भारतीय रिज़र्व बैंक और मौद्रिक नीति: कार्य, एमपीसी और साख नियंत्रण
परीक्षा के लिए रिज़र्व बैंक और मौद्रिक नीति के नोट्स: स्थापना, नोट निर्गमन, कार्य, मौद्रिक नीति समिति तथा साख नियंत्रण के मात्रात्मक और गुणात्मक उपकरण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारतीय रिज़र्व बैंक देश का केंद्रीय बैंक है: यह मुद्रा जारी करता है, सरकार और बैंकों का बैंकर है, विदेशी मुद्रा भंडार रखता है और सबसे बढ़कर मौद्रिक नीति चलाता है, अर्थात अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मात्रा और उसकी कीमत का प्रबंध करता है। बैंकिंग की हर परीक्षा में और एसएससी, रेलवे तथा राज्य परीक्षाओं के अर्थव्यवस्था खंड में इससे प्रश्न आते हैं, और वे मुख्यतः तीन बातों पर टिके रहते हैं: बैंक का इतिहास, उसके उपकरण और मौद्रिक नीति समिति।
स्थापना और स्वामित्व
रिज़र्व बैंक की स्थापना हिल्टन यंग आयोग की सिफारिश पर हुई, जिसका औपचारिक नाम भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग था और जिसने 1926 में अपनी रिपोर्ट दी। इसका गठन भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 के अंतर्गत हुआ और इसने 1 अप्रैल 1935 से एक शेयरधारक बैंक के रूप में काम शुरू किया, जिसका केंद्रीय कार्यालय कलकत्ता में था और 1937 में बंबई ले जाया गया। सर ओसबोर्न स्मिथ इसके पहले गवर्नर थे और सी. डी. देशमुख इस पद पर पहुँचने वाले पहले भारतीय। रिज़र्व बैंक सार्वजनिक स्वामित्व में अंतरण अधिनियम 1948 के अंतर्गत 1 जनवरी 1949 से इसका राष्ट्रीयकरण हुआ और अब यह पूरी तरह भारत सरकार के स्वामित्व में है। विभाजन के बाद कुछ समय तक यह बर्मा और पाकिस्तान का भी केंद्रीय बैंक रहा। इसका संचालन केंद्रीय निदेशक मंडल करता है, जिसके प्रमुख गवर्नर होते हैं और जिनकी सहायता डिप्टी गवर्नर करते हैं; गवर्नर की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है।
रिज़र्व बैंक के कार्य
केंद्रीय बैंक के सभी परंपरागत कार्य रिज़र्व बैंक करता है। अपने अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत भारत में नोट निर्गमन का एकाधिकार इसी के पास है और यह दो रुपये तथा उससे बड़े मूल्यवर्ग के नोट जारी करता है; एक रुपये का नोट और सभी सिक्के भारत सरकार जारी करती है तथा एक रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं, गवर्नर के नहीं। 1957 से बैंक न्यूनतम कोष प्रणाली अपनाता है, जिसके अंतर्गत जारी नोटों के विरुद्ध कम से कम दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखनी होती हैं, जिनमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये मूल्य का हो। यह केंद्र और राज्य सरकारों का बैंकर, अभिकर्ता तथा सलाहकार है और उनके सार्वजनिक ऋण का प्रबंध करता है। यह बैंकों का बैंक है, वाणिज्यिक बैंकों का आरक्षित कोष रखता है और अंतिम ऋणदाता का काम करता है। बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 के अंतर्गत यह बैंकों का विनियमन और पर्यवेक्षण करता है, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 के अंतर्गत विदेशी मुद्रा का प्रबंध करता है और साख का नियंत्रक है।
मौद्रिक नीति समिति
2016 तक नीतिगत दर गवर्नर तय करते थे। वित्त अधिनियम 2016 ने भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम में संशोधन कर वैधानिक मौद्रिक नीति समिति बनाई और लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का ढाँचा दिया, जिसकी सिफारिश ऊर्जित पटेल समिति ने की थी। समिति में छह सदस्य होते हैं: अध्यक्ष के रूप में गवर्नर, मौद्रिक नीति देखने वाले डिप्टी गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी, तथा केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन सदस्य, जो चार वर्ष के लिए पद पर रहते हैं और पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते। निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से होते हैं और मत बराबर होने पर गवर्नर को निर्णायक मत प्राप्त है। समिति को वर्ष में कम से कम चार बार बैठक करनी होती है और प्रत्येक सदस्य का मत प्रकाशित किया जाता है। मुद्रास्फीति का लक्ष्य केंद्र सरकार बैंक से परामर्श कर हर पाँच वर्ष में अधिसूचित करती है; अगस्त 2016 में पहली बार अधिसूचित लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति का चार प्रतिशत था, जिसमें दोनों ओर दो प्रतिशत अंक की सहन सीमा थी, और अप्रैल 2021 से पाँच वर्ष के लिए वही लक्ष्य बनाए रखा गया।
