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GK नोट्सउत्तर प्रदेशइलाहाबाद उच्च न्यायालय, UPPSC और राज्य आयोग

इलाहाबाद उच्च न्यायालय, UPPSC और राज्य आयोग

उत्तर प्रदेश की न्यायपालिका और आयोगों पर नोट्स: 1866 में स्थापना, लखनऊ खंडपीठ, अनुच्छेद 214 से 231 तथा 315 से 323 के प्रावधान और परीक्षा तथ्य।

लेखक · प्रकाशित · 6 मिनट

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय, UPPSC और राज्य आयोग — GK24 title card
इलाहाबाद उच्च न्यायालय, UPPSC और राज्य आयोग — GK24 title card

संविधान का अनुच्छेद 214 कहता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा, और उत्तर प्रदेश के लिए वह न्यायालय है इलाहाबाद उच्च न्यायालय, जो देश का सबसे पुराना उच्च न्यायालय है और जिसमें न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या भी सबसे अधिक है। इस न्यायालय के साथ संस्थाओं का एक दूसरा समूह खड़ा है जिसके बिना राज्य का कामकाज नहीं चल सकता: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, जो अधिकारियों का चयन करता है, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, जो समूह ग के पद भरता है, तथा मानवाधिकार, सूचना, महिला, पिछड़ा वर्ग, निर्वाचन और वित्त आयोग, जिनमें से प्रत्येक किसी कानून से या सीधे संविधान से बना है। यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी, यूपी पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय से स्थापना वर्ष, मुख्यालय, नियुक्ति प्राधिकारी और अनुच्छेद संख्या पूछते हैं, और ये उत्तर वर्ष दर वर्ष नहीं बदलते।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना

इस न्यायालय की स्थापना भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861 के अंतर्गत हुई और 17 मार्च 1866 को आगरा में उत्तर-पश्चिम प्रांत के उच्च न्यायालय के रूप में इसका उद्घाटन हुआ। वर्ष 1869 में इसका मुख्यालय इलाहाबाद स्थानांतरित कर दिया गया और 1919 के लेटर्स पेटेंट ने इसे वर्तमान नाम दिया। अवध क्षेत्र के लिए लखनऊ में एक पृथक अवध मुख्य न्यायालय कार्य करता था। संयुक्त प्रांत उच्च न्यायालय (समामेलन) आदेश के द्वारा 26 जुलाई 1948 से दोनों को मिला दिया गया और तब से लखनऊ इसी उच्च न्यायालय की स्थायी खंडपीठ है। इसलिए उत्तर प्रदेश में एक ही उच्च न्यायालय है जो दो स्थानों पर बैठता है, प्रयागराज (इलाहाबाद) और लखनऊ। परीक्षक इस बिंदु को पसंद करते हैं क्योंकि अभ्यर्थी खंडपीठ को अलग न्यायालय मान लेते हैं। 9 नवंबर 2000 को जब उत्तराखंड अलग राज्य बना, तब पर्वतीय जिले नैनीताल के नए उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में चले गए और अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार उत्तर प्रदेश के 75 जिलों पर है।

न्यायाधीश: नियुक्ति, शपथ और पदमुक्ति

अनुच्छेद 216 के अनुसार उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा उतने अन्य न्यायाधीश होंगे जितने राष्ट्रपति समय-समय पर आवश्यक समझें, अर्थात संविधान कोई अधिकतम संख्या तय नहीं करता। अनुच्छेद 217 के अंतर्गत न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के राज्यपाल तथा मुख्य न्यायाधीश से भिन्न न्यायाधीश की दशा में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद; आज सिफारिश उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम से आती है। न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहता है, जबकि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की आयु सीमा 65 वर्ष है। योग्यता के लिए व्यक्ति भारत का नागरिक हो और उसने भारत में दस वर्ष न्यायिक पद धारण किया हो अथवा दस वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता रहा हो। अनुच्छेद 215 प्रत्येक उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय बनाता है जिसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति है। अनुच्छेद 219 के अनुसार शपथ राज्य के राज्यपाल के समक्ष ली जाती है। पद से हटाना जानबूझकर कठिन रखा गया है: अनुच्छेद 218 के साथ अनुच्छेद 124(4) के अनुसार सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर संसद के प्रत्येक सदन के विशेष बहुमत वाले समावेदन के बाद केवल राष्ट्रपति ही न्यायाधीश को हटा सकते हैं।

