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भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र: प्राथमिक से तृतीयक तक

परीक्षा के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों पर नोट्स: प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक गतिविधि, संगठित और असंगठित रोजगार, स्वामित्व एवं रोजगार योजनाएँ।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र: प्राथमिक से तृतीयक तक — GK24 title card
भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र: प्राथमिक से तृतीयक तक — GK24 title card

कोई भी अर्थव्यवस्था हजारों प्रकार की वस्तुएँ और सेवाएँ पैदा करती है, और उन्हें एक-एक करके पढ़ना संभव नहीं। इसलिए अर्थशास्त्री गतिविधियों को क्षेत्रों में बाँटते हैं, और वह भी एक साथ तीन अलग-अलग आधारों पर: गतिविधि की प्रकृति के आधार पर, रोजगार की शर्तों के आधार पर, और उद्यम के स्वामित्व के आधार पर। परीक्षा का प्रश्न लगभग हमेशा यही जाँचता है कि किस वर्गीकरण की बात हो रही है, इसलिए तीनों सूचियाँ अलग-अलग याद कीजिए और कभी मिलाइए मत।

गतिविधि की प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण

पहला वर्गीकरण अर्थव्यवस्था को इस आधार पर तीन क्षेत्रों में बाँटता है कि गतिविधि प्रकृति से कितनी दूर है।

क्षेत्रक्या सम्मिलित हैअन्य नाम
प्राथमिककृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्य पालन और खननकृषि एवं संबद्ध क्षेत्र
द्वितीयकविनिर्माण, निर्माण कार्य, बिजली, गैस और जल आपूर्तिऔद्योगिक क्षेत्र
तृतीयकपरिवहन, भंडारण, संचार, व्यापार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनसेवा क्षेत्र

प्राथमिक क्षेत्र अपनी उपज सीधे प्राकृतिक संसाधनों से लेता है। द्वितीयक क्षेत्र उस उपज का रूप बदलता है: कपास से कपड़ा, गन्ने से चीनी, लौह अयस्क से इस्पात। तृतीयक क्षेत्र कोई वस्तु बनाता ही नहीं; वह पहले दोनों की सहायता करता है, वस्तुओं को ढोकर, भंडारित करके, वित्त देकर, बीमा करके और बेचकर, और साथ ही शिक्षा तथा चिकित्सा जैसी सेवाएँ भी देता है जिनकी लोगों को स्वयं आवश्यकता होती है। कुछ विद्वान अनुसंधान, सॉफ्टवेयर और परामर्श जैसी ज्ञान सेवाओं के लिए चतुर्थक क्षेत्र और सर्वोच्च निर्णय के स्तर के लिए पंचम क्षेत्र भी जोड़ते हैं, परंतु परीक्षाओं के लिए तीन का विभाजन ही महत्वपूर्ण है।

विकास के साथ उत्पादन में प्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा घटता है और पहले द्वितीयक तथा फिर तृतीयक का बढ़ता है। भारत असामान्य उदाहरण है: सेवा क्षेत्र राष्ट्रीय आय में सबसे बड़ा योगदान देने लगा जबकि प्राथमिक क्षेत्र अब भी सबसे अधिक लोगों को रोजगार देता रहा। उत्पादन के हिस्से और रोजगार के हिस्से का यही अंतर भारतीय क्षेत्रों का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है, और यही कारण है कि कृषि में आय कम रहती है।

