मुद्रास्फीति और मूल्य सूचकांक: थोक, उपभोक्ता सूचकांक नोट्स
परीक्षा के लिए मुद्रास्फीति के नोट्स: अर्थ और प्रकार, थोक तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और आधार वर्ष, जीडीपी अपस्फीतिकारक और भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्य।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

मुद्रास्फीति किसी अर्थव्यवस्था में सामान्य मूल्य स्तर की निरंतर वृद्धि है, जो मुद्रा की क्रय शक्ति के गिरने के समान है। किसी एक वस्तु के दाम बढ़ना मुद्रास्फीति नहीं है; इसके लिए समय के साथ कीमतों का सामान्य स्तर बढ़ना आवश्यक है। इसका उल्टा, अर्थात सामान्य मूल्य स्तर का निरंतर गिरना, अपस्फीति कहलाता है। मजदूरी, ब्याज दर, महँगाई भत्ता और पूरी मौद्रिक नीति इन्हीं आँकड़ों से बँधी है, इसलिए परीक्षा में मुद्रास्फीति की माप उसकी परिभाषा जितनी ही महत्वपूर्ण है।
भारत में मुद्रास्फीति कैसे मापी जाती है
मुद्रास्फीति सूचकांकों के माध्यम से मापी जाती है। किसी आधार वर्ष में वस्तुओं और सेवाओं की एक टोकरी तय की जाती है, आधार वर्ष का मान 100 रखा जाता है, और बाद की अवधियों में उसी टोकरी की लागत की तुलना की जाती है। भारतीय मूल्य सूचकांक लास्पेयर्स सूत्र पर बनते हैं, जिसमें आधार वर्ष की मात्राएँ ही भार बनी रहती हैं। मुद्रास्फीति की दर पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में सूचकांक का प्रतिशत परिवर्तन होती है, इसीलिए इसे वार्षिक आधार पर दर कहा जाता है।
| सूचकांक | जारीकर्ता | वर्तमान शृंखला का आधार वर्ष | दायरा |
|---|---|---|---|
| थोक मूल्य सूचकांक | आर्थिक सलाहकार कार्यालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग | 2011-12 | थोक बाजार में बिकने वाली वस्तुएँ; सेवाएँ शामिल नहीं |
| उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त) | राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय | 2012 | ग्रामीण और शहरी परिवारों द्वारा खरीदी वस्तुएँ तथा सेवाएँ |
| औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता सूचकांक | श्रम ब्यूरो, श्रम और रोजगार मंत्रालय | 2016 | औद्योगिक श्रमिक परिवार; महँगाई भत्ते का आधार |
| कृषि तथा ग्रामीण श्रमिकों के लिए सूचकांक | श्रम ब्यूरो | 1986-87 | कृषि और ग्रामीण श्रमिक परिवार |
थोक मूल्य सूचकांक के तीन समूह हैं: प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन तथा ऊर्जा, और विनिर्मित उत्पाद, जिनमें सबसे बड़ा भार विनिर्मित उत्पादों का है। इसमें केवल वस्तुएँ गिनी जाती हैं, इसलिए बाल कटाई या विद्यालय शुल्क जैसी सेवा इसमें कभी नहीं आती। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खुदरा स्तर की कीमतें मापता है, सेवाओं को शामिल करता है और सबसे बड़ा भार खाद्य तथा पेय पदार्थों को देता है, इसीलिए सब्जी या अनाज के दाम बढ़ते ही यह तेजी से चढ़ जाता है। तीसरा माप जीडीपी अपस्फीतिकारक है, जो नाममात्र जीडीपी में वास्तविक जीडीपी का भाग देकर सौ से गुणा करने पर मिलता है; यह अर्थव्यवस्था में उत्पादित हर वस्तु और सेवा को समेटता है पर राष्ट्रीय आय के आँकड़ों के साथ ही आता है, इसलिए सबसे व्यापक होते हुए भी सबसे धीमा है।
मुद्रास्फीति के प्रकार
