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GK नोट्सभारतीय अर्थव्यवस्थामूल अवधारणाएं: मांग, आपूर्ति और बाज़ार के प्रकार

मांग, आपूर्ति और बाज़ार के प्रकार: नियम, लोच और तथ्य

मांग, आपूर्ति और बाज़ार के प्रकारों के पूर्ण नोट्स: दोनों नियम, उनके अपवाद, मांग की लोच, संतुलन कीमत तथा बाज़ार के प्रत्येक रूप की विशेषताएं।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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मांग, आपूर्ति और बाज़ार के प्रकार: नियम, लोच और तथ्य — GK24 title card
मांग, आपूर्ति और बाज़ार के प्रकार: नियम, लोच और तथ्य — GK24 title card

अर्थशास्त्र में यह प्रश्न कि किसी वस्तु का मूल्य इतना क्यों है, अंत में दो सूचियों पर आ जाता है, एक क्रेताओं की और एक विक्रेताओं की। मांग का नियम क्रेताओं का व्यवहार बताता है, आपूर्ति का नियम विक्रेताओं का, और जहां दोनों सहमत होते हैं वहीं कीमत तय होती है। इसके बाद कीमत कितनी स्वतंत्रता से बदल सकती है, यह बाज़ार के रूप पर निर्भर करता है, जिसमें हजारों विक्रेता हो सकते हैं या केवल एक। परीक्षक प्रत्येक सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र में इस अध्याय से प्रश्न बनाते हैं, क्योंकि परिभाषाएं छोटी हैं, अपवाद गिनती में हैं और बाज़ार के चार रूपों को उनकी विशेषताओं से सुमेलित कराया जा सकता है।

मांग का नियम

मांग केवल इच्छा नहीं है; यह वह मात्रा है जिसे क्रेता किसी दी गई कीमत पर एक निश्चित अवधि में खरीदने के लिए इच्छुक और समर्थ हो। मांग का नियम कहता है कि अन्य बातें समान रहने पर किसी वस्तु की कीमत घटने से उसकी मांगी गई मात्रा बढ़ती है और कीमत बढ़ने से घटती है, इसलिए मांग वक्र बाएं से दाएं नीचे की ओर ढालू होता है। यह संबंध विपरीत इसलिए है कि कीमत घटने पर आय प्रभाव क्रेता के पास अधिक क्रय शक्ति छोड़ देता है, प्रतिस्थापन प्रभाव उसे महंगे विकल्पों से हटाता है, और सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम के कारण प्रत्येक अतिरिक्त इकाई उसके लिए कम उपयोगी होती है, इसलिए वह उसे कम कीमत पर ही लेगा। केवल कीमत बदलने पर क्रेता उसी वक्र पर आगे-पीछे खिसकता है, जिसे मांग का विस्तार या संकुचन कहते हैं; आय, रुचि, संबंधित वस्तुओं की कीमत या क्रेताओं की संख्या बदलने पर पूरा वक्र खिसक जाता है, जिसे मांग में वृद्धि या कमी कहते हैं।

अपवाद

  • गिफिन वस्तुएं, अर्थात रॉबर्ट गिफिन के नाम पर घटिया वस्तुएं, जिनकी कीमत घटने पर मांग घट जाती है क्योंकि क्रेता बेहतर विकल्प की ओर चला जाता है।
  • प्रतिष्ठा या दिखावे की वस्तुएं, जहां अधिक कीमत ही आकर्षण है; यह थॉर्सटीन वेब्लेन के नाम पर वेब्लेन प्रभाव है।
  • नमक और दवा जैसी अनिवार्य वस्तुएं, जो कीमत चाहे कुछ हो लगभग उतनी ही खरीदी जाती हैं।
  • कीमत में आगे और परिवर्तन की आशंका, जिससे कीमत बढ़ने पर भी लोग अधिक खरीदते हैं।
  • अज्ञानता, जिसमें क्रेता ऊंची कीमत को गुणवत्ता का प्रमाण मान लेता है।

