श्रम संहिताएं और सामाजिक सुरक्षा: मुख्य प्रावधान
परीक्षा नोट्स: भारत की चार श्रम संहिताएं, उनमें समाहित उनतीस कानून, मजदूरी, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कार्य दशा के प्रावधान तथा श्रमिक योजनाएं।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

श्रम समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए संसद और राज्य विधानमंडल दोनों इस पर कानून बना सकते हैं: प्रविष्टि 22 में श्रमिक संघ तथा औद्योगिक विवाद, प्रविष्टि 23 में सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा तथा प्रविष्टि 24 में श्रम कल्याण आता है। एक शताब्दी में इससे दर्जनों केंद्रीय अधिनियम बने, जिनमें प्रत्येक की अपनी परिभाषाएं, पंजियां, विवरणियां और निरीक्षक थे। इसलिए संसद ने उनतीस केंद्रीय श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समाहित किया, मजदूरी संहिता 2019 में और शेष तीन 2020 में पारित हुईं। संवैधानिक पृष्ठभूमि नीति निदेशक तत्व हैं: अनुच्छेद 39 में जीविका के पर्याप्त साधन तथा समान कार्य के लिए समान वेतन, अनुच्छेद 41 में काम का अधिकार, अनुच्छेद 42 में काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाएं तथा प्रसूति सहायता, अनुच्छेद 43 में निर्वाह मजदूरी और बयालीसवें संशोधन से जोड़े गए अनुच्छेद 43क में प्रबंध में श्रमिकों की भागीदारी। अनुच्छेद 23 बलात श्रम का और अनुच्छेद 24 कारखानों, खानों तथा संकटपूर्ण कार्य में चौदह वर्ष से कम आयु के बालकों के नियोजन का निषेध करता है।
चार संहिताएं और उनमें समाहित कानून
| संहिता | वर्ष | समाहित कानून |
|---|---|---|
| मजदूरी संहिता | 2019 | चार: मजदूरी संदाय अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, बोनस संदाय अधिनियम 1965, समान प्रतिफल अधिनियम 1976 |
| औद्योगिक संबंध संहिता | 2020 | तीन: श्रमिक संघ अधिनियम 1926, औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम 1946, औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 |
| सामाजिक सुरक्षा संहिता | 2020 | नौ, जिनमें कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948, प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम 1961, उपदान संदाय अधिनियम 1972 और कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम 1923 |
| व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता | 2020 | तेरह, जिनमें कारखाना अधिनियम 1948, खान अधिनियम 1952, ठेका श्रम अधिनियम 1970 और अंतर्राज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम 1979 |
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने चारों संहिताओं का प्रवर्तन 21 नवंबर 2025 से अधिसूचित किया, इसलिए अब पुराने अधिनियम नहीं, ये संहिताएं ही भारतीय श्रम कानून का ढांचा हैं; इनके अंतर्गत नियम केंद्र और प्रत्येक राज्य अलग-अलग अधिसूचित करते हैं, क्योंकि श्रम समवर्ती विषय है।
मजदूरी संहिता, 2019
यह संहिता न्यूनतम मजदूरी और समय पर भुगतान के अधिकार को सार्वभौमिक बनाती है: इसमें संगठित तथा असंगठित दोनों क्षेत्रों का प्रत्येक कर्मचारी आता है, जबकि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम केवल अनुसूचित नियोजनों पर लागू था। केंद्र सरकार श्रमिक के न्यूनतम जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए निचली मजदूरी अर्थात फ्लोर वेज तय करती है और कोई राज्य उससे कम न्यूनतम मजदूरी नहीं रख सकता; न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा पाँच वर्ष से अधिक के अंतराल पर नहीं होगी। संहिता चारों प्रयोजनों के लिए मजदूरी की एक ही परिभाषा देती है और उससे बाहर रखे जाने वाले अंशों को सीमित करती है, जिससे वेतन को भत्तों में बाँटकर भविष्य निधि और उपदान घटाया न जा सके। यह मजदूरी तथा भर्ती में लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध करती है, मजदूरी अवधि तय करती है, बकाया मजदूरी के दावे के लिए तीन वर्ष का समय देती है और केंद्रीय तथा राज्य सलाहकार बोर्डों का उपबंध करती है, जिनमें एक तिहाई स्थान महिलाओं के लिए हैं।