रोजगार की शर्तों के आधार पर वर्गीकरण

दूसरा वर्गीकरण काम को संगठित और असंगठित क्षेत्र में बाँटता है। संगठित क्षेत्र में वे उद्यम आते हैं जो सरकार के पास पंजीकृत हैं और कारखाना अधिनियम तथा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम जैसे कानूनों का पालन करते हैं। यहाँ काम नियमित है, घंटे निश्चित हैं, और कर्मचारी को लिखित अनुबंध, सवेतन अवकाश, भविष्य निधि, उपदान तथा चिकित्सा सुविधा का अधिकार है। असंगठित क्षेत्र छोटी और बिखरी इकाइयों से बना है जो प्रायः सरकारी नियंत्रण से बाहर हैं: छोटी दुकानें, सड़क किनारे की मरम्मत, दिहाड़ी निर्माण मजदूरी, हथकरघा बुनाई और अधिकांश खेती का काम। यहाँ रोजगार अनियमित और कम वेतन वाला है, न नौकरी की सुरक्षा है और न सामाजिक सुरक्षा।

भारत के अधिकांश श्रमिक असंगठित क्षेत्र में हैं, जिनमें छोटे और सीमांत किसान, भूमिहीन मजदूर, कारीगर तथा प्रवासी श्रमिक आते हैं। उनकी रक्षा का अर्थ है उनके काम को ऋण, कच्चे माल और बाजार तक पहुँच देकर सहारा देना और साथ ही सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना।

स्वामित्व के आधार पर वर्गीकरण

तीसरा वर्गीकरण देखता है कि संपत्ति का स्वामी कौन है और सेवाएँ कौन देता है। सार्वजनिक क्षेत्र में सरकार उद्यम की स्वामी है और उसे चलाती है, तथा उद्देश्य लाभ नहीं बल्कि जनकल्याण होता है, इसीलिए रेल, सड़क, सिंचाई, बिजली, बंदरगाह और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे काम वही उठाती है, जहाँ निवेश भारी और प्रतिफल धीमा होता है। निजी क्षेत्र में स्वामित्व व्यक्तियों या कंपनियों के पास होता है और उद्देश्य लाभ कमाना होता है। दोनों आवश्यक हैं, और बैंकिंग तथा दूरसंचार जैसी कई सेवाओं में आज दोनों प्रकार के उद्यम साथ-साथ काम करते हैं।

रोजगार, अल्प रोजगार और सरकारी योजनाएँ

भारत में बेरोजगारी कई रूपों में मिलती है। प्रच्छन्न बेरोजगारी, जिसे छिपी बेरोजगारी भी कहते हैं, वहाँ होती है जहाँ किसी काम पर आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों, इतने कि कुछ के हट जाने पर भी उत्पादन नहीं घटेगा; यह पारिवारिक खेतों और छोटी दुकानों में आम है। मौसमी बेरोजगारी तब होती है जब काम वर्ष के कुछ ही महीनों में मिलता है, जो फिर कृषि की विशेषता है। खुली बेरोजगारी का अर्थ है प्रचलित मजदूरी पर काम करने को तैयार व्यक्ति को काम का बिल्कुल न मिलना।

इसी के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 में पारित हुआ और अगले वर्ष लागू हुआ। यह हर उस ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित करता है जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार हों, और यदि पंद्रह दिन के भीतर काम न मिले तो बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान करता है। इसे अधिकार आधारित कानून कहा जाता है, क्योंकि यह गारंटी माँगी नहीं बल्कि अधिकार के रूप में दावा की जा सकती है।

क्षेत्रों के उत्पादन का मापन

किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य उसका सकल घरेलू उत्पाद कहलाता है। केवल अंतिम वस्तुएँ गिनी जाती हैं, क्योंकि मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य उन्हीं में सम्मिलित है और दोनों गिनने पर दोहरी गणना हो जाएगी। भारत में ये अनुमान सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय तैयार करता है, और वे क्षेत्रवार प्रकाशित होते हैं, जिससे प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक गतिविधि का बदलता संतुलन दिखाई देता है।

