भारत में मुद्रा और बैंकिंग: आरबीआई, आपूर्ति और नीति
मुद्रा और बैंकिंग के परीक्षोपयोगी नोट्स: मुद्रा के कार्य, M1 से M4, रिज़र्व बैंक और उसके उपकरण, बैंक राष्ट्रीयकरण तथा भारतीय बैंकिंग की संरचना।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

मुद्रा वह है जो वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान तथा ऋण के निपटारे में सामान्य रूप से स्वीकार की जाती है। बैंकिंग वह व्यवसाय है जिसमें ऐसी मुद्रा जमा के रूप में ली जाती है, माँगने पर लौटाई जाती है और आगे उधार दी जाती है। दोनों मिलकर तय करते हैं कि अर्थव्यवस्था में कितना साख उपलब्ध होगा, और भारत में दोनों का नियंत्रण एक ही संस्था, भारतीय रिज़र्व बैंक, के पास है। इस अध्याय के प्रश्न छोटे और परिभाषा आधारित होते हैं, इसलिए यह नोट परिभाषाएँ, तिथियाँ और उपकरण स्पष्ट करता है।
मुद्रा क्या करती है
मुद्रा चार कार्य करती है। वह विनिमय का माध्यम है, जिससे वस्तु विनिमय में आवश्यक आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की बाध्यता समाप्त हो जाती है। वह मूल्य का मापक या लेखा की इकाई है, जिससे भिन्न वस्तुओं के मूल्य तुलनीय बनते हैं। वह मूल्य का संचय है, क्योंकि उसे बिना खराब हुए रखा जा सकता है। और वह स्थगित भुगतान का मानक है, जिससे ऋण और अनुबंध उसी में लिखे जा सकते हैं। आधुनिक मुद्रा साख आधारित अर्थात फिएट मुद्रा है: उसके पीछे धातु का भंडार नहीं होता और वह इसलिए स्वीकार्य है कि राज्य उसे विधिग्राह्य घोषित करता है। नोट और सिक्के विधिग्राह्य मुद्रा हैं; चेक नहीं, क्योंकि लेनदार उसे अस्वीकार कर सकता है, इसलिए उसे साख मुद्रा कहते हैं। सावधि जमा, जो सूचना देने के बाद ही नकद में बदलती है, निकट मुद्रा कहलाती है।
मुद्रा आपूर्ति के माप
| माप | इसमें क्या शामिल है | नाम |
|---|---|---|
| M0 | प्रचलन में मुद्रा, रिज़र्व बैंक के पास बैंकों की जमा तथा अन्य जमा | आरक्षित मुद्रा या उच्च शक्ति मुद्रा |
| M1 | जनता के पास मुद्रा, बैंकों की माँग जमा तथा रिज़र्व बैंक के पास अन्य जमा | संकुचित मुद्रा |
| M2 | M1 तथा डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा | -- |
| M3 | M1 तथा बैंकों की सावधि जमा | व्यापक मुद्रा, समग्र मौद्रिक संसाधन |
| M4 | M3 तथा राष्ट्रीय बचत पत्रों को छोड़कर डाकघर की कुल जमा | -- |
M1 सर्वाधिक तरल है और M4 सबसे कम। रिज़र्व बैंक जिस माप पर सबसे अधिक ध्यान देता है वह M3 है, और परीक्षा में व्यापक मुद्रा से यही अभिप्राय होता है। बैंक साख सृजन द्वारा मुद्रा आपूर्ति बढ़ाते हैं: प्राप्त जमा का एक अंश आरक्षित रखकर शेष उधार दिया जाता है, वह ऋण व्यवस्था में नई जमा बनकर लौटता है, और यह क्रम दोहराया जाता है, जिससे दी गई मात्रा की आरक्षित मुद्रा उससे कई गुना जमा को सँभालती है।
भारतीय रिज़र्व बैंक
रिज़र्व बैंक की स्थापना हिल्टन यंग आयोग, अर्थात भारतीय मुद्रा और वित्त संबंधी राजकीय आयोग, की उस संस्तुति पर हुई जो 1926 में आई थी। इसका गठन भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत हुआ और इसने 1 अप्रैल 1935 को कार्य आरंभ किया, जिसका केंद्रीय कार्यालय कलकत्ता में था और 1937 में स्थायी रूप से बंबई ले जाया गया। यह आरंभ में अंशधारकों का बैंक था और 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण हुआ। इसके पहले गवर्नर सर ऑसबोर्न स्मिथ थे और पहले भारतीय गवर्नर सी. डी. देशमुख, जो बाद में वित्त मंत्री बने।
