वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान: यूपीआई तथा जन धन
भारत में वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान के पूर्ण नोट्स: पीएमजेडीवाई, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, भुगतान बैंक, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, एनपीसीआई, यूपीआई, आरटीजीएस और एईपीएस।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

वित्तीय समावेशन का अर्थ है कि प्रत्येक परिवार उन वित्तीय सेवाओं तक वहनीय लागत पर पहुँच सके जिन पर आधुनिक अर्थव्यवस्था चलती है: बचत खाता, ऋण, धन भेजने और पाने का साधन, बीमा और पेंशन। वित्तीय समावेशन पर रंगराजन समिति ने, जिसकी रिपोर्ट 2008 में आई, इसे कमजोर वर्गों के लिए वहनीय लागत पर वित्तीय सेवाओं तथा समय पर पर्याप्त ऋण की पहुँच सुनिश्चित करना बताया। दो बाद की समितियों ने नीति को आकार दिया: छोटे व्यवसायों और निम्न आय परिवारों के लिए समग्र वित्तीय सेवाओं पर 2014 की नचिकेत मोर समिति, जिससे भुगतान बैंक तथा लघु वित्त बैंक बने, और दीपक मोहंती समिति, जिसने वित्तीय समावेशन का मध्यावधि मार्ग बताया।
2014 से पहले का लंबा रास्ता
राज्य का पहला साधन बैंक शाखा थी। 1969 में चौदह बड़े व्यापारिक बैंकों और 1980 में छह और बैंकों का राष्ट्रीयकरण इसी घोषित उद्देश्य से हुआ कि बैंकिंग गाँवों तक पहुँचे, और अग्रणी बैंक योजना ने प्रत्येक जिले के लिए एक बैंक को उत्तरदायी बनाया। छोटे तथा सीमांत किसानों और ग्रामीण दस्तकारों को ऋण देने के लिए 1975 से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक स्थापित हुए, जिन्हें संघ सरकार, राज्य सरकार और एक व्यापारिक बैंक मिलकर प्रायोजित करते हैं। नाबार्ड ने 1992 में स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से जोड़ना आरंभ किया, जिससे करोड़ों ग्रामीण महिलाएँ अपने समूहों के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था में आईं। रिज़र्व बैंक ने 2005 में बैंकों से बिना अतिरिक्त शर्तों वाले खाते खोलने को कहा, जिन्हें बाद में मूल बचत बैंक जमा खाता नाम दिया गया, और 2006 में बैंकिंग संवाददाता व्यवस्था की अनुमति दी, जिससे प्रशिक्षित प्रतिनिधि उस गाँव तक सेवा पहुँचा सके जहाँ शाखा नहीं थी।
जन धन योजना और उस पर खड़ी योजनाएं
प्रधानमंत्री जन धन योजना 28 अगस्त 2014 को वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय मिशन के रूप में आरंभ हुई। इसमें शून्य शेष वाला मूल बचत बैंक जमा खाता, रुपे डेबिट कार्ड, कार्ड के साथ दुर्घटना बीमा कवर, और संतोषजनक संचालन पर ओवरड्राफ्ट सुविधा मिलती है। पहचान के लिए आधार और पहुँच के लिए मोबाइल के साथ मिलकर यह खाता वह व्यवस्था पूरी करता है जिसे जैम त्रयी कहा जाता है, जिससे सब्सिडी या पेंशन नकद अथवा वस्तु के बजाय सीधे लाभार्थी के खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से दी जा सकती है।
| योजना | क्या मिलता है | पात्र आयु |
|---|---|---|
| प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना | दो लाख रुपये का जीवन बीमा कवर | 18 से 50 वर्ष |
| प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना | दो लाख रुपये का दुर्घटना मृत्यु और दिव्यांगता कवर | 18 से 70 वर्ष |
| अटल पेंशन योजना | एक हजार से पाँच हजार रुपये तक मासिक गारंटीशुदा पेंशन | 18 से 40 वर्ष |
