बीमा और पेंशन क्षेत्र: आईआरडीएआई, पीएफआरडीए और एनपीएस
परीक्षा के लिए बीमा और पेंशन क्षेत्र के नोट्स: बीमा अधिनियम 1938, एलआईसी, जीआईसी, हैदराबाद में आईआरडीएआई, पीएफआरडीए, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और प्रमुख योजनाएं।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

बीमा और पेंशन वे दो दीर्घकालिक अनुबंध हैं जो कोई साधारण परिवार वित्तीय प्रणाली के साथ करता है: एक तब भुगतान करता है जब कुछ अनिष्ट होता है, दूसरा तब जब कमाई के वर्ष समाप्त हो जाते हैं। दोनों दशकों तक दूसरों का धन संभालते हैं, इसलिए दोनों का अपना सांविधिक नियामक है। बीमा का नियमन भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण करता है, जिसका कार्यालय हैदराबाद में है, और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत पेंशन का नियमन पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण करता है, जिसका कार्यालय नई दिल्ली में है। ये नोट्स बताते हैं कि दोनों क्षेत्र किस प्रकार बने, दोनों प्राधिकरण क्या करते हैं और वे योजनाएं कौन सी हैं जिनके विषय में परीक्षक पूछते हैं।
बीमा क्षेत्र वर्तमान स्वरूप तक कैसे पहुंचा
क्षेत्र का मुख्य कानून आज भी 1938 का बीमा अधिनियम है। जीवन बीमा का राष्ट्रीयकरण पहले हुआ: भारतीय जीवन बीमा निगम 1 सितंबर 1956 को जीवन बीमा निगम अधिनियम के अंतर्गत स्थापित हुआ और उसने लगभग दो सौ पैंतालीस बीमाकर्ताओं का कारोबार अपने हाथ में लिया; उसका प्रधान कार्यालय मुंबई में है। सामान्य बीमा सोलह वर्ष बाद, 1972 के सामान्य बीमा कारोबार राष्ट्रीयकरण अधिनियम के अंतर्गत आया, जिसने भारतीय सामान्य बीमा निगम बनाया और उसकी चार अनुषंगी कंपनियां थीं: नेशनल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस।
सुधार का आरंभ 1993 में भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर आर. एन. मल्होत्रा की अध्यक्षता में नियुक्त बीमा क्षेत्र सुधार समिति से हुआ। उसने निजी तथा विदेशी कंपनियों को प्रवेश देने, पूंजी आधार बढ़ाने और एक स्वतंत्र नियामक बनाने की सिफारिश की। उसी सिफारिश से 1999 का बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम बना, जिसके अंतर्गत प्राधिकरण अप्रैल 2000 में सांविधिक निकाय बना, और सामान्य बीमा की चार अनुषंगी कंपनियां 2000 में अपनी धारक कंपनी से अलग कर दी गईं, जिसके बाद भारतीय सामान्य बीमा निगम राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता बन गया।
दो बाद के संशोधन महत्वपूर्ण हैं। 2015 के बीमा विधि संशोधन अधिनियम ने नियामक का नाम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण किया और किसी भारतीय बीमा कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा छब्बीस से उनचास प्रतिशत कर दी। 2021 के बीमा संशोधन अधिनियम ने उस सीमा को भारतीय प्रबंधन तथा नियंत्रण की रक्षा के साथ चौहत्तर प्रतिशत तक बढ़ा दिया।
बीमा नियामक क्या करता है
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| अधिनियम | बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 |
| सांविधिक कब से | अप्रैल 2000 |
| मुख्यालय | हैदराबाद |
| संरचना | एक अध्यक्ष, अधिकतम पांच पूर्णकालिक सदस्य और अधिकतम चार अंशकालिक सदस्य, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त |
| मुख्य पुराना कानून | बीमा अधिनियम, 1938 |
| शिकायत मंच | बीमा लोकपाल, बीमा लोकपाल नियम, 2017 के अंतर्गत |
