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GK नोट्सभारतीय अर्थव्यवस्थाउपभोक्ता व्यवहार: उपयोगिता और तटस्थता वक्र

उपयोगिता और तटस्थता वक्र: उपभोक्ता व्यवहार नोट्स

परीक्षा के लिए उपभोक्ता व्यवहार पर नोट्स: गणनावाचक और क्रमवाचक उपयोगिता, उपयोगिता के नियम, तटस्थता वक्र, बजट रेखा तथा उपभोक्ता संतुलन की शर्तें।

लेखक · प्रकाशित · 6 मिनट

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उपयोगिता और तटस्थता वक्र: उपभोक्ता व्यवहार नोट्स — GK24 title card
उपयोगिता और तटस्थता वक्र: उपभोक्ता व्यवहार नोट्स — GK24 title card

व्यष्टि अर्थशास्त्र एक ही प्रश्न से आरंभ होता है: सीमित आय वाला क्रेता यह कैसे तय करता है कि क्या खरीदे? इसका उत्तर उपभोक्ता व्यवहार का सिद्धांत है और वह दो रूपों में पढ़ाया जाता है। पुराना गणनावाचक रूप, जो अल्फ्रेड मार्शल से जुड़ा है, मानता है कि संतुष्टि को संख्याओं में मापा जा सकता है, जबकि आधुनिक क्रमवाचक रूप, जो जे. आर. हिक्स और आर. जी. डी. एलन ने दिया, केवल इतना मानता है कि क्रेता संयोगों को बेहतर, कमतर अथवा समान बता सकता है। एसएससी, रेलवे, बैंकिंग और राज्य आयोगों के पेपर इस अध्याय को परिभाषाओं, सूत्रों और गुणों के रूप में पूछते हैं, और दोनों उपागमों को अलग-अलग याद रखने पर प्रत्येक प्रश्न का उत्तर एक पंक्ति का हो जाता है।

उपयोगिता और उसे मापने के दो तरीके

उपयोगिता किसी वस्तु की आवश्यकता संतुष्ट करने की शक्ति है। यह व्यक्तिपरक है, इसलिए पानी के एक गिलास की उपयोगिता प्यासे यात्री के लिए और नदी किनारे बैठे व्यक्ति के लिए भिन्न होती है। गणनावाचक उपागम में उपयोगिता को काल्पनिक इकाइयों, जिन्हें यूटिल कहते हैं, में मापा जाता है, अर्थात उपभोक्ता कह सकता है कि एक कप चाय उसे दस यूटिल और एक समोसा छह यूटिल देता है। क्रमवाचक उपागम ऐसा कोई माप नहीं मानता; उपभोक्ता केवल यह बताता है कि वह एक संयोग को दूसरे से अधिक पसंद करता है अथवा दोनों के बीच तटस्थ है। क्रमवाचक उपागम चार मान्यताओं पर खड़ा है: वरीयताओं की पूर्णता, संक्रामकता, कम की तुलना में अधिक मात्रा को वरीयता, तथा प्रतिस्थापन की ह्रासमान सीमांत दर; उपभोक्ता से कम अपेक्षा करने के कारण इसे श्रेष्ठ सिद्धांत माना जाता है।

कुल उपयोगिता और सीमांत उपयोगिता

कुल उपयोगिता उपभोग की गई सभी इकाइयों से मिली संतुष्टि का योग है, और सीमांत उपयोगिता एक अतिरिक्त इकाई से कुल उपयोगिता में हुई वृद्धि है, अर्थात सीमांत उपयोगिता कुल उपयोगिता में परिवर्तन को मात्रा में परिवर्तन से भाग देने पर मिलती है। इन दोनों का संबंध निश्चित है और बार-बार पूछा जाता है।

उपभोग इकाइयांकुल उपयोगितासीमांत उपयोगिता
11010
2188
3246
4284
5302
6300
728-2

जब तक सीमांत उपयोगिता धनात्मक रहती है, कुल उपयोगिता बढ़ती है; जब सीमांत उपयोगिता शून्य हो जाती है, कुल उपयोगिता अधिकतम होती है और उपभोक्ता तृप्ति बिंदु पर पहुंच जाता है; और जब सीमांत उपयोगिता ऋणात्मक हो जाती है, कुल उपयोगिता घटने लगती है। यही ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम है, जिसे गोसेन का प्रथम नियम भी कहते हैं और जो बताता है कि मांग वक्र नीचे की ओर क्यों ढलता है: क्रेता बाद की इकाई के लिए कम मूल्य देगा, क्योंकि वह उसे कम संतुष्टि देती है।

