जीडीपी और राष्ट्रीय आय: अवधारणाएं, विधियां और सूत्र
परीक्षा के लिए राष्ट्रीय आय के नोट्स: जीडीपी, जीएनपी, एनडीपी और एनएनपी, साधन लागत एवं बाजार मूल्य, मापन की तीन विधियां तथा वास्तविक और मौद्रिक जीडीपी।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

राष्ट्रीय आय किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मुद्रा में मूल्य है। विकास दर, प्रति व्यक्ति आय, मंदी अथवा कृषि और सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी से जुड़ा हर प्रश्न इन्हीं परिभाषाओं पर टिका है, इसलिए समुच्चयों और उन्हें जोड़ने वाले सूत्रों को ठीक-ठीक याद करना आवश्यक है। इन्हें एक श्रृंखला के रूप में पढ़ें: सकल से शुद्ध तक, घरेलू से राष्ट्रीय तक और बाजार मूल्य से साधन लागत तक।
चार मूल समुच्चय
सकल घरेलू उत्पाद अर्थात जीडीपी किसी देश की घरेलू सीमा के भीतर एक लेखा वर्ष में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का बाजार मूल्य है, चाहे उत्पादक उस देश का नागरिक हो या विदेशी। अंतिम शब्द महत्वपूर्ण है: मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य नहीं जोड़ा जाता, क्योंकि गेहूं, आटा और रोटी को अलग-अलग गिनने पर एक ही मूल्य तीन बार गिना जाएगा। सकल राष्ट्रीय उत्पाद अर्थात जीएनपी में यह देखा जाता है कि देश के निवासी कहीं भी रहकर कितना उत्पादन करते हैं, इसलिए इसमें विदेश में भारतीयों द्वारा अर्जित आय जोड़ी जाती है और भारत में विदेशियों द्वारा अर्जित आय घटाई जाती है। इस अंतर को विदेशों से शुद्ध साधन आय कहते हैं।
| समुच्चय | सूत्र | अर्थ |
|---|---|---|
| जीएनपी | जीडीपी + विदेशों से शुद्ध साधन आय | क्षेत्र के भीतर नहीं, बल्कि निवासियों द्वारा किया गया उत्पादन |
| एनडीपी | जीडीपी - मूल्यह्रास | पूंजी की घिसावट अलग रखने के बाद घरेलू उत्पाद |
| एनएनपी | जीएनपी - मूल्यह्रास | मूल्यह्रास घटाने के बाद राष्ट्रीय उत्पाद |
| राष्ट्रीय आय | साधन लागत पर एनएनपी | उत्पादन के साधनों को वास्तव में प्राप्त आय |
| प्रति व्यक्ति आय | राष्ट्रीय आय भाग जनसंख्या | एक वर्ष में एक व्यक्ति की औसत आय |
बाजार मूल्य और साधन लागत
एक ही उत्पादन का मूल्यांकन दो प्रकार से किया जा सकता है। बाजार मूल्य पर वह मूल्य लिया जाता है जो क्रेता चुकाता है, जिसमें अप्रत्यक्ष कर सम्मिलित रहते हैं और जिसे अनुदान घटा देते हैं। साधन लागत पर वह मूल्य लिया जाता है जो उत्पादकों को वास्तव में मिलता है, अर्थात भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यम को लगान, मजदूरी, ब्याज तथा लाभ के रूप में किया गया भुगतान। दोनों का संबंध छोटा सा है और बार-बार पूछा जाता है: साधन लागत बराबर बाजार मूल्य घटा अप्रत्यक्ष कर जोड़ अनुदान। भारत में जनवरी 2015 में जारी राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला के बाद से बाजार मूल्य पर जीडीपी के साथ आधारभूत मूल्यों पर सकल मूल्य वर्धित भी प्रकाशित होता है, और समाचारों में जो विकास दर आती है वह बाजार मूल्य पर वास्तविक जीडीपी की वृद्धि होती है।
मापन की तीन विधियां
तीनों विधियों से एक ही उत्तर आना चाहिए, क्योंकि एक व्यक्ति का व्यय दूसरे व्यक्ति की आय है।
