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मराठा और सिख: शिवाजी, पेशवा, गुरु और परीक्षा प्रश्न

मराठा और सिख शक्ति के परीक्षोपयोगी नोट्स: शिवाजी, अष्टप्रधान, चौथ, पेशवा, दस गुरु, खालसा, रणजीत सिंह तथा आंग्ल-मराठा और आंग्ल-सिख युद्ध एवं संधियां।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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मराठा और सिख: शिवाजी, पेशवा, गुरु और परीक्षा प्रश्न — GK24 title card
मराठा और सिख: शिवाजी, पेशवा, गुरु और परीक्षा प्रश्न — GK24 title card

औरंगजेब के बाद जब मुगल सत्ता कमजोर पड़ी तो दक्कन में मराठा और पंजाब में सिख दो ऐसी शक्तियां उभरीं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र राज्य खड़ा किया। दोनों ने अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी को लंबे समय तक रोके रखा और अंत में दोनों को कंपनी ने ही पराजित किया। परीक्षाओं में यह अध्याय इसलिए बार-बार आता है क्योंकि इसमें याद रखने योग्य जोड़ियां साफ हैं: शासक और किला, संधि और वर्ष, पद और उसका काम।

शिवाजी और मराठा शक्ति का उदय

शिवाजी भोंसले का जन्म 1630 में शिवनेरी किले में हुआ। उनके पिता शाहजी भोंसले बीजापुर की सेवा में थे और माता जीजाबाई ने पुणे में उनका पालन-पोषण किया, जहां दादाजी कोंडदेव उनके संरक्षक रहे। 1646 में उन्होंने तोरणा किला जीता और सह्याद्रि के पहाड़ी किलों पर अपनी शक्ति खड़ी की। 1659 में प्रतापगढ़ में उन्होंने बीजापुर के सेनापति अफजल खान को मारा। 1663 में पुणे के लाल महल पर रात्रि आक्रमण कर मुगल सूबेदार शाइस्ता खान को घायल किया और 1664 में सूरत बंदरगाह को लूटा, जहां वे 1670 में दोबारा गए। मिर्जा राजा जय सिंह के अभियान के बाद 1665 में पुरंदर की संधि हुई, जिसमें उन्हें तेईस किले सौंपने पड़े। 1666 में आगरा में नजरबंद किए जाने पर वे मिठाई की टोकरियों में छिपकर निकल भागे। 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और उन्होंने छत्रपति की उपाधि ली; 1680 में वहीं उनकी मृत्यु हुई। उनके पुत्र संभाजी को 1689 में औरंगजेब ने बंदी बनाकर मरवा दिया। दो सेनानायक परीक्षा में विशेष रूप से पूछे जाते हैं: तानाजी मालुसरे, जो 1670 में कोंडाना जीतते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और जिसके बाद किले का नाम सिंहगढ़ पड़ा, तथा बाजी प्रभु देशपांडे, जिन्होंने 1660 में पावन खिंड को रोके रखा।

अष्टप्रधान

शिवाजी ने आठ मंत्रियों की परिषद, अष्टप्रधान, के माध्यम से शासन चलाया। यह आधुनिक अर्थ में मंत्रिमंडल नहीं था, क्योंकि न्यायाधीश और पंडितराव को छोड़कर हर मंत्री के पास सैनिक दायित्व भी था और शिवाजी के समय ये पद वंशानुगत नहीं थे।

मंत्रीविभाग
पेशवा (मुख्य प्रधान)प्रधानमंत्री, सामान्य प्रशासन
अमात्य (मजूमदार)वित्त और लेखा
सचिव (सुरनवीस)राजकीय पत्राचार
मंत्री (वाकयानवीस)निजी मामले और गुप्तचर
सेनापति (सरनौबत)सेनाध्यक्ष
सुमंत (डबीर)विदेश विभाग
न्यायाधीशन्याय
पंडितरावदान और धार्मिक कार्य

