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वित्त मंत्रालय ने आईडीबीआई बैंक पुनर्गठन पर स्पष्टीकरण दिया

वित्त मंत्रालय ने बताया कि आईडीबीआई बैंक के सर्वोत्तम प्रस्ताव दौर की प्रक्रिया सचिवों के कोर समूह ने तय की और आरक्षित मूल्य में कोई बदलाव नहीं हुआ।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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वित्त मंत्रालय ने आईडीबीआई बैंक पुनर्गठन पर स्पष्टीकरण दिया — GK24 title card

चर्चा में क्यों

29 अक्टूबर 2026 को वित्त मंत्रालय ने आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन पर स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें दीपम तथा विनिवेश पर सचिवों के कोर समूह की भूमिका, अपनाई गई मूल्यांकन पद्धति और कर क्षतिपूर्ति से बोली मूल्य पर पड़े असर का विवरण दिया गया।

वित्त मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें बताया गया है कि बोलियों का पहला दौर स्वीकार न होने के बाद निर्णय किसने लिए, बैंक का मूल्यांकन किस तरह हुआ और प्रस्तावों का दूसरा दौर क्यों बुलाया गया।

बोलियों का पहला दौर

पहला दौर वित्त वर्ष 2025-26 में निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने अपनी आंतरिक कार्यपद्धति के अनुसार कराया था। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि ये कार्यपद्धति बाध्यकारी नियम नहीं, बल्कि संकेतात्मक दिशानिर्देश हैं। इनकी प्रस्तावना में ही लिखा है कि सुझाई गई प्रक्रिया को कठोर कानूनी ढांचा न माना जाए और जटिल सौदे को समय पर पूरा करने के लिए उसमें बदलाव करना पड़ सकता है। 14 अक्टूबर 2026 के प्रेस नोट में पहले ही बताया गया था कि बोली के लिए पहले से कोई मानक तय नहीं होता। बोलीदाता अपना मूल्यांकन स्वयं करते हैं और गोपनीय रूप से बोली देते हैं, जबकि स्वतंत्र एजेंसियां उसी समय उद्यम का उचित मूल्यांकन करती हैं, जिसका उपयोग केवल यह जांचने के लिए होता है कि बोलियां उचित हैं या नहीं। इसलिए बोली का मूल्य और तुलनात्मक मूल्यांकन एक-दूसरे से ऊपर या नीचे हो सकते हैं।

आगे का निर्णय किसने लिया

प्रस्ताव अनुरोध पत्र में इस स्थिति का प्रावधान पहले से था। पैरा 5.3.6(iii) कहता है कि सर्वोच्च बोलीदाता की वित्तीय बोली आरक्षित मूल्य से कम होने पर सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी और योग्य पक्ष बाद में उस निर्णय पर प्रश्न नहीं उठा सकते। दीपम के पास ऐसी स्थिति के लिए कोई आंतरिक प्रक्रिया नहीं है, इसलिए मामला विनिवेश पर सचिवों के कोर समूह (सीजीडी) के पास गया। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 16 अगस्त 2017 की बैठक में रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया और तंत्र पर नोट को मंजूरी दी और सीजीडी को प्रक्रियागत विषयों पर नीतिगत निर्णय लेने तथा आवश्यक विचलन की अनुमति देने का अधिकार दिया। इन्हीं अधिकारों के तहत सीजीडी ने दूसरे यानी सर्वोत्तम प्रस्ताव दौर की प्रक्रिया स्वयं तय की। आरक्षित मूल्य न घटाया गया न बढ़ाया गया, और शुरुआती बोलियां मंजूर न होने पर पहला दौर स्वतः समाप्त हो गया।

