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GK नोट्सभारतीय अर्थव्यवस्थागरीबी और बेरोजगारी

भारत में गरीबी और बेरोजगारी: अवधारणा, मापन और प्रश्न

गरीबी और बेरोजगारी के परीक्षोपयोगी नोट्स: गरीबी रेखा, तेंदुलकर और रंगराजन समितियां, गरीबों की श्रेणियां, बेरोजगारी के प्रकार तथा प्रमुख योजनाएं।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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भारत में गरीबी और बेरोजगारी: अवधारणा, मापन और प्रश्न — GK24 title card
भारत में गरीबी और बेरोजगारी: अवधारणा, मापन और प्रश्न — GK24 title card

गरीबी और बेरोजगारी भारतीय अर्थव्यवस्था के वे दो विषय हैं जो लगभग हर सामान्य जागरूकता प्रश्नपत्र में आते हैं, और प्रश्न कुछ निश्चित परिभाषाओं से ही बनते हैं: गरीबी रेखा कैसे खींची जाती है, कौन खींचता है, गरीबों की श्रेणियों के नाम क्या हैं, कौन-सी बेरोजगारी किस स्थिति से जुड़ी है और भारत में रोजगार किन सर्वेक्षणों से मापा जाता है। यह अध्याय राय का नहीं, सटीकता का है।

गरीबी रेखा क्या है

भारत में गरीबी मुख्यतः आय के बजाय उपभोग व्यय से मापी जाती रही है, क्योंकि बड़े अनौपचारिक क्षेत्र वाली अर्थव्यवस्था में आय का लेखा रखना कठिन है। गरीबी रेखा मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय का वह स्तर है जिससे नीचे व्यक्ति को गरीब गिना जाता है, और यह ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों के लिए अलग-अलग खींची जाती है, क्योंकि दोनों में कीमतें और आवश्यकताएं भिन्न होती हैं। आरंभिक सरकारी रेखा कैलोरी मानक पर टिकी थी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 2400 कैलोरी और नगरीय क्षेत्रों में 2100 कैलोरी थी; नगरीय आंकड़ा इसलिए कम है क्योंकि वहां काम औसतन कम शारीरिक श्रम मांगता है। जिन घरेलू उपभोग सर्वेक्षणों पर यह अनुमान टिका है, वे राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय कराता है, जो 2019 से राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के भीतर काम करता है।

प्रमुख समितियां

समितिरिपोर्ट वर्षमुख्य सिफारिश
वाई. के. अलघ कार्यदल1979ग्रामीण और नगरीय कैलोरी मानक पर आधारित गरीबी रेखा
डी. टी. लकड़वाला विशेषज्ञ समूह1993राज्यवार गरीबी रेखाएं, औद्योगिक तथा कृषि श्रमिक मूल्य सूचकांकों से संशोधन
सुरेश तेंदुलकर विशेषज्ञ समूह2009कैलोरी आधार छोड़ा, एक समान उपभोग टोकरी तथा स्वास्थ्य और शिक्षा व्यय को शामिल किया
सी. रंगराजन विशेषज्ञ समूह2014ग्रामीण और नगरीय टोकरियां फिर अलग कीं, रेखा ऊंची की तथा संशोधित मिश्रित संदर्भ अवधि अपनाई

गरीबी के प्रकार और गरीबों की श्रेणियां

निरपेक्ष गरीबी का अर्थ है जीवन स्तर के एक निश्चित न्यूनतम मानक से नीचे होना, जबकि सापेक्ष गरीबी एक समूह की तुलना दूसरे से करती है और वह धनी देशों में भी रहती है। मानक वर्गीकरण में गरीबों को दीर्घकालिक गरीब, जो सदा या प्रायः गरीब रहते हैं, तथा अस्थायी गरीब में बांटा जाता है, जिनकी स्थिति बदलती रहती है। अस्थायी गरीबों में जो नियमित रूप से गरीबी रेखा के आर-पार आते-जाते हैं, जैसे छोटे किसान और मौसमी मजदूर, उन्हें मंथन वाले गरीब यानी चर्निंग पुअर कहा जाता है, और जो सामान्यतः रेखा से ऊपर रहते हैं तथा किसी विपत्ति में ही नीचे जाते हैं, उन्हें कभी-कभार के गरीब कहते हैं। शीर्ष गणना अनुपात, अर्थात रेखा से नीचे की जनसंख्या का हिस्सा, सबसे प्रचलित माप है, पर वह यह नहीं बताता कि लोग रेखा से कितने नीचे हैं, जिसे गरीबी अंतराल सूचकांक दर्शाता है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक इसके बजाय स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर की वंचनाओं को देखता है।

बेरोजगारी के प्रकार

प्रकारअर्थ
छिपी या प्रच्छन्नआवश्यकता से अधिक लोग लगे हों, कुछ के हटने पर उत्पादन न घटे; पारिवारिक खेती इसका उदाहरण
मौसमीकाम वर्ष के कुछ महीनों में ही मिले, जैसे कृषि और चीनी मिलें
संरचनात्मकश्रमिकों के कौशल और अर्थव्यवस्था द्वारा सृजित रोजगार का मेल न बैठना
चक्रीयमंदी में मांग घटने से उत्पन्न बेरोजगारी
घर्षणात्मकएक नौकरी छोड़कर दूसरी पाने के बीच का छोटा अंतराल
शिक्षितयोग्यता के अनुरूप काम न पाने वाले प्रशिक्षित युवा

अल्प रोजगार बेरोजगारी से अलग है: व्यक्ति काम तो करता है, पर अपनी इच्छा से कम घंटे या अपने कौशल से बहुत नीचे के काम पर। भारतीय कृषि में प्रच्छन्न बेरोजगारी पाठ्यपुस्तकों का मानक उदाहरण है।

रोजगार का मापन

भारत में रोजगार पंजीकरण से नहीं, प्रतिदर्श सर्वेक्षणों से मापा जाता है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय तीन संदर्भ अवधियां प्रयोग करता है: सामान्य स्थिति, जो पिछले 365 दिनों के बड़े भाग की गतिविधि पूछती है और जिससे सामान्य मुख्य तथा गौण स्थिति निकलती है; वर्तमान साप्ताहिक स्थिति, जो पिछले सात दिनों को देखती है; और वर्तमान दैनिक स्थिति, जो पिछले सप्ताह के हर आधे दिन की गतिविधि दर्ज करती है और इसीलिए सबसे अधिक बेरोजगारी दिखाती है। 2017 से आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वार्षिक और नगरीय क्षेत्रों के लिए त्रैमासिक अनुमान देता है। तीन अनुपात पूछे जाते हैं: श्रम बल भागीदारी दर, यानी काम कर रहे या काम खोज रहे लोगों का जनसंख्या में हिस्सा; श्रमिक जनसंख्या अनुपात, यानी वास्तव में काम कर रहे लोगों का हिस्सा; और बेरोजगारी दर, यानी श्रम बल का वह भाग जो काम खोज रहा है पर पा नहीं रहा।

प्रमुख कार्यक्रम

2005 में पारित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम प्रत्येक ऐसे ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने को तैयार हों, एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देता है, और समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देय होता है। इससे पहले के रोजगार कार्यक्रमों में समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना और संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना शामिल थे। स्वरोजगार और कौशल के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जिसे दीनदयाल अंत्योदय योजना नाम दिया गया, तथा 2015 में आरंभ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना चलाई जाती है। खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली, 2000 की अंत्योदय अन्न योजना और 2013 का राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

