकार, नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य। अधिकार वाद योग्य हैं, निदेशक तत्व वाद योग्य नहीं पर देश के शासन में मूलभूत हैं, और कर्तव्य 1976 में स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़े गए।
  • धर्मनिरपेक्ष राज्य, जो किसी धर्म को राजधर्म का दर्जा नहीं देता और सभी को अंतःकरण की स्वतंत्रता देता है।
  • सार्वभौम वयस्क मताधिकार, जिसमें मताधिकार की आयु 1988 में इक्कीस से अठारह वर्ष कर दी गई, और पूरे देश के लिए इकहरी नागरिकता।
  • स्वतंत्र निकाय तीनों अंगों से बाहर, जिनमें निर्वाचन आयोग, नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, संघ तथा राज्य लोक सेवा आयोग और वित्त आयोग हैं।
  • सरकार के तीन स्तर, जिनमें गांव तथा नगरपालिका का स्तर 1992 के संशोधनों से जुड़ा।

प्रस्तावना

प्रस्तावना घोषित करती है कि भारत के लोग, देश को संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने का दृढ़ संकल्प लेकर, स्वयं को न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व प्रदान करते हैं। समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द मूल पाठ में नहीं थे; वे 1976 के बयालीसवें संशोधन से जोड़े गए, जो अब तक प्रस्तावना का एकमात्र संशोधन है। 1960 के बेरुबाड़ी संघ मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है, पर 1973 के केशवानंद भारती मामले में उसने माना कि प्रस्तावना संविधान का भाग है और मूल ढांचे को नष्ट किए बिना संशोधित हो सकती है, हालांकि वह स्वयं किसी शक्ति का स्रोत नहीं है।

परीक्षा की दृष्टि से

इस विषय से दो तरह के प्रश्न आते हैं और दोनों मिलान के होते हैं। पहला प्रकार कोई विशेषता देकर देश पूछता है, इसलिए वे जोड़े याद करें जो बार-बार पूछे जाते हैं: नीति निदेशक तत्व के साथ आयरलैंड, मूल कर्तव्य के साथ सोवियत संघ, न्यायिक पुनरावलोकन तथा मूल अधिकार के साथ अमेरिका, समवर्ती सूची के साथ ऑस्ट्रेलिया, संशोधन प्रक्रिया के साथ दक्षिण अफ्रीका, आपातकाल में अधिकारों के निलंबन के साथ वाइमर गणराज्य, और मजबूत केंद्र के साथ कनाडा। पसंदीदा जाल नीति निदेशक तत्वों को अमेरिका से या मूल कर्तव्यों को आयरलैंड से जोड़ देना है। दूसरा प्रकार प्रमुख विशेषताएं पूछता है, जहां परीक्षा योग्य बिंदु अर्धसंघीय शब्द, राज्यों का संघ वाक्यांश, इकहरी नागरिकता, कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण, तथा 26 नवंबर 1949 और 26 जनवरी 1950 की तिथियां हैं। प्रस्तावना पर कथन आधारित प्रश्न सामान्यतः बयालीसवें संशोधन और इस बात पर टिकते हैं कि प्रस्तावना संविधान का भाग है या नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

संविधान सभा की पहली बैठक9 दिसंबर 1946, अस्थायी अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा
सभा के स्थायी अध्यक्षराजेंद्र प्रसाद, 11 दिसंबर 1946 को निर्वाचित
प्रारूप समिति के अध्यक्षबी. आर. आंबेडकर
अंगीकरण और प्रवर्तन26 नवंबर 1949 को अंगीकृत; 26 जनवरी 1950 को प्रभावी
लगा समय2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन
मूल आकार395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां
सबसे बड़ा एकल स्रोतभारत शासन अधिनियम, 1935
आयरलैंड सेनीति निदेशक तत्व, राज्यसभा में नामनिर्देशन, राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति
सोवियत संघ सेमूल कर्तव्य तथा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का आदर्श
दक्षिण अफ्रीका सेसंविधान संशोधन की प्रक्रिया और राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन
वाइमर गणराज्य सेआपातकाल के दौरान मूल अधिकारों का निलंबन
प्रस्तावना का संशोधनकेवल एक बार, 1976 के बयालीसवें संशोधन से, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता जोड़े गए

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

निम्नलिखित में भारत के संविधान का सबसे बड़ा एकल स्रोत कौन है?