बैंक का मूल्यांकन कैसे हुआ

सीजीडी ने सर्वोत्तम प्रस्ताव आमंत्रित करने से पहले अप्रैल 2026 में पूरी मूल्यांकन पद्धति की समीक्षा की। चूंकि तुलना का आधार बोलियों की ही अवधि का होना चाहिए और 31 मार्च 2026 को बंद हुए लेखे अप्रैल के अंत में सार्वजनिक हुए, स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों ने मई 2026 में संशोधित मूल्यांकन पर काम शुरू किया। प्रक्रिया दोहरे रूप से गोपनीय रही, क्योंकि बोलीदाता ने मूल्यांकन नहीं देखा और मूल्यांकनकर्ताओं ने बोलियां नहीं देखीं; दोनों केवल सीजीडी के सामने थे। दो सलाहकारों ने अलग-अलग और स्वतंत्र पद्धतियों से काम किया। व्यवसाय मूल्यांकन लेनदेन सलाहकार के माध्यम से हुआ, जिसने मार्केट मल्टीपल पद्धति में प्रशिक्षित विशेषज्ञ नियुक्त किए। उपयुक्त तुलनीय लेनदेन उपलब्ध न होने के कारण तुलनीय कंपनी पद्धति अपनाई गई, जिसमें तुलना के लिए सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लिए गए।

सार्वजनिक बैंकों से तुलना क्यों

आईडीबीआई 2019 तक सरकार के स्वामित्व वाली बैंकिंग कंपनी था और उसी वर्ष एलआईसी द्वारा बहुलांश हिस्सेदारी लेने के बाद सरकार के नियंत्रण वाली कंपनी बन गया। इस स्थिति के लिए कोई विशेष नियामकीय प्रावधान न होने से भारतीय रिजर्व बैंक ने केवल नियामकीय प्रयोजन के लिए इसे निजी बैंक मानना शुरू किया, जबकि स्वामित्व मुख्यतः एलआईसी और सरकार के पास ही रहा और बाजार के निवेशक इसे सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई की तरह ही आंकते रहे।

कर क्षतिपूर्ति

परिसंपत्ति मूल्यांकनकर्ता ने विवादित कर मांगों के लिए अतिरिक्त मूल्य जोड़ा, जिनकी क्षतिपूर्ति योग्य बोलीदाताओं की साझा मांग पर दी गई, ताकि प्रस्ताव ऊपर जाए। मंत्रालय इसे कम संभावना वाली और राजस्व के लिहाज से निष्प्रभावी घटना बताता है, क्योंकि केवल वास्तव में चुकाई गई अतिरिक्त कर मांग ही प्रतिपूर्ति योग्य होगी। इस मद में संभावित दायित्व 627 करोड़ रुपये था, जबकि बोली से प्राप्त मूल्य 3,917 करोड़ रुपये बढ़ गया। सरकार और एलआईसी ने अवशिष्ट हिस्सेदारी रखी है, जिससे पुनर्गठन से अपेक्षित लाभ में उनका भाग बना रहे।

महत्वपूर्ण तथ्य

विषयआईडीबीआई बैंक लिमिटेड का रणनीतिक पुनर्गठन
स्पष्टीकरणवित्त मंत्रालय, 29 अक्टूबर 2026
पहला बोली दौरवित्त वर्ष 2025-26 में दीपम द्वारा
सक्षम प्रावधानप्रस्ताव अनुरोध पत्र का पैरा 5.3.6(iii)
अधिकार प्राप्त निकायविनिवेश पर सचिवों का कोर समूह (सीजीडी)
सीसीईए मंजूरी16 अगस्त 2017 की बैठक, रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया और तंत्र पर
आरक्षित मूल्यन घटाया न बढ़ाया; पहला दौर स्वतः समाप्त हुआ
मूल्यांकन समीक्षासीजीडी द्वारा अप्रैल 2026 में; संशोधित मूल्यांकन मई 2026 में शुरू
प्रयुक्त लेखे31 मार्च 2026 को बंद लेखे, अप्रैल के अंत में सार्वजनिक
पद्धतिमार्केट मल्टीपल पद्धति, तुलनीय कंपनी पद्धति में सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक
स्वामित्व परिवर्तन2019 तक सरकारी स्वामित्व, एलआईसी की बहुलांश हिस्सेदारी के बाद सरकारी नियंत्रण
कर क्षतिपूर्ति का असरसंभावित दायित्व 627 करोड़ रुपये, बोली मूल्य में 3,917 करोड़ रुपये की वृद्धि

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि विनिवेश का काम दीपम देखता है, सीजीडी को सीसीईए ने 16 अगस्त 2017 को अधिकार दिए, आरक्षित मूल्य अपरिवर्तित रहा, तुलनीय कंपनी पद्धति में सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लिए गए, एलआईसी ने 2019 में बहुलांश हिस्सेदारी ली जिसके बाद रिजर्व बैंक ने नियामकीय प्रयोजन से इसे निजी बैंक माना, तथा 627 करोड़ और 3,917 करोड़ रुपये के आंकड़े।

अभ्यास प्रश्न

Q1.बैंकिंग और वित्तमध्यम

रणनीतिक विनिवेश में प्रक्रियागत निर्णय लेने तथा विचलन की अनुमति देने का अधिकार आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने किस निकाय को दिया, जिसने आईडीबीआई बैंक के सर्वोत्तम प्रस्ताव दौर की प्रक्रिया तय की?