मांग की लोच

लोच बताती है कि मात्रा कीमत का उत्तर कितनी तीव्रता से देती है। कीमत लोच का अर्थ है मांगी गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन को कीमत में प्रतिशत परिवर्तन से भाग देना, यह माप एल्फ्रेड मार्शल ने दिया। मान एक से अधिक हो तो मांग लोचदार, एक के बराबर हो तो इकाई लोच वाली और एक से कम हो तो बेलोचदार कहलाती है; मान अनंत हो तो पूर्ण लोचदार, जिसका वक्र क्षैतिज होता है, और शून्य हो तो पूर्ण बेलोचदार, जिसका वक्र ऊर्ध्वाधर होता है। विलासिता की वस्तुएं, जिनके अनेक विकल्प हों और जो बजट का बड़ा भाग लें, लोचदार होती हैं; अनिवार्य वस्तुएं, आदत की वस्तुएं और जिनका विकल्प न हो, बेलोचदार होती हैं। आय लोच सामान्य वस्तुओं के लिए धनात्मक और घटिया वस्तुओं के लिए ऋणात्मक होती है, तथा तिर्यक लोच प्रतिस्थापन वस्तुओं के लिए धनात्मक और पूरक वस्तुओं के लिए ऋणात्मक होती है।

आपूर्ति और संतुलन

आपूर्ति वह मात्रा है जिसे विक्रेता किसी कीमत पर एक अवधि में बेचने को तैयार हों। आपूर्ति का नियम सीधा संबंध बताता है, इसलिए आपूर्ति वक्र ऊपर की ओर चढ़ता है: ऊंची कीमत बढ़ी हुई लागत को ढक लेती है और अधिक लाभ का वादा करती है, अतः अधिक मात्रा प्रस्तुत की जाती है। आपूर्ति साधनों की लागत, प्रौद्योगिकी, कर और अनुदान, अन्य वस्तुओं की कीमतों तथा विक्रेताओं की संख्या बदलने से खिसकती है। बाज़ार उस कीमत पर संतुलन में होता है जहां मांगी गई मात्रा आपूर्ति की गई मात्रा के बराबर हो; उससे ऊपर अतिरेक कीमत को नीचे धकेलता है और नीचे कमी कीमत को ऊपर खींचती है। यही कीमत तंत्र है, वही अदृश्य हाथ जिसका उल्लेख एडम स्मिथ ने 1776 के अपने ग्रंथ वेल्थ ऑफ नेशंस में किया था।

बाज़ार के रूप

रूपविक्रेतावस्तुकीमत पर नियंत्रणउदाहरण
पूर्ण प्रतिस्पर्धाबहुत अधिकसमरूपकोई नहीं, फर्म कीमत स्वीकारकसैद्धांतिक प्रतिमान
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धाअनेकविभेदितसीमित दायरे में कुछसाबुन, टूथपेस्ट
अल्पाधिकारकुछ हीसमान या विभेदितपर्याप्त, परस्पर निर्भरता के साथसिगरेट, सीमेंट, विमान सेवा
एकाधिकारएकनिकट विकल्प नहींपूर्ण, फर्म कीमत निर्धारकरेल परिवहन में भारतीय रेल

पूर्ण प्रतिस्पर्धा के लिए अनेक क्रेता और विक्रेता, समरूप वस्तु, मुक्त प्रवेश और निर्गम, पूर्ण जानकारी तथा परिवहन लागत का अभाव आवश्यक है, और इसकी पहचान यह है कि एक ही समय पर एक ही वस्तु की एक ही कीमत होती है। एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा, जिसका प्रतिमान एडवर्ड चैंबरलिन ने बनाया, बड़ी संख्या और मुक्त प्रवेश बनाए रखती है परंतु प्रत्येक फर्म को अपना ब्रांड देती है, इसलिए विज्ञापन महत्वपूर्ण हो जाता है और प्रत्येक विक्रेता का कीमत पर थोड़ा नियंत्रण होता है। अल्पाधिकार में विक्रेता इतने कम होते हैं कि प्रत्येक को दूसरों पर दृष्टि रखनी पड़ती है, जिससे मोड़दार मांग वक्र और मिलीभगत की प्रवृत्ति बनती है; केवल दो विक्रेताओं का बाज़ार द्वयाधिकार कहलाता है। एकाधिकार में एक ही विक्रेता होता है जिसकी वस्तु का निकट विकल्प नहीं होता, और वह पेटेंट, लाइसेंस, कच्चे माल के स्वामित्व या राजकीय अनुमति जैसी किसी बाधा के बल पर टिकता है। जहां एक ही विक्रेता के स्थान पर एक ही क्रेता हो, वह बाज़ार एकक्रेताधिकार कहलाता है।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्नपत्र परिभाषाएं और दो निकट अवधारणाओं को अलग करने वाली एक पंक्ति पूछते हैं। सबसे आम प्रश्न यह है कि किस बाज़ार रूप में फर्में अनेक हैं, प्रवेश मुक्त है और वस्तु विभेदित है, और उत्तर एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा है, अल्पाधिकार नहीं। दूसरा सबसे आम प्रश्न पूर्ण प्रतिस्पर्धा की अनिवार्य शर्त पूछता है, जिसका अपेक्षित उत्तर एक ही समय पर एक ही वस्तु की एक ही कीमत या समरूप वस्तु होता है। मांग के नियम के अपवादों पर प्रश्न निश्चित है, जिसमें गिफिन वस्तुएं और प्रतिष्ठा या वेब्लेन वस्तुएं मुख्य हैं, और लोच के मानों पर भी, जिसमें अनंत पूर्ण लोचदार और शून्य पूर्ण बेलोचदार है। याद रखें कि द्वयाधिकार में दो विक्रेता और एकक्रेताधिकार में एक क्रेता होता है, कि मांग वक्र कीमत के अतिरिक्त कुछ बदलने पर ही खिसकता है, और घटिया वस्तु की आय लोच ऋणात्मक होती है। प्रतिशत सूत्र से लोच निकालने वाले छोटे संख्यात्मक प्रश्न भी आते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

