भारत में नियोजन और नीति आयोग: योजनाएँ, मॉडल और संस्थाएँ
परीक्षा के लिए भारतीय नियोजन के नोट्स: आरंभिक योजना प्रस्ताव, योजना आयोग, बारह पंचवर्षीय योजनाएँ उनके मॉडल और लक्ष्यों सहित तथा नीति आयोग की संरचना।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

स्वतंत्र भारत ने विकास का रास्ता नियोजन से चुना, और पैंसठ वर्ष तक यह पंचवर्षीय योजना ही तय करती रही कि सार्वजनिक धन कहाँ लगेगा। अर्थव्यवस्था खंड में यह अध्याय इसलिए प्रिय है कि इसमें सब कुछ जोड़ों में है: योजना के साथ उसका क्रम, वर्ष, मॉडल और नारा, और फिर वे संस्थाएँ जिन्होंने ये योजनाएँ बनाईं। सन 2015 से योजना आयोग का स्थान नीति आयोग ने ले लिया, इसलिए अब प्रश्न कहानी के दोनों भागों से आते हैं।
स्वतंत्रता से पहले का विचार
नियोजन पर बहस 1947 से बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। एम. विश्वेश्वरैया ने 1934 में अपनी पुस्तक प्लांड इकोनॉमी फॉर इंडिया में यह तर्क रखा। कांग्रेस ने 1938 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में राष्ट्रीय योजना समिति बनाई, उस समय सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस अध्यक्ष थे। सन 1944 में जे. आर. डी. टाटा और जी. डी. बिड़ला सहित आठ प्रमुख उद्योगपतियों ने बॉम्बे योजना प्रकाशित की; उसी वर्ष एस. एन. अग्रवाल ने गाँव और लघु उद्योग पर आधारित गांधीवादी योजना दी; 1945 में एम. एन. राय ने समाजवादी आधार पर जन योजना रखी; और 1950 में जयप्रकाश नारायण ने सर्वोदय योजना प्रस्तुत की। परीक्षक योजना के साथ उसका प्रस्तावक पूछते हैं, इसलिए ये पाँचों नाम एक सूची के रूप में याद करें।
योजना आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद
योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव से हुई। यह न संवैधानिक संस्था थी न वैधानिक, प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते थे और कैबिनेट स्तर का उपाध्यक्ष इसे चलाता था। राज्यों को स्वर देने के लिए 6 अगस्त 1952 को राष्ट्रीय विकास परिषद बनी, वह भी कार्यपालिका के प्रस्ताव से; इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते थे और इसमें सभी मुख्यमंत्री तथा आयोग के सदस्य रहते थे, और अंतिम स्वीकृति यही परिषद देती थी। आयोग गाडगिल सूत्र के आधार पर राज्यों को अनुदान की संस्तुति करता था, जबकि अनुच्छेद 280 के अंतर्गत बनी संवैधानिक संस्था वित्त आयोग करों के वैधानिक बँटवारे का काम देखती थी।
पंचवर्षीय योजनाएँ एक दृष्टि में
| योजना | अवधि | मॉडल या मुख्य लक्ष्य |
|---|---|---|
| प्रथम | 1951 से 1956 | हैरोड डोमर मॉडल; कृषि, सिंचाई और नदी घाटी परियोजनाओं को प्राथमिकता; लक्ष्य से अधिक उपलब्धि |
| द्वितीय | 1956 से 1961 | महालनोबिस मॉडल; भारी और आधारभूत उद्योग; औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 इसी से जुड़ा है |
| तृतीय | 1961 से 1966 | आत्मनिर्भर और स्वतः स्फूर्त अर्थव्यवस्था; दो युद्धों और सूखे से विफल, फिर 1966 से 1969 तक योजना अवकाश |
| चतुर्थ | 1969 से 1974 | स्थिरता के साथ विकास तथा क्रमिक आत्मनिर्भरता |
| पंचम | 1974 से 1979 | गरीबी हटाओ और आत्मनिर्भरता; एक वर्ष पहले समाप्त, उसके बाद चल योजना |
| षष्ठ | 1980 से 1985 | गरीबी उन्मूलन के साथ आधुनिकीकरण और नियंत्रणों में ढील की शुरुआत |
| सप्तम | 1985 से 1990 | अन्न, काम और उत्पादकता, रोजगार पर विशेष बल |