परीक्षा की दृष्टि से

परीक्षक की प्रिय चाल तीनों वर्गीकरणों को आपस में मिला देना है। जिस प्रश्न में चीनी मिल, बैंक और गेहूँ का खेत दिए हों वह प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक का भेद जाँच रहा है, जिसमें भविष्य निधि और सवेतन अवकाश की बात हो वह संगठित बनाम असंगठित जाँच रहा है, और जिसमें स्वामित्व की बात हो वह सार्वजनिक बनाम निजी। कौन सी गतिविधि किस क्षेत्र में है यह अवश्य याद रखिए, क्योंकि खनन प्राथमिक क्षेत्र में और बिजली तथा जल आपूर्ति द्वितीयक क्षेत्र में रखी जाती है, और दोनों में प्रायः भूल होती है। मनरेगा से निश्चित प्रश्न बनते हैं: वर्ष 2005, सौ दिन की गारंटी, परिवार को इकाई मानना, और पंद्रह दिन बाद बेरोजगारी भत्ता। प्रच्छन्न, मौसमी तथा खुली बेरोजगारी की परिभाषाएँ भी सीधे पूछी जाती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

प्राथमिक क्षेत्रकृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्य पालन और खनन
द्वितीयक क्षेत्रविनिर्माण, निर्माण कार्य, बिजली, गैस और जल आपूर्ति
तृतीयक क्षेत्रपरिवहन, व्यापार, बैंकिंग, बीमा, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य
तृतीयक का दूसरा नामसेवा क्षेत्र
संगठित क्षेत्रपंजीकृत उद्यम, निश्चित घंटे, सवेतन अवकाश, भविष्य निधि और नौकरी की सुरक्षा
सार्वजनिक और निजी का आधारसंपत्ति का स्वामित्व और सेवाओं की व्यवस्था
प्रच्छन्न बेरोजगारीकाम पर आवश्यकता से अधिक लोग; कुछ के हटने पर भी उत्पादन नहीं घटता
मनरेगा2005 में पारित; प्रति ग्रामीण परिवार वर्ष में 100 दिन का मजदूरी रोजगार
बेरोजगारी भत्तामनरेगा में माँग के पंद्रह दिन के भीतर काम न मिलने पर देय
सकल घरेलू उत्पादएक वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य
भारत में जीडीपी अनुमानसांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा तैयार
ऑपरेशन फ्लड1970 में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए आरंभ, नेतृत्व वर्गीज कुरियन ने किया

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

खनन अर्थव्यवस्था के किस क्षेत्र में आता है?

  1. A.प्राथमिक क्षेत्र
  2. B.द्वितीयक क्षेत्र
  3. C.तृतीयक क्षेत्र
  4. D.चतुर्थक क्षेत्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. प्राथमिक क्षेत्र

व्याख्या

सही उत्तर A, प्राथमिक क्षेत्र है। खनन प्रकृति से सीधे उत्पाद निकालता है और उसका रूप नहीं बदलता, ठीक वैसे ही जैसे खेती, मत्स्य पालन और वानिकी करते हैं, और इसी प्रकार की हर गतिविधि प्राथमिक क्षेत्र में रखी जाती है।

विकल्प B, द्वितीयक क्षेत्र तभी सही होता जब अयस्क का प्रसंस्करण हो जाए: लौह अयस्क से इस्पात बनाना विनिर्माण है और इसलिए द्वितीयक है। विकल्प C, तृतीयक क्षेत्र में परिवहन, व्यापार और बैंकिंग जैसी सेवाएँ आती हैं जो स्वयं कोई वस्तु नहीं बनातीं। विकल्प D, चतुर्थक क्षेत्र अनुसंधान और सॉफ्टवेयर जैसी ज्ञान सेवाओं के लिए आधुनिक विस्तार है और परीक्षाओं के तीन क्षेत्रों वाले वर्गीकरण में नहीं आता। भारी काम होने के कारण अभ्यर्थी खनन को द्वितीयक मान बैठते हैं, इसलिए कसौटी याद रखिए: जो सीधे प्रकृति से मिले वह प्राथमिक है।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

अर्थव्यवस्था के किस क्षेत्र को सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है?

  1. A.प्राथमिक क्षेत्र
  2. B.द्वितीयक क्षेत्र
  3. C.तृतीयक क्षेत्र
  4. D.सार्वजनिक क्षेत्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. तृतीयक क्षेत्र

व्याख्या

सही उत्तर C, तृतीयक क्षेत्र है। यह कोई वस्तु नहीं बनाता; यह परिवहन, भंडारण, संचार, व्यापार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा प्रशासन जैसी सेवाएँ देता है, इसीलिए इसे सामान्यतः सेवा क्षेत्र कहा जाता है।

विकल्प A, प्राथमिक क्षेत्र को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र भी कहते हैं, और विकल्प B, द्वितीयक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र, अर्थात तीनों के दो-दो नाम हैं और प्रश्नपत्र इसी भ्रम का लाभ उठाते हैं। विकल्प D, सार्वजनिक क्षेत्र बिल्कुल दूसरे वर्गीकरण का है, जो स्वामित्व पर आधारित है, गतिविधि की प्रकृति पर नहीं; कोई सार्वजनिक उद्यम तीनों में से किसी भी क्षेत्र में हो सकता है, जैसे सरकारी कोयला खान, इस्पात संयंत्र या बैंक। तीनों वर्गीकरणों को अलग रखना ही इस अध्याय का मुख्य कौशल है, और इसी कारण प्रश्न में दिए शब्दों को ध्यान से पढ़िए कि बात गतिविधि की हो रही है, रोजगार की शर्तों की या स्वामित्व की।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में प्रच्छन्न बेरोजगारी सबसे अधिक किस क्षेत्र में पाई जाती है?

  1. A.कृषि
  2. B.सूचना प्रौद्योगिकी
  3. C.बैंकिंग
  4. D.खनन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. कृषि

व्याख्या

सही उत्तर A, कृषि है। छोटी पारिवारिक जोत पर घर के सभी सदस्य खेत में लगे रहते हैं जबकि काम को उससे बहुत कम हाथ चाहिए; यदि कुछ लोग हटा लिए जाएँ तो कुल उत्पादन नहीं घटेगा। इसका अर्थ है कि उनका श्रम कुछ नहीं जोड़ रहा, और यही प्रच्छन्न या छिपी बेरोजगारी कहलाती है।

विकल्प B, सूचना प्रौद्योगिकी और विकल्प C, बैंकिंग संगठित सेवा गतिविधियाँ हैं जहाँ पद स्वीकृत होते हैं और इस प्रकार अतिरिक्त कर्मचारी नहीं रखे जाते। विकल्प D, खनन अधिकांशतः संगठित और पूँजी प्रधान है। बेरोजगारी के अन्य रूप भी साथ याद कीजिए: मौसमी बेरोजगारी, जिसमें काम वर्ष के कुछ ही महीनों में मिलता है और जो कृषि में ही होती है, तथा खुली बेरोजगारी, जिसमें काम करने को तैयार व्यक्ति को काम मिलता ही नहीं।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

मनरेगा एक ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में कितने दिन का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित करता है?

  1. A.50 दिन
  2. B.100 दिन
  3. C.150 दिन
  4. D.200 दिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 100 दिन

व्याख्या

सही उत्तर B, 100 दिन है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, जो 2005 में पारित हुआ, हर उस ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित करता है जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार हों।

विकल्प A, C और D केवल गोल संख्याएँ हैं जिनका अधिनियम में कोई आधार नहीं। दो और बातें उतनी ही बार पूछी जाती हैं। पहली, गारंटी की इकाई परिवार है, व्यक्ति नहीं, इसलिए सौ दिन एक ही परिवार के वयस्कों में बँटते हैं। दूसरी, माँग के पंद्रह दिन के भीतर काम न मिलने पर राज्य सरकार पर बेरोजगारी भत्ता देने का दायित्व आ जाता है। इन्हीं दावों के कारण यह कल्याण कार्यक्रम नहीं बल्कि अधिकार आधारित कानून है, जिसे सरकार की इच्छा पर नहीं छोड़ा गया बल्कि जिसका पालन ग्रामीण परिवार माँग कर करा सकता है।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत के सर्वाधिक श्रमिकों को रोजगार कौन सा क्षेत्र देता है?