परीक्षक आंकड़ों से अधिक परिभाषाएं और संस्थाएं पूछते हैं। सबसे आम प्रश्न हैं कि उपभोग सर्वेक्षण कौन कराता है, कौन-सी समिति किस वर्ष और किस सिफारिश से जुड़ी है, तथा मंथन वाले, कभी-कभार के और दीर्घकालिक गरीबों का ठीक-ठीक अर्थ क्या है। बेरोजगारी में प्रच्छन्न बनाम मौसमी और संरचनात्मक बेरोजगारी का चार विकल्प वाला प्रश्न मानक है, और बैंकिंग परीक्षाओं में श्रम बल भागीदारी दर तथा श्रमिक जनसंख्या अनुपात का अंतर पूछा जाता है। मनरेगा से उसका वर्ष और गारंटी वाले दिनों की संख्या पूछी जाती है। किसी चालू गरीबी अनुपात को रटने से बचें, क्योंकि वह आंकड़ा समिति और सर्वेक्षण के अनुसार बदलता है और प्रश्न बैंकों में प्रायः पुराना पड़ा रहता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

गरीबी रेखा का आधारमासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय
कैलोरी मानकग्रामीण 2400 और नगरीय 2100 कैलोरी प्रतिदिन
सर्वेक्षण संस्थाराष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अंतर्गत
तेंदुलकर समिति2009 में रिपोर्ट; कैलोरी आधार छोड़ा
रंगराजन समिति2014 में रिपोर्ट; ग्रामीण और नगरीय टोकरियां अलग
मंथन वाले गरीबगरीबी रेखा के आर-पार नियमित आवाजाही
प्रच्छन्न बेरोजगारीअतिरिक्त श्रमिक, जिनके हटने पर उत्पादन नहीं घटता
मनरेगा2005 का अधिनियम; वर्ष में सौ दिन का रोजगार
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण2017 से वार्षिक रोजगार अनुमान
बहुआयामी गरीबी सूचकांकस्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 11 Jan 2023, Shift 2आसान

भारत में गरीबी रेखा की गणना के लिए प्रतिदर्श सर्वेक्षण निम्नलिखित में से कौन-सा संगठन कराता है?

  1. A.वित्त मंत्रालय
  2. B.भारतीय रिजर्व बैंक
  3. C.केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय
  4. D.राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय

व्याख्या

सही उत्तर D, राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय है। यही संस्था उपभोग व्यय के बड़े घरेलू सर्वेक्षण कराती है, जिनसे गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की संख्या निकाली जाती है, और अब यह सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के भीतर काम करती है। विकल्प A गलत है क्योंकि वित्त मंत्रालय बजट और आर्थिक समीक्षा में इन अनुमानों का उपयोग तो करता है पर घरेलू आंकड़े स्वयं एकत्र नहीं करता। विकल्प B गलत है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक प्राधिकरण और बैंकिंग नियामक है, और उसके आंकड़े मुद्रा, ऋण तथा भुगतान से जुड़े होते हैं, घरेलू उपभोग टोकरी से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय राष्ट्रीय लेखा और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक बनाता था; घरेलू प्रतिदर्श सर्वेक्षण दूसरी संस्था का काम था और 2019 में दोनों का विलय राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय में हुआ।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 16 Jan 2023, Shift 4मध्यम

जो लोग नियमित रूप से गरीबी रेखा के आर-पार आते-जाते रहते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?

  1. A.कभी-कभार के गरीब
  2. B.प्रायः गरीब
  3. C.दीर्घकालिक गरीब
  4. D.मंथन वाले गरीब
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. मंथन वाले गरीब

व्याख्या

सही उत्तर D, मंथन वाले गरीब है। मानक वर्गीकरण में मंथन वाले गरीब वे हैं जिनका उपभोग बार-बार गरीबी रेखा से ऊपर जाकर फिर नीचे आ जाता है; इसके ठेठ उदाहरण छोटे तथा सीमांत किसान और वे दिहाड़ी मजदूर हैं जिनकी कमाई मौसम पर निर्भर करती है। विकल्प A गलत है क्योंकि कभी-कभार के गरीब सामान्यतः रेखा से ऊपर रहते हैं और किसी बीमारी या फसल हानि जैसी विपत्ति में ही नीचे जाते हैं, इसलिए उनकी आवाजाही नियमित नहीं होती। विकल्प B गलत है क्योंकि प्रायः गरीब अधिकांश समय रेखा से नीचे रहते हैं और वे दीर्घकालिक गरीबों का ही भाग हैं, आर-पार आने-जाने वाला वर्ग नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि सदा गरीब और प्रायः गरीब मिलकर बने दीर्घकालिक गरीब वर्ष दर वर्ष रेखा से नीचे बने रहते हैं, यानी वही वर्ग है जो रेखा पार नहीं करता।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

वह स्थिति जिसमें किसी काम में आवश्यकता से अधिक श्रमिक लगे हों और कुछ के हटने पर भी उत्पादन न घटे, क्या कहलाती है?

  1. A.घर्षणात्मक बेरोजगारी
  2. B.प्रच्छन्न बेरोजगारी
  3. C.चक्रीय बेरोजगारी
  4. D.संरचनात्मक बेरोजगारी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्रच्छन्न बेरोजगारी

व्याख्या

सही उत्तर B, प्रच्छन्न बेरोजगारी है। इसमें अतिरिक्त श्रमिक देखने में कार्यरत लगते हैं, पर उत्पादन में उनका सीमांत योगदान लगभग शून्य होता है, इसीलिए इसे छिपी हुई बेरोजगारी कहा जाता है; भारत का मानक उदाहरण वह पारिवारिक खेत है जिस पर कई सदस्य उतनी भूमि जोतते हैं जिसे दो लोग संभाल सकते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि घर्षणात्मक बेरोजगारी एक नौकरी छोड़कर दूसरी खोजने के बीच का छोटा अंतराल है और वह पूरी तरह स्वस्थ अर्थव्यवस्था में भी रहती है। विकल्प C गलत है क्योंकि चक्रीय बेरोजगारी मंदी में मांग घटने से आती है और अर्थव्यवस्था के सुधरते ही समाप्त हो जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि संरचनात्मक बेरोजगारी तब होती है जब श्रमिकों का कौशल अर्थव्यवस्था द्वारा सृजित रोजगार से मेल नहीं खाता, जिसके लिए मांग नहीं बल्कि पुनःप्रशिक्षण चाहिए।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत एक ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में कितने दिन के रोजगार की गारंटी है?

  1. A.50
  2. B.75
  3. C.100
  4. D.150
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 100

व्याख्या

सही उत्तर C, सौ दिन है। 2005 में पारित इस अधिनियम से हर उस ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने को तैयार हों, एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन के मजदूरी रोजगार का कानूनी अधिकार मिलता है, और निर्धारित अवधि में काम न मिलने पर आवेदक बेरोजगारी भत्ते का हकदार हो जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पचास दिन अधिनियम के किसी प्रावधान से मेल नहीं खाते, यद्यपि सूखा या प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सौ से अधिक दिन कभी-कभी स्वीकृत किए जाते रहे हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि पचहत्तर दिन की कोई गारंटी इस कानून में नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि डेढ़ सौ दिन भी वैधानिक अधिकार नहीं है, और किसी राहत घोषणा को अधिनियम का प्रावधान मान लेना अभ्यर्थियों की आम भूल है।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

2009 में गरीबी रेखा से कैलोरी मानक का आधार हटाने की सिफारिश करने वाले विशेषज्ञ समूह के अध्यक्ष कौन थे?

  1. A.डी. टी. लकड़वाला
  2. B.सुरेश तेंदुलकर
  3. C.सी. रंगराजन
  4. D.वाई. के. अलघ
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सुरेश तेंदुलकर

व्याख्या

सही उत्तर B, सुरेश तेंदुलकर है। तेंदुलकर विशेषज्ञ समूह ने 2009 में रिपोर्ट दी, कैलोरी आधार छोड़ा, उपभोग के लिए मिश्रित संदर्भ अवधि अपनाई तथा स्वास्थ्य और शिक्षा पर निजी व्यय को टोकरी में शामिल किया, जिससे गरीबों का अनुमानित अनुपात बढ़ गया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1993 के लकड़वाला विशेषज्ञ समूह ने कैलोरी आधारित रेखा बनाए रखी और उसका योगदान रेखाओं को राज्यवार बनाना तथा उन्हें औद्योगिक एवं कृषि श्रमिक मूल्य सूचकांकों से संशोधित करना था। विकल्प C गलत है क्योंकि रंगराजन विशेषज्ञ समूह ने तेंदुलकर के बाद 2014 में रिपोर्ट दी और ग्रामीण तथा नगरीय टोकरियां फिर अलग करते हुए रेखा ऊंची की। विकल्प D गलत है क्योंकि 1979 में वाई. के. अलघ के कार्यदल ने ही कैलोरी मानक तय किया था, जो पूछे गए उत्तर का उल्टा है।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में ग्रामीण गरीबी रेखा खींचने के लिए मूल रूप से प्रयुक्त कैलोरी मानक क्या था?

  1. A.प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2100 कैलोरी
  2. B.प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2400 कैलोरी
  3. C.प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1800 कैलोरी
  4. D.प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 3000 कैलोरी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2400 कैलोरी

व्याख्या

सही उत्तर B, प्रतिदिन 2400 कैलोरी है। 1979 के कार्यदल ने ग्रामीण रेखा उस उपभोग व्यय पर तय की जिससे प्रतिदिन 2400 कैलोरी प्राप्त हो सके, इस आधार पर कि ग्रामीण काम में शारीरिक श्रम अधिक लगता है। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रतिदिन 2100 कैलोरी उसी समय तय किया गया नगरीय मानक है, और यह जोड़ी जानबूझकर विकल्पों में साथ रखी जाती है ताकि परखा जा सके कि अभ्यर्थी को कौन-सा किसका है यह याद है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1800 कैलोरी का आंकड़ा न्यूनतम आहार ऊर्जा की कुछ अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में आता है, भारत की सरकारी रेखा में नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 3000 कैलोरी किसी भी निर्वाह मानक से बहुत ऊपर है। याद रखने का नियम सरल है: ग्रामीण मानक दोनों में बड़ा है क्योंकि वहां श्रम अधिक है।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

वर्ष के कुछ ही महीनों में काम उपलब्ध होने से उत्पन्न बेरोजगारी क्या कहलाती है?

  1. A.मौसमी बेरोजगारी
  2. B.संरचनात्मक बेरोजगारी
  3. C.प्रच्छन्न बेरोजगारी
  4. D.शिक्षित बेरोजगारी
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मौसमी बेरोजगारी

व्याख्या

सही उत्तर A, मौसमी बेरोजगारी है। कृषि में बुवाई, रोपाई और कटाई के समय श्रम की मांग रहती है और बीच में बहुत कम, तथा किसी फसल से जुड़े उद्योग जैसे चीनी मिलें और चावल मिलें वर्ष के एक भाग में ही चलते हैं, इसलिए उनसे जुड़े श्रमिक शेष महीनों में खाली रहते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि संरचनात्मक बेरोजगारी श्रमिकों के कौशल और अर्थव्यवस्था द्वारा सृजित रोजगार के बेमेल से आती है और वह पूरे वर्ष बनी रहती है, कैलेंडर के अनुसार नहीं चलती। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रच्छन्न बेरोजगारी में पूरे मौसम अतिरिक्त श्रमिक काम पर लगे रहते हैं, जिनके हटने पर उत्पादन नहीं घटता। विकल्प D गलत है क्योंकि शिक्षित बेरोजगारी उन प्रशिक्षित युवाओं की है जिन्हें योग्यता के अनुरूप काम नहीं मिलता, जो वर्ष के समय का नहीं रोजगार की गुणवत्ता का प्रश्न है।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

रोजगार का कौन-सा माप संदर्भ सप्ताह के हर आधे दिन की गतिविधि दर्ज करता है और इसलिए सबसे अधिक बेरोजगारी दिखाता है?

  1. A.सामान्य स्थिति
  2. B.वर्तमान साप्ताहिक स्थिति
  3. C.वर्तमान दैनिक स्थिति
  4. D.मुख्य स्थिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. वर्तमान दैनिक स्थिति

व्याख्या

सही उत्तर C, वर्तमान दैनिक स्थिति है। यह माप सर्वेक्षण से पहले के सात दिनों में हर आधे दिन की गतिविधि नोट करता है, इसलिए खाली बीता हर दिन गिनती में आता है; लंबी संदर्भ अवधियों से छूट जाने वाले छोटे अंतराल भी इसमें पकड़ में आते हैं, जिससे तीनों मापों में यह सबसे अधिक बेरोजगारी दिखाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि सामान्य स्थिति पिछले 365 दिनों के बड़े भाग की गतिविधि पूछती है और यदि व्यक्ति ने वर्ष के अधिकांश भाग में काम किया हो तो उसे रोजगारशुदा मान लेती है, जिससे छोटे खाली अंतराल छिप जाते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि वर्तमान साप्ताहिक स्थिति में संदर्भ सप्ताह के किसी दिन एक घंटा भी काम करने वाला रोजगारशुदा गिना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि मुख्य स्थिति सामान्य स्थिति का ही एक अंश है, जो वर्ष के बड़े भाग की गतिविधि बताती है।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

2017 से भारत में रोजगार और बेरोजगारी के वार्षिक अनुमान कौन-सा सर्वेक्षण देता है?

  1. A.आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण
  2. B.उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण
  3. C.राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण
  4. D.आर्थिक जनगणना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण

व्याख्या

सही उत्तर A, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण है। 2017 में आरंभ इस सर्वेक्षण ने पांच वर्ष पर होने वाले रोजगार और बेरोजगारी सर्वेक्षणों का स्थान लिया और यह ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों के लिए वार्षिक अनुमान तथा नगरीय क्षेत्रों के लिए अधिक बार अनुमान देता है, जिसमें सामान्य स्थिति और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति दोनों मापों का उपयोग होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण पंजीकृत कारखानों के उत्पादन, पूंजी और श्रमिकों के आंकड़े जुटाता है, वह घरेलू श्रम सर्वेक्षण नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण जनसंख्या, स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ा है, रोजगार से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि आर्थिक जनगणना लंबे अंतराल पर प्रतिष्ठानों और उनमें काम करने वालों की गणना करती है और घरों का सर्वेक्षण न करने के कारण बेरोजगारी माप ही नहीं सकती।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

गरीबी के माप के रूप में शीर्ष गणना अनुपात क्या दर्शाता है?

  1. A.गरीब लोग गरीबी रेखा से कितने नीचे हैं
  2. B.गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या का अनुपात
  3. C.गरीबों के बीच आय की असमानता
  4. D.बेरोजगार लोगों की संख्या
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या का अनुपात

व्याख्या

सही उत्तर B, गरीबी रेखा से नीचे जनसंख्या का अनुपात है। शीर्ष गणना अनुपात केवल यह गिनता है कि कितने लोग रेखा से नीचे हैं और उसे कुल जनसंख्या से भाग देता है, इसीलिए इसे समझना और राज्यों के बीच तुलना करना आसान है। विकल्प A गलत है क्योंकि गरीबी की गहराई, यानी गरीबों का रेखा से औसत अंतर, गरीबी अंतराल सूचकांक से मापी जाती है, और यही वह बात है जो शीर्ष गणना अनुपात नहीं बताता। विकल्प C गलत है क्योंकि गरीबों के बीच की असमानता वर्गित गरीबी अंतराल या गिनी गुणांक जैसे मापों से देखी जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि बेरोजगारी अलग अवधारणा है, जिसे श्रम बल सर्वेक्षण मापते हैं; व्यक्ति रोजगार में रहते हुए भी गरीब हो सकता है, जो दिहाड़ी श्रमिकों में आम है।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

बहुआयामी गरीबी सूचकांक किन तीन आयामों में वंचना मापता है?

  1. A.आय, बचत और रोजगार
  2. B.स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर
  3. C.भोजन, वस्त्र और आवास
  4. D.कृषि, उद्योग और सेवाएं
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर

व्याख्या

सही उत्तर B, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर है। यह सूचकांक किसी परिवार को तब गरीब मानता है जब वह इन तीन शीर्षकों के अंतर्गत आने वाले पर्याप्त संकेतकों में वंचित हो, जैसे स्वास्थ्य में पोषण और बाल मृत्यु, शिक्षा में विद्यालय के वर्ष और उपस्थिति, तथा जीवन स्तर में रसोई ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास और संपत्ति। विकल्प A गलत है क्योंकि यह सूचकांक बना ही आय और बचत से आगे देखने के लिए है, जिन्हें उपभोग आधारित गरीबी रेखा पहले ही समेट लेती है। विकल्प C गलत है क्योंकि भोजन, वस्त्र और आवास पारंपरिक मूलभूत आवश्यकताएं हैं और प्रयुक्त संकेतकों से जुड़ी होने पर भी वे तीन आयामों के नाम नहीं हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि कृषि, उद्योग और सेवाएं अर्थव्यवस्था के क्षेत्र हैं, जिनका परिवार की वंचना मापने से कोई संबंध नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में गरीबी अनुमान के लिए सर्वेक्षण कौन कराता है?

राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण कराता है, जिन पर गरीबी के अनुमान टिके होते हैं। 2019 से यह सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के भीतर काम करता है, यद्यपि प्रश्नपत्रों में इसे पुराने नाम से ही पूछा जाता है।

दीर्घकालिक और अस्थायी गरीबों में क्या अंतर है?

दीर्घकालिक गरीब सदा या प्रायः गरीब रहते हैं और वर्ष दर वर्ष रेखा से नीचे बने रहते हैं। अस्थायी गरीब रेखा के आर-पार आते-जाते हैं: मंथन वाले गरीब नियमित रूप से, जैसे मौसमी मजदूर, और कभी-कभार के गरीब सामान्यतः रेखा से ऊपर रहते हुए किसी विपत्ति में ही नीचे चले जाते हैं।

प्रच्छन्न बेरोजगारी क्या है?

यह वह स्थिति है जिसमें किसी काम में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों, इतने कि उनमें से कुछ हटा दिए जाएं तो कुल उत्पादन न घटे। सामान्य उदाहरण वह पारिवारिक खेत है जिस पर कई सदस्य काम करते हैं जबकि दो ही पर्याप्त हैं; ऐसे अतिरिक्त लोगों का सीमांत योगदान लगभग शून्य होता है।

मनरेगा क्या गारंटी देता है?

2005 के अधिनियम के अंतर्गत हर उस ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने को तैयार हों, एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन के मजदूरी रोजगार का अधिकार है। निर्धारित अवधि में काम न मिलने पर आवेदक बेरोजगारी भत्ते का हकदार हो जाता है।

बेरोजगारी दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात में क्या अंतर है?

बेरोजगारी दर श्रम बल का वह हिस्सा है, अर्थात काम कर रहे या काम खोज रहे लोगों में वह भाग, जिसे काम नहीं मिल रहा। श्रमिक जनसंख्या अनुपात पूरी जनसंख्या का वह हिस्सा है जो वास्तव में काम कर रहा है, इसलिए वह यह भी दर्शाता है कि कितने लोग काम चाहते हैं और कितनों को मिला।

स्रोत

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