| प्रधानमंत्री मुद्रा योजना | शिशु, किशोर और तरुण श्रेणियों में बिना जमानत ऋण | सूक्ष्म उद्यम |
| स्टैंड अप इंडिया | अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों के उद्यमों को बैंक ऋण | नए उद्यम |
2015 में आरंभ मुद्रा योजना में शिशु श्रेणी पचास हजार रुपये तक के ऋण, किशोर पचास हजार से पाँच लाख तक, और तरुण पाँच लाख से दस लाख तक के ऋण देती है; दोहराने वाले ऋणियों के लिए इससे ऊपर की श्रेणी बाद में जोड़ी गई। मोर समिति से दो नए प्रकार के बैंक निकले: भुगतान बैंक, जो प्रति ग्राहक एक सीमा तक छोटी जमा ले सकते हैं और डेबिट कार्ड दे सकते हैं परंतु ऋण नहीं दे सकते और क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते, तथा लघु वित्त बैंक, जिन्हें अपने ऋण का तीन-चौथाई प्राथमिकता क्षेत्र में और अधिकांश ऋण छोटी राशियों में देना होता है।
भुगतान प्रणाली
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम 2008 में खुदरा भुगतान के शीर्ष संगठन के रूप में बना, जिसे रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंक संघ ने भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के ढाँचे में प्रवर्तित किया। इसके उत्पाद वही हैं जिन पर प्रश्न बनते हैं: घरेलू कार्ड नेटवर्क रुपे; आईएमपीएस, जिसने चौबीसों घंटे तत्काल अंतरण संभव किया; आधार सक्षम भुगतान प्रणाली, जिससे ग्राहक सूक्ष्म एटीएम पर आधार संख्या और अंगुलिचिह्न से निकासी या जमा कर सकता है; वेतन तथा सब्सिडी जैसे थोक भुगतानों के लिए राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन गृह; टोल के लिए फास्टैग; और एकीकृत भुगतान इंटरफेस।
यूपीआई 2016 में आरंभ हुआ और आईएमपीएस के आधार पर खड़ा है। इसके तीन विचार अलग-अलग समझने योग्य हैं। पहला, आभासी भुगतान पता खाता संख्या और आईएफएससी कोड की जगह लेता है, इसलिए भुगतान करने वाले को पाने वाले का बैंक विवरण नहीं चाहिए। दूसरा, एक ही मोबाइल ऐप से एक व्यक्ति के कई बैंक खाते चलाए जा सकते हैं। तीसरा, लेनदेन फोन पर यूपीआई पिन से एक ही चरण में अधिकृत होता है और निपटान तत्काल तथा हर समय उपलब्ध है। जिनके बैंक का अपना ऐप न हो उनके लिए भीम ऐप तुरंत बाद आया, यूपीआई 123पे ने इसे इंटरनेट रहित साधारण फोन तक बढ़ाया, और यूपीआई लाइट ने उपकरण पर रखे बटुए से छोटे भुगतान की सुविधा दी। सिंगापुर के पेनाउ से आरंभ करते हुए अन्य देशों की तीव्र भुगतान प्रणालियों से जुड़ाव इसे सीमा पार ले जाता है।
पुरानी अंतरण प्रणालियाँ
तीन प्रणालियाँ अलग रखनी चाहिए। एनईएफटी अंतरण को समूहों में निपटाता है और इसमें न्यूनतम राशि नहीं है। आरटीजीएस प्रत्येक लेनदेन को अलग और वास्तविक समय में निपटाता है तथा बड़ी राशि के लिए है, जिसकी न्यूनतम सीमा दो लाख रुपये है। आईएमपीएस मोबाइल तथा इंटरनेट बैंकिंग से बैंक से बैंक तत्काल अंतरण है। तीनों अब वर्ष के सभी दिन काम करते हैं। पर्यवेक्षण रिज़र्व बैंक के पास है, जो पहुँच, उपयोग और गुणवत्ता नापने के लिए वित्तीय समावेशन सूचकांक भी प्रकाशित करता है और बैंकों तथा भुगतान प्रणाली संचालकों की शिकायतों के लिए एकीकृत लोकपाल योजना चलाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
