मुद्रा बाज़ार और वित्तीय साधन: ट्रेजरी बिल, सीपी, सीडी
भारत के मुद्रा बाज़ार पर परीक्षा नोट्स: ट्रेजरी बिल, मांग मुद्रा, वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाणपत्र, रेपो, मुद्रा आपूर्ति के माप एम1 से एम4 तथा रिज़र्व बैंक की भूमिका।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

किसी देश के वित्तीय बाज़ार के दो भाग होते हैं। मुद्रा बाज़ार में एक वर्ष तक की अल्प अवधि वाले कोषों का लेन-देन होता है, और पूंजी बाज़ार में अंश, ऋणपत्र तथा सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से दीर्घकालिक कोष जुटाए जाते हैं। मुद्रा बाज़ार इसलिए आवश्यक है कि सरकार, बैंक और कंपनियों की प्राप्तियों तथा भुगतानों के बीच कुछ दिन या कुछ मास का अंतर बना रहता है। भारत में मुद्रा बाज़ार का नियमन भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत रिज़र्व बैंक करता है, जबकि पूंजी बाज़ार का नियमन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड करता है। इस अध्याय से प्रश्न प्रत्येक बैंकिंग परीक्षा में तथा एसएससी और रेलवे के अर्थव्यवस्था खंड में आते हैं, और लगभग सदैव प्रत्येक साधन की अवधि तथा निर्गमकर्ता पर।
मुद्रा बाज़ार की विशेषताएँ
- इसमें एक वर्ष तक की अवधि के कोष होते हैं, अतः इसके साधन मुद्रा के निकट विकल्प माने जाते हैं।
- इसका कोई नियत भौगोलिक स्थल नहीं होता; सौदे दूरभाष तथा नेगोशिएटेड डीलिंग सिस्टम जैसे इलेक्ट्रॉनिक मंचों पर होते हैं।
- इसके साधन अत्यधिक तरल होते हैं और उनमें चूक का जोखिम कम रहता है, इसलिए प्रतिफल पूंजी बाज़ार से कम होता है।
- इसके सहभागी छोटे बचतकर्ता नहीं, बल्कि संस्थाएँ होती हैं: रिज़र्व बैंक, वाणिज्यिक बैंक, प्राथमिक व्यापारी, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ, बड़ी कंपनियाँ तथा सरकार।
- यही वह बाज़ार है जिसके माध्यम से रिज़र्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति संचारित करता है, क्योंकि नीतिगत दर में परिवर्तन सबसे पहले यहीं की अल्पकालिक दरों को बदलता है।
मुद्रा बाज़ार के प्रमुख साधन
| साधन | निर्गमकर्ता | अवधि | स्मरणीय बिंदु |
|---|---|---|---|
| ट्रेजरी बिल | भारत सरकार की ओर से रिज़र्व बैंक | 91, 182 और 364 दिन | शून्य कूपन: बट्टे पर बेचे जाते हैं और अंकित मूल्य पर शोधित होते हैं |
| नकदी प्रबंध बिल | भारत सरकार की ओर से रिज़र्व बैंक | 91 दिन से कम | सरकार की अस्थायी नकदी असंगति के लिए 2010 में आरंभ |
| मांग मुद्रा | बैंक तथा प्राथमिक व्यापारी | एक दिन | इस पर की दर मांग मुद्रा दर है, जो तंत्र की सर्वाधिक संवेदनशील दर है |
| सूचना मुद्रा | बैंक तथा प्राथमिक व्यापारी | 2 से 14 दिन | अल्प सूचना देकर वापसी की शर्त पर उधार |
| अवधि मुद्रा | बैंक तथा प्राथमिक व्यापारी | 15 दिन से एक वर्ष | अंतर-बैंक अप्रतिभूत जमा |
| वाणिज्यिक पत्र | कंपनियाँ, प्राथमिक व्यापारी तथा वित्तीय संस्थाएँ | 7 दिन से एक वर्ष | अप्रतिभूत वचन पत्र, भारत में 1990 में आरंभ |
| जमा प्रमाणपत्र | अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक तथा चुनिंदा वित्तीय संस्थाएँ | बैंकों के लिए 7 दिन से एक वर्ष | जमा की परक्राम्य रसीद, भारत में 1989 में आरंभ |
