एफडीआई और एफपीआई: मार्ग, नियम और प्रमुख शब्द
भारत में विदेशी निवेश के परीक्षोपयोगी नोट्स: एफडीआई और एफपीआई का अंतर, फेमा, डीपीआईआईटी, स्वतः तथा सरकारी मार्ग, वर्जित क्षेत्र और प्रेस नोट 3।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

विदेशी धन भारत में दो बहुत भिन्न रूपों में आता है, और पूरा अध्याय इन दोनों में अंतर करने पर टिका है। जब कोई विदेशी कंपनी तमिलनाडु में कारखाना लगाती है या किसी भारतीय फर्म में नियंत्रक हिस्सा खरीदती है, तो वह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है; और जब कोई विदेशी कोष शेयर बाजार से किसी भारतीय कंपनी के शेयर खरीदता है और अगले महीने बेच देता है, तो वह विदेशी पोर्टफोलियो निवेश है। पहला मशीन, प्रबंधन और रोजगार साथ लाता है और उसे जल्दी बाहर निकालना कठिन है; दूसरा एक ही सुबह में निकल सकता है, इसीलिए उसे गर्म धन कहा जाता है। मॉरीशस और सिंगापुर बहुत समय से भारत में इक्विटी प्रवाह के दो सबसे बड़े स्रोत रहे हैं, जो व्यापार के साथ-साथ कर संधियों के बारे में भी कुछ कहता है।
एफडीआई और एफपीआई का अंतर
| बिंदु | प्रत्यक्ष विदेशी निवेश | विदेशी पोर्टफोलियो निवेश |
|---|---|---|
| क्या खरीदता है | स्थायी हित और प्रबंधन में दखल, परंपरा से दस प्रतिशत या अधिक मताधिकार | शेयर, बॉन्ड और अन्य प्रपत्र, कंपनी पर नियंत्रण नहीं |
| अवधि | दीर्घकालिक | अल्पकालिक, प्रायः सट्टात्मक |
| साथ क्या आता है | प्रौद्योगिकी, प्रबंधन पद्धति, रोजगार | केवल धन |
| अस्थिरता | कम; शीघ्र पलटना कठिन | अधिक; अचानक निकासी से रुपया और बाजार गिरते हैं |
| नियामक | फेमा के अंतर्गत डीपीआईआईटी की नीति, रिजर्व बैंक के साथ | एफपीआई विनियमों के अंतर्गत सेबी में पंजीकरण |
दोनों भुगतान संतुलन के पूँजी या वित्तीय खाते की प्राप्तियाँ हैं, चालू खाते की नहीं, और इस अंतर पर प्रश्न लगभग हर बैंकिंग प्रश्नपत्र में आता है। एक तीसरा शब्द, विदेशी संस्थागत निवेशक, पुरानी व्यवस्था का था: सन 2014 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने विदेशी संस्थागत निवेशकों, उनके उप-खातों और अर्हक विदेशी निवेशकों को एक ही वर्ग में मिलाकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक बना दिया, इसलिए एफआईआई अब केवल पुरानी पुस्तकों में मिलता है।
विदेशी निवेश का कानून
संचालक कानून विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 है, जिसने 1973 के विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम का स्थान लिया। एक शब्द का यह परिवर्तन उदारीकरण की पूरी कहानी कहता है: पुराना कानून विदेशी मुद्रा को दुर्लभ संसाधन मानकर विनियमित करता था और उल्लंघन को आपराधिक अपराध मानता था, जबकि नया उसे साधारण लेनदेन की तरह प्रबंधित करता है और दीवानी शास्ति देता है। नीति दस्तावेज स्वयं समेकित एफडीआई नीति परिपत्र है, जिसे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग जारी करता है; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का यह विभाग 2019 तक औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग कहलाता था। रिपोर्टिंग और विनिमय का पक्ष भारतीय रिजर्व बैंक संभालता है।