बैंकिंग और एसएससी के प्रश्नपत्र वर्ष तथा संख्याएँ पूछते हैं: पीएमजेडीवाई 2014, मुद्रा 2015, एनपीसीआई 2008, यूपीआई 2016, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 1975, राष्ट्रीयकरण 1969 और 1980। दूसरा प्रारूप योजना और विशेषता का मेल है: पीएमजेजेबीवाई तथा पीएमएसबीवाई का कवर और आयु सीमा, अटल पेंशन योजना की आयु सीमा, और मुद्रा की तीन श्रेणियाँ। तीसरा, प्रणालियों की तुलना: न्यूनतम राशि तथा निपटान पर आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस, तथा यूपीआई बनाम बटुआ। चौथा, भुगतान बैंक क्या नहीं कर सकता, अर्थात ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना। सामान्य जाल हैं पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई की आयु सीमाएँ बदल देना, आरटीजीएस की न्यूनतम सीमा एक लाख बताना, और यूपीआई का श्रेय एनपीसीआई के बजाय रिज़र्व बैंक को देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| रंगराजन समिति रिपोर्ट | वित्तीय समावेशन पर, 2008 |
|---|---|
| नचिकेत मोर समिति | 2014; भुगतान बैंक और लघु वित्त बैंक की सिफारिश |
| बैंक राष्ट्रीयकरण | 1969 में 14 बैंक, 1980 में 6 बैंक |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक | 1975 से स्थापित, संघ, राज्य और व्यापारिक बैंक द्वारा प्रायोजित |
| पीएमजेडीवाई आरंभ | 28 अगस्त 2014 |
| जैम त्रयी | जन धन, आधार, मोबाइल |
| पीएमजेजेबीवाई | दो लाख रुपये जीवन कवर, आयु 18 से 50 |
| पीएमएसबीवाई | दो लाख रुपये दुर्घटना कवर, आयु 18 से 70 |
| अटल पेंशन योजना | आयु 18 से 40; पेंशन एक हजार से पाँच हजार रुपये |
| मुद्रा श्रेणियाँ | शिशु, किशोर और तरुण |
| एनपीसीआई | खुदरा भुगतान के लिए 2008 में स्थापित |
| भुगतान संबंधी विधि | भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 |
| यूपीआई आरंभ | 2016, आईएमपीएस मंच पर आधारित |
| आरटीजीएस न्यूनतम | दो लाख रुपये |
| एईपीएस | आधार संख्या और अंगुलिचिह्न से निकासी तथा जमा |
| भुगतान बैंक की सीमा | छोटी जमा ले सकता है, ऋण और क्रेडिट कार्ड नहीं दे सकता |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
प्रधानमंत्री जन धन योजना किस वर्ष आरंभ की गई थी?
- A.2012
- B.2014
- C.2015
- D.2016
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 2014 है। प्रधानमंत्री जन धन योजना 28 अगस्त 2014 को वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय मिशन के रूप में आरंभ हुई, जिसमें शून्य शेष वाला मूल बचत बैंक जमा खाता, दुर्घटना बीमा कवर सहित रुपे डेबिट कार्ड, और संतोषजनक संचालन पर ओवरड्राफ्ट सुविधा दी जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि 2012 में रुपे कार्ड नेटवर्क आरंभ हुआ और उसी वर्ष बिना अतिरिक्त शर्तों वाले खाते का नाम मूल बचत बैंक जमा खाता रखा गया। विकल्प C गलत है क्योंकि 2015 सामाजिक सुरक्षा पैकेज का वर्ष है, जब प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और मुद्रा घोषित हुईं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2016 में एनपीसीआई ने एकीकृत भुगतान इंटरफेस आरंभ किया। परीक्षा में जन धन योजना के साथ 28 अगस्त की तिथि, रुपे कार्ड और ओवरड्राफ्ट सुविधा तीनों पूछे जाते हैं, इसलिए वर्ष के साथ ये विशेषताएँ भी याद रखनी चाहिए।
एकीकृत भुगतान इंटरफेस को कौन संगठन विकसित और संचालित करता है?