| वाणिज्यिक या व्यापारिक बिल | विक्रेता द्वारा क्रेता पर लिखित, बैंक द्वारा स्वीकृत | सामान्यतः 30 से 90 दिन | परिपक्वता से पहले बैंक में बट्टे पर भुनाया जा सकता है |
| रेपो और प्रतिवर्ती रेपो | रिज़र्व बैंक तथा बैंक | प्रायः एक दिन | पुनः क्रय के अनुबंध के साथ प्रतिभूतियों की बिक्री |
ट्रेजरी बिल
ट्रेजरी बिल सरकार के अल्पकालिक ऋण का साधन है। ये तीन अवधियों में, अर्थात 91, 182 तथा 364 दिन के लिए, रिज़र्व बैंक द्वारा आयोजित नीलामी से जारी होते हैं, और इनकी न्यूनतम राशि पच्चीस हज़ार रुपये तथा उसके गुणक में होती है। ट्रेजरी बिल पर कोई ब्याज कूपन नहीं होता; वह अंकित मूल्य से कम पर बेचा जाता है और अंकित मूल्य पर चुकाया जाता है, और यही बट्टा निवेशक की आय है। ऋणी सरकार होने के कारण ट्रेजरी बिल जोखिम-रहित माना जाता है और उसका प्रतिफल शेष सभी अल्पकालिक दरों का मानक बनता है। 2010 में आरंभ किए गए नकदी प्रबंध बिल इसी प्रकार कार्य करते हैं, परंतु 91 दिन से कम अवधि के लिए।
वाणिज्यिक पत्र और जमा प्रमाणपत्र
वाणिज्यिक पत्र भारत में 1990 में आरंभ किया गया, जिससे उच्च श्रेणी की कंपनियाँ बैंक से उधार लेने के स्थान पर सीधे बाज़ार से कार्यशील पूंजी जुटा सकें। यह अप्रतिभूत वचन पत्र है, जो अंकित मूल्य पर बट्टे के साथ सात दिन से एक वर्ष की अवधि के लिए, पाँच लाख रुपये तथा उसके गुणक की न्यूनतम राशि में जारी होता है, और निर्गमकर्ता को रिज़र्व बैंक द्वारा नियत निवल मूल्य तथा साख निर्धारण की शर्तें पूरी करनी होती हैं। जमा प्रमाणपत्र, जो एक वर्ष पूर्व 1989 में आरंभ हुआ, इसी विचार का बैंकिंग पक्ष है: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक द्वारा बड़ी जमा पर जारी परक्राम्य और हस्तांतरणीय रसीद, जिसकी अवधि सात दिन से एक वर्ष होती है और जिसे धारक परिपक्वता से पहले बाज़ार में बेच सकता है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा स्थानीय क्षेत्र बैंक जमा प्रमाणपत्र जारी नहीं कर सकते।
मुद्रा आपूर्ति के माप
रिज़र्व बैंक मुद्रा आपूर्ति के चार वैकल्पिक माप प्रकाशित करता है, और परीक्षक उनकी संरचना सीधे पूछते हैं। एम1, जिसे संकीर्ण मुद्रा कहते हैं, जनता के पास की करेंसी, बैंकों की मांग जमा तथा रिज़र्व बैंक के पास की अन्य जमाओं का योग है। एम2 एम1 में डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा जोड़कर बनता है। एम3, जिसे व्यापक मुद्रा कहते हैं और जिस पर सर्वाधिक ध्यान रहता है, एम1 में वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा जोड़कर बनता है। एम4 एम3 में डाकघर बचत संगठनों की कुल जमाएँ, राष्ट्रीय बचत पत्र को छोड़कर, जोड़ने पर बनता है। अतः तरलता का क्रम एम1, एम2, एम3, एम4 है, जबकि आकार का क्रम इसके विपरीत।
रेपो, नीतिगत गलियारा और रिज़र्व बैंक के साधन
पुनर्खरीद अनुबंध अर्थात रेपो में बैंक सरकारी प्रतिभूतियाँ रिज़र्व बैंक को बेचता है और एक दिन या कुछ दिन बाद उन्हें कुछ अधिक मूल्य पर पुनः खरीदने का वचन देता है; यह अंतर ही ब्याज है, और रेपो दर देश की नीतिगत दर है। प्रतिवर्ती रेपो इसका विपरीत संचालन है, जिससे रिज़र्व बैंक बैंकों से अतिरिक्त कोष अवशोषित करता है। ये संचालन 2000 में आरंभ तरलता समायोजन सुविधा तथा 2011 में आरंभ सीमांत स्थायी सुविधा के अंतर्गत होते हैं, जिसमें बैंक अपनी सांविधिक तरलता अनुपात की प्रतिभूतियों पर एक दिन के लिए उधार ले सकते हैं। भारतीय समाशोधन निगम के माध्यम से संपार्श्विक उधारी, जो पहले सीबीएलओ से होती थी, अब त्रिपक्षीय रेपो अर्थात ट्रेप्स से होती है। 1988 में स्थापित भारतीय बट्टा एवं वित्त गृह मुद्रा बाज़ार को गहराई देने के लिए बनाई गई पहली संस्था थी।