मौद्रिक नीति के उपकरण
मात्रात्मक उपकरण साख की कुल मात्रा पर काम करते हैं और गुणात्मक उपकरण उसकी दिशा पर। तरलता समायोजन सुविधा के अंतर्गत रेपो दर, अर्थात वह दर जिस पर बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के बदले बैंकों को एक दिन के लिए ऋण देता है, नीतिगत दर है; सीमांत स्थायी सुविधा दर इससे ऊपर गलियारे की ऊपरी सीमा बनाती है और स्थायी जमा सुविधा दर नीचे निचली सीमा, जिससे मुद्रा बाजार की प्रचालन दर इसी गलियारे में रहे।
| उपकरण | कार्य |
|---|---|
| रेपो दर | प्रतिभूतियों के बदले बैंकों को ऋण देने की दर, नीतिगत दर |
| नकद आरक्षित अनुपात | जमाओं का वह अंश जो बैंक नकद रूप में रिज़र्व बैंक के पास रखते हैं, आरबीआई अधिनियम की धारा 42 |
| वैधानिक तरलता अनुपात | नकदी, स्वर्ण और अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखा अंश, बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा 24 |
| खुले बाजार की क्रियाएँ | तरलता डालने या खींचने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री |
| मार्जिन आवश्यकता | गुणात्मक उपकरण: प्रतिभूति के मूल्य का वह भाग जो उधार लेने वाले को स्वयं देना होता है |
| नैतिक प्रत्यायन | गुणात्मक उपकरण: बैंकों को समझाना और परामर्श देना |
रेपो दर या आरक्षित अनुपातों में वृद्धि से साख महँगी और दुर्लभ हो जाती है, इसे महँगी मुद्रा या संकुचनकारी नीति कहते हैं और मुद्रास्फीति अधिक होने पर अपनाया जाता है। कटौती इसका उल्टा करती है और सस्ती मुद्रा या विस्तारकारी नीति कहलाती है, जो वृद्धि को सहारा देने के लिए अपनाई जाती है। चयनात्मक साख नियंत्रण, उपभोक्ता साख का विनियमन, साख की राशनिंग और किसी बैंक के विरुद्ध सीधी कार्रवाई अन्य गुणात्मक उपकरण हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से चार प्रकार के प्रश्न आते हैं: स्थापना से जुड़े तथ्य अर्थात आयोग, अधिनियम, तिथि और राष्ट्रीयकरण; नोट निर्गमन में बैंक और सरकार का विभाजन; मौद्रिक नीति समिति की संरचना और वैधानिक आधार; तथा उपकरणों का मात्रात्मक और गुणात्मक वर्गीकरण। सबसे आम भ्रम हिल्टन यंग आयोग और चैंबरलेन आयोग में, आरबीआई अधिनियम की धारा 42 और बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा 24 में, तथा खुले बाजार की क्रियाओं को गुणात्मक उपकरण कह देने में होता है। यह भी पूछा जाता है कि मुद्रास्फीति रोकने के लिए रेपो दर किस दिशा में बदली जाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सिफारिश | हिल्टन यंग आयोग, भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग, 1926 |
|---|---|
| मूल अधिनियम | भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 |
| कार्य आरंभ | 1 अप्रैल 1935, केंद्रीय कार्यालय कलकत्ता, 1937 में बंबई |
| राष्ट्रीयकरण | 1 जनवरी 1949, सार्वजनिक स्वामित्व में अंतरण अधिनियम 1948 के अंतर्गत |
| पहले गवर्नर | सर ओसबोर्न स्मिथ; पहले भारतीय गवर्नर सी. डी. देशमुख |
| नोट निर्गमन | आरबीआई अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत दो रुपये और उससे बड़े नोट |
| एक रुपये का नोट | भारत सरकार द्वारा जारी, वित्त सचिव के हस्ताक्षर सहित |
| न्यूनतम कोष प्रणाली | 1957 से: कम से कम 200 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति, स्वर्ण कम से कम 115 करोड़ रुपये |
| मौद्रिक नीति समिति | वित्त अधिनियम 2016 से; छह सदस्य; वर्ष में कम से कम चार बैठकें |
| नकद आरक्षित अनुपात | भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 42 |
| वैधानिक तरलता अनुपात | बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24 |
| नीतिगत दर | तरलता समायोजन सुविधा के अंतर्गत रेपो दर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना किस आयोग की सिफारिश पर की गई थी?
