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GK नोट्सभारतीय अर्थव्यवस्थाऔद्योगिक नीति और एमएसएमई

औद्योगिक नीति और एमएसएमई: संकल्प, सुधार और योजनाएँ

परीक्षा के नोट्स: 1948 और 1956 के संकल्पों से 1991 के सुधारों तक भारत की औद्योगिक नीति, तथा एमएसएमई का 2006 का अधिनियम, वर्गीकरण, संस्थाएँ और योजनाएँ।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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औद्योगिक नीति और एमएसएमई: संकल्प, सुधार और योजनाएँ — GK24 title card
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औद्योगिक नीति उन नियमों का समूह है जिनसे सरकार तय करती है कि कोई उद्योग कौन लगाएगा और किन शर्तों पर। भारत की नीति दो बहुत भिन्न चरणों से गुज़री है: 1948 से 1990 तक वह लाइसेंस और बड़े सार्वजनिक क्षेत्र पर टिकी रही, और 1991 से वह लाइसेंस मुक्ति, प्रतिस्पर्धा तथा निजी निवेश पर टिकी है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इस कहानी के भीतर वह क्षेत्र हैं जो कृषि के बाद सबसे अधिक लोगों को रोज़गार देते हैं, और उनका अपना कानून तथा योजनाओं का अपना समूह है।

1991 से पहले की औद्योगिक नीति

1948 के औद्योगिक नीति संकल्प ने मिश्रित अर्थव्यवस्था स्वीकार की और उद्योगों को चार वर्गों में बाँटकर शस्त्र, परमाणु ऊर्जा तथा रेलवे राज्य के लिए सुरक्षित रखे। 1956 का औद्योगिक नीति संकल्प, जिसे प्रायः भारत का आर्थिक संविधान कहा जाता है, बहुत आगे गया: अनुसूची क में सत्रह उद्योग राज्य के लिए सुरक्षित रखे गए, अनुसूची ख में बारह उद्योग रखे गए जिनमें राज्य की हिस्सेदारी क्रमशः बढ़नी थी, और अनुसूची ग शेष उद्योग निजी क्षेत्र के लिए छोड़ दी। इसी संकल्प ने दूसरी पंचवर्षीय योजना और उसके भारी उद्योग पर बल को आकार दिया। 1951 के उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम ने कारखाना लगाने, उसका विस्तार करने, उत्पाद बदलने या स्थान बदलने के लिए लाइसेंस अनिवार्य किया, और 1969 के एकाधिकार तथा प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम ने बड़े औद्योगिक घरानों पर और नियंत्रण रखा। 1977 के नीति वक्तव्य ने लघु, ग्रामीण तथा कुटीर उद्योगों की ओर ध्यान मोड़ा और ज़िला उद्योग केंद्र बनाए, और अस्सी के दशक के मध्य से आंशिक लाइसेंस मुक्ति आरंभ हुई।

1991 की नई औद्योगिक नीति

  • लगभग सभी उद्योगों के लिए औद्योगिक लाइसेंस समाप्त कर दिया गया और केवल एक छोटी सूची, जैसे रक्षा उपकरण, औद्योगिक विस्फोटक, संकटपूर्ण रसायन, तंबाकू उत्पाद तथा मादक पेय, लाइसेंस के अधीन रखी गई।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सुरक्षित उद्योगों की संख्या 1956 के सत्रह से तेज़ी से घटाई गई और उसके बाद भी घटती रही।
  • एमआरटीपी अधिनियम की परिसंपत्ति सीमाएँ हटा दी गईं, इसलिए बड़ी कंपनियों को विस्तार के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं रही।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा विदेशी प्रौद्योगिकी समझौतों को निर्धारित सीमा तक स्वतः अनुमोदन मिला और सार्वजनिक उद्यमों में सरकारी हिस्सेदारी का विनिवेश आरंभ हुआ।
  • रुग्ण इकाइयाँ रुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम के अंतर्गत औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड को भेजी जाती थीं, जिसे दिसंबर 1991 में संशोधित कर सार्वजनिक उद्यम भी उसके दायरे में लाए गए, और श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय नवीकरण निधि बनाई गई।

