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GK नोट्सभारतीय अर्थव्यवस्थाकिसानों और कृषि से जुड़ी सरकारी योजनाएं

किसानों और कृषि की सरकारी योजनाएं: नोट्स

किसानों की सरकारी योजनाओं के पूरे नोट्स: पीएम-किसान, फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, ई-नाम, किसान क्रेडिट कार्ड, न्यूनतम समर्थन मूल्य और पिछले प्रश्न।

लेखक · प्रकाशित · 6 मिनट

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किसानों और कृषि की सरकारी योजनाएं: नोट्स — GK24 title card
किसानों और कृषि की सरकारी योजनाएं: नोट्स — GK24 title card

भारत की लगभग आधी कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, इसलिए संघ और राज्य सरकारें किसानों के लिए योजनाओं की लंबी सूची चलाती हैं: आय सहायता, फसल बीमा, सस्ता ऋण, सिंचाई, मृदा परीक्षण, बाजार सुधार और पेंशन। इनमें सबसे नई पीएम धन-धान्य कृषि योजना चुने हुए सौ जिलों में पहले से चल रही योजनाओं को एक साथ लाती है और उसने अभी एक वर्ष पूरा किया है, जो बताता है कि पाठ्यक्रम का यह भाग समाचारों में कितनी बार आता है। परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है प्रत्येक योजना का स्थिर ढाँचा: आरंभ का वर्ष, संचालक मंत्रालय, मिलने वाली राशि और उससे जुड़ी शर्त। यह नोट उन्हें इसी रूप में प्रस्तुत करता है।

आय सहायता: पीएम-किसान और किसान पेंशन

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, अर्थात पीएम-किसान, की घोषणा फरवरी 2019 के अंतरिम बजट में हुई और इसका शुभारंभ 24 फरवरी 2019 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हुआ, जबकि यह 1 दिसंबर 2018 से प्रभावी मानी गई। इसमें भूमिधारक किसान परिवार को वर्ष में छह हजार रुपये, दो हजार रुपये की तीन समान किस्तों में, आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे भेजे जाते हैं। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है और पूरा व्यय संघ सरकार उठाती है, इसमें राज्य का अंश नहीं होता। मूल ढाँचे की दो हेक्टेयर की सीमा 2019 के मध्य में हटा दी गई और लाभ सभी भूमिधारक किसान परिवारों तक बढ़ा दिया गया, किंतु आयकरदाता, संस्थागत भूमिधारक, निर्धारित वेतन से ऊपर के सेवारत तथा सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी और पेशेवर इससे बाहर रखे गए। इसके साथ 2019 की प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना चलती है, जो अठारह से चालीस वर्ष के लघु एवं सीमांत किसानों के लिए स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है और साठ वर्ष के बाद तीन हजार रुपये मासिक पेंशन देती है, जिसमें सरकार किसान के अंशदान के बराबर अंशदान करती है।

फसल बीमा और जोखिम सुरक्षा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जनवरी 2016 में स्वीकृत हुई और खरीफ 2016 से लागू हुई, जिसने पुरानी राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना तथा उसके संशोधित रूप का स्थान लिया। इसकी सबसे अधिक याद रखी जाने वाली विशेषता किसान द्वारा दिया जाने वाला एक समान प्रीमियम है: खरीफ की खाद्य तथा तिलहन फसलों पर बीमित राशि का दो प्रतिशत, रबी की खाद्य तथा तिलहन फसलों पर डेढ़ प्रतिशत और वार्षिक वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों पर पाँच प्रतिशत। शेष बीमांकिक प्रीमियम संघ और राज्य सरकारें मिलकर देती हैं। बीमा बुवाई से कटाई के बाद तक रहता है, जिसमें बुवाई न हो पाना, ओलावृष्टि तथा भूस्खलन जैसी स्थानीय आपदाएँ और खेत में सूखने के लिए रखी कटी फसल की हानि भी शामिल है। आरंभ में ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य रहा नामांकन खरीफ 2020 से सभी के लिए स्वैच्छिक है। साथ में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना चलती है, जो फसल कटाई प्रयोगों के स्थान पर मौसम के आँकड़ों के आधार पर भुगतान करती है।