- A.हिल्टन यंग आयोग
- B.चैंबरलेन आयोग
- C.फाउलर समिति
- D.नरसिम्हम समिति
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. हिल्टन यंग आयोग
व्याख्या
सही उत्तर A, हिल्टन यंग आयोग है। इस निकाय का औपचारिक नाम भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग था, जिसने 1926 में रिपोर्ट देकर सरकार से अलग एक केंद्रीय बैंक बनाने की सिफारिश की। इसी सिफारिश से भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 बना, जिसके अंतर्गत बैंक ने 1 अप्रैल 1935 से काम शुरू किया।
विकल्प B चैंबरलेन आयोग ने 1913 और 1914 में भारतीय मुद्रा और वित्त की जाँच की थी और जॉन मेनार्ड कीन्स उसके सदस्य थे, पर उसमें चर्चित केंद्रीय बैंक तब स्थापित नहीं हुआ, इसीलिए यह सबसे आम भ्रम है। विकल्प C फाउलर समिति 1898 में भारत में स्वर्णमान के प्रश्न पर बनी थी। विकल्प D नरसिम्हम समिति 1991 के बाद के सुधार काल की है और उसने बैंकिंग क्षेत्र पर सिफारिशें दीं, जब रिज़र्व बैंक बहुत पहले से काम कर रहा था।
भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण किस तिथि से प्रभावी हुआ?
- A.1 अप्रैल 1935
- B.1 जनवरी 1949
- C.15 अगस्त 1947
- D.19 जुलाई 1969
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1 जनवरी 1949
व्याख्या
सही उत्तर B, 1 जनवरी 1949 है। बैंक आरंभ में शेयरधारकों का संस्थान था और रिज़र्व बैंक सार्वजनिक स्वामित्व में अंतरण अधिनियम 1948 ने उसके शेयर केंद्र सरकार को अंतरित कर दिए, जो 1949 के पहले दिन से प्रभावी हुआ; तभी से यह पूरी तरह भारत सरकार के स्वामित्व में है।
विकल्प A 1 अप्रैल 1935 वह तिथि है जब बैंक ने 1934 के अधिनियम के अंतर्गत काम शुरू किया, राष्ट्रीयकरण की तिथि नहीं, और इन दोनों को मिला देना इस प्रश्न की सबसे आम गलती है। विकल्प C स्वतंत्रता की तिथि है, जिसका बैंक के स्वामित्व से कोई संबंध नहीं। विकल्प D 19 जुलाई 1969 वह तिथि है जब चौदह बड़े वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ; 1980 में छह और बैंक राष्ट्रीयकृत किए गए।
रेपो दर वह दर है जिस पर
- A.वाणिज्यिक बैंक अपनी अतिरिक्त राशि रिज़र्व बैंक के पास रखते हैं
- B.रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के बदले बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है
- C.बैंक अपने सर्वोत्तम ग्राहकों को ऋण देते हैं
- D.सरकार खुले बाजार से उधार लेती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के बदले बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है
व्याख्या
सही उत्तर B है। पुनर्खरीद समझौते में बैंक सरकारी प्रतिभूतियाँ रिज़र्व बैंक को बेचता है और अगले दिन निश्चित कीमत पर वापस खरीदने का वचन देता है; इस अंतर को ही ब्याज माना जाता है और यही दर रेपो दर कहलाती है। यह मौद्रिक नीति समिति द्वारा घोषित नीतिगत दर है, इसलिए इसमें परिवर्तन से अल्पकालिक ब्याज दरों का पूरा ढाँचा हिल जाता है।
विकल्प A रिवर्स रेपो दर का वर्णन है, जिसमें बैंक अपनी अतिरिक्त राशि केंद्रीय बैंक को देते हैं, और यही अवशोषण का काम अब स्थायी जमा सुविधा भी करती है। विकल्प C ग्राहकों को दी जाने वाली उधार दर का वर्णन है, जिसे बैंक स्वयं तय करता है। विकल्प D दिनांकित प्रतिभूतियों की बिक्री से सरकार के उधार का वर्णन है, जिसका प्रबंध बैंक ऋण प्रबंधक के रूप में करता है, पर वह रेपो दर नहीं है।
भारत की मौद्रिक नीति समिति में कितने सदस्य होते हैं?