दो मार्ग
- स्वतः मार्ग — निवेशक को सरकार या रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति नहीं चाहिए; कंपनी बाद में रिजर्व बैंक को प्रवाह की सूचना दे देती है। अधिकांश क्षेत्र इसी में आते हैं और उनमें से अनेक पूरी इक्विटी तक खुले हैं।
- सरकारी या अनुमोदन मार्ग — संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय की पूर्व अनुमति आवश्यक है, जिसके लिए विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल से आवेदन होता है। विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड, जो पहले ऐसे प्रस्ताव स्वीकृत करता था, 2017 में समाप्त कर दिया गया और उसका कार्य मंत्रालयों को दे दिया गया।
प्रत्येक क्षेत्र के साथ एक सीमा और एक मार्ग जुड़ा होता है, जिसे नीति परिपत्र समय-समय पर बदलता रहता है, इसलिए अभ्यर्थी को पुरानी सारणी के भरोसे रहने के बजाय वर्तमान परिपत्र देखना चाहिए। जो नहीं बदलता वह उन क्षेत्रों की सूची है जिनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पूर्णतः वर्जित है—लॉटरी व्यवसाय, जुआ और सट्टेबाजी सहित कैसीनो, चिट फंड, निधि कंपनियाँ, हस्तांतरणीय विकास अधिकारों का व्यापार, स्थावर संपदा व्यवसाय और फार्म हाउस का निर्माण, सिगार, चेरूट, सिगरेट तथा अन्य तंबाकू विकल्पों का निर्माण, तथा वे गतिविधियाँ जो निजी निवेश के लिए ही बंद हैं, जैसे परमाणु ऊर्जा और रेल परिचालन। नीति का एक सूक्ष्म अंतर ध्यान दें—स्थावर संपदा व्यवसाय वर्जित है, किंतु टाउनशिप और सड़कों जैसी निर्माण और विकास परियोजनाएँ अनुमत हैं।
प्रेस नोट 3 और सीमावर्ती नियम
सन 2020 के प्रेस नोट 3 के अनुसार उस देश की कोई इकाई, जिसकी भारत के साथ थल सीमा लगती है, अथवा ऐसा निवेशक जो उस देश का नागरिक है या वहाँ स्थित है, किसी भी क्षेत्र में केवल सरकारी मार्ग से निवेश कर सकता है। यहाँ अभिप्रेत देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान हैं, और यही नियम स्वामित्व के उस हस्तांतरण पर भी लागू होता है जिससे ऐसा लाभकारी स्वामित्व बनता हो। इसका उद्देश्य भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण रोकना है, और यह उपाय परीक्षकों का स्थायी प्रिय है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के अध्याय को भारत की सीमाओं के भूगोल से जोड़ देता है।
जानने योग्य अन्य शब्द
- ग्रीनफील्ड निवेश — शून्य से नया संयंत्र या अनुषंगी खड़ा करना; ब्राउनफील्ड निवेश — विद्यमान इकाई को खरीदना या उसमें विलय करना
- क्षैतिज एफडीआई — दूसरे देश में वही व्यवसाय; ऊर्ध्वाधर एफडीआई — विदेश में आपूर्तिकर्ता या क्रेता चरण; समूह एफडीआई — असंबंधित व्यवसाय
- पार्टिसिपेटरी नोट — पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा उन विदेशी ग्राहकों को जारी अपतटीय व्युत्पन्न प्रपत्र जो सेबी में पंजीकरण के बिना भारतीय शेयरों में हिस्सेदारी चाहते हैं, और इसी अपारदर्शिता के कारण इन पर नजर रखी जाती है
- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का दर्पण — ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट, अर्थात भारतीय कंपनियों का विदेश में निवेश
- राउंड ट्रिपिंग — वह धन जो देश से बाहर जाकर विदेशी निवेश के वेश में लौटता है जिससे संधि के लाभ लिए जा सकें
सरकार एफडीआई क्यों चाहती है, और सावधानी
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इसलिए चाहा जाता है कि भारत की अपनी बचत उस निवेश के लिए पर्याप्त नहीं है जो वह करना चाहता है, और इसलिए भी कि विदेशी निवेशक वह लाता है जो केवल धन नहीं ला सकता—प्रौद्योगिकी, आपूर्ति श्रृंखला, निर्यात बाजार और प्रबंधन पद्धति। यह खुलापन 1991 की नई औद्योगिक नीति से आरंभ हुआ, जिसने पहली बार उच्च प्राथमिकता वाले उद्योगों की एक सूची में इक्यावन प्रतिशत तक विदेशी हिस्सेदारी की अनुमति दी, और तब से प्रत्येक नीति ने इसे चौड़ा किया है; मेक इन इंडिया तथा उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएँ विशेष रूप से निर्माण क्षेत्र का निवेश खींचने के लिए बनी हैं। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर वर्षों से प्रवाह का सबसे बड़ा भाग लेते रहे हैं।
सावधानी दूसरे प्रकार के प्रवाह के विषय में है। पोर्टफोलियो धन आते समय शेयरों के भाव चढ़ाता है और रुपये को मजबूत करता है, और जाते समय इसका उलटा करता है, इसलिए जो देश उस पर निर्भर रहता है वह विदेशी बाजारों की पूँजी के साथ उनका मनोभाव भी आयात कर लेता है। इसी कारण नीति प्रत्यक्ष निवेश को स्थिर पैर मानती है और पोर्टफोलियो निवेश को निगरानी का विषय, और इसी कारण अचानक उलटाव के विरुद्ध बीमे के रूप में विदेशी मुद्रा भंडार रखा जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न प्रायः संख्यात्मक नहीं, वैचारिक होता है, क्योंकि क्षेत्रवार सीमाएँ बदलती रहती हैं: एफडीआई और एफपीआई की तुलना, भुगतान संतुलन का वह खाता जिसमें ये दर्ज होते हैं, तथा दोनों मार्ग और उनके अनुमोदन प्राधिकारी पूछे जाते हैं। तीन तिथियाँ दोहराई जाती हैं—फेरा के स्थान पर फेमा, 2014 में एफआईआई और क्यूएफआई का एफपीआई में विलय, और 2017 में एफआईपीबी की समाप्ति। वर्जित क्षेत्र बेमेल पहचानने के रूप में आते हैं, जिनमें बीमा, रक्षा या दूरसंचार लुभावने गलत उत्तर बनते हैं क्योंकि वे समाचारों में रहते हैं। सन 2020 का प्रेस नोट 3 प्रिय है क्योंकि वह सात थल-सीमा देशों के नाम लेता है। अलग रखने योग्य शब्द—ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड, क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर एफडीआई, पार्टिसिपेटरी नोट तथा राउंड ट्रिपिंग।
महत्वपूर्ण तथ्य
| एफडीआई की सीमा | स्थायी हित, परंपरा से दस प्रतिशत या अधिक मताधिकार |
|---|---|
| संचालक कानून | विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999, जिसने फेरा, 1973 का स्थान लिया |
| नीति जारी करने वाला | डीपीआईआईटी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (2019 तक डीआईपीपी) |
| मार्ग | स्वतः मार्ग तथा सरकारी या अनुमोदन मार्ग |
| अनुमोदन पोर्टल | विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल; एफआईपीबी 2017 में समाप्त |
| एफपीआई विनियम | सेबी (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) विनियम, 2014 |
| वर्जित क्षेत्र | लॉटरी, जुआ और सट्टेबाजी, चिट फंड, निधि, टीडीआर व्यापार, स्थावर संपदा व्यवसाय, फार्म हाउस, तंबाकू निर्माण |
| निजी निवेश के लिए बंद | परमाणु ऊर्जा और रेल परिचालन |
| प्रेस नोट 3, 2020 | चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान के लिए सरकारी मार्ग |
| पार्टिसिपेटरी नोट | पंजीकृत एफपीआई द्वारा विदेशी ग्राहकों को जारी अपतटीय व्युत्पन्न प्रपत्र |
| ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड | शून्य से बनी नई इकाई बनाम विद्यमान इकाई की खरीद |
| सबसे बड़े स्रोत | मॉरीशस और सिंगापुर बहुत समय से भारत में इक्विटी प्रवाह में अग्रणी रहे हैं |
| भुगतान संतुलन | निवेश प्रवाह पूँजी और वित्तीय खाते में आते हैं |
| सन 1991 का खुलापन | नई औद्योगिक नीति ने उच्च प्राथमिकता वाले उद्योगों में इक्यावन प्रतिशत तक विदेशी हिस्सेदारी दी |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश से मुख्यतः इस कारण भिन्न है कि एफडीआई
- A.केवल सरकारें करती हैं
- B.निवेशक को स्थायी हित और प्रबंधन में दखल देता है
- C.भुगतान संतुलन के चालू खाते से होकर जाता है
- D.किसी भी कारोबारी दिन निकाला जा सकता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश विदेश के किसी उद्यम में स्थायी हित प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जिसे परंपरा से दस प्रतिशत या अधिक मताधिकार से मापा जाता है, और उसके साथ यह अधिकार भी आता है कि कंपनी कैसे चलेगी; पोर्टफोलियो निवेश ऐसे किसी नियंत्रण के बिना शेयर और बॉन्ड खरीदता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एफडीआई में निवेशक प्रायः कोई कंपनी होती है और सरकारें निवेशकों का एक प्रकार मात्र हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि एफडीआई और एफपीआई दोनों भुगतान संतुलन के पूँजी या वित्तीय खाते में दर्ज होते हैं, चालू खाते में नहीं, जिसमें व्यापार और आय आती है। विकल्प D गलत है क्योंकि यह पोर्टफोलियो निवेश का वर्णन है, वही गर्म धन जो एक ही दिन में निकल सकता है, जबकि प्रत्यक्ष निवेश संयंत्र और मशीनरी में बैठा होता है।
भारत में आज विदेशी मुद्रा लेनदेन और विदेशी निवेश को कौन अधिनियम नियंत्रित करता है?
- A.फेरा, 1973
- B.फेमा, 1999
- C.कंपनी अधिनियम, 2013
- D.सेबी अधिनियम, 1992
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 है, जो सन 2000 में प्रवृत्त हुआ और विदेशी मुद्रा के सभी लेनदेन, जिनमें भीतर आने और बाहर जाने वाला निवेश सम्मिलित है, नियंत्रित करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1973 का विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम पहले का कहीं अधिक कठोर कानून था जिसका स्थान फेमा ने लिया; वह विदेशी मुद्रा को दुर्लभ संसाधन मानता था और उल्लंघन को आपराधिक अपराध, जबकि फेमा दीवानी शास्ति से काम लेता है। विकल्प C गलत है क्योंकि कंपनी अधिनियम, 2013 कंपनियों के निगमन और संचालन को देखता है, निवेश के विनिमय पक्ष को नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि सेबी अधिनियम, 1992 ने प्रतिभूति बाजार का नियामक बनाया, जो पोर्टफोलियो निवेशकों को पंजीकृत करता है किंतु विदेशी मुद्रा को शासित नहीं करता।
भारत की समेकित एफडीआई नीति कौन जारी करता है?
- A.भारतीय रिजर्व बैंक
- B.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
- C.उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग
- D.वित्त मंत्रालय
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व्याख्या
सही उत्तर C, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग है, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय का विभाग है और 2019 में नाम बदलने तक औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग कहलाता था। विकल्प A गलत है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक फेमा के अंतर्गत विनिमय पक्ष संभालता है और प्रवाह की रिपोर्टिंग लेता है, किंतु क्षेत्रवार नीति नहीं बनाता। विकल्प B गलत है क्योंकि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड पोर्टफोलियो निवेशकों तथा प्रतिभूति बाजार का नियमन करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि वित्त मंत्रालय कराधान, बजट और वित्तीय क्षेत्र के कानून देखता है, जबकि प्रत्यक्ष निवेश की क्षेत्रवार सीमाएँ और मार्ग वाणिज्य मंत्रालय के इस विभाग से आते हैं। यह परिपत्र समय-समय पर प्रत्येक क्षेत्र की सीमा और मार्ग के साथ फिर जारी किया जाता है, इसलिए अभ्यर्थी को प्रतिशत की पुरानी सारणी के बजाय नवीनतम परिपत्र पढ़ना चाहिए।
विदेशी निवेश प्रस्तावों को स्वीकृत करने वाला विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड किस वर्ष समाप्त किया गया?
- A.2014
- B.2015
- C.2017
- D.2019
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2017 है। विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड समाप्त कर दिया गया और उसका कार्य संबंधित प्रशासनिक मंत्रालयों को दे दिया गया, जो अब विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल से आवेदन लेते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 2014 वह वर्ष है जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने विदेशी संस्थागत निवेशकों, उनके उप-खातों तथा अर्हक विदेशी निवेशकों को मिलाकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक का एक ही वर्ग बनाया। विकल्प B गलत है क्योंकि 2015 इस अध्याय में मेक इन इंडिया अभियान के जोर पकड़ने के लिए याद किया जाता है, बोर्ड के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2019 में औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग का नाम बदलकर उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग हुआ, और नाम का यह परिवर्तन प्रायः इसी प्रश्न समूह में आता है।
एफडीआई के स्वतः मार्ग में
- A.भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति आवश्यक है
- B.प्रशासनिक मंत्रालय की पूर्व अनुमति आवश्यक है
- C.सरकार या रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं है
- D.प्रत्येक क्षेत्र में निवेश छब्बीस प्रतिशत तक सीमित है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C है। स्वतः मार्ग में विदेशी निवेशक को सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक से कोई पूर्व अनुमति नहीं चाहिए; भारतीय कंपनी निर्धारित समय में प्रवाह और शेयर निर्गम की सूचना रिजर्व बैंक को दे देती है। विकल्प A और B गलत हैं क्योंकि पूर्व अनुमति दूसरे मार्ग की विशेषता है, अर्थात सरकारी या अनुमोदन मार्ग की, जिसमें आवेदन विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल से संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय को जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि स्वतः मार्ग में कोई एक सीमा नहीं होती: सीमा क्षेत्र पर निर्भर करती है, और बहुत से क्षेत्रों में इस मार्ग से पूरी इक्विटी खुली है, जबकि कुछ क्षेत्रों में सीमा कम है या उससे आगे अनुमोदन चाहिए। इसी कारण अधिकांश विदेशी निवेश स्वतः मार्ग से आता है और सरकारी मार्ग केवल कुछ संवेदनशील क्षेत्रों तथा थल-सीमा वाले देशों के निवेश तक सीमित रह गया है।
निम्नलिखित में से किसमें भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वर्जित है?
- A.बीमा
- B.लॉटरी व्यवसाय
- C.दूरसंचार सेवाएँ
- D.एकल ब्रांड खुदरा व्यापार
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व्याख्या
सही उत्तर B, लॉटरी व्यवसाय है। एफडीआई नीति वर्जित गतिविधियों की एक छोटी सूची देती है—लॉटरी व्यवसाय, कैसीनो सहित जुआ और सट्टेबाजी, चिट फंड, निधि कंपनियाँ, हस्तांतरणीय विकास अधिकारों का व्यापार, स्थावर संपदा व्यवसाय और फार्म हाउस का निर्माण, सिगार, चेरूट तथा सिगरेट का निर्माण, और वे गतिविधियाँ जो निजी निवेश के लिए ही बंद हैं, जैसे परमाणु ऊर्जा और रेल परिचालन। विकल्प A, C और D गलत हैं क्योंकि बीमा, दूरसंचार सेवाएँ और एकल ब्रांड खुदरा व्यापार सभी विदेशी निवेश के लिए खुले हैं, और प्रत्येक के लिए नीति परिपत्र में सीमा तथा मार्ग दिए हैं, जिन्हें वर्षों में बढ़ाया गया है। इस प्रश्न का जाल यही है कि अनुमत क्षेत्र ही समाचारों में अधिक रहते हैं। यह भी ध्यान दें कि नीति एक सूक्ष्म अंतर करती है—स्थावर संपदा व्यवसाय वर्जित है, किंतु टाउनशिप, सड़क और औद्योगिक पार्क जैसी निर्माण-विकास परियोजनाएँ अनुमत हैं।
सेबी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों और अर्हक विदेशी निवेशकों को मिलाकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक का एक वर्ग किस वर्ष बनाया?
- A.2010
- B.2012
- C.2014
- D.2016
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2014 है, जब सेबी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक विनियम प्रवृत्त हुए और तीन पुरानी श्रेणियाँ—विदेशी संस्थागत निवेशक, उनके उप-खाते तथा अर्हक विदेशी निवेशक—मिलकर एक वर्ग बन गईं, जिसका पंजीकरण जोखिम आधारित श्रेणियों में होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 2010 में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं हुआ। विकल्प B गलत है क्योंकि 2012 में अर्हक विदेशी निवेशक मार्ग स्वयं खोला गया था जिससे भारतीय इक्विटी में सीधा निवेश हो सके। विकल्प D गलत है क्योंकि 2016 इस अध्याय में मॉरीशस के साथ कर संधि के संशोधन के लिए याद किया जाता है, जिसने प्रवाह का स्वरूप बदला, और उसके तुरंत बाद सामान्य कर-परिवर्जन रोधी नियम लागू होने के लिए। याद रखने की बात यही है कि एफआईआई शब्द अब केवल पुरानी पुस्तकों में बचा है।
पार्टिसिपेटरी नोट कौन जारी करता है?
- A.भारतीय रिजर्व बैंक, विदेशी बैंकों को
- B.पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक, विदेशी निवेशकों को
- C.भारतीय कंपनियाँ, अपने विदेशी प्रवर्तकों को
- D.सरकार, सॉवरेन वेल्थ फंडों को
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। पार्टिसिपेटरी नोट अपतटीय व्युत्पन्न प्रपत्र हैं, जिन्हें सेबी में पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक उन विदेशी ग्राहकों को जारी करते हैं जो स्वयं भारत में पंजीकरण के बिना भारतीय शेयरों में हिस्सेदारी चाहते हैं; अंतर्निहित शेयर जारी करने वाले निवेशक के पास रहते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि रिजर्व बैंक ऐसा कोई प्रपत्र जारी नहीं करता। विकल्प C गलत है क्योंकि भारतीय कंपनी द्वारा विदेशी प्रवर्तक को दिया गया शेयर सीधे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है, जिसकी सूचना रिजर्व बैंक को दी जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि सॉवरेन वेल्थ फंड स्वयं पंजीकृत पोर्टफोलियो निवेशक के रूप में भारत में निवेश करते हैं। इन नोटों पर कड़ी नजर रहती है क्योंकि अंतिम लाभकारी स्वामी भारतीय नियामक को दिखाई नहीं देता। भारत में इन पर समय-समय पर कड़े नियम लगाए गए, जिनमें जारी करने वाले को अंतिम लाभकारी स्वामी की जानकारी रखनी और सेबी को देनी होती है।
सन 2020 का प्रेस नोट 3 किन देशों से आने वाले विदेशी निवेश के लिए पूर्व सरकारी अनुमोदन अनिवार्य करता है?
- A.राष्ट्रमंडल के सभी सदस्य
- B.भारत से थल सीमा साझा करने वाले देश
- C.कर पनाहगाह के रूप में सूचीबद्ध देश
- D.विश्व व्यापार संगठन से बाहर के सभी देश
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, भारत से थल सीमा साझा करने वाले देश हैं, अर्थात चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान। ऐसे देश की कोई इकाई, या वह निवेशक जो उस देश का नागरिक है या वहाँ स्थित है, किसी भी क्षेत्र में केवल सरकारी मार्ग से निवेश कर सकता है, और यह नियम स्वामित्व के उस हस्तांतरण पर भी लागू होता है जिससे ऐसा लाभकारी स्वामित्व बने। विकल्प A गलत है क्योंकि राष्ट्रमंडल की सदस्यता का एफडीआई नीति से कोई संबंध नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि कम कर वाले क्षेत्राधिकारों से संधि के दुरुपयोग को कर कानून देखता है, जिसमें सामान्य कर-परिवर्जन रोधी नियम सम्मिलित है, यह प्रेस नोट नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता एफडीआई नीति की कसौटी नहीं है।
विदेशी निवेश के संदर्भ में गर्म धन किसे कहा जाता है?
- A.निर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
- B.अल्पकालिक पोर्टफोलियो प्रवाह जो शीघ्र निकल सकता है
- C.राजकोषीय घाटा पूरा करने के लिए छापी गई मुद्रा
- D.प्रवासी श्रमिकों द्वारा भेजा गया धन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। गर्म धन उस अल्पकालिक पोर्टफोलियो पूँजी को कहा जाता है जो प्रतिफल के पीछे एक बाजार से दूसरे बाजार भागती है और कुछ दिनों में निकाली जा सकती है, जो आते समय शेयरों के भाव और रुपये को चढ़ाती है तथा जाते समय दोनों को गिराती है। विकल्प A गलत है क्योंकि कारखाने में प्रत्यक्ष निवेश इसका उलटा है, स्थिर संपत्तियों में बँधा और धीरे पलटने वाला। विकल्प C गलत है क्योंकि घाटा पूरा करने के लिए मुद्रा छापना घाटे की वित्त व्यवस्था या मुद्रीकरण है, जो पूर्णतः भिन्न बात है। विकल्प D गलत है क्योंकि विदेश से श्रमिकों द्वारा भेजा धन भुगतान संतुलन के चालू खाते की प्राप्ति है और भारत को मिलने वाले सबसे स्थिर प्रवाहों में है, अस्थिर पूँजी नहीं।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और पोर्टफोलियो निवेश भारत के भुगतान संतुलन के किस भाग में दर्ज होते हैं?
- A.चालू खाता
- B.पूँजी खाता
- C.भूल-चूक
- D.राजस्व खाता
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पूँजी खाता है, और अधिक ठीक कहें तो पूँजी और वित्तीय खाता, जिसमें वे लेनदेन दर्ज होते हैं जो किसी देश की विदेश स्थित संपत्तियों और दायित्वों को बदलते हैं; निवेश प्रवाह, ऋण और बैंकिंग पूँजी सभी यहीं आते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि चालू खाते में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, ब्याज तथा लाभांश जैसी प्राथमिक आय और विप्रेषण जैसे अंतरण आते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि भूल-चूक केवल संतुलन मद है जो सांख्यिकीय अंतर को समाहित करती है। विकल्प D गलत है क्योंकि राजस्व खाता सरकारी बजट का भाग है, भुगतान संतुलन का नहीं। चालू खाते का घाटा पूँजी खाते के अधिशेष से पूरा होता है, इसीलिए निवेश प्रवाह घटने पर रुपये पर दबाव आता है। दोनों खाते एक पहचान से जुड़े हैं—भुगतान संतुलन को संतुलित होना ही है, इसलिए चालू खाते का घाटा पूँजी खाते के शुद्ध प्रवाह से या भंडार में से निकालकर पूरा होता है।
विदेश में किसी विद्यमान फर्म को खरीदने के बजाय पूर्णतः नया संयंत्र या अनुषंगी स्थापित करना क्या कहलाता है?
- A.ब्राउनफील्ड निवेश
- B.ग्रीनफील्ड निवेश
- C.पोर्टफोलियो निवेश
- D.राउंड ट्रिपिंग
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, ग्रीनफील्ड निवेश है, अर्थात शून्य से नई इकाई खड़ी करना, जिससे मेजबान अर्थव्यवस्था में नई क्षमता और रोजगार जुड़ते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि ब्राउनफील्ड निवेश का अर्थ है विद्यमान इकाई का अधिग्रहण, उसमें विलय या उसका विस्तार, जिसमें क्षमता पहले से है और केवल स्वामित्व बदलता है; इन दो शब्दों पर प्रश्न प्रायः इसी अंतर पर टिकता है। विकल्प C गलत है क्योंकि पोर्टफोलियो निवेश वित्तीय प्रपत्र खरीदता है और कुछ स्थापित नहीं करता। विकल्प D गलत है क्योंकि राउंड ट्रिपिंग उस धन का वर्णन है जो देश से बाहर जाकर कर संधि का लाभ लेने के लिए विदेशी निवेश के वेश में लौटता है, जो संयंत्र का प्रकार नहीं बल्कि एक मार्ग है। मेक इन इंडिया जैसे अभियान ग्रीनफील्ड निवेश को ही खींचने के लिए बने हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एफडीआई और एफपीआई में मूल अंतर क्या है?
एफडीआई वह निवेश है जो विदेश के किसी उद्यम में स्थायी हित और प्रबंधन में दखल पाने के लिए किया जाता है, प्रायः दस प्रतिशत या अधिक मताधिकार, और वह प्रौद्योगिकी तथा रोजगार साथ लाता है। एफपीआई नियंत्रण के बिना शेयर और बॉन्ड खरीदता है, अल्पकालिक होता है और शीघ्र निकल सकता है, इसीलिए उसे गर्म धन कहा जाता है।
स्वतः मार्ग और सरकारी मार्ग में क्या अंतर है?
स्वतः मार्ग में सरकार या रिजर्व बैंक से कोई पूर्व अनुमति नहीं चाहिए और कंपनी बाद में केवल प्रवाह की सूचना देती है। सरकारी मार्ग में प्रशासनिक मंत्रालय का पूर्व अनुमोदन आवश्यक है, जिसके लिए विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल से आवेदन किया जाता है।
भारत में किन क्षेत्रों में एफडीआई पूर्णतः वर्जित है?
लॉटरी व्यवसाय, कैसीनो सहित जुआ और सट्टेबाजी, चिट फंड, निधि कंपनियाँ, हस्तांतरणीय विकास अधिकारों का व्यापार, स्थावर संपदा व्यवसाय और फार्म हाउस निर्माण, तथा सिगार, चेरूट और सिगरेट का निर्माण; इसके अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा और रेल परिचालन जैसी निजी निवेश के लिए बंद गतिविधियाँ।
सन 2020 का प्रेस नोट 3 क्या कहता है?
यह कि भारत से थल सीमा साझा करने वाले देश की इकाई, या ऐसा निवेशक जो उस देश का नागरिक है या वहाँ स्थित है, किसी भी क्षेत्र में केवल सरकारी मार्ग से निवेश कर सकता है। वे सात देश हैं चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान।
पार्टिसिपेटरी नोट क्या हैं?
ये अपतटीय व्युत्पन्न प्रपत्र हैं, जिन्हें सेबी में पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक उन विदेशी ग्राहकों को जारी करते हैं जो भारत में पंजीकरण के बिना भारतीय शेयरों में हिस्सेदारी चाहते हैं। इन पर कड़ी नजर रहती है क्योंकि अंतिम स्वामी नियामक को दिखाई नहीं देता।
स्रोत
- विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 — विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
- समेकित एफडीआई नीति परिपत्र — उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, भारत सरकार
- सेबी (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) विनियम, 2014 — भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (कक्षा 12) — एनसीईआरटी