ऋण, कीमतें और बाजार

संस्थागत ऋण किसान तक मुख्यतः किसान क्रेडिट कार्ड से पहुँचता है, जो आर. वी. गुप्ता समिति की सिफारिश पर 1998 में आरंभ हुआ और नाबार्ड ने इसका ढाँचा बनाया; यह खेती के खर्च के लिए घूमती अल्पकालिक सीमा देता है और आगे इसे पशुपालन तथा मत्स्य पालन के लिए भी खोल दिया गया। अल्पकालिक फसल ऋण पर संशोधित ब्याज अनुदान योजना के अंतर्गत दो प्रतिशत ब्याज अनुदान और समय पर भुगतान करने पर तीन प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है। कीमतों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से सहारा मिलता है, जिसकी सिफारिश कृषि लागत एवं मूल्य आयोग करता है; यह निकाय 1965 में कृषि मूल्य आयोग के रूप में बना और 1985 में इसका नाम बदला, तथा घोषणा आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बाईस अधिदेशित फसलों के लिए करती है; गन्ने को इसके स्थान पर गन्ना नियंत्रण आदेश के अंतर्गत उचित एवं लाभकारी मूल्य मिलता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद भारतीय खाद्य निगम और राज्य एजेंसियाँ करती हैं। विपणन की ओर 14 अप्रैल 2016 को आरंभ राष्ट्रीय कृषि बाजार, अर्थात ई-नाम, देश की विनियमित मंडियों को एक ऑनलाइन व्यापार मंच पर जोड़ता है, 2020 का कृषि अवसंरचना कोष भंडारण, श्रेणीकरण तथा शीत शृंखला के लिए दीर्घकालिक वित्त देता है और दस हजार किसान उत्पादक संगठनों की योजना छोटे किसानों को मिलकर बेचने में सहायता देती है।

योजनाएँ एक दृष्टि में

योजनाआरंभक्या देती है
किसान क्रेडिट कार्ड1998घूमती अल्पकालिक फसल ऋण सीमा, ढाँचा नाबार्ड का
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना2007कृषि के लिए राज्यों का छत्र कोष; केसर मिशन इसी की उप-योजना
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन2007-08चावल, गेहूँ, दलहन और मोटे अनाज का उत्पादन
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना2015, राजस्थान के सूरतगढ़ सेमृदा परीक्षण रिपोर्ट और उर्वरक की सलाह, नियत चक्र पर
परंपरागत कृषि विकास योजना2015समूहों में जैविक खेती और सहभागी प्रमाणन
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना2015हर खेत को पानी तथा पर ड्रॉप मोर क्रॉप के अंतर्गत सिंचाई
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाखरीफ 20162, 1.5 और 5 प्रतिशत किसान प्रीमियम पर फसल बीमा
ई-नाम14 अप्रैल 2016विनियमित मंडियों को जोड़ने वाला ऑनलाइन व्यापार मंच
पीएम-किसान24 फरवरी 2019, गोरखपुरवर्ष में छह हजार रुपये, तीन किस्तों में
पीएम किसान मानधन योजना2019साठ वर्ष के बाद तीन हजार रुपये मासिक पेंशन
पीएम-कुसुम2019किसानों के लिए सौर पंप और ग्रिड से जुड़े सौर संयंत्र
किसान रेल2020शीघ्र नष्ट होने वाली उपज के लिए रेल सेवा, आरंभ देवलाली से दानापुर मार्ग पर

सिंचाई, मृदा और टिकाऊ खेती

2015 की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना सिंचाई के कार्य को एक शीर्ष के नीचे लाती है और इसके चार परिचित घटक हैं: बड़ी तथा मध्यम परियोजनाओं के लिए त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम, नए स्रोतों के लिए हर खेत को पानी, टपक तथा फुहार सूक्ष्म सिंचाई के लिए पर ड्रॉप मोर क्रॉप, और जलग्रहण क्षेत्र विकास। 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ से आरंभ मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना प्रत्येक जोत को मुख्य मृदा पोषक तत्वों और भौतिक गुणों की रिपोर्ट तथा फसलवार उर्वरक सलाह देती है, जो नियमित चक्र पर दोहराई जाती है, जिससे किसान यूरिया का अपव्यय घटा सकें। परंपरागत कृषि विकास योजना समूहों में जैविक खेती को सहारा देती है और उपज को भारत की सहभागी गारंटी प्रणाली से प्रमाणित कराती है, जबकि राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन वर्षा आश्रित क्षेत्र विकास, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन देखता है। बागवानी के समेकित विकास का मिशन, खाद्य तेलों का राष्ट्रीय मिशन और दलहन में आत्मनिर्भरता का मिशन विशेष फसल समूहों पर काम करते हैं, और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की उप-योजना के रूप में चलने वाला राष्ट्रीय केसर मिशन प्रश्नपत्रों में फसल विशेष मिशन का मानक उदाहरण है।