- A.चार
- B.पाँच
- C.छह
- D.सात
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. छह
व्याख्या
सही उत्तर C, छह है। इनमें तीन रिज़र्व बैंक से आते हैं, अर्थात अध्यक्ष के रूप में गवर्नर, मौद्रिक नीति देखने वाले डिप्टी गवर्नर और केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी, तथा तीन सदस्य केंद्र सरकार ऐसे व्यक्तियों में से नियुक्त करती है जिन्हें अर्थशास्त्र, बैंकिंग या वित्त का ज्ञान हो।
विकल्प A चार समिति की बैठक का कोरम है, सदस्य संख्या नहीं, इसीलिए इसे भ्रम के लिए रखा गया है। विकल्प B और विकल्प D केवल गलत संख्याएँ हैं, यद्यपि सात उन्हें भ्रमित करता है जो गवर्नर को दो बार गिन लेते हैं, एक बार अध्यक्ष और एक बार सदस्य के रूप में। निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से होते हैं और मत बराबर होने पर गवर्नर का दूसरा अर्थात निर्णायक मत चलता है, जो सम संख्या में ही संभव है।
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम में संशोधन कर मौद्रिक नीति समिति को वैधानिक आधार किस कानून से मिला?
- A.वित्त अधिनियम 2016
- B.बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949
- C.राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम 2003
- D.विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. वित्त अधिनियम 2016
व्याख्या
सही उत्तर A, वित्त अधिनियम 2016 है। इसी ने भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 में संशोधन कर मुद्रास्फीति लक्ष्य और मौद्रिक नीति समिति से जुड़े प्रावधान जोड़े, जिससे नीतिगत दर अब अकेले गवर्नर के बजाय एक समिति तय करती है और लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का ढाँचा कानून बन गया।
विकल्प B बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 बैंकों को लाइसेंस देने, उनके विनियमन और पर्यवेक्षण की शक्ति देता है तथा वैधानिक तरलता अनुपात निर्धारित करता है, पर समिति से उसका संबंध नहीं। विकल्प C राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 राजकोषीय घाटे और सरकारी ऋण के लक्ष्य तय करता है, जो राजकोषीय नीति है, मौद्रिक नहीं, और यही यहाँ का मुख्य भ्रम है। विकल्प D विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 विदेशी मुद्रा के लेनदेन को नियंत्रित करता है।
बैंकों द्वारा रिज़र्व बैंक के पास रखा जाने वाला नकद आरक्षित अनुपात किस प्रावधान के अंतर्गत निर्धारित होता है?
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 42
- B.बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24
- C.भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 22
- D.विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 42
व्याख्या
सही उत्तर A, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 42 है। यह प्रत्येक अनुसूचित बैंक से अपेक्षा करती है कि वह अपनी निवल माँग और सावधि देयताओं पर गणना की गई नकद राशि रिज़र्व बैंक के पास रखे, और यही अनुपात नकद आरक्षित अनुपात कहलाता है। 2006 के संशोधन के बाद बैंक इसे किसी वैधानिक न्यूनतम या अधिकतम सीमा के बिना तय कर सकता है।
विकल्प B बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24 वैधानिक तरलता अनुपात निर्धारित करती है, अर्थात देयताओं का वह अंश जो बैंक को नकदी, स्वर्ण और अनुमोदित प्रतिभूतियों में अपने पास रखना होता है; इन्हीं दो धाराओं की अदला बदली बैंकिंग परीक्षाओं का प्रिय प्रश्न है। विकल्प C धारा 22 बैंक को नोट निर्गमन का एकाधिकार देती है। विकल्प D विदेशी मुद्रा के लेनदेन से संबंधित है और आरक्षित आवश्यकताओं से उसका कोई संबंध नहीं।
निम्नलिखित में से कौन साख नियंत्रण का गुणात्मक उपकरण है?
