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GK नोट्सभारतीय इतिहास1857 का विद्रोह

1857 का विद्रोह: कारण, केंद्र, नेता और परिणाम

परीक्षा के लिए 1857 के विद्रोह के नोट्स: राजनीतिक, आर्थिक और सैनिक कारण, विद्रोह के केंद्र और उनके नेता, असफलता के कारण तथा 1858 के परिवर्तन।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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1857 का विद्रोह: कारण, केंद्र, नेता और परिणाम — GK24 title card
1857 का विद्रोह: कारण, केंद्र, नेता और परिणाम — GK24 title card

1857 का विद्रोह 10 मई 1857 को मेरठ में सिपाहियों के विद्रोह के रूप में आरंभ हुआ और आगे चलकर वह सबसे बड़ी सशस्त्र चुनौती बना जिसका सामना अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में करना पड़ा। इसने कंपनी का शासन समाप्त किया, देश को ब्रिटिश ताज के सीधे शासन में लाया और अगले नब्बे वर्षों के लिए भारत के प्रशासन का स्वरूप बदल दिया। हर परीक्षा इसके केंद्र, नेता और परिणाम पूछती है, इसलिए इस विद्रोह के तथ्यों को जोड़ियों और तिथियों के रूप में याद करना सबसे उपयोगी है।

विद्रोह क्यों भड़का

राजनीतिक कारण लॉर्ड डलहौज़ी के विलयों में थे। उसके व्यपगत के सिद्धांत ने दत्तक पुत्र का उत्तराधिकार अस्वीकार किया, जिससे सतारा, झाँसी और नागपुर के शासक समाप्त हुए; 1856 में कुशासन के बहाने अवध का विलय हुआ और अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहेब की पेंशन रोक दी गई। आर्थिक कारणों में मशीन से बने माल के कारण भारतीय दस्तकारी का विनाश, भारी भू राजस्व की माँग, इनाम आयोग द्वारा करमुक्त भूमि की वापसी और किसानों तथा शिल्पकारों का संकट सम्मिलित थे। सामाजिक और धार्मिक स्तर पर लोगों को भय था कि कंपनी उनका धर्म बदलना चाहती है: 1829 में सती प्रथा का अंत, 1850 का धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम, जिसने धर्म परिवर्तन करने वाले को पैतृक संपत्ति का अधिकार दिया, और 1856 का हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, तीनों को हस्तक्षेप माना गया। सेना में भारतीय सिपाही को यूरोपीय सैनिक से कम वेतन मिलता था, ऊँचे पद नहीं मिलते थे और 1856 के सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम से रोष था, जिसके अनुसार उन्हें समुद्र पार भी सेवा करनी पड़ती। तात्कालिक कारण नई एनफील्ड राइफल थी, जिसके कारतूस दाँत से खोलने पड़ते थे और माना जाता था कि उन पर गाय तथा सूअर की चर्बी लगी है। 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के मंगल पांडे ने मार्च 1857 में बैरकपुर में अपने अधिकारियों पर आक्रमण किया और 8 अप्रैल 1857 को फाँसी पर चढ़े।

विद्रोह का क्रम

10 मई 1857 को मेरठ के सिपाही उठ खड़े हुए, अपने अधिकारियों को मार डाला और दिल्ली की ओर बढ़े, जहाँ वे 12 मई को पहुँचे। उन्होंने वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय को हिंदुस्तान का शासक घोषित किया और विद्रोह गंगा घाटी तथा मध्य भारत में फैल गया। सितंबर 1857 में अंग्रेज़ों ने दिल्ली पुनः जीत ली, बहादुर शाह बंदी बनाकर रंगून भेजे गए, जहाँ 1862 में उनका देहांत हुआ, और 1858 के मध्य तक अंतिम केंद्र भी गिर गए। रानी लक्ष्मीबाई जून 1858 में ग्वालियर के निकट लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, तांत्या टोपे 1859 में पकड़कर मृत्युदंड दिए गए और नाना साहेब नेपाल चले गए।