अधिनियम के शब्दों में उसका कर्तव्य बीमा तथा पुनर्बीमा कारोबार का नियमन, संवर्धन और व्यवस्थित वृद्धि सुनिश्चित करना है। व्यवहार में इसका अर्थ है बीमाकर्ताओं का पंजीकरण तथा पंजीकरण रद्द करना, अभिकर्ताओं, सर्वेक्षकों और अन्य मध्यवर्तियों की योग्यता तथा आचार संहिता निर्धारित करना, पॉलिसी दस्तावेजों का प्रपत्र तय करना, पॉलिसीधारकों की निधियों के निवेश तथा शोधक्षमता मार्जिन का नियमन करना, नामांकन, समर्पण मूल्य, दावा निपटान और फ्री-लुक अवधि जैसे विषयों में पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा करना, तथा बीमाकर्ताओं और मध्यवर्तियों के बीच विवादों का निपटारा करना। प्रत्येक बीमाकर्ता को प्राधिकरण द्वारा निर्धारित ग्रामीण तथा सामाजिक क्षेत्र के दायित्व भी पूरे करने होते हैं।
बीमा की शाखाएं और सिद्धांत
बीमा कारोबार जीवन बीमा तथा सामान्य या गैर-जीवन बीमा में बंटा है, और गैर-जीवन आगे अग्नि, समुद्री, मोटर, स्वास्थ्य तथा विविध कारोबार में बंटा है। जीवन कारोबार के लिए पंजीकृत कंपनी सामान्यतः सामान्य कारोबार नहीं कर सकती, यद्यपि स्वतंत्र स्वास्थ्य बीमाकर्ता एक अलग श्रेणी हैं। पुनर्बीमा वह बीमा है जो कोई बीमाकर्ता अपना जोखिम बांटने के लिए खरीदता है, और बैंकाश्योरेंस बैंक शाखाओं के माध्यम से बीमा की बिक्री है। यह अनुबंध स्थापित सिद्धांतों पर खड़ा है: बीमायोग्य हित, जिसके अनुसार बीमित को घटना से हानि होनी चाहिए; परम सद्भाव, जिसके अनुसार तात्विक तथ्य प्रकट करने होते हैं; क्षतिपूर्ति, जिसके अनुसार सामान्य बीमा का दावा हानि की पूर्ति करता है किंतु उससे अधिक नहीं देता, और यह सिद्धांत जीवन बीमा पर लागू नहीं होता; प्रत्यासन, जिसके अनुसार भुगतान के बाद बीमाकर्ता तीसरे पक्ष के विरुद्ध बीमित के अधिकार ले लेता है; अंशदान, जहां एक ही जोखिम पर दो पॉलिसी हों; और हानि न्यूनीकरण, जिसके अनुसार बीमित को फिर भी क्षति सीमित करने का प्रयास करना होता है।
पेंशन प्रणाली और उसका नियामक
भारत में तीन भिन्न पेंशन व्यवस्थाएं हैं और परीक्षक इनके बीच की सीमा जांचते हैं। पहली श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा चलाई जाने वाली भविष्य निधि प्रणाली है, जो 1952 के कर्मचारी भविष्य निधि तथा प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम के अंतर्गत 1952 की कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1995 की कर्मचारी पेंशन योजना और 1976 की कर्मचारी निक्षेप संबद्ध बीमा योजना संचालित करती है। दूसरी 2004 से पूर्व भर्ती सरकारी कर्मचारियों की परिभाषित लाभ पेंशन है। तीसरी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली है, जो परिभाषित अंशदान प्रणाली है और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा नियमित होती है।
यह प्राधिकरण अक्टूबर 2003 में अंतरिम निकाय के रूप में स्थापित हुआ और 2013 के पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम के अंतर्गत सांविधिक बना, जो 1 फरवरी 2014 को प्रवृत्त हुआ। इसमें एक अध्यक्ष और अधिकतम छह सदस्य होते हैं, जिनमें कम से कम तीन पूर्णकालिक सदस्य होते हैं, और इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करती है; इसका प्रधान कार्यालय नई दिल्ली में है। यह राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली तथा उन अन्य पेंशन योजनाओं का नियमन करता है जो किसी अन्य अधिनियम के अंतर्गत नहीं आतीं, इसी कारण कर्मचारी भविष्य निधि संगठन इसके दायरे से बाहर रहता है।