  1. A.भारत शासन अधिनियम, 1935
  2. B.भारतीय परिषद अधिनियम, 1909
  3. C.अमेरिका का संविधान
  4. D.आयरलैंड का संविधान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारत शासन अधिनियम, 1935

व्याख्या

सही उत्तर A, भारत शासन अधिनियम, 1935 है। संविधान के उपबंधों का लगभग दो-तिहाई उसी अधिनियम का अनुसरण करता है, जिसने विषय सूचियों वाली संघीय योजना, राज्यपाल का पद, न्यायपालिका का ढांचा और शक्तियां, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन उपबंध तथा अधिकांश प्रशासनिक विवरण दिया। अधिनियम पहले से लागू था, इसलिए उसकी मशीनरी आगे बढ़ाई जा सकी और अभी विभाजित हुआ प्रशासन अस्थिर नहीं हुआ। B ने पृथक निर्वाचन मंडल तथा सीमित निर्वाचित तत्व दिया और अंतिम पाठ में उसका योगदान नगण्य है। C ने मूल अधिकार तथा न्यायिक पुनरावलोकन दिए और D ने नीति निदेशक तत्व, पर इनमें से हर एक दस्तावेज का एक अध्याय है, उसका बड़ा भाग नहीं। यह भी ध्यान रखें कि 1935 के अधिनियम ने प्रांतों तथा देशी रियासतों के संघ का प्रावधान किया था, जो वास्तव में कभी अस्तित्व में नहीं आया।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्व किस देश के संविधान से लिए गए हैं?

  1. A.संयुक्त राज्य अमेरिका
  2. B.आयरलैंड
  3. C.कनाडा
  4. D.ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आयरलैंड

व्याख्या

सही उत्तर B, आयरलैंड है। 1937 के आयरिश संविधान में सामाजिक नीति के निदेशक तत्वों का अध्याय था, अर्थात विधानमंडल को संबोधित वाद योग्य न हो सकने वाले लक्ष्य, और संविधान सभा ने उसी युक्ति को हमारे संविधान के भाग चार के रूप में अपनाया, साथ ही राज्यसभा में सदस्यों का नामनिर्देशन तथा राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति भी ली। A ने वाद योग्य मूल अधिकार और न्यायिक पुनरावलोकन दिए, और यहां सबसे आम गलत उत्तर वही होता है क्योंकि विद्यार्थी सभी अधिकारों और तत्वों को एक साथ मान लेते हैं। C ने मजबूत केंद्र वाला संघ और केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियां दीं। D ने समवर्ती सूची, व्यापार तथा वाणिज्य की स्वतंत्रता और दोनों सदनों की संयुक्त बैठक दी। अनुच्छेद 37 कहता है कि ये तत्व किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, पर देश के शासन में मूलभूत हैं।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

संविधान के भाग चार-क में दिए मूल कर्तव्य किस देश के संविधान से प्रेरित हैं?

  1. A.सोवियत संघ
  2. B.जापान
  3. C.फ्रांस
  4. D.दक्षिण अफ्रीका
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सोवियत संघ

व्याख्या

सही उत्तर A, सोवियत संघ है, जिसके संविधान में नागरिकों के अधिकारों के साथ उनके कर्तव्य भी सूचीबद्ध थे। भारत में आरंभ में ऐसा अध्याय नहीं था; 1976 में बयालीसवें संशोधन द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर दस मूल कर्तव्य जोड़े गए, और बाद में ग्यारहवां कर्तव्य जोड़ा गया, अर्थात माता-पिता का अपने बच्चे को शिक्षा दिलाने का कर्तव्य। नीति निदेशक तत्वों की तरह ये कर्तव्य भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं। B ने अनुच्छेद 21 में विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया वाक्यांश दिया। C ने गणतंत्र तथा स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श दिए। D ने संशोधन प्रक्रिया और राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन दिया। इस जोड़ी को याद रखने का सरल तरीका यह है कि अधिकार पश्चिम से आए और कर्तव्य समाजवादी खेमे से।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

संविधान संशोधन की प्रक्रिया तथा राज्यसभा सदस्यों के निर्वाचन की पद्धति कहां से ली गई?