केंद्र, नेता और अंग्रेज़ सेनापति

केंद्रभारतीय नेतादमन करने वाला
दिल्लीबहादुर शाह द्वितीय, जनरल बख्त खानजॉन निकोलसन
कानपुरनाना साहेब, तांत्या टोपेहेनरी हैवलॉक और कॉलिन कैंपबेल
लखनऊबेगम हज़रत महल और उनके पुत्र बिरजिस क़द्रकॉलिन कैंपबेल
झाँसी और ग्वालियररानी लक्ष्मीबाईह्यू रोज़
जगदीशपुर, बिहारकुँवर सिंह और अमर सिंहविंसेंट आयर और विलियम टेलर
फैज़ाबादमौलवी अहमदुल्लाह शाहहेनरी लॉरेंस की सेना
बरेलीखान बहादुर खानकॉलिन कैंपबेल
इलाहाबादलियाकत अलीजेम्स नील

विद्रोह असफल क्यों हुआ

  • विद्रोह नर्मदा और पंजाब के बीच के क्षेत्र तक सीमित रहा; दक्षिण भारत, बंगाल और पश्चिमी भारत का बड़ा भाग शांत रहा।
  • कोई साझा योजना या कार्यक्रम नहीं था और कोई एक नेता नहीं था; हर केंद्र अपने कारण के लिए लड़ा।
  • कई भारतीय शासकों ने अंग्रेज़ों की सहायता की, जिनमें ग्वालियर के सिंधिया, इंदौर के होलकर, हैदराबाद के निज़ाम, पटियाला, जींद तथा नाभा के शासक और नेपाल के जंग बहादुर सम्मिलित थे।
  • विद्रोहियों के पास पुराने हथियार थे और सामने आधुनिक तोपखाना; तार और नई रेल लाइनों ने अंग्रेज़ों के आदेश तथा सेना शीघ्र पहुँचाई।
  • बंदरगाह नगरों का शिक्षित मध्य वर्ग, जो अंग्रेज़ी शासन से सुधार की आशा रखता था, दूर रहा।

विद्रोह ने क्या बदला

1858 का भारत शासन अधिनियम, जिसे भारत के उत्तम शासन का अधिनियम कहा गया, ने ईस्ट इंडिया कंपनी तथा उसके निदेशक मंडल और नियंत्रक मंडल को समाप्त कर भारत का शासन ताज को सौंप दिया। ब्रिटिश मंत्रिमंडल में भारत सचिव का पद बना, जिसकी सहायता के लिए पंद्रह सदस्यों की भारत परिषद रखी गई, और गवर्नर जनरल को वायसराय की अतिरिक्त उपाधि मिली, अर्थात सम्राट का प्रतिनिधि; इसलिए लॉर्ड कैनिंग कंपनी के अंतिम गवर्नर जनरल और भारत के पहले वायसराय हुए। 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद में कैनिंग द्वारा पढ़ी गई महारानी विक्टोरिया की घोषणा में वचन दिया गया कि देशी राजाओं से संधियाँ मानी जाएँगी, व्यपगत के सिद्धांत से विलय समाप्त है और भारतीयों को जाति या धर्म का भेद किए बिना पदों पर लिया जाएगा। 1859 के पील आयोग की सिफारिश पर सेना का पुनर्गठन हुआ: यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया, तोपखाना अंग्रेज़ों के हाथ में रखा गया और भर्ती उन क्षेत्रों से बढ़ाई गई जिन्हें अंग्रेज़ वफ़ादार मानते थे। 1858 के बाद का शासन खुले रूप में बाँटो और राज करो की नीति पर टिका, और 1861 के भारतीय परिषद अधिनियम से भारतीयों को विधायी कार्य में लेने की धीमी शुरुआत हुई।

इतिहासकारों की दृष्टि

वी डी सावरकर ने इस विद्रोह को भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम कहा। आर सी मजूमदार ने लिखा कि यह न प्रथम था, न राष्ट्रीय और न स्वतंत्रता संग्राम। एस एन सेन, जिनका शताब्दी वर्ष का सरकारी इतिहास प्रसिद्ध है, ने माना कि यह धर्म के लिए लड़ाई के रूप में आरंभ हुआ और स्वतंत्रता संग्राम के रूप में समाप्त हुआ। उस समय के ब्रिटिश लेखक, जैसे सर जॉन सीली, इसे केवल सिपाही विद्रोह कहते रहे, जबकि बेंजामिन डिज़रायली ने संसद में इसे राष्ट्रीय उत्थान कहा।

