ब्रिटिश भारत में शिक्षा और प्रेस: अधिनियम और प्रश्न
ब्रिटिश शासन में शिक्षा और प्रेस के परीक्षोपयोगी नोट्स: 1813 का चार्टर अधिनियम, मैकॉले, वुड का घोषणापत्र, आयोग, प्रेस कानून और राष्ट्रवादी समाचार पत्र।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

अंग्रेजों ने भारत में जो दो संस्थाएँ बनाईं, वे उनके ही विरुद्ध हो गईं। क्लर्क देने के लिए खोले गए स्कूल और कॉलेजों ने वकील, शिक्षक और संपादक पैदा किए, जिन्होंने अंग्रेजी में स्वतंत्रता के बारे में पढ़ा और फिर पूछा कि भारत में वह क्यों नहीं है; और छापाखाना, जो कंपनी अपनी सूचनाओं के लिए लाई थी, राष्ट्रीय आंदोलन की आवाज बन गया। परीक्षा के लिए यह अध्याय तिथियों की एक श्रृंखला है—एक चार्टर अधिनियम, एक टिप्पणी, एक घोषणापत्र, तीन आयोग और प्रेस कानूनों की एक कतार, और हर एक के साथ उस गवर्नर-जनरल या वायसराय का नाम जिसने उस पर हस्ताक्षर किए।
कंपनी शिक्षा की ओर कैसे मुड़ी
आरंभिक दशकों में कंपनी शिक्षा से दूर रही और केवल उस परंपरागत विद्या की सहायता की जो कानून चलाने में उपयोगी थी। वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1781 में इस्लामी कानून के लिए कलकत्ता मदरसा खोला, जोनाथन डंकन ने 1791 में बनारस में संस्कृत कॉलेज, और लॉर्ड वेलेजली ने 1800 में फोर्ट विलियम कॉलेज बनाया, जिसमें उनके अपने असैनिक अधिकारी भारतीय भाषाएँ सीखते थे। सन 1813 के चार्टर अधिनियम ने स्थिति बदली: पहली बार कंपनी ने शिक्षा का उत्तरदायित्व स्वीकार किया और साहित्य के पुनरुद्धार तथा उपयोगी ज्ञान के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष कम से कम एक लाख रुपये रखने पर सहमति दी। भारतीय स्वयं भी आगे बढ़ चुके थे—कलकत्ता का हिंदू कॉलेज 1817 में राजा राम मोहन राय, डेविड हेयर और एडवर्ड हाइड ईस्ट के प्रयासों से बना।
सन 1835 की आंग्लवादी विजय
अगले बीस वर्षों तक प्राच्यवादी, जो यह अनुदान संस्कृत, फारसी और अरबी विद्या पर खर्च कराना चाहते थे, आंग्लवादियों से भिड़ते रहे, जो अंग्रेजी माध्यम से यूरोपीय ज्ञान पढ़ाना चाहते थे। थॉमस बैबिंगटन मैकॉले ने 2 फरवरी 1835 की अपनी शिक्षा संबंधी टिप्पणी से यह विवाद समाप्त कर दिया; उन्होंने भारतीय विद्या को अत्यंत तिरस्कार से नकारा और ऐसा वर्ग बनाने की माँग की जो रक्त और रंग में भारतीय हो किंतु रुचि, मत, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज। लॉर्ड विलियम बेंटिंक के मार्च 1835 के संकल्प ने इसे स्वीकार किया और अंग्रेजी उच्च शिक्षा का माध्यम बन गई। यह योजना निस्यंदन सिद्धांत पर खड़ी थी—समाज के ऊपरी वर्ग को पढ़ाओ और ज्ञान रिसकर जनता तक पहुँच जाएगा, जो कभी नहीं हुआ।
वुड का घोषणापत्र और आयोग
| वर्ष | कदम | क्या किया |
|---|---|---|
| 1854 | वुड का घोषणापत्र | भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा; लोक शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय, सहायता अनुदान, देशी भाषा में प्राथमिक शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और स्त्री शिक्षा |
| 1857 | विश्वविद्यालयों की स्थापना | कलकत्ता, बंबई और मद्रास |
| 1882 | हंटर आयोग | पहला भारतीय शिक्षा आयोग, डब्ल्यू. डब्ल्यू. हंटर की अध्यक्षता में; देशी भाषा में प्राथमिक शिक्षा और स्कूलों को स्थानीय निकायों को देने पर बल |
| 1904 | भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम | कर्जन का कानून, 1902 के रैले आयोग के बाद; विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण कड़ा किया |
| 1917-19 | सैडलर आयोग | कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग; बारह वर्ष का स्कूल पाठ्यक्रम, इंटरमीडिएट कॉलेज और तीन वर्ष की स्नातक उपाधि |
| 1929 | हार्टोग समिति | प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय और अवरोधन की रिपोर्ट दी और विस्तार के स्थान पर सुदृढ़ीकरण की सलाह दी |
| 1937 | वर्धा योजना | गांधीजी की बुनियादी शिक्षा या नई तालीम, जाकिर हुसैन समिति द्वारा तैयार; मातृभाषा में किसी शिल्प के माध्यम से शिक्षा |
| 1944 | सार्जेंट योजना | केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की निःशुल्क अनिवार्य शिक्षा की योजना, जिसकी चालीस वर्ष की अवधि के लिए आलोचना हुई |
स्त्री शिक्षा धीरे-धीरे आई और अधिकतर निजी प्रयासों से: सन 1849 में कलकत्ता में आरंभ हुआ बेथ्यून स्कूल इसका मील का पत्थर है, और हंटर आयोग की स्त्री शिक्षा की माँग का उत्तर सरकार से अधिक मिशनरियों और समाज सुधारकों ने दिया। सन 1919 के मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के बाद शिक्षा प्रांतों में हस्तांतरित विषय बन गई और भारतीय मंत्रियों के हाथ में आई, जिनके पास उस पर खर्च करने के लिए धन बहुत कम था।
प्रेस और उसके विरुद्ध कानून
भारत का पहला समाचार पत्र बंगाल गजट था, जिसे हिक्की का गजट भी कहा जाता है; जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने इसे 1780 में निकाला और कंपनी ने शीघ्र ही इसे बंद करा दिया। इसके बाद प्रेस के हर विस्तार का उत्तर एक कानून से दिया गया।
| कानून | किसने | याद रखने योग्य बात |
|---|---|---|
| प्रेस सेंसरशिप अधिनियम, 1799 | वेलेजली | सभी समाचार पत्रों पर पूर्व सेंसरशिप |
| लाइसेंसिंग विनियम, 1823 | जॉन एडम | छापने के लिए लाइसेंस अनिवार्य; विरोध में राम मोहन राय का मिरात-उल-अखबार बंद हुआ |
| प्रेस अधिनियम, 1835 (मेटकाफ अधिनियम) | चार्ल्स मेटकाफ | 1823 के नियम रद्द; मेटकाफ भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता कहे जाते हैं |
| लाइसेंसिंग अधिनियम, 1857 | कैनिंग | विद्रोह के समय आपातकालीन नियंत्रण |
| पंजीकरण अधिनियम, 1867 | लॉरेंस | नियामक, प्रतिबंधात्मक नहीं; हर पुस्तक और पत्र पर मुद्रक, प्रकाशक और स्थान का नाम |
| वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम, 1878 | लिटन | मुँहबंद करने वाला कानून; केवल भारतीय भाषा के पत्रों पर लागू, अपील का अधिकार नहीं; 1882 में रिपन ने रद्द किया |
| समाचार पत्र (अपराध उत्तेजन) अधिनियम, 1908 | मिंटो | स्वदेशी आंदोलन के बाद उग्रवादी प्रेस के विरुद्ध |
| भारतीय प्रेस अधिनियम, 1910 | मिंटो | जमानत राशि और जब्ती की व्यवस्था फिर लागू |
वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम ही सबसे अधिक पूछा जाता है, एक तो लिटन के नाम के कारण और दूसरे उस प्रसिद्ध बचाव के कारण—शिशिर कुमार घोष का अमृत बाजार पत्रिका रातभर में अंग्रेजी पत्र बन गया और इस अधिनियम की पकड़ से निकल गया। भारतीय दंड संहिता में राजद्रोह की धारा 124क 1870 में जोड़ी गई थी, और इसी धारा के अंतर्गत बाल गंगाधर तिलक पर केसरी में लिखे लेखों के लिए मुकदमा चला।
समाचार पत्र और उनके पीछे के लोग
