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GK क्विजभारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 11

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय अर्थव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 11) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 10 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: भारत में मुद्रा और बैंकिंग, विदेशी मुद्रा और विनिमय दर, भारतीय रिज़र्व बैंक और मौद्रिक नीति और अन्य। इनमें से 14 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया को 1955 में किस बैंक में परिवर्तित किया गया?

  1. A.भारतीय रिज़र्व बैंक
  2. B.पंजाब नेशनल बैंक
  3. C.भारतीय स्टेट बैंक
  4. D.बैंक ऑफ बड़ौदा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. भारतीय स्टेट बैंक

व्याख्या

सही उत्तर C, भारतीय स्टेट बैंक है। इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया स्वयं 1921 में तीन प्रेसीडेंसी बैंकों, 1806 के बैंक ऑफ बंगाल, 1840 के बैंक ऑफ बंबई और 1843 के बैंक ऑफ मद्रास, को मिलाकर बना था। अखिल भारतीय ग्रामीण साख सर्वेक्षण समिति की संस्तुति पर सरकार ने 1 जुलाई 1955 को उसे भारतीय स्टेट बैंक में बदल दिया, ताकि सरकारी स्वामित्व वाला बैंक बैंकिंग को गाँवों तक ले जा सके।

विकल्प A, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय बैंक है और 1935 में अलग से बना; उससे पहले इंपीरियल बैंक कुछ केंद्रीय बैंकिंग कार्य करता था, इसीलिए यह भ्रामक विकल्प बनता है। विकल्प B, पंजाब नेशनल बैंक, 1894 में पूर्णतः भारतीय पूँजी और प्रबंधन से आरंभ होने वाले पहले बैंक के रूप में स्थापित हुआ और उसका इतिहास स्वतंत्र है। विकल्प D, बैंक ऑफ बड़ौदा, 1908 में बड़ौदा के महाराजा के संरक्षण में स्थापित हुआ और 1969 में राष्ट्रीयकृत हुआ। शृंखला याद रखें: प्रेसीडेंसी बैंक, इंपीरियल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 18 Oct 2021, Shift 3मध्यम

विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA) की जगह विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) किस वर्ष बनाया गया?

  1. A.1988
  2. B.1999
  3. C.2014
  4. D.1992
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1999

व्याख्या

सही उत्तर है B, 1999। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 में पारित हुआ और 1 जून 2000 से लागू हुआ, जिसने 1973 के विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम की जगह ली। नाम के एक शब्द का बदलाव ही पूरी कहानी कह देता है। फेरा विदेशी मुद्रा के लेन-देन पर नियंत्रण और रोक लगाता था और उल्लंघन को आपराधिक मामला मानता था, जबकि फेमा खुली अर्थव्यवस्था में उनका प्रबंधन करता है और उल्लंघन को दीवानी मामला मानकर आर्थिक दंड लगाता है। फेमा ने चालू खाते के अधिकांश लेन-देन मुक्त कर दिए, पूँजी खाते के लेन-देन रिज़र्व बैंक के नियंत्रण में रखे, और इसका प्रवर्तन प्रवर्तन निदेशालय करता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1988 का इस कानून से कोई संबंध नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 2014 का संबंध विदेशी निवेश नीति के बाद के बदलावों से है, फेमा के बनने से नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1992 सेबी अधिनियम और व्यापार नीति के पहले बड़े उदारीकरण का वर्ष है। परीक्षा टिप: फेरा 1973 आपराधिक दृष्टि वाला था, फेमा 1999 दीवानी है और जून 2000 से लागू हुआ।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

निम्नलिखित में से कौन साख नियंत्रण का गुणात्मक उपकरण है?

  1. A.खुले बाजार की क्रियाएँ
  2. B.मार्जिन आवश्यकता
  3. C.नकद आरक्षित अनुपात
  4. D.रेपो दर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मार्जिन आवश्यकता

व्याख्या

सही उत्तर B, मार्जिन आवश्यकता है। मार्जिन आवश्यकता प्रतिभूति के मूल्य का वह भाग है जो उधार लेने वाले को अपने साधनों से देना पड़ता है; किसी विशेष वस्तु पर ऋण की मार्जिन बढ़ाकर बैंक उस वस्तु के सट्टे में जाती साख को रोक सकता है और कुल साख को छुए बिना उसकी दिशा बदल सकता है। इसीलिए इसे गुणात्मक या चयनात्मक उपकरण कहा जाता है।

