संवैधानिक विकास 1858 से 1947: प्रमुख अधिनियम और प्रश्न
1858 के अधिनियम से 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम तक भारत में ब्रिटिश संवैधानिक विकास के पूरे नोट्स, हर प्रमुख उपबंध और परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्यों के साथ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

1858 से 1947 के बीच ब्रिटिश संसद ने अधिनियमों की एक श्रृंखला बनाई, जिसने धीरे-धीरे वह ढाँचा खड़ा किया जिसे बाद में हमारे संविधान ने बदला। 1857 के विद्रोह ने कंपनी शासन समाप्त किया; 1858 के अधिनियम ने ताज का शासन शुरू किया; और इसके बाद हर अधिनियम ने थोड़ा प्रतिनिधित्व, थोड़ा विकेंद्रीकरण और बहुत सारा सांप्रदायिक विभाजन जोड़ा। संविधान सभा ने इनमें अंतिम, 1935 के भारत शासन अधिनियम से बहुत कुछ लिया, इसलिए यह अध्याय स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय राजव्यवस्था के बीच का पुल है। परीक्षक इसे पसंद करते हैं क्योंकि हर अधिनियम का एक उपनाम, नामों की एक जोड़ी और एक प्रमुख उपबंध है।
1858 का अधिनियम: ताज के शासन की शुरुआत
1858 का भारत शासन अधिनियम, जिसे भारत के बेहतर शासन का अधिनियम भी कहा जाता है, ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर उसकी शक्तियाँ ब्रिटिश ताज को दे देता है। नियंत्रक मंडल और निदेशक न्यायालय समाप्त हुए और 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट से बना द्वैध शासन खत्म हुआ। भारत सचिव का नया पद बना, जो ब्रिटिश मंत्रिमंडल का सदस्य होता था, जिसकी सहायता पंद्रह सदस्यीय भारत परिषद करती थी और जिसका वेतन भारतीय राजस्व से दिया जाता था। भारत के गवर्नर-जनरल को वायसराय की अतिरिक्त उपाधि मिली, यानी ताज का व्यक्तिगत प्रतिनिधि; लॉर्ड कैनिंग पहले वायसराय बने। इस अधिनियम ने उस केंद्रीकरण की शुरुआत की जिसे अगले बीस वर्षों ने और गहरा किया।
1861, 1892 और 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम
- 1861: वायसराय की विधान परिषद में गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत करके भारतीयों को कानून बनाने से जोड़ने की शुरुआत की; लॉर्ड कैनिंग की परिषद में तीन भारतीय मनोनीत हुए। इसने बंबई और मद्रास प्रेसीडेंसियों की विधायी शक्ति लौटाई, बंगाल, उत्तर-पश्चिम प्रांत और पंजाब में नई विधान परिषदों की व्यवस्था की, वायसराय को अध्यादेश जारी करने की शक्ति दी और कैनिंग द्वारा शुरू की गई विभागीय प्रणाली को मान्यता दी।
- 1892: गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ाई, परिषदों को बजट पर चर्चा करने और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने की अनुमति दी, तथा स्थानीय संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और वाणिज्य मंडलों की सिफारिश पर सीमित और अप्रत्यक्ष मनोनयन की व्यवस्था की।
- 1909, मॉर्ले-मिंटो सुधार: विधान परिषदों का विस्तार किया और मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल लागू किया, जिसके कारण लॉर्ड मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है। पहली बार किसी भारतीय को वायसराय की कार्यकारी परिषद में स्थान मिला: सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा, विधि सदस्य के रूप में। सदस्यों को संकल्प रखने और पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति मिली, पर केंद्रीय परिषद में सरकारी बहुमत बना रहा।
1919 का भारत शासन अधिनियम
इसे मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार भी कहा जाता है, भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू और वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड के नाम पर। अधिनियम 1919 में पारित हुआ और 1921 में लागू हुआ। इसकी मुख्य युक्ति प्रांतों में द्वैध शासन थी: प्रांतीय विषयों को आरक्षित विषयों में बाँटा गया, जिन्हें गवर्नर अपनी कार्यकारी परिषद के साथ चलाता था, और हस्तांतरित विषयों में, जिन्हें विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी मंत्री चलाते थे। भू-राजस्व, पुलिस, न्याय, सिंचाई और अकाल राहत आरक्षित रहे; शिक्षा, स्थानीय स्वशासन, लोक स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग हस्तांतरित हुए। अधिनियम ने पहली बार केंद्रीय और प्रांतीय विषयों को अलग किया, केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था तथा प्रत्यक्ष निर्वाचन लाया, पृथक निर्वाचन मंडल सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपीयों तक बढ़ाया, तथा लोक सेवा आयोग की व्यवस्था की, जो 1926 में बना, और लंदन में भारत के उच्चायुक्त का पद बनाया। मताधिकार वयस्क आबादी के लगभग दस प्रतिशत को मिला और अधिनियम ने दस वर्ष बाद एक सांविधिक आयोग की व्यवस्था की, जो 1927 में साइमन आयोग के रूप में आया।
1935 का भारत शासन अधिनियम
यह उस समय तक ब्रिटिश संसद द्वारा पारित सबसे लंबा अधिनियम था। यह साइमन आयोग की रिपोर्ट, तीन गोलमेज सम्मेलनों, सांप्रदायिक पंचाट और पूना पैक्ट तथा 1933 के श्वेत पत्र से निकला, जिसकी जाँच लॉर्ड लिनलिथगो की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति ने की। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार थीं:
| उपबंध | प्रभाव |
|---|---|
| अखिल भारतीय संघ | प्रांतों और देशी रियासतों का संघ प्रस्तावित; रियासतों के सम्मिलित न होने से कभी नहीं बना |
| शक्तियों का विभाजन | तीन सूचियाँ: संघीय, प्रांतीय और समवर्ती; अवशिष्ट शक्तियाँ वायसराय के पास |
| प्रांतीय स्वायत्तता | प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त; उत्तरदायी मंत्रिमंडल वाली स्वायत्त इकाइयाँ; 1937 में चुनाव |
| केंद्र में द्वैध शासन | केंद्र में लागू करने का प्रस्ताव, जो कभी कार्यान्वित नहीं हुआ |
| द्विसदनीय व्यवस्था | ग्यारह में छह प्रांतों में: बंगाल, बंबई, मद्रास, बिहार, असम और संयुक्त प्रांत |
| पृथक निर्वाचन | दलित वर्गों, महिलाओं और श्रमिकों तक विस्तारित |
| नई संस्थाएँ | संघीय न्यायालय, 1937 में स्थापित, भारतीय रिजर्व बैंक और संघीय लोक सेवा आयोग; भारत परिषद समाप्त |
1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना पर आधारित यह अधिनियम 18 जुलाई 1947 को शाही अनुमति पाकर कानून बना। इसने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन समाप्त किया और भारत तथा पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन बनाए, जिन्हें राष्ट्रमंडल से अलग होने का अधिकार भी मिला। इसने भारत सचिव का पद समाप्त किया, देशी रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता खत्म की और उन्हें किसी भी डोमिनियन में सम्मिलित होने या स्वतंत्र रहने की छूट दी, गवर्नर-जनरल को मंत्रियों की सलाह पर काम करने वाला संवैधानिक प्रमुख बनाया, और संविधान बनने तक संविधान सभा को डोमिनियन विधानमंडल के रूप में काम करने दिया। 26 जनवरी 1950 तक भारत का शासन संशोधित रूप में 1935 के अधिनियम से ही चला।
दोहराने का तरीका
हर अधिनियम की एक पंक्ति बनाइए: उपनाम, नामों की जोड़ी और सबसे प्रसिद्ध उपबंध। 1858 ताज का शासन और पहला वायसराय, 1861 विभागीय प्रणाली, 1892 बजट पर चर्चा, 1909 पृथक निर्वाचन, 1919 प्रांतों में द्वैध शासन, 1935 प्रांतीय स्वायत्तता, 1947 दो डोमिनियन। इस अध्याय के दस में नौ प्रश्न इसी एक पंक्ति से हल हो जाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न अधिनियम और उपबंध के मेल तथा उपनाम पर आते हैं: किस अधिनियम को मॉर्ले-मिंटो सुधार कहा जाता है, किसने प्रांतीय स्वायत्तता दी, किसने वायसराय का पद बनाया। द्वैध शासन के आरक्षित और हस्तांतरित विषय यूपीएससी तथा राज्य लोक सेवा आयोगों का प्रिय प्रश्न हैं, इसलिए याद रखिए कि भू-राजस्व, पुलिस और न्याय आरक्षित थे तथा शिक्षा और स्थानीय स्वशासन हस्तांतरित। तिथियाँ जाल हैं: 1919 का अधिनियम 1921 में लागू हुआ और 1935 के अधिनियम से 1937 में प्रांतीय चुनाव हुए। नामों की जोड़ियाँ भी जाल हैं: 1909 में मॉर्ले के साथ मिंटो और 1919 में मॉन्टेग्यू के साथ चेम्सफोर्ड। पहले व्यक्ति से जुड़े प्रश्न भी आते हैं: कार्यकारी परिषद का पहला भारतीय, पहला वायसराय और 1935 के विधेयक की संयुक्त समिति का अध्यक्ष।
महत्वपूर्ण तथ्य
| 1858 का अधिनियम | ईस्ट इंडिया कंपनी समाप्त; लॉर्ड कैनिंग पहले वायसराय |
|---|---|
| भारत परिषद | 15 सदस्य, भारत सचिव की सहायता; 1935 के अधिनियम से समाप्त |
| विभागीय प्रणाली | लॉर्ड कैनिंग ने शुरू की, 1861 के अधिनियम ने मान्यता दी |
| बजट पर चर्चा | 1892 के भारतीय परिषद अधिनियम से अनुमत |
| पृथक निर्वाचन मंडल | 1909 के अधिनियम से मुसलमानों के लिए; लॉर्ड मिंटो सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक |
| कार्यकारी परिषद का पहला भारतीय | सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा, 1909, विधि सदस्य |
| 1919 का अधिनियम | मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार; प्रांतों में द्वैध शासन; 1921 से लागू |
| आरक्षित विषय | भू-राजस्व, पुलिस, न्याय प्रशासन, सिंचाई, अकाल राहत |
| हस्तांतरित विषय | शिक्षा, स्थानीय स्वशासन, लोक स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग |
| लोक सेवा आयोग | 1919 के अधिनियम में व्यवस्था, 1926 में गठन |
| 1935 का अधिनियम | प्रांतीय स्वायत्तता; संघीय, प्रांतीय और समवर्ती सूची; अवशिष्ट शक्तियाँ वायसराय को |
| संघीय न्यायालय | 1935 के अधिनियम के अंतर्गत 1937 में स्थापित |
| 1935 के विधेयक की संयुक्त संसदीय समिति | अध्यक्ष लॉर्ड लिनलिथगो |
| भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 | 18 जुलाई 1947 को अनुमति; 15 अगस्त 1947 से दो डोमिनियन |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
प्रांतीय स्वायत्तता लागू करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कौन-सा अधिनियम पारित किया?