परीक्षा की दृष्टि से

1857 से चार प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, आरंभ की तिथि और स्थान, जिसका उत्तर मेरठ और 10 मई 1857 है, जबकि जाल के रूप में बैरकपुर रखा जाता है क्योंकि मंगल पांडे ने वहाँ पहले कार्य किया था। दूसरा, केंद्र और नेता की जोड़ियाँ, जो दोनों दिशाओं में पूछी जाती हैं: कानपुर के साथ नाना साहेब और तांत्या टोपे, लखनऊ के साथ बेगम हज़रत महल, झाँसी के साथ रानी लक्ष्मीबाई, जगदीशपुर के साथ कुँवर सिंह, फैज़ाबाद के साथ मौलवी अहमदुल्लाह शाह, बरेली के साथ खान बहादुर खान और दिल्ली के साथ बख्त खान। तीसरा, कारण, जिनमें 1856 का सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम, 1850 का धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम और व्यपगत का सिद्धांत नामित विधियाँ तथा नीतियाँ हैं। चौथा, परिणाम, जहाँ 1858 का अधिनियम, वायसराय की उपाधि, पहला वायसराय कैनिंग, 1 नवंबर 1858 की घोषणा और 1859 का पील आयोग पूछे जाते हैं। सावरकर, मजूमदार और एस एन सेन के कथन सुमेलन के रूप में आते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

आरंभमेरठ, 10 मई 1857
प्रथम शहीदमंगल पांडे, 34वीं नेटिव इन्फैंट्री, बैरकपुर, 8 अप्रैल 1857 को फाँसी
तात्कालिक कारणएनफील्ड राइफल के चर्बी लगे कारतूस
प्रतीक नेताबहादुर शाह द्वितीय, 12 मई 1857 को दिल्ली में घोषित
बहादुर शाह का निर्वासनरंगून, जहाँ 1862 में देहांत हुआ
विद्रोह की पृष्ठभूमि की नीतिलॉर्ड डलहौज़ी का व्यपगत का सिद्धांत; 1856 में अवध का विलय
रोष का सैनिक कानूनसामान्य सेवा भर्ती अधिनियम, 1856, लॉर्ड कैनिंग के समय
कंपनी समाप्त करने वाला अधिनियमभारत शासन अधिनियम, 1858
पहला वायसरायलॉर्ड कैनिंग, कंपनी के अंतिम गवर्नर जनरल भी
महारानी की घोषणा1 नवंबर 1858, इलाहाबाद में पढ़ी गई
सेना आयोगपील आयोग, 1859
झाँसी अभियानरानी लक्ष्मीबाई को ह्यू रोज़ ने पराजित किया; जून 1858 में ग्वालियर के निकट वीरगति

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय इतिहासआसान

1857 का विद्रोह 10 मई 1857 को किस स्थान से आरंभ हुआ?

  1. A.बैरकपुर
  2. B.मेरठ
  3. C.दिल्ली
  4. D.कानपुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मेरठ

व्याख्या

सही उत्तर है B, मेरठ। 10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सिपाहियों ने नए कारतूस लेने से मना कर दिया, अपने यूरोपीय अधिकारियों को मार डाला, बंदी साथियों को छुड़ाया और दिल्ली की ओर बढ़ गए, जहाँ वे 12 मई को पहुँचे। इसी दिन को विद्रोह का आरंभ माना जाता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि बंगाल के बैरकपुर में मार्च 1857 में मंगल पांडे ने अपने अधिकारियों पर आक्रमण किया था, जो पहले की घटना है और चिंगारी मानी जाती है; यही सबसे सामान्य गलत उत्तर भी है। विकल्प C गलत है क्योंकि दिल्ली दो दिन बाद पहुँची गई और बहादुर शाह द्वितीय के सम्राट घोषित होने पर वह विद्रोह का राजनीतिक केंद्र बनी। विकल्प D गलत है क्योंकि कानपुर में नाना साहेब के नेतृत्व में विद्रोह बाद में उठा। क्रम याद रखें: मार्च में बैरकपुर, 10 मई को मेरठ, 12 मई को दिल्ली।

Q2.भारतीय इतिहासमध्यम

अप्रैल 1857 में फाँसी पाने वाले मंगल पांडे किस रेजिमेंट के सिपाही थे?

  1. A.19वीं नेटिव इन्फैंट्री
  2. B.34वीं नेटिव इन्फैंट्री
  3. C.तीसरी लाइट कैवेलरी
  4. D.सातवीं अवध अनियमित पैदल सेना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 34वीं नेटिव इन्फैंट्री

व्याख्या

सही उत्तर है B, 34वीं नेटिव इन्फैंट्री। मंगल पांडे इसी रेजिमेंट के सिपाही थे और कलकत्ता के निकट बैरकपुर में तैनात थे। मार्च 1857 में नए चर्बी लगे कारतूस के प्रयोग से इनकार करते हुए उन्होंने अपने अधिकारियों पर आक्रमण किया; उनका सैनिक न्यायालय में विचारण हुआ, 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दी गई और उनकी रेजिमेंट भंग कर दी गई।

विकल्प A गलत है क्योंकि बहरामपुर की 19वीं नेटिव इन्फैंट्री ने पहले कारतूस लेने से मना किया था और भंग हुई थी, पर मंगल पांडे उसमें नहीं थे। विकल्प C गलत है क्योंकि तीसरी लाइट कैवेलरी मेरठ की वह रेजिमेंट थी जिसके सिपाहियों ने 10 मई 1857 को विद्रोह आरंभ किया। विकल्प D गलत है क्योंकि अवध की अनियमित टुकड़ियाँ वर्ष में आगे चलकर जुड़ीं। मंगल पांडे को 34वीं नेटिव इन्फैंट्री और बैरकपुर के साथ याद रखें।

Q3.भारतीय इतिहासआसान

कानपुर में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?

  1. A.नाना साहेब
  2. B.कुँवर सिंह
  3. C.खान बहादुर खान
  4. D.मौलवी अहमदुल्लाह शाह
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नाना साहेब

व्याख्या

सही उत्तर है A, नाना साहेब। वे अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे और कंपनी द्वारा उनकी पेंशन रोकना विद्रोह के कारणों में गिना जाता है। कानपुर में उन्हें पेशवा घोषित किया गया, उनके सेनापति तांत्या टोपे ने वहाँ और बाद में झाँसी तथा ग्वालियर में युद्ध का नेतृत्व किया। अंत में नाना साहेब नेपाल चले गए।

विकल्प B गलत है क्योंकि जगदीशपुर के वृद्ध ज़मींदार कुँवर सिंह ने बिहार में विद्रोह का नेतृत्व किया। विकल्प C गलत है क्योंकि खान बहादुर खान रुहेलखंड के बरेली में नेता थे। विकल्प D गलत है क्योंकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह अवध के फैज़ाबाद में नेता थे। केंद्र और नेता की जोड़ियाँ दोनों दिशाओं में पूछी जाती हैं, इसलिए उन्हें सारणी के रूप में याद करें। नाना साहेब के साथ कानपुर और पेशवा की उपाधि, तथा तांत्या टोपे के साथ ग्वालियर का अभियान जोड़कर याद रखने से यह प्रश्न किसी भी रूप में पूछा जाए, उत्तर स्पष्ट रहता है।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 11 Feb 2019, Shift 2मध्यम

बेगम हज़रत महल भारत के निम्नलिखित में से किस विद्रोह से संबंधित हैं?

  1. A.मोपला विद्रोह 1921
  2. B.पाइक विद्रोह 1817
  3. C.गोंड विद्रोह 1941
  4. D.सिपाही विद्रोह 1857
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सिपाही विद्रोह 1857

व्याख्या

सही उत्तर है D, सिपाही विद्रोह 1857। अवध के अपदस्थ शासक की बेगम हज़रत महल ने 1857 में लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस क़द्र को अवध का शासक घोषित कराया। उन्होंने महीनों नगर संभाला, अंग्रेज़ों की शर्तें अस्वीकार कीं और नेपाल चली गईं, जहाँ उनका देहांत हुआ।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1921 का मोपला विद्रोह वर्तमान केरल के मलाबार क्षेत्र का किसान विद्रोह था, जो उनके समय से बहुत बाद हुआ। विकल्प B गलत है क्योंकि 1817 का पाइक विद्रोह ओडिशा में बक्शी जगबंधु के नेतृत्व में हुआ, 1857 से चार दशक पहले। विकल्प C गलत है क्योंकि 1941 का इस प्रकार का कोई गोंड विद्रोह नहीं है; कंपनी के विरुद्ध गोंड विद्रोह उन्नीसवीं सदी के आरंभ के हैं। उनका नाम सदा 1857 में लखनऊ और अवध से जुड़ता है।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

1857 के विद्रोह के नेता कुँवर सिंह किस क्षेत्र से थे?

  1. A.बिहार का जगदीशपुर
  2. B.वर्तमान उत्तर प्रदेश का रुहेलखंड
  3. C.मध्य भारत का बुंदेलखंड
  4. D.वर्तमान मध्य प्रदेश का मालवा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बिहार का जगदीशपुर

व्याख्या

सही उत्तर है A, बिहार का जगदीशपुर। शाहाबाद क्षेत्र के जगदीशपुर के ज़मींदार कुँवर सिंह लगभग अस्सी वर्ष के थे जब उन्होंने शस्त्र उठाए। उन्होंने अपने भाई अमर सिंह के साथ आरा में अंग्रेज़ों से युद्ध किया, विद्रोह को मध्य भारत तक ले गए और 1858 में बिहार लौटकर उनका देहांत हुआ।

विकल्प B गलत है क्योंकि बरेली केंद्र वाला रुहेलखंड खान बहादुर खान का क्षेत्र था। विकल्प C गलत है क्योंकि बुंदेलखंड झाँसी और रानी लक्ष्मीबाई का क्षेत्र है। विकल्प D गलत है क्योंकि इंदौर तथा महू वाला मालवा होलकर राज्य से जुड़ा है, जिसका शासक अंग्रेज़ों के साथ रहा जबकि उसकी कुछ टुकड़ियाँ उठ खड़ी हुईं। बिहार से जुड़े प्रश्न लगभग सदा जगदीशपुर और आरा पर टिकते हैं। इसी प्रकार बिहार के दूसरे नाम अमर सिंह को कुँवर सिंह के भाई के रूप में और 1858 को उनके देहांत के वर्ष के रूप में स्मरण रखें, क्योंकि राज्य स्तरीय परीक्षाओं में यह विवरण भी पूछा जाता है।

Q6.भारतीय इतिहासआसान

1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण क्या था?

  1. A.अवध का विलय
  2. B.एनफील्ड राइफल के चर्बी लगे कारतूस
  3. C.व्यपगत का सिद्धांत
  4. D.वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एनफील्ड राइफल के चर्बी लगे कारतूस

व्याख्या

सही उत्तर है B, एनफील्ड राइफल के चर्बी लगे कारतूस। नई राइफल के कारतूस का सिरा दाँत से खोलना पड़ता था और सिपाहियों को विश्वास था कि उस पर गाय तथा सूअर की चर्बी लगी है, जिससे हिंदू और मुसलमान दोनों की धार्मिक भावना आहत हुई। इन कारतूसों से इनकार पर रेजिमेंट भंग हुईं और फिर मेरठ में विद्रोह भड़का।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1856 में अवध का विलय महत्वपूर्ण राजनीतिक कारण था, तात्कालिक नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड डलहौज़ी के व्यपगत के सिद्धांत ने झाँसी, सतारा और नागपुर की शिकायतें वर्षों पहले पैदा कीं। विकल्प D गलत है क्योंकि वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम 1878 का है, विद्रोह के दो दशक बाद, लॉर्ड लिटन के समय। दीर्घकालिक कारण और तात्कालिक चिंगारी का अंतर ध्यान से रखें, क्योंकि प्रश्न दोनों रूपों में आता है।

Q7.भारतीय इतिहासकठिन

सिपाहियों के रोष का कारण बना सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?

  1. A.1850
  2. B.1853
  3. C.1856
  4. D.1859
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1856

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1856। लॉर्ड कैनिंग के गवर्नर जनरल काल में पारित 1856 के सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम के अनुसार बंगाल सेना के नए भर्ती सिपाहियों को वहीं सेवा करनी थी जहाँ भेजा जाए, समुद्र पार भी। समुद्र पार जाने को जाति भ्रष्ट होना माना जाता था, इसलिए इस कानून को धर्म पर आघात समझा गया और वह विद्रोह के सैनिक कारणों में गिना गया।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1850 धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम का वर्ष है, जिसने ईसाई बनने वाले को पैतृक संपत्ति का अधिकार दिया। विकल्प B गलत है क्योंकि 1853 चार्टर अधिनियम तथा भारत की पहली रेल और तार लाइन का वर्ष है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1859 पील आयोग का वर्ष है, जिसने विद्रोह के बाद सेना का पुनर्गठन किया। तीन वर्ष अलग रखें: भर्ती 1856, विद्रोह 1857 और आयोग 1859।

Q8.भारतीय इतिहासआसान

विद्रोह के दमन के बाद बहादुर शाह द्वितीय पर मुकदमा चलाकर उन्हें कहाँ निर्वासित किया गया?

  1. A.रंगून
  2. B.सिंगापुर
  3. C.अदन
  4. D.मॉरिशस
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. रंगून

व्याख्या

सही उत्तर है A, रंगून। अंतिम मुगल सम्राट सितंबर 1857 में दिल्ली में बंदी बनाए गए, अंग्रेज़ों ने उन पर मुकदमा चलाया, उपाधि छीनी और उन्हें बर्मा के रंगून भेज दिया, जहाँ 1862 में उनका देहांत हुआ। उनके पुत्रों को गोली मार दी गई और उनके हटने के साथ मुगल वंश का औपचारिक अंत हो गया।

विकल्प B गलत है क्योंकि सिंगापुर उनके निर्वासन का स्थान नहीं था, चाहे साम्राज्य के अन्य राजनीतिक बंदी दूर उपनिवेशों में भेजे गए। विकल्प C गलत है क्योंकि तब बंबई से प्रशासित अदन में बाद के वर्षों के बंदी रखे गए, सम्राट नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि मॉरिशस में भारत से गिरमिटिया मज़दूर भेजे जाते थे, राजबंदी नहीं। इसके साथ अवध के अपदस्थ शासक वाजिद अली शाह का कलकत्ता भेजा जाना भी पूछा जाता है।

Q9.भारतीय इतिहासमध्यम

1858 में रानी लक्ष्मीबाई को पराजित कर झाँसी पर अधिकार करने वाला अंग्रेज़ सेनापति कौन था?

  1. A.कॉलिन कैंपबेल
  2. B.ह्यू रोज़
  3. C.जॉन निकोलसन
  4. D.हेनरी हैवलॉक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ह्यू रोज़

व्याख्या

सही उत्तर है B, ह्यू रोज़। सर ह्यू रोज़ ने मध्य भारत का अभियान संभाला, अप्रैल 1858 में झाँसी पर अधिकार किया और विद्रोहियों का पीछा कालपी तथा ग्वालियर तक किया, जहाँ जून 1858 में रानी लक्ष्मीबाई लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं। तांत्या टोपे उस अभियान से बच निकले और अगले वर्ष पकड़कर मृत्युदंड पाए।

विकल्प A गलत है क्योंकि सर कॉलिन कैंपबेल ने अवध में कमान संभाली और लखनऊ को पहले राहत दी, फिर पुनः जीता। विकल्प C गलत है क्योंकि जॉन निकोलसन ने सितंबर 1857 में दिल्ली पर आक्रमण का नेतृत्व किया और वहीं मारे गए। विकल्प D गलत है क्योंकि हेनरी हैवलॉक कानपुर तथा लखनऊ की ओर बढ़े और 1857 में लखनऊ में उनका देहांत हुआ। सेनापति और केंद्र की जोड़ियाँ भारतीय नेताओं की तरह ही पूछी जाती हैं।

Q10.भारतीय इतिहासमध्यम

भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश ताज को किस अधिनियम द्वारा हस्तांतरित हुआ?

