प्राचीन भारत के बंदरगाह और समुद्री व्यापार: परीक्षा नोट्स
प्राचीन भारतीय बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर नोट्स: लोथल, भड़ौच, मुजिरिस, अरिकामेडु, ताम्रलिप्ति, रोम से व्यापार, मानसूनी मार्ग और व्यापारी श्रेणियाँ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत का तट सात हजार किलोमीटर से अधिक लंबा है और उसका उपयोग बहुत पहले आरंभ हो गया था। हड़प्पा के नगर जब खड़े थे, तब लोथल में गोदीबाड़ा बन चुका था; ईसा की पहली शताब्दी में यूनानी और रोमन नाविक मलाबार तट पर काली मिर्च खरीद रहे थे; और ग्यारहवीं शताब्दी में चोल बेड़ा बंगाल की खाड़ी पार कर गया। इस विषय के प्रश्न लगभग सदा जोड़ी मिलाने वाले होते हैं: प्राचीन नाम के सामने आज का स्थान, बंदरगाह के सामने उसका तट, तथा बंदरगाह के सामने उसकी नदी या राजवंश। नीचे वही जोड़ियाँ दी गई हैं जो वर्ष प्रति वर्ष लौटती हैं।
जानकारी के स्रोत
प्रमाण मुख्यतः चार स्रोतों से आते हैं। पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी, ईसा की पहली शताब्दी का यूनानी नौवहन विवरण, जिसे किसी अज्ञात व्यापारी ने लिखा, लाल सागर से गंगा तक के बंदरगाह और उनका माल गिनाता है। दूसरी शताब्दी के टॉलेमी के भूगोल में इनका नक्शा मिलता है। प्लिनी ने अपने नैचुरल हिस्ट्री में शिकायत की कि भारत रोम का सोना खींच रहा है। भारतीय पक्ष में संगम काव्य, विशेषकर पट्टिनप्पालै और शिलप्पादिकारम, पुहार बंदरगाह का वर्णन करते हैं, और कौटिल्य का अर्थशास्त्र नावाध्यक्ष के कर्तव्य तथा नियम बताता है।
सबसे प्राचीन बंदरगाह
गुजरात के भाल क्षेत्र में स्थित लोथल, जिसका उत्खनन एस. आर. राव ने किया, में पक्की ईंटों का जलकुंड मिला है जो भोगावो नदी से नहर द्वारा जुड़ा था और जिसे सामान्यतः गोदीबाड़ा माना जाता है; साथ में माल गोदाम और मनका कारखाना भी है। यह उपमहाद्वीप की अपने प्रकार की सबसे पुरानी संरचना है। अन्य हड़प्पाकालीन तटीय स्थल मकरान तट पर सुत्कागेनडोर और सोत्का कोह, तथा बालाकोट, कुंतासी और खादिर द्वीप का धौलावीरा हैं। मेसोपोटामिया की पट्टिकाएँ इस भूमि को मेलुहा और मार्ग के ठिकानों को दिलमुन, अर्थात आज का बहरीन, तथा मगान, अर्थात आज का ओमान कहती हैं। हड़प्पा से सूती वस्त्र, कार्नीलियन मनके, हाथीदाँत, शंख और इमारती लकड़ी बाहर जाती थी।
पश्चिमी तट के बंदरगाह
पश्चिमी बंदरगाह लाल सागर और फारस की खाड़ी की ओर खुलते थे। इनमें सबसे बड़ा बैरीगाजा था, अर्थात गुजरात में नर्मदा पर बसा आज का भड़ौच, जो सातवाहन और क्षत्रप प्रदेशों का व्यापार संभालता था। ग्रंथों का सूर्पारक, यानी सोपारा, आज के वसई के पास था, तथा कल्याण और चौल कोंकण की सेवा करते थे। मलाबार तट पर मुजिरिस था, जिसे केरल में कोडुंगल्लूर तथा उत्खनित स्थल पट्टनम के निकट रखा जाता है और जो रोमन व्यापार की प्रमुख काली मिर्च मंडी थी; उसके पास तिंडिस और नेल्किंडा थे। कैंबे, कोल्लम और कालीकट मध्यकाल में उभरे।
पूर्वी तट के बंदरगाह