इसके कार्य किसी भी केंद्रीय बैंक की शास्त्रीय सूची हैं। यह मौद्रिक प्राधिकरण है और मौद्रिक नीति बनाता तथा चलाता है। यह एक रुपये से बड़े सभी नोटों का एकमात्र निर्गमकर्ता है, जिन पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं; एक रुपये का नोट और सभी सिक्के भारत सरकार द्वारा निर्गत होते हैं और रिज़र्व बैंक केवल उन्हें प्रचलन में लाता है, तथा एक रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। नोट 1957 से लागू न्यूनतम आरक्षित प्रणाली के अंतर्गत निर्गत होते हैं, जिसके अनुसार बैंक को कम से कम दो सौ करोड़ रुपये का आरक्षित कोष रखना होता है, जिसमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में और शेष विदेशी प्रतिभूतियों में होता है। रिज़र्व बैंक केंद्र तथा राज्य सरकारों का बैंकर, बैंकों का बैंक और अंतिम ऋणदाता, देश के विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक, तथा बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों का नियामक एवं पर्यवेक्षक है।
मौद्रिक नीति के उपकरण
परिमाणात्मक उपकरण साख की मात्रा पर काम करते हैं। नकद आरक्षित अनुपात बैंक की शुद्ध माँग और सावधि देयताओं का वह अंश है जो उसे रिज़र्व बैंक के पास नकद रखना होता है। सांविधिक तरलता अनुपात वह अंश है जो उसे अपने पास नकद, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखना होता है। रेपो दर वह दर है जिस पर रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों की जमानत पर बैंकों को अल्पकाल के लिए ऋण देता है, और प्रतिवर्ती रेपो दर वह है जिस पर वह उनकी अतिरिक्त राशि अपने पास लेता है। बैंक दर वह दर है जिस पर वह ऐसी पुनर्खरीद के बिना लंबी अवधि के लिए ऋण देता है, तथा सीमांत स्थायी सुविधा बैंक को रेपो दर से ऊपर की दर पर रातोंरात उधार लेने देती है। खुले बाजार की क्रियाएँ सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री हैं, जिनसे तरलता घटाई या बढ़ाई जाती है। गुणात्मक उपकरण साख की दिशा पर काम करते हैं और उनमें मार्जिन आवश्यकता, साख की राशनिंग, उपभोक्ता साख का नियमन, नैतिक दबाव तथा प्रत्यक्ष कार्रवाई आते हैं। 2016 में रिज़र्व बैंक अधिनियम में संशोधन के बाद नीतिगत दर छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति तय करती है, जिसके तीन सदस्य रिज़र्व बैंक से होते हैं और गवर्नर अध्यक्ष होते हैं तथा तीन सदस्य केंद्र सरकार नियुक्त करती है, और मत बराबर होने पर निर्णायक मत गवर्नर का होता है; मुद्रास्फीति का लक्ष्य सरकार बैंक के परामर्श से पाँच वर्ष की अवधि के लिए अधिसूचित करती है।
भारतीय बैंकिंग की संरचना और पड़ाव
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की दूसरी अनुसूची में सूचीबद्ध बैंक अनुसूचित बैंक कहलाते हैं। वाणिज्यिक बैंकिंग समूह में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा नए लघु वित्त बैंक और भुगतान बैंक आते हैं; भुगतान बैंक रिज़र्व बैंक द्वारा तय सीमा तक जमा ले सकता है पर ऋण नहीं दे सकता। इनके साथ सहकारी बैंक तथा नाबार्ड जैसी विकास संस्थाएँ हैं, जिसकी स्थापना शिवरामन समिति की संस्तुति पर 12 जुलाई 1982 को ग्रामीण और कृषि साख की शीर्ष संस्था के रूप में हुई।