आगे के कदम उसी दिशा में चले। 2002 के प्रतिस्पर्धा अधिनियम ने एमआरटीपी अधिनियम का स्थान लिया और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग बनाया। 2016 की दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता ने रुग्ण कंपनियों की पुरानी व्यवस्था बदल दी। 2011 की राष्ट्रीय विनिर्माण नीति ने विनिर्माण को राष्ट्रीय उत्पादन के एक चौथाई तक लाने का लक्ष्य रखा, 2014 में मेक इन इंडिया आया, 2016 में स्टार्टअप इंडिया, और 2020 से चुने हुए क्षेत्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएँ घोषित हुईं।

एमएसएमई और 2006 का अधिनियम

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2 अक्तूबर 2006 से प्रवर्तन में आया और उसने पहली बार इस क्षेत्र को वैधानिक परिभाषा, एमएसएमई के लिए राष्ट्रीय बोर्ड तथा विलंबित भुगतान की व्यवस्था दी। आरंभिक रूप में वर्गीकरण केवल संयंत्र और मशीनरी में निवेश पर आधारित था, जिसमें विनिर्माण तथा सेवा उद्यमों के लिए अलग सीमाएँ थीं। 2020 की अधिसूचना ने इसके स्थान पर मिश्रित मानदंड रखे, जो निवेश और कारोबार दोनों को साथ लेते हैं तथा विनिर्माण एवं सेवा को समान मानते हैं: उसके अनुसार सूक्ष्म उद्यम में निवेश एक करोड़ रुपये तक और कारोबार पाँच करोड़ तक, लघु उद्यम में दस करोड़ तथा पचास करोड़ तक, और मध्यम उद्यम में पचास करोड़ तथा दो सौ पचास करोड़ रुपये तक था। ये सीमाएँ बाद में बढ़ाई गई हैं, इसलिए 2020 के आँकड़े याद रखें, जिन्हें परीक्षाएँ आज भी पूछती हैं, और वर्तमान सीमा के लिए नवीनतम अधिसूचना देखें। पंजीकरण अब उद्यम पोर्टल पर होता है, जिसने उद्योग आधार ज्ञापन का स्थान लिया, और व्यापारी भी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के प्रयोजन से पंजीकरण करा सकते हैं।

जानने योग्य संस्थाएँ और योजनाएँ

संस्था या योजनावर्षकार्य
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम1955लघु इकाइयों को विपणन, प्रौद्योगिकी और कच्चे माल की सहायता
खादी और ग्रामोद्योग आयोग1957खादी तथा ग्रामोद्योग; रोज़गार सृजन कार्यक्रम की नोडल एजेंसी
भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक1990क्षेत्र का शीर्ष वित्तीय संस्थान, मुख्यालय लखनऊ
सूक्ष्म और लघु उद्यम ऋण गारंटी निधि न्यास2000सूक्ष्म तथा लघु इकाइयों को बिना गारंटी ऋण की प्रत्याभूति
सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति2012सरकारी खरीद का निश्चित भाग इन उद्यमों से, जिसमें अनुसूचित जाति तथा जनजाति और महिला उद्यमों का उपभाग
समाधान पोर्टल2017विलंबित भुगतान की शिकायतें, जो अधिनियम के अनुसार पैंतालीस दिन में होना चाहिए

एमएसएमई महत्वपूर्ण हैं क्योंकि प्रत्येक रोज़गार के लिए उनमें पूँजी कम लगती है, वे उद्योग को छोटे नगरों तक फैलाते हैं, बड़े कारखानों के लिए आपूर्तिकर्ता बनते हैं और देश के निर्यात का बड़ा भाग कमाते हैं। उनकी कठिनाइयाँ भी उतनी ही पूछी जाती हैं: उचित दर पर ऋण का अभाव, क्रेताओं द्वारा विलंबित भुगतान, पुरानी प्रौद्योगिकी, विपणन की सीमित पहुँच और सस्ते आयात से प्रतिस्पर्धा।