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद सेवा में आए केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर अनिवार्य रूप से लागू होती है, सशस्त्र बलों को छोड़कर, और 1 मई 2009 से यह भारत के सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक आधार पर खोल दी गई। प्रत्येक अभिदाता को स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या मिलती है और वह टियर एक खाता रखता है, जो वास्तविक पेंशन खाता है और जिसमें केवल सीमित निकासी की अनुमति है, तथा वैकल्पिक रूप से टियर दो खाता, जो स्वैच्छिक बचत खाता है और जिससे अभिदाता स्वतंत्र रूप से निकासी कर सकता है। इसकी संरचना पृथक्कृत है: राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली न्यास परिसंपत्तियां धारण करता है, केंद्रीय अभिलेख रखरखाव अभिकरण खाते रखता है, पेंशन निधियां प्राधिकरण द्वारा निर्धारित निवेश प्रतिरूप के अनुसार धन का प्रबंधन करती हैं, उपस्थिति बिंदु अभिदाताओं का नामांकन करते हैं, और अभिरक्षक तथा न्यासी बैंक इस शृंखला को पूरा करते हैं।
स्मरणीय योजनाएं
| योजना | आरंभ | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| अटल पेंशन योजना | 2015, स्वावलंबन योजना के स्थान पर | 18 से 40 वर्ष के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए; 60 वर्ष की आयु से 1,000 से 5,000 रुपये मासिक की प्रत्याभूत पेंशन; पेंशन नियामक द्वारा संचालित |
| प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना | 2015 | 18 से 50 वर्ष के खाताधारकों के लिए 2 लाख रुपये का एक वर्षीय नवीकरणीय जीवन कवर |
| प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना | 2015 | 18 से 70 वर्ष के खाताधारकों के लिए 2 लाख रुपये का दुर्घटना मृत्यु तथा दिव्यांगता कवर |
| आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना | सितंबर 2018 | द्वितीयक तथा तृतीयक उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा संचालित |
| प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना | 2016 | फसल बीमा, जिसमें किसान खरीफ के लिए बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी के लिए 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत देता है |
अंत में एक भेद, जो सीधे पूछा जाता है: बीमा अनुबंध प्रीमियम के बदले जोखिम हस्तांतरित करता है, जबकि पेंशन उत्पाद बचत संचित करके उसे आय की धारा में बदलता है, इसी कारण कानून वार्षिकी कारोबार को बीमा मानता है किंतु राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली को एक भिन्न नियामक के अधीन पेंशन योजना मानता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय से चार प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, संस्था और उसका वर्ष: बीमा अधिनियम के लिए 1938, भारतीय जीवन बीमा निगम के लिए 1956, सामान्य बीमा राष्ट्रीयकरण के लिए 1972, बीमा नियामक के लिए 1999 तथा अप्रैल 2000, और पेंशन नियामक के लिए 2003, 2013 तथा 1 फरवरी 2014। दूसरा, मुख्यालय, जहां बीमा प्राधिकरण के लिए हैदराबाद और पेंशन प्राधिकरण के लिए नई दिल्ली नियमित रूप से आपस में बदल दिए जाते हैं। तीसरा, विदेशी निवेश की सीढ़ी 26, 49 और 74 प्रतिशत, वर्षों 1999, 2015 तथा 2021 के साथ। चौथा, योजनाओं के विवरण: अटल