अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र: पाँचवीं और छठी अनुसूची
अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों के पूरे नोट्स: अनुच्छेद 244 तथा 244क, पाँचवीं अनुसूची में राज्यपाल की शक्तियाँ, पेसा 1996, छठी अनुसूची की परिषदें और पिछले प्रश्न।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत के सभी भागों का शासन एक ही ढंग से नहीं होता। जहाँ जनजातीय समुदाय जनसंख्या का बड़ा हिस्सा हैं, वहाँ संविधान के भाग दस (अनुच्छेद 244 और 244क) में अलग प्रशासनिक व्यवस्था दी गई है, ताकि जनजातीय भूमि, परंपरा और स्वशासन उन कानूनों से सुरक्षित रहें जो शेष देश के लिए बनाए गए हैं। पाँचवीं अनुसूची मुख्य भूमि के राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू होती है और छठी अनुसूची पूर्वोत्तर के चार राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों पर। परीक्षाओं में यह अध्याय हर वर्ष आता है, क्योंकि इसमें अनुच्छेद, राज्यों की सूची और राज्यपाल, राष्ट्रपति तथा संसद के बीच शक्तियों का स्पष्ट बँटवारा पूछा जाता है।
जनजातीय क्षेत्रों का अलग प्रशासन क्यों
जनजातीय समाज का आधार भूमि पर सामुदायिक अधिकार, रूढ़िगत विधि और ग्राम सभा है। औपनिवेशिक काल में बने भू-राजस्व, काश्तकारी और साहूकारी कानून इन समुदायों के विरुद्ध काम करते थे और उनकी भूमि बाहरी लोगों के हाथ चली जाती थी। इसलिए संविधान ने भारत शासन अधिनियम, 1935 के अपवर्जित तथा आंशिक अपवर्जित क्षेत्रों के विचार को विस्तार देकर जनजातीय क्षेत्रों को संरक्षण देने वाली व्यवस्था में रखा। यह व्यवस्था संरक्षणात्मक है, पृथक्कारी नहीं: राज्य विधानमंडल और संसद की शक्तियाँ बनी रहती हैं, पर राज्यपाल तय कर सकता है कि कौन-सा कानून वहाँ वास्तव में लागू होगा।
पाँचवीं अनुसूची: अनुसूचित क्षेत्र
अनुच्छेद 244(1) के अनुसार पाँचवीं अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के अतिरिक्त किसी भी राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण पर लागू होती है। किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है और वह आदेश द्वारा ऐसे क्षेत्र को बढ़ा, घटा, बदल या समाप्त कर सकता है। संविधान में घोषणा का कोई मानदंड नहीं दिया गया है; ढेबर आयोग के बाद से प्रशासनिक व्यवहार में जनजातीय जनसंख्या की प्रधानता, क्षेत्र की सघनता और उचित आकार, व्यवहार्य प्रशासनिक इकाई तथा पड़ोसी क्षेत्रों की तुलना में आर्थिक पिछड़ापन देखा जाता है। अनुसूचित क्षेत्रों पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति चलती है, किंतु राज्यपाल को प्रतिवर्ष राष्ट्रपति को उनके प्रशासन की रिपोर्ट देनी होती है और संघ राज्य को जनजातीय कल्याण के बारे में निर्देश दे सकता है।
राज्यपाल और जनजाति सलाहकार परिषद
पाँचवीं अनुसूची को प्रभावी बनाने वाली दो शक्तियाँ हैं। पहली, राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा निर्देश दे सकता है कि संसद या राज्य विधानमंडल का कोई अधिनियम अनुसूचित क्षेत्र पर लागू नहीं होगा, अथवा अपवादों और उपांतरणों के साथ लागू होगा। दूसरी, राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्र की शांति और सुशासन के लिए विनियम बना सकता है; ऐसे विनियम अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा या उनके बीच भूमि हस्तांतरण को रोक या सीमित कर सकते हैं, भूमि आवंटन को नियंत्रित कर सकते हैं और जनजातियों को दिए जाने वाले ऋण पर नियंत्रण रख सकते हैं। विनियम किसी प्रचलित कानून को निरसित या संशोधित कर सकता है, पर उसके लिए राष्ट्रपति की अनुमति आवश्यक है। जिन राज्यों में अनुसूचित क्षेत्र हैं, वहाँ अधिकतम बीस सदस्यों की जनजाति सलाहकार परिषद होती है, जिसके लगभग तीन-चौथाई सदस्य राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होते हैं; राज्यपाल जो विषय भेजे, उन पर यह परिषद सलाह देती है।