मुद्रा बाज़ार और पूंजी बाज़ार की तुलना
| आधार | मुद्रा बाज़ार | पूंजी बाज़ार |
|---|---|---|
| अवधि | एक वर्ष तक | एक वर्ष से अधिक, अंश सदैव के लिए |
| साधन | ट्रेजरी बिल, मांग मुद्रा, वाणिज्यिक पत्र, जमा प्रमाणपत्र | अंश, ऋणपत्र, सरकारी दिनांकित प्रतिभूतियाँ |
| नियामक | भारतीय रिज़र्व बैंक | भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड |
| उद्देश्य | कार्यशील पूंजी और तरलता प्रबंध | स्थिर पूंजी और दीर्घकालिक निवेश |
| जोखिम और प्रतिफल | कम जोखिम, कम प्रतिफल | अधिक जोखिम, अधिक प्रतिफल |
मुद्रा बाज़ार का महत्व
गहरा मुद्रा बाज़ार सरकार को कुछ सप्ताह के लिए सस्ता ऋण दिलाता है, बैंक को दीर्घकालिक संपत्ति बेचे बिना एक रात में आरक्षित आवश्यकता पूरी करने देता है, और कंपनी को अपने ग्राहकों से भुगतान मिलने से पहले कच्चा माल खरीदने देता है। इससे मौद्रिक नीति भी प्रभावी बनती है: नीतिगत दर बदलते ही सबसे पहले मांग मुद्रा दर और ट्रेजरी बिल का प्रतिफल बदलते हैं, और उसके बाद बैंकों की ऋण दरें। परीक्षा के लिए प्रत्येक साधन का निर्गमकर्ता और अवधि, जमा प्रमाणपत्र के लिए 1989 तथा वाणिज्यिक पत्र के लिए 1990, ट्रेजरी बिल की तीन अवधियाँ और एम1 तथा एम3 की संरचना स्मरण रखें।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न लगभग सदैव साधन के निर्गमकर्ता और अवधि पर आते हैं। पूछा जाता है: ट्रेजरी बिल कौन जारी करता है (भारत सरकार की ओर से रिज़र्व बैंक), उनकी अवधियाँ (91, 182 और 364 दिन), वाणिज्यिक पत्र किस वर्ष आरंभ हुआ (1990) और जमा प्रमाणपत्र किस वर्ष (1989), मांग मुद्रा की अवधि (एक दिन) तथा सूचना मुद्रा की अवधि (2 से 14 दिन)। बैंकिंग और राज्य परीक्षाओं के कथन-आधारित प्रश्न सही तथ्य के साथ गलत निर्गमकर्ता जोड़ देते हैं, जैसे यह कि वाणिज्यिक पत्र रिज़र्व बैंक जारी करता है, जो असत्य है। एम1 से एम4 की संरचना सीधे पूछी जाती है और सामान्य जाल यह है कि एम1 में डाकघर बचत जमा जोड़कर उसे एम3 बता दिया जाए, जबकि एम3 एम1 में बैंकों की निवल सावधि जमा जोड़ने पर बनता है। एक और प्रचलित प्रश्न यह है कि कौन-सा साधन मुद्रा बाज़ार का नहीं है, जिसमें उत्तर अंश या ऋणपत्र होता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मुद्रा बाज़ार की अवधि | एक वर्ष तक |
|---|---|
| मुद्रा बाज़ार का नियामक | भारतीय रिज़र्व बैंक, आरबीआई अधिनियम 1934 के अंतर्गत |
| ट्रेजरी बिल की अवधियाँ | 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन |
| ट्रेजरी बिल की न्यूनतम राशि | 25,000 रुपये तथा 25,000 के गुणक में |
| नकदी प्रबंध बिल | 2010 में आरंभ; अवधि 91 दिन से कम |
| मांग मुद्रा | एक दिन |
| सूचना मुद्रा | 2 से 14 दिन |
| अवधि मुद्रा | 15 दिन से एक वर्ष |
| वाणिज्यिक पत्र | भारत में 1990 में आरंभ; 7 दिन से एक वर्ष; अप्रतिभूत वचन पत्र |