विकल्प A खुले बाजार की क्रियाएँ सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद बिक्री से मुद्रा की मात्रा बदलती हैं। विकल्प C नकद आरक्षित अनुपात बैंक के पास उधार देने योग्य राशि की मात्रा बदलता है। विकल्प D रेपो दर पूरी अर्थव्यवस्था के लिए साख की कीमत बदलती है। ये तीनों साख की मात्रा पर काम करते हैं इसलिए मात्रात्मक हैं, जबकि नैतिक प्रत्यायन, साख की राशनिंग, उपभोक्ता साख का विनियमन और सीधी कार्रवाई मार्जिन आवश्यकता के साथ गुणात्मक पक्ष में आते हैं।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 1 Sept 2022, Shift 3आसान

उपभोक्ता सिद्धांत यह बताता है कि लोग अपना ______ खर्च करने का निर्णय कैसे लेते हैं।

  1. A.समय
  2. B.संबंध
  3. C.ऊर्जा
  4. D.धन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. धन

व्याख्या

सही उत्तर है D, धन। उपभोक्ता सिद्धांत इस बात का अध्ययन करता है कि कोई परिवार उपलब्ध वस्तुओं और सेवाओं पर अपना धन किस प्रकार खर्च करने का निर्णय लेता है।

यह सिद्धांत तीन बातों पर आधारित है, उपभोक्ता की आवश्यकताएँ, वस्तुओं की कीमतें और हाथ में उपलब्ध आय, जिसे बजट सीमा कहा जाता है। आय सीमित होने के कारण उपभोक्ता वही संयोजन चुनता है जिससे खर्च किए धन पर सर्वाधिक संतुष्टि या उपयोगिता प्राप्त हो, और जब खर्च के किसी भी फेरबदल से संतुष्टि नहीं बढ़ सके तो उसे उपभोक्ता संतुलन कहा जाता है। घटती सीमांत उपयोगिता का नियम, तटस्थता वक्र और माँग का नियम सूक्ष्म अर्थशास्त्र की इसी शाखा में आते हैं।

विकल्प A गलत है क्योंकि समय के उपयोग का अध्ययन श्रम और अवकाश के चयन के रूप में अलग किया जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि संबंध सामाजिक विषय हैं, आर्थिक चयन नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि यहाँ ऊर्जा का कोई आर्थिक अर्थ नहीं बनता।

परीक्षा टिप: उपभोक्ता सिद्धांत आवश्यकता, कीमत और आय को जोड़कर माँग वक्र की व्याख्या करता है।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

भारत में 1957 से लागू न्यूनतम आरक्षित प्रणाली के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को कितना न्यूनतम कोष रखना होता है?

  1. A.दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में
  2. B.एक सौ करोड़ रुपये, पूर्णतः सोने में
  3. C.पाँच सौ करोड़ रुपये, पूर्णतः विदेशी प्रतिभूतियों में
  4. D.एक हजार करोड़ रुपये सरकारी बॉण्ड में
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में

व्याख्या

सही उत्तर A, दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में है। पहले चल रही आनुपातिक आरक्षित प्रणाली के स्थान पर 1957 में अपनाई गई न्यूनतम आरक्षित प्रणाली के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को अपने द्वारा निर्गत नोटों के विरुद्ध कम से कम दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखनी होती हैं, जिनमें एक सौ पंद्रह करोड़ सोने में और शेष पचासी करोड़ विदेशी प्रतिभूतियों में होता है। इस न्यूनतम से आगे बैंक अर्थव्यवस्था की आवश्यकता के अनुसार नोट निर्गत कर सकता है।

विकल्प B राशि और संरचना दोनों कम बताता है तथा विदेशी प्रतिभूतियों वाले भाग को छोड़ देता है। विकल्प C और D ऐसे आँकड़े और परिसंपत्तियाँ गढ़ते हैं जिनका इस प्रणाली में कोई स्थान नहीं है; भारत सरकार के बॉण्ड में यह न्यूनतम कोष परिभाषित नहीं होता। 1957 के इस परिवर्तन का उद्देश्य नोट निर्गमन को सोने के निश्चित अनुपात से मुक्त करना था, ताकि मुद्रा उत्पादन और व्यापार के साथ बढ़ सके, और यही तर्क कभी-कभी कथन प्रश्न के रूप में भी पूछा जाता है।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 7 Oct 2021, Shift 1कठिन

विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, जिसके अनुसार विदेशी निवेशक भारतीय उद्यमों में 40% से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकते थे, का पालन न कर पाने के कारण IBM और कोका कोला ने किस वर्ष भारत में अपना कारोबार बंद किया?