| प्राचीन नाम | आज का स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| ताम्रलिप्ति | तामलुक, पश्चिम बंगाल | रूपनारायण पर; फाह्यान यहीं से श्रीलंका गया |
| पोडुके | अरिकामेडु, पुडुचेरी के निकट | रोमन मदिरा पात्र और रूलेटेड मृदभांड |
| कावेरीपट्टिनम या पुहार | कावेरी का मुहाना, तमिलनाडु | संगम युग का चोल बंदरगाह |
| कोरकई | थूथुकुडी जिला, तमिलनाडु | ताम्रपर्णी पर पांड्य मोती बंदरगाह |
| मैसोलिया | मसूलीपट्टनम, आंध्र प्रदेश | मलमल के लिए प्रसिद्ध |
| दंतपुर और पलूर | तटीय ओडिशा | कलिंग के दक्षिण पूर्व एशियाई बंदरगाह |
रोम से व्यापार और मानसून
ईसा की पहली शताब्दी के मध्य के आसपास हिप्पालस नामक यूनानी नाविक ने दक्षिण पश्चिम मानसून की चाल समझ ली, और जहाज तट के सहारे चलने के बदले सीधे अरब सागर पार करने लगे। मिस्र से मुजिरिस की यात्रा घटकर लगभग चालीस दिन की रह गई और भारत रोम व्यापार तेज हो गया। भारत काली मिर्च बेचता था, जिसे तमिल काव्य यवनप्रिय कहते हैं, और उसके साथ मसाले, कोरकई के मोती, बारीक मलमल, हाथीदाँत, सागौन, नील, रत्न तथा वह उत्कृष्ट इस्पात, जिसे रोमन फेर्रम इंडिकम कहते थे। बदले में सोने चाँदी के सिक्के, दो हत्थों वाले पात्रों में मदिरा, काँच, राँगा, सीसा, मूँगा और गायक दास आते थे। अरिकामेडु, कोयंबटूर और मदुरै क्षेत्र तथा कोल्हापुर में ऑगस्टस, तिबेरियस और नीरो के सिक्कों के ढेर मिले हैं, इसी से प्लिनी रोम के सोने के बहाव पर क्षुब्ध थे।
श्रेणियाँ, राजा और पूर्वी यात्राएँ
समुद्री व्यापार राज्य के बदले व्यापारी श्रेणियों द्वारा संचालित था। ऐहोल के नाम पर बनी पाँच सौ की अय्यावोले श्रेणी, मणिग्रामम तथा नानादेसी, अर्थात अनेक देशों के व्यापारी, अपने जहाज, सशस्त्र रक्षक और कर्नाटक से सुमात्रा तक अभिलेख रखते थे। व्यापारियों के पीछे राजकीय नौसेनाएँ चलीं। चोल शासक राजराज प्रथम ने उत्तरी श्रीलंका तट और मालदीव लिया, और उनके पुत्र राजेंद्र प्रथम ने 1025 ईस्वी में सुमात्रा तथा मलाया के श्रीविजय साम्राज्य पर प्रसिद्ध नौसैनिक अभियान भेजा, जो इस पैमाने का एकमात्र भारतीय समुद्री अभियान था। नागपट्टिनम दक्षिण पूर्व एशिया की ओर चोल द्वार बन गया, जहाँ व्यापारियों के साथ भारतीय लिपियाँ, मंदिर और रामकथा भी पहुँचीं। इन यात्राओं की स्मृति ओडिशा के कटक में महानदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाली बालीयात्रा में जीवित है, जब बाली, जावा और सुमात्रा की यात्राओं की याद में छोटी नावें तैराई जाती हैं।
पतन और निरंतरता
तीसरी शताब्दी के बाद रोमन अर्थव्यवस्था के क्षीण होते ही भारत रोम व्यापार मंद पड़ गया और ढुलाई का काम अरब तथा बाद में चीनी व्यापारियों के हाथ चला गया। बंदरगाह मरे नहीं: जब पुर्तगाली आए तब भड़ौच, कोल्लम, कालीकट और मसूलीपट्टनम भरे पूरे थे, और काली मिर्च, वस्त्र तथा रत्न बाहर जाने और बहुमूल्य धातु भीतर आने का पुराना ढाँचा यूरोपीय कंपनियों के आने तक चलता रहा।