| जमा प्रमाणपत्र | भारत में 1989 में आरंभ; अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक जारी करते हैं |
| संकीर्ण मुद्रा | एम1 = जनता के पास करेंसी + मांग जमा + रिज़र्व बैंक के पास अन्य जमा |
| व्यापक मुद्रा | एम3 = एम1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा |
| भारतीय बट्टा एवं वित्त गृह | 1988 में स्थापित |
| तरलता समायोजन सुविधा | 2000 में आरंभ; सीमांत स्थायी सुविधा 2011 में |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
वाणिज्यिक पत्र के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? I. यह वचन पत्र के रूप में जारी अप्रतिभूत मुद्रा बाज़ार साधन है। II. इसे भारत में 1990 में आरंभ किया गया था। III. इन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है।
- A.केवल I
- B.I, II और III
- C.I और II
- D.केवल III
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, I और II है। कथन I सही है: वाणिज्यिक पत्र वचन पत्र के रूप में जारी अप्रतिभूत मुद्रा बाज़ार साधन है, अर्थात उसके पीछे कोई प्रतिभूति नहीं, केवल निर्गमकर्ता की साख होती है। कथन II भी सही है: वाणिज्यिक पत्र भारतीय मुद्रा बाज़ार में 1990 में आरंभ हुआ, जिससे उच्च श्रेणी की कंपनियाँ बैंक ऋण के स्थान पर सीधे बाज़ार से कार्यशील पूंजी जुटा सकें। कथन III गलत है, और इसी कारण B तथा D अनुचित हैं: वाणिज्यिक पत्र कंपनियाँ, प्राथमिक व्यापारी और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएँ जारी करती हैं, जबकि रिज़र्व बैंक केवल उसके निर्गम के नियम बनाता है और नियामक की भूमिका निभाता है। रिज़र्व बैंक ट्रेजरी बिल जारी करता है, परंतु वह भी भारत सरकार की ओर से। A अपूर्ण है क्योंकि वह 1990 वाले सही कथन को छोड़ देता है।
रिज़र्व बैंक मुद्रा आपूर्ति के चार वैकल्पिक माप प्रकाशित करता है। एम3 के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
- A.जनता के पास करेंसी + मांग जमा
- B.एम1 + डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा
- C.एम1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा
- D.एम1 + डाकघर बचत संगठनों की कुल जमा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, एम1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा है। एम3 को व्यापक मुद्रा अथवा समग्र मौद्रिक संसाधन कहते हैं और रिज़र्व बैंक इसी पर सर्वाधिक ध्यान देता है; इसमें संकीर्ण मुद्रा के साथ बैंकिंग तंत्र की सावधि जमाएँ जोड़ी जाती हैं। A गलत है क्योंकि जनता के पास करेंसी और मांग जमा मिलकर एम1 का ही एक भाग बनाते हैं; एम1 में रिज़र्व बैंक के पास की अन्य जमाएँ भी सम्मिलित होती हैं, अतः दिया गया व्यंजक अपूर्ण है और किसी भी स्थिति में एम1 का वर्णन करता है, एम3 का नहीं। B गलत है क्योंकि एम1 में डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा जोड़ने पर एम2 बनता है। D गलत है क्योंकि एम4, एम1 नहीं बल्कि एम3 में राष्ट्रीय बचत पत्र को छोड़कर डाकघर की कुल जमाएँ जोड़ने पर बनता है। तरलता का क्रम याद रखें: एम1 सर्वाधिक तरल और एम4 न्यूनतम।
मुद्रा बाज़ार में कितनी अवधि तक की परिपक्वता वाली वित्तीय परिसंपत्तियों का लेन-देन होता है?