पेंशन योजना के लिए 18 से 40 वर्ष, जीवन ज्योति जीवन कवर के लिए 18 से 50, सुरक्षा दुर्घटना कवर के लिए 18 से 70, आयुष्मान भारत में 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर और फसल बीमा में 2, 1.5 तथा 5 प्रतिशत के प्रीमियम अंश। बैंकिंग परीक्षाएं बीमा के सिद्धांत भी पूछती हैं, विशेषकर यह कि क्षतिपूर्ति जीवन बीमा पर लागू नहीं होती, तथा यह कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन पेंशन नियामक के दायरे से बाहर है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मुख्य बीमा कानून | बीमा अधिनियम, 1938 |
|---|---|
| भारतीय जीवन बीमा निगम | 1 सितंबर 1956 को स्थापित; प्रधान कार्यालय मुंबई |
| सामान्य बीमा राष्ट्रीयकरण | सामान्य बीमा कारोबार राष्ट्रीयकरण अधिनियम, 1972 |
| चार सामान्य बीमाकर्ता | नेशनल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस |
| राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता | भारतीय सामान्य बीमा निगम, 2000 में पुनर्गठित |
| मल्होत्रा समिति | 1993, बीमा क्षेत्र सुधार पर, रिज़र्व बैंक के एक पूर्व गवर्नर के अधीन |
| बीमा नियामक | 1999 का अधिनियम, अप्रैल 2000 से सांविधिक, मुख्यालय हैदराबाद |
| बीमा नियामक की संरचना | अध्यक्ष, अधिकतम पांच पूर्णकालिक और अधिकतम चार अंशकालिक सदस्य |
| विदेशी निवेश सीमा | 1999 में 26 प्रतिशत, 2015 में 49 प्रतिशत, 2021 के अधिनियम से 74 प्रतिशत |
| पेंशन नियामक | अक्टूबर 2003 में अंतरिम निकाय; 2013 का अधिनियम 1 फरवरी 2014 से प्रवृत्त; मुख्यालय नई दिल्ली |
| पेंशन नियामक की संरचना | अध्यक्ष और अधिकतम छह सदस्य, कम से कम तीन पूर्णकालिक |
| राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली | केंद्रीय भर्तियों के लिए 1 जनवरी 2004 से अनिवार्य; सभी नागरिकों के लिए 1 मई 2009 से स्वैच्छिक |
| अटल पेंशन योजना | 2015, आयु 18 से 40, 60 वर्ष से 1,000 से 5,000 रुपये मासिक पेंशन |
| आयुष्मान भारत पीएम-जय | सितंबर 2018, प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण का मुख्यालय किस नगर में है?
- A.मुंबई
- B.नई दिल्ली
- C.हैदराबाद
- D.बेंगलुरु
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, हैदराबाद है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण 1999 के अधिनियम के अंतर्गत गठित हुआ, अप्रैल 2000 में सांविधिक निकाय बना और उसका प्रधान कार्यालय हैदराबाद में है, जहां वह अपने आरंभिक वर्षों में दिल्ली से स्थानांतरित हुआ था। विकल्प A गलत है क्योंकि मुंबई भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय सामान्य बीमा निगम तथा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड का प्रधान कार्यालय है, जिससे वह यहां स्वाभाविक किंतु गलत विकल्प बन जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि नई दिल्ली में पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण बैठता है, अर्थात इस विषय के दोनों नियामकों के नगर भिन्न हैं और प्रश्नों में उन्हें प्रायः आपस में बदल दिया जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि बेंगलुरु में इस प्रकार का कोई वित्तीय क्षेत्र नियामक नहीं है। स्मरण रखने योग्य युग्म है: बीमा नियामक हैदराबाद में और पेंशन नियामक नई दिल्ली में।
जिस समिति की सिफारिशों से भारतीय बीमा क्षेत्र खुला और उसका नियामक बना, उसके अध्यक्ष कौन थे?