मांग का नियमअन्य बातें समान रहने पर कीमत और मांगी गई मात्रा में विपरीत संबंध
आपूर्ति का नियमकीमत और आपूर्ति की गई मात्रा में सीधा संबंध
वक्रों का आकारमांग वक्र नीचे ढालू, आपूर्ति वक्र ऊपर चढ़ता
गिफिन वस्तुएंघटिया वस्तुएं, रॉबर्ट गिफिन के नाम पर
प्रतिष्ठा वस्तुएंवेब्लेन प्रभाव, थॉर्सटीन वेब्लेन के नाम पर
लोच का सूत्रमात्रा में प्रतिशत परिवर्तन भाग कीमत में प्रतिशत परिवर्तन
पूर्ण लोचदार मांगलोच अनंत, वक्र क्षैतिज
पूर्ण बेलोचदार मांगलोच शून्य, वक्र ऊर्ध्वाधर
घटिया वस्तुमांग की आय लोच ऋणात्मक
प्रतिस्थापन और पूरकतिर्यक लोच प्रतिस्थापन के लिए धनात्मक, पूरक के लिए ऋणात्मक
संतुलन कीमतजहां मांगी गई मात्रा आपूर्ति की गई मात्रा के बराबर हो
पूर्ण प्रतिस्पर्धाबहुत विक्रेता, समरूप वस्तु, मुक्त प्रवेश, एक कीमत, कीमत स्वीकारक फर्म
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धाअनेक विक्रेता, विभेदित वस्तुएं; प्रतिमान एडवर्ड चैंबरलिन का
अल्पाधिकार और द्वयाधिकारकुछ परस्पर निर्भर विक्रेता; ठीक दो विक्रेता होने पर द्वयाधिकार
एकक्रेताधिकारऐसा बाज़ार जिसमें एक ही क्रेता हो

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 5 Dec 2017, Shift 1मध्यम

पूर्ण प्रतिस्पर्धा की अनिवार्य शर्तों में से एक है

  1. A.वस्तु विभेद
  2. B.एक ही समय पर समरूप वस्तुओं की अनेक कीमतें
  3. C.अनेक विक्रेता और कुछ ही क्रेता
  4. D.एक ही समय पर एक ही वस्तु की एक ही कीमत
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. एक ही समय पर एक ही वस्तु की एक ही कीमत

व्याख्या

सही उत्तर D है। पूर्ण प्रतिस्पर्धा में समरूप वस्तु, बहुत अधिक क्रेता और विक्रेता, पूर्ण जानकारी तथा मुक्त प्रवेश और निर्गम मान लिए जाते हैं, और इन सबका प्रत्यक्ष परिणाम एक ही प्रचलित कीमत है: एक ही वस्तु एक ही समय पर दो कीमतों पर नहीं बिक सकती, क्योंकि कोई भी क्रेता तुरंत सस्ते विक्रेता के पास चला जाएगा। विकल्प A गलत है क्योंकि वस्तु विभेद एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की पहचान है, जहां प्रत्येक फर्म वस्तु का अपना ब्रांड बेचती है। विकल्प B गलत है क्योंकि समरूप वस्तुओं की अनेक कीमतें एक कीमत के नियम के विपरीत हैं और ऐसा वहीं होता है जहां जानकारी अपूर्ण हो। विकल्प C गलत है क्योंकि पूर्ण प्रतिस्पर्धा में विक्रेताओं के साथ क्रेता भी अनेक होने चाहिए; क्रेता कम होते तो वे कीमत को प्रभावित करते और फर्म कीमत स्वीकारक न रहती।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 5 Dec 2017, Shift 1मध्यम

निम्नलिखित में से कौन अल्पाधिकार की परिभाषा के सर्वाधिक निकट है?