  1. A.1964
  2. B.1981
  3. C.1956
  4. D.1977
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 1977

व्याख्या

सही उत्तर है D, 1977। IBM और कोका कोला ने अपनी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक घटाने के बजाय 1977 में भारत से कारोबार समेट लिया। 1973 में पारित विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम यानी फेरा के अनुसार विदेशी कंपनियों को भारतीय अनुषंगियों में अपनी इक्विटी इसी स्तर तक लानी थी और विदेशी मुद्रा के अधिकांश लेन-देन के लिए अनुमति लेनी थी। यह बंद और लाइसेंस आधारित अर्थव्यवस्था का चरम दौर था, और दो प्रसिद्ध अमेरिकी कंपनियों का जाना उसका प्रतीक बन गया। कोका कोला 1991 के सुधारों के बाद ही लौटी, और फेरा की जगह 1999 में नरम विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम आया। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1964 फेरा बनने से बहुत पहले का वर्ष है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 1981 तक दोनों कंपनियाँ जा चुकी थीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1956 औद्योगिक नीति प्रस्ताव का वर्ष है, जिसका इस प्रकरण से संबंध नहीं है। परीक्षा टिप: फेरा 1973, IBM और कोका कोला की विदाई 1977, उदारीकरण 1991 और फेमा 1999 को एक श्रृंखला में याद रखें।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में एक रुपये का नोट भारत सरकार जारी करती है और उस पर किसके हस्ताक्षर होते हैं?

  1. A.भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर
  2. B.वित्त सचिव
  3. C.केंद्रीय वित्त मंत्री
  4. D.भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वित्त सचिव

व्याख्या

सही उत्तर B, वित्त सचिव है। एक रुपये का नोट रिज़र्व बैंक का नोट है ही नहीं: इसे भारत सरकार वित्त मंत्रालय के माध्यम से जारी करती है, यह सरकार का वैध मुद्रा नोट है और इस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। इसी प्रकार सभी सिक्के भी सरकार ढालती और जारी करती है।

विकल्प A एक रुपये के नोट के लिए गलत है, यद्यपि गवर्नर दो रुपये और उससे बड़े हर नोट पर हस्ताक्षर करते हैं, जिन्हें बैंक अपने अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत जारी करता है; यही अंतर इस प्रश्न का मूल है। विकल्प C इसलिए गलत है कि वित्त मंत्री किसी भी मुद्रा नोट पर हस्ताक्षर नहीं करते। विकल्प D इसलिए गलत है कि डिप्टी गवर्नर भी किसी मुद्रा नोट पर हस्ताक्षर नहीं करते, भले ही वे बैंक के अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हों और मौद्रिक नीति समिति में बैठते हों।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 27 Oct 2021मध्यम

औद्योगिक उत्पादन निर्देशांक, जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था में औद्योगिक क्रियाओं का मापक है, इसमें क्या सम्मिलित नहीं किया जाता है?

  1. A.खनन
  2. B.विद्युत
  3. C.विनिर्माण
  4. D.गैस एवं जलापूर्ति
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. गैस एवं जलापूर्ति

व्याख्या

सही उत्तर है D, गैस एवं जलापूर्ति। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में केवल तीन क्षेत्र शामिल हैं: खनन, विनिर्माण और विद्युत। यह एक मासिक सूचकांक है, जिसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय जारी करता है, और यह बताता है कि आधार वर्ष की तुलना में औद्योगिक उत्पादन की मात्रा कितनी तेज़ी से बढ़ या घट रही है। इस सूचकांक में विनिर्माण का भार सबसे अधिक है, इसलिए कारखानों में सुस्ती आते ही IIP तेज़ी से नीचे आ जाता है। राष्ट्रीय आय के व्यापक उद्योग क्षेत्र में बिजली के साथ गैस और जलापूर्ति भी गिनी जाती हैं, पर वे IIP की टोकरी में नहीं हैं, और यही इस प्रश्न का जाल है। विकल्प A गलत है, क्योंकि खनन IIP के तीन क्षेत्रों में से एक है। विकल्प B गलत है, क्योंकि विद्युत भी IIP का क्षेत्र है। विकल्प C गलत है, क्योंकि विनिर्माण तो सूचकांक का सबसे बड़ा हिस्सा है। परीक्षा टिप: IIP = खनन + विनिर्माण + विद्युत; आठ कोर उद्योगों का सूचकांक एक अलग, छोटा सूचकांक है।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 8 August 2019, Shift 1मध्यम

भारतीय करेंसी नोट के भाषा पैनल पर कितनी भाषाएँ होती हैं?