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक
- B.भारतीय स्टेट बैंक
- C.भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
- D.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
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व्याख्या
सही उत्तर C, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम है। एनपीसीआई, जो 2008 में देश के खुदरा भुगतान के शीर्ष संगठन के रूप में बना, एकीकृत भुगतान इंटरफेस के साथ रुपे, आईएमपीएस, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली, राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन गृह तथा फास्टैग भी चलाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि रिज़र्व बैंक ने भारतीय बैंक संघ के साथ एनपीसीआई को प्रवर्तित किया और भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत भुगतान प्रणालियों का नियमन करता है, परंतु यूपीआई स्वयं नहीं चलाता; वह आरटीजीएस और एनईएफटी चलाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक इस प्रणाली का केवल एक सदस्य बैंक है। विकल्प D गलत है क्योंकि सेबी प्रतिभूति बाजार का नियामक है और खुदरा भुगतान में उसकी कोई भूमिका नहीं है। इसलिए प्रश्न में नियामक और संचालक का अंतर ध्यान से देखना चाहिए: नियमन रिज़र्व बैंक करता है, संचालन एनपीसीआई करता है।
भारत में भुगतान बैंक को निम्नलिखित में से किस कार्य की अनुमति नहीं है?
- A.ग्राहकों से छोटी जमा स्वीकार करना
- B.ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना
- C.ग्राहकों को डेबिट कार्ड जारी करना
- D.अभिकर्ता के रूप में बीमा उत्पाद बेचना
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व्याख्या
सही उत्तर B, ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना है। भुगतान बैंकों को नचिकेत मोर समिति की सिफारिश पर जमा तथा भुगतान की पहुँच बढ़ाने के लिए लाइसेंस दिए गए, और रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देश उन्हें ऋण देने तथा क्रेडिट कार्ड जारी करने से स्पष्ट रूप से रोकते हैं; उनका धन सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य बैंकों की जमा में लगना चाहिए। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रति ग्राहक एक सीमा तक जमा लेना ही उनका मुख्य कार्य है। विकल्प C गलत है क्योंकि वे डेबिट तथा एटीएम कार्ड जारी कर सकते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि उन्हें अभिकर्ता के रूप में बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे सरल उत्पाद बेचने की अनुमति है। लघु वित्त बैंक दूसरी नई श्रेणी है और वे ऋण देते हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत शिशु श्रेणी में कितनी राशि तक के ऋण आते हैं?
- A.पच्चीस हजार रुपये
- B.पचास हजार रुपये
- C.एक लाख रुपये
- D.पाँच लाख रुपये
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पचास हजार रुपये है। गैर-कृषि सूक्ष्म उद्यमों को दिए जाने वाले मुद्रा ऋण तीन नामित श्रेणियों में बँटे हैं: शिशु पचास हजार रुपये तक, किशोर पचास हजार से अधिक और पाँच लाख तक, तथा तरुण पाँच लाख से अधिक और दस लाख तक, और पहले का ऋण चुका चुके ऋणियों के लिए बाद में ऊपर की श्रेणी जोड़ी गई। विकल्प A गलत है क्योंकि पच्चीस हजार मुद्रा की कोई सीमा नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि एक लाख किशोर श्रेणी के भीतर आता है और किसी श्रेणी की सीमा नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि पाँच लाख किशोर की ऊपरी और तरुण की निचली सीमा है, और परीक्षक इसी जोड़ी से भटकाते हैं। सभी मुद्रा ऋण बिना जमानत होते हैं।
भारत में आरटीजीएस से भेजी जा सकने वाली न्यूनतम राशि कितनी है?
- A.एक लाख रुपये
- B.दो लाख रुपये
- C.पाँच लाख रुपये
- D.कोई न्यूनतम सीमा नहीं
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व्याख्या
सही उत्तर B, दो लाख रुपये है। वास्तविक समय सकल निपटान बड़ी राशि के अंतरण के लिए बनाया गया है, जिसमें प्रत्येक लेनदेन रिज़र्व बैंक की पुस्तकों में अलग और तत्काल निपटाया जाता है, और ग्राहक लेनदेन की न्यूनतम राशि दो लाख रुपये है, जबकि ऊपरी सीमा नहीं है। विकल्प A गलत है क्योंकि एक लाख वह संख्या है जो अभ्यर्थी सबसे अधिक भूलवश याद रखते हैं और वह आरटीजीएस के किसी वर्तमान नियम में नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि पाँच लाख इस प्रणाली की कोई सीमा नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि न्यूनतम सीमा एनईएफटी में नहीं है, आरटीजीएस में है; एनईएफटी समूहों में निपटता है और किसी भी राशि के साधारण भुगतान के लिए प्रयुक्त होता है। तीसरी प्रणाली आईएमपीएस है।
भारत में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के केंद्र में रहने वाली जैम त्रयी किस मेल को कहती है?