- A.तीन मास
- B.छह मास
- C.एक वर्ष
- D.तीन वर्ष
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, एक वर्ष है। परिभाषा के अनुसार मुद्रा बाज़ार अल्पकालिक कोषों का बाज़ार है, और भारत सहित सर्वत्र विभाजक रेखा एक वर्ष की परिपक्वता मानी जाती है; इससे अधिक अवधि का साधन पूंजी बाज़ार का होता है। A गलत है क्योंकि तीन मास केवल 91 दिन के ट्रेजरी बिल की अवधि है, जो अनेक साधनों में से एक है, और बाज़ार में 182 तथा 364 दिन के बिल भी चलते हैं। B इसी कारण गलत है: छह मास लगभग 182 दिन के बिल से मेल खाता है, बाज़ार की सीमा से नहीं। D गलत है क्योंकि तीन वर्ष का साधन पूंजी बाज़ार की प्रतिभूति है; इस अवधि की दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियाँ, ऋणपत्र और बॉन्ड सेबी के नियमन में जारी होते हैं। एक वर्ष की यह रेखा स्मरण रखने से वाणिज्यिक पत्र और जमा प्रमाणपत्र की अधिकतम अवधि वाले प्रश्न भी हल हो जाते हैं।
भारत में ट्रेजरी बिल जारी किए जाते हैं
- A.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा
- B.भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा
- C.भारतीय स्टेट बैंक द्वारा
- D.कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। ट्रेजरी बिल सरकार के अल्पकालिक ऋण का साधन है, और सरकार का बैंकर तथा ऋण प्रबंधक होने के नाते भारतीय रिज़र्व बैंक उसे सरकार की ओर से नीलामी द्वारा जारी करता है। A गलत है क्योंकि सेबी प्रतिभूति बाज़ार का नियमन करता है और अंश तथा ऋणपत्र के निवेशकों की रक्षा करता है; वह कोई सरकारी पत्र जारी नहीं करता। C गलत है क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक अन्य बैंकों और प्राथमिक व्यापारियों की तरह केवल नीलामी का सहभागी है और अपने विनिधान के लिए ट्रेजरी बिल खरीदता है। D गलत है क्योंकि कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय कंपनी विधि का प्रशासन करता है और सरकारी ऋण से उसका कोई संबंध नहीं। साथ में यह भी याद रखें कि ट्रेजरी बिल पर कूपन नहीं होता: वह बट्टे पर बेचा और अंकित मूल्य पर शोधित होता है।
भारत में ट्रेजरी बिल वर्तमान में निम्नलिखित में से किन अवधियों के लिए जारी किए जाते हैं?
- A.14, 91 और 182 दिन
- B.91, 182 और 364 दिन
- C.30, 60 और 90 दिन
- D.182, 364 और 730 दिन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 91, 182 और 364 दिन है। रिज़र्व बैंक इन तीन अवधियों के ट्रेजरी बिल नीलाम करता है, जिनमें 91 दिन का बिल सर्वाधिक बार नीलाम होता है। A गलत है क्योंकि 14 दिन का ट्रेजरी बिल बंद कर दिया गया है और वह नियमित नीलामी कैलेंडर का भाग नहीं है; वह केवल पुरानी अध्ययन सामग्री में मिलता है। C गलत है क्योंकि 30, 60 और 90 दिन व्यापारिक बिलों तथा कुछ जमा प्रमाणपत्रों की सामान्य अवधियाँ हैं, ट्रेजरी बिल की नहीं। D गलत है क्योंकि 730 दिन का साधन दो वर्ष चलता है और इसलिए वह पूंजी बाज़ार की दिनांकित सरकारी प्रतिभूति है, जो मुद्रा बाज़ार की एक वर्ष की सीमा से बाहर है। 91 दिन से कम अवधि के लिए सरकार नकदी प्रबंध बिल का प्रयोग करती है, जो 2010 में आरंभ हुए।
बैंकों के बीच एक दिन की अवधि के लिए दिया और लिया गया उधार कहलाता है
- A.अवधि मुद्रा
- B.सूचना मुद्रा
- C.मांग मुद्रा
- D.सेतु वित्त