परीक्षा की दृष्टि से

इस विषय के प्रश्न तीन समूहों में आते हैं। पहला, संकल्प तथा अधिनियम अपने वर्षों के साथ: 1948, तीन अनुसूचियों वाला 1956, 1951 का लाइसेंस अधिनियम, 1969 का एमआरटीपी अधिनियम और 1991 की नई औद्योगिक नीति, जहाँ भारत का आर्थिक संविधान वाक्यांश सदा 1956 की ओर संकेत करता है। दूसरा, 1991 और उसके बाद के सुधार, जहाँ पूछा जाता है कि अब किन उद्योगों को लाइसेंस चाहिए, एमआरटीपी अधिनियम का स्थान किसने लिया और रुग्ण कंपनियों की व्यवस्था किस संहिता ने बदली। तीसरा, एमएसएमई, जिससे सर्वाधिक प्रश्न आते हैं: अधिनियम के प्रवर्तन का वर्ष, संक्षेपाक्षर का अर्थ, निवेश तथा कारोबार के मिश्रित मानदंड, भुगतान का पैंतालीस दिन का नियम, उद्यम पोर्टल, और राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, खादी और ग्रामोद्योग आयोग तथा सिडबी के स्थापना वर्ष। वर्गीकरण की सीमाएँ संशोधित हुई हैं, इसलिए प्रश्न में दिए आँकड़ों को उसी अधिसूचना का मानकर पढ़ें।

महत्वपूर्ण तथ्य

पूरा रूपसूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम
भारत का आर्थिक संविधानऔद्योगिक नीति संकल्प, 1956
लाइसेंस अधिनियमउद्योग विकास और विनियमन अधिनियम, 1951
1969 का एकाधिकार कानूनएमआरटीपी अधिनियम, जिसका स्थान 2002 के प्रतिस्पर्धा अधिनियम ने लिया
सुधारनई औद्योगिक नीति, 1991: लाइसेंस मुक्ति, विनिवेश, विदेशी निवेश
रुग्ण उद्योग कानूनरुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम, दिसंबर 1991 में संशोधित कर सार्वजनिक उद्यम सम्मिलित
एमएसएमई कानूनएमएसएमईडी अधिनियम, 2 अक्तूबर 2006 से प्रवर्तन में
2020 से वर्गीकरणनिवेश और कारोबार के मिश्रित मानदंड, विनिर्माण तथा सेवा के लिए समान
पंजीकरणउद्यम पोर्टल, जिसने उद्योग आधार ज्ञापन का स्थान लिया
एनएसआईसीराष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, 1955
केवीआईसीखादी और ग्रामोद्योग आयोग, 1957
सिडबीभारतीय लघु उद्योग विकास बैंक, 1990, मुख्यालय लखनऊ
ऋण गारंटीसीजीटीएमएसई, 2000, सूक्ष्म तथा लघु इकाइयों के बिना गारंटी ऋण के लिए
भुगतान का नियमअधिनियम के अनुसार पैंतालीस दिन में; शिकायत समाधान पोर्टल पर

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · 20 Dec 2020आसान

एमएसएमई का अर्थ क्या है?

  1. A.मध्यम, लघु और हाशिए के उद्यम
  2. B.सूक्ष्म, लघु और हाशिए के उद्यम
  3. C.मध्यम, सामरिक और सूक्ष्म उद्यम
  4. D.सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम

व्याख्या

सही उत्तर है D, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम। यह पद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम से आया है, जो 2 अक्तूबर 2006 से प्रवर्तन में आया और जिसने इस क्षेत्र को पहली वैधानिक परिभाषा दी तथा लघु एवं सहायक औद्योगिक उपक्रम की पुरानी शब्दावली का स्थान लिया।