- A.जन धन, आधार और मोबाइल
- B.जन धन, अटल पेंशन और मुद्रा
- C.जन सुरक्षा, आधार और सूक्ष्म बीमा
- D.जन धन, आयुष्मान और मनरेगा
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व्याख्या
सही उत्तर A, जन धन, आधार और मोबाइल है। यह शब्द उन तीन अंगों का वर्णन करता है जो मिलकर नकद अंतरण संभव बनाते हैं: धन पाने के लिए जन धन योजना में खुला बैंक खाता, लाभार्थी की पहचान तथा दोहरे नाम हटाने के लिए आधार संख्या, और वह मोबाइल फोन जिससे लाभार्थी को सूचना मिलती है और वह लेनदेन कर सकता है। विकल्प B गलत है क्योंकि अटल पेंशन योजना और मुद्रा जन धन खाते का उपयोग करती हैं, परंतु त्रयी का भाग नहीं हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि जन सुरक्षा बीमा और पेंशन योजनाओं का सामूहिक नाम है, जैम का कोई अक्षर नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना और मनरेगा ग्रामीण रोजगार विधि है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण में इन तीनों के मेल से भुगतान सीधे खाते में पहुँचता है, और परीक्षा में जैम का विस्तार पूछा ही जाता है।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना कितने का जीवन बीमा कवर देती है और किस आयु वर्ग को?
- A.एक लाख रुपये, आयु 18 से 50
- B.दो लाख रुपये, आयु 18 से 50
- C.दो लाख रुपये, आयु 18 से 70
- D.पाँच लाख रुपये, आयु 21 से 60
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, दो लाख रुपये, आयु 18 से 50 है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना किसी भी कारण से मृत्यु पर दो लाख रुपये का एक वर्षीय नवीकरणीय जीवन बीमा कवर देती है, जो अठारह से पचास वर्ष आयु के बचत बैंक खाताधारकों के लिए खुली है और प्रीमियम खाते से काटा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि कवर दो लाख है, एक लाख नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि अठारह से सत्तर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की आयु सीमा है, जो दुर्घटना मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता पर दो लाख और आंशिक दिव्यांगता पर एक लाख देती है; दोनों की आयु सीमाएँ बदल देना मानक जाल है। विकल्प D गलत है क्योंकि न यह राशि और न ये आयु जन सुरक्षा की किसी योजना से मेल खाती हैं।
अटल पेंशन योजना किस आयु वर्ग के अभिदाताओं के लिए खुली है?
- A.18 से 40 वर्ष
- B.18 से 50 वर्ष
- C.21 से 55 वर्ष
- D.25 से 60 वर्ष
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, 18 से 40 वर्ष है। 2015 में आरंभ और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित अटल पेंशन योजना में अठारह से चालीस वर्ष आयु के अभिदाता जुड़ सकते हैं, जिससे प्रत्येक अभिदाता साठ वर्ष पर पेंशन आरंभ होने से पहले कम से कम बीस वर्ष अंशदान करे। चुने गए अंशदान के अनुसार गारंटीशुदा पेंशन एक हजार से पाँच हजार रुपये मासिक तक होती है। विकल्प B गलत है क्योंकि अठारह से पचास जीवन ज्योति बीमा योजना की आयु सीमा है। विकल्प C गलत है क्योंकि इक्कीस इन योजनाओं में प्रवेश की आयु नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि पच्चीस से साठ की सीमा में अंशदान अवधि इतनी कम रह जाएगी कि गारंटी संभव न हो, और योजना में ऐसी सीमा नहीं है।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.2005
- B.2007
- C.2008
- D.2010
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2008 है। एनपीसीआई 2008 में खुदरा भुगतान के लिए लाभ-निरपेक्ष शीर्ष संगठन के रूप में निगमित हुआ, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक और भारतीय बैंक संघ ने भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के ढाँचे में प्रवर्तित किया। विकल्प A गलत है क्योंकि 2005 में रिज़र्व बैंक ने वित्तीय समावेशन के लिए बैंकों से बिना अतिरिक्त शर्तों वाले खाते खोलने को कहा था। विकल्प B गलत है क्योंकि 2007 भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम का वर्ष है, वह विधि जिसके अंतर्गत भुगतान प्रणालियाँ अधिकृत और नियंत्रित होती हैं, और परीक्षक जानबूझकर इसे एनपीसीआई के वर्ष के साथ रखते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2010 में एनपीसीआई ने आईएमपीएस आरंभ किया, फिर 2012 में रुपे और 2016 में यूपीआई। इसलिए एनपीसीआई 2008, अधिनियम 2007, आईएमपीएस 2010, रुपे 2012 और यूपीआई 2016 का क्रम एक साथ याद रखना चाहिए।
आधार सक्षम भुगतान प्रणाली ग्राहक को किस मेल से लेनदेन करने देती है?