कारण के आधार पर दो मूल प्रकार हैं। माँग-जनित मुद्रास्फीति तब होती है जब कुल माँग वस्तुओं की पूर्ति से आगे निकल जाए, जैसे मुद्रा आपूर्ति, सरकारी व्यय या ऋण के तेजी से बढ़ने पर; कहा जाता है कि बहुत अधिक मुद्रा बहुत कम वस्तुओं के पीछे दौड़ रही है। लागत-जनित मुद्रास्फीति तब होती है जब उत्पादन की लागत बढ़े, जैसे कच्चे तेल के महँगा होने, मजदूरी बढ़ने या रुपये के गिरने से आयात महँगा होने पर; उत्पादक यह बोझ उपभोक्ता पर डाल देते हैं। संरचनात्मक मुद्रास्फीति भंडारण और परिवहन जैसी आपूर्ति की अड़चनों से जन्म लेती है। गति के आधार पर अर्थशास्त्री मंद, चलती, दौड़ती तथा अतिमुद्रास्फीति में अंतर करते हैं, जिसमें कीमतें इतनी तेजी से बढ़ती हैं कि मुद्रा का प्रयोग ही रुक जाता है; 1923 का जर्मनी और दो हजार के दशक का जिंबाब्वे इसके मानक उदाहरण हैं।
भ्रम पैदा करने वाले शब्द
- अपस्फीति: सामान्य मूल्य स्तर का निरंतर गिरना, जिसके साथ प्रायः माँग और उत्पादन भी घटता है।
- विस्फीति: मुद्रास्फीति की दर का घटना, यानी कीमतें बढ़ती तो हैं पर पहले से धीमी गति से।
- पुनर्स्फीति: अपस्फीति के बाद माँग और कीमतें बढ़ाने की सोची-समझी नीति।
- मुद्रास्फीतिजनित मंदी: ऊँची मुद्रास्फीति के साथ ठहराव, अर्थात कम वृद्धि और ऊँची बेरोजगारी।
- विषम स्फीति: कुछ ही वस्तुओं, जैसे खाद्य पदार्थों, की कीमतों में तीखी वृद्धि जबकि शेष स्थिर रहें।
- शीर्ष और मूल मुद्रास्फीति: शीर्ष मुद्रास्फीति पूरा सूचकांक है, जबकि मूल मुद्रास्फीति में खाद्य और ईंधन छोड़ दिए जाते हैं क्योंकि उनके दाम मौसम तथा वैश्विक बाजार से उछलते रहते हैं।
किसे लाभ, किसे हानि
मुद्रास्फीति चुपचाप आय का पुनर्वितरण कर देती है। ऋण लेने वाले को लाभ होता है क्योंकि वह उधार ली गई राशि से कम मूल्य की मुद्रा में चुकाता है, जबकि ऋण देने वाले को हानि होती है। पेंशनभोगी और ऐसे वेतनभोगी जिनका वेतन कीमतों से नहीं जुड़ा, नुकसान में रहते हैं; भूमि, सोना और शेयर जैसी वास्तविक परिसंपत्तियाँ रखने वालों को लाभ होता है। माल का भंडार रखने वाले उत्पादक और व्यापारी बढ़ती कीमतों से कमाते हैं। गरीब अपनी आय का अधिकांश भाग भोजन पर खर्च करते हैं, इसलिए मुद्रास्फीति उन पर सबसे भारी पड़ने वाले छिपे कर की तरह काम करती है और इसे प्रायः सबसे निर्दयी कर कहा जाता है। वास्तविक ब्याज दर नाममात्र दर में से मुद्रास्फीति की दर घटाने पर मिलती है, इसलिए जब मुद्रास्फीति जमा पर मिलने वाले ब्याज से अधिक हो तो बचतकर्ता का मूल्य घटता है, भले ही उसकी राशि बढ़ती दिखे।
भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्य
उर्जित पटेल समिति की सिफारिश पर 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में संशोधन के बाद रिजर्व बैंक को वैधानिक मुद्रास्फीति लक्ष्य मिला; समिति ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को नाममात्र लंगर बनाने का सुझाव दिया था। इस ढाँचे में केंद्र सरकार रिजर्व बैंक के परामर्श से हर पाँच वर्ष में लक्ष्य तय करती है; 2016 में और फिर 2021 में अधिसूचित लक्ष्य चार प्रतिशत था, जिसमें दोनों ओर दो प्रतिशत अंक की सहनशीलता सीमा रखी गई। दर की गणना संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर होती है, थोक सूचकांक पर नहीं। छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति नीतिगत रेपो दर तय करती है, जिसमें तीन सदस्य रिजर्व बैंक के और तीन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं; गवर्नर इसकी अध्यक्षता करते हैं और मत बराबर होने पर निर्णायक मत देते हैं, तथा समिति वर्ष में कम से कम चार बार बैठती है। यदि औसत मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक सीमा से बाहर रहे तो रिजर्व बैंक को सरकार को रिपोर्ट भेजकर विफलता का कारण, प्रस्तावित उपाय और लगने वाला समय बताना पड़ता है। मुख्य साधन रेपो दर, रिवर्स रेपो तथा स्थायी जमा सुविधा, नकद आरक्षित अनुपात और खुले बाजार की क्रियाएँ हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस पाठ से चार बातें पूछी जाती हैं। कौन सी संस्था कौन सा सूचकांक जारी करती है और प्रत्येक शृंखला का आधार वर्ष क्या है। शब्दों का अंतर, जिसमें विस्फीति बनाम अपस्फीति और मुद्रास्फीतिजनित मंदी बनाम विषम स्फीति सबसे प्रिय जोड़े हैं। किसे लाभ और किसे हानि, जहाँ उत्तर प्रायः यही होता है कि ऋणी को लाभ और ऋणदाता को हानि। और मुद्रास्फीति लक्ष्य का ढाँचा, जिसमें मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों की संख्या, लक्ष्य के लिए प्रयुक्त सूचकांक, सहनशीलता सीमा तथा लगातार तीन तिमाहियों की विफलता पूछी जाती है। सामान्य जाल ये हैं: उपभोक्ता सूचकांक जारी करने वाली संस्था रिजर्व बैंक बता देना, थोक सूचकांक में सेवाएँ मान लेना, और दर के घटने को अपस्फीति समझ लेना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मुद्रास्फीति | सामान्य मूल्य स्तर की निरंतर वृद्धि; मुद्रा की क्रय शक्ति घटती है |
|---|---|
| थोक सूचकांक जारीकर्ता | आर्थिक सलाहकार कार्यालय, डीपीआईआईटी, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय |
| थोक सूचकांक का आधार वर्ष | 2017 में जारी शृंखला में 2011-12 |
| उपभोक्ता सूचकांक जारीकर्ता | राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय |
| उपभोक्ता सूचकांक का आधार वर्ष | 2015 में जारी संयुक्त शृंखला में 2012 |
| औद्योगिक श्रमिक सूचकांक | श्रम ब्यूरो, आधार 2016; महँगाई भत्ता इसी से तय होता है |
| सूचकांक सूत्र | लास्पेयर्स सूचकांक, जिसमें आधार वर्ष की मात्राएँ भार होती हैं |
| जीडीपी अपस्फीतिकारक | नाममात्र जीडीपी में वास्तविक जीडीपी का भाग, गुणा 100 |
| मूल मुद्रास्फीति | शीर्ष मुद्रास्फीति में से खाद्य और ईंधन हटाकर |
| मुद्रास्फीति लक्ष्य | 1934 के रिजर्व बैंक अधिनियम में 2016 के संशोधन के तहत केंद्र हर पाँच वर्ष में तय करता है |
| लक्ष्य का स्तर | चार प्रतिशत, दोनों ओर दो प्रतिशत अंक की सहनशीलता सीमा |
| मौद्रिक नीति समिति | छह सदस्य; तीन रिजर्व बैंक के और तीन केंद्र द्वारा नियुक्त |
| लक्ष्य में विफलता | लगातार तीन तिमाहियों तक औसत मुद्रास्फीति सीमा से बाहर |
| अतिमुद्रास्फीति के उदाहरण | 1923 का जर्मनी और दो हजार के दशक का जिंबाब्वे |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय रिजर्व बैंक अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य ढाँचे में महँगाई मापने के लिए किस सूचकांक का प्रयोग करता है?
