भारत के मुक्त व्यापार समझौते: सीईपीए, ईसीटीए और टीईपीए
परीक्षाओं के लिए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों के पूरे नोट्स: पीटीए, एफटीए, सीईपीए और सीईसीए का अंतर, साझेदार तथा वर्ष की सूची, ईएफटीए के साथ टीईपीए और मूल नियम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

मुक्त व्यापार समझौता दो या अधिक देशों के बीच वह संधि है जिसमें वे एक-दूसरे के सामान पर लगने वाले सीमा शुल्क को घटाने या हटाने पर सहमत होते हैं, और अक्सर सेवाओं, निवेश तथा सरकारी खरीद को भी एक-दूसरे के लिए खोलते हैं। भारत 1970 के दशक से ऐसे समझौते करता आया है, और इनमें सबसे नया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के चार देशों के साथ व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता, 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित होकर 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ। परीक्षक इस अध्याय को सूची और जोड़ी के विषय की तरह पूछते हैं: कौन सा देश किस समझौते के साथ है, संक्षिप्त नाम का पूरा रूप क्या है, और कोई समझौता किस वर्ष हस्ताक्षरित या प्रभावी हुआ। नीचे वही तथ्य दिए गए हैं जो बार-बार दोहराए जाते हैं।
आर्थिक एकीकरण की सीढ़ियां
व्यापार व्यवस्थाएं एक सीढ़ी पर बैठती हैं, और यह सीढ़ी स्वयं परीक्षा का विषय है। अधिमान्य व्यापार समझौता सबसे नीचे की पायदान है: शुल्क घटाया जाता है, हटाया नहीं जाता, और वह भी केवल सूचीबद्ध वस्तुओं पर। मुक्त व्यापार क्षेत्र सदस्यों के बीच अधिकांश वस्तुओं पर शुल्क हटा देता है, पर हर सदस्य बाहर से आने वाले सामान पर अपना अलग शुल्क बनाए रखता है। सीमा शुल्क संघ एक कदम आगे बढ़कर साझा बाह्य शुल्क अपनाता है, जिससे सभी सदस्य बाहरी देशों पर एक ही दर लगाते हैं। साझा बाजार इसमें श्रम और पूंजी की स्वतंत्र आवाजाही जोड़ देता है, और आर्थिक संघ साझा आर्थिक नीतियां तथा प्रायः साझा मुद्रा भी जोड़ देता है। यूरोपीय संघ इस सीढ़ी के शिखर का मानक उदाहरण है; भारत के लगभग सभी समझौते मुक्त व्यापार क्षेत्र की पायदान पर या उससे थोड़ा ऊपर ठहरते हैं।
भारतीय व्यापार समझौतों की वर्णमाला
भारत अपने समझौतों को उनके दायरे के अनुसार अलग-अलग नाम देता है, और यही अंतर सबसे पसंदीदा प्रश्न है। एफटीए वस्तुओं तक सीमित रहता है। सीईपीए, अर्थात व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता, और सीईसीए, अर्थात व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता, वस्तुओं के साथ सेवाओं, निवेश और आर्थिक सहयोग को भी समेटते हैं। ईसीटीए, अर्थात आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता, ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए समझौते का नाम है, और टीईपीए, व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता, ईएफटीए देशों के साथ हुए समझौते का नाम है। सीईटीए, व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता, ब्रिटेन के साथ 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित समझौते का नाम है।
भारत के प्रमुख व्यापार समझौते
| समझौता | साझेदार | हस्ताक्षर या प्रभावी |
|---|---|---|
| एपीटीए (बैंकॉक समझौता) | बांग्लादेश, चीन, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, लाओस | 1975 |
| भारत-श्रीलंका एफटीए | श्रीलंका | 1998 हस्ताक्षर, 2000 से प्रभावी |
| साफ्टा | सार्क सदस्य | 2004 हस्ताक्षर, 2006 से प्रभावी |
| भारत-सिंगापुर सीईसीए | सिंगापुर | 2005 |
| भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौता | आसियान | 2009 हस्ताक्षर, 2010 से प्रभावी |
| भारत-दक्षिण कोरिया सीईपीए | दक्षिण कोरिया | 2010 से प्रभावी |
| भारत-जापान सीईपीए | जापान | 2011 से प्रभावी |
| भारत-मलेशिया सीईसीए | मलेशिया | 2011 |
| भारत-मॉरीशस सीईसीपीए | मॉरीशस | 2021 |
| भारत-संयुक्त अरब अमीरात सीईपीए | संयुक्त अरब अमीरात | 2022 में हस्ताक्षर और प्रभावी |
| भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए | ऑस्ट्रेलिया | 2022 में हस्ताक्षर और प्रभावी |
| भारत-ईएफटीए टीईपीए | आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड | 2024 हस्ताक्षर, 2025 से प्रभावी |
| भारत-ब्रिटेन सीईटीए | ब्रिटेन | 2025 हस्ताक्षर |
इस तालिका की दो प्रविष्टियां अपनी प्रथमता के कारण याद रखने योग्य हैं। मॉरीशस के साथ सीईसीपीए अफ्रीका के किसी भी देश के साथ भारत का पहला व्यापार समझौता था। संयुक्त अरब अमीरात के साथ सीईपीए पर 18 फरवरी 2022 को हस्ताक्षर हुए और यह 1 मई 2022 से प्रभावी हो गया, यह असाधारण तेजी परीक्षक धीमे समझौतों से तुलना करने के लिए पूछते हैं।
टीईपीए: ईएफटीए के साथ समझौता
यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यूरोपीय संघ नहीं है। यह 1960 में स्थापित एक अलग समूह है, जिसके आज चार सदस्य हैं: आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड। इनमें स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और इसी कारण स्विट्जरलैंड से भारत का सबसे बड़ा आयात, सोना, जानबूझकर शुल्क कटौती से बाहर रखा गया। टीईपीए में चौदह अध्याय हैं और यह सबसे अधिक एक बात के लिए याद रखा जाता है: यह भारत द्वारा हस्ताक्षरित पहला समझौता है जिसमें साझेदार निवेश पर बाध्यकारी प्रतिबद्धता स्वीकार करते हैं। इसके अनुच्छेद 7.1 के अंतर्गत ईएफटीए देशों ने पहले दस वर्षों में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 50 अरब अमेरिकी डॉलर और अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर बढ़ाने का वचन दिया है, अर्थात पंद्रह वर्षों में कुल 100 अरब अमेरिकी डॉलर, जिसका लक्ष्य दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है। बाजार पहुंच के मामले में ईएफटीए ने अपनी 92.2 प्रतिशत शुल्क पंक्तियों पर रियायत दी, जो भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को समेटती हैं, जबकि भारत ने अपनी 82.7 प्रतिशत शुल्क पंक्तियों पर रियायत दी, जो ईएफटीए के 95.3 प्रतिशत निर्यात को समेटती हैं, और दुग्ध उत्पाद, सोयाबीन, कोयला तथा संवेदनशील कृषि उपज को संरक्षित रखा।
मूल नियम, नकारात्मक सूची और आरसीईपी
प्रत्येक समझौते को मूल नियम चाहिए, अर्थात यह परीक्षा कि कोई वस्तु वास्तव में साझेदार देश से आई है या नहीं। इनके बिना कोई तीसरा देश साझेदार के रास्ते माल भेजकर कम शुल्क का लाभ उठा सकता है, जिसे व्यापार विचलन या मार्ग परिवर्तन कहते हैं। यह परीक्षा सामान्यतः शुल्क शीर्षक में परिवर्तन तथा साझेदार देश में जुड़े मूल्य के न्यूनतम अंश पर आधारित होती है। प्रत्येक समझौते में एक नकारात्मक सूची या संवेदनशील सूची भी होती है, जिसमें शामिल वस्तुओं पर कोई रियायत नहीं दी जाती। इन्हीं बिंदुओं पर भारत की चिंताएं उसके सबसे चर्चित इनकार की व्याख्या करती हैं: नवंबर 2019 के बैंकॉक शिखर सम्मेलन में भारत ने घोषणा की कि वह क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी में शामिल नहीं होगा, क्योंकि उसे सस्ते चीनी सामान की बाढ़, शुल्क कटौती के आधार वर्ष तथा भारतीय सेवाओं के लिए वास्तविक अवसर के अभाव की आशंका थी।
परीक्षा की दृष्टि से
यहां पूछे जाने वाले लगभग सभी प्रश्न तीन प्रकारों में आते हैं। पहला, जोड़ी मिलाना: सीईपीए, सीईसीए, ईसीटीए, टीईपीए या सीईटीए किस देश या समूह के साथ है, और जाल है ऑस्ट्रेलिया के ईसीटीए को संयुक्त अरब अमीरात के सीईपीए से बदल देना, या ईएफटीए को यूरोपीय संघ समझ लेना। दूसरा, संक्षिप्त नामों का पूरा रूप तथा एकीकरण की सीढ़ी, जिसमें आम गलती मुक्त व्यापार क्षेत्र को साझा बाह्य शुल्क का श्रेय देकर सीमा शुल्क संघ से भ्रमित कर देना है। तीसरा, वर्ष: एपीटीए के लिए 1975, साफ्टा के प्रभावी होने के लिए 2006, आसियान वस्तु समझौते के लिए 2010, अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के समझौतों के लिए 2022, टीईपीए के हस्ताक्षर के लिए 2024 और उसके प्रभावी होने के लिए 2025। आरसीईपी पर एक कथन आधारित प्रश्न अपेक्षित है जो जांचता है कि आप जानते हैं भारत 2019 में बाहर रहा, तथा एक प्रश्न टीईपीए की 100 अरब डॉलर की निवेश प्रतिज्ञा पर।
महत्वपूर्ण तथ्य
| टीईपीए हस्ताक्षर | 10 मार्च 2024, नई दिल्ली |
|---|---|
| टीईपीए प्रभावी | 1 अक्टूबर 2025 |
| ईएफटीए सदस्य | आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड |
| ईएफटीए की स्थापना | 1960, मूल रूप से सात सदस्य देशों के साथ |
| टीईपीए निवेश प्रतिज्ञा | पंद्रह वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर, दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार |
| टीईपीए शुल्क कवरेज | ईएफटीए 92.2 प्रतिशत शुल्क पंक्तियां; भारत 82.7 प्रतिशत |
| अफ्रीकी देश के साथ पहला एफटीए | मॉरीशस के साथ सीईसीपीए, 2021 |
| साफ्टा प्रभावी | 1 जनवरी 2006 |
| भारत-अमीरात सीईपीए प्रभावी | 1 मई 2022 |
| भारत-ऑस्ट्रेलिया समझौता | ईसीटीए, दिसंबर 2022 से प्रभावी |
| भारत-ब्रिटेन समझौता | सीईटीए, 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित |
| आरसीईपी | भारत ने नवंबर 2019 के बैंकॉक शिखर सम्मेलन में शामिल न होने की घोषणा की |
| सबसे पुरानी व्यवस्था | एपीटीए, 1975 का बैंकॉक समझौता |
| नोडल मंत्रालय | वाणिज्य विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से किस देश के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) नहीं है?
- A.दक्षिण कोरिया
- B.जापान
- C.ब्राजील
- D.थाईलैंड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, ब्राजील है। ब्राजील के साथ भारत का कोई द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता नहीं है। ब्राजील से उसका एकमात्र अधिमान्य संबंध सीमित भारत-मर्कोसुर अधिमान्य व्यापार समझौते के माध्यम से है, जो उत्पादों की एक छोटी सूची पर घटा शुल्क देता है और मुक्त व्यापार समझौता नहीं है। विकल्प A गलत है क्योंकि भारत ने दक्षिण कोरिया के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता किया जो 2010 में प्रभावी हुआ और वस्तुओं, सेवाओं तथा निवेश को समेटता है। विकल्प B गलत है क्योंकि भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता 2011 में प्रभावी हुआ और दोनों देशों के बीच अधिकांश वस्तुओं पर शुल्क हटाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि थाईलैंड के साथ भारत का 2004 का प्रारंभिक फसल समझौता है और वह आसियान का सदस्य होने के कारण भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौते में भी शामिल है।
टीईपीए के नाम से जाना जाने वाला भारत का व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता किस समूह के साथ हस्ताक्षरित हुआ है?
- A.यूरोपीय संघ
- B.यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ
- C.खाड़ी सहयोग परिषद
- D.दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ है। टीईपीए पर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में ईएफटीए के चार देशों, आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के साथ हस्ताक्षर हुए और यह 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ। विकल्प A गलत है क्योंकि यूरोपीय संघ एक अलग समूह है जिसका ईएफटीए के ये चार देश सदस्य नहीं हैं; यूरोपीय संघ के साथ भारत की वार्ता पूर्णतः भिन्न है और यही इस प्रश्न का सबसे आम जाल है। विकल्प C गलत है क्योंकि खाड़ी सहयोग परिषद के साथ भारत का समूह स्तर पर कोई समझौता नहीं है; खाड़ी में उसका समझौता केवल संयुक्त अरब अमीरात के साथ द्विपक्षीय सीईपीए है। विकल्प D गलत है क्योंकि आसियान के साथ समझौता भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौता है, जो 2010 में प्रभावी हुआ।
निम्नलिखित में से कौन यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ का सदस्य नहीं है?