पड़ाव सीधे पूछे जाते हैं। 1770 में कलकत्ता में स्थापित बैंक ऑफ हिंदुस्तान भारत का पहला बैंक था। तीन प्रेसीडेंसी बैंक, 1806 का बैंक ऑफ बंगाल, 1840 का बैंक ऑफ बंबई और 1843 का बैंक ऑफ मद्रास, 1921 में मिलाकर इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया बने, जो 1 जुलाई 1955 को भारतीय स्टेट बैंक बन गया। 1894 में स्थापित पंजाब नेशनल बैंक पूर्णतः भारतीय पूँजी और भारतीय प्रबंधन से आरंभ होने वाला पहला बैंक था। चौदह बड़े वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण 19 जुलाई 1969 को और छह और बैंकों का अप्रैल 1980 में हुआ। अग्रणी बैंक योजना, जिसमें हर जिले की साख योजना का उत्तरदायित्व एक बैंक को दिया जाता है, भी 1969 से चली आ रही है। प्राथमिकता क्षेत्र ऋण मानकों के अंतर्गत घरेलू वाणिज्यिक बैंक को अपने समायोजित शुद्ध बैंक ऋण का निर्धारित अंश, मानक मानदंड में चालीस प्रतिशत, कृषि, लघु उद्यम, शिक्षा, आवास और कमजोर वर्गों को देना होता है।
परीक्षा की दृष्टि से
यहाँ विश्लेषण नहीं, परिभाषाएँ और तिथियाँ पूछी जाती हैं। नियमित प्रश्न हैं M1 और M3 के घटक, रेपो, प्रतिवर्ती रेपो, बैंक दर, नकद आरक्षित अनुपात और सांविधिक तरलता अनुपात का अर्थ, रिज़र्व बैंक की स्थापना तथा राष्ट्रीयकरण की तिथि, एक रुपये के नोट का निर्गमकर्ता, बैंक राष्ट्रीयकरण के दोनों चरण, और भारतीय स्टेट बैंक के गठन का वर्ष। सामान्य जाल हैं M1 को व्यापक मुद्रा कहना, एक रुपये का नोट रिज़र्व बैंक द्वारा निर्गत मान लेना, नकद आरक्षित अनुपात और सांविधिक तरलता अनुपात को मिला देना, तथा बैंक दर और रेपो दर को एक समझना। यह भी याद रखें कि भुगतान बैंक जमा ले सकता है पर ऋण नहीं दे सकता।
महत्वपूर्ण तथ्य
| रिज़र्व बैंक की स्थापना | 1 अप्रैल 1935, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत |
|---|---|
| संस्तुति करने वाला आयोग | हिल्टन यंग आयोग, भारतीय मुद्रा और वित्त संबंधी राजकीय आयोग, 1926 |
| रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण | 1 जनवरी 1949 |
| पहले और पहले भारतीय गवर्नर | सर ऑसबोर्न स्मिथ; सी. डी. देशमुख |
| नोट निर्गमन प्रणाली | 1957 से न्यूनतम आरक्षित प्रणाली, दो सौ करोड़ रुपये का कोष |
| एक रुपये के नोट का निर्गमकर्ता | भारत सरकार, वित्त सचिव के हस्ताक्षर सहित |
| संकुचित और व्यापक मुद्रा | M1 संकुचित मुद्रा; M3 व्यापक मुद्रा |
| रेपो दर | वह दर जिस पर रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों पर बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है |
| बैंक राष्ट्रीयकरण | 19 जुलाई 1969 को चौदह बैंक और अप्रैल 1980 में छह बैंक |
| भारतीय स्टेट बैंक | 1 जुलाई 1955 को इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया से गठित |
| नाबार्ड | 12 जुलाई 1982, शिवरामन समिति की संस्तुति पर स्थापित |
| भारत का पहला बैंक | बैंक ऑफ हिंदुस्तान, कलकत्ता, 1770 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय रिज़र्व बैंक ने किस तिथि से कार्य करना आरंभ किया था?