  1. A.15
  2. B.17
  3. C.10
  4. D.12
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 15

व्याख्या

सही उत्तर है A, 15। भारतीय नोट के पीछे बने भाषा पैनल पर नोट का मूल्य 15 भाषाओं में लिखा होता है। हिंदी और अंग्रेज़ी इस पैनल का हिस्सा नहीं हैं, वे नोट के सामने वाले भाग पर छपी होती हैं, इसलिए पूरे नोट पर कुल 17 भाषाएँ दिखती हैं। पैनल की 15 भाषाएँ हैं असमिया, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू। नोट भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत रिज़र्व बैंक जारी करता है, केवल एक रुपये का नोट भारत सरकार जारी करती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 17 पूरे नोट पर छपी सभी भाषाओं की संख्या है, जिसमें सामने की हिंदी और अंग्रेज़ी भी गिनी जाती हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि 10 पैनल की वास्तविक संख्या से बहुत कम है। विकल्प D गलत है, क्योंकि 12 भी असली संख्या से कम है। परीक्षा टिप: पीछे के पैनल पर 15 और पूरे नोट पर 17 भाषाएँ याद रखें।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC PCS Pre GS-I, 15 Dec 2019मध्यम

जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचकांक (पी.क्यू.एल.आई.) किसके द्वारा विकसित किया गया है?

  1. A.मोरिस डी. मोरिस
  2. B.यू.एन.डी.पी.
  3. C.महबूब-उल-हक
  4. D.उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मोरिस डी. मोरिस

व्याख्या

सही उत्तर है A, मोरिस डी. मोरिस। अमेरिकी आर्थिक इतिहासकार मोरिस डेविड मोरिस ने 1970 के दशक में ओवरसीज़ डेवलपमेंट काउंसिल के लिए भौतिक जीवन गुणवत्ता सूचकांक (PQLI) बनाया और 1979 में दुनिया के गरीबों की स्थिति मापने पर अपनी पुस्तक में इसे प्रस्तुत किया। वे कल्याण का ऐसा सरल पैमाना चाहते थे जो केवल आय पर निर्भर न हो। PQLI तीन संकेतकों पर आधारित है, जिनमें से हर एक को 0 से 100 तक अंक और बराबर भार दिया जाता है: बुनियादी साक्षरता, शिशु मृत्यु दर और एक वर्ष की आयु पर जीवन प्रत्याशा। इनका औसत देश को 100 में से अंक देता है। केरल को अक्सर ऐसे उदाहरण के रूप में दिया जाता था जहाँ कम आय के बावजूद PQLI ऊँचा था। विकल्प B गलत है, क्योंकि यू.एन.डी.पी. मानव विकास सूचकांक (HDI) प्रकाशित करता है, जो बाद में 1990 में आया। विकल्प C गलत है, क्योंकि महबूब-उल-हक ने HDI बनाया था, PQLI नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस सूचकांक के निर्माता ज्ञात हैं, मोरिस डी. मोरिस। परीक्षा टिप: PQLI – मोरिस डी. मोरिस, 1979, तीन संकेतक; HDI – महबूब-उल-हक और UNDP, 1990।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

1957 से चली आ रही न्यूनतम कोष प्रणाली के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को कितना कोष रखना होता है?

  1. A.दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये का हो
  2. B.एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये, जिसमें स्वर्ण कम से कम पचासी करोड़ रुपये का हो
  3. C.दो सौ करोड़ रुपये, पूरा का पूरा स्वर्ण में
  4. D.पाँच सौ करोड़ रुपये, जिसमें स्वर्ण कम से कम दो सौ करोड़ रुपये का हो
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दो सौ करोड़ रुपये, जिसमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये का हो

व्याख्या

सही उत्तर A है। 1957 में अपनाई गई न्यूनतम कोष प्रणाली के अंतर्गत बैंक जारी नोटों के विरुद्ध कम से कम दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखता है, जिनमें स्वर्ण का मूल्य कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये होना चाहिए और शेष विदेशी प्रतिभूतियों में रखा जाता है। इसने आनुपातिक कोष प्रणाली का स्थान लिया, जिसमें प्रचलित नोटों के एक निश्चित अनुपात के बराबर स्वर्ण और स्टर्लिंग रखना पड़ता था, और इससे नोट निर्गमन उस सीमा से मुक्त हो गया।

विकल्प B में आँकड़े उलट दिए गए हैं और स्वर्ण के भाग को ही कुल मान लिया गया है। विकल्प C इसलिए गलत है कि पूरा कोष स्वर्ण में नहीं, केवल उसका छोटा भाग स्वर्ण में होता है। विकल्प D के आँकड़े इस प्रणाली के किसी चरण के नहीं हैं और उन्हें उस छात्र के लिए रखा गया है जिसे केवल इतना याद है कि संख्या बड़ी है।

Q12.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019आसान

मांग की कीमत लोच शून्य होने (जीरो प्राइस इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड) का तात्पर्य है

  1. A.कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता
  2. B.कीमत में एक छोटे परिवर्तन पर, मांग में एक छोटा परिवर्तन होता है
  3. C.कीमत में एक छोटे परिवर्तन पर, मांग में एक विशाल परिवर्तन होता है
  4. D.कीमत में एक बड़े परिवर्तन पर, मांग में एक छोटा परिवर्तन होता है
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता

व्याख्या

सही उत्तर है A, कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता। लोच बताती है कि कीमत बदलने पर मांग की मात्रा कितनी बदलती है, और शून्य लोच का अर्थ है कोई प्रतिक्रिया नहीं। मांग की कीमत लोच, मांग की मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन को कीमत में प्रतिशत परिवर्तन से भाग देकर निकलती है। जब यह शून्य हो, तो मांग पूर्णतः बेलोचदार होती है और मांग वक्र एक खड़ी सीधी रेखा होता है। इंसुलिन जैसी जीवनरक्षक दवाएँ इसके सबसे करीब हैं, क्योंकि मरीज़ कीमत कुछ भी हो, उतनी ही खुराक खरीदता है। दूसरे छोर पर पूर्णतः लोचदार मांग, जिसकी लोच अनंत होती है, क्षैतिज मांग वक्र देती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मांग में कितना भी छोटा परिवर्तन हो, लोच शून्य से अधिक हो जाती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि छोटे कीमत परिवर्तन पर बड़ी प्रतिक्रिया लोचदार मांग है, जिसकी लोच एक से अधिक होती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि बड़े कीमत परिवर्तन पर छोटी प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत बेलोचदार मांग है, जिसकी लोच शून्य और एक के बीच होती है। परीक्षा टिप: शून्य लोच का वक्र खड़ा, अनंत लोच का वक्र क्षैतिज।

Q13.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 02 Aug, 2023, Shift 1कठिन

जब सामान्य ब्याज दर बहुत नीचे पहुंच जाती है, तो निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही होगा?

  1. A.अधिकांश लोग भविष्य में ब्याज दर बढ़ने की अपेक्षा करेंगे।
  2. B.अधिकांश लोग बॉन्ड रखना पसंद करेंगे।
  3. C.अधिकांश लोग ब्याज दर में और गिरावट का अनुमान लगाएंगे।
  4. D.मुद्रा आपूर्ति में कोई भी वृद्धि ब्याज दर को और नीचे ले जाएगी।
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अधिकांश लोग भविष्य में ब्याज दर बढ़ने की अपेक्षा करेंगे।

व्याख्या

सही उत्तर है A, अधिकांश लोग भविष्य में ब्याज दर बढ़ने की अपेक्षा करेंगे। जब ब्याज दर पहले ही बहुत नीची हो, तो लोग मानते हैं कि अब यह और नहीं गिर सकती और आगे बढ़ेगी ही, इसलिए वे बॉन्ड के बजाय नकदी अपने पास रखते हैं। कीन्स ने इसे मुद्रा की सट्टा मांग कहा, और वह चरम स्थिति जिसमें अत्यंत नीची दर पर सभी नकदी पसंद करते हैं, तरलता जाल कहलाती है। इसका कारण बॉन्ड की कीमत और ब्याज दर का संबंध है - ब्याज दर बढ़ने पर पुराने बॉन्ड की कीमत गिरती है, इसलिए बॉन्ड रखने वाले को पूंजीगत हानि होती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसी हानि के भय से लोग उस समय बॉन्ड से बचते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि दर के निम्नतम स्तर के निकट पहुंचने पर लोग और गिरावट की अपेक्षा छोड़ देते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि तरलता जाल में बढ़ी हुई मुद्रा नकदी के रूप में ही रखी जाती है और ब्याज दर अपरिवर्तित रहती है। परीक्षा टिप: बहुत नीची ब्याज दर - मुद्रा की ऊंची सट्टा मांग - तरलता जाल।

Q14.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 1 Oct 2023आसान

मुद्रास्फीति के सन्दर्भ में निम्न कथनों पर ध्यान दीजिये:

कथन (A): हैडलाइन मुद्रास्फीति उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में परिवर्तन की दर को संदर्भित करती है, जो एक विशिष्ट परिवार द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की एक मानक टोकरी की औसत कीमत का माप है।

कथन (B): कोर मुद्रास्फीति उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से अस्थिर मूल्य वाली कुछ वस्तुओं जैसे खाद्य और ईंधन को बाहर करने के बाद औसत उपभोक्ता कीमतों में बदलाव को मापती है।

इन कथनों में से

  1. A.न तो (A) और न ही (B) सही है।
  2. B.(A) और (B) दोनों सही हैं।
  3. C.केवल (B) सही है।
  4. D.केवल (A) सही है।
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. (A) और (B) दोनों सही हैं।

व्याख्या

सही उत्तर है B, (A) और (B) दोनों सही हैं। हैडलाइन मुद्रास्फीति पूरे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बदलाव है, जो एक सामान्य परिवार द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की तय टोकरी, जैसे भोजन, ईंधन, कपड़े, आवास और सेवाओं, की औसत कीमत पर नज़र रखता है। कोर मुद्रास्फीति उन वस्तुओं को हटा देती है जिनकी कीमतें सबसे अधिक ऊपर-नीचे होती हैं, मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन, ताकि कीमतों का असली रुझान दिखे। नीति के लिए यह अंतर अहम है: खराब मानसून के बाद सब्ज़ियों के दाम का उछाल कुछ महीनों में उतर सकता है, पर कोर मुद्रास्फीति का लगातार बढ़ना केंद्रीय बैंक को बताता है कि महँगाई का दबाव पूरी अर्थव्यवस्था में फैल गया है। इसीलिए रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति दोनों आँकड़ों पर नज़र रखती है। भारत में अखिल भारतीय CPI हर महीने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय तैयार करता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि दोनों कथन सही परिभाषाएँ हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि कथन A भी सही है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कथन B भी सही है। परीक्षा टिप: हैडलाइन = पूरी टोकरी; कोर = टोकरी में से खाद्य और ईंधन हटाकर।

Q15.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

मुद्रास्फीति रोकने के लिए रिज़र्व बैंक जब रेपो दर बढ़ाता है, तो तात्कालिक प्रभाव क्या होता है?

  1. A.साख महँगी हो जाती है और मुद्रा आपूर्ति की वृद्धि धीमी पड़ती है
  2. B.साख सस्ती हो जाती है और उधार बढ़ जाता है
  3. C.केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा अपने आप घट जाता है
  4. D.वैधानिक तरलता अनुपात उसी अनुपात में बढ़ जाता है
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. साख महँगी हो जाती है और मुद्रा आपूर्ति की वृद्धि धीमी पड़ती है

व्याख्या

सही उत्तर A है। रेपो दर बढ़ने से बैंकों के लिए रिज़र्व बैंक से उधार लेने की लागत बढ़ती है, इसलिए वे अपनी उधार दरें भी बढ़ा देते हैं। ऋण महँगे हो जाते हैं, परिवार और फर्में कम उधार लेकर कम व्यय करते हैं, साख तथा मुद्रा आपूर्ति की वृद्धि धीमी होती है और कीमतों पर माँग का दबाव घटता है। इसे महँगी मुद्रा या संकुचनकारी नीति कहा जाता है।

विकल्प B रेपो दर में कटौती का प्रभाव बताता है, अर्थात सस्ती मुद्रा की नीति, जो मुद्रास्फीति कम होने पर वृद्धि को सहारा देने के लिए अपनाई जाती है। विकल्प C इसलिए गलत है कि राजकोषीय घाटा सरकार के अपने कर और व्यय से तय होता है; उल्टे महँगी साख से सरकार का ब्याज भार बढ़ जाता है। विकल्प D इसलिए गलत है कि वैधानिक तरलता अनुपात बैंककारी विनियमन अधिनियम के अंतर्गत अलग उपकरण है और नीतिगत दर के साथ अपने आप नहीं बदलता।

Q16.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 3 Oct 2023, Shift 1मध्यम

भारत के वित्त आयोग के पहले अध्यक्ष कौन थे?