विकल्प A गलत है क्योंकि पहली श्रेणी सूक्ष्म है, मध्यम नहीं; बढ़ते क्रम में तीन श्रेणियाँ सूक्ष्म, लघु और मध्यम हैं। विकल्प B इसी कारण उलटे रूप में गलत है: तीसरा शब्द मध्यम है, हाशिए का नहीं, और भारत के किसी कानून में हाशिए का उद्यम जैसा पद नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि अधिनियम में सामरिक नाम की कोई उद्यम श्रेणी ही नहीं है। यह इस क्षेत्र का सरलतम प्रश्न है, इसलिए विकल्प अंत तक पढ़ें, क्योंकि चारों आरंभ में सही से लगते हैं।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · 5 Dec 2021मध्यम

भारत में एक करोड़ रुपये तक के निवेश और पाँच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले व्यवसाय किस श्रेणी में आते हैं?

  1. A.अति लघु उद्यम
  2. B.लघु उद्यम
  3. C.सूक्ष्म उद्यम
  4. D.मध्यम उद्यम
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सूक्ष्म उद्यम

व्याख्या

सही उत्तर है C, सूक्ष्म उद्यम। 2020 में अधिसूचित मिश्रित मानदंड के अनुसार संयंत्र, मशीनरी या उपकरण में एक करोड़ रुपये तक के निवेश और पाँच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाला उद्यम सूक्ष्म उद्यम है, और यही सीमाएँ चाहे वह वस्तु बनाता हो या सेवा देता हो, समान रूप से लागू होती हैं। किसी एक सीमा के पार जाने पर उद्यम अगली श्रेणी में जाता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि अति लघु या टिनी उद्यम पुरानी नीति व्यवस्था की श्रेणी थी, जो वर्तमान वर्गीकरण में नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि उसी अधिसूचना में लघु उद्यम की सीमा दस करोड़ रुपये का निवेश और पचास करोड़ का कारोबार थी। विकल्प D गलत है क्योंकि मध्यम उद्यम की सीमा पचास करोड़ तथा दो सौ पचास करोड़ रुपये थी। सीमाएँ बाद में बढ़ाई गई हैं, पर इस आकार का उद्यम सूक्ष्म श्रेणी में ही रहता है, इसलिए उत्तर नहीं बदलता।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 18 Jan, 2025कठिन

आर्थिक सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत दिसंबर 1991 में किस अधिनियम में संशोधन कर सार्वजनिक उद्यमों को औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड के दायरे में लाया गया?

  1. A.उद्योग अधिनियम
  2. B.कंपनी अधिनियम
  3. C.वित्तीय पुनर्वास अधिनियम
  4. D.रुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. रुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर है D, रुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम। 1985 के इस अधिनियम ने निजी क्षेत्र की रुग्ण औद्योगिक इकाइयों के लिए औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड बनाया था। सुधारों के अंतर्गत दिसंबर 1991 में उसमें संशोधन हुआ, जिससे रुग्ण सार्वजनिक उद्यम भी बोर्ड को भेजे जा सकें; यह उस नई नीति से मेल खाता था जो सार्वजनिक उपक्रमों को व्यावसायिक मानदंड पर परखना चाहती थी।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1951 का उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम लाइसेंस से संबंधित था, रुग्णता या पुनर्जीवन से नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि कंपनी अधिनियम सामान्यतः कंपनियों के गठन और संचालन का कानून है और उसके अंतर्गत परिसमापन अलग मार्ग है। विकल्प C गलत है क्योंकि भारतीय कानून में वित्तीय पुनर्वास अधिनियम नाम का कोई कानून नहीं है। 1985 के अधिनियम की व्यवस्था का स्थान आगे 2016 की दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता ने लिया।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 24 Mar, 2026, Shift 2मध्यम

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की स्थापना भारत में किस वर्ष हुई?

  1. A.1954
  2. B.1982
  3. C.1955
  4. D.1975
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1955

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1955। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की स्थापना 1955 में हुई, जिसका कार्य लघु इकाइयों को किराया क्रय पर मशीनें, कच्चे माल की आपूर्ति, विपणन और सरकारी खरीद में सहायता देना है, और वह सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1954 ग्रामीण तथा लघु उद्योगों पर कार्वे समिति के कार्य का वर्ष है, और वह यहाँ उस अभ्यर्थी को फँसाने के लिए है जिसे केवल इतना याद है कि निगम पचास के दशक के मध्य का है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1982 में ग्रामीण तथा कृषि ऋण के लिए नाबार्ड बना। विकल्प D गलत है क्योंकि 1975 कोयला कंपनियों के राष्ट्रीयकरण और कोल इंडिया की स्थापना का वर्ष है, जिसका लघु उद्योग से संबंध नहीं। इस क्षेत्र की तिथियाँ एक पंक्ति में रखें: एनएसआईसी 1955, केवीआईसी 1957, नाबार्ड 1982 और सिडबी 1990।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम किस वर्ष प्रवर्तन में आया?

  1. A.2002
  2. B.2004
  3. C.2006
  4. D.2010
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2006

व्याख्या

सही उत्तर है C, 2006। एमएसएमईडी अधिनियम 2 अक्तूबर 2006 से प्रवर्तन में आया। उसने पहली बार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की कानूनी परिभाषा दी, एमएसएमई के लिए राष्ट्रीय बोर्ड का उपबंध किया, पंजीकरण ज्ञापन की व्यवस्था की और यह नियम रखा कि क्रेता को सूक्ष्म या लघु उद्यम का भुगतान पैंतालीस दिन में करना होगा।

विकल्प A गलत है क्योंकि 2002 प्रतिस्पर्धा अधिनियम का वर्ष है, जिसने एमआरटीपी अधिनियम का स्थान लिया। विकल्प B गलत है क्योंकि 2004 में इस क्षेत्र का कोई कानून नहीं आया; वह वर्ष केवल सही उत्तर के निकट होने के कारण रखा गया है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2010 में इस क्षेत्र की कोई विधि नहीं बनी, यद्यपि 2011 में राष्ट्रीय विनिर्माण नीति आई। वर्ष के साथ तिथि भी ध्यान रखें, क्योंकि गाँव और लघु उद्यम के कानून के लिए 2 अक्तूबर जानबूझकर चुना गया।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

किस दस्तावेज़ को भारत का आर्थिक संविधान कहा जाता है?

  1. A.1948 का औद्योगिक नीति संकल्प
  2. B.1956 का औद्योगिक नीति संकल्प
  3. C.1977 का औद्योगिक नीति वक्तव्य
  4. D.1991 की नई औद्योगिक नीति
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1956 का औद्योगिक नीति संकल्प

व्याख्या

सही उत्तर है B, 1956 का औद्योगिक नीति संकल्प। उसने वह ढाँचा तय किया जिसमें भारतीय उद्योग तीन दशक से अधिक चला और उद्योगों को तीन अनुसूचियों में बाँटा: अनुसूची क ने सत्रह उद्योग राज्य के लिए सुरक्षित रखे, अनुसूची ख ने बारह में राज्य की बढ़ती भागीदारी तय की और अनुसूची ग ने शेष निजी क्षेत्र को दिए। उसी ने दूसरी पंचवर्षीय योजना को भारी तथा आधारभूत उद्योग पर बल दिया।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1948 के संकल्प ने केवल मिश्रित अर्थव्यवस्था का विचार और उद्योगों का चार भागों में विभाजन घोषित किया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1977 के वक्तव्य ने लघु, ग्रामीण तथा कुटीर उद्योगों की ओर ध्यान मोड़ा और ज़िला उद्योग केंद्र बनाए। विकल्प D गलत है क्योंकि 1991 की नीति ने उसी व्यवस्था को समाप्त किया जो 1956 ने बनाई थी। प्रश्न में आर्थिक संविधान वाक्यांश सदा 1956 की ओर संकेत करता है।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में औद्योगिक लाइसेंस किस अधिनियम द्वारा अनिवार्य किया गया था?

  1. A.उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम, 1951
  2. B.एमआरटीपी अधिनियम, 1969
  3. C.फेरा, 1973
  4. D.कंपनी अधिनियम, 1956
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम, 1951

व्याख्या

सही उत्तर है A, उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम, 1951। इस अधिनियम के अंतर्गत नया कारखाना लगाने, क्षमता बढ़ाने, उत्पाद बदलने या संयंत्र का स्थान बदलने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता था, और इसी से राज्य 1991 तक औद्योगिक विकास का स्वरूप नियंत्रित करता रहा।

विकल्प B गलत है क्योंकि 1969 का एमआरटीपी अधिनियम आर्थिक शक्ति के संकेंद्रण तथा प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार से संबंधित था और वह लाइसेंस व्यवस्था के साथ चलता था, उसे बनाता नहीं था। विकल्प C गलत है क्योंकि 1973 का विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम विदेशी मुद्रा और विदेशी हिस्सेदारी को नियंत्रित करता था, जिसका स्थान 1999 के फेमा ने लिया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1956 का कंपनी अधिनियम कंपनियों के निगमन और प्रबंधन का कानून था। 1951 को लाइसेंस, 1969 को एकाधिकार और 1973 को विदेशी मुद्रा से जोड़ें।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

1969 के एमआरटीपी अधिनियम का स्थान किस कानून ने लिया?

  1. A.प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002
  2. B.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986
  3. C.दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016
  4. D.फेमा, 1999
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002

व्याख्या

सही उत्तर है A, प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002। एमआरटीपी अधिनियम लाइसेंस वाली अर्थव्यवस्था के लिए बना था और कंपनियों के आकार से चिंतित रहता था; प्रतिस्पर्धा अधिनियम ने ध्यान आचरण पर मोड़ा, प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौतों तथा प्रभावी स्थिति के दुरुपयोग पर रोक लगाई, संयोजनों का नियमन किया और इन नियमों को लागू करने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग बनाया।

विकल्प B गलत है क्योंकि 1986 का उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, जिसका स्थान आगे 2019 के अधिनियम ने लिया, उपभोक्ता आयोगों के माध्यम से व्यक्तिगत उपभोक्ता की रक्षा करता है और वह अलग कानून है। विकल्प C गलत है क्योंकि 2016 की संहिता ने रुग्ण तथा दिवालिया कंपनियों की व्यवस्था बदली, एकाधिकार कानून नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1999 के फेमा ने विदेशी मुद्रा के क्षेत्र में 1973 के फेरा का स्थान लिया। इन तीन प्रतिस्थापनों को साथ याद करें।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

निम्नलिखित में से किस उद्योग के लिए भारत में आज भी औद्योगिक लाइसेंस आवश्यक है?

  1. A.सीमेंट
  2. B.औद्योगिक विस्फोटक
  3. C.सूती वस्त्र
  4. D.चीनी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. औद्योगिक विस्फोटक

व्याख्या

सही उत्तर है B, औद्योगिक विस्फोटक। 1991 की नई औद्योगिक नीति के बाद लगभग सभी उद्योगों का लाइसेंस समाप्त कर दिया गया और सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक नीति के कारण केवल एक छोटी सूची लाइसेंस के अधीन रखी गई: रक्षा उपकरण और एयरोस्पेस, औद्योगिक विस्फोटक, निर्दिष्ट संकटपूर्ण रसायन, सिगरेट जैसे तंबाकू उत्पाद, तथा मादक पेय का आसवन।

विकल्प A गलत है क्योंकि सीमेंट लाइसेंस और नियंत्रण से मुक्त हो चुका है और आज खुला उद्योग है। विकल्प C गलत है क्योंकि सूती वस्त्र, जो एक समय सर्वाधिक नियंत्रित भारतीय उद्योग था, अब लाइसेंस के अधीन नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि चीनी भी लाइसेंस मुक्त हो गई, यद्यपि मूल्य तथा गन्ना आपूर्ति के मामलों में वह नियंत्रित वस्तु बनी हुई है। इस प्रकार के प्रश्नों का पूरा उत्तर वही छोटी सूची है।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम की नोडल एजेंसी कौन है?