- A.नॉर्वे
- B.स्विट्जरलैंड
- C.डेनमार्क
- D.आइसलैंड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, डेनमार्क है। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के आज ठीक चार सदस्य हैं: आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड। डेनमार्क 1960 में ईएफटीए की स्थापना करने वाले सात देशों में था, परंतु वह यूरोपीय समुदायों में शामिल होने के लिए बाहर निकल गया और आज यूरोपीय संघ का सदस्य है, ईएफटीए का नहीं। विकल्प A गलत है क्योंकि नॉर्वे ईएफटीए का सदस्य है और उसने यूरोपीय संघ से बाहर रहना चुना है। विकल्प B गलत है क्योंकि स्विट्जरलैंड ईएफटीए का सदस्य है और इन चारों में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसी कारण सोने को टीईपीए की शुल्क कटौती से बाहर रखा गया। विकल्प D गलत है क्योंकि आइसलैंड ईएफटीए का सदस्य है; चौथा सदस्य लिकटेंस्टाइन इनमें सबसे छोटा है। ईएफटीए की स्थापना 1960 में स्टॉकहोम अभिसमय द्वारा सात देशों ने की थी, और समय के साथ अधिकांश संस्थापक सदस्य यूरोपीय समुदायों में चले गए, जिससे केवल यही चार शेष रह गए।
अफ्रीका के किस देश के साथ भारत का पहला व्यापार समझौता हस्ताक्षरित हुआ था?
- A.दक्षिण अफ्रीका
- B.मिस्र
- C.केन्या
- D.मॉरीशस
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, मॉरीशस है। भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं भागीदारी समझौता, अर्थात सीईसीपीए, 2021 में प्रभावी हुआ और यह किसी भी अफ्रीकी देश के साथ भारत द्वारा संपन्न पहला व्यापार समझौता है। इसमें वस्तुएं, सेवाएं और आर्थिक सहयोग शामिल हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत का कोई मुक्त व्यापार समझौता नहीं है; दोनों केवल दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ के साथ अपूर्ण वार्ता तथा ब्रिक्स जैसे समूहों से जुड़े हैं, जो व्यापार समझौते नहीं हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि मिस्र के साथ भारत का कोई मुक्त व्यापार समझौता नहीं है, भले व्यापारिक संबंध पुराने हों। विकल्प C गलत है क्योंकि केन्या के साथ भी भारत का कोई द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं है। परीक्षा की दृष्टि से यह प्रथमता महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रश्न अक्सर अफ्रीका के किसी बड़े देश का नाम विकल्प में रखकर अभ्यर्थी को भ्रमित करते हैं, जबकि उत्तर सदैव मॉरीशस ही रहता है।
भारत-संयुक्त अरब अमीरात व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता किस वर्ष प्रभावी हुआ?
- A.2019
- B.2020
- C.2022
- D.2024
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2022 है। भारत-संयुक्त अरब अमीरात व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर 18 फरवरी 2022 को हस्ताक्षर हुए और यह 1 मई 2022 से प्रभावी हो गया, अर्थात मात्र दस सप्ताह का अंतर, जो इसे भारत द्वारा सबसे तेजी से लागू किए गए समझौतों में रखता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 2019 वह वर्ष है जब भारत ने बैंकॉक में घोषणा की कि वह क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी में शामिल नहीं होगा, जो पूर्णतः भिन्न घटना है। विकल्प B गलत है क्योंकि 2020 में भारत का कोई प्रमुख व्यापार समझौता प्रभावी नहीं हुआ; तब तक अमीरात के साथ वार्ता औपचारिक रूप से शुरू भी नहीं हुई थी। विकल्प D गलत है क्योंकि 2024 में ईएफटीए देशों के साथ टीईपीए पर 10 मार्च को हस्ताक्षर हुए और वह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ।
भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी में शामिल न होने की घोषणा किस वर्ष और किस नगर के शिखर सम्मेलन में की?
- A.2017, मनीला
- B.2019, बैंकॉक
- C.2020, हनोई
- D.2021, जकार्ता
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 2019, बैंकॉक है। नवंबर 2019 में बैंकॉक में हुए क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी शिखर सम्मेलन में भारत ने घोषणा की कि वह इस समझौते में शामिल नहीं होगा। उसकी आपत्तियां थीं चीन से सस्ते आयात की संभावित बाढ़, शुल्क कटौती के लिए 2014 को आधार वर्ष मानना, आयात की बाढ़ से बचाव के व्यावहारिक तंत्र का अभाव तथा सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही को न खोलना। विकल्प A गलत है क्योंकि 2017 का मनीला सम्मेलन वार्ता का एक चरण था, बाहर निकलने का क्षण नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि शेष पंद्रह देशों ने 2020 में वियतनाम की अध्यक्षता में हुए डिजिटल शिखर सम्मेलन में आरसीईपी पर हस्ताक्षर किए, जब भारत पहले ही बाहर हो चुका था। विकल्प D गलत है क्योंकि 2021 में जकार्ता में भारत का ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ।
किस व्यापार व्यवस्था की विशेषता यह है कि उसके सभी सदस्य गैर-सदस्यों से आयात पर साझा बाह्य शुल्क लगाते हैं?
- A.अधिमान्य व्यापार समझौता
- B.मुक्त व्यापार क्षेत्र
- C.सीमा शुल्क संघ
- D.आर्थिक संघ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, सीमा शुल्क संघ है। सीमा शुल्क संघ अपने सदस्यों के बीच व्यापार पर शुल्क हटाता है और इसके अतिरिक्त प्रत्येक सदस्य से यह अपेक्षा करता है कि वह संघ के बाहर से आने वाले सामान पर एक ही दर लगाए, जो साझा बाह्य शुल्क है। विकल्प A गलत है क्योंकि अधिमान्य व्यापार समझौता केवल सूचीबद्ध उत्पादों पर शुल्क घटाता है और बाह्य शुल्क पूर्णतः प्रत्येक देश पर छोड़ देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि मुक्त व्यापार क्षेत्र आंतरिक शुल्क हटाता है पर प्रत्येक सदस्य अपना बाह्य शुल्क बनाए रखता है; इस अध्याय का यही सबसे आम भ्रम है। विकल्प D गलत है क्योंकि आर्थिक संघ एक उच्चतर अवस्था है जिसमें साझा बाह्य शुल्क पहले से सम्मिलित है पर श्रम तथा पूंजी की स्वतंत्र आवाजाही और साझा आर्थिक नीतियां भी जुड़ जाती हैं।
ईसीटीए किस देश के साथ भारत के आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते का नाम है?
- A.ऑस्ट्रेलिया
- B.कनाडा
- C.ब्रिटेन
- D.जापान
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, ऑस्ट्रेलिया है। भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता, संक्षेप में ईसीटीए, अप्रैल 2022 में हस्ताक्षरित हुआ और दिसंबर 2022 से प्रभावी हुआ, जो एक व्यापक समझौते की दिशा में अंतरिम कदम है। विकल्प B गलत है क्योंकि भारत और कनाडा ने प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौते पर वार्ता की है पर कोई समझौता हस्ताक्षरित नहीं हुआ, इसलिए कनाडा के साथ कोई संक्षिप्त नाम नहीं जुड़ा है। विकल्प C गलत है क्योंकि ब्रिटेन के साथ समझौता व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता, अर्थात सीईटीए है, जिस पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर हुए। विकल्प D गलत है क्योंकि जापान के साथ समझौता व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता, अर्थात सीईपीए है, जो 2011 से प्रभावी है। ईसीटीए के अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया ने अपनी लगभग सभी शुल्क पंक्तियों पर भारतीय वस्तुओं को शुल्क मुक्त पहुंच दी, जबकि भारत ने अपनी संवेदनशील कृषि वस्तुओं, दुग्ध उत्पादों तथा गेहूं और चीनी को इससे बाहर रखा।
भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते के अंतर्गत ईएफटीए देशों ने भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कितना और कितनी अवधि में बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है?
- A.10 वर्षों में 50 अरब अमेरिकी डॉलर
- B.15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर
- C.25 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर
- D.20 वर्षों में 200 अरब अमेरिकी डॉलर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर है। टीईपीए का अनुच्छेद 7.1 ईएफटीए देशों को पहले दस वर्षों में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 50 अरब अमेरिकी डॉलर और उसके बाद के पांच वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब डॉलर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध करता है, अर्थात पंद्रह वर्षों में कुल 100 अरब डॉलर, जिसका घोषित लक्ष्य भारत में दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न करना है। यह पहली बार है जब भारत द्वारा हस्ताक्षरित किसी मुक्त व्यापार समझौते में बाध्यकारी निवेश प्रतिबद्धता रखी गई है। विकल्प A गलत है क्योंकि 50 अरब इस प्रतिज्ञा की केवल पहली किस्त है, पूरी राशि नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि अवधि पंद्रह वर्ष है, पच्चीस नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 200 अरब का आंकड़ा समझौते में कहीं नहीं आता।
मुक्त व्यापार समझौते में मूल नियमों का मुख्य उद्देश्य है
- A.सभी सदस्यों के लिए साझा बाह्य शुल्क तय करना
- B.यह सुनिश्चित करना कि रियायतें केवल साझेदार देश में वास्तव में उत्पादित वस्तुओं को मिलें
- C.यह तय करना कि व्यापार का भुगतान किस मुद्रा में होगा
- D.सेवाओं के व्यापार के मूल्य पर उच्चतम सीमा तय करना
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, यह सुनिश्चित करना कि रियायतें केवल साझेदार देश में वास्तव में उत्पादित वस्तुओं को मिलें है। मूल नियम जांचते हैं कि कोई उत्पाद वास्तव में साझेदार देश का है या नहीं, सामान्यतः वहां उसके शुल्क वर्गीकरण में परिवर्तन तथा वहीं जुड़े मूल्य के न्यूनतम अंश की शर्त लगाकर। इनके बिना कोई गैर-सदस्य देश अपना माल साझेदार के रास्ते भेजकर वे रियायतें ले सकता है जिनकी उसने कभी वार्ता नहीं की, जिसे व्यापार विचलन कहते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि साझा बाह्य शुल्क सीमा शुल्क संघ की विशेषता है और मूल परीक्षा से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि भुगतान की मुद्रा भुगतान व्यवस्थाओं का विषय है, मूल नियमों का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि मूल नियम वस्तुओं से जुड़े हैं और कोई समझौता सेवाओं के मूल्य पर इस प्रकार सीमा नहीं लगाता।
दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र, साफ्टा, किस तिथि से प्रभावी हुआ?
- A.1 जनवरी 2004
- B.1 जनवरी 2006
- C.1 जनवरी 2010
- D.1 जनवरी 2016
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 1 जनवरी 2006 है। साफ्टा पर जनवरी 2004 में इस्लामाबाद में हुए बारहवें सार्क शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षर हुए और यह 1 जनवरी 2006 से प्रभावी हुआ, जिसने 1995 की कहीं अधिक कमजोर दक्षिण एशियाई अधिमान्य व्यापार व्यवस्था का स्थान लिया। विकल्प A गलत है क्योंकि 2004 इस्लामाबाद में हस्ताक्षर का वर्ष है, प्रभावी होने का नहीं, और हस्ताक्षर तथा क्रियान्वयन के बीच यही अंतर जाल है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1 जनवरी 2010 वह तिथि है जब भारत-आसियान वस्तु व्यापार समझौता तथा भारत-दक्षिण कोरिया व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता प्रभावी हुए। विकल्प D गलत है क्योंकि 2016 में ऐसा कुछ नहीं हुआ; उस वर्ष इस्लामाबाद में प्रस्तावित सार्क शिखर सम्मेलन वास्तव में रद्द हो गया था। यह ध्यान रखना चाहिए कि साफ्टा के अंतर्गत अल्प विकसित सदस्य देशों को शुल्क घटाने के लिए अधिक समय दिया गया, और संवेदनशील सूची के कारण क्षेत्र का वास्तविक व्यापार अपेक्षा से कम रहा।
निम्नलिखित में से कौन सी सबसे पुरानी अधिमान्य व्यापार व्यवस्था है जिसका भारत पक्षकार है?
- A.एशिया-प्रशांत व्यापार समझौता, पहले बैंकॉक समझौता
- B.दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र
- C.भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता
- D.भारत-सिंगापुर व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, एशिया-प्रशांत व्यापार समझौता, पहले बैंकॉक समझौता है। यह 1975 में संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत के लिए आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के तत्वावधान में संपन्न हुआ, 2005 में इसका नाम एशिया-प्रशांत व्यापार समझौता रखा गया, और इसके सदस्य भारत, बांग्लादेश, चीन, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, लाओस और मंगोलिया हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि साफ्टा पर हस्ताक्षर 2004 में हुए और वह 2006 में प्रभावी हुआ। विकल्प C गलत है क्योंकि भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता 1998 में हस्ताक्षरित हुआ और 2000 में क्रियान्वित हुआ, अर्थात बैंकॉक समझौते के दो दशक से अधिक बाद। विकल्प D गलत है क्योंकि सिंगापुर के साथ समझौता 2005 का है। एपीटीए की एक विशेषता यह भी है कि यह एकमात्र ऐसी व्यवस्था है जो भारत और चीन को जोड़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एफटीए और सीईपीए में क्या अंतर है?
मुक्त व्यापार समझौता मुख्यतः वस्तुओं से जुड़ा होता है: साझेदार एक-दूसरे के उत्पादों पर सीमा शुल्क घटाते या हटाते हैं। व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता इससे अधिक व्यापक है। वस्तुओं के अलावा यह सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवरों की आवाजाही, बौद्धिक संपदा और आर्थिक सहयोग को भी समेटता है। भारत जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ अपने समझौतों के लिए सीईपीए नाम का उपयोग करता है, तथा सिंगापुर और मलेशिया के लिए सीईसीए, जिसका अर्थ लगभग वही है।
क्या ईएफटीए यूरोपीय संघ का हिस्सा है?
नहीं। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ 1960 में स्थापित एक अलग समूह है और इसके वर्तमान चार सदस्य, आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड, यूरोपीय संघ के सदस्य नहीं हैं। इसलिए भारत का टीईपीए इन चार देशों के साथ समझौता है, यूरोपीय संघ के साथ नहीं, और यूरोपीय संघ के साथ भारत की वार्ता एक अलग विषय है।
भारत आरसीईपी में शामिल क्यों नहीं हुआ?
भारत ने नवंबर 2019 में बैंकॉक शिखर सम्मेलन में घोषणा की कि वह बाहर रहेगा। उसकी मुख्य आपत्तियां थीं चीन से सस्ते आयात की बाढ़ से पहले से बड़े व्यापार घाटे के और बढ़ने का खतरा, ऐसी बाढ़ से बचाव का कोई विश्वसनीय तंत्र न होना, शुल्क कटौती के लिए 2014 को आधार वर्ष मानना, तथा सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही को न खोलना, जहां भारत प्रतिस्पर्धी है।
मूल नियम क्या हैं और वे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मूल नियम तय करते हैं कि कोई उत्पाद वास्तव में साझेदार देश का है और इसलिए कम शुल्क का पात्र है या नहीं। सामान्यतः इनके लिए आवश्यक होता है कि उत्पाद के शुल्क वर्गीकरण में साझेदार देश में परिवर्तन हुआ हो और उसके मूल्य का एक न्यूनतम अंश वहीं जुड़ा हो। ऐसे नियमों के बिना कोई तीसरा देश अपना माल साझेदार के रास्ते भेजकर वे रियायतें पा सकता है जिनकी उसने कभी वार्ता नहीं की, जिसे व्यापार विचलन कहा जाता है।
अफ्रीका के किस देश के साथ भारत का पहला व्यापार समझौता हुआ?
मॉरीशस के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग एवं भागीदारी समझौता, जो 2021 में प्रभावी हुआ। यह अफ्रीका के किसी भी देश के साथ भारत द्वारा हस्ताक्षरित पहला व्यापार समझौता है, और इसमें वस्तुएं, सेवाएं तथा आर्थिक सहयोग शामिल हैं।
टीईपीए भारत के पहले के समझौतों से किस तरह भिन्न है?
टीईपीए भारत द्वारा हस्ताक्षरित पहला मुक्त व्यापार समझौता है जिसमें निवेश और रोजगार सृजन पर बाध्यकारी प्रतिबद्धता है। अनुच्छेद 7.1 के अंतर्गत ईएफटीए देशों ने पंद्रह वर्षों में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 100 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़ाने का वचन दिया, पहले दस वर्षों में 50 अरब और अगले पांच वर्षों में 50 अरब, जिसका घोषित लक्ष्य भारत में दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न करना है।
स्रोत
- भारत-ईएफटीए व्यापार समझौता: 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख रोजगार — पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार
- व्यापार समझौते — वाणिज्य विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (कक्षा 11), अध्याय 3: उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण — एनसीईआरटी