प्रश्न किस रूप में आते हैं

यहाँ अधिकांश प्रश्न एक पंक्ति के मिलान होते हैं: योजना के साथ वर्ष, योजना के साथ उसका नारा, योजना के साथ दी जाने वाली राशि, या योजना के साथ संचालक मंत्रालय। दूसरा प्रकार पूछता है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश कौन करता है या किसान क्रेडिट कार्ड किस समिति की सिफारिश पर बना। तीसरा प्रकार, जो बैंकिंग परीक्षाओं में आम है, फसल बीमा के प्रीमियम, फसल ऋण पर ब्याज अनुदान या ई-नाम चलाने वाली एजेंसी पूछता है। सबसे सुरक्षित तैयारी ऊपर की तालिका याद करना है, इस बात के साथ कि पीएम-किसान का पूरा व्यय संघ उठाता है, जबकि फसल बीमा का प्रीमियम राज्यों के साथ बाँटा जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न प्रायः एक पंक्ति के मिलान होते हैं। योजना के साथ वर्ष: किसान क्रेडिट कार्ड 1998, आरकेवीवाई 2007, मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा पीएमकेएसवाई और पीकेवीवाई 2015, पीएमएफबीवाई और ई-नाम 2016, पीएम-किसान, मानधन तथा कुसुम 2019। योजना के साथ राशि: पीएम-किसान में वर्ष के छह हजार रुपये, मानधन में तीन हजार रुपये मासिक, और फसल बीमा में दो, डेढ़ तथा पाँच प्रतिशत प्रीमियम। योजना के साथ नारा: हर खेत को पानी और पर ड्रॉप मोर क्रॉप सिंचाई योजना के साथ। संस्था से जुड़े प्रश्न पूछते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश कौन करता है, अनाज की खरीद कौन करता है और ई-नाम कौन चलाता है, जिनके उत्तर कृषि लागत एवं मूल्य आयोग, भारतीय खाद्य निगम तथा लघु कृषक कृषि व्यापार संघ हैं। बैंकिंग परीक्षाएँ फसल ऋण पर ब्याज अनुदान और कृषि अवसंरचना कोष जोड़ती हैं। लाभार्थियों की संख्या याद करने से बचें, क्योंकि वह हर वर्ष बदलती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

पीएम-किसान शुभारंभ24 फरवरी 2019, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश; 1 दिसंबर 2018 से प्रभावी
पीएम-किसान लाभवर्ष में छह हजार रुपये, दो हजार रुपये की तीन किस्तों में
पीएम-किसान वित्तकेंद्रीय क्षेत्र की योजना, पूरा व्यय संघ सरकार का
पीएमएफबीवाई आरंभखरीफ 2016, राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के स्थान पर
पीएमएफबीवाई किसान प्रीमियमखरीफ 2 प्रतिशत, रबी 1.5 प्रतिशत, वाणिज्यिक तथा बागवानी 5 प्रतिशत
मृदा स्वास्थ्य कार्ड19 फरवरी 2015, राजस्थान के सूरतगढ़ से आरंभ
पीएमकेएसवाई घटकएआईबीपी, हर खेत को पानी, पर ड्रॉप मोर क्रॉप, जलग्रहण विकास
ई-नाम14 अप्रैल 2016, संचालन लघु कृषक कृषि व्यापार संघ
किसान क्रेडिट कार्ड1998, आर. वी. गुप्ता समिति, प्रतिरूप नाबार्ड का
एमएसपी की सिफारिशकृषि लागत एवं मूल्य आयोग, 1965 में गठित, 1985 में नया नाम
गन्ने का मूल्यगन्ना नियंत्रण आदेश के अंतर्गत उचित एवं लाभकारी मूल्य
पीएम किसान मानधन2019, साठ वर्ष के बाद तीन हजार रुपये मासिक पेंशन, बराबर अंशदान
केसर मिशनराष्ट्रीय कृषि विकास योजना की उप-योजना
कृषि अवसंरचना कोष2020, भंडारण, श्रेणीकरण और शीत शृंखला के लिए दीर्घकालिक वित्त