- A.आधार संख्या और अंगुलिचिह्न
- B.डेबिट कार्ड और पिन
- C.चेक और पासबुक
- D.आभासी भुगतान पता और यूपीआई पिन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, आधार संख्या और अंगुलिचिह्न है। आधार सक्षम भुगतान प्रणाली ग्राहक को बैंकिंग संवाददाता के पास रखे सूक्ष्म एटीएम पर नकद निकालने, जमा करने, शेष देखने या धन अंतरित करने देती है, जिसमें वह बैंक का नाम, आधार संख्या और अंगुलिचिह्न जैसी बायोमीट्रिक पहचान देता है, इसलिए न कार्ड चाहिए न चेक। यही वह साधन है जो शाखा रहित गाँवों तक बैंकिंग पहुँचाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि कार्ड और पिन एटीएम अथवा बिक्री केंद्र के लेनदेन से जुड़े हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि चेक और पासबुक शाखा के साधन हैं और उस प्रणाली का उद्देश्य ही समाप्त कर देते हैं जो शाखा तक सहज पहुँच न रखने वालों के लिए बनी है। विकल्प D गलत है क्योंकि आभासी भुगतान पता और यूपीआई पिन यूपीआई का वर्णन करते हैं।
भारत में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक पहली बार किस वर्ष स्थापित किए गए?
- A.1969
- B.1975
- C.1980
- D.1982
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 1975 है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक एम नरसिम्हन की अध्यक्षता वाले कार्य समूह की सिफारिश पर 1975 से स्थापित हुए, जिनका उद्देश्य छोटे तथा सीमांत किसानों, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण दस्तकारों को ऋण देना था, और इसके बाद 1976 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम आया। प्रत्येक बैंक को संघ सरकार, संबंधित राज्य सरकार और एक व्यापारिक बैंक मिलकर प्रायोजित करते हैं, जो निर्धारित अनुपात में उसकी पूँजी रखते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 1969 में चौदह व्यापारिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ और अग्रणी बैंक योजना आरंभ हुई। विकल्प C गलत है क्योंकि 1980 में छह और बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि 1982 में नाबार्ड की स्थापना हुई। परीक्षा में 1969, 1975, 1980 और 1982 के चारों वर्ष एक साथ विकल्प बनते हैं, इसलिए राष्ट्रीयकरण, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और नाबार्ड के वर्ष अलग-अलग याद रखने चाहिए।
वित्तीय समावेशन के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा आरंभ किया गया बिना अतिरिक्त शर्तों वाला खाता अब किस नाम से जाना जाता है?
- A.मूल बचत बैंक जमा खाता
- B.आवर्ती जमा खाता
- C.चालू खाता
- D.सावधि जमा खाता
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, मूल बचत बैंक जमा खाता है। रिज़र्व बैंक ने 2005 में बैंकों से कहा कि वे शून्य अथवा बहुत कम न्यूनतम शेष वाला खाता दें, जिससे शुल्क के कारण निर्धन परिवार बैंकिंग से बाहर न रह जाएँ, और 2012 में इस उत्पाद का नाम मूल बचत बैंक जमा खाता रखा गया, जिसमें निःशुल्क डेबिट कार्ड तथा सीमित निःशुल्क निकासियाँ मिलती हैं। जन धन योजना में यही खाता खोला जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि आवर्ती जमा नियत मासिक किस्तों वाला बचत साधन है। विकल्प C गलत है क्योंकि चालू खाता व्यापार के लिए होता है और उसमें प्रायः अधिक शेष रखना पड़ता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सावधि जमा एक राशि को अवधि के लिए बाँध देती है और समावेशन खाता नहीं है। इस खाते में न्यूनतम शेष न रखने पर कोई शुल्क नहीं लगता, और यही बात इसे साधारण बचत खाते से अलग करती है, जिस पर परीक्षा में प्रश्न बनता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यूपीआई का पूरा नाम क्या है और इसे कौन चलाता है?
यूपीआई का पूरा नाम एकीकृत भुगतान इंटरफेस है, और इसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम चलाता है, सीधे रिज़र्व बैंक नहीं। यह 2016 में आरंभ हुआ, आईएमपीएस मंच पर काम करता है, और ग्राहक को एक ही मोबाइल ऐप से आभासी भुगतान पते तथा यूपीआई पिन के सहारे कई बैंक खातों से भुगतान करने देता है।
पीएमजेडीवाई खाताधारक को क्या मिलता है?
मूल बचत बैंक जमा खाता, जिसमें न्यूनतम शेष आवश्यक नहीं, दुर्घटना बीमा कवर सहित रुपे डेबिट कार्ड, और खाते के संतोषजनक संचालन पर ओवरड्राफ्ट सुविधा। यही खाता सब्सिडी, छात्रवृत्ति और पेंशन के प्रत्यक्ष लाभ अंतरण का माध्यम बनता है।
आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस में क्या अंतर है?
आरटीजीएस प्रत्येक लेनदेन को अलग और वास्तविक समय में निपटाता है तथा बड़ी राशि के लिए है, जिसकी न्यूनतम सीमा दो लाख रुपये है। एनईएफटी अंतरण समूहों में निपटाता है और इसमें न्यूनतम सीमा नहीं है, इसलिए यह साधारण भुगतान के लिए उपयुक्त है। आईएमपीएस एनपीसीआई की तत्काल मोबाइल तथा इंटरनेट अंतरण सेवा है। तीनों वर्ष के हर दिन उपलब्ध हैं।
भुगतान बैंक क्या नहीं कर सकता?
वह ऋण नहीं दे सकता। भुगतान बैंक प्रति ग्राहक एक सीमा तक जमा ले सकता है, डेबिट कार्ड जारी कर सकता है, भुगतान भेज और प्राप्त कर सकता है तथा अभिकर्ता के रूप में बीमा या म्यूचुअल फंड बेच सकता है, परंतु वह ऋण नहीं दे सकता और क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकता। इसके विपरीत लघु वित्त बैंक ऋण देते हैं, मुख्यतः प्राथमिकता क्षेत्र को छोटी राशियों में।
मुद्रा ऋण की तीन श्रेणियाँ कौन सी हैं?
शिशु, पचास हजार रुपये तक के ऋण के लिए; किशोर, पचास हजार से पाँच लाख तक; और तरुण, पाँच लाख से दस लाख तक। ये ऋण बिना जमानत होते हैं और बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के माध्यम से गैर-कृषि सूक्ष्म उद्यमों को मिलते हैं, और दोहराने वाले ऋणियों के लिए बाद में ऊपर की श्रेणी जोड़ी गई।
जैम त्रयी क्या है?
जन धन बैंक खाता, पहचान के लिए आधार संख्या और पहुँच तथा सूचना के लिए मोबाइल फोन का मेल। ये तीनों मिलकर सरकार को सीधे लाभार्थी के खाते में धन भेजने देते हैं, जिससे सब्सिडी भुगतान में रिसाव और बिचौलियों की भूमिका घटती है।
स्रोत
- वित्तीय समावेशन की राष्ट्रीय रणनीति और वित्तीय समावेशन सूचकांक — भारतीय रिज़र्व बैंक
- एकीकृत भुगतान इंटरफेस, उत्पाद विवरण और सहभागिता — भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
- प्रधानमंत्री जन धन योजना, योजना विवरण — वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय





