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GK नोट्सबैंकिंग और वित्तीय जागरूकताडी-एसआईबी, त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) और बैंक पर्यवेक्षण

डी-एसआईबी, पीसीए और बैंक पर्यवेक्षण: आरबीआई के नियम और तथ्य

बैंक पर्यवेक्षण पर परीक्षा केंद्रित पूरे नोट्स: डी-एसआईबी ढाँचा और बकेट, संशोधित पीसीए के तीन मानक, जोखिम सीमाएँ, बाहर आने की शर्त और पूँजी नियम।

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डी-एसआईबी, पीसीए और बैंक पर्यवेक्षण: आरबीआई के नियम और तथ्य — GK24 title card
डी-एसआईबी, पीसीए और बैंक पर्यवेक्षण: आरबीआई के नियम और तथ्य — GK24 title card

बैंक पर्यवेक्षण भारतीय रिज़र्व बैंक का वह काम है जिससे हर बैंक मज़बूत रहे और पूरी बैंकिंग व्यवस्था स्थिर रहे। इसके केंद्र में दो औज़ार हैं। पहला, घरेलू प्रणालीगत महत्व के बैंक यानी डी-एसआईबी का ढाँचा, जो सबसे बड़े बैंकों से अतिरिक्त पूँजी रखवाता है, क्योंकि उनके डूबने से पूरी अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचेगी। दूसरा, त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई यानी पीसीए का ढाँचा, जो कमज़ोर पड़ते बैंक पर समय रहते पाबंदियाँ लगा देता है। इनके चारों ओर रिज़र्व बैंक की पर्यवेक्षी मशीनरी है: वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड, मौके पर निरीक्षण, दूर से निगरानी और बड़े ऋणों का डेटाबेस। आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी, एसएससी और रेलवे की बैंकिंग जागरूकता में ये सब पूछे जाते हैं।

कुछ बैंकों को अतिरिक्त पूँजी क्यों रखनी पड़ती है

बहुत बड़ा बैंक ऋण, जमा, भुगतान प्रवाह और डेरिवेटिव के ज़रिये हज़ारों संस्थाओं से जुड़ा होता है। वह डूबे तो नुकसान फैलता है, इसलिए सरकारें उसे बचाती हैं। बचाए जाने की यही उम्मीद एक समस्या बन जाती है, जिसे नैतिक जोखिम कहते हैं: ऐसा बैंक सस्ते में बड़ा जोखिम उठा सकता है। वर्ष 2008 के संकट के बाद वैश्विक उत्तर यही निकला कि प्रणालीगत बैंक सामान्य न्यूनतम से ऊपर पूँजी रखें। वित्तीय स्थिरता बोर्ड ने बैंकिंग पर्यवेक्षण की बासल समिति के साथ मिलकर 2011 से वैश्विक प्रणालीगत महत्व के बैंकों यानी जी-एसआईबी की सूची निकालना शुरू किया और हर साल उसे अद्यतन करता है। भारत ने इसी विचार का घरेलू रूप बनाया।

डी-एसआईबी ढाँचा

रिज़र्व बैंक ने डी-एसआईबी ढाँचा 22 जुलाई 2014 को जारी किया। जिन बैंकों का आकार सकल घरेलू उत्पाद के दो प्रतिशत से ऊपर जाता है, वे नमूने में लिए जाते हैं और उनका प्रणालीगत महत्व अंक चार सूचकों से निकाला जाता है: आकार, अंतर-संबद्धता, प्रतिस्थापनीयता और जटिलता। सबसे अधिक भार आकार को मिलता है। तय अंक से ऊपर के बैंक पाँच बकेट में रखे जाते हैं और हर बकेट पर पूँजी संरक्षण बफर के ऊपर अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर 1 यानी CET1 की माँग लगती है। रिज़र्व बैंक हर साल अद्यतन सूची प्रकाशित करता है। भारतीय स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक पहले नामित हुए थे, एचडीएफसी बैंक बाद में जोड़ा गया।

बकेट2025 की सूची में बैंकजोखिम भारित आस्तियों पर अतिरिक्त CET1 (प्रतिशत)
5कोई नहीं1.00
4भारतीय स्टेट बैंक0.80
3कोई नहीं0.60
2एचडीएफसी बैंक0.40
1आईसीआईसीआई बैंक0.20

जो विदेशी बैंक जी-एसआईबी है और भारत में शाखाएँ चलाता है, उसे भारत की जोखिम भारित आस्तियों के अनुपात में यहाँ अतिरिक्त CET1 रखनी होती है।

संशोधित पीसीए ढाँचा

पीसीए नियम आधारित पूर्व चेतावनी व्यवस्था है। जब कोई बैंक किसी निगरानी वाले मानक की तय सीमा तोड़ता है, पाबंदियाँ अपने आप लागू हो जाती हैं, इसलिए पर्यवेक्षक को हर बैंक के लिए अलग तर्क नहीं देना पड़ता। रिज़र्व बैंक ने 2017 के ढाँचे की जगह 2 नवंबर 2021 के परिपत्र से संशोधित ढाँचा लाया, जो 1 जनवरी 2022 से प्रभावी हुआ। यह लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू है। बड़ा बदलाव यह था कि आस्तियों पर प्रतिफल से मापी जाने वाली लाभप्रदता मुख्य क्षेत्र से हटा दी गई और उसकी जगह उत्तोलन यानी लीवरेज को लाया गया।

निगरानी क्षेत्रप्रयुक्त सूचक
पूँजीजोखिम भारित आस्तियों पर पूँजी अनुपात या CET1 अनुपात
आस्ति गुणवत्ताशुद्ध अनर्जक आस्ति अनुपात
उत्तोलनटियर 1 लीवरेज अनुपात

जोखिम सीमाएँ और उनसे होने वाली कार्रवाई

ढाँचे में तीन जोखिम सीमाएँ हैं, हर अगली पिछली से गंभीर। किसी एक मानक का उल्लंघन भी बैंक को पीसीए में ला सकता है।

  • जोखिम सीमा 1: लाभांश बाँटने या लाभ भेजने पर रोक, और प्रवर्तकों, मालिकों या विदेशी बैंक की मूल संस्था से पूँजी लाने की अपेक्षा।
  • जोखिम सीमा 2: ऊपर की सभी कार्रवाइयाँ, साथ ही देश और विदेश में शाखा विस्तार पर रोक।
  • जोखिम सीमा 3: ऊपर की सभी कार्रवाइयाँ, साथ ही पूँजीगत व्यय पर सीमा, बोर्ड द्वारा स्वीकृत सीमा के भीतर प्रौद्योगिकी उन्नयन को छोड़कर।

इन अनिवार्य कदमों के अलावा रिज़र्व बैंक विवेकाधीन कार्रवाइयों की साझा सूची से चुन सकता है, जिसमें रणनीति, अभिशासन, पूँजी, ऋण जोखिम, बाज़ार जोखिम, मानव संसाधन, लाभप्रदता और परिचालन शामिल हैं। बैंक को पीसीए से बाहर निकालने पर तब विचार होता है जब लगातार चार तिमाही परिणामों में किसी मानक की कोई सीमा न टूटी हो, जिनमें एक लेखा परीक्षित वार्षिक परिणाम होना चाहिए, और पर्यवेक्षक को भरोसा हो कि कमाई में सुधार टिकाऊ है।

रिज़र्व बैंक पर्यवेक्षण कैसे करता है

वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड नवंबर 1994 में बना और इसकी अध्यक्षता गवर्नर करते हैं; यह बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पर्यवेक्षण पर अविभाजित ध्यान देता है। बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35 रिज़र्व बैंक को किसी भी बैंक के निरीक्षण की शक्ति देती है। आज पर्यवेक्षण जोखिम आधारित है: मौके पर निरीक्षण, नियमित विवरणियों से लगातार दूरस्थ निगरानी और बाज़ार सूचना। बड़े ऋणों की सूचना का केंद्रीय भंडार यानी CRILC पाँच करोड़ रुपये और उससे अधिक की कुल जोखिम राशि पर उधारकर्ता-वार आँकड़े जुटाता है, जिससे एक बैंक में फँसा उधारकर्ता बाकी सब बैंकों को दिख जाता है।

इन अंकों के पीछे के पूँजी नियम

भारतीय बैंक बासल III का पालन करते हैं, पर भारतीय न्यूनतम कड़े हैं। जोखिम भारित आस्तियों पर न्यूनतम पूँजी अनुपात नौ प्रतिशत है, जबकि बासल का आँकड़ा आठ प्रतिशत है; न्यूनतम CET1 5.5 प्रतिशत, टियर 1 सात प्रतिशत और इसके ऊपर 2.5 प्रतिशत का पूँजी संरक्षण बफर। न्यूनतम टियर 1 लीवरेज अनुपात डी-एसआईबी के लिए चार प्रतिशत और बाकी बैंकों के लिए 3.5 प्रतिशत है। इसलिए डी-एसआईबी को सामान्य न्यूनतम, संरक्षण बफर और अपने बकेट का अधिभार तीनों साथ रखने पड़ते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

परीक्षक चार बातें पूछते हैं। पहली, सीधा स्मरण: डी-एसआईबी ढाँचे का वर्ष (2014), बकेट की संख्या (पाँच), अधिभार की सीमा (0.20 से 1.00 प्रतिशत) और कौन बैंक किस बकेट में है। दूसरी, संशोधित पीसीए में हुआ बदलाव, जहाँ लाभप्रदता या आस्तियों पर प्रतिफल की जगह उत्तोलन आया; यह सबसे पसंदीदा एक पंक्ति का प्रश्न है। तीसरी, जोखिम सीमा 1, 2 और 3 पर अनिवार्य कार्रवाइयों का क्रम, जो आमतौर पर सुमेलित करने वाले प्रश्न में आता है। चौथी, छूट प्राप्त बैंक और बाहर आने की शर्त, जो तिमाहियों की संख्या के रूप में पूछी जाती है। आम जाल हैं: जी-एसआईबी (वित्तीय स्थिरता बोर्ड द्वारा चिह्नित) और डी-एसआईबी (रिज़र्व बैंक द्वारा चिह्नित) को मिला देना, भारत के नौ प्रतिशत की जगह बासल का आठ प्रतिशत लिख देना, और यह मान लेना कि पीसीए सभी बैंकों पर लागू है।

महत्वपूर्ण तथ्य

डी-एसआईबी ढाँचा जारी22 जुलाई 2014, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा
डी-एसआईबी नमूने की सीमाजीडीपी के दो प्रतिशत से अधिक आकार वाले बैंक
डी-एसआईबी सूचकआकार, अंतर-संबद्धता, प्रतिस्थापनीयता, जटिलता
बकेट की संख्यापाँच, जिनमें जोखिम भारित आस्तियों पर 0.20 से 1.00 प्रतिशत अतिरिक्त CET1
2025 के डी-एसआईबीभारतीय स्टेट बैंक (बकेट 4, 0.80 प्रतिशत), एचडीएफसी बैंक (बकेट 2, 0.40 प्रतिशत), आईसीआईसीआई बैंक (बकेट 1, 0.20 प्रतिशत)
जी-एसआईबी सूची कौन निकालता हैवित्तीय स्थिरता बोर्ड, बासल समिति के साथ, 2011 से हर वर्ष
संशोधित पीसीए परिपत्र2 नवंबर 2021, प्रभावी 1 जनवरी 2022
पीसीए मानकपूँजी (CRAR या CET1), आस्ति गुणवत्ता (शुद्ध एनपीए अनुपात), उत्तोलन (टियर 1 लीवरेज अनुपात)
2021 में पीसीए से हटाया गयाआस्तियों पर प्रतिफल से मापी जाने वाली लाभप्रदता
पीसीए से बाहर रखे बैंकलघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
जोखिम सीमाएँतीन; किसी एक मानक का उल्लंघन भी पीसीए ला सकता है
पीसीए से निकलने की शर्तलगातार चार तिमाही परिणामों में कोई उल्लंघन नहीं, एक लेखा परीक्षित वार्षिक, और पर्यवेक्षी संतोष
वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्डनवंबर 1994 में गठित, अध्यक्ष आरबीआई गवर्नर
निरीक्षण की शक्तिबैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35
CRILC रिपोर्टिंग सीमापाँच करोड़ रुपये और अधिक की कुल जोखिम राशि
भारत का न्यूनतम CRARनौ प्रतिशत, बासल III के आठ प्रतिशत के मुकाबले
पूँजी संरक्षण बफरजोखिम भारित आस्तियों का 2.5 प्रतिशत
न्यूनतम टियर 1 लीवरेज अनुपातडी-एसआईबी के लिए चार प्रतिशत, अन्य बैंकों के लिए 3.5 प्रतिशत

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

भारतीय रिज़र्व बैंक ने घरेलू प्रणालीगत महत्व के बैंकों से जुड़ा ढाँचा किस वर्ष जारी किया?

  1. A.2011
  2. B.2014
  3. C.2017
  4. D.2021
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2014

व्याख्या

सही उत्तर B, 2014 है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने डी-एसआईबी ढाँचा 22 जुलाई 2014 को जारी किया, जिसमें बताया गया कि नमूने के लिए बैंक कैसे चुने जाएँगे, आकार, अंतर-संबद्धता, प्रतिस्थापनीयता और जटिलता से प्रणालीगत महत्व अंक कैसे निकाला जाएगा, और हर बकेट पर कितनी अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर 1 पूँजी लगेगी। इस ढाँचे के तहत पहले नाम अगले वर्ष घोषित हुए।

विकल्प A, 2011, वह वर्ष है जब वित्तीय स्थिरता बोर्ड ने प्रणालीगत महत्व के बैंकों की वैश्विक सूची निकालना शुरू किया; यह विश्व स्तर पर होने वाला अलग काम है, इसलिए यह जाना-पहचाना भ्रम है। विकल्प C, 2017, वह वर्ष है जब बैंकों के लिए पहले वाला त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचा जारी हुआ था, डी-एसआईबी ढाँचा नहीं। विकल्प D, 2021, संशोधित पीसीए ढाँचे का वर्ष है। इन तीन तारीखों को मिला देने पर आसान अंक चला जाता है, इसलिए याद रखें: डी-एसआईबी के लिए 2014 और संशोधित पीसीए के लिए 2021।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के संशोधित त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे में लाभप्रदता की जगह किस मानक ने ली?

  1. A.तरलता
  2. B.उत्तोलन
  3. C.ऋण वृद्धि
  4. D.प्रावधान कवरेज
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उत्तोलन

व्याख्या

सही उत्तर B, उत्तोलन है। 2017 का ढाँचा पूँजी, आस्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता देखता था, जिसमें लाभप्रदता का सूचक आस्तियों पर प्रतिफल था। 2 नवंबर 2021 को अधिसूचित और 1 जनवरी 2022 से प्रभावी संशोधित ढाँचा पूँजी और आस्ति गुणवत्ता रखता है, पर लाभप्रदता हटाकर तीसरे मुख्य क्षेत्र के रूप में उत्तोलन लाता है, जिसे टियर 1 लीवरेज अनुपात से मापा जाता है। संशोधित ढाँचे से यही बिंदु सबसे अधिक पूछा जाता है।

विकल्प A, तरलता, तरलता कवरेज अनुपात और शुद्ध स्थिर निधीयन अनुपात से संभाली जाती है, पीसीए मानकों से नहीं। विकल्प C, ऋण वृद्धि, पर्यवेक्षक अन्य तरीकों से नज़र रखता है, पर यह पीसीए का ट्रिगर नहीं है। विकल्प D, प्रावधान कवरेज, बताता है कि बैंक ने फँसे ऋणों के लिए कितना अलग रखा है; यह पर्यवेक्षी अपेक्षा है, पीसीए मानक नहीं। इसलिए याद रखने योग्य तीन क्षेत्र हैं: पूँजी, आस्ति गुणवत्ता और उत्तोलन।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

रिज़र्व बैंक के बैंकों के लिए त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे में कितनी जोखिम सीमाएँ हैं?

  1. A.दो
  2. B.तीन
  3. C.चार
  4. D.पाँच
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीन

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन है। पीसीए ढाँचा उल्लंघनों को तीन जोखिम सीमाओं में बाँटता है, हर अगली पिछली से गंभीर, और हर सीमा से अनिवार्य सुधारात्मक कार्रवाइयाँ जुड़ी हैं। जोखिम सीमा 1 पर लाभांश बाँटने पर रोक लगती है और मालिकों से पूँजी लाने की अपेक्षा होती है। जोखिम सीमा 2 पर देश और विदेश में शाखा विस्तार पर रोक जुड़ती है। जोखिम सीमा 3 पर पूँजीगत व्यय की सीमा जुड़ती है, जिसमें बोर्ड से स्वीकृत प्रौद्योगिकी उन्नयन छोड़ दिया जाता है।

विकल्प A, दो, ढाँचे को कम करके बताता है। विकल्प C, चार, आकर्षक लगता है क्योंकि अभ्यर्थी तीन सीमाओं को पीसीए से बाहर आने के लिए ज़रूरी चार तिमाही परिणामों से मिला देते हैं। विकल्प D, पाँच, डी-एसआईबी ढाँचे के बकेट की संख्या है, पीसीए सीमाओं की नहीं, इसलिए यह विषयों के बीच का आम जाल है। जोड़ी याद रखें: डी-एसआईबी में पाँच बकेट, पीसीए में तीन सीमाएँ।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

रिज़र्व बैंक की 2025 की घरेलू प्रणालीगत महत्व के बैंकों की सूची के अनुसार बकेट 4 में कौन बैंक है?

  1. A.एचडीएफसी बैंक
  2. B.आईसीआईसीआई बैंक
  3. C.भारतीय स्टेट बैंक
  4. D.पंजाब नेशनल बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारतीय स्टेट बैंक

व्याख्या

सही उत्तर C, भारतीय स्टेट बैंक है। 2025 की सूची में भारतीय स्टेट बैंक बकेट 4 में है और उसे अपनी जोखिम भारित आस्तियों का 0.80 प्रतिशत अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर 1 रखना है, जो सामान्य न्यूनतम और पूँजी संरक्षण बफर के ऊपर है। बकेट 2 से ऊपर यह अकेला बैंक है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की तुलना में उसके आकार को दर्शाता है।

विकल्प A, एचडीएफसी बैंक, डी-एसआईबी है पर बकेट 2 में है और उसका अधिभार 0.40 प्रतिशत है। विकल्प B, आईसीआईसीआई बैंक, बकेट 1 में है और उसका अधिभार सबसे कम 0.20 प्रतिशत है। विकल्प D, पंजाब नेशनल बैंक, बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है पर उसे डी-एसआईबी नहीं माना गया है, इसलिए उस पर कोई अधिभार नहीं है। बकेट 3 और 5 खाली हैं, और यह भी अक्सर पूछा जाने वाला विवरण है।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

निम्नलिखित में से कौन अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे के दायरे में नहीं आता?

  1. A.सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक
  2. B.निजी क्षेत्र के बैंक
  3. C.क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
  4. D.भारत में शाखाओं से काम करने वाले विदेशी बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

व्याख्या

सही उत्तर C, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक है। संशोधित ढाँचा सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू है, पर तीन श्रेणियाँ स्पष्ट रूप से बाहर रखी गई हैं: लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को वाणिज्यिक बैंक प्रायोजित करते हैं और उनका पर्यवेक्षण अलग व्यवस्था से होता है, इसलिए वे इस ढाँचे से बाहर रहते हैं।

विकल्प A, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, पूरी तरह दायरे में हैं और उनमें से कई अतीत में पीसीए में रखे गए हैं। विकल्प B, निजी क्षेत्र के बैंक, भी दायरे में हैं और किसी निजी बैंक को सार्वजनिक बैंक की तरह ही पीसीए में रखा जा सकता है। विकल्प D, भारत में शाखाओं से काम करने वाले विदेशी बैंक, भी शामिल हैं; उनके लिए ढाँचा जोखिम सीमा 1 पर मूल संस्था से पूँजी लाने की बात विशेष रूप से कहता है। प्रश्न तीन छूटों की सूची की परख कर रहा है।

Q6.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

संशोधित त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे में आस्ति गुणवत्ता मापने के लिए कौन सूचक प्रयोग होता है?

  1. A.सकल अनर्जक आस्ति अनुपात
  2. B.शुद्ध अनर्जक आस्ति अनुपात
  3. C.स्लिपेज अनुपात
  4. D.प्रावधान कवरेज अनुपात
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. शुद्ध अनर्जक आस्ति अनुपात

व्याख्या

सही उत्तर B, शुद्ध अनर्जक आस्ति अनुपात है। संशोधित ढाँचे में तीन सूचक हैं: पूँजी के लिए जोखिम भारित आस्तियों पर पूँजी अनुपात या कॉमन इक्विटी टियर 1 अनुपात, आस्ति गुणवत्ता के लिए शुद्ध अनर्जक आस्ति अनुपात, और उत्तोलन के लिए टियर 1 लीवरेज अनुपात। शुद्ध आँकड़ा इसलिए लिया जाता है कि वह प्रावधान के बाद बचे असुरक्षित फँसे ऋण दिखाता है, और वही राशि पूँजी को खा सकती है।

विकल्प A, सकल अनर्जक आस्ति अनुपात, समाचारों में बहुत छपता और उद्धृत होता है, इसलिए यह सबसे लुभावना गलत उत्तर है, पर ढाँचा शुद्ध अनुपात लेता है। विकल्प C, स्लिपेज अनुपात, वर्ष के दौरान फँसे ऋणों में नई बढ़त नापता है और विश्लेषण का माप है, पीसीए ट्रिगर नहीं। विकल्प D, प्रावधान कवरेज अनुपात, बताता है कि फँसे ऋणों के लिए कितना प्रावधान हुआ है; यहाँ यह पर्यवेक्षी अपेक्षा है, सीमा वाला मानक नहीं।

Q7.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

पीसीए ढाँचे में लाभांश बाँटने पर रोक किस चरण पर अनिवार्य कार्रवाई है?