- A.खुले बाजार की क्रियाएँ
- B.मार्जिन आवश्यकता
- C.नकद आरक्षित अनुपात
- D.रेपो दर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मार्जिन आवश्यकता
व्याख्या
सही उत्तर B, मार्जिन आवश्यकता है। मार्जिन आवश्यकता प्रतिभूति के मूल्य का वह भाग है जो उधार लेने वाले को अपने साधनों से देना पड़ता है; किसी विशेष वस्तु पर ऋण की मार्जिन बढ़ाकर बैंक उस वस्तु के सट्टे में जाती साख को रोक सकता है और कुल साख को छुए बिना उसकी दिशा बदल सकता है। इसीलिए इसे गुणात्मक या चयनात्मक उपकरण कहा जाता है।
विकल्प A खुले बाजार की क्रियाएँ सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद बिक्री से मुद्रा की मात्रा बदलती हैं। विकल्प C नकद आरक्षित अनुपात बैंक के पास उधार देने योग्य राशि की मात्रा बदलता है। विकल्प D रेपो दर पूरी अर्थव्यवस्था के लिए साख की कीमत बदलती है। ये तीनों साख की मात्रा पर काम करते हैं इसलिए मात्रात्मक हैं, जबकि नैतिक प्रत्यायन, साख की राशनिंग, उपभोक्ता साख का विनियमन और सीधी कार्रवाई मार्जिन आवश्यकता के साथ गुणात्मक पक्ष में आते हैं।
भारत में एक रुपये का नोट भारत सरकार जारी करती है और उस पर किसके हस्ताक्षर होते हैं?
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर
- B.वित्त सचिव
- C.केंद्रीय वित्त मंत्री
- D.भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर
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सही उत्तर: B. वित्त सचिव
व्याख्या
सही उत्तर B, वित्त सचिव है। एक रुपये का नोट रिज़र्व बैंक का नोट है ही नहीं: इसे भारत सरकार वित्त मंत्रालय के माध्यम से जारी करती है, यह सरकार का वैध मुद्रा नोट है और इस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। इसी प्रकार सभी सिक्के भी सरकार ढालती और जारी करती है।
विकल्प A एक रुपये के नोट के लिए गलत है, यद्यपि गवर्नर दो रुपये और उससे बड़े हर नोट पर हस्ताक्षर करते हैं, जिन्हें बैंक अपने अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत जारी करता है; यही अंतर इस प्रश्न का मूल है। विकल्प C इसलिए गलत है कि वित्त मंत्री किसी भी मुद्रा नोट पर हस्ताक्षर नहीं करते। विकल्प D इसलिए गलत है कि डिप्टी गवर्नर भी किसी मुद्रा नोट पर हस्ताक्षर नहीं करते, भले ही वे बैंक के अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हों और मौद्रिक नीति समिति में बैठते हों।
1957 से चली आ रही न्यूनतम कोष प्रणाली के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को कितना कोष रखना होता है?
- A.दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये का हो
- B.एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये, जिसमें स्वर्ण कम से कम पचासी करोड़ रुपये का हो
- C.दो सौ करोड़ रुपये, पूरा का पूरा स्वर्ण में
- D.पाँच सौ करोड़ रुपये, जिसमें स्वर्ण कम से कम दो सौ करोड़ रुपये का हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये का हो
व्याख्या
सही उत्तर A है। 1957 में अपनाई गई न्यूनतम कोष प्रणाली के अंतर्गत बैंक जारी नोटों के विरुद्ध कम से कम दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखता है, जिनमें स्वर्ण का मूल्य कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये होना चाहिए और शेष विदेशी प्रतिभूतियों में रखा जाता है। इसने आनुपातिक कोष प्रणाली का स्थान लिया, जिसमें प्रचलित नोटों के एक निश्चित अनुपात के बराबर स्वर्ण और स्टर्लिंग रखना पड़ता था, और इससे नोट निर्गमन उस सीमा से मुक्त हो गया।
विकल्प B में आँकड़े उलट दिए गए हैं और स्वर्ण के भाग को ही कुल मान लिया गया है। विकल्प C इसलिए गलत है कि पूरा कोष स्वर्ण में नहीं, केवल उसका छोटा भाग स्वर्ण में होता है। विकल्प D के आँकड़े इस प्रणाली के किसी चरण के नहीं हैं और उन्हें उस छात्र के लिए रखा गया है जिसे केवल इतना याद है कि संख्या बड़ी है।
मुद्रास्फीति रोकने के लिए रिज़र्व बैंक जब रेपो दर बढ़ाता है, तो तात्कालिक प्रभाव क्या होता है?
- A.साख महँगी हो जाती है और मुद्रा आपूर्ति की वृद्धि धीमी पड़ती है
- B.साख सस्ती हो जाती है और उधार बढ़ जाता है
- C.केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा अपने आप घट जाता है
- D.वैधानिक तरलता अनुपात उसी अनुपात में बढ़ जाता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. साख महँगी हो जाती है और मुद्रा आपूर्ति की वृद्धि धीमी पड़ती है
व्याख्या
सही उत्तर A है। रेपो दर बढ़ने से बैंकों के लिए रिज़र्व बैंक से उधार लेने की लागत बढ़ती है, इसलिए वे अपनी उधार दरें भी बढ़ा देते हैं। ऋण महँगे हो जाते हैं, परिवार और फर्में कम उधार लेकर कम व्यय करते हैं, साख तथा मुद्रा आपूर्ति की वृद्धि धीमी होती है और कीमतों पर माँग का दबाव घटता है। इसे महँगी मुद्रा या संकुचनकारी नीति कहा जाता है।
विकल्प B रेपो दर में कटौती का प्रभाव बताता है, अर्थात सस्ती मुद्रा की नीति, जो मुद्रास्फीति कम होने पर वृद्धि को सहारा देने के लिए अपनाई जाती है। विकल्प C इसलिए गलत है कि राजकोषीय घाटा सरकार के अपने कर और व्यय से तय होता है; उल्टे महँगी साख से सरकार का ब्याज भार बढ़ जाता है। विकल्प D इसलिए गलत है कि वैधानिक तरलता अनुपात बैंककारी विनियमन अधिनियम के अंतर्गत अलग उपकरण है और नीतिगत दर के साथ अपने आप नहीं बदलता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना किसकी सिफारिश पर हुई थी?
हिल्टन यंग आयोग की सिफारिश पर, जिसका औपचारिक नाम भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग था और जिसने 1926 में रिपोर्ट दी। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 में पारित हुआ और बैंक ने 1 अप्रैल 1935 से काम शुरू किया, जिसका केंद्रीय कार्यालय कलकत्ता में था और 1937 में बंबई ले जाया गया।
भारत में एक रुपये का नोट कौन जारी करता है?
एक रुपये का नोट भारत सरकार वित्त मंत्रालय के माध्यम से जारी करती है और उस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। सभी सिक्के भी सरकार ही जारी करती है। दो रुपये और उससे बड़े मूल्यवर्ग के नोट रिज़र्व बैंक अपने अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत जारी करता है और उन पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।
मौद्रिक नीति समिति की संरचना क्या है?
इसमें छह सदस्य होते हैं: अध्यक्ष के रूप में रिज़र्व बैंक के गवर्नर, मौद्रिक नीति देखने वाले डिप्टी गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी, तथा केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन सदस्य। नियुक्त सदस्य चार वर्ष तक पद पर रहते हैं और पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते, तथा गवर्नर को निर्णायक मत प्राप्त है।
रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में क्या अंतर है?
रेपो दर वह दर है जिस पर रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के बदले वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है, अर्थात यह बैंकों के लिए उधार लेने की लागत है। रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक अपनी अतिरिक्त राशि रिज़र्व बैंक के पास रखते हैं, अर्थात यह केंद्रीय बैंक को दिए गए ऋण पर मिलने वाला प्रतिफल है।
साख नियंत्रण के कौन से उपकरण गुणात्मक कहलाते हैं?
वे जो साख की कुल मात्रा के बजाय उसकी दिशा बदलते हैं: प्रतिभूति पर ऋण की मार्जिन आवश्यकता, विशेष वस्तुओं पर चयनात्मक साख नियंत्रण, उपभोक्ता साख का विनियमन, साख की राशनिंग, नैतिक प्रत्यायन तथा किसी बैंक के विरुद्ध सीधी कार्रवाई। आरक्षित अनुपात, नीतिगत दरें और खुले बाजार की क्रियाएँ मात्रात्मक उपकरण हैं।
मुद्रास्फीति अधिक होने पर रिज़र्व बैंक क्या करता है?
वह महँगी मुद्रा या संकुचनकारी नीति अपनाता है। रेपो दर बढ़ाता है, आवश्यकता होने पर नकद आरक्षित अनुपात भी बढ़ा सकता है और खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचता है। इससे साख महँगी और कम हो जाती है, उधार तथा व्यय घटते हैं और कीमतों पर माँग का दबाव कम होता है, भले ही कुछ समय के लिए वृद्धि धीमी पड़ जाए।
स्रोत
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (कक्षा 12), भारतीय अर्थव्यवस्था और उसकी संस्थाओं से संबंधित अध्याय — एनसीईआरटी
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 — भारत सरकार
- बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 — भारत सरकार