- A.थोक मूल्य सूचकांक
- B.उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त)
- C.औद्योगिक उत्पादन सूचकांक
- D.जीडीपी अपस्फीतिकारक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त)
व्याख्या
सही उत्तर B, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त) है। 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के संशोधन के बाद लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य ढाँचा अपनाया गया और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी ग्रामीण तथा शहरी संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को नाममात्र लंगर बनाया गया, जैसा उर्जित पटेल समिति ने सुझाया था। इसे इसलिए चुना गया कि यह वही कीमतें मापता है जो परिवार वास्तव में चुकाते हैं और इसमें सेवाएँ भी आती हैं।
विकल्प A थोक मूल्य सूचकांक इस बदलाव से पहले मुख्य माप था, पर इसमें केवल थोक में बिकने वाली वस्तुएँ आती हैं, कोई सेवा नहीं। विकल्प C औद्योगिक उत्पादन सूचकांक औद्योगिक उत्पादन की मात्रा मापता है, यह मूल्य सूचकांक है ही नहीं। विकल्प D जीडीपी अपस्फीतिकारक सबसे व्यापक माप है पर राष्ट्रीय लेखा के साथ बहुत देर से आता है।
भारत में थोक मूल्य सूचकांक किस निकाय द्वारा तैयार और जारी किया जाता है?
- A.भारतीय रिजर्व बैंक
- B.श्रम ब्यूरो
- C.आर्थिक सलाहकार कार्यालय
- D.राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. आर्थिक सलाहकार कार्यालय
व्याख्या
सही उत्तर C, आर्थिक सलाहकार कार्यालय है। थोक मूल्य सूचकांक हर महीने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन उद्योग संवर्धन तथा आंतरिक व्यापार विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा तैयार और जारी किया जाता है। इसके तीन समूह प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन तथा ऊर्जा और विनिर्मित उत्पाद हैं, और 2017 में जारी शृंखला का आधार वर्ष 2011-12 है।
विकल्प A भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के लिए मूल्य सूचकांकों का उपयोग तो करता है पर उन्हें तैयार नहीं करता। विकल्प B श्रम ब्यूरो, जो श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन है, औद्योगिक श्रमिकों तथा कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता सूचकांक बनाता है। विकल्प D राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और राष्ट्रीय लेखा तैयार करता है। परीक्षा में यह ध्यान रखना चाहिए कि थोक सूचकांक वाणिज्य मंत्रालय से और उपभोक्ता सूचकांक सांख्यिकी मंत्रालय से आता है।
वस्तुओं और सेवाओं की पूर्ति की तुलना में कुल माँग के तेजी से बढ़ने से होने वाली मुद्रास्फीति क्या कहलाती है?