- A.1 अप्रैल 1935
- B.1 जनवरी 1949
- C.1 जुलाई 1955
- D.19 जुलाई 1969
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1 अप्रैल 1935
व्याख्या
सही उत्तर A, 1 अप्रैल 1935 है। भारतीय रिज़र्व बैंक का गठन हिल्टन यंग आयोग की संस्तुति पर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत हुआ और इसने 1 अप्रैल 1935 से कार्य आरंभ किया, जिसका केंद्रीय कार्यालय कलकत्ता में था और 1937 में स्थायी रूप से बंबई स्थानांतरित कर दिया गया।
विकल्प B, 1 जनवरी 1949, वह तिथि है जब रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण हुआ और वह निजी अंशधारकों से पूर्ण सरकारी स्वामित्व में आया, इसलिए यह सही तिथि तो है पर दूसरे प्रश्न का उत्तर है। विकल्प C, 1 जुलाई 1955, वह तिथि है जब इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया को भारतीय स्टेट बैंक में बदला गया। विकल्प D, 19 जुलाई 1969, वह तिथि है जब चौदह बड़े वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। चारों तिथियाँ एक ही विकल्प सूची में आती हैं, इसलिए हर तिथि के साथ उसकी घटना जोड़कर याद करें।
भारत में मुद्रा आपूर्ति के मापन में किस समुच्चय को व्यापक मुद्रा कहा जाता है?
- A.M0
- B.M1
- C.M3
- D.M4
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. M3
व्याख्या
सही उत्तर C, M3 है। M3 में M1 के साथ बैंकों की सावधि जमा जुड़ती हैं और इसे व्यापक मुद्रा या समग्र मौद्रिक संसाधन कहा जाता है। रिज़र्व बैंक इसी माप पर सबसे अधिक ध्यान रखता है, क्योंकि इसमें तुरंत खर्च होने योग्य राशि और नियत अवधि के लिए रखी राशि दोनों आ जाती हैं।
विकल्प A, M0, आरक्षित या उच्च शक्ति मुद्रा है, जिसमें प्रचलन की मुद्रा, रिज़र्व बैंक के पास बैंकों की जमा तथा अन्य जमा आती हैं; यह वह आधार है जिस पर साख सृजित होती है, व्यापक मुद्रा नहीं। विकल्प B, M1, संकुचित मुद्रा है, जिसमें जनता के पास मुद्रा, माँग जमा और रिज़र्व बैंक के पास अन्य जमा आती हैं, और यह सबसे तरल माप है। विकल्प D, M4, M3 के साथ राष्ट्रीय बचत पत्रों को छोड़कर डाकघर की कुल जमा जोड़कर बनता है और सबसे व्यापक पर सबसे कम प्रयुक्त माप है। तरलता का क्रम M1, M2, M3, M4 है।
रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर
- A.वाणिज्यिक बैंक अपने प्रमुख ग्राहकों को ऋण देते हैं
- B.रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों की जमानत पर बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है
- C.रिज़र्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों से उनकी अतिरिक्त राशि उधार लेता है
- D.बैंक बचत जमा पर ब्याज देते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों की जमानत पर बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है
व्याख्या
सही उत्तर B, रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों की जमानत पर बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है है। पुनर्खरीद अर्थात रेपो सौदे में बैंक सरकारी प्रतिभूति रिज़र्व बैंक को बेचता है और थोड़े समय बाद उसे कुछ अधिक मूल्य पर वापस खरीदने का वचन देता है; यही अंतर रेपो दर के रूप में ब्याज बन जाता है। यह मौद्रिक नीति का मुख्य संचालन उपकरण है और इसके बढ़ने पर बैंकों और फिर उनके ग्राहकों के लिए ऋण महँगा हो जाता है।