पेसा अधिनियम, 1996
73वें संशोधन से जोड़ा गया संविधान का भाग नौ अनुसूचित क्षेत्रों पर स्वयं लागू नहीं होता। इसलिए भूरिया समिति की सिफारिशों पर संसद ने पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 पारित किया। पेसा ग्राम सभा को गाँव के शासन का केंद्र बनाता है: वह योजनाओं और लाभार्थी सूचियों का अनुमोदन करती है, लघु जल स्रोतों और लघु वन उपज का प्रबंधन करती है, स्थानीय हाट-बाज़ार तथा साहूकारी पर नियंत्रण रखती है, और भूमि अधिग्रहण तथा पुनर्वास से पहले उससे परामर्श अनिवार्य है। गौण खनिजों के पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति और खनन पट्टे के लिए उसकी संस्तुति चाहिए। राज्यों के पंचायती राज कानून रूढ़िगत विधि और इन शक्तियों के अनुरूप होने चाहिए।
छठी अनुसूची: पूर्वोत्तर के जनजातीय क्षेत्र
अनुच्छेद 244(2) छठी अनुसूची को असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू करता है, जहाँ जनजातीय जनसंख्या बड़ी है और जो सामान्य प्रशासन में पूरी तरह नहीं मिली। ये क्षेत्र स्वायत्त जिलों और स्वायत्त प्रदेशों में बाँटे जाते हैं और प्रत्येक में निर्वाचित परिषद होती है। जिला परिषद में अधिकतम तीस सदस्य होते हैं, जिनमें चार राज्यपाल द्वारा नामित होते हैं और शेष वयस्क मताधिकार से पाँच वर्ष के लिए चुने जाते हैं। परिषदें आरक्षित वन से भिन्न भूमि, वन प्रबंधन, झूम खेती, ग्राम प्रशासन, उत्तराधिकार, विवाह-विच्छेद तथा सामाजिक रीति पर कानून बनाती हैं और इन कानूनों के लिए राज्यपाल की अनुमति आवश्यक है। वे जनजातियों के बीच के वादों के लिए ग्राम और जिला न्यायालय गठित करती हैं, भू-राजस्व तथा वृत्ति, व्यापार और पशुओं पर कर लगाती हैं और अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत अनुदान पाती हैं। राज्यपाल नए स्वायत्त जिले बना सकता है, उनकी सीमाएँ बदल सकता है या नाम बदल सकता है।
पाँचवीं और छठी अनुसूची की तुलना
| बिंदु | पाँचवीं अनुसूची | छठी अनुसूची |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 244(1) | 244(2) और 275(1) |
| लागू कहाँ | असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम से भिन्न राज्यों के अनुसूचित क्षेत्र | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्र |
| मुख्य संस्था | जनजाति सलाहकार परिषद, केवल सलाहकारी | स्वायत्त जिला और प्रादेशिक परिषदें, कानून बनाने की शक्ति सहित |
| स्थानीय स्वशासन | पेसा, 1996 के माध्यम से पंचायतें | अनुसूची के अंतर्गत परिषदें स्वयं |
| क्षेत्र की घोषणा | राष्ट्रपति द्वारा | जिलों और प्रदेशों के लिए राज्यपाल द्वारा |
छठी अनुसूची की स्वायत्त परिषदें
| राज्य | छठी अनुसूची की परिषदें |
|---|---|
| असम | बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद, कार्बी आंगलोंग तथा दिमा हसाओ (उत्तरी कछार पहाड़ी) |
| मेघालय | खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और गारो हिल्स |