- A.लागत-जनित मुद्रास्फीति
- B.माँग-जनित मुद्रास्फीति
- C.संरचनात्मक मुद्रास्फीति
- D.आयातित मुद्रास्फीति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. माँग-जनित मुद्रास्फीति
व्याख्या
सही उत्तर B, माँग-जनित मुद्रास्फीति है। इसे प्रसिद्ध वाक्य में यूँ कहा जाता है कि बहुत अधिक मुद्रा बहुत कम वस्तुओं के पीछे दौड़ रही है। मुद्रा आपूर्ति की तेज वृद्धि, सरकारी व्यय में बड़ी बढ़ोतरी, सस्ता ऋण या निर्यात में अचानक उछाल कुल माँग को उस स्तर से आगे ले जाते हैं जितना अर्थव्यवस्था मौजूदा कीमतों पर उत्पादित कर सकती है, और तब कीमतें बढ़कर संतुलन बनाती हैं।
विकल्प A लागत-जनित मुद्रास्फीति पूर्ति पक्ष से आती है, जब महँगा कच्चा तेल, बढ़ी मजदूरी या महँगे आयातित कच्चे माल उत्पादन लागत बढ़ा देते हैं। विकल्प C संरचनात्मक मुद्रास्फीति भंडारण, परिवहन या कुशल श्रम की कमी जैसी अड़चनों से आती है। विकल्प D आयातित मुद्रास्फीति लागत-जनित का ही रूप है, जिसमें मुद्रा का मूल्य गिरने या विश्व कीमतें बढ़ने से आयात महँगा होता है।
ऊँची मुद्रास्फीति के साथ ठहरी हुई वृद्धि और ऊँची बेरोजगारी की स्थिति क्या कहलाती है?
- A.पुनर्स्फीति
- B.विस्फीति
- C.मुद्रास्फीतिजनित मंदी
- D.अपस्फीति
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. मुद्रास्फीतिजनित मंदी
व्याख्या
सही उत्तर C, मुद्रास्फीतिजनित मंदी है, जिसे अंग्रेजी में स्टैगफ्लेशन कहते हैं और यह शब्द ठहराव तथा मुद्रास्फीति को जोड़कर बना है। यह वह विषम स्थिति है जिसमें कीमतें तेजी से बढ़ रही हों जबकि उत्पादन ठहरा हो और बेरोजगारी ऊँची हो। इसका उपचार कठिन है, क्योंकि कीमतें रोकने के लिए ब्याज दर बढ़ाने से उत्पादन और गिरता है, जबकि रोजगार के लिए माँग बढ़ाने से कीमतें और चढ़ती हैं। सत्तर के दशक के तेल संकटों ने विश्व अर्थव्यवस्था में इसका सबसे प्रसिद्ध दौर खड़ा किया।
विकल्प A पुनर्स्फीति अपस्फीति के बाद माँग और कीमतें बढ़ाने की सोची-समझी नीति है। विकल्प B विस्फीति में दर घटती है पर कीमतें बढ़ती रहती हैं। विकल्प D अपस्फीति में मूल्य स्तर वास्तव में गिरता है और यह प्रायः कमजोर माँग के साथ आती है, ऊँची महँगाई के साथ नहीं।
ऊँची मुद्रास्फीति के दौर में सामान्यतः किस वर्ग को लाभ होता है?
- A.ऋण लेने वाले
- B.ऋण देने वाले
- C.पेंशनभोगी
- D.सावधि जमा रखने वाले
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ऋण लेने वाले
व्याख्या
सही उत्तर A, ऋण लेने वाले है। ऋण एक निश्चित रुपये राशि में चुकाया जाता है और मुद्रास्फीति उन रुपयों की क्रय शक्ति घटा देती है। इस तरह ऋणी उधार ली गई राशि से कम वास्तविक मूल्य की मुद्रा लौटाता है और कर्ज का वास्तविक बोझ घट जाता है। माल का भंडार रखने वाले उत्पादक और व्यापारी भी इसी तरह लाभ में रहते हैं, क्योंकि उनके भंडार का मूल्य मूल्य स्तर के साथ बढ़ता है।
विकल्प B ऋण देने वालों को इसी कारण हानि होती है, क्योंकि मिलने वाला ब्याज क्रय शक्ति की हानि तक की भरपाई नहीं कर पाता। विकल्प C पेंशनभोगी निश्चित राशि पर जीते हैं और जब तक पेंशन कीमतों से न जुड़ी हो, घाटे में रहते हैं। विकल्प D सावधि जमा पर निश्चित नाममात्र दर मिलती है; मुद्रास्फीति उससे अधिक हो तो वास्तविक प्रतिफल ऋणात्मक हो जाता है।
मूल्य स्तर के बढ़ते रहने के बावजूद मुद्रास्फीति की दर का घटना क्या कहलाता है?
- A.अपस्फीति
- B.विस्फीति
- C.मुद्रास्फीतिजनित मंदी
- D.विषम स्फीति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विस्फीति
व्याख्या
सही उत्तर B, विस्फीति है, जिसे अंग्रेजी में डिसइन्फ्लेशन कहते हैं। यदि मुद्रास्फीति की दर सात प्रतिशत से घटकर पाँच प्रतिशत रह जाए तो कीमतें पिछले वर्ष से ऊँची ही हैं, पर उनके बढ़ने की गति धीमी पड़ गई है। यही धीमापन विस्फीति है और ऊँची महँगाई से लड़ने के लिए ब्याज दर बढ़ाने वाला केंद्रीय बैंक सामान्यतः यही हासिल करना चाहता है।
विकल्प A अपस्फीति का अर्थ है कि कीमतें स्वयं गिर रही हैं और दर ऋणात्मक हो गई है, जो कमजोर माँग का संकेत है और कहीं अधिक हानिकारक है। विकल्प C मुद्रास्फीतिजनित मंदी ऊँची महँगाई के साथ कम वृद्धि तथा ऊँची बेरोजगारी है। विकल्प D विषम स्फीति में कुछ वस्तुओं, प्रायः खाद्य पदार्थों, के दाम तेजी से बढ़ते हैं जबकि सामान्य मूल्य स्तर स्थिर रहता है।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति में कितने सदस्य होते हैं?
- A.चार
- B.पाँच
- C.छह
- D.सात
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. छह
व्याख्या
सही उत्तर C, छह है। संशोधित भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के अंतर्गत गठित मौद्रिक नीति समिति में छह सदस्य होते हैं। तीन रिजर्व बैंक के होते हैं, अर्थात गवर्नर, मौद्रिक नीति देखने वाले डिप्टी गवर्नर और केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी, तथा तीन बाहरी सदस्य केंद्र सरकार नियुक्त करती है। गवर्नर समिति के अध्यक्ष होते हैं और मत बराबर होने पर निर्णायक मत देते हैं, गणपूर्ति चार सदस्यों की होती है और समिति को वर्ष में कम से कम चार बार बैठक करनी होती है।
विकल्प A, B और D गलत संख्याएँ हैं। समिति बहुमत से नीतिगत रेपो दर तय करती है और उसका संकल्प प्रत्येक सदस्य के मत के साथ प्रकाशित होता है, जो पारदर्शिता का उपाय है और परीक्षा में पूछा जाने वाला एक और विवरण है।
भारत के थोक मूल्य सूचकांक में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं होता?
- A.प्राथमिक वस्तुएँ
- B.ईंधन और ऊर्जा
- C.विनिर्मित उत्पाद
- D.सेवाएँ
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. सेवाएँ
व्याख्या
सही उत्तर D, सेवाएँ है। थोक मूल्य सूचकांक पूरी तरह थोक में बिकने वाली वस्तुओं की कीमतों से बनता है और इसमें ठीक तीन प्रमुख समूह हैं: प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन तथा ऊर्जा और विनिर्मित उत्पाद, जिनमें सबसे बड़ा भार विनिर्मित उत्पादों का है। बाल कटाई, विद्यालय शुल्क, बस किराया या डॉक्टर की फीस इस सूचकांक में कभी नहीं आती, जबकि सेवाएँ देश के उत्पादन का आधे से अधिक भाग हैं। सेवाओं को समेटने वाले अलग उत्पादक मूल्य सूचकांक की तैयारी लंबे समय से चल रही है।
विकल्प A, B और C उन्हीं तीन समूहों के नाम हैं जो सूचकांक में आते हैं, इसलिए वे उत्तर नहीं हो सकते। सेवाओं की यही अनुपस्थिति एक कारण थी कि मौद्रिक नीति के लंगर के रूप में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को चुना गया।
यदि किसी जमा पर नाममात्र ब्याज दर 6 प्रतिशत है और मुद्रास्फीति की दर 8 प्रतिशत है, तो वास्तविक ब्याज दर कितनी होगी?