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
यह संहिता श्रमिक संघ, स्थायी आदेश, हड़ताल, छंटनी, कर्मचारी कटौती और बंदी को नियंत्रित करती है। तीन सौ या अधिक श्रमिकों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान के लिए स्थायी आदेश आवश्यक हैं, और तीन सौ की यही संख्या वह सीमा है जिससे ऊपर छंटनी, कर्मचारी कटौती या बंदी के लिए नियोजक को समुचित सरकार की पूर्व अनुमति लेनी होती है, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम में सौ थी। चौदह दिन की सूचना के बिना कोई हड़ताल या तालाबंदी विधिपूर्ण नहीं है, और सुलह अथवा अधिकरण की कार्यवाही चलते समय इनकी अनुमति नहीं है। संहिता नियत अवधि नियोजन को मान्यता देती है, जिसमें समान कार्य करने वाले स्थायी श्रमिक के समान मजदूरी, घंटे और सुविधाएं तथा एक वर्ष की सेवा पर उपदान मिलता है। इक्यावन प्रतिशत श्रमिकों के समर्थन वाला संघ एकमात्र वार्ताकार संघ होता है, और ऐसा समर्थन किसी के पास न हो तो वार्ता परिषद बनती है। श्रमिक पुनः कौशल निधि बनाई गई है, जिसमें नियोजक छंटनी किए गए श्रमिक की पंद्रह दिन की मजदूरी जमा करता है, जो छंटनी के पैंतालीस दिन के भीतर उस श्रमिक को देनी होती है, तथा बीस या अधिक श्रमिकों वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान में शिकायत निवारण समिति अनिवार्य है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020
यही संहिता दायरा बढ़ाती है। केंद्रीय कानून में पहली बार गिग श्रमिक, प्लेटफॉर्म श्रमिक और एग्रीगेटर की परिभाषा दी गई है, तथा असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा निधि का उपबंध है, जिसमें एग्रीगेटर अपने कारोबार का एक से दो प्रतिशत देते हैं, परंतु यह राशि ऐसे श्रमिकों को किए गए भुगतान के पाँच प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन तथा कर्मचारी राज्य बीमा निगम दो स्तंभ बने हुए हैं: बीस या अधिक व्यक्तियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए भविष्य निधि, पेंशन और निक्षेप सहबद्ध बीमा, तथा दस या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए कर्मचारी राज्य बीमा से चिकित्सा और नकद लाभ, जो अब पूरे देश में लागू है, छोटे प्रतिष्ठानों के लिए स्वैच्छिक है और संकटपूर्ण प्रतिष्ठान में एक श्रमिक होने पर भी अनिवार्य है। प्रसूति प्रसुविधा छब्बीस सप्ताह बनी हुई है। नियत अवधि कर्मचारी को उपदान यथानुपात मिलता है, और श्रमिकों का पंजीकरण आधार आधारित है जिससे लाभ श्रमिक के साथ चलें।
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020
सुरक्षा संहिता तेरह अधिनियमों के स्थान पर प्रतिष्ठान के लिए एक पंजीकरण, एक लाइसेंस और एक विवरणी लाती है। प्रत्येक श्रमिक को औपचारिक नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य है, जो नियोजन का वह विधिक प्रमाण है जिसका असंगठित श्रमिकों के पास अभाव रहा। संहिता निर्धारित आयु से अधिक के श्रमिकों के निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण तथा पेयजल, शौचालय, शिशु गृह और कैंटीन जैसी कल्याण सुविधाओं का उपबंध करती है। अब कारखाना वह प्रतिष्ठान है जहाँ विद्युत शक्ति से विनिर्माण प्रक्रिया में बीस या अधिक श्रमिक हों, अथवा शक्ति के बिना चालीस या अधिक। महिलाएं प्रत्येक प्रतिष्ठान में और सभी प्रकार के कार्य में नियोजित हो सकती हैं, प्रातः छह बजे से पूर्व और सायं सात बजे के बाद भी, उनकी सहमति तथा सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के साथ। ठेका श्रम के प्रावधान वहाँ लागू होते हैं जहाँ पचास या अधिक ठेका श्रमिक लगे हों, और अंतर्राज्यिक प्रवासी कर्मकार, जिसकी परिभाषा में अब स्वयं आने वाला तथा अधिसूचित मजदूरी से कम कमाने वाला श्रमिक भी आता है, नियोजक से यात्रा भत्ता तथा मूल और गंतव्य दोनों राज्यों में लाभ पाने का अधिकारी है। दैनिक कार्य के घंटे आठ तक सीमित हैं, साप्ताहिक सीमा के साथ, और अधिसमय मजदूरी श्रमिक की सहमति से तथा सामान्य दर से दुगुनी दर पर देय है।
संहिताओं से आगे सामाजिक सुरक्षा
कई योजनाएं इन कानूनों के साथ चलती हैं। 2019 की प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना अठारह से चालीस वर्ष की आयु में जुड़ने वाले और पंद्रह हजार रुपये मासिक तक आय वाले असंगठित श्रमिक को साठ वर्ष के बाद तीन हजार रुपये मासिक पेंशन देती है, जिसमें अंशदान श्रमिक और सरकार आधा-आधा करते हैं। 2015 की अटल पेंशन योजना व्यापक अनौपचारिक क्षेत्र के लिए यही कार्य करती है, तथा 2015 की प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना कम प्रीमियम पर जीवन और दुर्घटना बीमा देती हैं। ई-श्रम पोर्टल असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय आँकड़ा आधार सार्वत्रिक खाता संख्या के साथ तैयार करता है। भारत 1919 में बने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का संस्थापक सदस्य है, जिसका मुख्यालय जेनेवा में है और जो सरकार, नियोजक तथा श्रमिक के त्रिपक्षीय आधार पर कार्य करता है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न संहिता और कानून के जोड़े, संख्याओं तथा परिभाषाओं पर आते हैं: किस संहिता में कितने अधिनियम समाहित हैं, श्रमिक संघ अधिनियम या कारखाना अधिनियम किस संहिता में है, तीन सौ, पचास, बीस, दस और चालीस की सीमाएं, हड़ताल की चौदह दिन की सूचना, पुनः कौशल निधि की पंद्रह दिन की मजदूरी, छब्बीस सप्ताह की प्रसूति प्रसुविधा तथा गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक की नई परिभाषाएं। जाल ये हैं: कारखाना अधिनियम को औद्योगिक संबंध संहिता में रख देना, निचली मजदूरी राज्यों द्वारा तय बताना, कर्मचारी कटौती की पुरानी सीमा सौ मान लेना, तथा भविष्य निधि की बीस और राज्य बीमा की दस की सीमा में भ्रम।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संवैधानिक सूची | समवर्ती सूची, सातवीं अनुसूची की प्रविष्टि 22, 23 और 24 |
|---|---|
| समाहित कानून | उनतीस केंद्रीय श्रम कानून, चार संहिताओं में |
| मजदूरी संहिता, 2019 | मजदूरी संदाय, न्यूनतम मजदूरी, बोनस संदाय तथा समान प्रतिफल अधिनियम समाहित |
| औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 | श्रमिक संघ अधिनियम 1926, स्थायी आदेश अधिनियम 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 समाहित |
| निचली मजदूरी | केंद्र सरकार तय करती है; कोई राज्य न्यूनतम मजदूरी उससे कम नहीं रख सकता |
| न्यूनतम मजदूरी समीक्षा | पाँच वर्ष से अधिक के अंतराल पर नहीं |
| पूर्व अनुमति की सीमा | छंटनी, कर्मचारी कटौती और बंदी के लिए तीन सौ श्रमिक |
| हड़ताल की सूचना | औद्योगिक संबंध संहिता में चौदह दिन |
| एकमात्र वार्ताकार संघ | वह संघ जिसका सदस्य इक्यावन प्रतिशत श्रमिक हों |
| पुनः कौशल निधि | छंटनी किए गए श्रमिक की पंद्रह दिन की मजदूरी, पैंतालीस दिन में देय |
| एग्रीगेटर अंशदान | कारोबार का एक से दो प्रतिशत, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के भुगतान के पाँच प्रतिशत तक |
| प्रसूति प्रसुविधा | छब्बीस सप्ताह |
| कारखाना की परिभाषा | शक्ति सहित बीस या अधिक श्रमिक, शक्ति रहित चालीस या अधिक |
| ठेका श्रम | प्रावधान वहाँ लागू जहाँ पचास या अधिक ठेका श्रमिक हों |
| प्रवर्तन | चारों संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी |
| प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन | अठारह से चालीस वर्ष में जुड़ने वाले असंगठित श्रमिक को साठ के बाद तीन हजार रुपये मासिक पेंशन |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत की चार श्रम संहिताओं में कितने केंद्रीय श्रम कानून समाहित किए गए हैं?
- A.बारह
- B.उनतीस
- C.चौवालीस
- D.बावन
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व्याख्या
सही उत्तर B, उनतीस है। चार संहिताओं में उनतीस केंद्रीय श्रम अधिनियम समाहित हैं: मजदूरी संहिता में चार, औद्योगिक संबंध संहिता में तीन, सामाजिक सुरक्षा संहिता में नौ और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता में तेरह। विकल्प A गलत है क्योंकि बारह इस संख्या से बहुत कम है और किसी चरण से मेल नहीं खाता। विकल्प C आकर्षक अंक होने पर भी गलत है, क्योंकि सुधार से पहले विधि पुस्तक पर विद्यमान केंद्रीय श्रम कानूनों की संख्या अक्सर चौवालीस बताई जाती थी, संहिताओं में समाहित कानूनों की नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि बावन किसी भी आँकड़े से मेल नहीं खाता। याद रखने का सरल सूत्र चार, तीन, नौ और तेरह का क्रम है, जो जोड़कर उनतीस बनता है और प्रत्येक संहिता का आकार भी बता देता है।
श्रमिक संघ अधिनियम 1926, औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम 1946 तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 किस संहिता में समाहित किए गए हैं?
- A.मजदूरी संहिता, 2019
- B.औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
- C.सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020
- D.व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020
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व्याख्या
सही उत्तर B, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 है। ये तीनों अधिनियम संघों के पंजीकरण, स्थायी आदेश के रूप में प्रकाशित सेवा शर्तों तथा विवाद, छंटनी, कर्मचारी कटौती और बंदी की व्यवस्था से संबंधित थे, और अब ये तीनों विषय एक ही संहिता में हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि मजदूरी संहिता में मजदूरी संदाय, न्यूनतम मजदूरी, बोनस संदाय और समान प्रतिफल अधिनियम आते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि सामाजिक सुरक्षा संहिता में भविष्य निधि, राज्य बीमा, प्रसूति प्रसुविधा, उपदान और प्रतिकर के कानून आते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि सुरक्षा संहिता में कारखाना अधिनियम, खान अधिनियम, ठेका श्रम अधिनियम और अंतर्राज्यिक प्रवासी कर्मकार अधिनियम आदि आते हैं। प्रत्येक संहिता के तीन बड़े अधिनियम याद रखना ऐसे प्रश्नों का सबसे तेज हल है। इन तीनों अधिनियमों के वर्ष 1926, 1946 और 1947 भी परीक्षा में अलग-अलग पूछे जाते हैं, इसलिए संहिता के साथ उनके वर्ष भी स्मरण रखें।
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत छंटनी, कर्मचारी कटौती या बंदी के लिए नियोजक को समुचित सरकार की पूर्व अनुमति कब लेनी होती है?
- A.पचास श्रमिक होने पर
- B.सौ श्रमिक होने पर
- C.दो सौ श्रमिक होने पर
- D.तीन सौ श्रमिक होने पर
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व्याख्या
सही उत्तर D, तीन सौ श्रमिक होने पर है। संहिता ने यह सीमा पहले की संख्या से बढ़ाई है और तीन सौ को ही वह बिंदु भी बनाया है जहाँ से प्रमाणित स्थायी आदेश अनिवार्य हो जाते हैं, इसलिए एक ही संख्या दो प्रावधानों में काम आती है। विकल्प A गलत है क्योंकि पचास सुरक्षा संहिता के ठेका श्रम प्रावधानों की सीमा है, जो भिन्न विषय है। विकल्प B गलत है क्योंकि सौ औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अध्याय पाँच-ख की सीमा थी, जिसे संहिता ने प्रतिस्थापित किया; पुरानी सामग्री से पढ़ने वाले यही चुनते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि दो सौ किसी संहिता में नहीं आता। दोनों पक्षों के तर्क भी जानने चाहिए: नियोजक इसे भर्ती और समायोजन की लचीलता कहते हैं, श्रमिक संघ इसे कटौती से संरक्षण का क्षरण कहते हैं।
गिग श्रमिक, प्लेटफॉर्म श्रमिक और एग्रीगेटर की परिभाषा केंद्रीय कानून में पहली बार किस संहिता ने दी?
- A.सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020
- B.मजदूरी संहिता, 2019
- C.औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
- D.व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020
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व्याख्या
सही उत्तर A, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 है। यह गिग श्रमिक को उस व्यक्ति के रूप में परिभाषित करती है जो परंपरागत नियोजक-कर्मचारी संबंध से बाहर कार्य करता है, प्लेटफॉर्म श्रमिक को उस व्यक्ति के रूप में जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से काम पाता है, और एग्रीगेटर को उस डिजिटल मध्यस्थ के रूप में जो क्रेता और विक्रेता को जोड़ता है, तथा ऐसे श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा निधि का उपबंध करती है। विकल्प B गलत है क्योंकि मजदूरी संहिता न्यूनतम मजदूरी, बोनस और मजदूरी संदाय से संबंधित है, यद्यपि सभी कर्मचारियों पर लागू होने से उसका लाभ अनौपचारिक श्रमिकों को भी मिलता है। विकल्प C गलत है क्योंकि औद्योगिक संबंध संहिता संघ, स्थायी आदेश और विवाद देखती है। विकल्प D गलत है क्योंकि सुरक्षा संहिता पंजीकरण, सुरक्षा, घंटे और कल्याण सुविधाओं से संबंधित है।
मजदूरी संहिता, 2019 के अंतर्गत निचली मजदूरी अर्थात फ्लोर वेज कौन तय करता है?
- A.प्रत्येक राज्य सरकार अपने क्षेत्र के लिए
- B.केंद्र सरकार
- C.भारतीय रिजर्व बैंक
- D.पंद्रहवां वित्त आयोग
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व्याख्या
सही उत्तर B, केंद्र सरकार है। वह श्रमिक के न्यूनतम जीवन स्तर को ध्यान में रखकर निचली मजदूरी तय करती है और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए भिन्न निचली मजदूरी रख सकती है; इसके बाद कोई राज्य उससे कम न्यूनतम मजदूरी नहीं रख सकता। विकल्प A गलत है क्योंकि राज्य न्यूनतम मजदूरी तय करते हैं, निचली मजदूरी नहीं, और राष्ट्रीय स्तर रखने का उद्देश्य ही राज्यों के बीच मजदूरी घटाने की होड़ रोकना है। विकल्प C गलत है क्योंकि रिजर्व बैंक का कार्य मौद्रिक नीति, मुद्रा और बैंकिंग विनियमन है, मजदूरी निर्धारण नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि वित्त आयोग संघ और राज्यों के बीच पाँच वर्ष के लिए करों तथा अनुदानों के बंटवारे की सिफारिश करता है। न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा पाँच वर्ष से अधिक के अंतराल पर नहीं होती।
संविधान की सातवीं अनुसूची में श्रम, श्रमिक संघ और सामाजिक सुरक्षा किस सूची में आते हैं?
- A.संघ सूची
- B.राज्य सूची
- C.समवर्ती सूची
- D.संसद की अवशिष्ट शक्तियां
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व्याख्या
सही उत्तर C, समवर्ती सूची है। प्रविष्टि 22 में श्रमिक संघ तथा औद्योगिक और श्रम विवाद, प्रविष्टि 23 में रोजगार तथा बेरोजगारी सहित सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा, और प्रविष्टि 24 में कार्य दशाओं तथा भविष्य निधि सहित श्रम कल्याण आता है, इसलिए संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं और प्रत्येक राज्य संहिताओं के अंतर्गत अपने नियम अधिसूचित करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि संघ सूची में प्रतिरक्षा, विदेश मामले, रेल और बैंकिंग जैसे विषय हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि राज्य सूची में लोक व्यवस्था, पुलिस, भूमि, कृषि और लोक स्वास्थ्य आते हैं, यद्यपि श्रम कल्याण को भ्रमवश वहाँ रख दिया जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 248 की अवशिष्ट शक्तियां केवल उन विषयों पर लागू होती हैं जो तीनों सूचियों में नहीं हैं।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत प्रसूति प्रसुविधा कितनी अवधि के लिए उपलब्ध है?
- A.बारह सप्ताह
- B.सोलह सप्ताह
- C.छब्बीस सप्ताह
- D.बावन सप्ताह
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व्याख्या
सही उत्तर C, छब्बीस सप्ताह है। प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 में मूलतः बारह सप्ताह का उपबंध था; 2017 के संशोधन ने पहले दो बच्चों के लिए इसे छब्बीस सप्ताह किया और सामाजिक सुरक्षा संहिता उसी प्रावधान को आगे ले जाती है, बड़े प्रतिष्ठानों में शिशु गृह की सुविधा के साथ। विकल्प A गलत है क्योंकि बारह सप्ताह पुराना हक है और अब केवल कानून में बताई सीमित स्थितियों में लागू होता है, जैसे दो या अधिक जीवित संतान वाली महिला के मामले में। विकल्प B गलत है क्योंकि सोलह सप्ताह किसी भारतीय प्रावधान से मेल नहीं खाता। विकल्प D गलत है क्योंकि बावन सप्ताह अर्थात पूरा वर्ष कुछ अन्य देशों की आंशिक अवैतनिक व्यवस्था है, भारत का आँकड़ा कभी नहीं रहा। यह लाभ औसत दैनिक मजदूरी की दर से मिलता है।
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020 के अंतर्गत कोई प्रतिष्ठान कारखाना कब माना जाता है?
- A.शक्ति सहित दस और शक्ति रहित बीस श्रमिक
- B.शक्ति सहित बीस और शक्ति रहित चालीस श्रमिक
- C.शक्ति सहित तीस और शक्ति रहित साठ श्रमिक
- D.पचास श्रमिक, शक्ति के प्रयोग से निरपेक्ष
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व्याख्या
सही उत्तर B, शक्ति सहित बीस और शक्ति रहित चालीस श्रमिक है। संहिता ने कारखाना अधिनियम, 1948 की सीमाएं दुगुनी कर दी हैं; तर्क यह दिया गया कि छोटी इकाइयों पर बड़ी इकाइयों के अनुपालन का बोझ था, जबकि आलोचना यह है कि अनेक श्रमिक अब कारखाना प्रावधानों से बाहर हो गए। विकल्प A गलत है क्योंकि दस और बीस कारखाना अधिनियम, 1948 के आँकड़े थे, और यही इस प्रश्न का जाल है। विकल्प C गलत है क्योंकि तीस और साठ संहिता में कहीं नहीं हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि कारखाना की परिभाषा आज भी इस पर निर्भर है कि विनिर्माण प्रक्रिया में शक्ति का प्रयोग होता है या नहीं; पचास की संख्या ठेका श्रम प्रावधानों की सीमा है। यही संहिता प्रत्येक श्रमिक के लिए नियुक्ति पत्र भी अनिवार्य करती है।
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत हड़ताल या तालाबंदी से पूर्व कितने दिन की सूचना देना आवश्यक है?