  1. A.खादी और ग्रामोद्योग आयोग
  2. B.सिडबी
  3. C.नाबार्ड
  4. D.राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. खादी और ग्रामोद्योग आयोग

व्याख्या

सही उत्तर है A, खादी और ग्रामोद्योग आयोग। इस रोज़गार सृजन कार्यक्रम में बैंक ऋण के साथ सरकार की मार्जिन मनी सहायता दी जाती है, जिससे कोई व्यक्ति सूक्ष्म उद्यम लगा सके, और 1957 में एमएसएमई मंत्रालय के अधीन बना यह आयोग राज्य बोर्डों तथा ज़िला उद्योग केंद्रों के माध्यम से इसकी राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।

विकल्प B गलत है क्योंकि 1990 में लखनऊ मुख्यालय के साथ बना सिडबी लघु उद्योग के लिए शीर्ष पुनर्वित्त संस्थान है, यह योजना चलाने वाली एजेंसी नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1982 में बना नाबार्ड कृषि तथा ग्रामीण विकास वित्त की शीर्ष संस्था है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1955 का राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम इकाइयों को मशीन, कच्चा माल और विपणन में सहायता देता है। चारों संस्थाएँ और उनके वर्ष अलग-अलग याद रखें, क्योंकि प्रश्न योजना को गलत एजेंसी से जोड़ते हैं।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

एमएसएमईडी अधिनियम के अंतर्गत क्रेता को सूक्ष्म या लघु उद्यम का भुगतान कितने दिनों में करना होता है?

  1. A.तीस दिन
  2. B.पैंतालीस दिन
  3. C.साठ दिन
  4. D.नब्बे दिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पैंतालीस दिन

व्याख्या

सही उत्तर है B, पैंतालीस दिन। अधिनियम कहता है कि क्रेता लिखित रूप में तय तिथि पर या उससे पहले भुगतान करेगा और किसी भी स्थिति में यह अवधि वस्तु की सुपुर्दगी या सेवा दिए जाने और स्वीकार किए जाने के दिन से पैंतालीस दिन से अधिक नहीं हो सकती। उसके बाद चक्रवृद्धि ब्याज देना होता है और उद्यम अपनी शिकायत समाधान पोर्टल पर या राज्य की सूक्ष्म तथा लघु उद्यम सुविधा परिषद के समक्ष ले जा सकता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि तीस दिन बाहरी सीमा नहीं है; लिखित समझौते के अभाव में वह सामान्य अवधि होती है, इसीलिए वह भ्रम पैदा करता है। विकल्प C और विकल्प D गलत हैं क्योंकि अधिनियम का कोई उपबंध सूक्ष्म या लघु उद्यम के भुगतान के लिए साठ या नब्बे दिन नहीं देता। इस नियम का कारण लघु इकाइयों की कार्यशील पूँजी की कठिनाई है।

Q12.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना किस वर्ष हुई और उसका मुख्यालय कहाँ है?

  1. A.1982, मुंबई
  2. B.1990, लखनऊ
  3. C.1991, नई दिल्ली
  4. D.2000, कानपुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1990, लखनऊ

व्याख्या

सही उत्तर है B, 1990, लखनऊ। सिडबी की स्थापना 1990 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के संवर्धन, वित्तपोषण तथा विकास की प्रमुख वित्तीय संस्था के रूप में हुई, और वह मुख्यतः बैंकों तथा अन्य ऋणदाताओं को पुनर्वित्त देकर कार्य करता है, हर इकाई को सीधे ऋण देकर नहीं। उसका मुख्यालय उत्तर प्रदेश के लखनऊ में है।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1982 और मुंबई नाबार्ड से जुड़े हैं, जो ग्रामीण तथा कृषि ऋण के लिए रिज़र्व बैंक से अलग किया गया था। विकल्प C गलत है क्योंकि 1991 नई औद्योगिक नीति का वर्ष है, इस बैंक का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि वर्ष 2000 सूक्ष्म तथा लघु उद्यम ऋण गारंटी न्यास का है और कानपुर इनमें किसी का मुख्यालय नहीं है। प्रश्न प्रायः वर्ष और नगर साथ पूछते हैं, इसलिए दोनों एक साथ याद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएसएमई का पूरा रूप क्या है?