- राजा राम मोहन राय — बांग्ला में संवाद कौमुदी और फारसी में मिरात-उल-अखबार
- बाल गंगाधर तिलक — मराठी में केसरी और अंग्रेजी में मराठा
- दादाभाई नौरोजी — गुजराती में रास्त गोफ्तार
- जी. सुब्रमण्य अय्यर — द हिंदू और स्वदेशमित्रन
- शिशिर कुमार घोष और मोतीलाल घोष — अमृत बाजार पत्रिका
- हरीश चंद्र मुखर्जी — हिंदू पैट्रियट के संपादक, जिसने नील बागान मालिकों का पर्दाफाश किया
- ईश्वर चंद्र विद्यासागर — सोम प्रकाश
- अरविंद घोष — वंदे मातरम्; गोपाल कृष्ण गोखले — सुधारक और हितवाद
- मौलाना अबुल कलाम आजाद — अल-हिलाल; मोहम्मद अली — कॉमरेड और हमदर्द
- महात्मा गांधी — यंग इंडिया, नवजीवन और हरिजन; मोतीलाल नेहरू — द इंडिपेंडेंट
दोनों कहानियाँ मिलकर एक-दूसरे को समझाती हैं। अंग्रेजी शिक्षा ने ऐसा पाठक वर्ग बनाया जो शासकों की ही भाषा में बहस कर सकता था; प्रेस ने उस पाठक वर्ग को प्रतिदिन मिलने का स्थान दिया; और प्रेस के विरुद्ध बने कानून इसका सबसे स्पष्ट प्रमाण हैं कि सरकार इन दोनों से कितना डरती थी।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, तिथि और व्यक्ति साथ—1813 के साथ चार्टर अधिनियम, 1835 के साथ मैकॉले और मेटकाफ, 1854 के साथ वुड, 1857 के साथ तीन विश्वविद्यालय, 1878 के साथ लिटन और 1882 के साथ रिपन तथा हंटर। दूसरा, किस व्यक्ति के साथ कौन समाचार पत्र, जिसमें संवाद कौमुदी, केसरी, रास्त गोफ्तार, अल-हिलाल, अमृत बाजार पत्रिका और यंग इंडिया प्रतिवर्ष दोहराए जाते हैं। तीसरा, आयोगों में बेमेल पहचानना, जिसमें प्रायः सैडलर आयोग की विश्वविद्यालय सिफारिशें और हार्टोग समिति का अपव्यय-अवरोधन मिला दिए जाते हैं। दो जाल सावधानी माँगते हैं—पहला समाचार पत्र बनाम सबसे पुराना चलता पत्र, और वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम पारित करने वाला वायसराय बनाम रद्द करने वाला।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सन 1813 का चार्टर अधिनियम | शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपये; कंपनी का पहला उत्तरदायित्व |
|---|---|
| मैकॉले की टिप्पणी | 2 फरवरी 1835; अंग्रेजी माध्यम; निस्यंदन सिद्धांत |
| वुड का घोषणापत्र | 1854; भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा |
| प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय | कलकत्ता, बंबई और मद्रास, 1857 |
| हंटर आयोग | 1882; पहला भारतीय शिक्षा आयोग |
| सैडलर आयोग | 1917-19; इंटरमीडिएट कॉलेज और तीन वर्ष की उपाधि |
| हार्टोग समिति | 1929; प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय और अवरोधन |
| वर्धा योजना | 1937; गांधीजी की बुनियादी शिक्षा, जाकिर हुसैन समिति |
| पहला समाचार पत्र | बंगाल गजट, जेम्स ऑगस्टस हिक्की, 1780 |
| सबसे पुराना चलता पत्र | बॉम्बे समाचार, गुजराती, 1822 |
| मेटकाफ अधिनियम | 1835 का प्रेस अधिनियम; भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता |
| वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम | 1878, लिटन; 1882 में रिपन ने रद्द किया |
| राजद्रोह की धारा | भारतीय दंड संहिता की धारा 124क, 1870 में जोड़ी गई |
| आरंभिक संस्थाएँ | कलकत्ता मदरसा 1781, बनारस संस्कृत कॉलेज 1791, फोर्ट विलियम कॉलेज 1800, हिंदू कॉलेज 1817 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से किसने 'संवाद कौमुदी' समाचार पत्र निकाला था?
- A.रास बिहारी बोस
- B.राजा राम मोहन राय
- C.शिशिर कुमार घोष
- D.ईश्वर चंद्र विद्यासागर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, राजा राम मोहन राय है, जिन्होंने 1821 में बांग्ला में संवाद कौमुदी निकाला और अगले वर्ष फारसी साप्ताहिक मिरात-उल-अखबार, जिसे उन्होंने 1823 के लाइसेंसिंग विनियम के विरोध में बंद कर दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि रास बिहारी बोस बहुत बाद की पीढ़ी के क्रांतिकारी थे, जिन्होंने जापान से कार्य किया और भारतीय स्वतंत्रता संघ बनाने में सहयोग दिया। विकल्प C गलत है क्योंकि शिशिर कुमार घोष ने अपने भाई मोतीलाल घोष के साथ अमृत बाजार पत्रिका निकाली, वही पत्र जो वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम से बचने के लिए अंग्रेजी साप्ताहिक बन गया। विकल्प D गलत है क्योंकि ईश्वर चंद्र विद्यासागर सोम प्रकाश तथा विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा से जुड़े हैं, संवाद कौमुदी से नहीं। इस नाम के साथ यह जोड़ी याद रखें—1821 का बांग्ला संवाद कौमुदी और 1822 का फारसी मिरात-उल-अखबार, दोनों कलकत्ता से और दोनों इसी समाज सुधारक के।
भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा किस दस्तावेज को कहा जाता है?
- A.सन 1835 की मैकॉले की टिप्पणी
- B.सन 1854 का वुड का घोषणापत्र
- C.सन 1882 की हंटर आयोग रिपोर्ट
- D.सन 1944 की सार्जेंट योजना
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, सन 1854 का वुड का घोषणापत्र है, जिसे बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष चार्ल्स वुड ने भेजा था और जिसे भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है, क्योंकि इसने पूरी व्यवस्था रखी—प्रांतों में लोक शिक्षा विभाग, प्रेसीडेंसी नगरों में विश्वविद्यालय, निजी विद्यालयों के लिए सहायता अनुदान, देशी भाषा में प्राथमिक शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और स्त्री शिक्षा। विकल्प A गलत है क्योंकि मैकॉले की टिप्पणी ने 1835 में केवल शिक्षा का माध्यम और आंग्लवादी पक्ष तय किया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1882 के हंटर आयोग ने यह देखा कि घोषणापत्र कितना लागू हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि 1944 की सार्जेंट योजना ब्रिटिश शासन के अंत में आई और सार्वत्रिक शिक्षा के लिए चालीस वर्ष की अवधि सुझाने पर उसकी आलोचना हुई।
मैकॉले की वह प्रसिद्ध शिक्षा टिप्पणी, जिसने अंग्रेजी को भारत में उच्च शिक्षा का माध्यम बनाया, किस वर्ष लिखी गई?
- A.1813
- B.1823
- C.1835
- D.1854
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 1835 है। थॉमस बैबिंगटन मैकॉले ने अपनी टिप्पणी 2 फरवरी 1835 को लिखी और अगले माह लॉर्ड विलियम बेंटिंक के संकल्प ने उसे स्वीकार कर लिया, जिससे प्राच्यवादियों और आंग्लवादियों का लंबा विवाद अंग्रेजी माध्यम से यूरोपीय ज्ञान के पक्ष में समाप्त हो गया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1813 उस चार्टर अधिनियम का वर्ष है जिसने पहली बार शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपये रखे। विकल्प B गलत है क्योंकि 1823 प्रेस के विरुद्ध लाइसेंसिंग विनियम का वर्ष है, यद्यपि उसी वर्ष लोक शिक्षा की सामान्य समिति भी बनी। विकल्प D गलत है क्योंकि 1854 वुड के घोषणापत्र का वर्ष है। मैकॉले की नीति निस्यंदन सिद्धांत पर खड़ी थी, अर्थात ऊपरी वर्ग को दी गई शिक्षा रिसकर जनता तक पहुँचेगी।
किस चार्टर अधिनियम ने पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी को भारतीयों की शिक्षा का उत्तरदायी बनाया?
- A.सन 1793 का चार्टर अधिनियम
- B.सन 1813 का चार्टर अधिनियम
- C.सन 1833 का चार्टर अधिनियम
- D.सन 1853 का चार्टर अधिनियम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, सन 1813 का चार्टर अधिनियम है, जिसने कंपनी के लिए अनिवार्य किया कि वह साहित्य के पुनरुद्धार और सुधार, भारत के विद्वानों के प्रोत्साहन तथा उपयोगी ज्ञान के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष कम से कम एक लाख रुपये रखे। विकल्प A गलत है क्योंकि 1793 का चार्टर अधिनियम कंपनी के एकाधिकार को बीस वर्ष और बढ़ाने तथा गवर्नर-जनरल के वेतन को भारतीय राजस्व पर भारित करने के लिए याद किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1833 के चार्टर अधिनियम ने कंपनी के व्यापारिक कार्य समाप्त किए और बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1853 के चार्टर अधिनियम ने सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता आरंभ की और गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी तथा कार्यपालिका कार्य अलग किए।
कलकत्ता, बंबई और मद्रास विश्वविद्यालयों की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.1835
- B.1854
- C.1857
- D.1882
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 1857 है, जो विद्रोह का वर्ष भी था; तीनों प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय 1854 के वुड के घोषणापत्र में सुझाए गए प्रतिरूप पर बने और आरंभ में वे पढ़ाने वाले नहीं, परीक्षा लेने वाले विश्वविद्यालय थे। विकल्प A गलत है क्योंकि 1835 मैकॉले की टिप्पणी और मेटकाफ प्रेस अधिनियम का वर्ष है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1854 उस घोषणापत्र का वर्ष है जिसने विश्वविद्यालयों की सिफारिश की—यह अंतर याद रखना आवश्यक है क्योंकि प्रश्नों में दोनों वर्ष साथ दिए जाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1882 हंटर आयोग का वर्ष है और वही वर्ष जब लॉर्ड रिपन ने वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम रद्द किया। चौथा विश्वविद्यालय इलाहाबाद में उसी शताब्दी में बाद में बना। इस वर्ष से एक बात और जुड़ी है—ये विश्वविद्यालय परीक्षा लेकर उपाधि देते थे और पढ़ाने का कार्य संबद्ध कॉलेज करते थे, और यह प्रतिरूप दशकों तक चला।
सन 1878 का वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम किस वायसराय के काल में पारित हुआ?
- A.लॉर्ड लिटन
- B.लॉर्ड रिपन
- C.लॉर्ड कर्जन
- D.लॉर्ड मिंटो
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, लॉर्ड लिटन है, जिनका 1878 का वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम मुँहबंद करने वाले कानून के रूप में याद किया जाता है, क्योंकि यह केवल भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों पर लागू होता था, सरकार को बंधपत्र माँगने और छापाखाना जब्त करने की शक्ति देता था, और न्यायालय में अपील का अधिकार नहीं देता था। विकल्प B गलत है, यद्यपि लॉर्ड रिपन ने 1882 में इसे रद्द किया, इसलिए उनका नाम रद्द करने से जुड़ा है, पारित करने से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड कर्जन 1904 के भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम और 1905 के बंगाल विभाजन से जुड़े हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड मिंटो उग्रवादी प्रेस के विरुद्ध 1908 का समाचार पत्र अधिनियम और 1910 का भारतीय प्रेस अधिनियम लाए। यह भी याद रखें कि अमृत बाजार पत्रिका रातभर में अंग्रेजी पत्र बनकर 1878 के अधिनियम से बच गई।
भारत में प्रकाशित पहला समाचार पत्र कौन था?
- A.बंगाल गजट
- B.कलकत्ता गजट
- C.बॉम्बे समाचार
- D.इंडियन मिरर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, बंगाल गजट है, जिसे हिक्की का गजट या कलकत्ता जनरल एडवर्टाइजर भी कहा जाता है; जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने इसे 1780 में आरंभ किया और कंपनी के अधिकारियों पर उसके प्रहारों के कारण इसे जब्त कर लिया गया। विकल्प B गलत है क्योंकि कलकत्ता गजट कुछ वर्ष बाद आरंभ हुआ सरकारी पत्र था। विकल्प C गलत है क्योंकि 1822 में आरंभ हुआ गुजराती पत्र बॉम्बे समाचार भारत का सबसे पुराना चलता हुआ समाचार पत्र है, किंतु भारत में प्रकाशित पहला नहीं—यही अंतर इसे बार-बार जाल बनाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि इंडियन मिरर उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध का है और देवेंद्रनाथ टैगोर से जुड़ा है। जोड़ी अलग रखें—पहला पत्र 1780 का, सबसे पुराना चलता पत्र 1822 का। एक बात और याद रखें—हिक्की के गजट ने कंपनी के उच्च अधिकारियों पर तीखे प्रहार किए, इसी कारण उसका छापाखाना जब्त हुआ और हिक्की को कारावास भुगतना पड़ा।
भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता किसे कहा जाता है?
- A.लॉर्ड वेलेजली
- B.लॉर्ड विलियम बेंटिंक
- C.चार्ल्स मेटकाफ
- D.लॉर्ड मैकॉले
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, चार्ल्स मेटकाफ है, जिन्होंने कार्यकारी गवर्नर-जनरल के रूप में 1835 के प्रेस अधिनियम से 1823 के लाइसेंसिंग विनियम रद्द किए और भारतीय समाचार पत्रों को लाइसेंस की बाध्यता से मुक्त किया, जिससे उन्हें भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड वेलेजली ने इसके विपरीत 1799 के प्रेस सेंसरशिप अधिनियम से सभी समाचार पत्रों पर पूर्व सेंसरशिप लगाई। विकल्प B गलत है क्योंकि लॉर्ड विलियम बेंटिंक 1829 में सती प्रथा के अंत, ठगी के दमन और मैकॉले की शिक्षा नीति स्वीकार करने के लिए याद किए जाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि मैकॉले ने 1835 का प्रेस अधिनियम और भारतीय दंड संहिता का प्रारूप बनाया, किंतु प्रेस की मुक्ति का श्रेय मेटकाफ को मिलता है, जिनके नाम से कानून पारित हुआ।
सन 1882 के पहले भारतीय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष कौन थे?
- A.डब्ल्यू. डब्ल्यू. हंटर
- B.माइकल सैडलर
- C.फिलिप हार्टोग
- D.जॉन सार्जेंट
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, डब्ल्यू. डब्ल्यू. हंटर है, जिन्होंने 1882 में नियुक्त उस भारतीय शिक्षा आयोग का नेतृत्व किया जिसे वुड के घोषणापत्र के कार्यान्वयन की समीक्षा करनी थी; इसने देशी भाषा में दी जाने वाली प्राथमिक शिक्षा, विद्यालयों को स्थानीय बोर्डों को सौंपने और अनुदान द्वारा निजी विद्यालयों की सहायता पर बल दिया। विकल्प B गलत है क्योंकि माइकल सैडलर 1917 से 1919 के कलकत्ता विश्वविद्यालय आयोग के अध्यक्ष थे, जिसने बारह वर्ष का स्कूल पाठ्यक्रम, इंटरमीडिएट कॉलेज और तीन वर्ष की उपाधि सुझाई। विकल्प C गलत है क्योंकि फिलिप हार्टोग ने 1929 की उस समिति की अध्यक्षता की जिसने प्राथमिक विद्यालयों में अपव्यय और अवरोधन की रिपोर्ट दी। विकल्प D गलत है क्योंकि जॉन सार्जेंट ने 1944 में युद्धोत्तर शिक्षा विकास की योजना दी।
'केसरी' और 'मराठा' समाचार पत्र किसने आरंभ किए?
- A.गोपाल कृष्ण गोखले
- B.बाल गंगाधर तिलक
- C.दादाभाई नौरोजी
- D.अरविंद घोष
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बाल गंगाधर तिलक है, जिन्होंने पुणे से मराठी में केसरी और अंग्रेजी में मराठा निकाला, और उनमें लिखे लेखों के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 124क के अंतर्गत उन पर राजद्रोह का मुकदमा चला। विकल्प A गलत है क्योंकि गोपाल कृष्ण गोखले सुधारक और हितवाद से जुड़े हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि दादाभाई नौरोजी ने गुजराती में रास्त गोफ्तार निकाला और पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया लिखी। विकल्प D गलत है क्योंकि अरविंद घोष ने स्वदेशी आंदोलन के समय वंदे मातरम् और बाद में कर्मयोगिन का संपादन किया। याद रखें कि राजद्रोह की धारा दंड संहिता में 1870 में जोड़ी गई और यही सरकार का राष्ट्रवादी संपादकों के विरुद्ध मुख्य हथियार बनी। तिलक इस बात के लिए भी याद किए जाते हैं कि सरकार की कार्रवाई ने उनके पक्ष को ही सिद्ध किया, तथा गणपति और शिवाजी उत्सवों के लिए, जिनके द्वारा वे राजनीति को इन पत्रों के साधारण पाठकों तक ले गए।
'अल-हिलाल' पत्रिका किसने आरंभ की?
- A.मौलाना अबुल कलाम आजाद
- B.मोहम्मद अली
- C.सैयद अहमद खान
- D.मुहम्मद इकबाल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, मौलाना अबुल कलाम आजाद है, जिन्होंने उर्दू साप्ताहिक अल-हिलाल आरंभ किया और उसके दबा दिए जाने पर अल-बलाग निकाला, और दोनों से औपनिवेशिक सरकार के विरुद्ध हिंदू-मुस्लिम एकता का पक्ष रखा। विकल्प B गलत है क्योंकि खिलाफत आंदोलन के अली भाइयों में से एक मोहम्मद अली ने अंग्रेजी में कॉमरेड और उर्दू में हमदर्द का संपादन किया। विकल्प C गलत है क्योंकि सैयद अहमद खान ने अलीगढ़ आंदोलन, मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज और तहजीब-उल-अखलाक पत्रिका आरंभ की। विकल्प D गलत है क्योंकि मुहम्मद इकबाल कवि और दार्शनिक थे, इस साप्ताहिक के संस्थापक नहीं। आजाद आगे स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने, और इसी नाम से इस अध्याय के दोनों भाग जुड़ते हैं। अल-हिलाल उर्दू प्रेस में एक बदलाव का भी चिह्न है—साहित्यिक स्वर से खुली राजनीतिक बहस की ओर, और इसी कारण सरकार ने उस दशक के प्रेस कानूनों के अंतर्गत उस पर कार्रवाई की।
सन 1929 की किस समिति ने भारत में प्राथमिक शिक्षा के अपव्यय और अवरोधन की समस्या की ओर ध्यान खींचा?
- A.सैडलर आयोग
- B.हार्टोग समिति
- C.रैले आयोग
- D.वर्धा समिति
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, हार्टोग समिति है, जिसने 1929 में बताया कि अधिकांश बच्चे साक्षर होने से पहले ही विद्यालय छोड़ देते हैं और प्राथमिक विद्यालयों के जल्दबाजी में हुए विस्तार से अपव्यय तथा अवरोधन उत्पन्न हुआ है; इसने आगे विस्तार के स्थान पर विद्यमान विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण की सिफारिश की। विकल्प A गलत है क्योंकि 1917 से 1919 का सैडलर आयोग विश्वविद्यालय शिक्षा तथा स्कूल और उपाधि पाठ्यक्रम के ढाँचे से संबंधित था। विकल्प C गलत है क्योंकि 1902 के रैले आयोग ने विश्वविद्यालयों की जाँच की और उससे कर्जन का 1904 का भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम निकला। विकल्प D गलत है क्योंकि 1937 की वर्धा योजना, जिसे गांधीजी की बुनियादी शिक्षा के विचार पर जाकिर हुसैन समिति ने तैयार किया, मातृभाषा में उत्पादक शिल्प के माध्यम से शिक्षा देने का प्रस्ताव था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वुड के घोषणापत्र को भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यह पहला दस्तावेज था जिसने किसी एक नियम के बजाय पूरी व्यवस्था रखी—लोक शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय, सहायता अनुदान योजना, देशी भाषा के प्राथमिक विद्यालय, शिक्षक प्रशिक्षण और स्त्री शिक्षा। सन 1854 के बाद जो कुछ बना, उसकी रूपरेखा इसी से निकली।
निस्यंदन सिद्धांत क्या था?
मैकॉले की नीति के पीछे यह विश्वास था कि यदि सरकार एक छोटे उच्च वर्ग को अंग्रेजी में पढ़ा दे तो ज्ञान उनसे रिसकर जनता तक पहुँच जाएगा। धन कॉलेजों में गया, रिसाव कभी नहीं हुआ और जन साक्षरता बहुत नीची बनी रही।
वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम को मुँहबंद करने वाला कानून क्यों कहा गया?
क्योंकि यह केवल भारतीय भाषाओं में छपने वाले पत्रों पर लागू होता था, अंग्रेजी पत्रों पर नहीं, मजिस्ट्रेट को बंधपत्र लेने और छापाखाना जब्त करने की शक्ति देता था, और न्यायालय में अपील का अधिकार नहीं देता था। अमृत बाजार पत्रिका अंग्रेजी साप्ताहिक बनकर इससे बच निकली।
महात्मा गांधी ने कौन से समाचार पत्रों का संपादन किया?
अंग्रेजी में यंग इंडिया, गुजराती में नवजीवन और बाद में हरिजन। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में इंडियन ओपिनियन का संपादन किया था, और वे अपने पत्रों में विज्ञापन लेने से इनकार करते थे।
भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता किसे और क्यों कहा जाता है?
चार्ल्स मेटकाफ को, क्योंकि कार्यकारी गवर्नर-जनरल के रूप में उन्होंने 1835 के प्रेस अधिनियम से 1823 के लाइसेंसिंग विनियम रद्द कर दिए, जिससे समाचार पत्र छापने के लिए किसी भारतीय को सरकारी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं रही।
स्रोत
- हमारे अतीत 3 (कक्षा 8), सभ्य बनाना, राष्ट्र को शिक्षित करना — एनसीईआरटी
- शिक्षा पर निदेशक मंडल का घोषणापत्र, 1854 (वुड का घोषणापत्र) — ईस्ट इंडिया कंपनी
- भारतीय शिक्षा आयोग की रिपोर्ट, 1882 — भारत सरकार
- प्रेस तथा पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 — भारत सरकार