  1. A.सिगरेट उद्योग
  2. B.नाई की दुकान
  3. C.वेल्डिंग की दुकान
  4. D.गेहूं उगाने वाले किसान
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सिगरेट उद्योग

व्याख्या

सही उत्तर A, सिगरेट उद्योग है। अल्पाधिकार वह बाज़ार है जिसमें कुछ बड़ी फर्में पूरा उत्पादन देती हैं, इसलिए प्रत्येक को देखना पड़ता है कि उसकी कीमत पर दूसरी फर्में क्या प्रतिक्रिया देंगी, और सिगरेट उद्योग इसका मानक उदाहरण है क्योंकि गिनी-चुनी कंपनियों के पास लगभग पूरा बाज़ार रहता है। विकल्प B गलत है क्योंकि नाई की दुकानें बहुत अधिक संख्या में हैं और प्रत्येक अपने क्षेत्र में थोड़ी भिन्न सेवा देती है, जिससे यह व्यवसाय एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा का उदाहरण बनता है। विकल्प C इसी कारण गलत है, क्योंकि वेल्डिंग की दुकानें भी अनेक, छोटी और स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि गेहूं उगाने वाले किसान असंख्य हैं और समरूप वस्तु उस कीमत पर बेचते हैं जिसे उनमें से कोई प्रभावित नहीं कर सकता, जो वास्तविक जगत में पूर्ण प्रतिस्पर्धा के सबसे निकट है। उदाहरण पक्के कर लें: सिगरेट, सीमेंट और विमान सेवा अल्पाधिकार, कृषि उत्पाद पूर्ण प्रतिस्पर्धा।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 16 Jan 2023, Shift 3मध्यम

ऐसे बाज़ार ढांचे पर विचार कीजिए जिसमें फर्मों की संख्या बड़ी है, फर्मों का प्रवेश और निर्गम मुक्त है, परंतु उनके द्वारा उत्पादित वस्तुएं समरूप नहीं हैं। ऐसे बाज़ार ढांचे को ______ कहा जाता है।

  1. A.एकक्रेताधिकार
  2. B.अल्पाधिकार
  3. C.एकाधिकार
  4. D.एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा

व्याख्या

सही उत्तर D, एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा है। एडवर्ड चैंबरलिन द्वारा विश्लेषित यह रूप पूर्ण प्रतिस्पर्धा की दो विशेषताएं बनाए रखता है, फर्मों की बड़ी संख्या तथा मुक्त प्रवेश और निर्गम, परंतु तीसरी छोड़ देता है: प्रत्येक फर्म विभेदित या ब्रांडेड वस्तु बेचती है, इसलिए उसका मांग वक्र नीचे ढालू होता है, कीमत पर उसका थोड़ा नियंत्रण होता है और विज्ञापन जैसी विक्रय लागत महत्वपूर्ण हो जाती है। साबुन, टूथपेस्ट और भोजनालय इसके सामान्य उदाहरण हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि एकक्रेताधिकार एक ही क्रेता वाला बाज़ार है, अनेक फर्मों वाला नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि अल्पाधिकार में विक्रेता कुछ ही होते हैं और प्रवेश सामान्यतः कठिन होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि एकाधिकार में ठीक एक विक्रेता होता है जिसका निकट विकल्प नहीं होता, जो प्रश्न में दी बड़ी संख्या और मुक्त प्रवेश दोनों के विपरीत है।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Assistant Professor Commerce 2017मध्यम

मांग के नियम के अपवाद के रूप में गिफिन का विरोधाभास किसे सम्मिलित करता है?

  1. A.प्रतिष्ठा की वस्तुएं
  2. B.घटिया वस्तुएं
  3. C.पूरक वस्तुएं
  4. D.प्रतिस्थापन वस्तुएं
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. घटिया वस्तुएं

व्याख्या

सही उत्तर B, घटिया वस्तुएं है। रॉबर्ट गिफिन ने देखा कि मोटे आटे जैसी सस्ती मुख्य वस्तु की कीमत घटने पर निर्धन परिवार उसे अधिक नहीं, कम खरीदते थे, क्योंकि बची राशि से वे बेहतर भोजन की ओर चले जाते थे; ऐसी घटिया वस्तुओं को इसीलिए गिफिन वस्तुएं कहा जाता है और उनका मांग वक्र ऊपर की ओर चढ़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रतिष्ठा या दिखावे की वस्तुएं एक अलग अपवाद हैं, जिसे वेब्लेन प्रभाव कहते हैं, जिसमें ऊंची कीमत ही आकर्षण होती है। विकल्प C गलत है क्योंकि कार और पेट्रोल जैसी पूरक वस्तुएं तिर्यक लोच का विषय हैं, जो उनके लिए ऋणात्मक होती है, और उनका मांग के नियम से सीधा संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि प्रतिस्थापन वस्तुएं भी तिर्यक लोच में आती हैं, जहां मान धनात्मक होता है, और वे मांग के नियम का सामान्य रूप से पालन करती हैं। दोनों नामित प्रभाव अलग रखें: घटिया वस्तुओं के लिए गिफिन और प्रतिष्ठा वस्तुओं के लिए वेब्लेन।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

मांग का नियम कहता है कि अन्य बातें समान रहने पर

  1. A.कीमत बढ़ने पर मांगी गई मात्रा बढ़ती है
  2. B.कीमत बढ़ने पर मांगी गई मात्रा घटती है
  3. C.कीमत से मांगी गई मात्रा नहीं बदलती
  4. D.मांगी गई मात्रा केवल आय पर निर्भर करती है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कीमत बढ़ने पर मांगी गई मात्रा घटती है

व्याख्या

सही उत्तर B है। मांग का नियम विपरीत संबंध बताता है: ऊंची कीमत पर क्रेता किसी वस्तु की कम मात्रा लेते हैं और नीची कीमत पर अधिक, इसीलिए मांग वक्र बाएं से दाएं नीचे की ओर ढालू होता है। इसके तीन कारण हैं, कीमत घटने पर अधिक क्रय शक्ति छोड़ने वाला आय प्रभाव, महंगे विकल्पों से हटाने वाला प्रतिस्थापन प्रभाव, और सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम जिससे प्रत्येक अतिरिक्त इकाई कम मूल्यवान लगती है। विकल्प A सीधा संबंध बताता है, जो वास्तव में आपूर्ति के नियम का वर्णन है। विकल्प C गलत है क्योंकि मात्रा का न बदलना केवल पूर्ण बेलोचदार मांग की विशेष स्थिति है, सामान्य नियम नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि आय पूरे मांग वक्र को खिसकाती है, जबकि मांग का नियम आय स्थिर रखकर कीमत की बात करता है।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

अन्य बातें समान रहने पर किसी वस्तु की कीमत में कमी से क्या होता है?

  1. A.मांग में वृद्धि होती है और मांग वक्र दाईं ओर खिसकता है
  2. B.उसी मांग वक्र पर मांग का विस्तार होता है
  3. C.मांग में कमी होती है और वक्र बाईं ओर खिसकता है
  4. D.मांगी गई मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उसी मांग वक्र पर मांग का विस्तार होता है

व्याख्या

सही उत्तर B है। जब केवल उसी वस्तु की कीमत बदलती है तो क्रेता उसी मांग वक्र के दूसरे बिंदु पर चला जाता है, और कम कीमत पर अधिक मात्रा की ओर जाने को मांग का विस्तार कहते हैं, जबकि उलटी स्थिति संकुचन है। विकल्प A और C गलत हैं क्योंकि मांग में वृद्धि या कमी, जिससे पूरा वक्र खिसकता है, उस वस्तु की कीमत के अतिरिक्त किसी कारण से होती है, जैसे आय, रुचि, प्रतिस्थापन या पूरक वस्तु की कीमत, अथवा क्रेताओं की संख्या। विकल्प D गलत है क्योंकि सामान्य वस्तुओं में कीमत बदलने पर मांगी गई मात्रा बदलती ही है; केवल पूर्ण बेलोचदार मांग में वह अपरिवर्तित रहती है। वक्र पर खिसकाव और वक्र के खिसकने का यही अंतर इस अध्याय में सबसे अधिक पूछा जाता है।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

यदि किसी वस्तु की कीमत बदलने पर उसकी मांगी गई मात्रा बिल्कुल नहीं बदलती, तो मांग कहलाती है

  1. A.पूर्ण लोचदार, लोच अनंत
  2. B.इकाई लोच वाली, लोच एक
  3. C.पूर्ण बेलोचदार, लोच शून्य
  4. D.सापेक्ष लोचदार, लोच एक से अधिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. पूर्ण बेलोचदार, लोच शून्य

व्याख्या

सही उत्तर C है। लोच मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन को कीमत में प्रतिशत परिवर्तन से भाग देकर निकाली जाती है; यदि अंश शून्य हो तो पूरा मान शून्य हो जाता है और मांग वक्र ऊर्ध्वाधर सीधी रेखा बन जाता है। किसी रोगी के लिए जीवनरक्षक दवा इस स्थिति के सबसे निकट है। विकल्प A गलत है क्योंकि पूर्ण लोचदार मांग इसका उलटा छोर है, जहां कीमत में तनिक वृद्धि से मात्रा शून्य हो जाती है, मान अनंत होता है और वक्र क्षैतिज होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि इकाई लोच का अर्थ है मात्रा में कीमत के ठीक उसी अनुपात में परिवर्तन, जिससे कुल व्यय अपरिवर्तित रहता है। विकल्प D गलत है क्योंकि एक से अधिक मान लोचदार मांग बताता है, जिसमें मात्रा आनुपातिक से अधिक प्रतिक्रिया देती है, जैसा विलासिता की वस्तुओं में होता है। दोनों छोर याद रखें: शून्य ऊर्ध्वाधर और अनंत क्षैतिज।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

आपूर्ति का नियम कहता है कि किसी वस्तु की कीमत और आपूर्ति की गई मात्रा के बीच संबंध है

  1. A.विपरीत, इसलिए आपूर्ति वक्र नीचे ढालू होता है
  2. B.सीधा, इसलिए आपूर्ति वक्र ऊपर चढ़ता है
  3. C.कोई नहीं, इसलिए आपूर्ति वक्र ऊर्ध्वाधर होता है
  4. D.सदैव पूर्ण लोचदार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सीधा, इसलिए आपूर्ति वक्र ऊपर चढ़ता है

व्याख्या

सही उत्तर B है। ऊंची कीमत अतिरिक्त इकाइयों की बढ़ती लागत को ढक लेती है और अधिक लाभ का वादा करती है, इसलिए विक्रेता अधिक मात्रा प्रस्तुत करते हैं और आपूर्ति वक्र बाएं से दाएं ऊपर चढ़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि विपरीत संबंध मांग का लक्षण है, आपूर्ति का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि ऊर्ध्वाधर आपूर्ति वक्र का अर्थ है कि आपूर्ति बदल ही नहीं सकती, जो केवल अति अल्पकाल में निश्चित भंडार पर लागू होता है, जैसे किसी स्टेडियम की सीटें, सामान्य नियम पर नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पूर्ण लोचदार आपूर्ति वह विशेष स्थिति है जिसमें एक ही कीमत पर कोई भी मात्रा दी जाती है और वक्र क्षैतिज रेखा होता है। यह भी देखें कि आपूर्ति को वक्र पर खिसकाने के बजाय खिसकाता क्या है: साधनों की लागत, प्रौद्योगिकी, कर और अनुदान, फर्म जो अन्य वस्तुएं बना सकती है उनकी कीमतें, तथा विक्रेताओं की संख्या।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

किसी बाज़ार में संतुलन कीमत वह कीमत है जिस पर

  1. A.विक्रेता को सर्वाधिक संभव लाभ मिलता है
  2. B.मांगी गई मात्रा आपूर्ति की गई मात्रा के बराबर होती है
  3. C.सरकार उच्चतम सीमा निर्धारित करती है
  4. D.मांग पूर्ण बेलोचदार होती है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मांगी गई मात्रा आपूर्ति की गई मात्रा के बराबर होती है

व्याख्या

सही उत्तर B है। बाज़ार वहां साफ होता है जहां मांग और आपूर्ति वक्र एक-दूसरे को काटते हैं, अर्थात जहां क्रेता जितना खरीदना चाहते हैं वह ठीक उतना है जितना विक्रेता बेचना चाहते हैं; वहां की कीमत संतुलन कीमत और मात्रा संतुलन मात्रा कहलाती है। उस कीमत से ऊपर न बिके माल का अतिरेक विक्रेताओं को कीमत घटाने पर विवश करता है और नीचे कमी उन्हें बढ़ाने देती है, इसलिए बाज़ार उस कीमत तंत्र से स्वयं संतुलन पर लौटता है जिसे एडम स्मिथ ने अदृश्य हाथ कहा था। विकल्प A गलत है क्योंकि किसी एक विक्रेता के अधिकतम लाभ का बाज़ार के साफ होने से संबंध नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि सरकारी उच्चतम सीमा बाहर से थोपी गई प्रशासित कीमत है और वह सामान्यतः कमी उत्पन्न करती है, जैसा कीमत नियंत्रण में होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि लोच वक्र का आकार बताती है, कटान बिंदु नहीं।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

निम्नलिखित में से कौन एकाधिकार बाज़ार की विशेषता है?