| अष्टम | 1992 से 1997 | मानव संसाधन विकास; 1991 के सुधारों और दो वार्षिक योजनाओं के बाद आरंभ |
| नवम | 1997 से 2002 | सामाजिक न्याय और समता के साथ विकास |
| दशम | 2002 से 2007 | दस वर्षों में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी करना और गरीबी अनुपात घटाना |
| एकादश | 2007 से 2012 | तीव्र और अधिक समावेशी विकास |
| द्वादश | 2012 से 2017 | तीव्र, अधिक समावेशी और संधारणीय विकास; यही अंतिम पंचवर्षीय योजना रही |
नीति आयोग
नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अर्थात नीति आयोग 1 जनवरी 2015 को मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से अस्तित्व में आया और उसने योजना आयोग का स्थान लिया। पूर्ववर्ती संस्था की तरह यह भी न संवैधानिक है न वैधानिक, पर इसका स्वभाव अलग है: यह परामर्श देने वाला विचार समूह है और राज्यों को धन आवंटित नहीं करता। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। इसकी संरचना में उपाध्यक्ष, पूर्णकालिक सदस्य, अंशकालिक सदस्य, केंद्रीय मंत्रिपरिषद से लिए गए पदेन सदस्य, विशेष आमंत्रित तथा सचिव स्तर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है, जिसकी नियुक्ति प्रधानमंत्री करते हैं। इसकी संचालन परिषद में प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और शेष केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल सम्मिलित होते हैं, तथा कुछ राज्यों से जुड़े विषयों के लिए क्षेत्रीय परिषदें बनाई जाती हैं।
क्या बदला और नीति आयोग करता क्या है
- योजना आयोग राज्यों को योजना मद में धन देता था; नीति आयोग के पास यह अधिकार नहीं है और अंतरण अब वित्त आयोग तथा केंद्रीय बजट के माध्यम से होता है।
- पहले नियोजन ऊपर से नीचे और एक समान था; नीति आयोग नीचे से ऊपर की पद्धति अपनाता है और सहकारी तथा प्रतिस्पर्धी संघवाद की बात करता है, जिसमें राज्य साझेदार भी हैं और प्रदर्शन में प्रतिद्वंद्वी भी।
- पंचवर्षीय योजनाओं के स्थान पर इसने दीर्घकालिक दृष्टिपत्र, मध्यम अवधि की रणनीति और अल्पकालिक कार्यसूची की व्यवस्था दी।
- यह अटल नवाचार मिशन चलाता है, स्वास्थ्य, विद्यालयी शिक्षा, जल प्रबंधन और संधारणीय विकास लक्ष्यों पर सूचकांक प्रकाशित करता है तथा आकांक्षी जिला कार्यक्रम का संचालन करता है, जिसमें सबसे पिछड़े जिलों को मापने योग्य संकेतकों पर क्रम दिया जाता है।
दोहराने के लिए तीन आधार पकड़ लें: दोनों पुरानी संस्थाओं के लिए 1950 और 1952, नीति आयोग के लिए 2015, तथा पहली दो योजनाओं के साथ हैरोड डोमर और महालनोबिस मॉडल का जोड़ा। इस अध्याय का शेष सब कुछ इन्हीं पर टिका है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय के प्रश्न प्रायः एक पंक्ति के मिलान वाले होते हैं। किसी संस्था का स्थापना वर्ष, किसी योजना का मॉडल, किसी योजना का नारा अथवा किसी संस्था का अध्यक्ष, यही पूछा जाता है। स्थायी भ्रम हैं हैरोड डोमर मॉडल बनाम महालनोबिस मॉडल, योजना आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद के लिए 1950 बनाम 1952, तथा योजना अवकाश को तृतीय के स्थान पर चतुर्थ योजना के बाद रख देना। दूसरा वर्ग यह पूछता है कि नीति आयोग योजना आयोग से किस प्रकार भिन्न है, जहाँ मुख्य बिंदु यह है कि वह परामर्श देता है, धन आवंटित नहीं करता। यह भी याद रखें कि दोनों संस्थाएँ कार्यपालिका के प्रस्ताव से बनीं, इसलिए कोई भी संवैधानिक या वैधानिक नहीं है, और कथन आधारित प्रश्न प्रायः यहीं से आते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्लांड इकोनॉमी फॉर इंडिया | एम. विश्वेश्वरैया द्वारा 1934 में लिखित |
|---|---|
| राष्ट्रीय योजना समिति | 1938 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में गठित |
| बॉम्बे योजना | 1944 में जे. आर. डी. टाटा और जी. डी. बिड़ला सहित आठ उद्योगपतियों द्वारा प्रकाशित |
| योजना आयोग | 15 मार्च 1950 को स्थापित; अध्यक्ष प्रधानमंत्री; संवैधानिक संस्था नहीं |
| राष्ट्रीय विकास परिषद | 6 अगस्त 1952 को स्थापित; अध्यक्ष प्रधानमंत्री, सदस्य सभी मुख्यमंत्री |
| प्रथम योजना का मॉडल | हैरोड डोमर मॉडल, 1951 से 1956, प्राथमिकता कृषि को |
| द्वितीय योजना का मॉडल | महालनोबिस मॉडल, 1956 से 1961, प्राथमिकता भारी उद्योग को |
| योजना अवकाश | 1966 से 1969, तृतीय योजना के बाद तीन वार्षिक योजनाएँ |
| गरीबी हटाओ योजना | पंचम पंचवर्षीय योजना, 1974 से 1979 |
| अंतिम पंचवर्षीय योजना | द्वादश योजना, 2012 से 2017 |
| नीति आयोग | नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया, 1 जनवरी 2015 को गठित |
| नीति आयोग का नेतृत्व | अध्यक्ष प्रधानमंत्री, एक उपाध्यक्ष तथा सचिव स्तर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत में योजना आयोग की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- A.1947
- B.1950
- C.1952
- D.1956
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1950
व्याख्या
सही उत्तर B, 1950 है। योजना आयोग का गठन 15 मार्च 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव द्वारा हुआ, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते थे, और इसी संस्था ने 2015 में अपने स्थान पर नीति आयोग आने तक सभी पंचवर्षीय योजनाएँ तैयार कीं।
विकल्प A, 1947 स्वतंत्रता और विभाजन का वर्ष है, इस संस्था का नहीं। विकल्प C, 1952 वह वर्ष है जब राज्यों को नियोजन से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद बनी, और यही इस प्रश्न का सबसे सामान्य भ्रम है। विकल्प D, 1956 औद्योगिक नीति प्रस्ताव तथा द्वितीय पंचवर्षीय योजना के आरंभ का वर्ष है। यह भी ध्यान रखें कि आयोग कार्यपालिका के प्रस्ताव से बना था, संविधान या किसी अधिनियम से नहीं, और यह बात अलग कथन के रूप में पूछी जाती है।
नीति आयोग किस तिथि को अस्तित्व में आया?
- A.1 जनवरी 2015
- B.15 मार्च 2014
- C.1 अप्रैल 2016
- D.26 जनवरी 2015
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1 जनवरी 2015
व्याख्या
सही उत्तर A, 1 जनवरी 2015 है। इसी तिथि को मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से योजना आयोग के स्थान पर नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बना, जिसमें प्रधानमंत्री तो अध्यक्ष बने रहे पर संस्था का काम धन आवंटन से बदलकर परामर्श देना हो गया।
विकल्प B में 15 मार्च तिथि तो ठीक है पर वह 1950 में योजना आयोग की स्थापना की थी, अर्थात सही दिन गलत संस्था के साथ जोड़ा गया है। विकल्प C, 1 अप्रैल 2016 केवल एक वित्तीय वर्ष की तिथि है, इस गठन से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प D, 26 जनवरी 2015 गणतंत्र दिवस है और केवल भ्रम के लिए दिया गया है। याद रखने योग्य जोड़ा है योजना आयोग के लिए 1950 और नीति आयोग के लिए 2015, तथा बीच में राष्ट्रीय विकास परिषद के लिए 1952।
भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना किसके मॉडल पर आधारित थी?
- A.पी. सी. महालनोबिस
- B.हैरोड और डोमर
- C.एम. विश्वेश्वरैया
- D.वी. के. आर. वी. राव
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पी. सी. महालनोबिस
व्याख्या
सही उत्तर A, पी. सी. महालनोबिस है। भारतीय सांख्यिकी संस्थान के संस्थापक इस सांख्यिकीविद ने द्वितीय योजना का ढाँचा दिया, जिसमें निवेश इस्पात, मशीनरी और ऊर्जा जैसे भारी तथा आधारभूत उद्योगों की ओर मोड़ा गया, इस तर्क पर कि यही उद्योग आगे चलकर शेष सब कुछ बनाने की क्षमता देंगे।
विकल्प B, हैरोड और डोमर का मॉडल प्रथम योजना का आधार था, जो विकास दर को बचत तथा पूँजी उत्पाद अनुपात से जोड़ता है। विकल्प C, एम. विश्वेश्वरैया ने 1934 में प्लांड इकोनॉमी फॉर इंडिया लिखी और वे नियोजन के विचार के अग्रदूत हैं, पर किसी योजना का मॉडल उनके नाम से नहीं है। विकल्प D, वी. के. आर. वी. राव स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय आय के पहले वैज्ञानिक अनुमान के लिए याद किए जाते हैं। पहली दो योजनाओं के मॉडल का यह जोड़ा इस अध्याय में सर्वाधिक दोहराया जाता है।
भारतीय नियोजन में योजना अवकाश किस पंचवर्षीय योजना की विफलता के बाद घोषित किया गया था?
- A.द्वितीय योजना
- B.तृतीय योजना
- C.चतुर्थ योजना
- D.पंचम योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तृतीय योजना
व्याख्या
सही उत्तर B, तृतीय योजना है। सन 1961 से 1966 की यह योजना 1962 के चीन युद्ध, 1965 के पाकिस्तान युद्ध और भीषण सूखे के कारण बिखर गई, इसलिए नई पंचवर्षीय योजना के स्थान पर सरकार ने 1966 से 1969 तक तीन वार्षिक योजनाएँ चलाईं, जिस अवधि को योजना अवकाश कहा जाता है।
विकल्प A, द्वितीय योजना विदेशी मुद्रा संकट के बावजूद 1956 से 1961 तक पूरी चली और उसी ने भारी उद्योग का आधार रखा। विकल्प C, चतुर्थ योजना वही है जो अवकाश समाप्त होने के बाद 1969 में आरंभ हुई, अर्थात वह कारण नहीं परिणाम है। विकल्प D, पंचम योजना 1978 में नई सरकार ने एक वर्ष पहले समाप्त कर दी थी और उसके बाद चल योजना आई, जो एक अलग प्रकार का व्यवधान है और प्रायः भ्रम पैदा करता है।
गरीबी हटाओ का नारा किस पंचवर्षीय योजना से जुड़ा है?
- A.तृतीय योजना
- B.चतुर्थ योजना
- C.पंचम योजना
- D.षष्ठ योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पंचम योजना
व्याख्या
सही उत्तर C, पंचम योजना है। सन 1974 से 1979 तक चली इस योजना ने गरीबी का उन्मूलन और आत्मनिर्भरता को अपने दो मुख्य उद्देश्य बनाया, और इसी कारण वह गरीबी हटाओ के नारे से याद की जाती है। यह योजना निर्धारित समय से एक वर्ष पहले 1978 में समाप्त कर दी गई और उसके स्थान पर चल योजना लाई गई।
विकल्प A, तृतीय योजना का लक्ष्य आत्मनिर्भर और स्वतः स्फूर्त अर्थव्यवस्था था और उसका अंत योजना अवकाश में हुआ। विकल्प B, चतुर्थ योजना स्थिरता के साथ विकास वाक्यांश तथा 1969 के बैंक राष्ट्रीयकरण के लिए याद की जाती है। विकल्प D, षष्ठ योजना ने गरीबी पर प्रहार जारी रखा और नियंत्रणों में ढील आरंभ की, इसीलिए वह यहाँ विकल्प के रूप में दी गई है। हर योजना के साथ एक वाक्यांश जोड़ लेना इस वर्ग के प्रश्नों का सबसे तेज उपाय है।
नीति आयोग के अध्यक्ष कौन होते हैं?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत के प्रधानमंत्री
- C.केंद्रीय वित्त मंत्री
- D.भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारत के प्रधानमंत्री
व्याख्या
सही उत्तर B, भारत के प्रधानमंत्री है। नीति आयोग की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के पद के साथ जुड़ी है, ठीक वैसे ही जैसे 2015 से पहले योजना आयोग की अध्यक्षता उनके पास थी और जैसे संचालन परिषद तथा राष्ट्रीय विकास परिषद की अध्यक्षता भी उन्हीं के पास रही है।
विकल्प A, राष्ट्रपति संघ के संवैधानिक प्रमुख हैं, पर इस कार्यपालिका संस्था में उनकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प C, केंद्रीय वित्त मंत्री मंत्रिपरिषद से लिए गए पदेन सदस्य हो सकते हैं, पर वे संस्था के अध्यक्ष नहीं होते। विकल्प D, रिजर्व बैंक के गवर्नर केंद्रीय बैंक और मौद्रिक कार्यों के प्रमुख हैं, जिनका नीति आयोग से संबंध नहीं। यह भी याद रखें कि संस्था का कार्यकारी प्रमुख उपाध्यक्ष होता है और प्रशासनिक प्रमुख सचिव स्तर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी।
नीति आयोग की संचालन परिषद में प्रधानमंत्री के अतिरिक्त कौन सम्मिलित होते हैं?
- A.सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल
- B.सभी राज्यों के राज्यपाल
- C.उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश
- D.वित्त आयोग के सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल
व्याख्या
सही उत्तर A है। संचालन परिषद में प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री तथा शेष केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल एक साथ बैठते हैं, ताकि संघ और राज्य मिलकर प्राथमिकताएँ तय कर सकें।
विकल्प B, राज्यों के राज्यपाल इसलिए गलत हैं कि यह परिषद निर्वाचित सरकारों के प्रमुखों पर टिकी है, राज्यों के संवैधानिक प्रमुखों पर नहीं। विकल्प C, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायपालिका के अंग हैं और किसी कार्यपालिका नीति निकाय में नहीं बैठ सकते। विकल्प D, वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के अंतर्गत बनी अलग संवैधानिक संस्था है, जो संघ और राज्यों के बीच करों के बँटवारे की संस्तुति करती है। संचालन परिषद की यही संरचना उस सहकारी संघवाद का सबसे स्पष्ट प्रमाण है जिसका दावा यह संस्था करती है।
सन 1934 में प्रकाशित पुस्तक प्लांड इकोनॉमी फॉर इंडिया किसने लिखी थी?
- A.एम. एन. राय
- B.एम. विश्वेश्वरैया
- C.जयप्रकाश नारायण
- D.एस. एन. अग्रवाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एम. विश्वेश्वरैया
व्याख्या
सही उत्तर B, एम. विश्वेश्वरैया है। इस अभियंता और राजनेता ने दस वर्ष का ऐसा कार्यक्रम रखा जिसमें श्रमिकों को कृषि से हटाकर उद्योग में लगाया जाना था, और 1934 की उनकी यह पुस्तक भारत में नियोजन का पहला व्यवस्थित प्रस्ताव मानी जाती है।
विकल्प A, एम. एन. राय ने 1945 में समाजवादी आधार पर जन योजना बनाई, जिसके केंद्र में कृषि और उपभोक्ता वस्तुएँ थीं। विकल्प C, जयप्रकाश नारायण ने 1950 में सर्वोदय योजना दी, जो गांधीवादी तथा भूदान विचारों पर आधारित थी। विकल्प D, एस. एन. अग्रवाल ने 1944 में गांधीवादी योजना दी, जिसका आधार गाँव और कुटीर उद्योग थे। इनके साथ 1944 की बॉम्बे योजना, जो आठ उद्योगपतियों ने बनाई, मिलाकर पाँच प्रस्तावों और चार लेखकों की सूची बनती है, जिसे परीक्षक आपस में बदलते रहते हैं।
राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन किस वर्ष हुआ था?
- A.1950
- B.1951
- C.1952
- D.1954
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1952
व्याख्या
सही उत्तर C, 1952 है। राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन 6 अगस्त 1952 को कार्यपालिका के प्रस्ताव से हुआ, ताकि राज्य भी राष्ट्रीय नियोजन में भाग ले सकें; इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते थे, इसमें मुख्यमंत्री तथा योजना आयोग के सदस्य रहते थे, और कार्यान्वयन से पहले अंतिम स्वीकृति यही परिषद देती थी।
विकल्प A, 1950 में स्वयं योजना आयोग बना था। विकल्प B, 1951 में प्रथम पंचवर्षीय योजना आरंभ हुई थी। विकल्प D, 1954 का इस क्रम में कोई स्थान नहीं है और वह केवल भरने के लिए दिया गया है। तीनों तिथियाँ क्रम से याद रखें: 1950 में आयोग, 1951 में पहली योजना और 1952 में परिषद। यह भी ध्यान रहे कि आयोग की तरह परिषद को भी कभी संवैधानिक या वैधानिक दर्जा नहीं मिला।
भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना कौन सी थी?
- A.दशम योजना
- B.एकादश योजना
- C.द्वादश योजना
- D.त्रयोदश योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. द्वादश योजना
व्याख्या
सही उत्तर C, द्वादश योजना है। यह 2012 से 2017 तक चली और इसका लक्ष्य तीव्र, अधिक समावेशी तथा संधारणीय विकास था; इसके समाप्त होने पर कोई तेरहवीं योजना नहीं आई, क्योंकि तब तक नीति आयोग योजना आयोग का स्थान ले चुका था और पंचवर्षीय योजनाओं के बदले दीर्घकालिक दृष्टिपत्र तथा छोटी कार्यसूची की व्यवस्था बन चुकी थी।
विकल्प A, दशम योजना 2002 से 2007 तक चली और उसने दस वर्ष में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा। विकल्प B, एकादश योजना 2007 से 2012 तक तीव्र और अधिक समावेशी विकास के विषय पर चली, जिसका वाक्यांश बारहवीं योजना से मिलता जुलता है। विकल्प D, त्रयोदश योजना कभी बनी ही नहीं। अंतिम दो योजनाओं के मिलते जुलते शब्द ही यहाँ जाल हैं, इसलिए संधारणीय शब्द केवल द्वादश योजना से जोड़ें।
अटल नवाचार मिशन किस संस्था की पहल है?
- A.नीति आयोग
- B.भारतीय रिजर्व बैंक
- C.वित्त आयोग
- D.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नीति आयोग
व्याख्या
सही उत्तर A, नीति आयोग है। यह मिशन नवाचार और उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देता है, मुख्यतः विद्यालयों में टिंकरिंग प्रयोगशालाओं तथा महाविद्यालयों और संस्थानों में इनक्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से, और सरकार के विचार समूह के रूप में इसका संचालन नीति आयोग करता है।
विकल्प B, भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय बैंक है और मौद्रिक नीति, मुद्रा तथा बैंकों के नियमन का काम देखता है। विकल्प C, वित्त आयोग संवैधानिक संस्था है, जो प्रत्येक पाँच वर्ष पर गठित होकर संघ और राज्यों के बीच करों के बँटवारे की संस्तुति करती है। विकल्प D, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड शेयर बाजार का नियमन करता है और निवेशकों की रक्षा करता है। नीति आयोग स्वास्थ्य, विद्यालयी शिक्षा, जल प्रबंधन और संधारणीय विकास लक्ष्यों पर सूचकांक भी प्रकाशित करता है तथा आकांक्षी जिला कार्यक्रम चलाता है।
नीति आयोग के विषय में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A.यह प्रतिवर्ष राज्यों को योजना मद में धन आवंटित करता है
- B.यह संविधान संशोधन से बनी संवैधानिक संस्था है
- C.यह परामर्शदात्री विचार संस्था है, जिसे धन आवंटन का अधिकार नहीं है
- D.इसने वित्त आयोग का स्थान लिया है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. यह परामर्शदात्री विचार संस्था है, जिसे धन आवंटन का अधिकार नहीं है
व्याख्या
सही उत्तर C है। नीति आयोग संघ और राज्य सरकारों को परामर्श देता है, रणनीति बनाता है, कार्यक्रमों की निगरानी करता है और राज्यों के लिए मंच का काम करता है, पर उसके माध्यम से कोई धन नहीं जाता; योजना आयोग से यही उसका सबसे बड़ा अंतर है।
विकल्प A पुराने योजना आयोग का वर्णन है, जो राज्यों की योजनाएँ स्वीकृत करता था और योजना सहायता जारी करता था, और इसी अधिकार से उसका राज्यों पर बड़ा प्रभाव बनता था। विकल्प B इसलिए गलत है कि यह संस्था 1 जनवरी 2015 को मंत्रिमंडलीय प्रस्ताव से बनी, इसलिए वह न संवैधानिक है न वैधानिक। विकल्प D इसलिए गलत है कि वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के अंतर्गत संवैधानिक संस्था है और आज भी करों के बँटवारे की संस्तुति करता है; नीति आयोग ने केवल योजना आयोग का स्थान लिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या नीति आयोग संवैधानिक संस्था है?
नहीं। नीति आयोग 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से बना, ठीक वैसे ही जैसे योजना आयोग 1950 में बना था, इसलिए वह न संवैधानिक संस्था है न वैधानिक। यह कार्यपालिका द्वारा बनाई गई संस्था है, जिसे किसी संविधान संशोधन या संसद के अधिनियम के बिना, केवल एक और मंत्रिमंडलीय निर्णय से बदला या समाप्त किया जा सकता है।
नीति आयोग योजना आयोग से किस प्रकार भिन्न है?
योजना आयोग पंचवर्षीय योजनाएँ बनाता था और राज्यों को योजना मद में धन देता था, जिससे वह नियंत्रण रखने वाली संस्था बन गया था। नीति आयोग केवल परामर्श देता है, दीर्घकालिक रणनीति बनाता है और कार्यक्रमों का मूल्यांकन करता है, जबकि धन अब वित्त आयोग और केंद्रीय बजट से जाता है। यह नीचे से ऊपर की पद्धति अपनाता है और राज्यों को सहकारी तथा प्रतिस्पर्धी संघवाद में साझेदार मानता है।
सन 1966 में योजना अवकाश क्यों घोषित करना पड़ा?
तृतीय योजना 1962 के चीन युद्ध, 1965 के पाकिस्तान युद्ध और भीषण सूखे के दबाव में बिखर गई, जिससे संसाधन घटे और कीमतें बढ़ीं। सरकार ने चौथी योजना तुरंत शुरू करने के बजाय 1966 से 1969 तक तीन वार्षिक योजनाएँ चलाईं, और इसी अवधि को योजना अवकाश कहा जाता है; चतुर्थ योजना 1969 में ही आरंभ हो सकी।
हैरोड डोमर और महालनोबिस मॉडल किन योजनाओं से जुड़े हैं?
प्रथम पंचवर्षीय योजना, 1951 से 1956, हैरोड डोमर मॉडल पर आधारित थी, जो विकास दर को बचत और निवेश की दर से जोड़ता है, और उसमें कृषि तथा सिंचाई को पहला स्थान मिला। द्वितीय योजना, 1956 से 1961, सांख्यिकीविद पी. सी. महालनोबिस के मॉडल पर बनी और उसने भारी तथा आधारभूत उद्योगों को प्राथमिकता दी।
आकांक्षी जिला कार्यक्रम क्या है?
यह नीति आयोग की पहल है, जिसमें देश के सबसे पिछड़े जिलों को चुनकर स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि, बुनियादी ढाँचे और वित्तीय समावेशन के मापने योग्य संकेतकों पर नियमित रूप से क्रम दिया जाता है। यह क्रम सार्वजनिक किया जाता है ताकि जिले सुधार के लिए प्रतिस्पर्धा करें, अर्थात प्रतिस्पर्धी संघवाद का विचार राज्य से नीचे जिले के स्तर पर लागू होता है।
स्रोत
- भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास (कक्षा 11), स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था तथा पंचवर्षीय योजनाओं से संबंधित अध्याय — एनसीईआरटी
- नीति आयोग के गठन संबंधी मंत्रिमंडलीय प्रस्ताव, 1 जनवरी 2015 — भारत सरकार