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · 4 Jan 2020, Shift 2मध्यम

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) का शुभारंभ 2019 में उत्तर प्रदेश के ______ से हुआ था।

  1. A.लखनऊ
  2. B.गोरखपुर
  3. C.प्रयागराज (इलाहाबाद)
  4. D.वाराणसी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गोरखपुर

व्याख्या

सही उत्तर B, गोरखपुर है। पीएम-किसान की घोषणा फरवरी 2019 के अंतरिम बजट में हुई और औपचारिक शुभारंभ 24 फरवरी 2019 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हुआ, जहाँ पहली किस्त जारी की गई, जबकि योजना 1 दिसंबर 2018 से प्रभावी मानी गई। यह भूमिधारक किसान परिवार को वर्ष में छह हजार रुपये, दो-दो हजार की तीन किस्तों में देती है। A गलत है, क्योंकि राज्य की राजधानी लखनऊ इस योजना का शुभारंभ स्थल नहीं थी। C गलत है, क्योंकि प्रयागराज उस काल के कुंभ तथा अन्य घोषणाओं से जुड़ा है, पीएम-किसान से नहीं। D गलत है, क्योंकि अनेक योजनाओं के शुभारंभ का स्थल होने पर भी वाराणसी से यह योजना आरंभ नहीं हुई। स्थान और योजना का मिलान याद रखें, क्योंकि प्रश्नपत्र गोरखपुर और वाराणसी को आपस में बदल देते हैं।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 16 Oct 2018, Shift 2मध्यम

राष्ट्रीय केसर मिशन निम्नलिखित में से किसकी उप-योजना के रूप में आरंभ किया गया था?

  1. A.कौशल विकास योजना
  2. B.कृषि विकास योजना
  3. C.अंत्योदय योजना
  4. D.ग्राम ज्योति योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कृषि विकास योजना

व्याख्या

सही उत्तर B, कृषि विकास योजना है। जम्मू-कश्मीर में बेहतर कंद, सिंचाई और मसाला पार्क के माध्यम से केसर की खेती को पुनर्जीवित करने वाला राष्ट्रीय केसर मिशन राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की उप-योजना के रूप में चलता है, जो 2007 में आरंभ वह छत्र कोष है जिससे राज्य अपनी कृषि परियोजनाएँ बनाते हैं। A गलत है, क्योंकि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना कौशल विकास मंत्रालय की प्रशिक्षण योजना है। C गलत है, क्योंकि अंत्योदय अन्न योजना सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सबसे निर्धन परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा योजना है। D गलत है, क्योंकि दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना ग्रामीण विद्युतीकरण और कृषि विद्युत आपूर्ति के लिए फीडर पृथक्करण से संबंधित है। फसल विशेष मिशन सामान्यतः बड़ी छत्र योजनाओं के घटक होते हैं, इसलिए उन्हें मूल योजना तक जोड़कर याद करें।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

पीएम-किसान के अंतर्गत पात्र किसान परिवार को वर्ष में कितनी आय सहायता मिलती है?

  1. A.दो किस्तों में 4,000 रुपये
  2. B.तीन किस्तों में 6,000 रुपये
  3. C.तीन किस्तों में 9,000 रुपये
  4. D.चार किस्तों में 12,000 रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीन किस्तों में 6,000 रुपये

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन किस्तों में छह हजार रुपये है। पीएम-किसान प्रत्येक पात्र भूमिधारक किसान परिवार को हर चार महीने में दो हजार रुपये, अर्थात वर्ष में छह हजार रुपये, आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे देती है; पूरा व्यय संघ सरकार उठाती है, क्योंकि यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। आयकरदाता, संस्थागत भूमिधारक तथा कुछ सरकारी कर्मचारी और पेशेवर इससे बाहर हैं। A, C और D गलत हैं, क्योंकि इनमें राशि या किस्तों की संख्या बदल दी गई है और दोनों आँकड़े साथ पूछे जाते हैं। मिलती-जुलती संख्याएँ अलग-अलग याद रखें: पीएम-किसान में वर्ष के छह हजार रुपये, किसान मानधन योजना में साठ वर्ष के बाद तीन हजार रुपये मासिक पेंशन, और फसल बीमा योजना में खरीफ फसलों पर दो प्रतिशत प्रीमियम। इन तीनों आँकड़ों को एक साथ याद रखने पर विकल्पों का भ्रम नहीं होता।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ की खाद्य फसलों पर किसान बीमित राशि का कितना भाग प्रीमियम के रूप में देता है?

  1. A.1.5 प्रतिशत
  2. B.2 प्रतिशत
  3. C.5 प्रतिशत
  4. D.10 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर B, दो प्रतिशत है। इस योजना ने किसान के लिए एक समान अधिकतम प्रीमियम तय किया: खरीफ की खाद्य तथा तिलहन फसलों पर बीमित राशि का दो प्रतिशत, रबी की खाद्य तथा तिलहन फसलों पर डेढ़ प्रतिशत और वार्षिक वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों पर पाँच प्रतिशत, और शेष बीमांकिक प्रीमियम संघ तथा राज्य सरकारें बाँटती हैं। A गलत है, क्योंकि डेढ़ प्रतिशत रबी की दर है, जो इस प्रश्न का आम भ्रम है। C गलत है, क्योंकि पाँच प्रतिशत कपास और आलू जैसी वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों पर लगता है। D गलत है, क्योंकि योजना की किसी श्रेणी में किसान से दस प्रतिशत नहीं लिया जाता। यह भी याद रखें कि योजना खरीफ 2016 से आरंभ हुई, जिसने राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना का स्थान लिया, और 2020 से नामांकन स्वैच्छिक है।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का शुभारंभ 2015 में किस स्थान से हुआ था?

  1. A.सूरतगढ़, राजस्थान
  2. B.सीहोर, मध्य प्रदेश
  3. C.गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
  4. D.आनंद, गुजरात
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सूरतगढ़, राजस्थान

व्याख्या

सही उत्तर A, राजस्थान का सूरतगढ़ है। यह योजना 19 फरवरी 2015 को श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ से आरंभ हुई और प्रत्येक जोत को ऐसा कार्ड देती है जिसमें मुख्य पोषक तत्वों की स्थिति तथा मृदा के भौतिक गुण और फसलवार उर्वरक एवं खाद की सलाह होती है; यह नियत चक्र पर नया बनता है, जिससे किसान असंतुलन सुधार सके और यूरिया का अपव्यय घटा सके। B गलत है, क्योंकि सीहोर अन्य कृषि कार्यक्रमों से जुड़ा है, इस शुभारंभ से नहीं। C गलत है, क्योंकि गोरखपुर फरवरी 2019 में पीएम-किसान के शुभारंभ का स्थल है, जो इस प्रश्न का सबसे आम भ्रम है। D गलत है, क्योंकि गुजरात का आनंद दुग्ध सहकारी आंदोलन और अमूल का केंद्र माना जाता है, मृदा स्वास्थ्य कार्ड का नहीं। प्रत्येक योजना के साथ स्थान और वर्ष जोड़कर याद रखें।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

भारत में कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश कौन-सा निकाय करता है?

  1. A.भारतीय खाद्य निगम
  2. B.कृषि लागत एवं मूल्य आयोग
  3. C.नीति आयोग
  4. D.राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग

व्याख्या

सही उत्तर B, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग है। 1965 में कृषि मूल्य आयोग के रूप में गठित और 1985 में नया नाम पाने वाला यह निकाय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का संबद्ध कार्यालय है, जो उत्पादन लागत का अध्ययन करके अधिदेशित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश करता है; अंतिम निर्णय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति लेती है। A गलत है, क्योंकि 1965 में बना भारतीय खाद्य निगम घोषित मूल्य पर अनाज की खरीद, भंडारण और परिवहन करता है, मूल्य तय नहीं करता। C गलत है, क्योंकि नीति आयोग नीति विषयक संस्था है, जिसके पास मूल्य निर्धारण की शक्ति नहीं है। D गलत है, क्योंकि 1982 में स्थापित नाबार्ड ग्रामीण ऋण और पुनर्वित्त की शीर्ष संस्था है। यह भी याद रखें कि गन्ने को न्यूनतम समर्थन मूल्य के स्थान पर गन्ना नियंत्रण आदेश के अंतर्गत उचित एवं लाभकारी मूल्य मिलता है।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

अप्रैल 2016 में आरंभ ई-नाम क्या है?

  1. A.फसल बीमा पोर्टल
  2. B.कृषि मंडियों को जोड़ने वाला ऑनलाइन व्यापार मंच
  3. C.मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का तंत्र
  4. D.कृषि यंत्रीकरण की योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कृषि मंडियों को जोड़ने वाला ऑनलाइन व्यापार मंच

व्याख्या

सही उत्तर B, कृषि मंडियों को जोड़ने वाला ऑनलाइन व्यापार मंच है। इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार 14 अप्रैल 2016 को आरंभ हुआ, जिसका उद्देश्य राज्यों की विनियमित मंडियों को एक ही इंटरनेट मंच पर जोड़ना है, जिससे कहीं भी बैठा व्यापारी जाँच के बाद किसी लॉट पर बोली लगा सके; इससे किसान का बाजार चौड़ा होता है और स्थानीय खरीदारों की पकड़ घटती है। इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत लघु कृषक कृषि व्यापार संघ चलाता है। A गलत है, क्योंकि फसल बीमा का काम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल से होता है। C गलत है, क्योंकि मृदा परीक्षण मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और उसकी प्रयोगशालाओं का कार्य है। D गलत है, क्योंकि कृषि यंत्रीकरण के लिए अलग उप-मिशन है, जिसमें मशीनों के किराया केंद्र बनते हैं।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

किसान क्रेडिट कार्ड योजना आर. वी. गुप्ता समिति की सिफारिश पर किस वर्ष आरंभ हुई?

  1. A.1991
  2. B.1998
  3. C.2004
  4. D.2014
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1998

व्याख्या

सही उत्तर B, 1998 है। आर. वी. गुप्ता समिति की रिपोर्ट पर यह योजना 1998 में आरंभ हुई और नाबार्ड ने वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा सहकारी बैंकों के लिए इसका प्रतिरूप तैयार किया। यह किसान को बीज, उर्वरक और खेती के अन्य खर्च के लिए घूमती ऋण सीमा देती है, जिसके साथ साधारण पासबुक या कार्ड रहता है, और आगे इसे निवेश ऋण तथा पशुपालन एवं मत्स्य पालन तक बढ़ाया गया। A गलत है, क्योंकि 1991 आर्थिक सुधारों और वित्तीय तंत्र पर नरसिंहम समिति का वर्ष है। C गलत है, क्योंकि 2004 किसान कॉल सेंटर और कृषि ऋण दोगुना करने के कार्यक्रम से जुड़ा है। D गलत है, क्योंकि 2014 जन धन योजना और बागवानी मिशन का वर्ष है। इस कार्ड के फसल ऋण पर ब्याज अनुदान तथा समय पर भुगतान की छूट भी मिलती है।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

हर खेत को पानी और पर ड्रॉप मोर क्रॉप किस योजना के घटक हैं?

  1. A.प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
  2. B.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
  3. C.राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
  4. D.परंपरागत कृषि विकास योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

व्याख्या

सही उत्तर A, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना है। 2015 में आरंभ यह योजना सिंचाई के कार्य को एक छत्र के नीचे लाती है, जिसमें बड़ी तथा मध्यम परियोजनाओं के लिए त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम, नए स्रोत बनाने के लिए हर खेत को पानी, टपक तथा फुहार सूक्ष्म सिंचाई के लिए पर ड्रॉप मोर क्रॉप और वर्षा आश्रित क्षेत्रों के लिए जलग्रहण विकास शामिल हैं। B गलत है, क्योंकि 2007 की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना राज्यों की कृषि योजनाओं के लिए लचीला कोष है और केसर मिशन जैसी उप-योजनाओं की मूल योजना है। C गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन चावल, गेहूँ, दलहन और मोटे अनाज के उत्पादन पर काम करता है। D गलत है, क्योंकि परंपरागत कृषि विकास योजना समूहों में जैविक खेती को बढ़ावा देती है। योजनाओं के नारे बहुत पूछे जाते हैं, इसलिए उन्हें मूल योजना के साथ याद करें।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अंतर्गत लघु या सीमांत किसान को साठ वर्ष की आयु के बाद कितनी मासिक पेंशन का आश्वासन है?

  1. A.1,000 रुपये
  2. B.2,000 रुपये
  3. C.3,000 रुपये
  4. D.5,000 रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 3,000 रुपये

व्याख्या

सही उत्तर C, तीन हजार रुपये मासिक है। 2019 में आरंभ यह योजना अठारह से चालीस वर्ष के लघु और सीमांत किसानों के लिए स्वैच्छिक तथा अंशदायी पेंशन व्यवस्था है; किसान प्रवेश की आयु के अनुसार मासिक अंशदान देता है, संघ सरकार उतना ही अंशदान करती है, और साठ वर्ष के बाद तीन हजार रुपये मासिक पेंशन आरंभ होती है, जिसमें जीवनसाथी को उसकी आधी राशि पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलती है। A गलत है, क्योंकि एक हजार रुपये का आँकड़ा अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशनों से जोड़ा जाता है। B गलत है, क्योंकि दो हजार रुपये पीएम-किसान की एक किस्त है, पेंशन नहीं। D गलत है, क्योंकि केंद्र की किसी किसान पेंशन योजना में पाँच हजार रुपये मासिक का आश्वासन नहीं है। अंशदान के इसी ढाँचे का उपयोग व्यापारियों तथा असंगठित श्रमिकों के लिए भी होता है।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

2015 में आरंभ परंपरागत कृषि विकास योजना किस प्रकार की खेती को बढ़ावा देती है?

  1. A.समूहों में जैविक खेती
  2. B.निर्यात के लिए अनुबंध खेती
  3. C.हरितगृहों में पुष्प कृषि
  4. D.यंत्रीकृत शुष्क भूमि खेती
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. समूहों में जैविक खेती

व्याख्या

सही उत्तर A, समूहों में जैविक खेती है। राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के घटक के रूप में यह योजना किसानों को समूहों में जोड़ती है, जैविक खेती के लिए प्रशिक्षण तथा सामग्री देती है और उपज को भारत की सहभागी गारंटी प्रणाली से प्रमाणित कराती है, जिसमें किसानों के समूह एक-दूसरे के खेतों की जाँच करके प्रमाण देते हैं। B गलत है, क्योंकि अनुबंध खेती राज्यों के कृषि बाजार कानूनों और आदर्श अधिनियमों से नियंत्रित होती है, इस योजना से नहीं। C गलत है, क्योंकि फूलों की संरक्षित खेती बागवानी के समेकित विकास मिशन के अंतर्गत आती है। D गलत है, क्योंकि शुष्क तथा वर्षा आश्रित खेती सतत कृषि मिशन के वर्षा आश्रित क्षेत्र विकास घटक के अंतर्गत है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए इसी विचार पर चलने वाला जैविक मूल्य शृंखला विकास मिशन भी याद रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-किसान के लिए कौन पात्र है?

वह प्रत्येक भूमिधारक किसान परिवार, जिसका नाम राज्य के भू-अभिलेख में है, क्योंकि दो हेक्टेयर की सीमा 2019 में हटा दी गई। आयकरदाता, संस्थागत भूमिधारक, निर्धारित वेतन से ऊपर के सेवारत तथा सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, निर्वाचित प्रतिनिधि और पेशेवर इससे बाहर हैं।

फसल बीमा में किसान कितना प्रीमियम देता है?

खरीफ की खाद्य तथा तिलहन फसलों पर बीमित राशि का दो प्रतिशत, रबी की खाद्य तथा तिलहन फसलों पर डेढ़ प्रतिशत और वार्षिक वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों पर पाँच प्रतिशत; शेष संघ और राज्य बाँटते हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य कौन तय करता है?

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग उत्पादन लागत का अध्ययन करके सिफारिश करता है और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति घोषणा करती है। खरीद भारतीय खाद्य निगम तथा राज्य एजेंसियाँ करती हैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग क्या है?

यह किसी जोत की मृदा के मुख्य पोषक तत्वों और भौतिक गुणों की स्थिति बताता है और फसलवार सलाह देता है कि कितना उर्वरक तथा खाद डालें, जिससे लागत बचती है और यूरिया का अत्यधिक उपयोग घटता है।

ई-नाम किसान की कैसे सहायता करता है?

यह विनियमित मंडियों की उपज को एक ऑनलाइन मंच पर रखता है, जहाँ जाँच के बाद देश में कहीं का व्यापारी बोली लगा सकता है, इसलिए किसान को व्यापक बाजार और उचित मूल्य की बेहतर संभावना मिलती है।

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