- उत्पाद अथवा मूल्य वर्धित विधि: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों की प्रत्येक उत्पादक इकाई द्वारा जोड़े गए मूल्य, अर्थात उत्पादन घटा मध्यवर्ती उपभोग, को जोड़ दिया जाता है। इससे दोहरी गणना नहीं होती।
- आय विधि: उत्पादन के साधनों को प्राप्त आयें, अर्थात लगान, मजदूरी और वेतन, ब्याज तथा लाभ, और स्वनियोजितों की मिश्रित आय जोड़ी जाती है।
- व्यय विधि: अर्थव्यवस्था के समस्त अंतिम व्यय जोड़े जाते हैं। सूत्र रूप में जीडीपी बराबर निजी उपभोग जोड़ निवेश जोड़ सरकारी व्यय जोड़ निर्यात घटा आयात।
मौद्रिक जीडीपी, वास्तविक जीडीपी और अपस्फीतिकारक
मौद्रिक अथवा नाममात्र जीडीपी उसी वर्ष के प्रचलित मूल्यों पर निकाली जाती है, इसलिए वह उत्पादन बढ़ने पर भी बढ़ती है और कीमतें बढ़ने पर भी। वास्तविक जीडीपी एक निश्चित आधार वर्ष के मूल्यों पर निकाली जाती है, इसलिए वह तभी बदलती है जब वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा बदले। यही कारण है कि विकास दर मापने के लिए वास्तविक जीडीपी का ही प्रयोग होता है, मौद्रिक जीडीपी का नहीं। दोनों का अनुपात सौ से गुणा करने पर जीडीपी अपस्फीतिकारक मिलता है, जो उपभोक्ता वस्तुओं की निश्चित टोकरी के बजाय सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की महंगाई का व्यापक माप है।
भारत में राष्ट्रीय आय का आकलन
भारत की राष्ट्रीय आय का पहला अनुमान उन्नीसवीं शताब्दी में दादाभाई नौरोजी ने लगाया और धन के निष्कासन संबंधी अपने तर्क में उसका उपयोग किया; उन्होंने प्रति व्यक्ति आय लगभग बीस रुपये वार्षिक बताई थी। पहला वैज्ञानिक अनुमान वी. के. आर. वी. राव ने वर्ष 1931-32 के लिए प्रस्तुत किया। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने 1949 में राष्ट्रीय आय समिति गठित की, जिसके अध्यक्ष पी. सी. महालनोबिस थे तथा डी. आर. गाडगिल और वी. के. आर. वी. राव सदस्य थे; इसकी अंतिम रिपोर्ट 1954 में आई। आज यह कार्य राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय करता है, जो केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय के विलय से बना है और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन है। इन अनुमानों का लेखा वर्ष भारतीय वित्तीय वर्ष है, अर्थात 1 अप्रैल से 31 मार्च तक, और श्रृंखला का आधार वर्ष समय-समय पर संशोधित किया जाता है।
जीडीपी क्या नहीं बताती
ऊंची जीडीपी का अर्थ ऊंचा जीवन स्तर नहीं है। जीडीपी में घरेलू श्रम जैसे अवैतनिक कार्य नहीं गिने जाते, असंगठित और काली अर्थव्यवस्था की गतिविधियां छूट जाती हैं, आय अमीर और गरीब के बीच किस प्रकार बंटी है यह कुछ नहीं बताती, तथा प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के क्षय की लागत इसमें से घटाई नहीं जाती। इसी कारण हरित जीडीपी तथा मानव विकास सूचकांक जैसे मापों का प्रयोग इसके साथ किया जाता है। आर्थिक संवृद्धि का अर्थ है वास्तविक राष्ट्रीय आय का बढ़ना, जबकि विकास का अर्थ है वह संवृद्धि तथा उसके साथ बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और समानता।