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय में जोड़ियाँ पूछी जाती हैं। प्राचीन नाम और स्थान मिलाइए: बैरीगाजा और भड़ौच, मुजिरिस और केरल तट, पोडुके और अरिकामेडु, मैसोलिया और मसूलीपट्टनम, ताम्रलिप्ति और तामलुक। बंदरगाह और उसकी नदी या तट मिलाइए: लोथल और भोगावो, कोरकई और ताम्रपर्णी, पुहार और कावेरी, ताम्रलिप्ति और रूपनारायण। एक अंक के प्रश्न स्रोतों से बनते हैं, मुख्यतः पेरिप्लस और टॉलेमी से, हिप्पालस को दिए गए मानसून के श्रेय से, काली मिर्च के लिए यवनप्रिय शब्द से, तथा अय्यावोले, मणिग्रामम और नानादेसी श्रेणियों से। चोल कड़ी, अर्थात श्रीलंका में राजराज प्रथम और 1025 ईस्वी में श्रीविजय पर राजेंद्र प्रथम, इतिहास तथा समसामयिकी दोनों में आती है जब बालीयात्रा या चोल वर्षगाँठ समाचार में हों। सामान्य जाल हैं: लोथल को राजस्थान में बताना, मुजिरिस को पूर्वी तट का बंदरगाह कहना, अरिकामेडु को आदिचनल्लूर से बदल देना, और श्रीविजय अभियान का श्रेय राजेंद्र प्रथम के स्थान पर राजराज प्रथम को देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सबसे पुराना गोदीबाड़ा | लोथल, गुजरात, भोगावो की नहर पर, उत्खनन एस. आर. राव |
|---|---|
| बैरीगाजा | नर्मदा तट पर भड़ौच, गुजरात |
| मुजिरिस | केरल तट, कोडुंगल्लूर और पट्टनम के निकट, प्रमुख काली मिर्च बंदरगाह |
| पोडुके | पुडुचेरी के निकट अरिकामेडु, रोमन मदिरा पात्र और रूलेटेड मृदभांड |
| ताम्रलिप्ति | तामलुक, पश्चिम बंगाल, रूपनारायण नदी पर |
| पांड्य मोती बंदरगाह | ताम्रपर्णी नदी पर कोरकई |
| प्रमुख विदेशी स्रोत | पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी, ईसा की पहली शताब्दी |
| मानसूनी मार्ग | यूनानी नाविक हिप्पालस को श्रेय |
| काली मिर्च | तमिल स्रोतों में यवनप्रिय |
| चोल समुद्री अभियान | राजेंद्र प्रथम का श्रीविजय पर, 1025 ईस्वी |
| व्यापारी श्रेणियाँ | पाँच सौ की अय्यावोले, मणिग्रामम, नानादेसी |
| कलिंग की स्मृति | कटक, ओडिशा में कार्तिक पूर्णिमा की बालीयात्रा |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
उपमहाद्वीप के सबसे प्राचीन गोदीबाड़े के लिए प्रसिद्ध हड़प्पाकालीन स्थल लोथल आज किस राज्य में है?
- A.राजस्थान
- B.गुजरात
- C.महाराष्ट्र
- D.हरियाणा
उत्तर देखें
लोथल गुजरात के भाल क्षेत्र में, खंभात की खाड़ी के शीर्ष के निकट स्थित है और इसका उत्खनन एस. आर. राव ने किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यूनानी और रोमन विवरणों में भारत का सबसे व्यस्त पश्चिमी बंदरगाह बैरीगाजा किस आज के नगर से पहचाना जाता है?
- A.भड़ौच
- B.सूरत
- C.मुंबई
- D.कोच्चि
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यह नर्मदा और तापी घाटियों के रास्ते सातवाहन तथा क्षत्रप प्रदेशों का व्यापार संभालता था और यहाँ से सूती वस्त्र, पिप्पली, जटामांसी और रत्न बाहर जाते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत रोम व्यापार की प्रमुख काली मिर्च मंडी प्राचीन बंदरगाह मुजिरिस आज के किस राज्य के तट पर था?