  1. A.ब्रिटेन
  2. B.कनाडा
  3. C.दक्षिण अफ्रीका
  4. D.जर्मनी का वाइमर गणराज्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. दक्षिण अफ्रीका

व्याख्या

सही उत्तर C, दक्षिण अफ्रीका है। दो विशेषताएं दक्षिण अफ्रीका के संविधान से जुड़ती हैं: संविधान संशोधन की प्रक्रिया, जो कुछ उपबंधों के लिए विशेष बहुमत के साथ राज्यों की सहमति मिलाती है, और राज्यसभा सदस्यों का निर्वाचन, जो राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से होता है। A ने संसदीय प्रणाली, विधि का शासन, इकहरी नागरिकता और लेख दिए। B ने मजबूत केंद्र, केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल और उच्चतम न्यायालय का परामर्शी क्षेत्राधिकार दिया। D ने केवल एक विशेषता दी, आपातकाल में मूल अधिकारों का निलंबन, और वाइमर संविधान के बारे में सबसे अधिक यही जोड़ा पूछा जाता है। जब किसी विकल्प में एकल संक्रमणीय मत का उल्लेख हो, तो वह लगभग सदा राज्यसभा के निर्वाचन की ओर संकेत करता है।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

समवर्ती सूची, व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता, तथा संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक कहां से ली गई?

  1. A.ऑस्ट्रेलिया
  2. B.आयरलैंड
  3. C.संयुक्त राज्य अमेरिका
  4. D.जापान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ऑस्ट्रेलिया

व्याख्या

सही उत्तर A, ऑस्ट्रेलिया है। ऑस्ट्रेलिया के संविधान में उन विषयों की सूची है जिन पर संघीय तथा राज्य विधानमंडल दोनों विधि बना सकते हैं, और भारत ने उसी युक्ति को सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची के रूप में अपनाया, जिसमें टकराव की स्थिति में केंद्रीय विधि प्रभावी रहती है। पूरे राज्यक्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता की गारंटी, जो अब अनुच्छेद 301 में है, तथा साधारण विधेयक पर गतिरोध सुलझाने के लिए दोनों सदनों की संयुक्त बैठक, जो अब अनुच्छेद 108 में है, उसी स्रोत से आई हैं। B ने नीति निदेशक तत्व दिए। C ने मूल अधिकार और न्यायिक पुनरावलोकन दिए। D ने अनुच्छेद 21 में प्रयुक्त विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया वाक्यांश दिया। उपयोगी संकेत यह है कि ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों में समवर्ती विषय पर केंद्रीय विधि राज्य विधि पर प्रभावी रहती है।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के निलंबन का उपबंध किस देश के संविधान से जुड़ता है?

  1. A.फ्रांस
  2. B.जर्मनी का वाइमर गणराज्य
  3. C.कनाडा
  4. D.सोवियत संघ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जर्मनी का वाइमर गणराज्य

व्याख्या

सही उत्तर B, जर्मनी का वाइमर गणराज्य है। वाइमर संविधान राष्ट्रपति को आपातकाल में नागरिक स्वतंत्रताएं निलंबित करने देता था, और भारत के वे उपबंध जिनके अंतर्गत आपात उद्घोषणा के दौरान कुछ मूल अधिकारों का प्रवर्तन सीमित किया जा सकता है, उसी प्रतिमान का अनुसरण करते हैं। वाइमर का अनुभव ही इस उपबंध को संदेह से देखने का कारण भी है: उसी खंड के प्रयोग से जर्मन गणराज्य ध्वस्त किया गया। A ने गणतंत्रात्मक रूप तथा स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श दिए। C ने मजबूत केंद्र वाले संघ का आकार दिया। D ने मूल कर्तव्य और प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय का आदर्श दिया। अनुच्छेद 358 और 359 वे उपबंध हैं जिनमें यह उधार आज भारतीय पाठ में दिखाई देता है। इसलिए आपातकाल और अधिकारों के निलंबन वाले प्रश्न में वाइमर गणराज्य ही अपेक्षित उत्तर होता है।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

मजबूत केंद्र वाला संघ, अवशिष्ट शक्तियां केंद्र में निहित करना और केंद्र द्वारा राज्यपालों की नियुक्ति कहां से ली गई?

  1. A.कनाडा
  2. B.ऑस्ट्रेलिया
  3. C.ब्रिटेन
  4. D.आयरलैंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कनाडा

व्याख्या

सही उत्तर A, कनाडा है। कनाडा वह संघ है जो अवशिष्ट शक्तियां इकाइयों के पास छोड़ने के बजाय केंद्र के पास रखता है, प्रत्येक प्रांत का प्रमुख केंद्र से नियुक्त करता है और अपने उच्चतम न्यायालय को परामर्शी क्षेत्राधिकार देता है, और ये तीनों विशेषताएं भारत में अपनाई गईं। अनुच्छेद 1 का राज्यों का संघ वाक्यांश भी उसी कनाडाई विचार को दर्शाता है कि संघ राज्यों के बीच किसी करार का परिणाम नहीं है और कोई राज्य उससे अलग नहीं हो सकता। B ने समवर्ती सूची और संयुक्त बैठक दी। C ने संसदीय प्रणाली और इकहरी नागरिकता दी। D ने नीति निदेशक तत्व तथा राज्यसभा में नामनिर्देशन दिया। इसके विपरीत संयुक्त राज्य अमेरिका में अवशिष्ट शक्तियां राज्यों के पास रहती हैं, और परीक्षक यही तुलना अपेक्षित करता है।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संविधान सभा को भारत का संविधान बनाने में कितना समय लगा?

  1. A.1 वर्ष, 6 माह और 10 दिन
  2. B.2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन
  3. C.3 वर्ष, 2 माह और 5 दिन
  4. D.4 वर्ष और 1 माह
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन

व्याख्या

सही उत्तर B, दो वर्ष, ग्यारह माह और अठारह दिन है, जो 9 दिसंबर 1946 की संविधान सभा की पहली बैठक से 26 नवंबर 1949 के अंगीकरण तक गिना जाता है। इस अवधि में सभा के ग्यारह सत्र हुए और वह एक सौ पैंसठ दिन बैठी, तथा प्रारूप पर खंडवार बहस हुई। इसके बाद संविधान 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया, और यह तिथि इसलिए चुनी गई कि कांग्रेस 1930 से उसे स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाती आई थी। A, C और D इसलिए दिए गए हैं कि विद्यार्थी यह आंकड़ा ढीले ढंग से याद रखते हैं; उपयोगी तरीका इसे लगभग तीन वर्ष मानना और दोनों तिथियों से उसके सिरे बांध लेना है। वही सभा आगे पहले आम चुनाव तक भारत की अस्थायी संसद के रूप में कार्य करती रही।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?

  1. A.चौबीसवां संशोधन, 1971
  2. B.बयालीसवां संशोधन, 1976
  3. C.चवालीसवां संशोधन, 1978
  4. D.बावनवां संशोधन, 1985
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बयालीसवां संशोधन, 1976

व्याख्या

सही उत्तर B, 1976 का बयालीसवां संशोधन है, जो अब तक प्रस्तावना का एकमात्र संशोधन है। उसने देश का वर्णन संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य से बदलकर संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य किया, और राष्ट्र की एकता को राष्ट्र की एकता और अखंडता किया। आपातकाल में पारित यही संशोधन, जिसे अक्सर लघु संविधान कहा जाता है, मूल कर्तव्य भी जोड़ गया। A ने गोलकनाथ मामले के बाद मूल अधिकारों के संशोधन को स्पष्ट किया। C ने आपातकाल के कई परिवर्तन पलटे और संपत्ति के अधिकार को विधिक अधिकार बनाया। D दलबदल विरोधी संशोधन है, जिसने दसवीं अनुसूची जोड़ी। उस संशोधन का बड़ा भाग 1978 में पलट दिया गया, पर प्रस्तावना में जोड़े गए तीनों शब्द यथावत रहे। इसी कारण प्रस्तावना के संशोधन पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर सदैव बयालीसवां संशोधन, 1976 ही रहता है, और वह अब तक का एकमात्र संशोधन है।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

भारतीय संविधान की निम्नलिखित में कौन विशेषता संयुक्त राज्य अमेरिका से नहीं ली गई है?

  1. A.न्यायिक पुनरावलोकन
  2. B.राष्ट्रपति पर महाभियोग
  3. C.उपराष्ट्रपति का पद
  4. D.इकहरी नागरिकता
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. इकहरी नागरिकता

व्याख्या

सही उत्तर D, इकहरी नागरिकता है, जो ब्रिटेन से आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका हर व्यक्ति को दो नागरिकताएं देता है, संघ की और निवास वाले राज्य की, जबकि भारत ने जानबूझकर पूरे देश के लिए एक ही नागरिकता रखी, जिससे कोई राज्य दूसरे राज्य के लोगों को बाहरी न माने। A यानी न्यायिक पुनरावलोकन, जिससे न्यायालय किसी विधि को संविधान के उल्लंघन पर शून्य घोषित कर सकता है, अमेरिका का सबसे अधिक पूछा जाने वाला योगदान है। B यानी संविधान के उल्लंघन पर राष्ट्रपति पर महाभियोग अमेरिकी प्रतिमान का निकट अनुसरण करता है। C यानी उपराष्ट्रपति का पद, जो उच्च सदन की अध्यक्षता करता है, भी अमेरिकी उपराष्ट्रपति से लिया गया है। परीक्षा के विकल्पों में इकहरी नागरिकता और संसदीय प्रणाली वे दो विशेषताएं हैं जो ब्रिटेन की हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय संविधान का सबसे बड़ा स्रोत कौन है?

भारत शासन अधिनियम, 1935। उपबंधों का लगभग दो-तिहाई उसी का अनुसरण करता है, जिसमें शक्तियों के विभाजन वाली संघीय योजना, राज्यपाल का पद, न्यायपालिका का ढांचा और शक्तियां, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन उपबंध तथा बहुत सा प्रशासनिक विवरण शामिल है। चूंकि यह अधिनियम पहले से लागू था, उसकी मशीनरी आगे बढ़ाई जा सकती थी और उस देश का प्रशासन अस्थिर नहीं हुआ जिसका विभाजन अभी हुआ था।

अमेरिका से कौन विशेषताएं ली गईं?

वाद योग्य अध्याय के रूप में मूल अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, राष्ट्रपति पर महाभियोग, उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया, उपराष्ट्रपति का पद, और दस्तावेज को जनता के प्राधिकार से आरंभ करने का विचार। ध्यान रखें कि नीति निदेशक तत्व आयरलैंड से हैं, अमेरिका से नहीं, क्योंकि परीक्षा के विकल्पों में यही सबसे आम भ्रम है।

भारतीय संविधान को अर्धसंघीय क्यों कहा जाता है?

उसमें संघ के लक्षण हैं: दो स्तर की सरकार, लिखित संविधान, सातवीं अनुसूची में विषयों का विभाजन, और विवाद निपटाने वाली स्वतंत्र न्यायपालिका। पर उसमें वे विशेषताएं भी हैं जो सच्चे संघ में नहीं होतीं: एक ही संविधान और इकहरी नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका, केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल, केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियां, अखिल भारतीय सेवाएं, और आपातकालीन उपबंध जिनसे केंद्र किसी राज्य का शासन संभाल सकता है। संविधान स्वयं राज्यों का संघ कहता है।

क्या प्रस्तावना संविधान का भाग है?

हां। 1960 के बेरुबाड़ी संघ मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि वह संविधान का भाग नहीं है, पर 1973 के केशवानंद भारती मामले में न्यायालय ने अपनी स्थिति सुधारी और माना कि प्रस्तावना संविधान का भाग है तथा मूल ढांचे को नष्ट किए बिना संशोधित हो सकती है। बाद के निर्णयों ने यही स्थिति दोहराई। प्रस्तावना निर्माताओं के आशय की कुंजी है, पर वह स्वयं किसी प्राधिकारी को शक्ति नहीं देती।

स्रोत

  • भारत का संविधान, प्रस्तावना तथा भाग एक से चार — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
  • संविधान सभा की बहसें, खंड एक और खंड ग्यारह — लोक सभा सचिवालय
  • भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार, कक्षा ग्यारह — एनसीईआरटी
  • भारत का संविधान, बयालीसवां संशोधन अधिनियम, 1976 — भारत सरकार
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