| मिजोरम | चकमा, लाई और मारा |
| त्रिपुरा | त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद |
एक प्रावधान अक्सर पूछा जाता है। 22वें संशोधन अधिनियम, 1969 से जोड़ा गया अनुच्छेद 244क संसद को यह शक्ति देता है कि वह असम के कुछ जनजातीय क्षेत्रों को मिलाकर अपने विधानमंडल और मंत्रिपरिषद वाला एक स्वायत्त राज्य बना सके। इन सभी उपबंधों को साथ पढ़ने से संवैधानिक तर्क स्पष्ट होता है: मुख्य भूमि के अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि और परंपरा की रक्षा, और पूर्वोत्तर के पहाड़ी जिलों में वास्तविक विधायी हस्तांतरण।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्नों का ढाँचा तय है। पहला, अनुच्छेद का मिलान: पाँचवीं अनुसूची के साथ 244(1) और छठी के साथ 244(2), तथा अनुच्छेद 243 का भ्रम। दूसरा, छठी अनुसूची वाले राज्यों की सूची, जिसमें अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर विकल्पों में डाले जाते हैं। तीसरा, कौन क्या करता है: राष्ट्रपति अनुसूचित क्षेत्र घोषित करता है, राज्यपाल वार्षिक रिपोर्ट देता है, विनियम बनाता है और परिषदों के कानूनों को अनुमति देता है। चौथा, संख्याएँ: जनजाति सलाहकार परिषद में 20 सदस्य और तीन-चौथाई अनुसूचित जनजाति विधायक, जिला परिषद में 30 सदस्य जिनमें 4 नामित, पाँच वर्ष का कार्यकाल और पेसा के दस राज्य। पाँचवाँ, पेसा 1996 और ग्राम सभा की शक्तियाँ, जिन्हें 1992 के 73वें संशोधन तथा 2006 के वन अधिकार अधिनियम के साथ पूछा जाता है। यूपीएससी परिणाम आधारित प्रश्न पूछता है, जबकि एसएससी, रेलवे और राज्य परीक्षाएँ अनुच्छेद, वर्ष और राज्यों की सूची सीधे पूछती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पाँचवीं अनुसूची | अनुच्छेद 244(1), भाग दस; असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम से भिन्न राज्यों के अनुसूचित क्षेत्र और अनुसूचित जनजातियाँ |
|---|---|
| छठी अनुसूची | अनुच्छेद 244(2); असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्र |
| अनुसूचित क्षेत्र की घोषणा | राष्ट्रपति, राज्यपाल से परामर्श के बाद आदेश द्वारा |
| वार्षिक रिपोर्ट | राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को, अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर |
| जनजाति सलाहकार परिषद | अधिकतम 20 सदस्य; लगभग तीन-चौथाई राज्य विधानसभा के अनुसूचित जनजाति सदस्य |
| स्वायत्त जिला परिषद | अधिकतम 30 सदस्य, 4 राज्यपाल द्वारा नामित, निर्वाचित सदस्य पाँच वर्ष के लिए |
| पेसा | पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996; भूरिया समिति की सिफारिश पर |
| पेसा राज्य | दस: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान |
| जनजातीय कल्याण अनुदान | अनुच्छेद 275(1), भारत की संचित निधि पर भारित |
| असम में स्वायत्त राज्य | अनुच्छेद 244क, 22वें संशोधन अधिनियम 1969 से जोड़ा गया |
| अनुसूचित क्षेत्र के मानदंड | संविधान में नहीं; ढेबर आयोग के बाद जनजातीय प्रधानता, सघनता, व्यवहार्यता और पिछड़ापन देखा जाता है |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
यदि किसी क्षेत्र को भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत लाया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उसके परिणाम को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?