- A.भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
- B.भारत शासन अधिनियम, 1935
- C.चार्टर अधिनियम, 1853
- D.भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारत शासन अधिनियम, 1935
व्याख्या
सही उत्तर है B, भारत शासन अधिनियम, 1935। इस अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त किया और उन्हें स्वायत्त इकाइयाँ बनाया, जिनमें निर्वाचित प्रांतीय विधानमंडलों के प्रति उत्तरदायी मंत्रिमंडल थे; इसके अंतर्गत पहले चुनाव 1937 में हुए और अधिकांश प्रांतों में कांग्रेस के मंत्रिमंडल बने। विकल्प A गलत है क्योंकि 1892 के भारतीय परिषद अधिनियम ने केवल परिषदों का विस्तार किया, बजट पर चर्चा की अनुमति दी और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने दिया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1853 का चार्टर अधिनियम कंपनी शासन का है और विधायी तथा कार्यपालिका कार्यों के पृथक्करण एवं सिविल सेवा की खुली प्रतियोगिता के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1947 के अधिनियम ने प्रांतों में सुधार नहीं किया, बल्कि ब्रिटिश शासन समाप्त कर दो डोमिनियन बनाए। जोड़ी याद रखिए: 1919 प्रांतों में द्वैध शासन लाया और 1935 ने उसकी जगह प्रांतीय स्वायत्तता दी।
भारत शासन अधिनियम, 1919 में प्रांतीय सरकार के कार्य आरक्षित और हस्तांतरित विषयों में बाँटे गए थे। निम्नलिखित में से कौन आरक्षित विषय माने गए थे? 1. न्याय प्रशासन 2. स्थानीय स्वशासन 3. भू-राजस्व 4. पुलिस। नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए:
- A.1, 2 और 3
- B.2, 3 और 4
- C.1, 3 और 4
- D.1, 2 और 4
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1, 3 और 4
व्याख्या
सही उत्तर है C, 1, 3 और 4। द्वैध शासन में गवर्नर ने वे विषय अपने पास रखे जो राजस्व और बलप्रयोग से जुड़े थे: न्याय प्रशासन, भू-राजस्व, पुलिस, सिंचाई, अकाल राहत, वन और श्रम संबंध। स्थानीय स्वशासन, शिक्षा, लोक स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग तथा आबकारी हस्तांतरित सूची में थे, जिन्हें विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी भारतीय मंत्री चलाते थे। विकल्प A गलत है क्योंकि इसमें स्थानीय स्वशासन है, जो हस्तांतरित विषय था। विकल्प B भी इसी कारण गलत है, क्योंकि उसमें भी स्थानीय स्वशासन सम्मिलित है। विकल्प D गलत है क्योंकि वह भू-राजस्व को छोड़ देता है, जो आरक्षित विषयों में सबसे संरक्षित था, और स्थानीय स्वशासन जोड़ देता है। परीक्षा का सरल नियम यह है कि जो धन कमाता या व्यवस्था बनाए रखता था वह आरक्षित था और जो जनता पर धन खर्च करता था वह हस्तांतरित।
भारत शासन अधिनियम, 1919 के बारे में गलत कथन पहचानिए:
- A.भारत शासन अधिनियम, 1919 वर्ष 1921 में लागू हुआ।
- B.इस अधिनियम को मॉर्ले-मिंटो सुधार अधिनियम भी कहा जाता है।
- C.मॉन्टेग्यू भारत सचिव थे और लॉर्ड चेम्सफोर्ड भारत के वायसराय थे।
- D.इस अधिनियम ने केंद्रीय और प्रांतीय विषयों को अलग किया।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इस अधिनियम को मॉर्ले-मिंटो सुधार अधिनियम भी कहा जाता है।
व्याख्या
सही उत्तर है B, जो गलत कथन है। 1919 के अधिनियम को मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार कहा जाता है; मॉर्ले-मिंटो सुधार 1909 का भारतीय परिषद अधिनियम था, जो एक दशक पहले आया और पृथक निर्वाचन मंडल के लिए याद किया जाता है। विकल्प A सही कथन है, क्योंकि अधिनियम 1919 में पारित हुआ पर उसके उपबंध 1921 में लागू किए गए, इसीलिए द्वैध शासन के पहले मंत्रिमंडल उसी वर्ष बने। विकल्प C सही है, क्योंकि एडविन मॉन्टेग्यू भारत सचिव और लॉर्ड चेम्सफोर्ड वायसराय थे और सुधार दोनों के नाम से जाने जाते हैं। विकल्प D भी सही है, क्योंकि इस अधिनियम ने पहली बार केंद्रीय और प्रांतीय विषय अलग किए और प्रांतों को अपने राजस्व स्रोत दिए। ऐसे नकारात्मक प्रश्न में पहले बेमेल उपनाम ढूँढ़िए; उत्तर प्रायः वही होता है।
भारत शासन अधिनियम, 1919 ब्रिटिश संसद ने किसकी सिफारिश पर पारित किया था?
- A.लॉर्ड एल्गिन
- B.एडविन मॉन्टेग्यू
- C.चार्ल्स प्रथम
- D.लॉर्ड लिनलिथगो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एडविन मॉन्टेग्यू
व्याख्या
सही उत्तर है B, एडविन मॉन्टेग्यू। भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू ने अगस्त 1917 की घोषणा की, जिसमें स्वशासी संस्थाओं के क्रमिक विकास का वचन था, और वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड के साथ मिलकर 1918 की रिपोर्ट तैयार की, जिस पर 1919 का अधिनियम आधारित था। विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड एल्गिन उन्नीसवीं सदी में वायसराय रहे और इन सुधारों से उनका कोई संबंध नहीं था। विकल्प C गलत है क्योंकि चार्ल्स प्रथम सत्रहवीं सदी के इंग्लैंड के राजा थे, जिनका नाम ईस्ट इंडिया कंपनी के आरंभिक चार्टरों से जुड़ा है, बीसवीं सदी के सुधारों से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड लिनलिथगो बाद में आए: उन्होंने 1935 के अधिनियम वाले विधेयक की संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता की और द्वितीय विश्वयुद्ध के समय वायसराय रहे। श्रृंखला याद रखिए: 1917 की मॉन्टेग्यू घोषणा, 1918 की रिपोर्ट, 1919 का अधिनियम और 1921 में उसका लागू होना।
1935 के उस विधेयक की संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष कौन थे, जिससे भारत शासन अधिनियम, 1935 बना?
- A.लिनलिथगो
- B.जेम्स मैकडोनाल्ड
- C.विंस्टन चर्चिल
- D.क्लीमेंट एटली
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लिनलिथगो
व्याख्या
सही उत्तर है A, लिनलिथगो। भारतीय संवैधानिक सुधार पर 1933 के श्वेत पत्र की जाँच ब्रिटिश संसद की संयुक्त प्रवर समिति ने की, जिसके अध्यक्ष लॉर्ड लिनलिथगो थे, और उसकी रिपोर्ट पर बना विधेयक भारत शासन अधिनियम, 1935 के रूप में पारित हुआ; लिनलिथगो बाद में 1936 से 1943 तक भारत के वायसराय रहे। विकल्प B गलत है क्योंकि रैम्से मैकडोनाल्ड वह ब्रिटिश प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गोलमेज सम्मेलन बुलाए और 1932 का सांप्रदायिक पंचाट घोषित किया। विकल्प C गलत है क्योंकि विंस्टन चर्चिल ब्रिटिश संसद में इन सुधारों के सबसे मुखर विरोधी थे, समिति के अध्यक्ष नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि क्लीमेंट एटली कहानी के अंत से जुड़े हैं: प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने फरवरी 1947 में सत्ता हस्तांतरण की घोषणा की और 1946 में कैबिनेट मिशन भेजा। इन चारों को उनके दशक के अनुसार क्रम में रखिए।
ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम निम्नलिखित में से किस वर्ष पारित किया?
- A.1945
- B.1942
- C.1947
- D.1946
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1947
व्याख्या
सही उत्तर है C, 1947। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना के आधार पर जुलाई 1947 में ब्रिटिश संसद में रखा गया, 18 जुलाई 1947 को शाही अनुमति मिली और 15 अगस्त 1947 से प्रभावी हुआ, जिससे भारत और पाकिस्तान डोमिनियन बने। विकल्प A गलत है क्योंकि 1945 वेवेल योजना और शिमला सम्मेलन का वर्ष है, जो मुस्लिम लीग के इस दावे पर विफल हुआ कि सभी मुस्लिम सदस्य वही नामित करेगी। विकल्प B गलत है क्योंकि 1942 में क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आंदोलन हुए, सत्ता हस्तांतरण नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1946 कैबिनेट मिशन, संविधान सभा के चुनाव और अंतरिम सरकार के गठन का वर्ष है। अंतिम क्रम याद रखिए: 1945 वेवेल योजना, 1946 कैबिनेट मिशन, 1947 माउंटबेटन योजना और अधिनियम।
1858 के भारत शासन अधिनियम के बाद भारत के पहले वायसराय कौन थे?
- A.लॉर्ड डलहौजी
- B.लॉर्ड कैनिंग
- C.लॉर्ड लिटन
- D.लॉर्ड रिपन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड कैनिंग
व्याख्या
सही उत्तर है B, लॉर्ड कैनिंग। 1858 के अधिनियम ने गवर्नर-जनरल को वायसराय की अतिरिक्त उपाधि दी, जिससे वह भारत में ताज का सीधा प्रतिनिधि बना, और 1857 के विद्रोह के समय गवर्नर-जनरल रहे लॉर्ड कैनिंग यह उपाधि पाने वाले पहले व्यक्ति बने। विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड डलहौजी 1856 में, विद्रोह से पहले, भारत छोड़ चुके थे और वे हड़प नीति तथा पहली रेल लाइन के लिए याद किए जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड लिटन बहुत बाद में आए और 1878 के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट तथा 1877 के दिल्ली दरबार से जुड़े हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि भारत में स्थानीय स्वशासन के जनक कहे जाने वाले लॉर्ड रिपन 1880 के दशक में रहे और उन्होंने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट निरस्त किया। क्रम यही है: 1858 में कैनिंग, फिर उनके उत्तराधिकारियों के समय परिषदों का क्रमिक विस्तार।
भारत में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल किस अधिनियम ने लागू किया?
- A.भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
- B.भारतीय परिषद अधिनियम, 1909
- C.भारत शासन अधिनियम, 1919
- D.भारत शासन अधिनियम, 1935
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारतीय परिषद अधिनियम, 1909
व्याख्या
सही उत्तर है B, भारतीय परिषद अधिनियम, 1909। मॉर्ले-मिंटो सुधारों ने ऐसे पृथक निर्वाचन मंडल बनाए जिनमें मुस्लिम सदस्यों को केवल मुस्लिम मतदाता चुनते थे, और इसी कारण लॉर्ड मिंटो को भारत में सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1892 के अधिनियम में केवल स्थानीय संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और वाणिज्य मंडलों के माध्यम से सीमित तथा अप्रत्यक्ष मनोनयन था, कोई सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1919 के अधिनियम ने यह व्यवस्था शुरू नहीं की, बल्कि उसे सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपीयों तक बढ़ाया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1935 के अधिनियम ने 1932 के सांप्रदायिक पंचाट और पूना पैक्ट के बाद इसे दलित वर्गों, महिलाओं और श्रमिकों तक और बढ़ाया। इसलिए 1909 ने शुरू किया, 1919 ने बढ़ाया और 1935 ने फिर बढ़ाया: यही क्रम स्वयं एक प्रिय प्रश्न है।
भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत अवशिष्ट शक्तियाँ किसमें निहित थीं?
- A.संघीय विधानमंडल में
- B.प्रांतीय विधानमंडलों में
- C.गवर्नर-जनरल में
- D.संघीय न्यायालय में
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. गवर्नर-जनरल में
व्याख्या
सही उत्तर है C, गवर्नर-जनरल में। 1935 के अधिनियम ने शक्तियों को संघीय सूची, प्रांतीय सूची और समवर्ती सूची में बाँटा और जो विषय इन तीनों में कहीं नहीं थे, वे अवशिष्ट विषय गवर्नर-जनरल यानी वायसराय के विवेक पर छोड़ दिए गए। विकल्प A गलत है क्योंकि संघीय विधानमंडल केवल संघीय सूची पर और प्रांतीय विधानमंडलों के साथ समवर्ती सूची पर कानून बना सकता था। विकल्प B गलत है क्योंकि प्रांत प्रांतीय और समवर्ती सूची तक सीमित थे। विकल्प D गलत है क्योंकि 1937 में स्थापित संघीय न्यायालय अधिनियम की व्याख्या करता था और संघ तथा इकाइयों के विवाद सुलझाता था; उसके पास विधायी शक्ति नहीं थी। इसकी तुलना हमारे संविधान से कीजिए, जहाँ अवशिष्ट शक्तियाँ अनुच्छेद 248 के अंतर्गत संसद के पास हैं, और यह अंतर परीक्षा में सरल अंक बन जाता है।
भारत में विभागीय प्रणाली किस वायसराय ने शुरू की और उसे किस अधिनियम ने मान्यता दी?
- A.लॉर्ड कैनिंग, भारतीय परिषद अधिनियम 1861
- B.लॉर्ड मिंटो, भारतीय परिषद अधिनियम 1909
- C.लॉर्ड चेम्सफोर्ड, भारत शासन अधिनियम 1919
- D.लॉर्ड रिपन, भारतीय परिषद अधिनियम 1892
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लॉर्ड कैनिंग, भारतीय परिषद अधिनियम 1861
व्याख्या
सही उत्तर है A, लॉर्ड कैनिंग और भारतीय परिषद अधिनियम 1861। कैनिंग ने विभागीय प्रणाली शुरू की, जिसमें वायसराय की परिषद के प्रत्येक सदस्य को शासन के एक या अधिक विभागों का प्रभार दिया गया और वह विभागीय मामलों पर अंतिम आदेश दे सकता था; 1861 के अधिनियम ने इस व्यवस्था को सांविधिक मान्यता दी और यह अधिनियम भारतीयों को कानून बनाने से जोड़ने तथा वायसराय को अध्यादेश की शक्ति देने के लिए भी याद किया जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1909 का अधिनियम पृथक निर्वाचन और कार्यकारी परिषद में पहले भारतीय का अधिनियम है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1919 का अधिनियम द्वैध शासन का अधिनियम है, जो बहुत बाद का विकास है। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड रिपन 1882 के स्थानीय स्वशासन से जुड़े हैं और 1892 का अधिनियम बजट चर्चा से, विभागीय प्रणाली से नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किस अधिनियम को मॉर्ले-मिंटो सुधार कहा जाता है?
1909 का भारतीय परिषद अधिनियम। यह भारत सचिव लॉर्ड मॉर्ले और वायसराय लॉर्ड मिंटो के नाम पर है और मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल लागू करने तथा वायसराय की कार्यकारी परिषद में पहले भारतीय की नियुक्ति के लिए याद किया जाता है।
1919 के अधिनियम का द्वैध शासन क्या था?
द्वैध शासन प्रांतों में दोहरी सरकार थी। प्रांतीय विषय आरक्षित और हस्तांतरित वर्गों में बँटे थे; आरक्षित विषय गवर्नर अपनी कार्यकारी परिषद के साथ चलाता था और वे विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी नहीं थे, जबकि हस्तांतरित विषय निर्वाचित विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी मंत्री चलाते थे।
भारत में प्रांतीय स्वायत्तता किस अधिनियम ने दी?
1935 के भारत शासन अधिनियम ने। इसने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त किया, उन्हें निर्वाचित विधानमंडलों के प्रति उत्तरदायी मंत्रिमंडल वाली स्वायत्त इकाइयाँ बनाया और इसके बदले केंद्र में द्वैध शासन का प्रस्ताव रखा, जो कभी लागू नहीं हुआ।
भारतीय संविधान के लिए 1935 का अधिनियम क्यों महत्वपूर्ण है?
हमारे संविधान का बड़ा भाग इसी से लिया गया है: तीन सूचियों वाली संघीय योजना, राज्यपाल का पद, न्यायपालिका का ढाँचा, आपातकालीन उपबंध, लोक सेवा आयोग और प्रशासन का बहुत सारा विस्तार 1935 के अधिनियम से अनुकूलित है।
भारत और पाकिस्तान को सत्ता किस कानून से हस्तांतरित हुई?
1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम से, जो 3 जून 1947 की माउंटबेटन योजना पर आधारित था। इसने 15 अगस्त 1947 से दो स्वतंत्र डोमिनियन बनाए, देशी रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त की और भारत सचिव का पद खत्म किया।
स्रोत
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग III, कक्षा XII, औपनिवेशिक शासन और ग्रामीण भारत से संबंधित अध्याय — एनसीईआरटी
- भारत शासन अधिनियम, 1935 तथा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 — विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
- संविधान सभा की बहसें, संवैधानिक पृष्ठभूमि पर प्रारंभिक खंड — लोक सभा सचिवालय