सम-सीमांत उपयोगिता नियम और गणनावाचक संतुलन

कई वस्तुओं पर व्यय करने वाला उपभोक्ता अपना व्यय इस प्रकार बांटता है कि प्रत्येक वस्तु पर खर्च किया अंतिम रुपया समान संतुष्टि दे। यही सम-सीमांत उपयोगिता नियम है, अर्थात गोसेन का द्वितीय नियम, जिसे प्रतिस्थापन का नियम अथवा अधिकतम संतुष्टि का नियम भी कहा जाता है। इसलिए गणनावाचक उपागम में उपभोक्ता संतुलन की शर्त यह है कि प्रत्येक वस्तु की सीमांत उपयोगिता को उसकी कीमत से भाग देने पर मिला अनुपात सब वस्तुओं के लिए समान हो और मुद्रा की सीमांत उपयोगिता के बराबर हो, अर्थात X की सीमांत उपयोगिता बटा X की कीमत = Y की सीमांत उपयोगिता बटा Y की कीमत = मुद्रा की सीमांत उपयोगिता। यदि किसी एक वस्तु का अनुपात अधिक हो, तो उपभोक्ता व्यय उसी ओर मोड़ता है, जब तक अनुपात पुनः समान न हो जाएं।

तटस्थता वक्र और उसके गुण

तटस्थता वक्र दो वस्तुओं के उन सभी संयोगों का बिंदुपथ है जो उपभोक्ता को समान स्तर की संतुष्टि देते हैं, इसलिए वह उनके बीच तटस्थ रहता है; ऐसे वक्रों के समूह को तटस्थता मानचित्र कहते हैं। यह अवधारणा सबसे पहले एफ. वाई. एजवर्थ ने खींची, विल्फ्रेडो पेरेटो ने विकसित की और हिक्स तथा एलन ने पूर्ण सिद्धांत का रूप दिया।

  • यह बाएं से दाएं नीचे की ओर ढलता है, क्योंकि एक वस्तु अधिक लेने के लिए दूसरी वस्तु छोड़नी पड़ती है।
  • यह मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर (कॉन्वेक्स) होता है, क्योंकि प्रतिस्थापन की सीमांत दर घटती जाती है।
  • ऊंचा तटस्थता वक्र संतुष्टि के ऊंचे स्तर को दिखाता है।
  • दो तटस्थता वक्र न कभी एक-दूसरे को काट सकते हैं और न स्पर्श कर सकते हैं, क्योंकि इससे एक ही संयोग दो भिन्न संतुष्टि स्तर देने लगेगा।
  • तटस्थता वक्र किसी अक्ष को स्पर्श नहीं करता, क्योंकि उपभोक्ता दोनों वस्तुओं की कुछ मात्रा चाहता है।

तटस्थता वक्र का ढाल प्रतिस्थापन की सीमांत दर है, अर्थात पहली वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के लिए उपभोक्ता दूसरी वस्तु की कितनी मात्रा छोड़ने को तैयार है; यह दोनों वस्तुओं की सीमांत उपयोगिताओं का अनुपात होता है। दो विशेष स्थितियां याद रखने योग्य हैं: पूर्ण प्रतिस्थापन्न वस्तुओं का तटस्थता वक्र सरल रेखा होता है जिसकी प्रतिस्थापन दर स्थिर रहती है, और पूर्ण पूरक वस्तुओं का तटस्थता वक्र समकोण अर्थात अंग्रेजी अक्षर एल के आकार का होता है।

बजट रेखा और उपभोक्ता संतुलन

बजट रेखा, जिसे कीमत रेखा भी कहते हैं, वे सभी संयोग दिखाती है जिन्हें उपभोक्ता अपनी पूरी आय खर्च करके खरीद सकता है, इसलिए उसका समीकरण है: X की कीमत गुणा X की मात्रा और Y की कीमत गुणा Y की मात्रा का योग आय के बराबर। उसका ढाल दोनों कीमतों का अनुपात है, अर्थात X की कीमत बटा Y की कीमत। आय में परिवर्तन बजट रेखा को समानांतर खिसका देता है, वृद्धि पर बाहर और कमी पर भीतर, जबकि किसी एक वस्तु की कीमत में परिवर्तन रेखा को दूसरी वस्तु के अंतःखंड पर घुमा देता है। उपभोक्ता उस बिंदु पर संतुलन में होता है जहां बजट रेखा उच्चतम प्राप्य तटस्थता वक्र को स्पर्श करती है, अर्थात जहां प्रतिस्थापन की सीमांत दर कीमतों के अनुपात के बराबर हो और वक्र उस बिंदु पर उन्नतोदर हो।

कीमत प्रभाव, आय प्रभाव और उपभोक्ता की बचत

किसी वस्तु की कीमत घटने पर संपूर्ण कीमत प्रभाव को दो भागों में बांटा जा सकता है: प्रतिस्थापन प्रभाव, जिससे उपभोक्ता दूसरी वस्तु के स्थान पर सस्ती वस्तु अधिक खरीदता है, और आय प्रभाव, जिससे उसकी वास्तविक आय बढ़ जाती है। सामान्य वस्तु में दोनों एक ही दिशा में काम करते हैं। निम्नस्तरीय वस्तु में आय प्रभाव प्रतिस्थापन प्रभाव के विरुद्ध काम करता है, और उस दुर्लभ स्थिति में जब वह उसे पराजित कर दे, वस्तु गिफेन वस्तु कहलाती है और उसका मांग वक्र ऊपर की ओर ढलता है, जो मांग के नियम का प्रमुख अपवाद है। उपभोक्ता की बचत अथवा उपभोक्ता अधिशेष, मार्शल की अवधारणा, उस कीमत और वास्तविक चुकाई कीमत का अंतर है जो उपभोक्ता देने को तैयार था। एडम स्मिथ का मूल्य विरोधाभास, अर्थात पानी आवश्यक होकर भी सस्ता और हीरा अनुपयोगी होकर भी महंगा, इसी सीमांत तर्क से समझाया जाता है: कीमत कुल उपयोगिता का नहीं, सीमांत उपयोगिता का अनुसरण करती है।

परीक्षा की दृष्टि से

इस अध्याय से तीन बातें पूछी जाती हैं: कौन सा उपागम किसने दिया, कुल और सीमांत उपयोगिता का संबंध, तथा तटस्थता वक्र और बजट रेखा के गुण एवं सूत्र। संख्यात्मक प्रश्न उपयोगिता सारणी देकर पूछते हैं कि कुल उपयोगिता किस इकाई पर अधिकतम है, अथवा दो कीमतें देकर बजट रेखा का ढाल पूछते हैं। जाल ये हैं: मार्शल को क्रमवाचक उपागम में रख देना, बजट रेखा का ढाल Py बटा Px लिख देना, तटस्थता वक्र को मूल बिंदु की ओर नतोदर बता देना, और प्रतिस्थापन की सीमांत दर को कीमत अनुपात समझ लेना, जबकि दोनों केवल संतुलन बिंदु पर बराबर होते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

उपयोगितावस्तु की आवश्यकता संतुष्ट करने की शक्ति; व्यक्तिपरक और वास्तव में अमापनीय
गणनावाचक उपागमअल्फ्रेड मार्शल; उपयोगिता यूटिल नामक इकाइयों में मापी जाती है
क्रमवाचक उपागमजे. आर. हिक्स और आर. जी. डी. एलन; केवल वरीयता क्रम
तटस्थता वक्रसर्वप्रथम एफ. वाई. एजवर्थ ने खींचा, विल्फ्रेडो पेरेटो ने विकसित किया
सीमांत उपयोगिताकुल उपयोगिता में परिवर्तन ÷ उपभोग मात्रा में परिवर्तन
कुल उपयोगिता अधिकतमजब सीमांत उपयोगिता शून्य हो, अर्थात तृप्ति बिंदु
गोसेन का प्रथम नियमह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम
गोसेन का द्वितीय नियमसम-सीमांत उपयोगिता नियम, जिसे प्रतिस्थापन का नियम भी कहते हैं
गणनावाचक संतुलनMUx ÷ Px = MUy ÷ Py = मुद्रा की सीमांत उपयोगिता
प्रतिस्थापन की सीमांत दरतटस्थता वक्र का ढाल; MRSxy = MUx ÷ MUy
बजट रेखाPx·X + Py·Y = M; ढाल = Px ÷ Py
क्रमवाचक संतुलनबजट रेखा उच्चतम प्राप्य तटस्थता वक्र को स्पर्श करे; MRSxy = Px ÷ Py
पूर्ण प्रतिस्थापन्न वस्तुएंतटस्थता वक्र सरल रेखा, प्रतिस्थापन दर स्थिर
पूर्ण पूरक वस्तुएंतटस्थता वक्र समकोण अर्थात एल आकार का
कीमत प्रभावप्रतिस्थापन प्रभाव और आय प्रभाव का योग
गिफेन वस्तुवह निम्नस्तरीय वस्तु जिसका आय प्रभाव प्रतिस्थापन प्रभाव से बड़ा हो; मांग वक्र ऊपर ढलता है
उपभोक्ता अधिशेषदेने को तैयार कीमत और वास्तविक चुकाई कीमत का अंतर; मार्शल की अवधारणा
मूल्य विरोधाभासएडम स्मिथ का पानी-हीरा विरोधाभास, जो सीमांत उपयोगिता से समझाया जाता है

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

उपभोक्ता व्यवहार का गणनावाचक उपयोगिता उपागम, जिसमें उपयोगिता को यूटिल नामक इकाइयों में मापा जाता है, किससे संबंधित है?

  1. A.अल्फ्रेड मार्शल
  2. B.जे. आर. हिक्स
  3. C.पॉल सैमुअल्सन
  4. D.विल्फ्रेडो पेरेटो
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अल्फ्रेड मार्शल

मार्शल ने अपनी पुस्तक प्रिंसिपल्स ऑफ इकोनॉमिक्स में मांग का सिद्धांत इस मान्यता पर खड़ा किया कि उपयोगिता काल्पनिक इकाइयों में मापी जा सकती है, जिससे उपभोक्ता एक कप चाय के दस यूटिल और समोसे के छह यूटिल की तुलना कर सकता है; इसी से उन्होंने ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का…

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

कुल उपयोगिता अधिकतम कब होती है?

  1. A.जब सीमांत उपयोगिता अधिकतम हो
  2. B.जब सीमांत उपयोगिता शून्य हो
  3. C.जब सीमांत उपयोगिता ऋणात्मक हो
  4. D.जब सीमांत उपयोगिता औसत उपयोगिता के बराबर हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जब सीमांत उपयोगिता शून्य हो

सीमांत उपयोगिता एक अतिरिक्त इकाई से कुल उपयोगिता में हुई वृद्धि है, इसलिए जब तक वह धनात्मक है, कुल उपयोगिता बढ़ती रहती है; जिस क्षण वह शून्य होती है, कुछ और नहीं जुड़ता और कुल उपयोगिता अपने उच्चतम बिंदु पर होती है, जिसे तृप्ति बिंदु कहते हैं।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

तटस्थता वक्र के किसी बिंदु पर उसका ढाल क्या कहलाता है?

  1. A.प्रतिस्थापन की सीमांत दर
  2. B.कीमत अनुपात
  3. C.उपभोग की सीमांत प्रवृत्ति
  4. D.प्रतिस्थापन की लोच
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रतिस्थापन की सीमांत दर

X के लिए Y की प्रतिस्थापन की सीमांत दर वह मात्रा है जितनी Y उपभोक्ता उसी तटस्थता वक्र पर रहते हुए X की एक अतिरिक्त इकाई के लिए छोड़ने को तैयार होता है, और वह X की सीमांत उपयोगिता तथा Y की सीमांत उपयोगिता के अनुपात के बराबर होती है।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

तटस्थता वक्र मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर होता है, इसका कारण है:

  1. A.प्रतिस्थापन की बढ़ती सीमांत दर
  2. B.प्रतिस्थापन की घटती सीमांत दर
  3. C.प्रतिस्थापन की स्थिर सीमांत दर
  4. D.पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रतिस्थापन की घटती सीमांत दर

जैसे-जैसे उपभोक्ता तटस्थता वक्र पर नीचे बढ़ता है, उसके पास पहली वस्तु अधिक और दूसरी कम होती जाती है, इसलिए पहली वस्तु की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई उसके लिए दूसरी वस्तु की कम इकाइयों के बराबर रह जाती है; इससे ढाल बाएं से दाएं चपटा होता जाता है और वक्र मूल…

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

निम्नलिखित में से कौन तटस्थता वक्र का गुण नहीं है?

  1. A.यह बाएं से दाएं नीचे की ओर ढलता है
  2. B.यह मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर होता है
  3. C.दो तटस्थता वक्र एक-दूसरे को काट सकते हैं
  4. D.ऊंचा तटस्थता वक्र संतुष्टि का ऊंचा स्तर दिखाता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. दो तटस्थता वक्र एक-दूसरे को काट सकते हैं

यदि दो वक्र कटते, तो कटान बिंदु का संयोग दोनों का होता और एक ही समय में दो भिन्न संतुष्टि स्तर देता, जो तार्किक विरोधाभास है; इसी कारण वे एक-दूसरे को स्पर्श भी नहीं कर सकते।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

दो वस्तुएं X और Y खरीदने वाले उपभोक्ता की बजट रेखा का ढाल किससे दिया जाता है?

  1. A.X की कीमत ÷ Y की कीमत
  2. B.Y की कीमत ÷ X की कीमत
  3. C.आय ÷ X की कीमत
  4. D.X की सीमांत उपयोगिता ÷ Y की सीमांत उपयोगिता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. X की कीमत ÷ Y की कीमत

बजट रेखा का समीकरण Px·X + Py·Y = M है, जिसे पुनर्व्यवस्थित करने पर Y = M ÷ Py − (Px ÷ Py)·X मिलता है, इसलिए अंतःखंड आय बटा Y की कीमत है और ढाल क्षैतिज अक्ष वाली वस्तु की कीमत बटा ऊर्ध्व अक्ष वाली वस्तु की कीमत है।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

तटस्थता वक्र उपागम में उपभोक्ता संतुलन में कब होता है?

  1. A.जब प्रतिस्थापन की सीमांत दर कीमतों के अनुपात के बराबर हो
  2. B.जब वस्तु की सीमांत उपयोगिता शून्य हो
  3. C.जब बजट रेखा तटस्थता वक्र को दो बिंदुओं पर काटे
  4. D.जब दोनों वस्तुओं की कुल उपयोगिता समान हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जब प्रतिस्थापन की सीमांत दर कीमतों के अनुपात के बराबर हो

संतुलन वह बिंदु है जहां बजट रेखा उपभोक्ता के लिए प्राप्य उच्चतम तटस्थता वक्र को स्पर्श करती है, और स्पर्श बिंदु पर दोनों के ढाल बराबर होते हैं, अर्थात X के लिए Y की प्रतिस्थापन दर Px बटा Py के बराबर होती है; दूसरी शर्त यह है कि वहां तटस्थता…

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

उपभोक्ता व्यवहार के सिद्धांत का क्रमवाचक उपयोगिता उपागम किसने विकसित किया?

  1. A.एडम स्मिथ और डेविड रिकार्डो
  2. B.जे. आर. हिक्स और आर. जी. डी. एलन
  3. C.अल्फ्रेड मार्शल और ए. सी. पिगू
  4. D.जे. एम. कीन्स और जोन रॉबिन्सन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जे. आर. हिक्स और आर. जी. डी. एलन

उन्होंने 1934 के अपने संयुक्त कार्य में और आगे हिक्स की पुस्तक वैल्यू एंड कैपिटल में उपयोगिता के माप के स्थान पर वरीयता क्रम रखा और मांग के सिद्धांत को तटस्थता वक्र, प्रतिस्थापन की सीमांत दर तथा बजट रेखा पर फिर से खड़ा किया।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

सम-सीमांत उपयोगिता नियम को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?

  1. A.मांग का नियम
  2. B.प्रतिस्थापन का नियम
  3. C.पूर्ति का नियम
  4. D.ह्रासमान प्रतिफल का नियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रतिस्थापन का नियम

सम-सीमांत उपयोगिता नियम, जिसे गोसेन का द्वितीय नियम तथा अधिकतम संतुष्टि का नियम भी कहते हैं, कहता है कि उपभोक्ता अपनी आय वस्तुओं में इस प्रकार बांटता है कि प्रत्येक वस्तु पर खर्च अंतिम रुपया उसे समान सीमांत उपयोगिता दे; वह इस स्थिति तक प्रति रुपया अधिक उपयोगिता देने वाली…

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

दो पूर्ण प्रतिस्थापन्न वस्तुओं का तटस्थता वक्र कैसा होता है?

  1. A.नीचे की ओर ढलती सरल रेखा
  2. B.एल के आकार का
  3. C.मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर
  4. D.ऊर्ध्व सरल रेखा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नीचे की ओर ढलती सरल रेखा

यदि दो वस्तुएं पूर्ण प्रतिस्थापन्न हों, जैसे एक समान नमक के दो ब्रांड, तो उपभोक्ता उन्हें एक निश्चित दर पर बदलने को तैयार रहता है, चाहे उसके पास कितनी भी मात्रा हो, इसलिए प्रतिस्थापन की सीमांत दर स्थिर रहती है और स्थिर ढाल का अर्थ सरल रेखा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणनावाचक और क्रमवाचक उपयोगिता में क्या अंतर है?

मार्शल द्वारा प्रयुक्त गणनावाचक उपयोगिता मानती है कि संतुष्टि को यूटिल नामक संख्याओं में मापा जा सकता है, इसलिए उपयोगिताओं को जोड़ा और तुलना किया जा सकता है। हिक्स और एलन की क्रमवाचक उपयोगिता केवल यह मानती है कि उपभोक्ता संयोगों को वरीयता क्रम में रख सकता है, उन पर संख्या नहीं लगा सकता।

कुल उपयोगिता कब अधिकतम होती है?

कुल उपयोगिता उपभोग के उस स्तर पर अधिकतम होती है जहां सीमांत उपयोगिता शून्य हो जाती है, जिसे तृप्ति बिंदु कहते हैं। उससे आगे उपभोग करने पर सीमांत उपयोगिता ऋणात्मक हो जाती है और कुल उपयोगिता घटने लगती है।

तटस्थता वक्र मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर क्यों होता है?

क्योंकि प्रतिस्थापन की सीमांत दर घटती जाती है। जैसे-जैसे उपभोक्ता को एक वस्तु अधिक मिलती है, वह उसे दूसरी वस्तु की तुलना में कम महत्व देता है, इसलिए प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के लिए वह दूसरी वस्तु की कम-से-कम मात्रा छोड़ता है और वक्र दाईं ओर चपटा होता जाता है।

क्या दो तटस्थता वक्र एक-दूसरे को काट सकते हैं?

नहीं। यदि वे कटते, तो कटान बिंदु का संयोग दोनों वक्रों पर होता और एक ही समय में दो भिन्न संतुष्टि स्तर देता, जो विरोधाभास है। इसी कारण दो तटस्थता वक्र एक-दूसरे को स्पर्श भी नहीं कर सकते।

बजट रेखा का ढाल क्या होता है?

दोनों वस्तुओं की कीमतों का अनुपात, अर्थात क्षैतिज अक्ष वाली वस्तु की कीमत बटा ऊर्ध्व अक्ष वाली वस्तु की कीमत। आय घटने पर बजट रेखा भीतर की ओर समानांतर खिसक जाती है, परंतु यह ढाल नहीं बदलता।

तटस्थता वक्र उपागम में उपभोक्ता संतुलन की शर्त क्या है?

बजट रेखा उच्चतम प्राप्य तटस्थता वक्र को स्पर्श करनी चाहिए, जिससे दोनों वस्तुओं के बीच प्रतिस्थापन की सीमांत दर उनकी कीमतों के अनुपात के बराबर हो, और उस बिंदु पर तटस्थता वक्र मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर होना चाहिए।

स्रोत

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