याद रखने योग्य अनुच्छेद

अनुच्छेदविषय
214प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय
215उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय होगा
217न्यायाधीश की नियुक्ति और सेवा शर्तें; सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष
221वेतन राज्य की संचित निधि पर भारित; पेंशन भारत की संचित निधि पर
222राष्ट्रपति द्वारा एक उच्च न्यायालय से दूसरे में न्यायाधीश का स्थानांतरण
224 और 224Aअपर और कार्यकारी न्यायाधीश; सेवानिवृत्त न्यायाधीश का बैठकों में बैठना
226रिट क्षेत्राधिकार, अनुच्छेद 32 से व्यापक क्योंकि इसमें विधिक अधिकार भी आते हैं
227राज्य के सभी न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण
231दो या अधिक राज्यों के लिए एक सामान्य उच्च न्यायालय
233 और 235जिला न्यायाधीश की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय से परामर्श से; अधीनस्थ न्यायपालिका पर नियंत्रण

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग

अनुच्छेद 315 संघ के लिए एक और प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग का प्रावधान करता है, और उत्तर प्रदेश का राज्य आयोग UPPSC है जिसका कार्यालय प्रयागराज में है। वर्तमान स्वरूप में यह भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत गठित संयुक्त प्रांत के लोक सेवा आयोग से विकसित हुआ है। अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति अनुच्छेद 316 के अंतर्गत राज्यपाल करते हैं और वे छह वर्ष तक या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, पद पर रहते हैं; संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य के लिए यही आयु 65 वर्ष है। सदस्य राज्यपाल को त्यागपत्र दे सकता है, परंतु उसे हटाया केवल राष्ट्रपति द्वारा जा सकता है, अनुच्छेद 317 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को जांच के लिए निर्देश भेजने और उसकी रिपोर्ट पर; जो राज्यपाल नियुक्ति करते हैं वे हटा नहीं सकते, और यह इस अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला बिंदु है। अनुच्छेद 318 सेवा शर्तें राज्यपाल के विनियमों पर छोड़ता है और अनुच्छेद 319 सेवानिवृत्त सदस्य को आगे सरकारी नौकरी से रोकता है, हालांकि राज्य आयोग का अध्यक्ष UPSC का अध्यक्ष या सदस्य अथवा किसी अन्य राज्य आयोग का अध्यक्ष बन सकता है। अनुच्छेद 320 कार्यों की गणना करता है: राज्य की सेवाओं में नियुक्ति के लिए परीक्षाएं कराना तथा भर्ती, पदोन्नति, स्थानांतरण और अनुशासनिक मामलों में परामर्श देना; यह परामर्श सलाहकारी है और सरकार उसे अस्वीकार कर सकती है। व्यय अनुच्छेद 322 के अंतर्गत राज्य की संचित निधि पर भारित है और अनुच्छेद 323 के अनुसार आयोग राज्यपाल को वार्षिक प्रतिवेदन देता है, जो उन मामलों के ज्ञापन के साथ विधानमंडल के समक्ष रखा जाता है जिनमें परामर्श स्वीकार नहीं किया गया। UPPSC संयुक्त राज्य या प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा, जिसे पीसीएस कहा जाता है, प्रांतीय सिविल सेवा (न्यायिक) परीक्षा तथा समीक्षा अधिकारी परीक्षा आदि आयोजित करता है।