  1. A.1853 का चार्टर अधिनियम
  2. B.1858 का भारत शासन अधिनियम
  3. C.1861 का भारतीय परिषद अधिनियम
  4. D.1919 का भारत शासन अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1858 का भारत शासन अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर है B, 1858 का भारत शासन अधिनियम। भारत के उत्तम शासन का अधिनियम कहे जाने वाले इस कानून ने ईस्ट इंडिया कंपनी तथा उसके निदेशक मंडल और नियंत्रक मंडल को समाप्त किया, भारत का शासन ताज को सौंपा, पंद्रह सदस्यों की भारत परिषद के साथ भारत सचिव का पद बनाया और गवर्नर जनरल को वायसराय की अतिरिक्त उपाधि दी।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1853 का चार्टर अधिनियम अंतिम चार्टर अधिनियम था और उसने सिविल सेवा में खुली प्रतियोगिता आरंभ की। विकल्प C गलत है क्योंकि 1861 का भारतीय परिषद अधिनियम बाद में आया और उसने भारतीयों को विधायी कार्य से जोड़ने की शुरुआत की। विकल्प D गलत है क्योंकि 1919 का अधिनियम, अर्थात मॉन्टेग्यू चेम्सफ़ोर्ड सुधार, प्रांतों में द्वैध शासन लाया। प्रश्न में ताज शब्द ही 1858 का संकेत है।

Q11.भारतीय इतिहासमध्यम

1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद में महारानी विक्टोरिया की घोषणा किसने पढ़ी?

  1. A.लॉर्ड डलहौज़ी
  2. B.लॉर्ड कैनिंग
  3. C.लॉर्ड लिटन
  4. D.लॉर्ड रिपन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लॉर्ड कैनिंग

व्याख्या

सही उत्तर है B, लॉर्ड कैनिंग। विद्रोह के समय कैनिंग गवर्नर जनरल थे और 1858 के अधिनियम के अंतर्गत वे भारत के पहले वायसराय बने। उन्होंने 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद के दरबार में महारानी की घोषणा पढ़ी, जिसमें वचन दिया गया कि देशी राजाओं से संधियाँ मानी जाएँगी, व्यपगत के सिद्धांत से विलय समाप्त है और भारतीयों को जाति या धर्म के भेद बिना पदों पर लिया जाएगा।

विकल्प A गलत है क्योंकि व्यपगत के सिद्धांत के रचयिता लॉर्ड डलहौज़ी 1856 में भारत छोड़ चुके थे। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड लिटन दो दशक बाद आए और उन्होंने 1877 का दिल्ली दरबार किया। विकल्प D गलत है क्योंकि स्थानीय स्वशासन के लिए स्मरण किए जाने वाले लॉर्ड रिपन 1880 में आए। कैनिंग का दोहरा परिचय, कंपनी के अंतिम गवर्नर जनरल और पहले वायसराय, स्वयं एक प्रिय प्रश्न है।

Q12.भारतीय इतिहासकठिन

किस इतिहासकार ने 1857 के विद्रोह को न प्रथम, न राष्ट्रीय और न स्वतंत्रता संग्राम कहा?

  1. A.वी डी सावरकर
  2. B.एस एन सेन
  3. C.आर सी मजूमदार
  4. D.बेंजामिन डिज़रायली
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. आर सी मजूमदार