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम। यह शब्द सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम से आया है, जो 2 अक्तूबर 2006 से प्रवर्तन में आया और जिसने लघु तथा सहायक औद्योगिक उपक्रम की पुरानी शब्दावली का स्थान लिया। इस क्षेत्र का कार्य एमएसएमई मंत्रालय देखता है और उद्यम अपना पंजीकरण उद्यम पोर्टल पर कराते हैं।

आज एमएसएमई का वर्गीकरण कैसे होता है?

मिश्रित मानदंड से, अर्थात संयंत्र, मशीनरी या उपकरण में निवेश और वार्षिक कारोबार दोनों देखे जाते हैं, और विनिर्माण तथा सेवा उद्यमों पर समान सीमाएँ लागू होती हैं। किसी एक सीमा के पार जाने पर उद्यम अगली श्रेणी में चला जाता है। 2020 में अधिसूचित सीमाएँ सूक्ष्म के लिए एक करोड़ तथा पाँच करोड़ रुपये, लघु के लिए दस करोड़ तथा पचास करोड़ और मध्यम के लिए पचास करोड़ तथा दो सौ पचास करोड़ थीं; वे बाद में बढ़ाई गई हैं, इसलिए वर्तमान आँकड़ों के लिए नवीनतम अधिसूचना देखें।

1956 के औद्योगिक नीति संकल्प को भारत का आर्थिक संविधान क्यों कहा जाता है?

क्योंकि उसने वह ढाँचा तय किया जिसमें भारतीय उद्योग तीन दशक से अधिक चला। उसने उद्योगों को तीन अनुसूचियों में बाँटा, सत्रह उद्योग राज्य के लिए सुरक्षित रखे, बारह में राज्य की बढ़ती भागीदारी तय की और शेष निजी क्षेत्र को दिए, तथा दूसरी पंचवर्षीय योजना को भारी और आधारभूत उद्योग पर बल दिया। 1991 तक हर बाद का नीति वक्तव्य उसी योजना के भीतर चला।

1991 की नई औद्योगिक नीति ने क्या बदला?

उसने लगभग सभी उद्योगों के लिए औद्योगिक लाइसेंस समाप्त कर दिया और केवल रक्षा उपकरण, औद्योगिक विस्फोटक, संकटपूर्ण रसायन, तंबाकू उत्पाद तथा मादक पेय जैसी छोटी सूची लाइसेंस के अधीन रखी। उसने सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सुरक्षित उद्योगों की सूची घटाई, एमआरटीपी अधिनियम की परिसंपत्ति सीमाएँ हटाईं, निर्धारित सीमा तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को स्वतः अनुमोदन दिया और सार्वजनिक उद्यमों में विनिवेश आरंभ किया।

एमएसएमई को क्रेता से भुगतान कितने दिनों में मिलना चाहिए?

पैंतालीस दिनों में, जो 2006 के एमएसएमईडी अधिनियम के विलंबित भुगतान संबंधी उपबंधों से आता है। यदि क्रेता तय अवधि में भुगतान नहीं करता, और किसी भी स्थिति में वस्तु या सेवा स्वीकार किए जाने के दिन से पैंतालीस दिन के बाद, तो ब्याज देना होता है और उद्यम अपनी शिकायत समाधान पोर्टल पर या राज्य की सूक्ष्म तथा लघु उद्यम सुविधा परिषद के समक्ष रख सकता है।

स्रोत

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 — सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार
  • औद्योगिक नीति वक्तव्य, 24 जुलाई 1991 — उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, भारत सरकार
  • भारतीय आर्थिक विकास, कक्षा 11: उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण — एनसीईआरटी
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