राज्य के अन्य आयोग

समूह ग के पद 1988 के राज्य अधिनियम से बने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा भरे जाते हैं, जबकि शिक्षक, पुलिस और तकनीकी संवर्गों के अपने बोर्ड हैं। उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 21 के अंतर्गत कार्य करता है: इसका अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति होता है जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो, नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री और नेता प्रतिपक्ष की समिति की सिफारिश पर करते हैं, और 2019 के संशोधन के बाद कार्यकाल तीन वर्ष या सत्तर वर्ष की आयु तक है; UPPSC के सदस्य की तरह राज्य आयोग के सदस्य को भी केवल राष्ट्रपति हटा सकते हैं। राज्य सूचना आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 के अंतर्गत काम करता है, जिसमें एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस राज्य सूचना आयुक्त होते हैं, जिनकी नियुक्ति मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और एक कैबिनेट मंत्री की समिति की सलाह पर राज्यपाल करते हैं। उत्तर प्रदेश का लोकायुक्त 1975 के राज्य अधिनियम के अंतर्गत मंत्रियों और लोक सेवकों के विरुद्ध आरोपों की जांच करता है। दो संस्थाएं सीधे संविधान से आती हैं: अनुच्छेद 243K के अंतर्गत राज्य निर्वाचन आयोग, जो पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराता है और जिसके आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी सुरक्षा मिलती है, तथा अनुच्छेद 243-I के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग, जिसका गठन राज्यपाल प्रत्येक पांच वर्ष में पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए करते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

इस अध्याय से तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, तिथियां और मुख्यालय: स्थापना का 1866, इलाहाबाद स्थानांतरण का 1869, अवध मुख्य न्यायालय के विलय का 1948, और लखनऊ का खंडपीठ होना। दूसरा, अनुच्छेद: उच्च न्यायालय के लिए 214, 215, 216, 217, 219, 221, 222, 226, 227 और 231, अधीनस्थ न्यायपालिका के लिए 233 और 235, लोक सेवा आयोग के लिए 315 से 323, तथा स्थानीय निकाय आयोगों के लिए 243K और 243-I। तीसरा, नियुक्ति और पदमुक्ति के प्राधिकारी, जहां अधिकांश अभ्यर्थी चूकते हैं: उच्च न्यायालय का न्यायाधीश और UPPSC का सदस्य दोनों को नियुक्त करने वाला प्राधिकारी हटाने वाले प्राधिकारी से भिन्न है। सामान्य भ्रमजाल हैं: सेवानिवृत्ति आयु में 62 के स्थान पर 65 देना; UPPSC सदस्य को हटाने में राष्ट्रपति के स्थान पर राज्यपाल देना; राज्य आयोग के सदस्य के कार्यकाल में 62 के स्थान पर UPSC की 65 वर्ष आयु देना; और लखनऊ खंडपीठ को स्वतंत्र उच्च न्यायालय बताना।

महत्वपूर्ण तथ्य

न्यायालयइलाहाबाद उच्च न्यायालय, भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय
उद्घाटन17 मार्च 1866, आगरा में, उत्तर-पश्चिम प्रांत के उच्च न्यायालय के रूप में
मुख्यालय परिवर्तन1869 में इलाहाबाद; वर्तमान नाम 1919 के लेटर्स पेटेंट से
खंडपीठलखनऊ, 26 जुलाई 1948 को अवध मुख्य न्यायालय के विलय से
मूल अधिनियमभारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861
सेवानिवृत्ति आयुउच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए 62 वर्ष (अनुच्छेद 217)
योग्यताभारत में दस वर्ष न्यायिक पद अथवा उच्च न्यायालय में दस वर्ष अधिवक्ता
शपथराज्य के राज्यपाल के समक्ष (अनुच्छेद 219)
रिट शक्तिअनुच्छेद 226, अनुच्छेद 32 से व्यापक
UPPSC कार्यालयप्रयागराज (इलाहाबाद)
UPPSC नियुक्तिराज्यपाल द्वारा (अनुच्छेद 316); कार्यकाल छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु
UPPSC पदमुक्तिकेवल राष्ट्रपति द्वारा, उच्चतम न्यायालय की जांच के बाद (अनुच्छेद 317)
UPPSC व्ययराज्य की संचित निधि पर भारित (अनुच्छेद 322)
समूह ग भर्तीउत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, 1988 का राज्य अधिनियम
मानवाधिकार संस्थाउत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 21
स्थानीय निकाय चुनावराज्य निर्वाचन आयोग, अनुच्छेद 243K

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.उत्तर प्रदेशआसान

भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय कौन है?