  1. A.प्राथमिक क्षेत्र
  2. B.द्वितीयक क्षेत्र
  3. C.तृतीयक क्षेत्र
  4. D.चतुर्थक क्षेत्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. प्राथमिक क्षेत्र

व्याख्या

सही उत्तर A, प्राथमिक क्षेत्र है। कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियाँ आज भी सबसे अधिक भारतीयों को काम देती हैं, यद्यपि राष्ट्रीय आय में इस क्षेत्र का योगदान उस रोजगार हिस्से की तुलना में कहीं कम है।

विकल्प C, तृतीयक क्षेत्र कठिन विकल्प है, क्योंकि राष्ट्रीय आय में सबसे बड़ा हिस्सा सेवाओं का ही है; परंतु आय का हिस्सा और रोजगार का हिस्सा दो अलग प्रश्न हैं, और प्रश्नपत्र दोनों को साथ रखकर उसी अभ्यर्थी को पकड़ते हैं जिसने केवल एक पंक्ति रटी हो। विकल्प B, द्वितीयक क्षेत्र ने उन देशों में बड़ी श्रमशक्ति खपाई जो पहले औद्योगिक हुए, भारत में उस पैमाने पर यह नहीं हुआ। विकल्प D, चतुर्थक क्षेत्र बाद का विस्तार है। उत्पादन और रोजगार का यही अंतर कृषि में कम आय का कारण है।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

बैंकिंग और बीमा किस क्षेत्र की गतिविधियाँ हैं?

  1. A.प्राथमिक क्षेत्र
  2. B.द्वितीयक क्षेत्र
  3. C.तृतीयक क्षेत्र
  4. D.असंगठित क्षेत्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. तृतीयक क्षेत्र

व्याख्या

सही उत्तर C, तृतीयक क्षेत्र है। बैंकिंग और बीमा कोई भौतिक वस्तु नहीं बनाते; वे ऋण देकर, धन का प्रवाह चलाकर और जोखिम ढककर उत्पादन तथा व्यापार को सहारा देते हैं, और यही सहायक गतिविधियाँ तृतीयक या सेवा क्षेत्र का केंद्र हैं।

विकल्प A, प्राथमिक क्षेत्र उन गतिविधियों का है जो सीधे प्रकृति पर निर्भर हैं, और विकल्प B, द्वितीयक क्षेत्र उन उत्पादों को विनिर्मित वस्तुओं में बदलने का। विकल्प D, असंगठित क्षेत्र बिल्कुल दूसरे वर्गीकरण का है, जो रोजगार की शर्तों पर आधारित है; बैंक तो संगठित क्षेत्र का विशिष्ट नियोक्ता है, जहाँ घंटे निश्चित हैं तथा भविष्य निधि और नौकरी की सुरक्षा मिलती है। ध्यान दीजिए कि एक शब्द से क्षेत्र बदल जाता है: गन्ना उगाना प्राथमिक, उससे चीनी बनाना द्वितीयक और उसे बेचना या उसके लिए वित्त देना तृतीयक है।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

अर्थव्यवस्था का संगठित और असंगठित क्षेत्र में विभाजन किस आधार पर होता है?