- A.तमिलनाडु
- B.कर्नाटक
- C.केरल
- D.आंध्र प्रदेश
उत्तर देखें
मुजिरिस, जिसे तमिल स्रोत मुचिरि कहते हैं, पेरियार नदी पर कोडुंगल्लूर के निकट था, और एर्णाकुलम जिले के पट्टनम में हुए उत्खनन से रोमन मदिरा पात्रों के टुकड़े, काँच के मनके तथा ईंटों की संरचनाएँ मिली हैं, जो पेरिप्लस के वर्णन से मेल खाती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जिस अरिकामेडु से रोमन मदिरा पात्र और रूलेटेड मृदभांड मिले, वह पेरिप्लस में किस नाम से आता है?
- A.पोडुके
- B.नेल्किंडा
- C.तिंडिस
- D.मैसोलिया
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पुडुचेरी के पास अरियनकुप्पम नदी पर स्थित अरिकामेडु को पेरिप्लस के पोडुके तथा टॉलेमी के पोडुके एम्पोरियन से पहचाना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वह प्राचीन बंदरगाह ताम्रलिप्ति, जहाँ से फाह्यान श्रीलंका के लिए रवाना हुआ, आज किस राज्य में है?
- A.ओडिशा
- B.पश्चिम बंगाल
- C.बिहार
- D.आंध्र प्रदेश
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ताम्रलिप्ति आज का तामलुक है, जो पूर्व मेदिनीपुर जिले में रूपनारायण नदी पर, हुगली से उसके संगम के निकट स्थित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दक्षिण पश्चिम मानसूनी हवाओं से सीधे अरब सागर पार कर भारत आने का श्रेय किस यूनानी नाविक को दिया जाता है?
- A.मेगस्थनीज
- B.हिप्पालस
- C.टॉलेमी
- D.नियार्कस
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ईसा की पहली शताब्दी के मध्य के आसपास इस नाविक ने दक्षिण पश्चिम मानसून की चाल समझ ली, जिसके बाद जहाज तट से सटकर चलने के बदले लाल सागर के मुहाने से सीधे मलाबार तट पहुँचने लगे; यात्रा घटकर लगभग चालीस दिन की रह गई और भारत रोम व्यापार में…
पूरी व्याख्या पढ़ें →तमिल स्रोतों में किस भारतीय निर्यात वस्तु को यवनप्रिय कहा गया है?
- A.मोती
- B.मलमल
- C.काली मिर्च
- D.चंदन
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संगम काव्य तथा बाद के संस्कृत ग्रंथ काली मिर्च को यवनप्रिय कहते हैं, अर्थात यवनों को प्रिय, और यवन शब्द उन यूनानियों तथा रोमनों के लिए प्रयुक्त होता था जो इसके लिए मलाबार बंदरगाहों पर उमड़ते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सुमात्रा के श्रीविजय साम्राज्य पर 1025 ईस्वी में नौसैनिक अभियान किस चोल शासक ने भेजा?
- A.राजराज प्रथम
- B.राजेंद्र प्रथम
- C.कुलोत्तुंग प्रथम
- D.विजयालय
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सही उत्तर है B, राजेंद्र प्रथम, जो राजराज प्रथम के पुत्र थे और जिन्होंने 1025 ईस्वी में मलक्का तथा सुंडा जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखने वाली व्यापारिक शक्ति श्रीविजय के विरुद्ध बंगाल की खाड़ी पार चोल बेड़ा भेजा तथा अपने अभिलेखों में इस अभियान और अर्जित उपाधियों का उल्लेख किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संगम युग में पांड्यों का मोती बंदरगाह कोरकई किस नदी पर स्थित था?