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, मांग मुद्रा है। मांग मुद्रा बैंकों और प्राथमिक व्यापारियों के बीच एक रात का अप्रतिभूत उधार है, जिससे बैंक दिन के अंत में अपनी नकद आरक्षित स्थिति संतुलित करता है; इस पर का ब्याज मांग मुद्रा दर है, जो तंत्र की सर्वाधिक संवेदनशील ब्याज दर मानी जाती है। A गलत है क्योंकि अवधि मुद्रा 15 दिन से एक वर्ष की अंतर-बैंक जमा है। B गलत है क्योंकि सूचना मुद्रा 2 से 14 दिन के लिए होती है और उसकी वापसी अल्प सूचना देने पर होती है, और मांग तथा सूचना मुद्रा का यही भेद परीक्षक जाँचते हैं। D गलत है क्योंकि सेतु वित्त किसी कंपनी या परियोजना को दीर्घकालिक ऋण अथवा प्रतिभूति निर्गम पूरा होने तक दिया जाने वाला अल्पकालिक ऋण है, और वह अंतर-बैंक मुद्रा बाज़ार साधन नहीं है।
भारतीय मुद्रा बाज़ार में जमा प्रमाणपत्र किस वर्ष आरंभ किए गए?
- A.1985
- B.1989
- C.1991
- D.1997
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 1989 है। मुद्रा बाज़ार पर वाघुल समिति की सिफारिशों के बाद रिज़र्व बैंक ने 1989 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को परक्राम्य जमा प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति दी, और एक वर्ष बाद 1990 में वाणिज्यिक पत्र आया। A गलत है क्योंकि 1985 मौद्रिक प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सुखमय चक्रवर्ती समिति से जुड़ा वर्ष है, जिसकी रिपोर्ट से ये सुधार हुए, परंतु साधन उसी वर्ष नहीं आया। C गलत है क्योंकि 1991 आर्थिक सुधारों और वित्तीय प्रणाली पर नरसिंहम समिति का वर्ष है, जमा प्रमाणपत्र का नहीं। D गलत है क्योंकि 1997 में मुद्रा बाज़ार के अन्य परिवर्तन हुए, जैसे तदर्थ ट्रेजरी बिलों की समाप्ति और नीलामी व्यवस्था की ओर बढ़ना। स्मरण रखने योग्य जोड़ी है: जमा प्रमाणपत्र 1989 और वाणिज्यिक पत्र 1990।
निम्नलिखित में से कौन मुद्रा बाज़ार का साधन नहीं है?
- A.जमा प्रमाणपत्र
- B.ट्रेजरी बिल
- C.समता अंश
- D.वाणिज्यिक पत्र
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, समता अंश है। समता अंश की कोई परिपक्वता तिथि नहीं होती; वह कंपनी के अस्तित्व तक उसके स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करता है, अतः वह पूंजी बाज़ार का प्रतिनिधि साधन है, जो प्राथमिक बाज़ार में जारी होता है और सेबी के नियमन में शेयर बाज़ारों पर खरीदा-बेचा जाता है। A उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि जमा प्रमाणपत्र बैंक द्वारा सात दिन से एक वर्ष के लिए जारी मुद्रा बाज़ार साधन है। B गलत है क्योंकि ट्रेजरी बिल सरकार का 91, 182 अथवा 364 दिन का अल्पकालिक पत्र और मुद्रा बाज़ार का सुरक्षित साधन है। D गलत है क्योंकि वाणिज्यिक पत्र कंपनी का सात दिन से एक वर्ष की अवधि वाला अप्रतिभूत वचन पत्र है। ऐसे प्रश्नों में कसौटी सरल है: जिस साधन की अवधि एक वर्ष से अधिक हो सकती है, वह मुद्रा बाज़ार का नहीं है।
भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ पुनर्खरीद अनुबंध अर्थात रेपो में वाणिज्यिक बैंक
- A.सरकारी प्रतिभूतियाँ रिज़र्व बैंक को बेचता है और बाद में उन्हें पुनः खरीदने का वचन देता है
- B.रिज़र्व बैंक से सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता है और बाद में उन्हें पुनः बेचने का वचन देता है
- C.अपनी अतिरिक्त नकदी बिना किसी प्रतिभूति पर रिज़र्व बैंक के पास जमा करता है