  1. A.एक ही विक्रेता और वस्तु का कोई निकट विकल्प नहीं
  2. B.समरूप वस्तु के बहुत अधिक विक्रेता
  3. C.अनेक विक्रेताओं के सामने एक ही क्रेता
  4. D.फर्मों का मुक्त प्रवेश और निर्गम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एक ही विक्रेता और वस्तु का कोई निकट विकल्प नहीं

व्याख्या

सही उत्तर A है। एकाधिकार वह बाज़ार है जिसमें एक ही विक्रेता होता है और उसकी वस्तु का कोई निकट विकल्प नहीं होता, इसलिए वह फर्म ही पूरा उद्योग है और कीमत निर्धारक होती है: वह कीमत चुनती है और मात्रा बाज़ार पर छोड़ देती है, या इसका उलटा। यह स्थिति तभी टिकती है जब प्रवेश किसी पेटेंट, लाइसेंस, आवश्यक कच्चे माल के स्वामित्व या राजकीय अनुमति से रुका हो। विकल्प B गलत है क्योंकि समरूप वस्तु के बहुत अधिक विक्रेता पूर्ण प्रतिस्पर्धा की परिभाषा है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनेक विक्रेताओं के सामने एक ही क्रेता होना एकक्रेताधिकार है, जो एकाधिकार का दर्पण रूप है। विकल्प D गलत है क्योंकि मुक्त प्रवेश और निर्गम एकाधिकार को तुरंत समाप्त कर देगा, क्योंकि नई फर्में लाभ बांटने आ जाएंगी; यह पूर्ण प्रतिस्पर्धा तथा एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की विशेषता है।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

जिस बाज़ार में किसी वस्तु के ठीक दो विक्रेता हों, उसे क्या कहा जाता है?

  1. A.द्वयाधिकार
  2. B.एकक्रेताधिकार
  3. C.अल्पक्रेताधिकार
  4. D.एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. द्वयाधिकार

व्याख्या

सही उत्तर A, द्वयाधिकार है। द्वयाधिकार अल्पाधिकार की वह सीमांत स्थिति है जिसमें केवल दो फर्में पूरे बाज़ार को आपूर्ति करती हैं, इसलिए प्रत्येक अपनी कीमत और उत्पादन दूसरी पर सीधी दृष्टि रखकर तय करती है। विकल्प B गलत है क्योंकि एकक्रेताधिकार एक ही क्रेता वाला बाज़ार है, और उपसर्ग एक को दो समझ लेना ही इस प्रश्न की परीक्षा है। विकल्प C गलत है क्योंकि अल्पक्रेताधिकार कुछ ही क्रेताओं वाला बाज़ार है, यह भी क्रय पक्ष का। विकल्प D गलत है क्योंकि एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में विभेदित वस्तुओं के विक्रेता बड़ी संख्या में होते हैं। शब्दों का अंत याद रखें: अधिकार वाले शब्द विक्रेता गिनते हैं, जैसे एकाधिकार, द्वयाधिकार और अल्पाधिकार, तथा क्रेताधिकार वाले शब्द क्रेता गिनते हैं, जैसे एकक्रेताधिकार और अल्पक्रेताधिकार। परीक्षा में अल्पाधिकार और द्वयाधिकार का अंतर भी पूछा जाता है, जिसमें अल्पाधिकार में कुछ विक्रेता होते हैं और द्वयाधिकार में ठीक दो, परंतु दोनों में फर्में परस्पर निर्भर रहती हैं और एक की कीमत नीति दूसरी की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है।

Q12.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

अर्थशास्त्र में उपभोक्ता की बचत की अवधारणा किसने दी?

  1. A.एडम स्मिथ
  2. B.एल्फ्रेड मार्शल
  3. C.डेविड रिकार्डो
  4. D.जे. एम. कीन्स
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एल्फ्रेड मार्शल