- A.कावेरी
- B.वैगै
- C.ताम्रपर्णी
- D.पालार
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कोरकई आज के थूथुकुडी जिले में ताम्रपर्णी के मुहाने के पास था और मन्नार की खाड़ी की पांड्य मोती मत्स्यकी का केंद्र था, जिसकी प्रशंसा पेरिप्लस तथा संगम कवियों ने की; समुद्र पीछे हट जाने से यह स्थल अब भीतर रह गया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय व्यापारियों की दक्षिण पूर्व एशिया की प्राचीन समुद्री यात्राओं की स्मृति में मनाई जाने वाली बालीयात्रा किस राज्य में होती है?
- A.ओडिशा
- B.पश्चिम बंगाल
- C.गुजरात
- D.तमिलनाडु
उत्तर देखें
बालीयात्रा, अर्थात बाली की यात्रा, कटक में महानदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है, जब लोग कागज तथा केले की छाल की छोटी नावें तैराकर उन कलिंग व्यापारियों को स्मरण करते हैं जो बाली, जावा, सुमात्रा और बोर्नियो जाते थे; उसी दिन को बोइता बंदाण भी कहा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत का सबसे प्राचीन ज्ञात गोदीबाड़ा कहाँ है?
गुजरात के हड़प्पाकालीन स्थल लोथल का ईंटों वाला जलकुंड, जिसका उत्खनन एस. आर. राव ने किया, उपमहाद्वीप का सबसे पुराना गोदीबाड़ा माना जाता है। यह नहर से भोगावो नदी से जुड़ा था और उसके पास माल गोदाम तथा मनका कारखाना था।
पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी क्या है?
यह ईसा की पहली शताब्दी का यूनानी नौवहन ग्रंथ है, जिसे किसी अनाम व्यापारी ने लिखा और जिसमें लाल सागर से गंगा के मुहाने तक के बंदरगाह तथा प्रत्येक का क्रय विक्रय गिनाया गया है। प्रारंभिक भारतीय समुद्री व्यापार पर यह सर्वाधिक उपयोगी विदेशी स्रोत है।
बैरीगाजा, मुजिरिस और ताम्रलिप्ति आज के कौन से नगर हैं?
बैरीगाजा गुजरात में नर्मदा तट का भड़ौच है, मुजिरिस केरल तट पर कोडुंगल्लूर के पास, उत्खनित स्थल पट्टनम के निकट था, और ताम्रलिप्ति पश्चिम बंगाल में रूपनारायण नदी पर स्थित तामलुक है।
दक्षिण भारत में रोमन सिक्के इतनी बड़ी संख्या में क्यों मिले?
क्योंकि रोम भारतीय काली मिर्च, मोती, मलमल और रत्नों का मूल्य बहुत कुछ सोने चाँदी के सिक्कों में चुकाता था। अरिकामेडु तथा कोयंबटूर, मदुरै और कोल्हापुर क्षेत्र में ऑगस्टस, तिबेरियस और नीरो के सिक्कों के ढेर मिले हैं, और प्लिनी ने शिकायत की थी कि यह व्यापार रोम का धन खींच रहा है।
श्रीविजय पर भारतीय नौसैनिक अभियान किसने भेजा?
चोल शासक राजेंद्र प्रथम ने, जिन्होंने 1025 ईस्वी में सुमात्रा और मलय प्रायद्वीप के श्रीविजय साम्राज्य के विरुद्ध बंगाल की खाड़ी पार अपना बेड़ा भेजा। उनके पिता राजराज प्रथम ने इससे पहले उत्तरी श्रीलंका तथा मालदीव जीता था।
ओडिशा की बालीयात्रा किस बात की स्मृति है?
यह कलिंग के व्यापारियों की बाली, जावा, सुमात्रा और बोर्नियो की यात्राओं की याद है। यह मेला कटक में महानदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा को लगता है, जब उन जहाजों की स्मृति में छोटी नावें तैराई जाती हैं जो कलिंग के बंदरगाहों से निकलती थीं।
स्रोत
- लोथल और सिंधु सभ्यता: लोथल गोदीबाड़ा के उत्खनन विवरण — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
- हमारे अतीत एक (कक्षा 6), व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री अध्याय — एनसीईआरटी
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग एक (कक्षा 12), अध्याय 1: ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ — एनसीईआरटी
- अरिकामेडु, भारत रोम व्यापारिक केंद्र: स्थल अभिलेख — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण