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से दो प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला सूत्र पर आधारित होता है: जीएनपी में से मूल्यह्रास, जीडीपी में विदेशों से शुद्ध साधन आय, बाजार मूल्य बनाम साधन लागत, अथवा व्यय विधि का समीकरण। दूसरा नाम और वर्ष पूछता है: पहला अनुमान दादाभाई नौरोजी, पहला वैज्ञानिक अनुमान वी. के. आर. वी. राव द्वारा 1931-32 के लिए, 1949 की राष्ट्रीय आय समिति के अध्यक्ष पी. सी. महालनोबिस, तथा वर्तमान अनुमान तैयार करने वाला राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय। सामान्य जाल हैं घरेलू और राष्ट्रीय को आपस में बदल देना, जिनका अंतर विदेशों से शुद्ध साधन आय तय करती है, तथा सकल और शुद्ध को बदल देना, जिनका अंतर मूल्यह्रास तय करता है; यह भी याद रखें कि विकास दर स्थिर मूल्यों पर वास्तविक जीडीपी से मापी जाती है, मौद्रिक जीडीपी से कभी नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| जीडीपी | घरेलू सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य |
|---|---|
| जीएनपी | जीडीपी + विदेशों से शुद्ध साधन आय |
| एनडीपी | जीडीपी - मूल्यह्रास |
| एनएनपी | जीएनपी - मूल्यह्रास |
| राष्ट्रीय आय | साधन लागत पर एनएनपी |
| प्रति व्यक्ति आय | राष्ट्रीय आय में जनसंख्या का भाग |
| साधन लागत | बाजार मूल्य - अप्रत्यक्ष कर + अनुदान |
| व्यय विधि | जीडीपी = उपभोग + निवेश + सरकारी व्यय + (निर्यात - आयात) |
| जीडीपी अपस्फीतिकारक | (मौद्रिक जीडीपी भाग वास्तविक जीडीपी) गुणा 100 |
| भारत की राष्ट्रीय आय का पहला अनुमान | दादाभाई नौरोजी |
| पहला वैज्ञानिक अनुमान | वी. के. आर. वी. राव, वर्ष 1931-32 के लिए |
| राष्ट्रीय आय समिति | गठन 1949; अध्यक्ष पी. सी. महालनोबिस; रिपोर्ट 1954 |
| अनुमान तैयार करने वाली संस्था | राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन |
| लेखा वर्ष | 1 अप्रैल से 31 मार्च तक |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किन अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है?
- A.देश के निवासियों द्वारा, चाहे वे कहीं भी हों, उत्पादित
- B.एक वर्ष में देश की घरेलू सीमा के भीतर उत्पादित
- C.एक वर्ष में केवल सरकारी क्षेत्र द्वारा उत्पादित
- D.उत्पादन में प्रयुक्त मध्यवर्ती वस्तुओं सहित उत्पादित
उत्तर देखें
जीडीपी एक लेखा वर्ष में देश की सीमा के भीतर हुए उत्पादन को मापती है, चाहे उत्पादक कोई भी हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी) निम्नलिखित में से किसके बराबर होता है?
- A.जीडीपी + विदेशों से शुद्ध साधन आय
- B.जीडीपी - मूल्यह्रास
- C.जीडीपी + अप्रत्यक्ष कर
- D.जीडीपी - अनुदान
उत्तर देखें
विदेशों से शुद्ध साधन आय वह राशि है जो देश के निवासी विदेश में कमाते हैं, उसमें से विदेशियों द्वारा देश के भीतर कमाई गई आय घटाकर निकाली जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सकल राष्ट्रीय उत्पाद में से कौन सी मद घटाने पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (एनएनपी) प्राप्त होता है?
- A.अप्रत्यक्ष कर
- B.मूल्यह्रास
- C.अनुदान
- D.विदेशों से शुद्ध साधन आय
उत्तर देखें
मशीनें, भवन और वाहन प्रयोग से घिसते हैं, और यदि देश को अपनी पूंजी यथावत बनाए रखनी है तो इस घिसावट का मूल्य अलग रखना आवश्यक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की राष्ट्रीय आय का पहला अनुमान किसने प्रस्तुत किया था?