  1. A.संपत्ति का स्वामित्व
  2. B.रोजगार की दशाएँ और शर्तें
  3. C.आर्थिक गतिविधि की प्रकृति
  4. D.निर्यात की मात्रा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रोजगार की दशाएँ और शर्तें

व्याख्या

सही उत्तर B, रोजगार की दशाएँ और शर्तें है। कोई उद्यम संगठित क्षेत्र में तब आता है जब वह सरकार के पास पंजीकृत हो और श्रम कानूनों का पालन करता हो, जिससे रोजगार नियमित तथा सुरक्षित रहे और श्रमिकों को निश्चित घंटे, सवेतन अवकाश, भविष्य निधि और चिकित्सा लाभ मिलें। जहाँ यह सब न हो वह इकाई असंगठित क्षेत्र में है।

विकल्प A, संपत्ति का स्वामित्व सार्वजनिक और निजी वर्गीकरण का आधार है। विकल्प C, गतिविधि की प्रकृति प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक वर्गीकरण का आधार है। विकल्प D का इनमें कोई स्थान नहीं। पूरा अध्याय तीनों आधारों को अलग रखने पर टिका है, क्योंकि एक ही इकाई तीनों दृष्टियों से वर्णित हो सकती है: सरकारी इस्पात संयंत्र गतिविधि से द्वितीयक, शर्तों से संगठित और स्वामित्व से सार्वजनिक है।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र का भेद किस आधार पर किया जाता है?

  1. A.उद्यमों का स्वामित्व
  2. B.कार्यरत श्रमिकों की संख्या
  3. C.मशीनों का उपयोग
  4. D.उद्यम का स्थान
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उद्यमों का स्वामित्व

व्याख्या

सही उत्तर A, स्वामित्व है। सार्वजनिक क्षेत्र में सरकार संपत्ति की स्वामी होती है और सेवाएँ देती है, तथा उद्देश्य लाभ नहीं बल्कि जनकल्याण होता है; निजी क्षेत्र में स्वामित्व व्यक्तियों या कंपनियों के पास रहता है और उद्देश्य लाभ होता है।

विकल्प B, श्रमिकों की संख्या श्रम कानून में कारखाने की परिभाषा जैसी बातों के लिए महत्वपूर्ण है, इस विभाजन के लिए नहीं। विकल्प C, मशीनों का उपयोग पूँजी प्रधान और श्रम प्रधान उत्पादन का भेद करता है, जो अलग विचार है। विकल्प D, स्थान का स्वामित्व से कोई संबंध नहीं। सरकार रेल, सड़क, सिंचाई, बिजली और बंदरगाह इसलिए उठाती है कि इनमें निवेश भारी है और प्रतिफल धीमा, इसलिए निजी कंपनियाँ इन्हें आम आदमी की पहुँच वाली कीमत पर नहीं बनातीं; इनसे पूरी अर्थव्यवस्था को जो लाभ मिलता है वह किसी निजी लेखा-जोखा में नहीं दिखता।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

1970 में आरंभ ऑपरेशन फ्लड किस उत्पाद से संबंधित था?

  1. A.खाद्यान्न
  2. B.दूध
  3. C.मछली
  4. D.तिलहन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. दूध

व्याख्या

सही उत्तर B, दूध है। ऑपरेशन फ्लड 1970 में आरंभ हुआ और वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में गाँवों की दुग्ध सहकारी समितियों को नगरों के बाजार से जोड़कर भारत को दूध के बड़े उत्पादकों में ला खड़ा किया। इसे श्वेत क्रांति के नाम से याद किया जाता है।

विकल्प A, खाद्यान्न हरित क्रांति से जुड़ा है, जिसने अधिक उपज वाली किस्मों, सिंचाई और उर्वरक से गेहूँ तथा चावल का उत्पादन बढ़ाया। विकल्प C, मछली नीली क्रांति से जुड़ी है, जिसने मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया। विकल्प D, तिलहन पीली क्रांति से जुड़ा है, जिसका लक्ष्य खाद्य तेल उत्पादन था। ये सभी रंगीन क्रांतियाँ प्राथमिक क्षेत्र के भीतर के सुधार हैं और प्रश्नपत्र इन्हें मिलान के रूप में पूछते हैं, इसलिए चारों को साथ याद कीजिए।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

सकल घरेलू उत्पाद निम्नलिखित में से किसका मूल्य है?

