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GK नोट्सभारतीय अर्थव्यवस्थाउत्पादन, लागत और आगम

उत्पादन, लागत और आगम: अवधारणाएं एवं सूत्र

परीक्षा के लिए उत्पादन, लागत और आगम के नोट्स: उत्पादन फलन, परिवर्ती अनुपात का नियम, पैमाने के प्रतिफल, लागत वक्र, आगम अवधारणाएं और सम विच्छेद बिंदु।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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उत्पादन, लागत और आगम: अवधारणाएं एवं सूत्र — GK24 title card
उत्पादन, लागत और आगम: अवधारणाएं एवं सूत्र — GK24 title card

प्रत्येक फर्म के सामने तीन ही प्रश्न होते हैं: साधनों से कितना उत्पादन मिलेगा, उस उत्पादन की लागत क्या है, और उससे आय कितनी होगी। इनके उत्तर क्रमशः उत्पादन का सिद्धांत, लागत का सिद्धांत और आगम का सिद्धांत हैं, और मिलकर ये बताते हैं कि फर्म किसी विशेष उत्पादन स्तर पर विस्तार क्यों रोक देती है। परीक्षाएं इस अध्याय को सूत्रों का अध्याय मानती हैं, इसलिए सबसे सुरक्षित तैयारी यह है कि प्रत्येक परिभाषा उसके सूत्र और उसके वक्र के आकार के साथ याद की जाए।

उत्पादन और उत्पादन के साधन

उत्पादन का अर्थ है उत्पादन के चार साधनों को मिलाकर उपयोगिता का सृजन: भूमि, जिसे लगान मिलता है, श्रम, जिसे मजदूरी मिलती है, पूंजी, जिसे ब्याज मिलता है, और उपक्रम, जिसे लाभ मिलता है। भौतिक साधनों और भौतिक उत्पादन के बीच के संबंध को उत्पादन फलन कहते हैं। उत्पादन तीन प्रकार से मापा जाता है। कुल उत्पाद परिवर्ती साधन की दी गई मात्रा से प्राप्त संपूर्ण उत्पादन है। औसत उत्पाद कुल उत्पाद में परिवर्ती साधन की इकाइयों का भाग देने से मिलता है। सीमांत उत्पाद परिवर्ती साधन की एक अतिरिक्त इकाई से कुल उत्पाद में हुई वृद्धि है। दो समीकरण सीधे पूछे जाते हैं: कुल उत्पाद सीमांत उत्पादों का योग होता है, और जब कुल उत्पाद अधिकतम होता है तब सीमांत उत्पाद शून्य होता है।

परिवर्ती अनुपात का नियम

अल्पकाल में कम से कम एक साधन, सामान्यतः संयंत्र और मशीन, स्थिर रहता है, इसलिए केवल साधनों का अनुपात बदला जा सकता है। परिवर्ती अनुपात का नियम कहता है कि स्थिर साधन पर परिवर्ती साधन की अधिक इकाइयां लगाने पर सीमांत उत्पाद पहले बढ़ता है, फिर घटता है और अंत में ऋणात्मक हो जाता है। इससे तीन अवस्थाएं बनती हैं: बढ़ते प्रतिफल, जहां स्थिर साधन का उपयोग सुधरता है; घटते प्रतिफल, जहां स्थिर साधन पर भीड़ बढ़ जाती है; और ऋणात्मक प्रतिफल, जहां अतिरिक्त इकाइयां एक दूसरे के काम में बाधा बनती हैं। विवेकशील उत्पादक दूसरी अवस्था में रुकता है। दीर्घकाल में सभी साधन बदले जा सकते हैं, और उससे संबंधित विचार पैमाने के प्रतिफल है, जो बढ़ते, स्थिर या घटते हो सकते हैं।

लागत की अवधारणाएं

अवधारणासूत्रउत्पादन बढ़ने पर व्यवहार
कुल स्थिर लागतस्थिर साधनों की लागतप्रत्येक उत्पादन स्तर पर, शून्य उत्पादन पर भी, स्थिर
कुल परिवर्ती लागतपरिवर्ती साधनों की लागतशून्य उत्पादन पर शून्य, उसके बाद बढ़ती है
कुल लागतकुल लागत बराबर कुल स्थिर लागत जोड़ कुल परिवर्ती लागतस्थिर लागत के स्तर से आरंभ होकर बढ़ती है
औसत स्थिर लागतकुल स्थिर लागत में उत्पादन का भागलगातार घटती है, उत्पादन अक्ष को कभी नहीं छूती
औसत परिवर्ती लागतकुल परिवर्ती लागत में उत्पादन का भागअंग्रेजी यू आकार: घटती है, न्यूनतम पर पहुंचती है, फिर बढ़ती है
औसत लागतकुल लागत में उत्पादन का भाग, अथवा औसत स्थिर जोड़ औसत परिवर्ती लागतयू आकार, जिसका न्यूनतम बिंदु औसत परिवर्ती लागत के न्यूनतम से दाईं ओर
सीमांत लागतकुल लागत में परिवर्तन में उत्पादन के परिवर्तन का भागयू आकार; स्थिर लागत से अप्रभावित