- A.14 प्रतिशत
- B.2 प्रतिशत
- C.ऋण 2 प्रतिशत
- D.8 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ऋण 2 प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर C, ऋण 2 प्रतिशत है। वास्तविक ब्याज दर नाममात्र दर में से मुद्रास्फीति की दर घटाने पर मिलती है, और इस सन्निकटन को फिशर समीकरण कहते हैं। यहाँ छह प्रतिशत में से आठ प्रतिशत घटाने पर ऋण दो प्रतिशत आता है, अर्थात जमा रुपये में तो बढ़ती है पर वर्ष के अंत में उससे उतना सामान नहीं खरीदा जा सकता जितना आरंभ में उसी मूल राशि से खरीदा जा सकता था। जब भी मुद्रास्फीति अर्जित ब्याज से अधिक हो, बचतकर्ता वास्तविक अर्थ में घाटे में रहता है।
विकल्प A में दोनों दरें घटाने के बजाय जोड़ दी गई हैं। विकल्प B में घटाव उलटी दिशा में किया गया है। विकल्प D केवल मुद्रास्फीति की दर दोहराता है और अर्जित ब्याज की उपेक्षा करता है।
जीडीपी अपस्फीतिकारक की गणना कैसे की जाती है?
- A.वास्तविक जीडीपी में नाममात्र जीडीपी का भाग, गुणा 100
- B.नाममात्र जीडीपी में वास्तविक जीडीपी का भाग, गुणा 100
- C.नाममात्र जीडीपी में से वास्तविक जीडीपी घटाकर
- D.साधन लागत पर जीडीपी में जनसंख्या का भाग देकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नाममात्र जीडीपी में वास्तविक जीडीपी का भाग, गुणा 100
व्याख्या
सही उत्तर B, नाममात्र जीडीपी में वास्तविक जीडीपी का भाग देकर सौ से गुणा है। नाममात्र जीडीपी चालू कीमतों पर और वास्तविक जीडीपी आधार वर्ष की कीमतों पर मापी जाती है, इसलिए दोनों का अनुपात केवल कीमतों के परिवर्तन का प्रभाव अलग कर देता है। यह उपलब्ध सबसे व्यापक मूल्य माप है, क्योंकि इसमें देश के भीतर उत्पादित हर वस्तु और सेवा आती है, और थोक तथा उपभोक्ता सूचकांकों के विपरीत उत्पादन की संरचना बदलने पर इसकी टोकरी भी बदल जाती है।
विकल्प A में सूत्र उलटा है और कीमतें बढ़ने पर उसका मान घटेगा। विकल्प C रुपये में केवल निरपेक्ष अंतर देता है, कोई सूचकांक नहीं। विकल्प D प्रति व्यक्ति जीडीपी का वर्णन है, जिसका कीमतों की माप से कोई संबंध नहीं। अपस्फीतिकारक का मान 120 होने का अर्थ है कि चालू वर्ष की कीमतें आधार वर्ष से बीस प्रतिशत ऊपर हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में क्या अंतर है?