  1. A.अशोक कुमार चंदा
  2. B.के. सी. नियोगी
  3. C.के. संथानम
  4. D.पी. वी. राजमन्नार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. के. सी. नियोगी

व्याख्या

सही उत्तर है B, के. सी. नियोगी। क्षितिश चंद्र नियोगी पहले वित्त आयोग के अध्यक्ष थे, जिसे राष्ट्रपति ने नवंबर 1951 में गठित किया और जिसने 1952 में 1952 से 1957 की अवधि के लिए रिपोर्ट दी। वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के तहत एक संवैधानिक निकाय है। यह हर पाँच वर्ष में, या ज़रूरत हो तो पहले, एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्यों के साथ बनता है, और सुझाव देता है कि केंद्र द्वारा वसूले गए करों का राज्यों के साथ बँटवारा कैसे हो और सहायता अनुदान कैसे दिए जाएँ। इसके सदस्यों की योग्यताएँ वित्त आयोग (विविध उपबंध) अधिनियम, 1951 में तय हैं। नियोगी पहले संविधान सभा के सदस्य और नेहरू के पहले मंत्रिमंडल में मंत्री रहे थे। A गलत है क्योंकि अशोक कुमार चंदा तीसरे वित्त आयोग के अध्यक्ष थे। C गलत है क्योंकि के. संथानम दूसरे वित्त आयोग के अध्यक्ष थे। D गलत है क्योंकि पी. वी. राजमन्नार चौथे वित्त आयोग के अध्यक्ष थे। परीक्षा टिप: पहले चार अध्यक्ष क्रम से नियोगी, संथानम, चंदा, राजमन्नार; वित्त आयोग का अनुच्छेद 280 है।

Q17.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 03 Aug, 2023, Shift 1मध्यम

मौद्रिक नीति समिति ने ब्याज दरों पर 'हॉकिश' रुख बनाए रखा। इस संदर्भ में 'हॉकिश' रुख का अर्थ है __________।

  1. A.ब्याज दरें घटाई गईं
  2. B.ब्याज दरें बढ़ाई गईं
  3. C.ब्याज दरें अपरिवर्तित रखी गईं
  4. D.मुद्रा आपूर्ति बढ़ाई गई
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ब्याज दरें बढ़ाई गईं

व्याख्या

सही उत्तर है B, ब्याज दरें बढ़ाई गईं। हॉकिश रुख का अर्थ है कि केंद्रीय बैंक को धीमी वृद्धि से अधिक चिंता महँगाई की है, इसलिए वह नीतिगत दर बढ़ाने और मुद्रा कसने की ओर झुकता है। कर्ज महँगा होने पर उधारी और खर्च घटते हैं और कीमतें धीरे बढ़ती हैं। भारत में मौद्रिक नीति समिति 2016 में संशोधित आरबीआई अधिनियम के तहत बनी। इसमें छह सदस्य होते हैं - तीन रिज़र्व बैंक के और तीन केंद्र सरकार के नामित - और रेपो दर बहुमत से तय होती है, जिसमें गवर्नर के पास निर्णायक मत रहता है। समिति को खुदरा महँगाई 4 प्रतिशत पर रखनी होती है, जिसका दायरा 2 से 6 प्रतिशत है। विकल्प A गलत है, क्योंकि वृद्धि के लिए दरें घटाना इसका उल्टा, यानी डविश रुख है। विकल्प C गलत है, क्योंकि दरें ज्यों की त्यों रखना तटस्थ रुख कहलाता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि मुद्रा आपूर्ति बढ़ाना विस्तारकारी और फिर डविश रुख है। परीक्षा टिप: हॉक महँगाई से लड़ता है और दरें बढ़ाता है, डव वृद्धि बचाता है और दरें घटाता है।

Q18.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 28 May 2023मध्यम

निम्नलिखित बाजारों पर विचार कीजिए:

1. सरकारी बॉन्ड बाजार

2. कॉल मनी बाजार

3. ट्रेजरी बिल बाजार

4. शेयर बाजार

उपर्युक्त में से कितने पूँजी बाजार में शामिल हैं?