सीमांत लागत के दो गुण बार बार पूछे जाते हैं। सीमांत लागत केवल परिवर्ती लागत पर निर्भर करती है, क्योंकि स्थिर लागत उत्पादन के साथ बदलती नहीं। और सीमांत लागत वक्र औसत परिवर्ती लागत तथा औसत लागत दोनों वक्रों को उनके न्यूनतम बिंदु पर, नीचे से काटता है। गणित से आगे, लागतों को स्पष्ट और अस्पष्ट में भी बांटा जाता है: स्पष्ट लागत वास्तविक मौद्रिक भुगतान हैं, और अस्पष्ट लागत उद्यमी के अपने साधनों का आरोपित मूल्य, जैसे अपने भवन का लगान या वह वेतन जो वह अन्यत्र कमा सकता था। आर्थिक लागत इन दोनों का योग है, और अवसर लागत त्यागे गए अगले सर्वोत्तम विकल्प का मूल्य है। डूबी लागत वह है जो पहले ही लग चुकी है और वापस नहीं मिल सकती, और नए निर्णय में उसे छोड़ देना चाहिए।

आगम की अवधारणाएं

कुल आगम कीमत और बेची गई मात्रा का गुणनफल है। औसत आगम कुल आगम में उत्पादन का भाग है, और चूंकि वह कीमत के बराबर होता है, औसत आगम वक्र ही फर्म के सामने की मांग वक्र है। सीमांत आगम एक अतिरिक्त इकाई बेचने से कुल आगम में हुई वृद्धि है। पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म कीमत स्वीकारक होती है, इसलिए कीमत, औसत आगम और सीमांत आगम तीनों बराबर होते हैं और वक्र एक क्षैतिज रेखा होता है। एकाधिकार और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अधिक बेचने के लिए कीमत घटानी पड़ती है, इसलिए औसत आगम घटता है और सीमांत आगम उससे तेज घटकर नीचे रहता है। लागत लेखांकन में ये ही विचार अंशदान के रूप में आते हैं, जो बिक्री में से परिवर्ती लागत घटाने पर मिलता है, और लाभ मात्रा अनुपात के रूप में, जो अंशदान को बिक्री के प्रतिशत में बताता है।

संतुलन, सम विच्छेद और उत्पादन बंद करना

उत्पादक संतुलन में वहां होता है जहां सीमांत आगम सीमांत लागत के बराबर हो और उस बिंदु पर सीमांत लागत बढ़ रही हो; ये दोनों शर्तें मिलकर उत्पादक संतुलन की शर्त कहलाती हैं। सम विच्छेद बिंदु वह उत्पादन है जहां कुल आगम कुल लागत के बराबर हो, इसलिए लाभ शून्य होता है और फर्म केवल सामान्य लाभ कमाती है। अल्पकाल में फर्म उत्पादन बंद करती है जब कीमत औसत परिवर्ती लागत से नीचे गिर जाए, क्योंकि तब वह परिवर्ती साधनों की लागत भी नहीं निकाल पाती, और दीर्घकाल में जब कीमत औसत लागत से नीचे गिर जाए।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न परिभाषा और सूत्र पर आधारित होते हैं। पूछा जाता है कि कौन सी लागत उत्पादन के साथ नहीं बदलती, औसत स्थिर लागत वक्र का आकार कैसा है, सीमांत लागत वक्र औसत लागत वक्र को कहां काटता है, सीमांत लागत और सीमांत आगम का सूत्र क्या है, औसत आगम और कीमत का संबंध क्या है, तथा उत्पादक संतुलन की शर्त क्या है। संख्यात्मक प्रश्न लागत या बिक्री की सारणी देकर सीमांत लागत, औसत लागत, अंशदान, लाभ मात्रा अनुपात या सम विच्छेद उत्पादन पूछते हैं। बैंकिंग और राज्य सेवा परीक्षाएं लागत लेखांकन के शब्द भी पूछती हैं: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लागत, डूबी लागत, स्पष्ट और अस्पष्ट लागत। आम जाल हैं: स्थिर लागत को सीमांत लागत का भाग मान लेना, अल्पकालीन परिवर्ती अनुपात के नियम को दीर्घकालीन पैमाने के प्रतिफल से मिला देना, और एकाधिकार में सीमांत आगम को कीमत के बराबर मान लेना, जहां वह सदा कम होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