- A.इससे जनजातीय लोगों की भूमि का गैर-जनजातीय लोगों को हस्तांतरण रुक जाएगा।
- B.इससे उस क्षेत्र में स्थानीय स्वशासन की संस्था बन जाएगी।
- C.इससे वह क्षेत्र संघ राज्यक्षेत्र में बदल जाएगा।
- D.ऐसे क्षेत्र वाले राज्य को विशेष श्रेणी राज्य घोषित कर दिया जाएगा।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, जनजातीय भूमि का गैर-जनजातियों को हस्तांतरण रुकना है। पाँचवीं अनुसूची के पैरा 5(2) के अनुसार राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्र की शांति और सुशासन के लिए विनियम बना सकता है और इसमें स्पष्ट रूप से ऐसे विनियम शामिल हैं जो अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा या उनके बीच भूमि हस्तांतरण को रोकते या सीमित करते हैं। इसलिए भूमि की सुरक्षा पाँचवीं अनुसूची की घोषणा का सीधा विधिक परिणाम है। B गलत है, क्योंकि अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 से आता है, घोषणा से नहीं; अनुसूची केवल सलाहकारी जनजाति सलाहकार परिषद बनाती है। C गलत है, क्योंकि अनुसूचित क्षेत्र संबंधित राज्य का ही भाग रहता है और उस पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति चलती रहती है, जबकि संघ राज्यक्षेत्र अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद बनाती है। D गलत है, क्योंकि विशेष श्रेणी का दर्जा केंद्रीय सहायता के बँटवारे से जुड़ी पुरानी व्यवस्था थी और उसका पाँचवीं अनुसूची से कोई संबंध नहीं है।
भारत के संविधान की किस अनुसूची के अंतर्गत खनन के लिए निजी पक्षों को जनजातीय भूमि का हस्तांतरण अकृत और शून्य घोषित किया जा सकता है?
- A.तीसरी अनुसूची
- B.पाँचवीं अनुसूची
- C.नौवीं अनुसूची
- D.बारहवीं अनुसूची
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पाँचवीं अनुसूची है। पाँचवीं अनुसूची के पैरा 5(2) के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा बनाए गए विनियम अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा या उनके बीच भूमि हस्तांतरण को रोक या सीमित कर सकते हैं और ऐसे विनियम के विरुद्ध किया गया हस्तांतरण शून्य होता है। इसी शक्ति से बने राज्यों के भूमि हस्तांतरण विनियमों के आधार पर न्यायालय अनुसूचित क्षेत्रों में निजी खनन कंपनियों को दिए गए जनजातीय भूमि के पट्टे रद्द करते हैं। A गलत है, क्योंकि तीसरी अनुसूची में केवल मंत्रियों, विधायकों, न्यायाधीशों तथा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की शपथ और प्रतिज्ञान के प्रारूप हैं। C गलत है, क्योंकि 1951 के पहले संशोधन से जोड़ी गई नौवीं अनुसूची में वे कानून, मुख्यतः भूमि सुधार कानून, रखे गए हैं जिन्हें मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती से बचाया गया। D गलत है, क्योंकि 74वें संशोधन से जोड़ी गई बारहवीं अनुसूची में शहरी स्थानीय निकायों के अठारह कार्य दिए गए हैं।
पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 के अंतर्गत पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र वाले कितने राज्य आते हैं?
- A.7
- B.9
- C.10
- D.13
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, दस राज्य है। पेसा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू होता है और इन दस राज्यों को अपने पंचायती राज कानून इसके अनुरूप बनाने होते हैं। यह संख्या पाँचवीं अनुसूची से ही निकलती है, क्योंकि पेसा संविधान के भाग नौ को केवल उन क्षेत्रों पर विस्तारित करता है जिन्हें राष्ट्रपति के आदेश से अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया है। A और B गलत हैं, क्योंकि इनमें हिमाचल प्रदेश और राजस्थान जैसे स्पष्ट अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्य छूट जाते हैं; झारखंड तथा छत्तीसगढ़ (2000) और तेलंगाना (2014) पुराने राज्यों से बने और उन्हें अनुसूचित क्षेत्र विरासत में मिले। D गलत है, क्योंकि असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम छठी अनुसूची में आते हैं और पेसा के दायरे से बाहर हैं।
भारतीय संविधान की छठी अनुसूची कुछ राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन की व्यवस्था करती है। निम्नलिखित में से किस राज्य का उल्लेख उस अनुसूची में नहीं है?