राजस्व और सेना

मराठा भूमि-कर व्यवस्था नाप और निश्चित राजभाग पर टिकी थी, पर प्रसिद्ध वे दो वसूलियां हैं जो राज्य के बाहर के इलाकों से ली जाती थीं। चौथ उस क्षेत्र की आय का एक-चौथाई भाग था, जो मराठा आक्रमण से बचने के बदले दिया जाता था, और सरदेशमुखी अतिरिक्त एक-दसवां भाग था, जिसे शिवाजी महाराष्ट्र के वंशानुगत सरदेशमुख होने के दावे पर मांगते थे। सेना का आधार हल्की घुड़सवार टुकड़ियां थीं; बरगीर राज्य के दिए घोड़ों पर लड़ते थे और सिलहदार अपने घोड़े-हथियार स्वयं लाते थे। किलों की संख्या सैकड़ों में थी और हर किले पर समान पद के तीन अधिकारी रखे जाते थे ताकि कोई अकेला अधिकारी किला बेच न सके।

पेशवा और मराठा संघ

1713 में शाहू द्वारा नियुक्त बालाजी विश्वनाथ के समय से पेशवा का पद वास्तविक सत्ता का केंद्र बन गया और उनके परिवार में वंशानुगत हो गया। उनके पुत्र बाजीराव प्रथम (1720 से 1740) ने मराठा शक्ति को मालवा, गुजरात और गंगा-यमुना दोआब तक पहुंचाया। बालाजी बाजीराव, जिन्हें नाना साहब कहा जाता है, के समय 14 जनवरी 1761 को पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ, जिसमें अहमद शाह अब्दाली ने सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व वाली मराठा सेना को हराया। माधवराव प्रथम ने इस क्षति की बहुत-सी भरपाई की, पर 1772 में उनका असमय निधन हो गया। तब तक साम्राज्य बड़े घरानों का संघ बन चुका था: पूना में पेशवा, ग्वालियर में सिंधिया, इंदौर में होल्कर, बड़ौदा में गायकवाड़ और नागपुर में भोंसले।

आंग्ल-मराठा युद्ध

युद्धवर्षसमाप्ति
प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध1775 से 1782सालबाई की संधि, 1782
द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध1803 से 1805बसीन की संधि (1802) के बाद
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध1817 से 1818सिंधिया से ग्वालियर की और होल्कर से मंदसौर की संधि

बसीन की संधि से पेशवा बाजीराव द्वितीय ने सहायक संधि स्वीकार कर ली, इसीलिए कहा जाता है कि इसी संधि ने मराठा स्वतंत्रता पर मुहर लगा दी। तीसरे युद्ध के बाद पेशवा पद समाप्त कर दिया गया और बाजीराव द्वितीय को कानपुर के पास बिठूर में पेंशन देकर भेज दिया गया।

सिख गुरु और खालसा

गुरु नानक का जन्म 1469 में तलवंडी (आज का ननकाना साहिब) में हुआ और उनके बाद नौ गुरु हुए। गुरु अंगद ने गुरुमुखी लिपि को उसका रूप दिया। गुरु अमरदास ने लंगर को हर आगंतुक के लिए अनिवार्य बनाया और प्रचार के लिए मंजी व्यवस्था चलाई। गुरु रामदास ने रामदासपुर बसाया, जो आगे चलकर अमृतसर कहलाया। गुरु अर्जुन देव ने 1604 में आदि ग्रंथ का संकलन किया और हरमंदिर साहिब बनवाया; 1606 में जहांगीर के शासन में उन्हें मृत्युदंड दिया गया। गुरु हरगोबिंद ने मीरी और पीरी की दो तलवारें धारण कीं और अकाल तख्त की स्थापना की। गुरु तेग बहादुर को 1675 में औरंगजेब के शासन में दिल्ली में शहीद किया गया। गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 की बैसाखी को आनंदपुर साहिब में खालसा की स्थापना की, पंज प्यारे को अमृत छकाया, पांच ककार दिए और 1708 में नांदेड़ में देहावसान से पूर्व गुरु ग्रंथ साहिब को सदा के लिए गुरु घोषित कर देहधारी गुरु परंपरा समाप्त कर दी। इसके बाद बंदा सिंह बहादुर ने संघर्ष संभाला, 1710 में सरहिंद के फौजदार को हराया और 1716 में शहीद हुए।

रणजीत सिंह और आंग्ल-सिख युद्ध

अठारहवीं सदी में पंजाब बारह मिसलों में बंटा था। सुकरचकिया मिसल के रणजीत सिंह ने 1799 में लाहौर लिया और 1801 में महाराजा घोषित हुए। उन्होंने फ्रांसीसी और इतालवी अधिकारियों की मदद से आधुनिक सेना बनाई, अमृतसर, मुल्तान, कश्मीर और पेशावर जीते तथा शाह शुजा से कोहिनूर प्राप्त किया। 1809 की अमृतसर संधि से कंपनी के साथ सतलुज नदी को सीमा मान लिया गया। 1839 में उनकी मृत्यु हुई। 1845 से 1846 का प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध लाहौर की संधि पर समाप्त हुआ और 1848 से 1849 के द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के बाद लॉर्ड डलहौजी ने पंजाब का विलय कर लिया।

परीक्षा की दृष्टि से

इस अध्याय से प्रश्न प्रायः निश्चित जोड़ियों पर बनते हैं। अष्टप्रधान के किसी एक मंत्री और उसके विभाग पर प्रश्न लगभग तय है, विशेषकर वित्त के लिए अमात्य, दान-धर्म के लिए पंडितराव और विदेश के लिए सुमंत। युद्ध या संधि का वर्ष भी पूछा जाता है, जिनमें 1761 का पानीपत, 1665 की पुरंदर, 1782 की सालबाई, 1802 की बसीन और 1818 की मंदसौर संधि सबसे अधिक आती हैं। सिख पक्ष से खालसा के संस्थापक, आदि ग्रंथ के संकलनकर्ता, जहांगीर द्वारा शहीद किए गए गुरु बनाम औरंगजेब द्वारा शहीद किए गए गुरु, और पंजाब विलय का वर्ष पूछा जाता है। सामान्य भ्रम अमात्य और पेशवा में, प्रतापगढ़ और पुरंदर में तथा प्रथम और द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध में होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

शिवाजी का राज्याभिषेकरायगढ़, 1674, उपाधि छत्रपति
अष्टप्रधान का वित्त मंत्रीअमात्य, जिसे मजूमदार भी कहते हैं
चौथ और सरदेशमुखीआय का एक-चौथाई और एक-दसवां भाग
पानीपत का तीसरा युद्ध14 जनवरी 1761, अब्दाली ने मराठों को हराया
वंशानुगत पेशवा परंपरा का आरंभबालाजी विश्वनाथ, 1713
खालसा की स्थापनाआनंदपुर साहिब, बैसाखी 1699, गुरु गोबिंद सिंह द्वारा
आदि ग्रंथ का संकलन1604, गुरु अर्जुन देव द्वारा
अमृतसर की संधि1809, रणजीत सिंह और ईस्ट इंडिया कंपनी
पंजाब का विलय1849, लॉर्ड डलहौजी द्वारा
सिंहगढ़कोंडाना किला, 1670 में विजय, जहां तानाजी मालुसरे शहीद हुए

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 5th Sep 2021, Shift 1कठिन

1818 में तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के परिणामस्वरूप अंग्रेजों और होल्कर शासक के बीच कौन-सी संधि हुई?

  1. A.पुरंदर की संधि
  2. B.ग्वालियर की संधि
  3. C.सूरत की संधि
  4. D.मंदसौर की संधि
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. मंदसौर की संधि

व्याख्या

सही उत्तर D, मंदसौर की संधि है। 1817 से 1818 के तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध का निपटारा अलग-अलग मराठा घरानों से अलग-अलग संधियों द्वारा हुआ और इंदौर के होल्कर शासक से जनवरी 1818 में मंदसौर (मंदेश्वर) में संधि हुई। इससे होल्कर राज्य कंपनी के अधीन आ गया और उसकी स्वतंत्रता समाप्त हो गई। विकल्प A गलत है क्योंकि 1665 की पुरंदर संधि शिवाजी और मिर्जा राजा जय सिंह के बीच हुई थी, जब दक्कन में कंपनी का कोई महत्व नहीं था। विकल्प B गलत है क्योंकि 1817 की ग्वालियर संधि दौलतराव सिंधिया से हुई थी, होल्कर से नहीं, और विद्यार्थी अक्सर इन दोनों घरानों को आपस में बदल देते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1775 की सूरत संधि रघुनाथ राव से हुई थी और उसी से प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध आरंभ हुआ था।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 6 March 2019, Shift 1मध्यम

मुगल सेना के विरुद्ध सिंहगढ़ किले की सफल रक्षा में कौन-सा मराठा योद्धा वीरगति को प्राप्त हुआ?

  1. A.चिमाजी अप्पा
  2. B.बाजी प्रभु देशपांडे
  3. C.तानाजी मालुसरे
  4. D.बाजी पासलकर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. तानाजी मालुसरे

व्याख्या

सही उत्तर C, तानाजी मालुसरे है। तानाजी ने 1670 में रात के आक्रमण से कोंडाना किला मुगल सैन्य टुकड़ी से छीना और इसी लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए। कहा जाता है कि शिवाजी ने कहा कि गढ़ आया पर सिंह गया, और इसके बाद किले का नाम सिंहगढ़ पड़ा। विकल्प A गलत है क्योंकि चिमाजी अप्पा पेशवा बाजीराव प्रथम के भाई थे और 1739 में पुर्तगालियों से वसई जीतने के लिए याद किए जाते हैं, जो लगभग सत्तर वर्ष बाद की घटना है। विकल्प B गलत है क्योंकि बाजी प्रभु देशपांडे 1660 में पावन खिंड को रोककर शहीद हुए थे ताकि शिवाजी सुरक्षित विशालगढ़ पहुंच सकें; यह अलग प्रसंग है जिसे प्रश्नपत्र जानबूझकर विकल्पों में रखते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि बाजी पासलकर पुणे क्षेत्र के आरंभिक साथी थे और कोंडाना से उनका संबंध नहीं है।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: हरियाणा · 9 Jan 2021, Shift 1मध्यम

छत्रपति शिवाजी के अष्टप्रधान में वित्त मंत्री को क्या कहा जाता था?

  1. A.पेशवा
  2. B.सुरनवीस
  3. C.सुमंत
  4. D.अमात्य
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अमात्य

व्याख्या

सही उत्तर D, अमात्य है। अमात्य, जिसे मजूमदार भी कहा जाता था, राज्य के लेखे रखता था और हर परगने की आय-व्यय की जांच करता था, इसलिए वही आठ मंत्रियों में वित्त का अधिकारी माना जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पेशवा मुख्य प्रधान था जो सामान्य प्रशासन देखता और शासक की अनुपस्थिति में उसका प्रतिनिधित्व करता था; बाद के काल में यह पद सर्वोपरि हो गया, पर वह वित्त विभाग कभी नहीं था। विकल्प B गलत है क्योंकि सचिव, जिसे सुरनवीस भी कहते थे, राजकीय पत्राचार देखता और पत्रों तथा सनदों की भाषा जांचता था। विकल्प C गलत है क्योंकि सुमंत, जिसे डबीर कहा जाता था, विदेश विभाग का मंत्री था और दूसरे राज्यों के दूतों से व्यवहार करता था। याद रखने का सरल तरीका है तीन जोड़ियां: अमात्य से धन, सचिव से पत्र और सुमंत से विदेश।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 16 Nov 2021, Shift 1आसान

मराठों और अफगानिस्तान के शासक अहमद शाह दुर्रानी के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध किस वर्ष लड़ा गया?

  1. A.1781
  2. B.1851
  3. C.1761
  4. D.1831
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1761

व्याख्या

सही उत्तर C, 1761 है। पानीपत का तीसरा युद्ध 14 जनवरी 1761 को सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व वाली मराठा सेना, जिसमें पेशवा पुत्र विश्वासराव भी थे, और रोहिलों तथा अवध के नवाब की सहायता प्राप्त अहमद शाह अब्दाली (दुर्रानी) के बीच लड़ा गया। मराठों की भारी क्षति हुई और कुछ ही महीनों में पेशवा बालाजी बाजीराव का निधन हो गया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1781 प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का वर्ष है, जो 1782 की सालबाई संधि पर समाप्त हुआ। विकल्प B गलत है क्योंकि 1851 तक मराठा संघ 1818 में समाप्त हो चुका था और पंजाब का विलय भी हो चुका था। विकल्प D गलत है क्योंकि 1831 कंपनी के प्रभुत्व का काल है और उस समय पानीपत में कोई युद्ध नहीं हुआ। पानीपत के तीन युद्ध 1526, 1556 और 1761 में हुए।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 11 Nov 2018, Shift 3मध्यम

छत्रपति शिवाजी के प्रशासन में पंडितराव का कार्य क्या था?

  1. A.विदेश विभाग
  2. B.दान और धार्मिक कार्य
  3. C.महालेखाकार
  4. D.न्याय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. दान और धार्मिक कार्य

व्याख्या

सही उत्तर B, दान और धार्मिक कार्य है। पंडितराव अष्टप्रधान में धार्मिक विभाग का प्रमुख था, जो धार्मिक अनुष्ठानों की तिथियां तय करता, मंदिरों तथा विद्वानों को दिए जाने वाले अनुदान की देखरेख करता और धार्मिक आचरण से जुड़े अपराधों पर दंड देता था। विकल्प A गलत है क्योंकि विदेश विभाग सुमंत या डबीर के पास था, जो दूतों का आदान-प्रदान करता था। विकल्प C गलत है क्योंकि लेखा और वित्त अमात्य या मजूमदार का काम था, जो परगनों की आय-व्यय की जांच करता था। विकल्प D गलत है क्योंकि न्याय का काम न्यायाधीश करता था, जो प्रथा और प्राचीन धर्मशास्त्रों के आधार पर दीवानी तथा फौजदारी मामले तय करता था। यह भी याद रखें कि शेष छह मंत्रियों के विपरीत पंडितराव और न्यायाधीश को सैनिक दायित्व नहीं दिया जाता था।

Q6.भारतीय इतिहासआसान

गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की स्थापना किस वर्ष की?

  1. A.1604
  2. B.1675
  3. C.1699
  4. D.1708
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1699

व्याख्या

सही उत्तर C, 1699 है। 1699 की बैसाखी पर आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद सिंह ने पहले पांच स्वयंसेवकों, पंज प्यारे, को खंडे की पाहुल से अमृत छकाया और खालसा पंथ की स्थापना की, जिसके सदस्यों को पांच ककार तथा सिंह और कौर नाम दिए गए। विकल्प A गलत है क्योंकि 1604 में गुरु अर्जुन देव ने आदि ग्रंथ पूरा कर हरमंदिर साहिब में स्थापित किया था। विकल्प B गलत है क्योंकि 1675 में औरंगजेब के शासन में दिल्ली में गुरु तेग बहादुर की शहादत हुई, जिसके बाद गुरु गोबिंद सिंह गद्दी पर बैठे। विकल्प D गलत है क्योंकि 1708 में नांदेड़ में गुरु गोबिंद सिंह का देहावसान हुआ, जिससे पहले उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत गुरु घोषित किया। इन चार वर्षों को क्रम से याद रखना इस पूरे वर्ग के प्रश्नों को हल कर देता है।

Q7.भारतीय इतिहासआसान

सिखों के पहले प्रामाणिक ग्रंथ आदि ग्रंथ का संकलन किसने किया?

  1. A.गुरु नानक
  2. B.गुरु अंगद
  3. C.गुरु अर्जुन देव
  4. D.गुरु हरगोबिंद
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. गुरु अर्जुन देव

व्याख्या

सही उत्तर C, गुरु अर्जुन देव है। पांचवें गुरु ने अपने से पहले के गुरुओं की वाणी के साथ कबीर, नामदेव, रविदास और शेख फरीद जैसे संतों के पद एकत्र कर 1604 में आदि ग्रंथ पूरा किया और उसे अमृतसर के हरमंदिर साहिब में स्थापित किया, जहां बाबा बुड्ढा पहले ग्रंथी बने। विकल्प A गलत है क्योंकि गुरु नानक ने वाणी का बड़ा भाग रचा अवश्य, पर ग्रंथ का संकलन नहीं किया; यह संकलन उनके चार उत्तराधिकारियों के बाद हुआ। विकल्प B गलत है क्योंकि गुरु अंगद गुरुमुखी लिपि को व्यवस्थित रूप देने और लंगर परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि गुरु अर्जुन देव के पुत्र गुरु हरगोबिंद मीरी और पीरी की दो तलवारों तथा हरमंदिर साहिब के सामने अकाल तख्त के निर्माण के लिए स्मरण किए जाते हैं।

Q8.भारतीय इतिहासमध्यम

महाराजा रणजीत सिंह ने किस संधि द्वारा सतलुज को अपने विस्तार की सीमा स्वीकार किया?

  1. A.लाहौर की संधि, 1846
  2. B.अमृतसर की संधि, 1809
  3. C.बसीन की संधि, 1802
  4. D.सालबाई की संधि, 1782
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अमृतसर की संधि, 1809

व्याख्या

सही उत्तर B, 1809 की अमृतसर संधि है। इस संधि से रणजीत सिंह और ईस्ट इंडिया कंपनी ने तय किया कि सतलुज नदी दोनों के प्रभाव क्षेत्रों को बांटेगी, जिससे सतलुज के इस पार के सिख सरदार कंपनी के संरक्षण में चले गए और रणजीत सिंह ने अपना ध्यान पश्चिम में मुल्तान, कश्मीर और पेशावर की ओर मोड़ा। विकल्प A गलत है क्योंकि 1846 की लाहौर संधि प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध के अंत में हुई, जो रणजीत सिंह की मृत्यु के सात वर्ष बाद की घटना है, और इसमें जालंधर दोआब तथा भारी हर्जाना देना पड़ा। विकल्प C गलत है क्योंकि 1802 की बसीन संधि मराठा पेशवा बाजीराव द्वितीय ने की थी, जिसमें उन्होंने सहायक संधि स्वीकार की। विकल्प D गलत है क्योंकि 1782 की सालबाई संधि ने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त किया और उसका पंजाब से कोई संबंध नहीं है।

Q9.भारतीय इतिहासआसान

मराठों द्वारा वसूली जाने वाली चौथ आय का कितना भाग होती थी?

  1. A.एक-दसवां
  2. B.एक-छठा
  3. C.एक-चौथाई
  4. D.एक-तिहाई
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एक-चौथाई

व्याख्या

सही उत्तर C, एक-चौथाई है। चौथ शब्द ही चार से बना है और यह मराठा राज्य के बाहर के किसी क्षेत्र की आय का एक-चौथाई भाग था, जो इसलिए दिया जाता था कि मराठा सेनाएं वहां आक्रमण न करें और सिद्धांततः उसकी रक्षा करें। विकल्प A गलत है क्योंकि एक-दसवां भाग सरदेशमुखी था, जिसे शिवाजी महाराष्ट्र के वंशानुगत सरदेशमुख होने के दावे पर वसूलते थे, और यही जोड़ी प्रश्नपत्रों में आपस में बदल दी जाती है। विकल्प B गलत है क्योंकि एक-छठा भाग प्राचीन धर्मशास्त्रों में उल्लिखित राजा का पारंपरिक भाग है, कोई मराठा वसूली नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि एक-तिहाई की कोई मराठा मांग नहीं थी; अपने राज्य की भूमि पर राजस्व की अलग व्यवस्था थी, जो अन्नाजी दत्तो से जुड़ी मानी जाती है।

Q10.भारतीय इतिहासमध्यम

मराठा राज्य में वंशानुगत पेशवा परंपरा का पहला पेशवा कौन था?

  1. A.बाजीराव प्रथम
  2. B.बालाजी विश्वनाथ
  3. C.माधवराव प्रथम
  4. D.नाना फडणवीस
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. बालाजी विश्वनाथ

व्याख्या

सही उत्तर B, बालाजी विश्वनाथ है। 1713 में शाहू ने उन्हें पेशवा नियुक्त किया और उन्होंने मुगल दरबार से दक्कन में चौथ तथा सरदेशमुखी वसूलने का अधिकार प्राप्त किया; इसके बाद यह पद उनके परिवार में वंशानुगत हो गया और पूना से पेशवा शासन चलाने लगे, जबकि सतारा के छत्रपति नाममात्र के शासक रह गए। विकल्प A गलत है क्योंकि मालवा और गुजरात तक मराठा शक्ति फैलाने वाले बाजीराव प्रथम उनके पुत्र और इस परंपरा के दूसरे पेशवा थे। विकल्प C गलत है क्योंकि पानीपत के बाद मराठा शक्ति को संभालने वाले माधवराव प्रथम बहुत बाद में आए और 1772 में उनका निधन हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि नाना फडणवीस कभी पेशवा नहीं बने; वे माधवराव द्वितीय के अल्पवयस्क काल में पूना दरबार संभालने वाले प्रमुख मंत्री और संघ के बड़े राजनयिक थे।

Q11.भारतीय इतिहासआसान

1849 में पंजाब का ब्रिटिश भारत में विलय किस गवर्नर जनरल ने किया?

  1. A.लॉर्ड वेलेजली
  2. B.लॉर्ड हेस्टिंग्स
  3. C.लॉर्ड डलहौजी
  4. D.लॉर्ड कैनिंग
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लॉर्ड डलहौजी

व्याख्या

सही उत्तर C, लॉर्ड डलहौजी है। 1848 से 1849 का द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध गुजरात के युद्ध में सिख सेना की पराजय पर समाप्त हुआ और डलहौजी ने 1849 में पंजाब का विलय कर उसे प्रशासन बोर्ड के अधीन रखा तथा बालक महाराजा दलीप सिंह को निर्वासित कर दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1798 से 1805 तक गवर्नर जनरल रहे लॉर्ड वेलेजली सहायक संधि व्यवस्था और बसीन की संधि के लिए याद किए जाते हैं, पंजाब के लिए नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि लॉर्ड हेस्टिंग्स ने 1817 से 1818 का तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध लड़ा और पेशवा पद समाप्त किया, जबकि उनके काल में रणजीत सिंह का पंजाब स्वतंत्र था। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड कैनिंग 1857 के विद्रोह के समय गवर्नर जनरल थे और 1858 में पहले वायसराय बने, जो विलय से लगभग एक दशक बाद की बात है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अष्टप्रधान में कौन-कौन से मंत्री होते थे?

पेशवा या मुख्य प्रधान, वित्त के लिए अमात्य, पत्राचार के लिए सचिव, निजी मामलों और गुप्तचरी के लिए मंत्री, सेनाध्यक्ष सेनापति, विदेश के लिए सुमंत, न्याय के लिए न्यायाधीश और दान तथा धार्मिक कार्यों के लिए पंडितराव।

चौथ और सरदेशमुखी में क्या अंतर है?

चौथ मराठा राज्य के बाहर के क्षेत्र की आय का एक-चौथाई भाग था, जो आक्रमण से बचने के बदले दिया जाता था। सरदेशमुखी उससे अलग एक-दसवां भाग था, जिसे शिवाजी महाराष्ट्र के वंशानुगत सरदेशमुख होने के दावे पर वसूलते थे।

पानीपत का तीसरा युद्ध क्यों महत्वपूर्ण है?

14 जनवरी 1761 को लड़े गए इस युद्ध में सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व वाली मराठा सेना अहमद शाह अब्दाली से हार गई। दिल्ली से आगे मराठा विस्तार रुक गया और साम्राज्य घरानों के संघ में बदल गया, जिन्हें कंपनी ने बाद में एक-एक कर हराया।

किन सिख गुरुओं को मुगलों ने शहीद किया?

पांचवें गुरु अर्जुन देव को 1606 में जहांगीर के शासन में और नौवें गुरु तेग बहादुर को 1675 में औरंगजेब के शासन में दिल्ली में शहीद किया गया। कौन-सा गुरु किस बादशाह के काल में शहीद हुआ, यह परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।

अंग्रेजों ने पंजाब का विलय कब किया?

द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध की समाप्ति पर 1849 में लॉर्ड डलहौजी ने पंजाब का विलय किया। इससे पहले 1845 से 1846 के प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध के बाद लाहौर की संधि हुई थी, जिसने सिख राज्य को कमजोर किया पर समाप्त नहीं किया।

स्रोत

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