विकल्प A ग्राहकों से ली जाने वाली ऋण दर का वर्णन है, जिसे बैंक रिज़र्व बैंक के बेंचमार्क ढाँचे के भीतर स्वयं तय करते हैं। विकल्प C प्रतिवर्ती रेपो दर का वर्णन है, जिस पर रिज़र्व बैंक बैंकों की अतिरिक्त राशि अपने पास लेता है और जो सदा रेपो दर से कम होती है। विकल्प D बचत जमा दर है, जिसे तय करने की छूट बैंकों को है। याद रखने का सरल सूत्र यह है कि रेपो में रिज़र्व बैंक धन देता है और प्रतिवर्ती रेपो में धन लेता है।
जुलाई 1969 के पहले चरण में भारत में कितने वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था?
- A.छह
- B.बारह
- C.चौदह
- D.बीस
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चौदह
व्याख्या
सही उत्तर C, चौदह है। 19 जुलाई 1969 को सरकार ने देश के चौदह सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, जिसका उद्देश्य बैंकिंग को ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाना, साख को कृषि तथा लघु उद्योग की ओर मोड़ना और बैंक निधियों के कुछ ही व्यापारिक घरानों में केंद्रित रहने को समाप्त करना था।
विकल्प A, छह, अप्रैल 1980 के दूसरे चरण में राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या है, अर्थात सही आँकड़ा पर गलत वर्ष से जुड़ा। विकल्प B, बारह, किसी चरण से मेल नहीं खाता और केवल निकट का भ्रामक विकल्प है। विकल्प D, बीस, दोनों चरणों का योग है, चौदह और छह, और यही सबसे अधिक चुना जाने वाला जाल है। प्रश्न में दिया वर्ष ध्यान से पढ़ें, क्योंकि यही तथ्य 1969, 1980 और कुल योग तीनों रूपों में पूछा जाता है।
भारत में एक रुपये का नोट किसके द्वारा निर्गत किया जाता है?
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक
- B.भारतीय स्टेट बैंक
- C.भारत सरकार
- D.भारत प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारत सरकार
व्याख्या
सही उत्तर C, भारत सरकार है। एक रुपये का नोट और सभी सिक्के भारत सरकार वित्त मंत्रालय के माध्यम से निर्गत करती है, और एक रुपये के नोट पर रिज़र्व बैंक के गवर्नर के नहीं, बल्कि वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। रिज़र्व बैंक केवल वितरण करने वाली संस्था के रूप में काम करता है।
विकल्प A, भारतीय रिज़र्व बैंक, एक रुपये से बड़े मूल्यवर्ग के प्रत्येक नोट का निर्गमन करता है और उन पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं, पर एक रुपये का नोट उसका नहीं होता। विकल्प B, भारतीय स्टेट बैंक, एक वाणिज्यिक बैंक है और नोट निर्गमन नहीं करता, यद्यपि जहाँ रिज़र्व बैंक का कार्यालय नहीं है वहाँ वह उसके अभिकर्ता के रूप में काम करता है। विकल्प D, भारत प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम, वे प्रेस और टकसालें चलाता है जहाँ नोट छपते और सिक्के ढलते हैं, पर छापना निर्गत करना नहीं है। यही अंतर इस प्रश्न में परखा जाता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण किस वर्ष हुआ था?