- A.आर. एन. मल्होत्रा
- B.नरसिंहम
- C.रघुराम राजन
- D.वाई. वी. रेड्डी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, आर. एन. मल्होत्रा है। बीमा क्षेत्र सुधार समिति 1993 में भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर आर. एन. मल्होत्रा की अध्यक्षता में नियुक्त हुई। उसने निजी तथा विदेशी भागीदारी की अनुमति देने, बीमाकर्ताओं के लिए पूंजी अपेक्षा बढ़ाने और एक स्वतंत्र विनियामक प्राधिकरण बनाने की सिफारिश की, और उसी से 1999 का बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम आया। विकल्प B गलत है क्योंकि 1991 और 1998 की नरसिंहम समितियां बैंकिंग क्षेत्र सुधार, विवेकपूर्ण मानदंड तथा बैंकिंग प्रणाली की संरचना से संबंधित थीं, बीमा से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि रघुराम राजन ने 2008 में वित्तीय क्षेत्र सुधार समिति की अध्यक्षता की और बाद में रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे, किंतु बीमा नियामक उस कार्य से पहले का है। विकल्प D गलत है क्योंकि वाई. वी. रेड्डी रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे और वित्त आयोग तथा मौद्रिक नीति से जुड़े हैं, इस समिति से नहीं।
भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.1938
- B.1956
- C.1972
- D.1999
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 1956 है। भारतीय जीवन बीमा निगम 1 सितंबर 1956 को जीवन बीमा निगम अधिनियम के अंतर्गत अस्तित्व में आया, जिसने भारत में जीवन बीमा का राष्ट्रीयकरण किया और लगभग दो सौ पैंतालीस बीमाकर्ताओं का कारोबार अपने हाथ में लिया; उसका प्रधान कार्यालय मुंबई में है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1938 बीमा अधिनियम का वर्ष है, जो आज भी क्षेत्र का मुख्य कानून है किंतु उसने निगम नहीं बनाया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1972 सामान्य बीमा कारोबार राष्ट्रीयकरण अधिनियम का वर्ष है, जिसने सामान्य बीमा का राष्ट्रीयकरण किया और चार अनुषंगी कंपनियों के साथ भारतीय सामान्य बीमा निगम बनाया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1999 उस अधिनियम का वर्ष है जिसने बीमा नियामक स्थापित किया, और वह अप्रैल 2000 में सांविधिक निकाय बना। 1938, 1956, 1972, 1999 का क्रम एक शृंखला के रूप में स्मरण रखने योग्य है।
पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण किस वर्ष के अधिनियम के अंतर्गत सांविधिक निकाय बना?
- A.2003
- B.2009
- C.2013
- D.2015
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2013 है। यह प्राधिकरण पहले अक्टूबर 2003 के सरकारी संकल्प से बने अंतरिम निकाय के रूप में कार्य करता था, और उसे 2013 के पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम द्वारा सांविधिक दर्जा मिला, जो 1 फरवरी 2014 को प्रवृत्त हुआ। विकल्प A गलत है क्योंकि 2003 अंतरिम निकाय का वर्ष है, जिसे परीक्षक प्रायः निकट भ्रम के रूप में रखते हैं; तब प्राधिकरण को कोई सांविधिक आधार नहीं था। विकल्प B गलत है क्योंकि 1 मई 2009 वह तिथि है जिससे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली भारत के सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक आधार पर खोली गई, अधिनियम की तिथि नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2015 बीमा विधि संशोधन अधिनियम का वर्ष है, जिसने बीमा नियामक का नाम बदला और विदेशी निवेश उनचास प्रतिशत किया, तथा उसी वर्ष अटल पेंशन योजना आरंभ हुई।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली केंद्र सरकार के उन कर्मचारियों पर अनिवार्य की गई जो किस तिथि को या उसके बाद सेवा में आए?
- A.1 अप्रैल 2000
- B.1 जनवरी 2004
- C.1 मई 2009
- D.1 फरवरी 2014
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 1 जनवरी 2004 है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, जो परिभाषित अंशदान व्यवस्था है, 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद सेवा में आए केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर अनिवार्य रूप से लागू होती है, और सशस्त्र बल इससे बाहर हैं; उस तिथि से पूर्व भर्ती कर्मचारी पुरानी परिभाषित लाभ पेंशन के अंतर्गत रहते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि अप्रैल 2000 में बीमा नियामक सांविधिक निकाय बना था, यह पेंशन से जुड़ा पड़ाव नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1 मई 2009 वह तिथि है जिससे यह प्रणाली भारत के सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक आधार पर विस्तारित हुई, जो एक भिन्न और समान रूप से परीक्षायोग्य तिथि है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1 फरवरी 2014 को 2013 का पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम प्रवृत्त हुआ। तीनों तिथियां साथ रखें: सरकारी कर्मचारियों के लिए 2004, सभी नागरिकों के लिए 2009, अधिनियम के लिए 2014।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत टियर एक और टियर दो खातों के विषय में निम्नलिखित में से कौन सही है?