  1. A.देश में वर्ष भर में उत्पादित सभी अंतिम तथा मध्यवर्ती वस्तुएँ और सेवाएँ
  2. B.देश की सीमा के भीतर वर्ष भर में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ
  3. C.देश द्वारा वर्ष भर में निर्यात की गई सभी वस्तुएँ
  4. D.देश के नागरिकों द्वारा विश्व में कहीं भी उत्पादित सभी वस्तुएँ
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. देश की सीमा के भीतर वर्ष भर में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुएँ और सेवाएँ

व्याख्या

सही उत्तर B है। सकल घरेलू उत्पाद किसी देश की सीमा के भीतर वर्ष भर में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है, जिसे क्षेत्रवार गिना जाता है।

विकल्प A सबसे बड़ा जाल है, क्योंकि मध्यवर्ती वस्तुएँ जोड़ने पर दोहरी गणना होगी: आटे का मूल्य रोटी की कीमत में पहले से है, दोनों जोड़ने पर कुल बढ़ा हुआ दिखेगा। विकल्प C जीडीपी को निर्यात समझ बैठता है, जो माँग का केवल एक भाग है। विकल्प D नागरिकता पर आधारित माप का वर्णन है, जो सकल राष्ट्रीय उत्पाद की धारणा है; दोनों का अंतर विदेश से प्राप्त शुद्ध साधन आय है। भारत में ये अनुमान सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय तैयार तथा प्रकाशित करता है, और वे क्षेत्रवार दिए जाते हैं ताकि प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र का बदलता हिस्सा देखा जा सके।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

निम्नलिखित में से कौन तृतीयक क्षेत्र की गतिविधि नहीं है?

  1. A.चीनी मिल चलाना
  2. B.रेल से माल ढोना
  3. C.विद्यालय में पढ़ाना
  4. D.दुकान में सामान बेचना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. चीनी मिल चलाना

व्याख्या

सही उत्तर A, चीनी मिल चलाना है। मिल गन्ने को चीनी में बदलती है, अर्थात वह किसी प्राकृतिक उत्पाद का रूप बदलती है, और ऐसा हर रूपांतरण द्वितीयक या औद्योगिक क्षेत्र में आता है।

विकल्प B, रेल से माल ढोना, विकल्प C, पढ़ाना और विकल्प D, खुदरा व्यापार सभी सेवाएँ हैं: इनमें से कोई वस्तु नहीं बनाता, और प्रत्येक या तो उत्पादन में सहायता करता है या सीधे किसी आवश्यकता की पूर्ति करता है, इसलिए ये तृतीयक क्षेत्र में हैं। ऐसे प्रश्न दोनों दिशाओं में पूछे जाते हैं, और सबसे सुरक्षित तरीका उत्पाद का पीछा करना है। गन्ना उगाना प्राथमिक, चीनी बनाना द्वितीयक, और उस चीनी को ढोना, भंडारित करना, वित्त देना तथा बेचना तृतीयक है, अर्थात एक ही वस्तु तीनों क्षेत्रों से गुजरती है।

Q12.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

मनरेगा के अंतर्गत माँग के कितने दिनों के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देय हो जाता है?

  1. A.7 दिन
  2. B.15 दिन
  3. C.30 दिन
  4. D.45 दिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 15 दिन

व्याख्या

सही उत्तर B, पंद्रह दिन है। अधिनियम की अपेक्षा है कि काम के आवेदन के पंद्रह दिन के भीतर रोजगार दिया जाए, और यदि प्रशासन ऐसा न कर सके तो राज्य सरकार पर आवेदक को बेरोजगारी भत्ता देने का दायित्व आ जाता है।