- A.मेघालय
- B.मिजोरम
- C.अरुणाचल प्रदेश
- D.असम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अरुणाचल प्रदेश है। अनुच्छेद 244(2) के साथ पढ़ी जाने वाली छठी अनुसूची केवल चार राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू होती है, अर्थात असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम। अरुणाचल प्रदेश में इस अनुसूची के अंतर्गत कोई स्वायत्त जिला परिषद नहीं है; वहाँ जनजातीय जनसंख्या की रक्षा बंगाल पूर्वी सीमांत विनियम, 1873 से होती है, जिसके अनुसार बाहरी व्यक्तियों को इनर लाइन परमिट लेना पड़ता है, तथा राज्य की अपनी पंचायत व्यवस्था से। A गलत है, क्योंकि मेघालय में खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और गारो हिल्स की तीन परिषदें हैं। B गलत है, क्योंकि मिजोरम में चकमा, लाई और मारा क्षेत्रों की परिषदें हैं। D गलत है, क्योंकि असम में बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद के साथ कार्बी आंगलोंग और दिमा हसाओ परिषदें हैं और अनुच्छेद 244क संसद को असम के भीतर स्वायत्त राज्य बनाने की शक्ति भी देता है।
असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से भिन्न राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन और नियंत्रण संविधान के किस अनुच्छेद से होता है?
- A.अनुच्छेद 243
- B.अनुच्छेद 244(1)
- C.अनुच्छेद 245
- D.अनुच्छेद 246
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, अनुच्छेद 244(1) है। इसमें कहा गया है कि पाँचवीं अनुसूची के उपबंध असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से भिन्न किसी भी राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण पर लागू होंगे, जबकि अनुच्छेद 244(2) इन चार राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों पर छठी अनुसूची लागू करता है। दोनों खंड संविधान के भाग दस में हैं, जिसका शीर्षक अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र है। A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 243 पंचायतों से संबंधित भाग नौ का परिभाषा खंड है। C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 245 संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों के क्षेत्रीय विस्तार से संबंधित है। D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 246 सातवीं अनुसूची की तीन सूचियों के माध्यम से संघ और राज्यों के बीच विधायी विषयों का बँटवारा करता है। याद रखें, पाँचवीं अनुसूची के लिए 244(1) और छठी के लिए 244(2)।
पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने की शक्ति किसे है?
- A.राज्य के राज्यपाल को
- B.भारत के राष्ट्रपति को
- C.साधारण बहुमत से संसद को
- D.राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, भारत के राष्ट्रपति है। पाँचवीं अनुसूची के पैरा 6 के अनुसार राष्ट्रपति आदेश द्वारा किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित कर सकता है तथा संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श के बाद उसका क्षेत्र बढ़ा या घटा सकता है, सीमाएँ बदल सकता है, घोषणा रद्द कर सकता है या नया आदेश कर सकता है। A गलत है, यद्यपि यही सबसे आम भ्रम है: राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्र का प्रशासन करता है, प्रतिवर्ष राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजता है, विनियम बनाता है और कानूनों के लागू होने को रोक या उपांतरित कर सकता है, पर उसे बना या समाप्त नहीं कर सकता। C गलत है, क्योंकि यह घोषणा कार्यपालिका का आदेश है, संसद का अधिनियम नहीं; हाँ, संसद ऐसे क्षेत्रों के लिए पेसा जैसे कानून बनाती है। D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 338क के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग केवल संरक्षणों की जाँच करता है और जनजातीय विकास पर सलाह देता है।
पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत किसी राज्य की जनजाति सलाहकार परिषद में अधिकतम कितने सदस्य होते हैं?