व्याख्या

सही उत्तर B, एल्फ्रेड मार्शल है। अपने ग्रंथ प्रिंसिपल्स ऑफ इकोनॉमिक्स में उन्होंने उपभोक्ता की बचत को उस अंतर के रूप में परिभाषित किया जो क्रेता किसी वस्तु के लिए देने को तैयार है और जो वह वास्तव में देता है, और मांग की लोच का मानक माप भी उन्होंने ही दिया, इसीलिए दोनों अवधारणाओं से उनका नाम जुड़ा है। विकल्प A गलत है क्योंकि एडम स्मिथ को 1776 के वेल्थ ऑफ नेशंस में श्रम विभाजन, अदृश्य हाथ और परंपरागत अर्थशास्त्र की नींव के लिए याद किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि डेविड रिकार्डो तुलनात्मक लाभ, लगान के सिद्धांत और ह्रासमान प्रतिफल के नियम से जुड़े हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि जे. एम. कीन्स ने 1936 का जनरल थ्योरी लिखा और वे समष्टि अर्थशास्त्र से संबंधित हैं, जिसमें प्रभावी मांग, गुणक और मंदी में सार्वजनिक व्यय का पक्ष आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मांग में परिवर्तन और मांगी गई मात्रा में परिवर्तन में क्या अंतर है?

मांगी गई मात्रा में परिवर्तन केवल उस वस्तु की कीमत बदलने से होता है और उसी मांग वक्र पर खिसकाव के रूप में दिखता है, जिसे विस्तार या संकुचन कहते हैं। मांग में परिवर्तन किसी अन्य कारण से होता है, जैसे आय, रुचि, संबंधित वस्तु की कीमत या क्रेताओं की संख्या, और इसमें पूरा वक्र दाएं या बाएं खिसक जाता है।

मांग के नियम के अपवाद कौन-कौन हैं?

मान्य अपवाद हैं गिफिन या घटिया वस्तुएं, वेब्लेन प्रभाव वाली प्रतिष्ठा और दिखावे की वस्तुएं, नमक तथा दवा जैसी अनिवार्य वस्तुएं, कीमत में आगे परिवर्तन की आशंका, और अज्ञानता जिसमें ऊंची कीमत को अच्छी गुणवत्ता मान लिया जाता है। इन सभी में कीमत बढ़ने पर मांग घटती नहीं।

मांग पूर्ण लोचदार या पूर्ण बेलोचदार होने का क्या अर्थ है?

पूर्ण लोचदार मांग की लोच अनंत होती है: एक ही कीमत पर क्रेता कितनी भी मात्रा ले लेंगे और मांग वक्र क्षैतिज रेखा होता है। पूर्ण बेलोचदार मांग की लोच शून्य होती है: कीमत चाहे कुछ हो, मात्रा वही रहती है और वक्र ऊर्ध्वाधर रेखा होता है। वास्तविक वस्तुएं इन दोनों के बीच होती हैं।

बाज़ार में संतुलन कीमत कैसे तय होती है?

वह कीमत संतुलन कीमत होती है जिस पर क्रेता जितना खरीदना चाहते हैं वह विक्रेताओं द्वारा बेची जाने वाली मात्रा के ठीक बराबर हो। कीमत उससे ऊपर हो तो न बिके माल का अतिरेक विक्रेताओं को कीमत घटाने को विवश करता है; नीचे हो तो कमी के कारण वे कीमत बढ़ा देते हैं। इस प्रकार बाज़ार स्वयं संतुलन पर लौट आता है।

एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा और अल्पाधिकार में क्या अंतर है?

एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में विक्रेताओं की संख्या बड़ी होती है, प्रवेश और निर्गम मुक्त होता है, और प्रत्येक विभेदित या ब्रांडेड वस्तु बेचता है, जैसे साबुन या टूथपेस्ट, तथा कीमत पर उसका नियंत्रण थोड़ा ही होता है। अल्पाधिकार में विक्रेता कुछ ही होते हैं, इसलिए प्रत्येक को यह सोचना पड़ता है कि उसकी कीमत पर दूसरे क्या प्रतिक्रिया देंगे, जिससे वे परस्पर निर्भर और मिलीभगत के इच्छुक हो जाते हैं।

एकक्रेताधिकार क्या है?

एकक्रेताधिकार वह बाज़ार है जिसमें अनेक विक्रेताओं के सामने एक ही क्रेता होता है, यानी एकाधिकार का उलटा रूप। वह एकमात्र क्रेता अपनी दी जाने वाली कीमत को प्रभावित कर सकता है, जैसा तब होता है जब किसी छोटे नगर के श्रम बाज़ार पर एक बड़ा नियोक्ता छाया हो या किसी फसल का एकमात्र खरीदार कोई एक अभिकरण हो।

स्रोत

  • व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (कक्षा 12), अध्याय 2: उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत — एनसीईआरटी
  • व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (कक्षा 12), अध्याय 5: बाज़ार संतुलन — एनसीईआरटी
  • व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (कक्षा 12), अध्याय 6: अपूर्ण प्रतिस्पर्धा के बाज़ार — एनसीईआरटी
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