कुल लागतकुल लागत बराबर कुल स्थिर लागत जोड़ कुल परिवर्ती लागत
औसत लागतकुल लागत में उत्पादन का भाग, अथवा औसत स्थिर जोड़ औसत परिवर्ती लागत
सीमांत लागतकुल लागत में परिवर्तन में उत्पादन के परिवर्तन का भाग
सीमांत आगमकुल आगम में परिवर्तन में उत्पादन के परिवर्तन का भाग
औसत आगमकुल आगम में उत्पादन का भाग, जो कीमत ही होता है
पूर्ण प्रतिस्पर्धाकीमत बराबर औसत आगम बराबर सीमांत आगम, क्षैतिज आगम वक्र
उत्पादक संतुलनसीमांत आगम बराबर सीमांत लागत, और सीमांत लागत बढ़ती हुई
सम विच्छेद बिंदुवह उत्पादन जहां कुल आगम कुल लागत के बराबर हो
अल्पकाल में उत्पादन बंदकीमत औसत परिवर्ती लागत से नीचे गिरने पर
परिवर्ती अनुपात का नियमअल्पकालीन नियम; बढ़ते, घटते और ऋणात्मक प्रतिफल की अवस्थाएं
पैमाने के प्रतिफलदीर्घकालीन अवधारणा; बढ़ते, स्थिर या घटते
अंशदानबिक्री में से परिवर्ती लागत घटाने पर प्राप्त राशि
लाभ मात्रा अनुपातअंशदान में बिक्री का भाग, प्रतिशत में
अस्पष्ट लागतउद्यमी के अपने साधनों का आरोपित मूल्य, जैसे अपने भवन का लगान

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

अल्पकाल में निम्नलिखित में से कौन सी लागत प्रत्येक उत्पादन स्तर पर समान रहती है?

  1. A.कुल परिवर्ती लागत
  2. B.कुल स्थिर लागत
  3. C.सीमांत लागत
  4. D.औसत लागत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कुल स्थिर लागत

स्थिर लागत उन साधनों का भुगतान है जिन्हें अल्पकाल में बदला नहीं जा सकता, जैसे कारखाने के भवन का किराया, बीमा और स्थायी कर्मचारियों का वेतन, और यह उत्पादन शून्य होने पर भी चुकानी पड़ती है, इसीलिए इसे पूरक या उपरिव्यय लागत भी कहते हैं।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

उत्पादन का स्तर बढ़ने पर फर्म की औसत स्थिर लागत

  1. A.स्थिर रहती है
  2. B.लगातार बढ़ती है
  3. C.लगातार घटती है पर कभी शून्य नहीं होती
  4. D.पहले घटती है फिर बढ़ती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लगातार घटती है पर कभी शून्य नहीं होती

औसत स्थिर लागत कुल स्थिर लागत में उत्पादन का भाग है; अंश अपरिवर्तित रहता है, इसलिए बड़ा उत्पादन उसी स्थिर लागत को अधिक इकाइयों पर फैला देता है।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

सीमांत लागत वक्र औसत लागत वक्र को कहां काटता है?

  1. A.औसत लागत वक्र के न्यूनतम बिंदु पर
  2. B.औसत लागत वक्र के अधिकतम बिंदु पर
  3. C.उस बिंदु पर जहां औसत लागत औसत स्थिर लागत के बराबर हो
  4. D.किसी भी बिंदु पर नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. औसत लागत वक्र के न्यूनतम बिंदु पर

इसका कारण आर्थिक से अधिक गणितीय है: जब तक सीमांत लागत औसत लागत से कम है, प्रत्येक अतिरिक्त इकाई औसत को नीचे खींचती है, और जैसे ही सीमांत लागत औसत से ऊपर जाती है, औसत बढ़नी ही पड़ती है, इसलिए दोनों केवल वहीं बराबर हो सकती हैं जहां औसत न्यूनतम…

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

परिवर्ती अनुपात का नियम किस स्थिति में लागू होता है?