- A.1935
- B.1949
- C.1955
- D.1969
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1949
व्याख्या
सही उत्तर B, 1949 है। रिज़र्व बैंक ने 1935 में अंशधारकों के बैंक के रूप में कार्य आरंभ किया था, जिसकी पूँजी निजी हाथों में थी। भारतीय रिज़र्व बैंक सार्वजनिक स्वामित्व में अंतरण अधिनियम के अंतर्गत स्वतंत्रता के कुछ ही समय बाद 1 जनवरी 1949 को वह पूर्ण सरकारी स्वामित्व में आ गया, ताकि केंद्रीय बैंक और नई सरकार की आर्थिक नीति साथ चल सकें।
विकल्प A, 1935, वह वर्ष है जब बैंक की स्थापना हुई और उसने कार्य आरंभ किया, राष्ट्रीयकरण का वर्ष नहीं। विकल्प C, 1955, वह वर्ष है जब अखिल भारतीय ग्रामीण साख सर्वेक्षण समिति की संस्तुति पर इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया को भारतीय स्टेट बैंक के रूप में पुनर्गठित किया गया। विकल्प D, 1969, वह वर्ष है जब चौदह वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। क्रम याद रखें: स्थापना 1935, राष्ट्रीयकरण 1949, स्टेट बैंक 1955, बैंक राष्ट्रीयकरण 1969 और 1980।
भारत में ग्रामीण और कृषि साख की शीर्ष संस्था नाबार्ड की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.1975
- B.1982
- C.1991
- D.2005
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1982
व्याख्या
सही उत्तर B, 1982 है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की स्थापना बी. शिवरामन की अध्यक्षता वाली समिति की संस्तुति पर 12 जुलाई 1982 को हुई, और उसने तब तक रिज़र्व बैंक द्वारा किए जा रहे कृषि साख संबंधी कार्य तथा कृषि पुनर्वित्त एवं विकास निगम का पुनर्वित्त कार्य अपने हाथ में ले लिया। यह अधिकांशतः किसानों को सीधे ऋण नहीं देता, बल्कि सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त देता है।
विकल्प A, 1975, वह वर्ष है जब नरसिंहम कार्य दल की संस्तुति पर अध्यादेश के अंतर्गत पहले क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक स्थापित हुए, अर्थात वही क्षेत्र पर दूसरी संस्था। विकल्प C, 1991, आर्थिक उदारीकरण के आरंभ और वित्तीय प्रणाली पर नरसिंहम समिति की नियुक्ति का वर्ष है। विकल्प D, 2005, वित्तीय समावेशन और बिना झंझट वाले खातों की नीति से जुड़ा है। नाबार्ड के साथ 1982 और शिवरामन समिति दोनों जोड़कर याद रखें।
नकद आरक्षित अनुपात से तात्पर्य बैंक की जमाओं के उस भाग से है जिसे
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक के पास नकद रखना होता है
- B.सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में लगाना होता है
- C.बैंक को स्वयं स्वर्ण और अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखना होता है
- D.प्राथमिकता क्षेत्र को उधार देना होता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारतीय रिज़र्व बैंक के पास नकद रखना होता है
व्याख्या
सही उत्तर A, भारतीय रिज़र्व बैंक के पास नकद रखना होता है है। नकद आरक्षित अनुपात बैंक की शुद्ध माँग और सावधि देयताओं का वह अंश है जिसे उसे रिज़र्व बैंक के पास नकद शेष के रूप में रखना होता है। इस शेष पर बैंक को कोई आय नहीं होती, इसलिए अनुपात बढ़ने पर उधार देने योग्य धन घटता है और साख कसती है, जबकि घटाने पर धन मुक्त होता है।
विकल्प C सांविधिक तरलता अनुपात का वर्णन है, जिसे बैंक अपने ही पास नकद, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखता है और जिस पर उसे प्रतिफल मिलता है; इसी अध्याय में यही सबसे आम भ्रम है। विकल्प B इसलिए गलत है कि बैंकों से आरक्षित राशि कंपनी शेयरों में रखवाई ही नहीं जा सकती, जिनमें बाजार जोखिम होता है। विकल्प D प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का वर्णन है, जिसमें समायोजित शुद्ध बैंक ऋण का निर्धारित अंश कृषि, लघु उद्यम, शिक्षा, आवास और कमजोर वर्गों को देना होता है। एक पंक्ति में अंतर याद रखें: नकद आरक्षित अनुपात रिज़र्व बैंक के पास, सांविधिक तरलता अनुपात बैंक के अपने पास।
इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया को 1955 में किस बैंक में परिवर्तित किया गया?