  1. A.जोखिम सीमा 1
  2. B.जोखिम सीमा 2
  3. C.जोखिम सीमा 3
  4. D.बैंक पर अधिस्थगन लगने के बाद ही
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जोखिम सीमा 1

व्याख्या

सही उत्तर A, जोखिम सीमा 1 है। बैंक जैसे ही जोखिम सीमा 1 पार करता है, अनिवार्य कार्रवाइयों का पहला समूह लगता है: लाभांश बाँटने या लाभ भेजने पर रोक, और साथ ही यह अपेक्षा कि प्रवर्तक, मालिक या विदेशी बैंक की मूल संस्था पूँजी डालें। तर्क सीधा है: जो पैसा पूँजी मज़बूत कर सकता है, वह बैंक से बाहर न जाए।

विकल्प B, जोखिम सीमा 2, में सीमा 1 की सभी कार्रवाइयाँ और उनके ऊपर देश या विदेश में शाखा खोलने पर रोक है, इसलिए लाभांश रोक वहाँ शामिल तो है पर शुरू वहाँ से नहीं हुई। विकल्प C, जोखिम सीमा 3, में ऊपर की सब कार्रवाइयाँ और बोर्ड से स्वीकृत प्रौद्योगिकी उन्नयन के अलावा पूँजीगत व्यय की सीमा जुड़ती है। विकल्प D गलत है क्योंकि बैंककारी विनियमन अधिनियम के तहत अधिस्थगन बहुत बाद का और दुर्लभ कदम है, जो पुनर्गठन या समामेलन के समय आता है, और पीसीए की पाबंदियाँ उससे बहुत पहले लग जाती हैं।

Q8.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

किसी बैंक को पीसीए से बाहर करने पर विचार तब होता है जब वह लगातार कितने तिमाही वित्तीय परिणामों में कोई सीमा उल्लंघन न दिखाए?

  1. A.दो
  2. B.तीन
  3. C.चार
  4. D.छह
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चार

व्याख्या

सही उत्तर C, चार है। पीसीए की पाबंदियाँ हटाने पर विचार तब होता है जब लगातार चार तिमाही वित्तीय परिणामों में किसी भी मानक पर कोई जोखिम सीमा न टूटी हो, और उन चार में से एक लेखा परीक्षित वार्षिक वित्तीय परिणाम होना चाहिए। लेखा परीक्षित परिणाम पर ज़ोर इसलिए है कि सुधार केवल अनंतिम आँकड़ों से नहीं, लेखा परीक्षक से भी पुष्ट हो जाए।

विकल्प A, दो, और विकल्प B, तीन, इतनी छोटी अवधि है कि पर्यवेक्षक को भरोसा न हो कि सुधार असली है या किसी एक अच्छी तिमाही का नतीजा। विकल्प D, छह, अपेक्षा को बढ़ाकर बताता है। यह भी ध्यान रखें कि चार साफ़ तिमाहियाँ आवश्यक हैं पर अपने आप में पर्याप्त नहीं: रिज़र्व बैंक इसके अतिरिक्त पर्यवेक्षी संतोष देखता है, जिसमें यह आकलन शामिल है कि बैंक की लाभप्रदता टिकाऊ है या नहीं।

Q9.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

भारतीय रिज़र्व बैंक के वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड की अध्यक्षता कौन करता है?

  1. A.केंद्रीय वित्त मंत्री
  2. B.भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर
  3. C.वित्त सचिव
  4. D.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अध्यक्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर

व्याख्या

सही उत्तर B, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर है। वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड नवंबर 1994 में इसलिए गठित हुआ कि बैंकों, चुनिंदा अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पर्यवेक्षण पर अविभाजित ध्यान मिले। यह रिज़र्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की समिति है, जिसके अध्यक्ष गवर्नर होते हैं, एक डिप्टी गवर्नर उपाध्यक्ष होते हैं और केंद्रीय बोर्ड के कुछ सदस्य इसमें रहते हैं।

विकल्प A गलत है क्योंकि केंद्रीय वित्त मंत्री सरकार की वित्तीय मशीनरी के मुखिया हैं, रिज़र्व बैंक की समिति के नहीं; बैंकों का पर्यवेक्षण केंद्रीय बैंक का काम है जिसे मंत्रालय से दूरी पर रखा जाता है। विकल्प C, वित्त सचिव, सरकार में आर्थिक कार्य विभाग के मुखिया हैं और यहाँ अध्यक्षता की कोई भूमिका नहीं रखते। विकल्प D गलत है क्योंकि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड प्रतिभूति बाज़ारों का नियमन करता है, जो अलग क्षेत्र है। बैंक के निरीक्षण की वैधानिक शक्ति बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35 से आती है।

Q10.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को जोखिम भारित आस्तियों पर न्यूनतम कितना पूँजी अनुपात रखना होता है?

  1. A.8 प्रतिशत
  2. B.9 प्रतिशत
  3. C.10.5 प्रतिशत
  4. D.11.5 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 9 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर B, 9 प्रतिशत है। भारत बासल III लागू करता है पर न्यूनतम कड़ा रखता है: जोखिम भारित आस्तियों पर पूँजी अनुपात कम से कम नौ प्रतिशत होना चाहिए, जिसमें कॉमन इक्विटी टियर 1 कम से कम 5.5 प्रतिशत और टियर 1 कम से कम सात प्रतिशत हो। रिज़र्व बैंक ने भारतीय न्यूनतम को वैश्विक न्यूनतम से लगातार एक प्रतिशत बिंदु ऊपर रखा है।

विकल्प A, 8 प्रतिशत, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय बासल III का न्यूनतम कुल पूँजी अनुपात है और इस प्रश्न में सबसे आम गलती यही है। विकल्प C, 10.5 प्रतिशत, बासल के आठ प्रतिशत में 2.5 प्रतिशत पूँजी संरक्षण बफर जोड़ने से बनता है, जो बफर सहित वैश्विक अपेक्षा है। विकल्प D, 11.5 प्रतिशत, भारत के नौ प्रतिशत में 2.5 प्रतिशत संरक्षण बफर जोड़ने से बनता है, जो बफर गिनने पर भारत की प्रभावी अपेक्षा है, पर प्रश्न में पूछा गया न्यूनतम अनुपात नौ प्रतिशत ही है।

Q11.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

डी-एसआईबी ढाँचे में बैंक का प्रणालीगत महत्व अंक निकालने वाले चार सूचकों में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?

  1. A.आकार
  2. B.अंतर-संबद्धता
  3. C.लाभप्रदता
  4. D.जटिलता
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लाभप्रदता

व्याख्या

सही उत्तर C, लाभप्रदता है। बैंक का प्रणालीगत महत्व अंक चार सूचकों से बनता है: आकार, अंतर-संबद्धता, प्रतिस्थापनीयता और जटिलता। सबसे अधिक भार आकार को मिलता है, क्योंकि बैंक की बही का पैमाना ही तय करता है कि उसके डूबने से कितना नुकसान होगा। लाभप्रदता का प्रणालीगत महत्व से कोई लेना-देना नहीं; बहुत लाभ कमाने वाला बैंक छोटा हो सकता है और घाटे वाला बैंक प्रणालीगत हो सकता है।

विकल्प A, आकार, पहला और सबसे भारी सूचक है। विकल्प B, अंतर-संबद्धता, बताता है कि बैंक अन्य वित्तीय संस्थाओं को कितना उधार देता और उनसे कितना लेता है, क्योंकि यही कड़ियाँ संकट फैलाती हैं। विकल्प D, जटिलता, बताता है कि बैंक का कारोबार और उसके उपकरण कितने जटिल हैं, क्योंकि जटिल बैंक को संकट में समेटना कठिन होता है। चौथा सूचक प्रतिस्थापनीयता पूछता है कि उसकी सेवाएँ, जैसे भुगतान और अभिरक्षा, दूसरे बैंक कितनी आसानी से सँभाल सकते हैं।

Q12.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

बड़े ऋणों की सूचना के केंद्रीय भंडार (CRILC) में बैंक कितनी कुल जोखिम राशि से ऊपर के उधारकर्ताओं का ब्योरा देते हैं?