- A.टियर एक स्वैच्छिक है और टियर दो अनिवार्य है
- B.टियर एक सीमित निकासी वाला पेंशन खाता है और टियर दो स्वैच्छिक बचत खाता है
- C.दोनों खातों में कभी भी मुक्त निकासी की अनुमति है
- D.टियर दो खाता टियर एक खाते के बिना खोला जा सकता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत अभिदाता स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या तथा एक टियर एक खाता रखता है, जो वास्तविक पेंशन खाता है और सेवानिवृत्ति से पूर्व केवल सीमित निकासी की अनुमति देता है, और वह अतिरिक्त रूप से टियर दो खाता खोल सकता है, जो स्वैच्छिक बचत खाता है और जिससे धन स्वतंत्र रूप से निकाला जा सकता है। विकल्प A गलत है क्योंकि वह दोनों को उलट देता है, जो इस प्रश्न की सबसे सामान्य भूल है। विकल्प C गलत है क्योंकि मुक्त निकासी केवल टियर दो की विशेषता है; यदि टियर एक में भी यह होती तो योजना पेंशन व्यवस्था ही न रहती। विकल्प D गलत है क्योंकि टियर दो एक अतिरिक्त खाता है और स्वतंत्र रूप से नहीं रह सकता: उसे खोलने के लिए सक्रिय टियर एक खाता पूर्व शर्त है। इन खातों के चारों ओर की संरचना, अर्थात न्यास, अभिलेख रखरखाव अभिकरण, पेंशन निधियां तथा उपस्थिति बिंदु, भी पूछी जाती है।
अटल पेंशन योजना किस आयु वर्ग के अभिदाताओं के लिए खुली है?
- A.18 से 40 वर्ष
- B.18 से 50 वर्ष
- C.21 से 50 वर्ष
- D.25 से 60 वर्ष
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, 18 से 40 वर्ष है। अटल पेंशन योजना 2015 में पूर्ववर्ती स्वावलंबन योजना के स्थान पर आरंभ हुई और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए है। अभिदाता की आयु जुड़ते समय अठारह से चालीस वर्ष के बीच होनी चाहिए, जिससे साठ वर्ष की आयु में एक हजार से पांच हजार रुपये मासिक की प्रत्याभूत पेंशन आरंभ होने से पूर्व कम से कम बीस वर्ष का अंशदान हो जाए। इसका संचालन पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि अठारह से पचास प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की पात्र आयु सीमा है, जो जीवन बीमा कवर है। विकल्प C गलत है क्योंकि इस योजना में ऐसी कोई सीमा नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि उनसठ वर्ष में जुड़ने पर संचय की अवधि ही शेष न रहेगी, इसीलिए ऊपरी सीमा चालीस वर्ष है।
बीमा का कौन सा सिद्धांत कहता है कि बीमित वास्तविक हानि से अधिक वसूल नहीं कर सकता, और जो जीवन बीमा पर लागू नहीं होता?
- A.परम सद्भाव
- B.क्षतिपूर्ति
- C.प्रत्यासन
- D.बीमायोग्य हित
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, क्षतिपूर्ति है। क्षतिपूर्ति के सिद्धांत का अर्थ है कि सामान्य बीमा का दावा बीमित को हानि से पूर्व की स्थिति में लौटाता है किंतु वास्तविक हानि से अधिक कभी नहीं देता, इसीलिए मोटर या अग्नि दावे का निपटान क्षति के मूल्य पर होता है। यह जीवन बीमा पर लागू नहीं होता, क्योंकि मानव जीवन का कोई मापनीय धन मूल्य नहीं होता और बीमित राशि पहले ही तय कर दी जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि परम सद्भाव दोनों पक्षों से सभी तात्विक तथ्य प्रकट करने की अपेक्षा करता है, और वह जीवन बीमा सहित प्रत्येक बीमा अनुबंध पर लागू होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रत्यासन का अर्थ है कि दावा चुकाने के बाद बीमाकर्ता हानि के लिए उत्तरदायी किसी तीसरे पक्ष के विरुद्ध बीमित के अधिकार ले लेता है। विकल्प D गलत है क्योंकि बीमायोग्य हित का अर्थ है कि बीमित को उस घटना से हानि होनी चाहिए जिसके विरुद्ध बीमा कराया गया है, और वह भी जीवन बीमा पर लागू होता है।
कौन सा संगठन 1995 की कर्मचारी पेंशन योजना संचालित करता है और पेंशन नियामक के अधीन नहीं है?
- A.कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
- B.भारतीय जीवन बीमा निगम
- C.राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली न्यास
- D.भारतीय सामान्य बीमा निगम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन है। वह श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और 1952 के कर्मचारी भविष्य निधि तथा प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम के अंतर्गत तीन योजनाएं संचालित करता है: 1952 की कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1995 की कर्मचारी पेंशन योजना और 1976 की कर्मचारी निक्षेप संबद्ध बीमा योजना। चूंकि ये अपने ही अधिनियम से शासित हैं, वे पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण के दायरे से बाहर पड़ती हैं, जो राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली तथा उन पेंशन योजनाओं का नियमन करता है जो किसी अन्य कानून के अंतर्गत नहीं हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि भारतीय जीवन बीमा निगम एक बीमाकर्ता है जो बीमा प्राधिकरण के अधीन है। विकल्प C गलत है क्योंकि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली न्यास उस प्रणाली की परिसंपत्तियां धारण करता है और पेंशन नियामक के अधीन है। विकल्प D गलत है क्योंकि भारतीय सामान्य बीमा निगम राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता है।
2021 के बीमा संशोधन अधिनियम ने किसी भारतीय बीमा कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा कितनी कर दी?
- A.26 प्रतिशत
- B.49 प्रतिशत
- C.74 प्रतिशत
- D.100 प्रतिशत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 74 प्रतिशत है। 2021 के बीमा संशोधन अधिनियम ने 1938 के बीमा अधिनियम में संशोधन करके किसी भारतीय बीमा कंपनी में अनुमेय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश चौहत्तर प्रतिशत कर दिया, और इसके साथ ऐसी शर्तें रखीं जो प्रबंधन तथा नियंत्रण भारतीय हाथों में रखें। विकल्प A गलत है क्योंकि छब्बीस प्रतिशत वह मूल सीमा थी जो 1999 के अधिनियम के अंतर्गत क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलते समय तय हुई थी। विकल्प B गलत है क्योंकि उनचास प्रतिशत 2015 के बीमा विधि संशोधन अधिनियम द्वारा तय मध्यवर्ती सीमा थी, और उसी अधिनियम ने नियामक का नाम भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण किया। विकल्प D इस अधिनियम के विवरण के रूप में गलत है, क्योंकि 2021 का अधिनियम चौहत्तर प्रतिशत पर रुका। इस सीढ़ी को क्रम के रूप में याद रखें: 1999 में 26, 2015 में 49 और 2021 में 74।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ फसल के लिए किसान बीमित राशि का कितना अंश प्रीमियम के रूप में देता है?
- A.1.5 प्रतिशत
- B.2 प्रतिशत
- C.5 प्रतिशत
- D.10 प्रतिशत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 2 प्रतिशत है। 2016 में आरंभ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ के खाद्य तथा तिलहन फसलों के लिए किसान का प्रीमियम अंश बीमित राशि का दो प्रतिशत तय करती है, और शेष बीमांकिक प्रीमियम केंद्र तथा राज्य सरकारें मिलकर वहन करती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि डेढ़ प्रतिशत रबी फसलों के लिए किसान का अंश है, और यही आंकड़ा खरीफ की दर से सर्वाधिक बदला जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि पांच प्रतिशत वार्षिक वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों पर लागू होता है, जिनमें जोखिम अधिक रहता है। विकल्प D गलत है क्योंकि दस प्रतिशत इस योजना में कोई दर ही नहीं है। तीनों दरें, अर्थात खरीफ के लिए दो, रबी के लिए डेढ़ और वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों के लिए पांच, एक मानक एक अंक का प्रश्न हैं।
2000 में सामान्य बीमा की अनुषंगी कंपनियां अलग होने के बाद कौन निकाय भारत का राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता बना?
- A.भारतीय जीवन बीमा निगम
- B.भारतीय सामान्य बीमा निगम
- C.न्यू इंडिया एश्योरेंस
- D.निर्यात ऋण गारंटी निगम
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व्याख्या
सही उत्तर B, भारतीय सामान्य बीमा निगम है। वह 1972 के सामान्य बीमा कारोबार राष्ट्रीयकरण अधिनियम के अंतर्गत चार अनुषंगी कंपनियों वाली धारक कंपनी के रूप में बना था, अर्थात नेशनल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया एश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस। जब क्षेत्र निजी बीमाकर्ताओं के लिए खुला, तब 2000 में चारों अनुषंगियां अलग कर दी गईं और निगम को राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता के रूप में पुनर्गठित किया गया, इसलिए अब वह जनता का नहीं, बीमाकर्ताओं का बीमा करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि भारतीय जीवन बीमा निगम 1956 में बना जीवन बीमाकर्ता है और उसके पास पुनर्बीमा का कार्यादेश नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि न्यू इंडिया एश्योरेंस उन चार अलग की गई अनुषंगियों में से एक है और साधारण सामान्य बीमा करती है। विकल्प D गलत है क्योंकि निर्यात ऋण गारंटी निगम निर्यातकों को भुगतान जोखिम से कवर देता है और राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में बीमा का नियमन कौन प्राधिकरण करता है और वह कहां स्थित है?
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, जो 1999 के अधिनियम से बना और अप्रैल 2000 से सांविधिक है, तथा जिसका प्रधान कार्यालय हैदराबाद में है। इसमें एक अध्यक्ष, अधिकतम पांच पूर्णकालिक सदस्य और अधिकतम चार अंशकालिक सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करती है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन पेंशन नियामक के अधीन क्यों नहीं है?
क्योंकि 2013 का पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली तथा उन पेंशन योजनाओं को ढकता है जो किसी अन्य अधिनियम के अंतर्गत नहीं हैं। संगठन की भविष्य निधि तथा पेंशन योजनाएं 1952 के कर्मचारी भविष्य निधि तथा प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम से शासित हैं और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के पास रहती हैं।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में टियर एक और टियर दो खातों में क्या अंतर है?
टियर एक वास्तविक पेंशन खाता है, जिसमें सेवानिवृत्ति से पूर्व निकासी सीमित है, और अभिदाता के लिए वह अनिवार्य है। टियर दो एक वैकल्पिक बचत खाता है जिससे धन स्वतंत्र रूप से निकाला जा सकता है, और वह केवल उसी व्यक्ति द्वारा खोला जा सकता है जिसके पास पहले से सक्रिय टियर एक खाता हो।
भारतीय बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा समय के साथ कैसे बदली?
1999 के अधिनियम के अंतर्गत क्षेत्र खुलने पर वह छब्बीस प्रतिशत से आरंभ हुई, 2015 के बीमा विधि संशोधन अधिनियम से उनचास प्रतिशत हुई, और 2021 के बीमा संशोधन अधिनियम से चौहत्तर प्रतिशत कर दी गई, तथा भारतीय प्रबंधन और नियंत्रण बनाए रखने की रक्षोपाय शर्तें रखी गईं।
क्या क्षतिपूर्ति का सिद्धांत जीवन बीमा पर लागू होता है?
नहीं। क्षतिपूर्ति का अर्थ है कि दावा वास्तविक हानि से अधिक नहीं दे सकता, जो संपत्ति, मोटर और स्वास्थ्य बीमा में चलता है। मानव जीवन का कोई मापनीय धन मूल्य नहीं होता, इसलिए जीवन बीमा पहले से तय बीमित राशि देता है और वह क्षतिपूर्ति का अनुबंध नहीं है।
अटल पेंशन योजना किसकी प्रत्याभूति देती है?
चुने गए अंशदान के अनुसार साठ वर्ष की आयु से एक हजार से पांच हजार रुपये मासिक की निश्चित पेंशन। यह अठारह से चालीस वर्ष के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए खुली है, 2015 में पूर्ववर्ती स्वावलंबन योजना के स्थान पर आई और इसका संचालन पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण करता है।
स्रोत
- प्राधिकरण का परिचय तथा कार्य — भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
- राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली तथा अटल पेंशन योजना — पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण