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक
- B.पंजाब नेशनल बैंक
- C.भारतीय स्टेट बैंक
- D.बैंक ऑफ बड़ौदा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारतीय स्टेट बैंक
व्याख्या
सही उत्तर C, भारतीय स्टेट बैंक है। इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया स्वयं 1921 में तीन प्रेसीडेंसी बैंकों, 1806 के बैंक ऑफ बंगाल, 1840 के बैंक ऑफ बंबई और 1843 के बैंक ऑफ मद्रास, को मिलाकर बना था। अखिल भारतीय ग्रामीण साख सर्वेक्षण समिति की संस्तुति पर सरकार ने 1 जुलाई 1955 को उसे भारतीय स्टेट बैंक में बदल दिया, ताकि सरकारी स्वामित्व वाला बैंक बैंकिंग को गाँवों तक ले जा सके।
विकल्प A, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय बैंक है और 1935 में अलग से बना; उससे पहले इंपीरियल बैंक कुछ केंद्रीय बैंकिंग कार्य करता था, इसीलिए यह भ्रामक विकल्प बनता है। विकल्प B, पंजाब नेशनल बैंक, 1894 में पूर्णतः भारतीय पूँजी और प्रबंधन से आरंभ होने वाले पहले बैंक के रूप में स्थापित हुआ और उसका इतिहास स्वतंत्र है। विकल्प D, बैंक ऑफ बड़ौदा, 1908 में बड़ौदा के महाराजा के संरक्षण में स्थापित हुआ और 1969 में राष्ट्रीयकृत हुआ। शृंखला याद रखें: प्रेसीडेंसी बैंक, इंपीरियल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक।
भारत में 1957 से लागू न्यूनतम आरक्षित प्रणाली के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को कितना न्यूनतम कोष रखना होता है?
- A.दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में
- B.एक सौ करोड़ रुपये, पूर्णतः सोने में
- C.पाँच सौ करोड़ रुपये, पूर्णतः विदेशी प्रतिभूतियों में
- D.एक हजार करोड़ रुपये सरकारी बॉण्ड में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में
व्याख्या
सही उत्तर A, दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में है। पहले चल रही आनुपातिक आरक्षित प्रणाली के स्थान पर 1957 में अपनाई गई न्यूनतम आरक्षित प्रणाली के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को अपने द्वारा निर्गत नोटों के विरुद्ध कम से कम दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखनी होती हैं, जिनमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में और शेष पचासी करोड़ विदेशी प्रतिभूतियों में होता है। इस न्यूनतम से आगे बैंक अर्थव्यवस्था की आवश्यकता के अनुसार नोट निर्गत कर सकता है।
विकल्प B राशि और संरचना दोनों कम बताता है तथा विदेशी प्रतिभूतियों वाले भाग को छोड़ देता है। विकल्प C और D ऐसे आँकड़े और परिसंपत्तियाँ गढ़ते हैं जिनका इस प्रणाली में कोई स्थान नहीं है; भारत सरकार के बॉण्ड में यह न्यूनतम कोष परिभाषित नहीं होता। 1957 के इस परिवर्तन का उद्देश्य नोट निर्गमन को सोने के निश्चित अनुपात से मुक्त करना था, ताकि मुद्रा उत्पादन और व्यापार के साथ बढ़ सके, और यही तर्क कभी-कभी कथन प्रश्न के रूप में भी पूछा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संकुचित मुद्रा और व्यापक मुद्रा में क्या अंतर है?
संकुचित मुद्रा अर्थात M1 में जनता के पास मुद्रा, बैंकों की माँग जमा और रिज़र्व बैंक के पास अन्य जमा आती हैं, अर्थात वह धन जो तुरंत खर्च किया जा सकता है। व्यापक मुद्रा अर्थात M3 में M1 के साथ बैंकों की सावधि जमा भी जुड़ जाती है, अर्थात वह धन भी जो नियत अवधि के लिए बँधा है। M3 ही समग्र मौद्रिक संसाधन है और रिज़र्व बैंक सबसे अधिक इसी पर ध्यान रखता है।
नकद आरक्षित अनुपात और सांविधिक तरलता अनुपात में क्या अंतर है?
नकद आरक्षित अनुपात बैंक की शुद्ध माँग और सावधि देयताओं का वह भाग है जो रिज़र्व बैंक के पास नकद रखना अनिवार्य है और जिस पर बैंक को कोई आय नहीं होती। सांविधिक तरलता अनुपात वह भाग है जो बैंक अपने ही पास नकद, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखता है और जिस पर उसे प्रतिफल मिलता है। दोनों में से किसी को भी बढ़ाने पर बैंक के पास उधार देने के लिए कम धन बचता है, इसलिए दोनों साख नियंत्रण के उपकरण हैं।
एक रुपये का नोट कौन निर्गत करता है और शेष नोट कौन?
एक रुपये का नोट और सभी सिक्के भारत सरकार वित्त मंत्रालय के माध्यम से निर्गत करती है और एक रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं; रिज़र्व बैंक केवल उन्हें प्रचलन में लाता है। एक रुपये से बड़े सभी मूल्यवर्ग के नोट भारतीय रिज़र्व बैंक निर्गत करता है और उन पर गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं। वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्रों में यही अंतर सीधे पूछा जाता है।
रेपो दर और बैंक दर में क्या अंतर है?
रेपो दर वह दर है जिस पर रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों की जमानत पर वाणिज्यिक बैंकों को अल्प अवधि के लिए ऋण देता है, और बैंक उन प्रतिभूतियों को पुनः खरीदने का वचन देता है। बैंक दर वह दर है जिस पर रिज़र्व बैंक ऐसी पुनर्खरीद के बिना लंबी अवधि के लिए ऋण देता है। दैनिक मौद्रिक नीति का प्रमुख उपकरण रेपो दर है, जबकि बैंक दर अब सीमांत स्थायी सुविधा की दर से जुड़ी है और मुख्यतः दंडात्मक दर के रूप में काम करती है।
वाणिज्यिक बैंक साख का सृजन कैसे करते हैं?
बैंक प्रत्येक जमा का केवल एक अंश आरक्षित रखता है और शेष उधार दे देता है। ऋण लेने वाला उसे खर्च करता है, वह धन बैंकिंग व्यवस्था में नई जमा बनकर लौटता है, उसका भी एक अंश रखकर शेष फिर उधार दिया जाता है। इस शृंखला से दी गई आरक्षित मुद्रा कई गुना बड़ी जमा राशि को सँभालती है, और इसीलिए रिज़र्व बैंक नकद आरक्षित अनुपात या नीतिगत दर बदलकर कुल साख को नियंत्रित कर सकता है।
स्रोत
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (कक्षा XI), भारतीय अर्थव्यवस्था और उसके क्षेत्रों वाले अध्याय — एनसीईआरटी
- समष्टि अर्थशास्त्र: एक परिचय (कक्षा XII), मुद्रा और बैंकिंग वाला अध्याय — एनसीईआरटी