- A.सात दिन
- B.चौदह दिन
- C.तीस दिन
- D.साठ दिन
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व्याख्या
सही उत्तर B, चौदह दिन है। पहले जो आवश्यकता केवल लोक उपयोगी सेवाओं तक सीमित थी, उसे संहिता सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर लागू करती है: चौदह दिन की सूचना के बिना कोई व्यक्ति हड़ताल पर नहीं जाएगा और कोई नियोजक तालाबंदी घोषित नहीं करेगा, तथा हड़ताल उस सूचना के साठ दिन के भीतर आरंभ होनी चाहिए। सुलह कार्यवाही लंबित रहते तथा अधिकरण की कार्यवाही के बाद एक अवधि तक हड़ताल वर्जित है। विकल्प A गलत है क्योंकि सात दिन सुलह कार्यवाही की समाप्ति के बाद की अवधि से संबंधित है, सूचना से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि तीस दिन अन्य श्रम प्रावधानों, जैसे कर्मचारी कटौती की सूचना, से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि साठ दिन वह बाहरी सीमा है जिसके भीतर हड़ताल आरंभ होनी चाहिए।
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अंतर्गत छंटनी किए गए श्रमिक के लिए श्रमिक पुनः कौशल निधि में नियोजक का अंशदान कितना है?
- A.श्रमिक की अंतिम आहरित पंद्रह दिन की मजदूरी
- B.श्रमिक की अंतिम आहरित एक माह की मजदूरी
- C.श्रमिक की अंतिम आहरित तीन माह की मजदूरी
- D.केंद्र सरकार द्वारा प्रति वर्ष तय एक निश्चित राशि
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, अंतिम आहरित पंद्रह दिन की मजदूरी है। संहिता श्रमिक पुनः कौशल निधि बनाती है, जिसमें नियोजक प्रत्येक छंटनी किए गए श्रमिक के लिए पंद्रह दिन की मजदूरी देता है, और यह राशि छंटनी के पैंतालीस दिन के भीतर उस श्रमिक के खाते में जमा होनी चाहिए जिससे नया काम खोजते समय वह उपयोग में आ सके। विकल्प B गलत है क्योंकि एक माह की मजदूरी वह सूचना के बदले वेतन है जो कर्मचारी कटौती पर देय हो सकता है, जो अलग भुगतान है। विकल्प C गलत है क्योंकि तीन माह की मजदूरी संहिता के किसी प्रावधान से मेल नहीं खाती। विकल्प D गलत है क्योंकि अंशदान श्रमिक की अपनी अंतिम मजदूरी से मापा जाता है, राष्ट्रीय स्तर पर तय निश्चित राशि से नहीं। यह प्रावधान नया है; औद्योगिक विवाद अधिनियम में कोई पुनः कौशल निधि नहीं थी।
उद्यमों के प्रबंध में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश देने वाला अनुच्छेद 43क किस संशोधन से जोड़ा गया?
- A.24वां संशोधन, 1971
- B.42वां संशोधन, 1976
- C.44वां संशोधन, 1978
- D.86वां संशोधन, 2002
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 42वां संशोधन, 1976 है। इसने कई नीति निदेशक तत्व जोड़े, जिनमें औद्योगिक उद्यमों के प्रबंध में श्रमिकों की भागीदारी वाला अनुच्छेद 43क, समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता वाला अनुच्छेद 39क तथा पर्यावरण संरक्षण वाला अनुच्छेद 48क सम्मिलित हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 1971 के 24वें संशोधन ने संविधान के किसी भी भाग में संशोधन की संसद की शक्ति की पुष्टि की। विकल्प C गलत है क्योंकि 1978 के 44वें संशोधन ने आपातकाल के अनेक परिवर्तन हटाए और संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों से बाहर किया। विकल्प D गलत है क्योंकि 2002 के 86वें संशोधन ने शिक्षा के अधिकार का अनुच्छेद 21क जोड़ा। काम के अधिकार, मानवीय दशाओं और निर्वाह मजदूरी वाले अनुच्छेद 41, 42 और 43 आरंभ से संविधान में थे।
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के अंतर्गत पात्र असंगठित श्रमिक को साठ वर्ष की आयु के बाद कितनी मासिक पेंशन मिलती है?
- A.एक हजार रुपये
- B.दो हजार रुपये
- C.तीन हजार रुपये
- D.पाँच हजार रुपये
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, तीन हजार रुपये है। 2019 में आरंभ यह योजना अठारह से चालीस वर्ष की आयु तथा पंद्रह हजार रुपये मासिक तक आय वाले असंगठित श्रमिक के लिए है और साठ वर्ष के बाद तीन हजार रुपये मासिक की निश्चित पेंशन देती है, जिसमें श्रमिक और सरकार समान अंशदान करते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि एक हजार रुपये अटल पेंशन योजना का सबसे निचला स्तर है, जो भिन्न योजना है। विकल्प B गलत है क्योंकि दो हजार रुपये भी अटल पेंशन योजना का ही एक स्तर है। विकल्प D गलत है क्योंकि पाँच हजार रुपये अटल पेंशन योजना का सर्वोच्च स्तर है, जो दोनों योजनाओं को साथ पढ़ने वाले परीक्षार्थियों को भ्रमित करता है। दोनों योजनाएं पेंशन निधि नियामक की व्यवस्था से संचालित होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के केंद्रीय श्रम कानूनों के स्थान पर कौन सी चार संहिताएं आईं?
मजदूरी संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020; तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020। इनमें मिलाकर उनतीस केंद्रीय श्रम कानून समाहित हैं, और श्रम तथा रोजगार मंत्रालय ने चारों को 21 नवंबर 2025 से प्रभावी किया। इनके अंतर्गत नियम केंद्र तथा प्रत्येक राज्य अलग अधिसूचित करते हैं, क्योंकि श्रम समवर्ती सूची का विषय है।
निचली मजदूरी क्या है और उसे कौन तय करता है?
निचली मजदूरी वह राष्ट्रीय न्यूनतम स्तर है जिससे कम न्यूनतम मजदूरी कोई राज्य तय नहीं कर सकता। मजदूरी संहिता के अंतर्गत केंद्र सरकार श्रमिक के न्यूनतम जीवन स्तर को ध्यान में रखकर इसे तय करती है और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए भिन्न निचली मजदूरी रख सकती है। इसके बाद राज्य अपने क्षेत्र के कार्यों के लिए उसी स्तर पर या उससे ऊपर न्यूनतम मजदूरी तय करते हैं, जिसकी समीक्षा पाँच वर्ष से अधिक के अंतराल पर नहीं होती।
गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए क्या बदला?
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 केंद्रीय कानून में पहली बार गिग श्रमिक, प्लेटफॉर्म श्रमिक और एग्रीगेटर को परिभाषित करती है तथा असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा निधि का उपबंध करती है। एग्रीगेटर अपने वार्षिक कारोबार का एक से दो प्रतिशत इसमें देते हैं, जो ऐसे श्रमिकों को किए गए भुगतान के पाँच प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, और श्रमिक लाभ के लिए ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराते हैं।
औद्योगिक संबंध संहिता में तीन सौ श्रमिकों की संख्या क्यों महत्वपूर्ण है?
दो प्रावधान इस पर निर्भर हैं। तीन सौ या अधिक श्रमिकों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान में सेवा शर्तें बताने वाले प्रमाणित स्थायी आदेश अनिवार्य हैं, तथा तीन सौ या अधिक श्रमिकों वाले नियोजक को छंटनी, कर्मचारी कटौती या बंदी से पूर्व समुचित सरकार की अनुमति लेनी होती है। औद्योगिक विवाद अधिनियम में यह सीमा सौ थी, इसलिए यह परिवर्तन परीक्षा का प्रिय प्रश्न है।
नियुक्ति पत्र की अनिवार्यता श्रमिक के लिए क्या अर्थ रखती है?
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता के अंतर्गत प्रत्येक नियोजक को प्रत्येक कर्मचारी को औपचारिक नियुक्ति पत्र देना होता है। श्रमिक के लिए यह नियोजन, मजदूरी और सेवा शर्तों का दस्तावेजी प्रमाण है, जिससे भविष्य निधि, उपदान, बोनस या प्रतिकर का दावा संभव होता है। इसी के अभाव में अनौपचारिक श्रमिक अपने अधिकार लागू नहीं करा पाते थे।
स्रोत
- मजदूरी संहिता, 2019 तथा औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- चार श्रम संहिताओं के 21 नवंबर 2025 से कार्यान्वयन पर विज्ञप्ति — पत्र सूचना कार्यालय, श्रम और रोजगार मंत्रालय
- भारतीय आर्थिक विकास (कक्षा 11), रोजगार अध्याय — एनसीईआरटी





