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GK नोट्सभारतीय अर्थव्यवस्थाअवसंरचना विकास और सार्वजनिक-निजी भागीदारी

अवसंरचना और पीपीपी: मॉडल, वीजीएफ और मास्टर प्लान

परीक्षा के लिए अवसंरचना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के पूरे नोट्स: बीओटी, एचएएम और टीओटी मॉडल, व्यवहार्यता अंतर निधि, पीपीपीएसी, एनआईपी, एनएमपी तथा पीएम गतिशक्ति।

लेखक · प्रकाशित · 6 मिनट

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अवसंरचना और पीपीपी: मॉडल, वीजीएफ और मास्टर प्लान — GK24 title card
अवसंरचना और पीपीपी: मॉडल, वीजीएफ और मास्टर प्लान — GK24 title card

सड़कें, रेल लाइनें, बंदरगाह, बिजली घर, पाइपलाइन और ब्रॉडबैंड केबल किसी भी अर्थव्यवस्था की धमनियां हैं, और यही सरकार की सबसे महंगी खरीद भी हैं। 1991 के सुधारों के बाद भारत ने बीच का रास्ता अपनाया: संपत्ति का स्वामित्व सरकार के पास रहता है, पर उसे बनाने और चलाने में निजी पूंजी, परियोजना प्रबंधन और संचालन कौशल अनुबंध के तहत लाया जाता है। यही व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी या पीपीपी है। परीक्षक इस अध्याय से तीन ही बातें पूछता है: मॉडलों के नाम, परियोजना को मंजूरी देने वाली संस्था, और वे निधियां तथा मास्टर प्लान जिनसे पैसा आता है। विषय समाचार में भी है, क्योंकि 6 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान बनाने के लिए एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण को मंजूरी दी।

अवसंरचना में क्या आता है

आर्थिक अवसंरचना सीधे उत्पादन की सेवा करती है। इसमें परिवहन (सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे और अंतर्देशीय जलमार्ग), ऊर्जा (उत्पादन, पारेषण और पाइपलाइन), संचार (दूरसंचार, ब्रॉडबैंड और डाक) तथा सिंचाई शामिल हैं। सामाजिक अवसंरचना लोगों की सेवा करती है और श्रम की गुणवत्ता बढ़ाती है: विद्यालय, अस्पताल, पेयजल, स्वच्छता और आवास। वित्त मंत्रालय का आर्थिक कार्य विभाग अवसंरचना उप-क्षेत्रों की सामंजस्यपूर्ण मास्टर सूची रखता है। इस सूची में आया क्षेत्र बैंकों से अवसंरचना ऋण ले सकता है, विदेश से आसान शर्तों पर उधार ले सकता है और अवसंरचना के लिए निर्धारित निधियां पा सकता है, इसलिए सूची में शामिल होना अपने आप में एक नीतिगत निर्णय है।

चार विशेषताएं अवसंरचना को विशेष प्रकार का निवेश बनाती हैं, और जो विद्यार्थी ये चार शब्द याद रखता है वह अवधारणात्मक प्रश्न हल कर लेता है। व्यय एकमुश्त होता है, क्योंकि पुल आधा नहीं बनाया जा सकता। गर्भावधि लंबी होती है, इसलिए आय आने से वर्षों पहले पूंजी फंस जाती है। लाभ बाह्यता वाले होते हैं, क्योंकि नई सड़क से वे व्यापारी भी कमाते हैं जो कुछ नहीं चुकाते। और कई सेवाएं प्राकृतिक एकाधिकार हैं, जहां एक ही नेटवर्क दो से सस्ता पड़ता है, इसलिए कीमत प्रतिस्पर्धा से नहीं, नियामक से तय होती है।

निजी क्षेत्र क्यों लाया गया

1991 तक अवसंरचना लगभग पूरी तरह राज्य बजट और योजना परिव्यय से बनती थी। राकेश मोहन की अध्यक्षता वाले अवसंरचना परियोजनाओं के वाणिज्यीकरण पर विशेषज्ञ समूह ने 1996 की रिपोर्ट में कहा कि देश की आवश्यकता और बजट की क्षमता के बीच की खाई व्यावसायिक पूंजी से ही भरी जा सकती है। दूरसंचार खोला गया, विद्युत अधिनियम 2003 ने उत्पादन को वितरण से अलग किया, और दिल्ली तथा मुंबई के हवाई अड्डे संयुक्त उद्यम कंपनियों को दिए गए। हर ऐसे अनुबंध में सरकारी प्राधिकरण ही स्वामी बना रहता है। निजी भागीदार तय रियायत अवधि के लिए परियोजना का डिजाइन, वित्तपोषण, निर्माण और संचालन करता है, टोल या प्राधिकरण के भुगतान से कमाता है, और अवधि के अंत में संपत्ति लौटा देता है।

परीक्षा में पूछे जाने वाले पीपीपी मॉडल

मॉडलकार्यप्रणालीयातायात जोखिम किसका
बीओटी (टोल)रियायतग्राही सड़क बनाता है और लागत उपयोगकर्ता टोल से वसूलता हैनिजी भागीदार
बीओटी (वार्षिकी)प्राधिकरण नियत अंतराल पर तय वार्षिकी देता है; निर्माता को टोल आय नहीं मिलतीसरकार
हाइब्रिड एन्युटी मॉडलनिर्माण के दौरान 40 प्रतिशत लागत सरकारी अनुदान के रूप में किश्तों में; शेष रियायतग्राही लगाता है और उसे ब्याज सहित वार्षिकी में वापस मिलता हैसाझा
डीबीएफओटीडिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण; राजमार्गों तथा हवाई अड्डों की पूर्ण सेवा रियायतनिजी भागीदार
टीओटीटोल-ऑपरेट-ट्रांसफर: पहले से चल रहे सरकारी राजमार्ग को गुच्छों में अग्रिम रियायत शुल्क पर नीलाम किया जाता हैनिजी भागीदार
ईपीसीइंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण: पूरा भुगतान सरकार करती है, इसलिए यह पीपीपी ही नहीं हैसरकार

दो शब्द और इसी के साथ आते हैं। मॉडल रियायत करार वह मानक अनुबंध है जो जोखिम का बंटवारा तय करता है, जिससे एक ही तरह की हर परियोजना समान शर्तों पर बोली में जाती है। स्विस चैलेंज पद्धति तब काम आती है जब कोई निजी पक्ष बिन मांगा प्रस्ताव भेजता है: प्राधिकरण उसे प्रकाशित कर दूसरों को बेहतर प्रस्ताव देने का न्योता देता है, और मूल प्रस्तावक को सर्वोत्तम प्रति-प्रस्ताव की बराबरी का अवसर मिलता है।

मूल्यांकन और मॉडलों के पीछे का पैसा

केंद्रीय क्षेत्र की पीपीपी परियोजना का मूल्यांकन सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति करती है, जिसका अध्यक्ष आर्थिक कार्य विभाग का सचिव होता है। जहां परियोजना देश के लिए अच्छी है पर अपनी लागत नहीं निकाल सकती, वहां व्यवहार्यता अंतर निधि योजना केंद्र से परियोजना लागत के 20 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान देती है, और प्रायोजक मंत्रालय या राज्य 20 प्रतिशत तक और जोड़ सकता है। 2006 में बनी भारतीय अवसंरचना वित्त कंपनी लिमिटेड दीर्घकालिक ऋण देती है और बैंक ऋणों का पुनर्वित्त करती है। राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण एवं विकास बैंक 2021 के संसदीय अधिनियम से बना विकास वित्तीय संस्थान है, जिसकी प्रदत्त पूंजी बीस हजार करोड़ रुपये और केंद्र से अनुदान पांच हजार करोड़ रुपये है। 2015 में स्थापित राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष निधियों का कोष है, जिसमें सरकार की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत है। सेबी द्वारा 2014 से नियंत्रित अवसंरचना निवेश न्यास साधारण निवेशकों को पूर्ण, आय देने वाली संपत्तियों में इकाइयां रखने देते हैं।

मास्टर प्लान और कार्यक्रम

  • 2019-20 के बजट में घोषित राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन ने 2019-20 से 2024-25 के पांच वर्षों के लिए लगभग एक सौ ग्यारह लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का अनुमान रखा, जिसमें केंद्र और राज्यों का हिस्सा करीब उनतालीस प्रतिशत प्रत्येक और शेष निजी क्षेत्र का माना गया।
  • राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन अगस्त 2021 में नीति आयोग ने जारी की, जिसका लक्ष्य राजमार्ग, पारेषण लाइन, रेलवे स्टेशन और गैस पाइपलाइन जैसी चालू केंद्रीय संपत्तियां पट्टे पर देकर लगभग छह लाख करोड़ रुपये जुटाना है। केवल ब्राउनफील्ड संपत्तियां पट्टे पर जाती हैं, स्वामित्व कभी नहीं बिकता।
  • 13 अक्टूबर 2021 को शुरू पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान एक जीआईएस मंच है, जो अवसंरचना मंत्रालयों की परियोजना परतें एक ही नक्शे पर रखता है, ताकि सड़क, पाइपलाइन और रेल लाइन साथ मिलकर नियोजित हों।
  • सितंबर 2022 की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति तेज दस्तावेजीकरण, एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस और बहुविध पार्कों के जरिए माल ढुलाई की लागत पर हमला करती है।
  • क्षेत्रीय कार्यक्रम सूची पूरी करते हैं: राजमार्गों के लिए 2017 की भारतमाला परियोजना, बंदरगाह आधारित विकास के लिए 2015 की सागरमाला, 2016 की नागर विमानन नीति के तहत उड़ान क्षेत्रीय संपर्क योजना, और 2006 में बनी निगम द्वारा निर्मित पूर्वी तथा पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे।

पीपीपी कहां लड़खड़ाई

शुरुआती कई सड़क और बिजली रियायतें उन यातायात अनुमानों पर बोली गईं जो कभी सच नहीं हुए, और घाटा उन बैंकों तक पहुंचा जिन्होंने ऋण दिया था। भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृतियों ने उन परियोजनाओं को विलंबित किया जिनके अनुबंध तुरंत कब्जा मान बैठे थे, और बार-बार पुनर्वार्ता ने बोली का अनुशासन कमजोर किया। विजय केलकर की अध्यक्षता में 2015 की पीपीपी मॉडल पर पुनर्विचार और पुनरुद्धार समिति ने कहा कि जोखिम उसी पक्ष पर डाला जाए जो उसे सबसे अच्छी तरह संभाल सके, हर क्षेत्र में स्वतंत्र नियामक और तेज विवाद निपटान तंत्र हो, और छोटी परियोजनाओं को पीपीपी के ढांचे में जबरन न डाला जाए। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल, जो बोझ प्राधिकरण और निर्माता के बीच बांटता है, उसी अनुभव से निकला व्यावहारिक उत्तर है।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न चार रूपों में आते हैं। पहला, मॉडल पहचान: किस मॉडल में यातायात जोखिम किसका है, और दिए गए विकल्पों में कौन पीपीपी नहीं है, जहां उत्तर ईपीसी होता है। दूसरा, अंक: एचएएम में सरकारी हिस्सा 40 प्रतिशत और केंद्रीय व्यवहार्यता अंतर निधि 20 प्रतिशत, ये दो आंकड़े विकल्पों में सबसे ज्यादा बदले जाते हैं। तीसरा, संस्थाएं: पीपीपीएसी और उसका अध्यक्ष, 2006 की आईआईएफसीएल, 2021 का नैबफिड और 2015 का एनआईआईएफ। चौथा, योजना मिलान: एनआईपी के साथ आर्थिक कार्य विभाग, एनएमपी के साथ नीति आयोग, गतिशक्ति के साथ जीआईएस मास्टर प्लान, सागरमाला के साथ बंदरगाह और भारतमाला के साथ राजमार्ग। आम जाल राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन को नीति आयोग के बजाय वित्त मंत्रालय से जोड़ देना है।

महत्वपूर्ण तथ्य

व्यवहार्यता अंतर निधि, केंद्रीय अनुदानपरियोजना लागत का 20 प्रतिशत तक, प्रायोजक प्राधिकरण से 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल का बंटवारानिर्माण के दौरान 40 प्रतिशत सरकारी अनुदान, 60 प्रतिशत रियायतग्राही का
पीपीपीएसी अध्यक्षसचिव, आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय
आईआईएफसीएलभारतीय अवसंरचना वित्त कंपनी लिमिटेड, 2006 में दीर्घकालिक अवसंरचना ऋण के लिए स्थापित
नैबफिड2021 के संसदीय अधिनियम से बना विकास वित्तीय संस्थान; प्रदत्त पूंजी 20,000 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष2015 में निधियों के कोष के रूप में स्थापित; सरकार की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत
राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन2019-20 से 2024-25 के लिए लगभग 111 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का अनुमान
राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइननीति आयोग, अगस्त 2021; चालू केंद्रीय संपत्तियों के पट्टे से लगभग 6 लाख करोड़ रुपये
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान13 अक्टूबर 2021 को जीआईएस आधारित बहुविध नियोजन मंच के रूप में शुरू
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीतिमाल ढुलाई की लागत और समय घटाने के लिए सितंबर 2022 में शुरू
केलकर समितिपीपीपी मॉडल पर पुनर्विचार और पुनरुद्धार के लिए 2015 की विजय केलकर समिति
क्षेत्रीय कार्यक्रमराजमार्गों के लिए भारतमाला 2017, बंदरगाहों के लिए सागरमाला 2015, क्षेत्रीय हवाई संपर्क के लिए उड़ान

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC Civil Services General Studies Offमध्यम

नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक अभिकथन (A) और दूसरा कारण (R) के रूप में। अभिकथन (A): सरकार ने राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) 2020-30 की अवधि के लिए शुरू की है। कारण (R): एनआईपी का उद्देश्य सभी को अवसंरचना तक समान पहुंच देना है। नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए।

  1. A.(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. B.(A) और (R) दोनों सही हैं पर (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. C.(A) सही है पर (R) गलत है
  4. D.(A) गलत है पर (R) सही है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. (A) गलत है पर (R) सही है

व्याख्या

सही उत्तर D, (A) गलत है पर (R) सही है है। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन की घोषणा 2019-20 के बजट भाषण में हुई और आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाले कार्यबल ने इसे 2019-20 से 2024-25 के पांच वर्षों के लिए तैयार किया, जिसमें लगभग 111 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का अनुमान था। इसलिए अभिकथन में दी अवधि 2020-30 गलत है, जिससे A और B दोनों कट जाते हैं, क्योंकि वे अभिकथन को सही मानते हैं। कारण एनआईपी का उद्देश्य ठीक बताता है: रिपोर्ट का लक्ष्य हर नागरिक को विश्वस्तरीय अवसंरचना तक समान पहुंच देना है, और यह उद्देश्य वास्तविक है। C गलत है क्योंकि वह स्थिति उलट देता है, गलत अभिकथन को सही और सही कारण को गलत कहता है। ऐसे युग्मों में पहले अभिकथन की जांच करें, क्योंकि गलत अभिकथन उत्तर तुरंत तय कर देता है।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में प्रयुक्त हाइब्रिड एन्युटी मॉडल में निर्माण के दौरान सरकार परियोजना लागत का कितना हिस्सा अनुदान के रूप में देती है?

  1. A.20 प्रतिशत
  2. B.40 प्रतिशत
  3. C.60 प्रतिशत
  4. D.100 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 40 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर B, 40 प्रतिशत है। टोल और वार्षिकी दोनों मॉडल अड़चन में आने के बाद सड़क निर्माण को पुनर्जीवित करने के लिए हाइब्रिड एन्युटी मॉडल अपनाया गया। काम चलने के दौरान प्राधिकरण बोली परियोजना लागत का चालीस प्रतिशत निर्माण अनुदान के रूप में किश्तों में जारी करता है, और शेष साठ प्रतिशत रियायतग्राही अपनी पूंजी तथा ऋणदाताओं से जुटाता है। वही साठ प्रतिशत पूरा होने के बाद बैंक दर से जुड़े ब्याज के साथ वार्षिकियों की श्रृंखला में वापस मिलता है, और टोल प्राधिकरण स्वयं वसूलता है। A यानी बीस प्रतिशत केंद्रीय व्यवहार्यता अंतर निधि की सीमा है, एचएएम अनुदान नहीं। C यानी साठ प्रतिशत रियायतग्राही का हिस्सा है, इसलिए यह विकल्प बंटवारा उलट देता है। D होने पर यह भागीदारी नहीं, ईपीसी अनुबंध बन जाता।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

व्यवहार्यता अंतर निधि योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार का पूंजी अनुदान सामान्यतः कुल परियोजना लागत के कितने हिस्से तक सीमित रहता है?

  1. A.10 प्रतिशत
  2. B.20 प्रतिशत
  3. C.40 प्रतिशत
  4. D.50 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 20 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर B, 20 प्रतिशत है। व्यवहार्यता अंतर निधि उस परियोजना के लिए एकबारगी या विलंबित पूंजी अनुदान है जो आर्थिक रूप से आवश्यक पर व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य हो, जैसे ग्रामीण सड़क या जलापूर्ति लाइन, जिसके उपयोग शुल्क से पूंजी कभी नहीं निकल सकती। आर्थिक कार्य विभाग परियोजना लागत का बीस प्रतिशत तक देता है, और प्रायोजक मंत्रालय, राज्य सरकार या सांविधिक प्राधिकरण बीस प्रतिशत और दे सकता है, इसलिए कुल सहायता चालीस प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसी कारण C आकर्षक भ्रामक विकल्प है: चालीस प्रतिशत संयुक्त सीमा है, अकेले केंद्र का हिस्सा नहीं। A योजना को कम आंकता है और D इसमें उपलब्ध ही नहीं है। इन अंकों को बीस और बीस की जोड़ी के रूप में याद रखें। परीक्षा में यही जोड़ी बार-बार बदली जाती है, इसलिए दोनों आंकड़े अलग-अलग याद रखें।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

केंद्रीय क्षेत्र की सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं का मूल्यांकन कौन निकाय करता है, जिसका अध्यक्ष आर्थिक कार्य विभाग का सचिव होता है?

  1. A.सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति
  2. B.आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति
  3. C.नीति आयोग का शासी परिषद
  4. D.भारत का वित्त आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति

व्याख्या

सही उत्तर A, सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति है, जिसे पीपीपीएसी लिखा जाता है। यह स्थायी अंतर-मंत्रालयी समिति केंद्रीय क्षेत्र के पीपीपी प्रस्ताव की रियायत संधि, जोखिम बंटवारे और वित्तीय ढांचे की जांच मंजूरी से पहले करती है, और इसका अध्यक्ष आर्थिक कार्य विभाग का सचिव होता है, जिसमें व्यय, विधि कार्य, नीति आयोग तथा प्रायोजक मंत्रालय के सचिव सदस्य होते हैं। B यानी आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बड़ी परियोजनाओं पर अंतिम राजनीतिक निर्णय लेती है, तकनीकी मूल्यांकन नहीं करती। C मुख्यमंत्रियों का वह निकाय है जो नीति आयोग का मार्गदर्शन करता है और परियोजना मंजूरी से उसका संबंध नहीं है। D अनुच्छेद 280 के अंतर्गत सांविधिक निकाय है जो संघ और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है। याद रखें कि तकनीकी मूल्यांकन पीपीपीएसी करती है और अंतिम मंजूरी मंत्रिमंडलीय समिति देती है।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) मॉडल में निजी संचालक को वास्तव में क्या सौंपा जाता है?

  1. A.निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
  2. B.पहले से टोल वसूल रहा चालू राष्ट्रीय राजमार्ग खंड
  3. C.लॉजिस्टिक्स पार्क बनाने के लिए भूमि
  4. D.राज्य सरकार के स्वामित्व वाली रेल लाइन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पहले से टोल वसूल रहा चालू राष्ट्रीय राजमार्ग खंड

व्याख्या

सही उत्तर B, पहले से टोल वसूल रहा चालू राष्ट्रीय राजमार्ग खंड है। टीओटी में प्राधिकरण उन पूर्ण राजमार्ग खंडों को गुच्छों में जोड़ता है जिनका यातायात रिकॉर्ड सिद्ध है, और एक अग्रिम भुगतान के बदले लंबी रियायत अवधि, आमतौर पर तीस वर्ष, के लिए टोल वसूली का अधिकार नीलाम करता है। इस तरह मिला धन नई सड़कें बनाने में लगता है, इसलिए टीओटी निर्माण मॉडल नहीं, मुद्रीकरण का साधन है, और अवधि के अंत में संपत्ति प्राधिकरण को लौट आती है। A बीओटी या एचएएम जैसी ग्रीनफील्ड रियायत का वर्णन है, जहां सड़क बननी बाकी है और यातायात केवल अनुमान है। C भूमि पट्टा है, टोल रियायत नहीं। D योजना के बाहर है, जो केंद्रीय प्राधिकरण के राष्ट्रीय राजमार्गों को कवर करती है। इसलिए टीओटी को मुद्रीकरण के खंड में रखकर याद करें, निर्माण मॉडलों के साथ नहीं।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

निम्नलिखित में कौन सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल नहीं है?

  1. A.बीओटी (वार्षिकी)
  2. B.हाइब्रिड एन्युटी मॉडल
  3. C.इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण
  4. D.डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण

व्याख्या

सही उत्तर C, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण है। ईपीसी अनुबंध में परियोजना का स्वामित्व सरकार का होता है, वह अपने बजट से उसका भुगतान करती है और केवल निर्माण सेवा खरीदती है; ठेकेदार को किए गए काम का पैसा मिलता है, उस पर संचालन की जिम्मेदारी नहीं रहती और वह आय जोखिम नहीं उठाता, इसलिए भागीदारी का कोई लक्षण मौजूद नहीं होता। A यानी वार्षिकी आधारित बीओटी वह भागीदारी है जिसमें निजी भागीदार अपनी पूंजी से निर्माण करता है और उसे तय किश्तों में भुगतान मिलता है। B यानी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल चालीस प्रतिशत निर्माण अनुदान और शेष निजी वित्त को मिलाता है। D यानी डीबीएफओटी रियायत का पूर्णतम रूप है। परीक्षक इस प्रश्न से यही विचार जांचता है कि निजी वित्त और संचालन मिलकर पीपीपी बनाते हैं।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

चालू केंद्रीय संपत्तियों को निजी संचालकों को पट्टे पर देने की सूची वाली राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन किस संगठन ने जारी की?

  1. A.भारतीय रिजर्व बैंक
  2. B.नीति आयोग
  3. C.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
  4. D.सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नीति आयोग

व्याख्या

सही उत्तर B, नीति आयोग है। राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन अगस्त 2021 में दो खंडों में जारी हुई, जिसका दूसरा खंड मंत्रालयवार संपत्तियां सूचीबद्ध करता है, और चार वर्षों में सड़क, विद्युत पारेषण, रेलवे, पाइपलाइन, गोदाम, स्टेडियम तथा हवाई अड्डों से लगभग छह लाख करोड़ रुपये की कुल मुद्रीकरण क्षमता आंकी गई। मुद्रीकरण का अर्थ पूर्ण संपत्ति के संचालन अधिकार को एक अवधि के लिए पट्टे पर देना है; स्वामित्व सरकार के पास रहता है और अंत में संपत्ति लौट आती है। A यानी रिजर्व बैंक मौद्रिक प्राधिकरण है और इसमें उसकी भूमिका नहीं है। C प्रतिभूति बाजार का नियामक है और इनविट सूचीबद्ध होने पर ही जुड़ता है। D उन मंत्रालयों में एक है जिनकी संपत्तियां पाइपलाइन में हैं, इसे बनाने वाला निकाय नहीं। इसलिए राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन को सदैव नीति आयोग के साथ जोड़कर याद रखें।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

अक्टूबर 2021 में शुरू पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का सबसे सही वर्णन क्या है?

  1. A.जीआईएस आधारित डिजिटल मंच जो अवसंरचना मंत्रालयों की परियोजना परतें एक नक्शे पर लाता है
  2. B.राज्य सड़क निगमों के लिए रियायती ऋण खिड़की
  3. C.राष्ट्रीय राजमार्गों पर ढोए गए माल पर लगाया उपकर
  4. D.दिल्ली और मुंबई के बीच मालगाड़ियों का समर्पित गलियारा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जीआईएस आधारित डिजिटल मंच जो अवसंरचना मंत्रालयों की परियोजना परतें एक नक्शे पर लाता है

व्याख्या

सही उत्तर A, जीआईएस आधारित डिजिटल मंच जो अवसंरचना मंत्रालयों की परियोजना परतें एक नक्शे पर लाता है है। 13 अक्टूबर 2021 को शुरू पीएम गतिशक्ति उस पुरानी शिकायत का संस्थागत उत्तर है कि सड़क बनने के तुरंत बाद खोद दी जाती है, क्योंकि पाइपलाइन या केबल अलग से नियोजित थी। हर अवसंरचना मंत्रालय अपनी मौजूदा और प्रस्तावित संपत्तियां साझा भौगोलिक सूचना प्रणाली पर रखता है, जिससे काम शुरू होने से पहले संरेखण, उपयोगिता पारण और स्वीकृतियां एक साथ दिखती हैं, और आर्थिक क्षेत्रों तक बहुविध संपर्क एक नेटवर्क के रूप में नियोजित होता है। B गलत है क्योंकि इस योजना में कोई ऋण खिड़की नहीं है। C कल्पित है, ऐसा कोई उपकर इसके साथ नहीं लगता। D पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे का वर्णन है, जो अलग रेल परियोजना है।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण एवं विकास बैंक (नैबफिड) किस वर्ष पारित संसदीय अधिनियम के अंतर्गत स्थापित हुआ?

  1. A.2018
  2. B.2019
  3. C.2021
  4. D.2023
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2021

व्याख्या

सही उत्तर C, 2021 है। अवसंरचना को बीस वर्ष या उससे अधिक के ऋण चाहिए, जबकि व्यावसायिक बैंक कुछ वर्षों के लिए जमा लेता है, और दोनों के इस बेमेल ने पुराने विकास वित्त संस्थानों के बैंक बन जाने के बाद अवसंरचना ऋण को अपंग कर दिया था। इसलिए संसद ने 2021 में राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण एवं विकास बैंक अधिनियम पारित किया और नैबफिड को विकास वित्तीय संस्थान के रूप में खड़ा किया, जिसकी प्रदत्त पूंजी बीस हजार करोड़ रुपये तथा केंद्र से अनुदान पांच हजार करोड़ रुपये है, और जिसका काम दीर्घकालिक ऋण देना तथा अवसंरचना के लिए बांड और डेरिवेटिव बाजार गहरा करना है। A और B अन्य सुधारों के वर्ष हैं और केवल निकट भ्रम के रूप में दिए गए हैं, D अधिनियम के बाद का वर्ष है।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

अवसंरचना के सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर पुनर्विचार और पुनरुद्धार की रिपोर्ट 2015 में किस समिति ने दी?

  1. A.विजय केलकर की अध्यक्षता वाली समिति
  2. B.सी. रंगराजन की अध्यक्षता वाली समिति
  3. C.बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति
  4. D.एम. नरसिंहम की अध्यक्षता वाली समिति
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. विजय केलकर की अध्यक्षता वाली समिति

व्याख्या

सही उत्तर A, विजय केलकर की अध्यक्षता वाली समिति है। एक दशक में रुकी सड़क और बिजली रियायतों के खराब ऋण बन जाने के बाद वित्त मंत्रालय ने यह समिति बनाई, और केलकर समिति ने 2015 में कहा कि जोखिम उस पक्ष पर नहीं डाला गया जो उसे सबसे अच्छी तरह संभाल सके, बल्कि जो स्वीकार कर ले उस पर थोप दिया गया। उसने स्वतंत्र क्षेत्रीय नियामकों, वर्षों के मुकदमों के बजाय विशेषीकृत विवाद निपटान तंत्र, बोली से पहले परियोजनाओं की बेहतर तैयारी, और छोटे कामों में पीपीपी के प्रयोग को बंद करने की मांग की। B ने गरीबी आकलन तथा बारहवीं योजना के दृष्टिकोण पर समितियों का नेतृत्व किया। C ने रिजर्व बैंक की आर्थिक पूंजी रूपरेखा पर समूह की अध्यक्षता की। D 1991 और 1998 की दो बैंकिंग सुधार समितियों के लिए याद किए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईपीसी और पीपीपी में क्या अंतर है?

ईपीसी अनुबंध में पूरी लागत सरकार देती है और ठेकेदार केवल इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण करता है; वह न पूंजी लगाता है, न संचालन जोखिम उठाता है। पीपीपी में निजी भागीदार परियोजना का वित्तपोषण भी करता है, पंद्रह से तीस वर्ष की रियायत अवधि तक उसे चलाता है, और टोल या वार्षिकी से कमाता है। इसीलिए परीक्षा के विकल्पों में ईपीसी वही मद होती है जो पीपीपी मॉडल नहीं है।

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल क्या है?

यह सड़क मॉडल दो पुराने मॉडलों का मिश्रण है। निर्माण चलते रहने के दौरान प्राधिकरण परियोजना लागत का चालीस प्रतिशत किश्तों में अनुदान के रूप में देता है, और शेष साठ प्रतिशत रियायतग्राही जुटाता है। सड़क खुलने के बाद प्राधिकरण वही साठ प्रतिशत ब्याज सहित वार्षिकी में लौटाता है और टोल अपने पास रखता है। यातायात जोखिम सरकार पर और निर्माण जोखिम निर्माता पर रहता है।

भारत के पीपीपी मॉडल की समीक्षा किस समिति ने की?

अवसंरचना के सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल पर पुनर्विचार और पुनरुद्धार समिति, जिसके अध्यक्ष विजय केलकर थे, ने 2015 में अपनी रिपोर्ट दी। उसने कहा कि हर जोखिम उसी पक्ष को दिया जाए जो उसे सबसे अच्छी तरह उठा सके, हर क्षेत्र के लिए स्वतंत्र नियामक बने, विवाद लंबे मुकदमों के बजाय तेजी से निपटें, और जहां लेन-देन लागत लाभ से अधिक हो वहां छोटी परियोजनाओं में पीपीपी न अपनाई जाए।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन क्या करती है?

नीति आयोग ने अगस्त 2021 में इसे जारी किया। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग, विद्युत पारेषण लाइन, रेलवे स्टेशन, गैस पाइपलाइन और स्टेडियम जैसी चालू केंद्रीय संपत्तियां सूचीबद्ध हैं, जिनका संचालन अधिकार एक अवधि के लिए निजी संचालकों को पट्टे पर देकर नए निर्माण के लिए लगभग छह लाख करोड़ रुपये जुटाए जाने हैं। केवल पहले से आय दे रही ब्राउनफील्ड संपत्तियां दी जाती हैं और स्वामित्व हस्तांतरित नहीं होता।

स्रोत

  • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर कार्यबल की रिपोर्ट, खंड एक — आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय
  • राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन, खंड एक: मुद्रीकरण गाइडबुक — नीति आयोग
  • अवसंरचना के पीपीपी मॉडल पर पुनर्विचार और पुनरुद्धार समिति की रिपोर्ट — वित्त मंत्रालय
  • भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास, कक्षा ग्यारह, अवसंरचना अध्याय — एनसीईआरटी
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