  1. A.केवल एक
  2. B.केवल दो
  3. C.केवल तीन
  4. D.सभी चार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. केवल दो

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल दो। सरकारी बॉन्ड बाजार और शेयर बाजार दीर्घकालिक धन का लेन-देन करते हैं, इसलिए ये पूँजी बाजार हैं; कॉल मनी और ट्रेजरी बिल मुद्रा बाजार के हिस्से हैं। विभाजन रेखा परिपक्वता अवधि है: पूँजी बाजार एक साल से अधिक के धन का, और मुद्रा बाजार एक साल तक के धन का लेन-देन करता है। सरकारी बॉन्ड, यानी दिनांकित प्रतिभूतियाँ, 5 से 40 साल तक चलते हैं, और शेयरों की कोई परिपक्वता नहीं होती। कॉल मनी बैंकों के बीच एक दिन का कर्ज है, नोटिस मनी 2 से 14 दिन की होती है, और ट्रेजरी बिल 91, 182 या 364 दिन की अल्पकालिक सरकारी उधारी हैं। पूँजी बाजार का नियामक SEBI है, जबकि मुद्रा बाजार मुख्य रूप से RBI के नियमन में है। विकल्प A गलत है, क्योंकि बॉन्ड और शेयर दोनों पूँजी बाजार के खंड हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह एक अल्पकालिक बाजार भी जोड़ देगा। विकल्प D गलत है, क्योंकि कॉल मनी और ट्रेजरी बिल मुद्रा बाजार के खंड हैं। परीक्षा टिप: एक साल से अधिक तो पूँजी बाजार, एक साल तक तो मुद्रा बाजार; ट्रेजरी बिल 91, 182 और 364 दिन।

Q19.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 11 May, 2023, Shift 2मध्यम

रिवर्स रेपो दर का अर्थ क्या है?

  1. A.वह दर जिस पर RBI विदेशी बैंकों से धन उधार लेता है
  2. B.वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से धन उधार लेता है
  3. C.वह दर जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI से धन उधार लेते हैं
  4. D.वह दर जिस पर वाणिज्यिक बैंक विदेशी बैंकों से धन उधार लेते हैं
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से धन उधार लेता है

व्याख्या

सही उत्तर है B, वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से धन उधार लेता है। रिवर्स रेपो दर वह ब्याज है जो रिज़र्व बैंक बैंकों को देता है जब वह उनकी अतिरिक्त नक़दी थोड़े समय के लिए अपने पास रखता है। यह रेपो दर का उलटा है, जिस पर बैंक सरकारी प्रतिभूतियाँ गिरवी रखकर रिज़र्व बैंक से उधार लेते हैं। जब रिज़र्व बैंक बाज़ार से अतिरिक्त धन खींचना चाहता है, तो वह केंद्रीय बैंक के पास पैसा रखना अधिक लाभदायक बना देता है; जब वह कर्ज़ का प्रवाह बढ़ाना चाहता है, तो उलटा करता है। रिवर्स रेपो दर सदा रेपो दर से नीचे रखी जाती है, और दोनों गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति तय करती है। 2022 से यह नक़दी अवशोषण अधिकतर स्टैंडिंग डिपॉज़िट फैसिलिटी से होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि RBI इस खिड़की से विदेशी बैंकों से उधार नहीं लेता। विकल्प C गलत है, क्योंकि जिस दर पर बैंक RBI से उधार लेते हैं वह रेपो दर है। विकल्प D गलत है, क्योंकि वाणिज्यिक और विदेशी बैंकों के बीच लेन-देन RBI तय नहीं करता। परीक्षा टिप: रेपो में RBI देता है, रिवर्स रेपो में RBI लेता है।

Q20.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 9 March 2019, Shift 2मध्यम

भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य किसे बनाए रखना है?

  1. A.संपत्ति
  2. B.विनिमय दर
  3. C.संवृद्धि
  4. D.मूल्य स्थिरता
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. मूल्य स्थिरता

व्याख्या

सही उत्तर है D, मूल्य स्थिरता। 2016 में संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम कहता है कि मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य संवृद्धि के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। मुद्रास्फीति लक्ष्य ढाँचे के तहत सरकार, रिज़र्व बैंक से परामर्श करके, उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति का लक्ष्य चार प्रतिशत तय करती है, जिसमें दोनों ओर दो प्रतिशत का दायरा रहता है। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति, जिसमें गवर्नर सहित रिज़र्व बैंक के तीन सदस्य होते हैं और गवर्नर के पास निर्णायक मत होता है तथा तीन सदस्य सरकार नियुक्त करती है, आमतौर पर हर दो महीने में रेपो दर तय करती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि संपत्ति बनाना मौद्रिक नीति का काम नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि रिज़र्व बैंक फेमा के तहत विनिमय दर देखता है, पर केवल तेज उतार-चढ़ाव रोकने के लिए, मुख्य उद्देश्य के रूप में नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि संवृद्धि ध्यान में रखा जाने वाला उद्देश्य है, पर कानून में वह मूल्य स्थिरता के बाद आता है। परीक्षा टिप: पहले मूल्य स्थिरता, साथ में संवृद्धि का ध्यान, और चार प्रतिशत का मुद्रास्फीति लक्ष्य दो प्रतिशत के दायरे के साथ।

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