- A.15
- B.20
- C.25
- D.30
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बीस सदस्य है। पाँचवीं अनुसूची के पैरा 4 के अनुसार जिन राज्यों में अनुसूचित क्षेत्र हैं, और यदि राष्ट्रपति निर्देश दे तो जिन राज्यों में अनुसूचित जनजातियाँ हैं पर अनुसूचित क्षेत्र नहीं, वहाँ अधिकतम बीस सदस्यों की जनजाति सलाहकार परिषद गठित करनी होती है, जिसके लगभग तीन-चौथाई सदस्य राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होते हैं। इसका कार्य राज्यपाल द्वारा भेजे गए जनजातीय कल्याण और उन्नति से जुड़े विषयों पर सलाह देना है, इसलिए यह सलाहकारी निकाय है, कानून बनाने वाला नहीं। A, C और D गलत हैं, क्योंकि इनमें इसी विषय की दूसरी संख्याओं से भ्रम होता है: तीस छठी अनुसूची की स्वायत्त जिला परिषद की अधिकतम सदस्य संख्या है, जिसमें चार सदस्य राज्यपाल नामित करता है, जबकि पंद्रह और पच्चीस किसी भी अनुसूची के उपबंध में नहीं आते।
छठी अनुसूची के अंतर्गत स्वायत्त जिला परिषद में अधिकतम तीस सदस्य होते हैं। इनमें से कितने सदस्य राज्यपाल नामित करता है?
- A.दो
- B.चार
- C.छह
- D.आठ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, चार है। छठी अनुसूची के पैरा 2 के अनुसार जिला परिषद में अधिकतम तीस सदस्य होते हैं, जिनमें से अधिकतम चार राज्यपाल द्वारा नामित होते हैं और शेष वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचित होते हैं। निर्वाचित सदस्य परिषद की पहली बैठक के लिए नियत तिथि से पाँच वर्ष तक पद पर रहते हैं, जबकि नामित सदस्य राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं। A, C और D गलत हैं, क्योंकि इनमें नामित सदस्यों की संख्या बदल दी गई है, और परीक्षक इसी अंश को पूछते हैं क्योंकि निर्वाचित निकाय में यही एक मनोनीत तत्व है। साथ के तथ्य भी याद रखें: परिषद स्वायत्त प्रदेश के लिए प्रादेशिक परिषद बना सकती है, भूमि, वन और सामाजिक रीति पर उसके कानूनों को राज्यपाल की अनुमति चाहिए, और अनुदान अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत संघ से मिलते हैं।
पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, जिसे पेसा कहते हैं, किस वर्ष बना?
- A.1992
- B.1993
- C.1996
- D.2006
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 1996 है। चूँकि संविधान का भाग नौ स्वयं अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू नहीं होता, इसलिए संसद ने भूरिया समिति की सिफारिशों पर दिसंबर 1996 में पेसा बनाया और इन क्षेत्रों में ग्राम सभा को गाँव के शासन का केंद्र बनाया, जिसे लघु वन उपज, लघु जल स्रोत, गौण खनिज, स्थानीय बाज़ार, साहूकारी तथा भूमि अधिग्रहण से पहले परामर्श की शक्तियाँ मिलीं। A गलत है, क्योंकि 1992 में 73वाँ और 74वाँ संशोधन अधिनियम पारित हुए थे। B गलत है, क्योंकि 73वाँ संशोधन 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ, जो अब राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है। D गलत है, क्योंकि 2006 में अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम बना, जो व्यक्तिगत तथा सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता देता है और एक अलग कानून है।
अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन का स्तर ऊँचा उठाने के लिए संघ से राज्य को सहायता अनुदान किस अनुच्छेद के अंतर्गत मिलता है?
- A.अनुच्छेद 270
- B.अनुच्छेद 275(1)
- C.अनुच्छेद 280
- D.अनुच्छेद 282
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, अनुच्छेद 275(1) है। इसके परंतुक में कहा गया है कि अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन का स्तर ऊँचा उठाने के लिए संघ द्वारा अनुमोदित विकास योजनाओं के लिए राज्यों को सहायता अनुदान के रूप में धनराशि भारत की संचित निधि पर भारित होगी, और इसमें असम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन का विशेष उल्लेख है। A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 270 उन करों से संबंधित है जो संघ लगाता और वसूल करता है तथा संघ और राज्यों के बीच बाँटे जाते हैं। C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 280 वित्त आयोग की व्यवस्था करता है, जो करों के बँटवारे और अनुदान के सिद्धांतों की सिफारिश करता है, अनुदान स्वयं नहीं देता। D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 282 संघ या राज्य को किसी लोक प्रयोजन के लिए विवेकाधीन अनुदान की अनुमति देता है, जो केंद्र प्रायोजित योजनाओं का आधार है।
22वें संशोधन अधिनियम, 1969 से जोड़ा गया अनुच्छेद 244क संसद को किस राज्य के भीतर स्वायत्त राज्य बनाने की शक्ति देता है?