- A.वी. के. आर. वी. राव
- B.पी. सी. महालनोबिस
- C.दादाभाई नौरोजी
- D.डी. आर. गाडगिल
उत्तर देखें
उन्होंने उन्नीसवीं शताब्दी में भारत की राष्ट्रीय आय का सबसे पहला अनुमान लगाया और इसके आधार पर तर्क दिया कि ब्रिटिश शासन देश से धन बाहर खींच रहा है; उन्होंने औसत आय लगभग बीस रुपये प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष बताई थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत सरकार द्वारा 1949 में गठित राष्ट्रीय आय समिति के अध्यक्ष कौन थे?
- A.पी. सी. महालनोबिस
- B.दादाभाई नौरोजी
- C.वी. के. आर. वी. राव
- D.सी. रंगराजन
उत्तर देखें
यह समिति स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय आय के सरकारी अनुमान तैयार करने के लिए 1949 में बनाई गई और इसने अपनी अंतिम रिपोर्ट 1954 में प्रस्तुत की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बाजार मूल्य पर राष्ट्रीय आय से साधन लागत पर राष्ट्रीय आय किस प्रकार प्राप्त की जाती है?
- A.अप्रत्यक्ष कर जोड़कर और अनुदान घटाकर
- B.अप्रत्यक्ष कर घटाकर और अनुदान जोड़कर
- C.अप्रत्यक्ष कर और अनुदान दोनों जोड़कर
- D.अप्रत्यक्ष कर और अनुदान दोनों घटाकर
उत्तर देखें
बाजार मूल्य में वे अप्रत्यक्ष कर सम्मिलित रहते हैं जो क्रेता चुकाता है किंतु जो उत्पादक तक कभी नहीं पहुंचते, इसलिए उन्हें घटाना पड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी देश की वास्तविक जीडीपी किन मूल्यों पर मापी जाती है?
- A.संबंधित वर्ष के प्रचलित मूल्यों पर
- B.आधार वर्ष के स्थिर मूल्यों पर
- C.पिछले वर्ष की साधन लागत पर
- D.अंतर्राष्ट्रीय डॉलर मूल्यों पर
उत्तर देखें
जब प्रत्येक वर्ष का उत्पादन एक ही निश्चित मूल्य समूह पर आंका जाता है, तो कुल में होने वाला कोई भी परिवर्तन उत्पादित मात्रा के परिवर्तन से ही आएगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जीडीपी अपस्फीतिकारक की गणना किस प्रकार की जाती है?
- A.(वास्तविक जीडीपी भाग मौद्रिक जीडीपी) गुणा 100
- B.(मौद्रिक जीडीपी भाग वास्तविक जीडीपी) गुणा 100
- C.मौद्रिक जीडीपी घटा वास्तविक जीडीपी
- D.जीडीपी भाग जनसंख्या
उत्तर देखें
अपस्फीतिकारक यह तुलना करता है कि वर्ष का उत्पादन इस वर्ष के मूल्यों पर कितने का पड़ता है और वही उत्पादन आधार वर्ष के मूल्यों पर कितने का पड़ता, इसलिए ऊपर मौद्रिक जीडीपी और नीचे वास्तविक जीडीपी आती है तथा अनुपात को प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →व्यय विधि के अनुसार जीडीपी उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय तथा किसका योग है?
- A.निर्यात घटा आयात
- B.आयात घटा निर्यात
- C.केवल कुल निर्यात
- D.मूल्यह्रास
उत्तर देखें
निर्यात देश में उत्पादित होकर विदेश में बेचा जाता है, इसलिए वह घरेलू उत्पादन का अंग है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में राष्ट्रीय आय के सरकारी अनुमान कौन सी संस्था तैयार करती है?
- A.भारतीय रिजर्व बैंक
- B.सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय
- C.वित्त आयोग
- D.भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड
उत्तर देखें
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, जो केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय के विलय से बना है, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय लेखे तैयार करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी देश की प्रति व्यक्ति आय की गणना किस प्रकार की जाती है?