  1. A.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
  2. B.विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह
  3. C.भारतीय रिजर्व बैंक
  4. D.वित्तीय सेवाएं विभाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह

वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण में बताया गया है कि जब सर्वोच्च वित्तीय बोली आरक्षित मूल्य से कम आ जाए, ऐसी स्थिति के लिए दीपम के पास कोई आंतरिक प्रक्रिया नहीं है।

Q2.बैंकिंग और वित्तमध्यम

एलआईसी द्वारा बहुलांश हिस्सेदारी लेने के बाद आईडीबीआई बैंक किस वर्ष सरकारी स्वामित्व वाली से सरकारी नियंत्रण वाली बैंकिंग कंपनी बना?

  1. A.2015
  2. B.2017
  3. C.2019
  4. D.2021
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2019

स्पष्टीकरण में कहा गया है कि आईडीबीआई उस वर्ष तक सरकार के स्वामित्व वाली बैंकिंग कंपनी था और एलआईसी द्वारा बहुलांश हिस्सेदारी लेने के बाद सरकार के नियंत्रण वाली कंपनी बन गया।

Q3.बैंकिंग और वित्तकठिन

विवादित कर मांगों की क्षतिपूर्ति के बाद बोली से प्राप्त मूल्य में कितनी वृद्धि हुई?

  1. A.627 करोड़ रुपये
  2. B.1,450 करोड़ रुपये
  3. C.3,917 करोड़ रुपये
  4. D.5,280 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 3,917 करोड़ रुपये

परिसंपत्ति मूल्यांकनकर्ता ने विवादित कर मांगों के लिए अतिरिक्त मूल्य जोड़ा और इन मांगों की क्षतिपूर्ति योग्य बोलीदाताओं की साझा मांग पर दी गई, जिसका उद्देश्य प्रस्ताव को ऊपर ले जाना था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीबीआई बैंक की दूसरी बोली की प्रक्रिया किस निकाय ने तय की?

विनिवेश पर सचिवों के कोर समूह ने, जिसे सीजीडी कहा जाता है। दीपम के पास ऐसी स्थिति की कोई आंतरिक प्रक्रिया नहीं है जहां सर्वोच्च बोली आरक्षित मूल्य से कम रह जाए, और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 16 अगस्त 2017 की बैठक में सीजीडी को प्रक्रियागत निर्णय लेने तथा विचलन की अनुमति देने का अधिकार दिया था।

आईडीबीआई बैंक के मूल्यांकन में सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को तुलना के लिए क्यों लिया गया?

क्योंकि उपयुक्त तुलनीय लेनदेन उपलब्ध नहीं थे, इसलिए मार्केट मल्टीपल पद्धति के तहत तुलनीय कंपनी पद्धति अपनाई गई। आईडीबीआई 2019 तक सरकारी स्वामित्व में था और एलआईसी की बहुलांश हिस्सेदारी के बाद सरकारी नियंत्रण में आ गया, और बाजार के निवेशक इसे सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई की तरह आंकते रहे, जबकि रिजर्व बैंक ने नियामकीय प्रयोजन से इसे निजी बैंक माना।

विवादित कर मांगों की क्षतिपूर्ति का क्या असर पड़ा?

इससे बोली से प्राप्त मूल्य 3,917 करोड़ रुपये बढ़ गया, जबकि इस मद में संभावित दायित्व केवल 627 करोड़ रुपये था। मंत्रालय इसे कम संभावना वाली और राजस्व के लिहाज से निष्प्रभावी घटना बताता है, क्योंकि प्रतिपूर्ति तभी होगी जब कोई अतिरिक्त कर मांग वास्तव में चुकाई जाए।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 29 अक्टूबर 2026

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