- D.रिज़र्व बैंक को वाणिज्यिक पत्र जारी करता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A है। रेपो में कोष की आवश्यकता वाला बैंक सरकारी प्रतिभूतियाँ रिज़र्व बैंक को बेचता है और साथ ही एक दिन या कुछ दिन बाद उन्हें कुछ अधिक मूल्य पर पुनः खरीदने का अनुबंध करता है; यह अंतर ब्याज है और ली जाने वाली दर रेपो दर कहलाती है, जो देश की नीतिगत दर है। B प्रतिवर्ती रेपो का वर्णन करता है, जिसमें रिज़र्व बैंक बैंकों को प्रतिभूतियाँ बेचकर तंत्र से अतिरिक्त कोष अवशोषित करता है। C गलत है क्योंकि रिज़र्व बैंक के पास अप्रतिभूत जमा रेपो नहीं है; रेपो का मूल लक्षण यही है कि उधारी सरकारी प्रतिभूतियों से संपार्श्विक होती है। D गलत है क्योंकि बैंक वाणिज्यिक पत्र जारी करके रिज़र्व बैंक से धन नहीं जुटा सकता; वाणिज्यिक पत्र कंपनियाँ और वित्तीय संस्थाएँ बाज़ार के निवेशकों को जारी करती हैं।
भारत में संकीर्ण मुद्रा अर्थात एम1 में सम्मिलित है
- A.जनता के पास करेंसी तथा बैंकों की निवल सावधि जमा
- B.जनता के पास करेंसी, बैंकों की मांग जमा तथा रिज़र्व बैंक के पास अन्य जमा
- C.जनता के पास करेंसी तथा डाकघर की कुल जमा
- D.केवल बैंकों की मांग जमा तथा सावधि जमा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। एम1 अर्थात संकीर्ण मुद्रा सर्वाधिक तरल समुच्चय है: जनता के पास की करेंसी अर्थात नोट और सिक्के, बैंकों की मांग जमा जो कभी भी निकाली जा सकती है, तथा रिज़र्व बैंक के पास की अन्य जमाएँ, जो एक छोटी शेष मद है। A गलत है क्योंकि करेंसी और मांग जमा में बैंकों की निवल सावधि जमा जोड़ने पर एम3 अर्थात व्यापक मुद्रा बनती है, एम1 नहीं। C गलत है क्योंकि डाकघर की जमाएँ समुच्चयों में अलग से आती हैं: डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा एम1 में जोड़ने पर एम2 बनता है, और राष्ट्रीय बचत पत्र को छोड़कर डाकघर की कुल जमाएँ एम3 में जोड़ने पर एम4। D दो कारणों से गलत है: वह जनता के पास की करेंसी छोड़ देता है, जो नकदी-प्रधान अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा घटक है, और सावधि जमा को संकीर्ण मुद्रा में सम्मिलित कर लेता है।
भारत में 2010 में आरंभ किए गए नकदी प्रबंध बिलों की परिपक्वता अवधि होती है
- A.91 दिन से कम
- B.ठीक 91 दिन
- C.182 से 364 दिन
- D.एक वर्ष से अधिक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, 91 दिन से कम है। नकदी प्रबंध बिल भारत सरकार और रिज़र्व बैंक ने 2010 में सरकार के नकदी प्रवाह की अस्थायी असंगति पूरी करने के लिए आरंभ किए, और वे 91 दिन से कम अवधि के लिए, कभी-कभी केवल कुछ सप्ताह के लिए जारी होते हैं। शेष सभी बातों में वे ट्रेजरी बिल जैसे हैं: नीलामी से बट्टे पर जारी और अंकित मूल्य पर शोधित। B गलत है क्योंकि ठीक 91 दिन की अवधि सबसे छोटे नियमित ट्रेजरी बिल की है, जो पहले से विद्यमान था। C गलत है क्योंकि 182 और 364 दिन ट्रेजरी बिल की अन्य दो अवधियाँ हैं, और नकदी प्रबंध बिल जान-बूझकर इन सबसे छोटा रखा गया है। D गलत है क्योंकि एक वर्ष से अधिक का साधन मुद्रा बाज़ार का नहीं होता और वह दिनांकित सरकारी प्रतिभूति कहलाएगा।
भारत में मुद्रा बाज़ार के विकास के लिए 1988 में स्थापित संस्था थी
- A.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
- B.भारतीय बट्टा एवं वित्त गृह
- C.राष्ट्रीय आवास बैंक