व्याख्या

सही उत्तर है C, आर सी मजूमदार। उनका मत था कि 1857 का उत्थान ब्रिटिश शक्ति के विरुद्ध पहली सशस्त्र चुनौती नहीं था, उसने पूरे देश या उसके लोगों को एक नहीं किया और वह राष्ट्रीय स्वतंत्रता के किसी स्पष्ट विचार के लिए नहीं लड़ा गया; उनका यह निष्कर्ष परीक्षा में इसी रूप में उद्धृत होता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि वी डी सावरकर ने इसके विपरीत मत रखा और विद्रोह को भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम कहा। विकल्प B गलत है क्योंकि शताब्दी वर्ष का सरकारी इतिहास लिखने वाले एस एन सेन ने निष्कर्ष दिया कि विद्रोह धर्म के लिए लड़ाई के रूप में आरंभ हुआ और स्वतंत्रता संग्राम के रूप में समाप्त हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि बेंजामिन डिज़रायली ब्रिटिश राजनेता थे, भारत के इतिहासकार नहीं, और उन्होंने संसद में इसे राष्ट्रीय उत्थान कहा। इन चार मतों को सुमेलन के रूप में याद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1857 का विद्रोह कहाँ और कब आरंभ हुआ?

यह 10 मई 1857 को मेरठ में आरंभ हुआ, जब वहाँ के सिपाहियों ने नए कारतूस लेने से मना कर दिया, अपने अधिकारियों को मार डाला और दिल्ली की ओर बढ़े, जहाँ वे 12 मई को पहुँचे। मार्च 1857 में बैरकपुर की घटना, जिसमें मंगल पांडे ने अधिकारियों पर आक्रमण किया, चिंगारी मानी जाती है, आरंभ नहीं; इसलिए इस प्रश्न का उत्तर सदा मेरठ है।

बेगम हज़रत महल कौन थीं?

वे अवध की बेगम और लखनऊ में विद्रोह की नेता थीं, जहाँ वाजिद अली शाह के अपदस्थ होने पर उन्होंने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस क़द्र को शासक घोषित कराया। उन्होंने महीनों लखनऊ अंग्रेज़ों से बचाए रखा, उन्हें दी गई शर्तें अस्वीकार कीं और अंत में नेपाल चली गईं, जहाँ उनका देहांत हुआ। उनका नाम लखनऊ और अवध के साथ पूछा जाता है।

1858 के भारत शासन अधिनियम ने कौन से परिवर्तन किए?

उसने ईस्ट इंडिया कंपनी तथा उसके निदेशक मंडल और नियंत्रक मंडल को समाप्त कर भारत का शासन ताज को सौंप दिया। उसने भारत सचिव का पद बनाया, जो ब्रिटिश मंत्रिमंडल का सदस्य होता था और जिसकी सहायता के लिए पंद्रह सदस्यों की भारत परिषद थी, तथा गवर्नर जनरल को वायसराय की अतिरिक्त उपाधि दी। इसी से लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।

1857 का विद्रोह असफल क्यों हुआ?

वह नर्मदा और पंजाब के बीच के क्षेत्र तक सीमित रहा, उसके पास साझा नेतृत्व या कार्यक्रम नहीं था और पुराने हथियारों से आधुनिक तोपखाने का सामना करना पड़ा। ग्वालियर के सिंधिया, इंदौर के होलकर और हैदराबाद के निज़ाम सहित कई भारतीय शासक अंग्रेज़ों के साथ रहे, तार और रेल ने अंग्रेज़ों को आदेश तथा सेना भेजने में सहायता दी, और शिक्षित मध्य वर्ग दूर रहा।

1857 सिपाही विद्रोह था या प्रथम स्वतंत्रता संग्राम?

इतिहासकारों में मतभेद है और परीक्षा निर्णय नहीं, मत पूछती है। वी डी सावरकर ने इसे भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम कहा; आर सी मजूमदार ने माना कि यह न प्रथम था, न राष्ट्रीय और न स्वतंत्रता संग्राम; एस एन सेन ने निष्कर्ष दिया कि यह धर्म के लिए लड़ाई के रूप में आरंभ हुआ और स्वतंत्रता संग्राम के रूप में समाप्त हुआ। उस समय के ब्रिटिश लेखक इसे सिपाही विद्रोह कहते थे।

स्रोत

  • भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 3, कक्षा 12: विद्रोही और राज, 1857 का आंदोलन और उसके व्याख्यान — एनसीईआरटी
  • हमारे अतीत 3, कक्षा 8: जब जनता बग़ावत करती है, 1857 और उसके बाद — एनसीईआरटी
  • महारानी विक्टोरिया की घोषणा, 1 नवंबर 1858 — भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार
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