  1. A.एक करोड़ रुपये
  2. B.पाँच करोड़ रुपये
  3. C.दस करोड़ रुपये
  4. D.पचास करोड़ रुपये
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सही उत्तर: B. पाँच करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर B, पाँच करोड़ रुपये है। बड़े ऋणों की सूचना का केंद्रीय भंडार, जिसे संक्षेप में CRILC कहते हैं, रिज़र्व बैंक का वह डेटाबेस है जिसमें बैंक हर उस उधारकर्ता का ब्योरा देते हैं जिसकी कुल जोखिम राशि, निधि आधारित और गैर-निधि आधारित मिलाकर, पाँच करोड़ रुपये या अधिक है। उद्देश्य दबाव की जल्दी पहचान है: एक ऋणदाता के यहाँ चूक शुरू होते ही बाकी सब ऋणदाताओं को दिख जाता है।

विकल्प A, एक करोड़, बहुत नीचे है और इससे भंडार छोटे खातों से भर जाएगा। विकल्प C, दस करोड़, और विकल्प D, पचास करोड़, बहुत ऊँचे हैं और इससे बड़े दबाव वाले खाते नज़र से बच जाएँगे। CRILC के साथ यह भी याद रखें कि केंद्रीय धोखाधड़ी रजिस्ट्री बैंकों द्वारा सूचित धोखाधड़ियों का रिज़र्व बैंक का डेटाबेस है, और दोनों दूरस्थ निगरानी के औज़ार हैं जो जोखिम आधारित पर्यवेक्षण में मौके पर निरीक्षण के साथ काम करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डी-एसआईबी आसान शब्दों में क्या है?

घरेलू प्रणालीगत महत्व का बैंक वह बैंक है जो इतना बड़ा और वित्तीय व्यवस्था से इतना जुड़ा है कि उसके डूबने से देश की अर्थव्यवस्था हिल जाएगी। रिज़र्व बैंक हर साल ऐसे बैंक चिह्नित करता है और उनसे सामान्य अपेक्षा के ऊपर अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर 1 पूँजी रखवाता है, ताकि वे बड़ा नुकसान अपने दम पर सह सकें।

भारत में कौन बैंक डी-एसआईबी हैं?

रिज़र्व बैंक की 2025 की सूची में तीन बैंक हैं: भारतीय स्टेट बैंक बकेट 4 में, जिसे जोखिम भारित आस्तियों का 0.80 प्रतिशत अतिरिक्त CET1 रखना है; एचडीएफसी बैंक बकेट 2 में 0.40 प्रतिशत पर; और आईसीआईसीआई बैंक बकेट 1 में 0.20 प्रतिशत पर। बकेट 3 और 5 खाली हैं।

2021 के संशोधित पीसीए ढाँचे में क्या बदला?

आस्तियों पर प्रतिफल से मापी जाने वाली लाभप्रदता मुख्य निगरानी क्षेत्र से हटा दी गई और टियर 1 लीवरेज अनुपात से मापा जाने वाला उत्तोलन उसकी जगह आया। इसलिए संशोधित ढाँचा पूँजी, आस्ति गुणवत्ता और उत्तोलन देखता है। यह 1 जनवरी 2022 से प्रभावी हुआ और लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इससे बाहर हैं।

कोई बैंक पीसीए से बाहर कैसे आता है?

बैंक को लगातार चार तिमाही वित्तीय परिणामों में किसी भी मानक पर कोई सीमा उल्लंघन न दिखाना होता है, और इनमें एक लेखा परीक्षित वार्षिक परिणाम होना चाहिए। इसके बाद भी रिज़र्व बैंक पर्यवेक्षी संतोष देखता है, विशेष रूप से यह कि लाभप्रदता में सुधार टिकाऊ लगता है या नहीं, तभी बैंक को बाहर करता है।

जी-एसआईबी और डी-एसआईबी में क्या अंतर है?

वैश्विक प्रणालीगत महत्व का बैंक वित्तीय स्थिरता बोर्ड बासल समिति के साथ चिह्नित करता है और वह विश्व स्तर पर मायने रखता है। घरेलू प्रणालीगत महत्व का बैंक राष्ट्रीय पर्यवेक्षक, यहाँ भारतीय रिज़र्व बैंक, चिह्नित करता है और वह राष्ट्रीय स्तर पर मायने रखता है। डी-एसआईबी का अधिभार रिज़र्व बैंक तय करता है।

आरबीआई में बैंकों के पर्यवेक्षण का काम कौन निकाय देखता है?

वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड, जो नवंबर 1994 में गठित हुआ और जिसकी अध्यक्षता रिज़र्व बैंक के गवर्नर करते हैं, बैंकों, चुनिंदा वित्तीय संस्थाओं और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पर्यवेक्षण पर केंद्रित ध्यान देता है। बैंक के निरीक्षण की वैधानिक शक्ति रिज़र्व बैंक को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35 से मिलती है।

स्रोत

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