- A.नगालैंड
- B.असम
- C.मणिपुर
- D.त्रिपुरा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, असम है। 22वें संशोधन अधिनियम, 1969 से जोड़ा गया अनुच्छेद 244क संसद को यह शक्ति देता है कि वह कानून बनाकर छठी अनुसूची में उल्लिखित सभी या किसी जनजातीय क्षेत्र को मिलाकर असम के भीतर स्वायत्त राज्य बनाए और उसे विधानमंडल या मंत्रिपरिषद, अथवा दोनों, तथा निर्धारित शक्तियाँ दे। यह उपबंध केवल असम के लिए है और पहाड़ी जिलों में इसके उपयोग की माँग आज भी उठती है। A गलत है, क्योंकि नगालैंड के लिए अनुच्छेद 371क में विशेष उपबंध है, जो नगा रूढ़िगत विधि की रक्षा करता है। C गलत है, क्योंकि मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विधानसभा की समिति से संबंधित अनुच्छेद 371ग लागू होता है। D गलत है, क्योंकि त्रिपुरा में छठी अनुसूची के अंतर्गत स्वायत्त जिला परिषद है, पर स्वायत्त राज्य का उपबंध नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पाँचवीं और छठी अनुसूची में क्या अंतर है?
पाँचवीं अनुसूची मुख्य भूमि के राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों की रक्षा राज्यपाल और सलाहकारी जनजाति सलाहकार परिषद के माध्यम से करती है, और वहाँ पंचायतें पेसा से आती हैं। छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा तथा मिजोरम में निर्वाचित स्वायत्त जिला और प्रादेशिक परिषदें बनाती है, जो भूमि, वन और सामाजिक रीति पर स्वयं कानून बना सकती हैं।
छठी अनुसूची किन राज्यों पर लागू है?
केवल असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम पर। अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर के लिए दूसरी विशेष व्यवस्थाएँ हैं, जैसे इनर लाइन परमिट तथा अनुच्छेद 371क और 371ग।
73वें संशोधन के बाद भी पेसा की आवश्यकता क्यों पड़ी?
संविधान का भाग नौ अनुसूचित क्षेत्रों पर स्वयं लागू नहीं होता। इसलिए संसद को 1996 में अलग कानून पेसा बनाना पड़ा, जो पंचायतों को वहाँ ऐसे रूप में लागू करता है जो रूढ़िगत विधि का आदर करे और ग्राम सभा को स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण दे।
क्या राज्यपाल संसद के कानून को अनुसूचित क्षेत्र में लागू होने से रोक सकता है?
हाँ। पाँचवीं अनुसूची के पैरा 5(1) के अनुसार राज्यपाल अधिसूचना द्वारा कह सकता है कि संसद या राज्य विधानमंडल का कोई अधिनियम अनुसूचित क्षेत्र पर लागू नहीं होगा या अपवादों और उपांतरणों के साथ लागू होगा।
स्वायत्त जिला परिषद में कितने सदस्य होते हैं?
अधिकतम तीस, जिनमें अधिकतम चार राज्यपाल द्वारा नामित और शेष वयस्क मताधिकार से निर्वाचित; निर्वाचित सदस्य पाँच वर्ष तक और नामित सदस्य राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग दस तथा पाँचवीं और छठी अनुसूची — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 — इंडिया कोड, भारत सरकार
- भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (कक्षा 11), अध्याय 7: संघवाद — एनसीईआरटी