  1. A.जब उत्पादन के सभी साधन समान अनुपात में बढ़ाए जाएं
  2. B.जब एक साधन बदला जाए और शेष स्थिर रखे जाएं
  3. C.केवल दीर्घकाल में
  4. D.केवल जब फर्म संतुलन में हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जब एक साधन बदला जाए और शेष स्थिर रखे जाएं

यही अल्पकाल की परिभाषित शर्त है, जिसमें संयंत्र और मशीन बदली नहीं जा सकतीं, इसलिए केवल परिवर्ती साधन और स्थिर साधन का अनुपात बदलता है।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म का औसत आगम किसके बराबर होता है?

  1. A.कुल लागत
  2. B.केवल सीमांत लागत
  3. C.कीमत और सीमांत आगम
  4. D.कीमत का आधा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कीमत और सीमांत आगम

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म कीमत स्वीकारक होती है, क्योंकि उसका उत्पादन बाजार का नगण्य भाग है, इसलिए वह प्रचलित कीमत पर कोई भी मात्रा बेच सकती है।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

उत्पादक संतुलन में कब होता है?

  1. A.जब सीमांत आगम सीमांत लागत के बराबर हो और सीमांत लागत बढ़ रही हो
  2. B.जब औसत आगम औसत स्थिर लागत के बराबर हो
  3. C.जब कुल आगम अधिकतम हो
  4. D.जब सीमांत लागत न्यूनतम हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जब सीमांत आगम सीमांत लागत के बराबर हो और सीमांत लागत बढ़ रही हो

दोनों शर्तें आवश्यक हैं। यदि सीमांत आगम सीमांत लागत से अधिक है तो अधिक उत्पादन करने से लाभ बढ़ेगा, और यदि सीमांत लागत सीमांत आगम से अधिक है तो कम उत्पादन करने से लाभ बढ़ेगा, इसलिए लाभ अधिकतम वहीं हो सकता है जहां दोनों बराबर हों; और यह समानता सीमांत…

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

फर्म का सम विच्छेद बिंदु वह उत्पादन स्तर है जहां

  1. A.कुल आगम कुल लागत के बराबर हो
  2. B.कुल आगम कुल परिवर्ती लागत के बराबर हो
  3. C.औसत लागत न्यूनतम हो
  4. D.सीमांत लागत औसत स्थिर लागत के बराबर हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कुल आगम कुल लागत के बराबर हो

उस उत्पादन पर फर्म को आर्थिक अर्थ में न लाभ होता है न हानि और वह केवल सामान्य लाभ कमाती है, क्योंकि सामान्य लाभ को उपक्रम के प्रतिफल के रूप में लागत में पहले ही गिन लिया जाता है।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

सीमांत लागत की सही परिभाषा क्या है?

  1. A.कुल लागत में कुल उत्पादन का भाग
  2. B.कुल लागत में परिवर्तन में उत्पादन के परिवर्तन का भाग
  3. C.कुल स्थिर लागत में कुल उत्पादन का भाग
  4. D.कुल आगम में परिवर्तन में उत्पादन के परिवर्तन का भाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कुल लागत में परिवर्तन में उत्पादन के परिवर्तन का भाग

सीमांत लागत एक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन से कुल लागत में हुई वृद्धि है, इसलिए एक इकाई के परिवर्तन पर यह कुल लागत के क्रमागत मानों का अंतर ही होती है।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

निम्नलिखित में से कौन अस्पष्ट लागत का उदाहरण है?

  1. A.भाड़े के श्रमिकों को दी गई मजदूरी
  2. B.कारखाने का बिजली बिल
  3. C.फर्म द्वारा प्रयुक्त स्वामी के अपने भवन का लगान
  4. D.बैंक ऋण पर चुकाया गया ब्याज
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. फर्म द्वारा प्रयुक्त स्वामी के अपने भवन का लगान

अस्पष्ट लागत उद्यमी द्वारा स्वयं जुटाए गए साधन का आरोपित मूल्य है, जिसके लिए फर्म से कोई भुगतान बाहर नहीं जाता; अपना भवन किराए पर देकर मिलने वाला लगान, अपनी पूंजी पर ब्याज और अन्यत्र नौकरी करके मिल सकने वाला वेतन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

पैमाने के प्रतिफल की अवधारणा किस पर लागू होती है?

  1. A.अल्पकाल पर, जब एक साधन स्थिर हो
  2. B.दीर्घकाल पर, जब सभी साधन बदले जा सकें
  3. C.बाजार अवधि पर, जब उत्पादन स्थिर हो
  4. D.केवल कृषि पर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दीर्घकाल पर, जब सभी साधन बदले जा सकें

पैमाने के प्रतिफल यह पूछते हैं कि जब प्रत्येक साधन समान अनुपात में बढ़ाया जाए तब उत्पादन का क्या होता है, और यह केवल दीर्घकाल में संभव है, जब फर्म अधिक श्रम रखने के साथ बड़ा संयंत्र भी लगा सकती है।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · 4 Aug 2018, Shift 1मध्यम

अप्रत्यक्ष लागत फर्म द्वारा वहन की गई वह लागत है जो ________।

  1. A.पहले ही वहन की जा चुकी है और जिसे टाला नहीं जा सकता
  2. B.किसी उत्पाद तक सरलता से जोड़ी जा सकती है
  3. C.कई उत्पादों के लिए सामान्य होती है
  4. D.परिवर्ती लागत का कुल योग होती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कई उत्पादों के लिए सामान्य होती है

लागतों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष में इस आधार पर बांटा जाता है कि उन्हें किसी उत्पाद तक जोड़ा जा सकता है या नहीं।

Q12.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · 4 Aug 2018, Shift 2कठिन

एक फर्म की कुल बिक्री 4,00,000 रुपये और परिवर्ती लागत 2,00,000 रुपये है। यदि फर्म ने 50,000 रुपये का लाभ कमाया है, तो फर्म का लाभ मात्रा अनुपात कितना होगा?

  1. A.50%
  2. B.30%
  3. C.20%
  4. D.40%
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 50%

लाभ मात्रा अनुपात अंशदान को बिक्री के प्रतिशत में मापता है, और अंशदान बिक्री में से परिवर्ती लागत घटाने पर मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्थिर लागत और परिवर्ती लागत में क्या अंतर है?

स्थिर लागत उन साधनों की लागत है जिन्हें अल्पकाल में बदला नहीं जा सकता, जैसे संयंत्र का किराया, और वह शून्य उत्पादन सहित हर स्तर पर समान रहती है। परिवर्ती लागत कच्चे माल और अस्थायी श्रम जैसी मदों की लागत है, जो उत्पादन शून्य होने पर शून्य होती है।

औसत स्थिर लागत वक्र उत्पादन अक्ष को क्यों नहीं छूता?

क्योंकि औसत स्थिर लागत कुल स्थिर लागत में उत्पादन का भाग है। उत्पादन कितना भी बड़ा हो, धनात्मक संख्या में भाग देने पर परिणाम धनात्मक ही रहता है, इसलिए वक्र अक्ष की ओर घटता जाता है पर शून्य तक नहीं पहुंचता; उसका आकार समकोणीय अतिपरवलय होता है।

सीमांत लागत वक्र औसत लागत वक्र को कहां काटता है?

औसत लागत वक्र के न्यूनतम बिंदु पर, नीचे से। यही संबंध औसत परिवर्ती लागत वक्र के साथ भी है, और इसका कारण गणितीय है: जब तक सीमांत लागत औसत से कम है औसत घटती है, और जब वह औसत से अधिक हो जाती है तब औसत बढ़ने लगती है।

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में सीमांत आगम का कीमत से क्या संबंध है?

दोनों बराबर होते हैं। पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म कीमत स्वीकारक होती है और प्रचलित कीमत पर कोई भी मात्रा बेच सकती है, इसलिए प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से कुल आगम ठीक कीमत के बराबर बढ़ता है, जिससे कीमत, औसत आगम और सीमांत आगम समान हो जाते हैं।

परिवर्ती अनुपात का नियम क्या है?

यह अल्पकालीन नियम है, जिसके अनुसार स्थिर साधन पर परिवर्ती साधन की अधिक इकाइयां लगाने पर उसका सीमांत उत्पाद पहले बढ़ता है, फिर घटता है और अंत में ऋणात्मक हो जाता है, जिससे बढ़ते, घटते और ऋणात्मक प्रतिफल की तीन अवस्थाएं बनती हैं।

फर्म का सम विच्छेद बिंदु क्या है?

वह उत्पादन स्तर जहां कुल आगम ठीक कुल लागत के बराबर हो, इसलिए फर्म को न लाभ होता है न हानि और वह केवल सामान्य लाभ कमाती है। लागत लेखांकन में यह स्थिर लागत में प्रति इकाई अंशदान का भाग देकर निकाला जाता है।

स्रोत

  • व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (कक्षा 12), उत्पादन तथा लागत अध्याय — एनसीईआरटी
  • व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (कक्षा 12), पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म का सिद्धांत अध्याय — एनसीईआरटी
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