थोक मूल्य सूचकांक उन कीमतों को मापता है जिन पर वस्तुएँ उपभोक्ता तक पहुँचने से पहले थोक में बिकती हैं, और इसमें केवल वस्तुएँ आती हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक परिवारों द्वारा चुकाई जाने वाली खुदरा कीमतें मापता है और इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य तथा परिवहन जैसी सेवाएँ भी शामिल हैं। उपभोक्ता सूचकांक में खाद्य पदार्थों का भार अधिक है, इसलिए यह सब्जी और अनाज के दामों से चलता है, जबकि थोक सूचकांक पर विनिर्मित उत्पादों तथा ईंधन का प्रभाव रहता है। रिजर्व बैंक अपने लक्ष्य के लिए उपभोक्ता सूचकांक का प्रयोग करता है।
अपस्फीति और विस्फीति में क्या अंतर है?
अपस्फीति में सामान्य मूल्य स्तर स्वयं गिरता है, सूचकांक नीचे जाता है और मुद्रास्फीति की दर ऋणात्मक हो जाती है। विस्फीति में कीमतें बढ़ती तो रहती हैं पर दर घट जाती है, जैसे मुद्रास्फीति छह प्रतिशत से घटकर चार प्रतिशत रह जाए। अपस्फीति कमजोर माँग का संकेत है और इससे डर इसलिए लगता है कि लोग खर्च टालने लगते हैं; विस्फीति प्रायः ऊँची महँगाई से लड़ते केंद्रीय बैंक का लक्ष्य होती है।
मुद्रास्फीति को सबसे निर्दयी कर क्यों कहा जाता है?
मुद्रास्फीति बिना कोई कानून बनाए क्रय शक्ति छीन लेती है और गरीबों से अनुपात में अधिक लेती है। गरीब परिवार अपनी आय का अधिकांश भाग भोजन और ईंधन पर खर्च करते हैं, बचत नकद में रखते हैं और उनके पास ऐसी परिसंपत्ति नहीं होती जिसका दाम महँगाई के साथ बढ़े, इसलिए वे स्वयं को बचा नहीं पाते। संपन्न परिवारों के पास भूमि, सोना और शेयर होते हैं जिनके दाम मूल्य स्तर के साथ बढ़ते हैं। इस तरह बोझ उन्हीं पर पड़ता है जो उसे सबसे कम सह सकते हैं।
मूल मुद्रास्फीति क्या है और इस पर नजर क्यों रखी जाती है?
मूल मुद्रास्फीति शीर्ष दर में से खाद्य और ईंधन हटाकर निकाली जाती है। सब्जी, दाल और कच्चे तेल के दाम मानसून, फसल तथा विश्व बाजार से उछलते रहते हैं और ये उतार-चढ़ाव अपने आप पलट भी जाते हैं। इसलिए मूल मुद्रास्फीति कीमतों की वह अंतर्निहित प्रवृत्ति दिखाती है जिस पर मौद्रिक नीति वास्तव में असर डाल सकती है, और केंद्रीय बैंक इसी से तय करता है कि शीर्ष दर की वृद्धि अस्थायी है या टिकाऊ।
यदि रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति को सीमा के भीतर न रख पाए तो क्या होता है?
विफलता की परिभाषा यह है कि औसत मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक ऊपरी सहनशीलता स्तर से अधिक या निचले स्तर से कम रहे। ऐसा होने पर रिजर्व बैंक को केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजनी होती है, जिसमें विफलता के कारण, प्रस्तावित उपचारात्मक उपाय और लक्ष्य पूरा होने में लगने वाले अनुमानित समय का उल्लेख होता है। यह रिपोर्ट संशोधित भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक आवश्यकता है।
स्रोत
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (कक्षा ग्यारह), मुद्रा, बैंकिंग और आर्थिक सुधार अध्याय — एनसीईआरटी
- समष्टि अर्थशास्त्र: एक परिचय (कक्षा बारह), मुद्रा और बैंकिंग अध्याय — एनसीईआरटी