विकल्प A, C और D सामान्य प्रशासनिक अवधियाँ हैं जो केवल भ्रमित करने के लिए दी जाती हैं; इस प्रावधान में इनमें से कोई नहीं आती। यही पंद्रह दिन का नियम वादे को कानूनी अधिकार में बदल देता है, क्योंकि काम न देने पर सरकार पर लागत आती है और बात अनसुनी नहीं रह जाती। इसके साथ ये बातें भी याद रखिए: वित्तीय वर्ष में सौ दिन की गारंटी, इकाई के रूप में परिवार, अधिनियम का वर्ष 2005, और अकुशल शारीरिक श्रम की शर्त।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र में क्या अंतर है?

प्राथमिक क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों का सीधे उपयोग करके वस्तुएँ पैदा करता है, जैसे खेती, मत्स्य पालन, वानिकी और खनन। द्वितीयक क्षेत्र उन्हीं उत्पादों को विनिर्मित वस्तुओं में बदलता है, जैसे कपास से कपड़ा या लौह अयस्क से इस्पात। तृतीयक क्षेत्र कोई वस्तु नहीं बनाता; वह परिवहन, बैंकिंग, व्यापार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी सेवाएँ देता है जो या तो पहले दोनों की सहायता करती हैं या स्वयं आवश्यक होती हैं।

कृषि में प्रच्छन्न बेरोजगारी क्यों कही जाती है?

छोटे पारिवारिक खेत पर घर के सभी सदस्य काम करते दिखते हैं जबकि काम को उससे कहीं कम हाथ चाहिए। यदि उनमें से कुछ हट जाएँ तो उत्पादन नहीं घटेगा, जिससे स्पष्ट है कि उनका श्रम कुछ नहीं जोड़ रहा। वे रोजगार में दिखते हैं पर वास्तव में अतिरिक्त हैं, और यही छिपी या प्रच्छन्न बेरोजगारी है, जिसके कारण कुल उत्पादन बढ़ने पर भी प्रति श्रमिक आय कम रहती है।

संगठित और असंगठित क्षेत्र में क्या भेद है?

संगठित क्षेत्र में वे पंजीकृत उद्यम आते हैं जिन्हें श्रम कानूनों का पालन करना होता है। वहाँ रोजगार नियमित और सुरक्षित है, घंटे निश्चित हैं, और श्रमिकों को सवेतन अवकाश, भविष्य निधि, उपदान तथा चिकित्सा लाभ मिलते हैं। असंगठित क्षेत्र छोटी और बिखरी इकाइयों का है जो प्रायः नियमन से बाहर हैं, जहाँ काम अनियमित है, मजदूरी कम है, न लिखित अनुबंध है और न सामाजिक सुरक्षा। भारत के अधिकांश श्रमिक इसी क्षेत्र में हैं।

मनरेगा क्या सुनिश्चित करता है?

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, जो 2005 में पारित हुआ, हर उस ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित करता है जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार हों। यदि माँग के पंद्रह दिन के भीतर काम न दिया जाए तो बेरोजगारी भत्ता देय हो जाता है। गारंटी को अधिकार के रूप में दावा किया जा सकता है, इसीलिए इसे अधिकार आधारित कानून कहा जाता है।

जीडीपी की गणना में केवल अंतिम वस्तुएँ ही क्यों गिनी जाती हैं?

मध्यवर्ती वस्तु का मूल्य उस अंतिम वस्तु की कीमत में पहले से सम्मिलित रहता है जिसमें वह लगती है। यदि बेकरी को बेचा गया आटा और ग्राहक को बेची गई रोटी दोनों गिने जाएँ तो आटा दो बार गिना जाएगा। केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं को गिनने से यह दोहरी गणना नहीं होती और वर्ष भर के वास्तविक उत्पादन का सही मूल्य मिलता है।

स्रोत

  • आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक अध्याय — एनसीईआरटी
  • भारतीय आर्थिक विकास (कक्षा 11) — एनसीईआरटी
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