- A.राष्ट्रीय आय में कुल जनसंख्या का भाग देकर
- B.राष्ट्रीय आय में कार्यशील जनसंख्या का भाग देकर
- C.राष्ट्रीय आय को विकास दर से गुणा करके
- D.एक वर्ष में परिवारों की कुल बचत जोड़कर
उत्तर देखें
प्रति व्यक्ति आय एक वर्ष में एक व्यक्ति की औसत आय है, जो राष्ट्रीय आय में सम्पूर्ण जनसंख्या का भाग देकर निकाली जाती है, जिसमें बच्चे और वे लोग भी सम्मिलित हैं जो काम नहीं करते।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जीडीपी और जीएनपी में क्या अंतर है?
जीडीपी देश की सीमा के भीतर हुआ उत्पादन गिनती है, चाहे उत्पादक कोई भी हो, इसलिए भारत में उत्पादन करने वाली विदेशी कंपनी भारत की जीडीपी बढ़ाती है। जीएनपी देश के निवासियों द्वारा कहीं भी किया गया उत्पादन गिनती है, इसलिए विदेश में कार्यरत भारतीयों की आय भारत की जीएनपी में जुड़ती है, जीडीपी में नहीं। दोनों के बीच का सेतु विदेशों से शुद्ध साधन आय है: जीएनपी बराबर जीडीपी जोड़ यह राशि।
विकास दर मापने के लिए वास्तविक जीडीपी का ही प्रयोग क्यों होता है?
मौद्रिक जीडीपी उसी वर्ष के प्रचलित मूल्यों पर निकाली जाती है, इसलिए वह केवल कीमतें बढ़ने से भी बढ़ सकती है, भले ही देश ने कुछ अधिक उत्पादन न किया हो। वास्तविक जीडीपी उत्पादन को आधार वर्ष के स्थिर मूल्यों पर आंकती है, इसलिए उसमें वृद्धि का अर्थ वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा में सचमुच वृद्धि होता है। इसी कारण विकास दर सदैव वास्तविक जीडीपी के आधार पर बताई जाती है।
जीडीपी अपस्फीतिकारक क्या है?
यह मौद्रिक जीडीपी और वास्तविक जीडीपी का अनुपात है, जिसे सौ से गुणा किया जाता है। चूंकि इसमें जीडीपी में गिनी गई हर वस्तु और सेवा सम्मिलित होती है, यह सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की महंगाई मापता है, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक चुनी हुई वस्तुओं की निश्चित टोकरी पर आधारित होते हैं। सौ से अधिक मान बताता है कि आधार वर्ष की तुलना में कीमतें बढ़ी हैं।
भारत में राष्ट्रीय आय का पहला अनुमान किसने लगाया था?
दादाभाई नौरोजी ने उन्नीसवीं शताब्दी में, भारत से ब्रिटेन को होने वाले धन के निष्कासन संबंधी अपने तर्क के अंग के रूप में, और उन्होंने प्रति व्यक्ति आय लगभग बीस रुपये वार्षिक बताई थी। आधुनिक विधियों पर आधारित पहला वैज्ञानिक अनुमान वी. के. आर. वी. राव ने 1931-32 के लिए लगाया। स्वतंत्रता के बाद 1949 की राष्ट्रीय आय समिति ने, जिसके अध्यक्ष पी. सी. महालनोबिस थे, इस कार्य को सरकारी रूप दिया।
जीडीपी बढ़ने का अर्थ कल्याण बढ़ना क्यों नहीं है?
जीडीपी उत्पादन का मूल्य मापती है, जीवन की गुणवत्ता नहीं। इसमें अवैतनिक घरेलू श्रम नहीं गिना जाता, असंगठित और काली अर्थव्यवस्था का बड़ा भाग छूट जाता है, आय अमीर और गरीब के बीच कैसे बंटी है यह पता नहीं चलता, तथा पर्यावरण को हुई हानि घटाई नहीं जाती। इसीलिए प्रति व्यक्ति आय, मानव विकास सूचकांक तथा गरीबी और असमानता के माप इसके साथ पढ़े जाते हैं।
स्रोत
- समष्टि अर्थशास्त्र: एक परिचय (कक्षा 12), राष्ट्रीय आय लेखांकन अध्याय — एनसीईआरटी
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (कक्षा 11) — एनसीईआरटी