  1. A.कलकत्ता उच्च न्यायालय
  2. B.बंबई उच्च न्यायालय
  3. C.इलाहाबाद उच्च न्यायालय
  4. D.मद्रास उच्च न्यायालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इसका उद्घाटन 17 मार्च 1866 को आगरा में उत्तर-पश्चिम प्रांत के उच्च न्यायालय के रूप में हुआ और इसी विवरण के साथ निरंतर अस्तित्व में रहने वाला यह देश का सबसे पुराना उच्च न्यायालय है।

Q2.उत्तर प्रदेशआसान

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का उद्घाटन किस वर्ष हुआ?

  1. A.1861
  2. B.1866
  3. C.1869
  4. D.1919
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1866

इस न्यायालय का उद्घाटन 17 मार्च 1866 को आगरा में उत्तर-पश्चिम प्रांत के उच्च न्यायालय के रूप में हुआ, और यह भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861 के प्राधिकार से हुआ।

Q3.उत्तर प्रदेशमध्यम

लखनऊ का अवध मुख्य न्यायालय किस वर्ष इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मिलाया गया?

  1. A.1935
  2. B.1948
  3. C.1950
  4. D.2000
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1948

संयुक्त प्रांत उच्च न्यायालय (समामेलन) आदेश 26 जुलाई 1948 से प्रभावी हुआ और उसने लखनऊ में बैठने वाले अवध मुख्य न्यायालय को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मिला दिया।

Q4.उत्तर प्रदेशआसान

भारत में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु क्या है?

  1. A.60 वर्ष
  2. B.62 वर्ष
  3. C.65 वर्ष
  4. D.70 वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 62 वर्ष

संविधान का अनुच्छेद 217(1) कहता है कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बासठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद धारण करेगा।

Q5.उत्तर प्रदेशमध्यम

उच्च न्यायालय का न्यायाधीश किसके समक्ष पद की शपथ लेता है?

  1. A.भारत के राष्ट्रपति
  2. B.भारत के मुख्य न्यायाधीश
  3. C.राज्य के राज्यपाल
  4. D.उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. राज्य के राज्यपाल

अनुच्छेद 219 कहता है कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया प्रत्येक व्यक्ति अपना पद ग्रहण करने से पहले राज्य के राज्यपाल अथवा उनके द्वारा इस निमित्त नियुक्त व्यक्ति के समक्ष तीसरी अनुसूची में दिए प्रारूप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा।

Q6.उत्तर प्रदेशआसान

उच्च न्यायालय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत रिट जारी करता है?

  1. A.अनुच्छेद 32
  2. B.अनुच्छेद 131
  3. C.अनुच्छेद 226
  4. D.अनुच्छेद 227
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 226

यह प्रत्येक उच्च न्यायालय को निदेश, आदेश या रिट जारी करने की शक्ति देता है, जिसमें बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा और उत्प्रेषण रिट शामिल हैं, मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए तथा किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी।

Q7.उत्तर प्रदेशकठिन

किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?

  1. A.राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके
  2. B.राज्यपाल, उच्च न्यायालय से परामर्श करके
  3. C.केवल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
  4. D.राज्य लोक सेवा आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राज्यपाल, उच्च न्यायालय से परामर्श करके

अनुच्छेद 233(1) कहता है कि किसी राज्य में जिला न्यायाधीश के पद पर व्यक्तियों की नियुक्ति उस राज्य का राज्यपाल उस राज्य के संबंध में क्षेत्राधिकार रखने वाले उच्च न्यायालय से परामर्श करके करेगा।

Q8.उत्तर प्रदेशमध्यम

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का कार्यालय कहां स्थित है?

  1. A.लखनऊ
  2. B.प्रयागराज
  3. C.कानपुर
  4. D.वाराणसी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रयागराज

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का कार्यालय प्रयागराज में है, वह नगर जो पहले इलाहाबाद कहलाता था और जो राज्य के उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ भी है।

Q9.उत्तर प्रदेशमध्यम

राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य को किस प्राधिकारी द्वारा पद से हटाया जा सकता है?

  1. A.राज्य के राज्यपाल
  2. B.भारत के राष्ट्रपति
  3. C.राज्य के मुख्यमंत्री
  4. D.राज्य विधानमंडल, विशेष बहुमत से
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारत के राष्ट्रपति

अनुच्छेद 317 के अंतर्गत किसी लोक सेवा आयोग के, जिसमें राज्य लोक सेवा आयोग भी शामिल है, अध्यक्ष या अन्य किसी सदस्य को कदाचार के आधार पर केवल राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है, और वह भी तब जब राष्ट्रपति के निर्देश पर उच्चतम न्यायालय जांच कर यह…

Q10.उत्तर प्रदेशमध्यम

राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य का कार्यकाल क्या है?

  1. A.छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो
  2. B.छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो
  3. C.पांच वर्ष या 60 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो
  4. D.तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो

अनुच्छेद 316(2) उपबंध करता है कि लोक सेवा आयोग का सदस्य अपने पद ग्रहण की तिथि से छह वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा, परंतु राज्य लोक सेवा आयोग अथवा संयुक्त आयोग का सदस्य बासठ वर्ष की आयु प्राप्त करने पर पद छोड़ देगा।

Q11.उत्तर प्रदेशमध्यम

उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग किस कानून के अंतर्गत गठित है?

  1. A.मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
  2. B.सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
  3. C.स्वयं संविधान के एक प्रावधान
  4. D.उत्तर प्रदेश लोकायुक्त अधिनियम, 1975
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993

उस अधिनियम की धारा 21 किसी राज्य सरकार को राज्य मानवाधिकार आयोग गठित करने की अनुमति देती है, जो राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों के संबंध में मानवाधिकार उल्लंघन की जांच करे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय कौन है और वह कहां बैठता है?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय, जिसका उद्घाटन 17 मार्च 1866 को आगरा में भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861 के अंतर्गत हुआ। 1869 में इसका मुख्यालय इलाहाबाद, अब प्रयागराज, आ गया और यह लखनऊ में भी बैठता है, जो 1948 से स्थायी खंडपीठ है।

क्या लखनऊ खंडपीठ एक अलग उच्च न्यायालय है?

नहीं। लखनऊ का अवध मुख्य न्यायालय संयुक्त प्रांत उच्च न्यायालय (समामेलन) आदेश द्वारा 26 जुलाई 1948 से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मिला दिया गया। उत्तर प्रदेश में एक ही उच्च न्यायालय है, जो प्रयागराज और लखनऊ में बैठता है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और पदमुक्ति कौन करता है?

अनुच्छेद 217 के अंतर्गत राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं, भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल तथा मुख्य न्यायाधीश से भिन्न न्यायाधीश की दशा में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद। हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति को है, संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत वाले समावेदन के बाद।

क्या राज्यपाल UPPSC के सदस्य को हटा सकते हैं?

नहीं। राज्यपाल अनुच्छेद 316 के अंतर्गत अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करते हैं और सदस्य को निलंबित कर सकते हैं, परंतु हटाना अनुच्छेद 317 के अंतर्गत केवल राष्ट्रपति कर सकते हैं, उच्चतम न्यायालय की जांच और रिपोर्ट के बाद। सदस्य राज्यपाल को लिखकर त्यागपत्र दे सकता है।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सदस्य का कार्यकाल कितना है?

पद ग्रहण की तिथि से छह वर्ष, या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो। संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य के लिए यही आयु 65 वर्ष है, और दोनों आयोगों का यही अंतर परीक्षाओं का प्रिय प्रश्न है।

उत्तर प्रदेश के कौन से आयोग सीधे संविधान से बने हैं?

अनुच्छेद 315 के अंतर्गत राज्य लोक सेवा आयोग, अनुच्छेद 243K और 243ZA के अंतर्गत पंचायत और नगरीय चुनावों का राज्य निर्वाचन आयोग, तथा अनुच्छेद 243-I और 243Y के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग। मानवाधिकार, सूचना और महिला आयोग कानूनों से बने हैं।

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