- D.भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, भारतीय बट्टा एवं वित्त गृह है। इसकी स्थापना 1988 में वाघुल कार्य समूह की सिफारिश पर हुई, जिससे ट्रेजरी बिल और वाणिज्यिक बिल जैसे अल्पकालिक साधनों में लेन-देन कर मुद्रा बाज़ार को गहराई और तरलता मिले; बाद में यह प्राथमिक व्यापारी बन गई। A गलत है क्योंकि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की स्थापना 1988 में गैर-सांविधिक निकाय के रूप में हुई, परंतु वह पूंजी बाज़ार के लिए बना और 1992 में सांविधिक हुआ। C गलत है क्योंकि राष्ट्रीय आवास बैंक भी 1988 में बना, परंतु वह आवास वित्त की शीर्ष संस्था है, जो दीर्घकालिक कारोबार है। D गलत है क्योंकि भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक 1990 में लघु उद्योगों के वित्तपोषण और विकास के लिए स्थापित हुआ, मुद्रा बाज़ार के लिए नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुद्रा बाज़ार और पूंजी बाज़ार में क्या अंतर है?
मुद्रा बाज़ार में एक वर्ष तक की अवधि के कोषों का लेन-देन ट्रेजरी बिल, मांग मुद्रा और वाणिज्यिक पत्र जैसे साधनों से होता है और उसका नियामक रिज़र्व बैंक है। पूंजी बाज़ार में अंश, ऋणपत्र और दिनांकित प्रतिभूतियों से दीर्घकालिक कोष जुटाए जाते हैं और उसका नियामक सेबी है।
भारत में ट्रेजरी बिल कौन जारी करता है?
ट्रेजरी बिल भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक नीलामी के माध्यम से 91, 182 तथा 364 दिन की अवधि के लिए जारी करता है। ये शून्य कूपन साधन हैं, जो अंकित मूल्य से कम पर बेचे जाते हैं और अंकित मूल्य पर शोधित होते हैं।
वाणिज्यिक पत्र क्या है?
वाणिज्यिक पत्र कंपनी, प्राथमिक व्यापारी अथवा वित्तीय संस्था द्वारा अल्पकालिक कार्यशील पूंजी जुटाने के लिए बट्टे पर जारी अप्रतिभूत वचन पत्र है। यह भारत में 1990 में आरंभ हुआ और इसकी अवधि सात दिन से एक वर्ष होती है।
मुद्रा आपूर्ति का व्यापक माप कौन-सा है?
एम3 व्यापक मुद्रा है। यह एम1 अर्थात जनता के पास करेंसी, मांग जमा तथा रिज़र्व बैंक के पास अन्य जमा में वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा जोड़ने पर बनता है। एम4 में राष्ट्रीय बचत पत्र को छोड़कर डाकघर की कुल जमाएँ और जुड़ जाती हैं।
मांग मुद्रा क्या होती है?
मांग मुद्रा बैंकों और प्राथमिक व्यापारियों के बीच एक दिन के लिए बिना किसी प्रतिभूति पर दिया और लिया गया उधार है। इस पर दिया गया ब्याज मांग मुद्रा दर कहलाता है, जो बैंकिंग तंत्र की तरलता के साथ घटती-बढ़ती रहती है।
क्या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक जमा प्रमाणपत्र जारी कर सकता है?
नहीं। जमा प्रमाणपत्र अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक तथा रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमत चुनिंदा अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएँ जारी कर सकती हैं, परंतु क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंक इन्हें जारी नहीं कर सकते।
स्रोत
- मुद्रा बाज़ार साधनों पर मास्टर निदेश: मांग, सूचना और अवधि मुद्रा, सीडी तथा सीपी — भारतीय रिज़र्व बैंक
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (कक्षा 12), मुद्रा और बैंकिंग अध्याय — एनसीईआरटी
- भारतीय अर्थव्यवस्था पर सांख्यिकी पुस्तिका: मौद्रिक समुच्चय — भारतीय रिज़र्व बैंक





