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GK नोट्सभारतीय इतिहासभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशन

कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशन: स्थान, अध्यक्ष और निर्णय

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशनों के नोट्स: 1885 के बंबई से 1946 के मेरठ तक प्रत्येक अधिवेशन का स्थान, अध्यक्ष और मुख्य निर्णय।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशन: स्थान, अध्यक्ष और निर्णय — GK24 title card
कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशन: स्थान, अध्यक्ष और निर्णय — GK24 title card

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रत्येक दिसंबर में किसी नए नगर में जुटती थी और उन वार्षिक अधिवेशनों में से प्रत्येक के साथ एक स्थान, एक अध्यक्ष और एक निर्णय जुड़ा है, जिन्हें परीक्षक एक अंक के प्रश्नों में बदल देते हैं। कोई प्रश्न सूरत अधिवेशन का अध्यक्ष पूछ सकता है, कोई उस स्थान का नाम जहां पूर्ण स्वराज प्रस्ताव पारित हुआ, और कोई वह एकमात्र अधिवेशन जिसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की। इस अध्याय को याद रखने का सबसे सुरक्षित तरीका तीन स्तंभों की सारणी है, अर्थात वर्ष, स्थान और अध्यक्ष, और फिर प्रत्येक वर्ष के साथ वहां हुई एक मुख्य बात जोड़ देना।

स्थापना और उदारवादी काल

कांग्रेस की स्थापना 1885 में सेवानिवृत्त सिविल सेवक एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ने दादाभाई नौरोजी, दिनशा वाचा तथा सुरेंद्रनाथ बनर्जी जैसे नेताओं के सहयोग से की। उसका पहला अधिवेशन बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में 28 से 31 दिसंबर 1885 तक हुआ, जिसमें 72 प्रतिनिधि आए और व्योमेश चंद्र बनर्जी ने अध्यक्षता की। यह अधिवेशन पहले पुणे में होना था, परंतु हैजा फैलने के कारण बंबई में हुआ। आरंभिक अधिवेशनों पर उदारवादियों का प्रभुत्व रहा, जो आवेदनों, प्रस्तावों और संवैधानिक तर्कों से काम करते थे।

वर्षस्थानअध्यक्षक्यों पूछा जाता है
1885बंबईव्योमेश चंद्र बनर्जीपहला अधिवेशन, 72 प्रतिनिधि
1886कलकत्तादादाभाई नौरोजीभारत के वयोवृद्ध पुरुष की अध्यक्षता
1887मद्रासबदरुद्दीन तैयबजीपहले मुस्लिम अध्यक्ष
1888इलाहाबादजॉर्ज यूलपहले अंग्रेज अध्यक्ष
1896कलकत्तारहीमतुल्ला सयानीरवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम गाया
1905बनारसगोपाल कृष्ण गोखलेबंग-भंग के विरुद्ध विरोध

स्वराज, विभाजन और पुनर्मिलन

1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी ने अध्यक्षता की और कांग्रेस ने पहली बार स्वशासी उपनिवेशों की तर्ज पर स्वराज की मांग की। 1907 का सूरत अधिवेशन, जिसमें रास बिहारी घोष अध्यक्ष थे, अव्यवस्था में समाप्त हो गया: उदारवादी और उग्रवादी अध्यक्ष पद तथा बहिष्कार और स्वदेशी की पद्धति पर बंट गए और कांग्रेस 1916 तक विभाजित रही। 1911 का कलकत्ता अधिवेशन इसलिए स्मरणीय है कि वहां 27 दिसंबर 1911 को पहली बार जन गण मन गाया गया। 1916 के लखनऊ अधिवेशन में अंबिका चरण मजूमदार के अध्यक्षता में दोनों धड़े फिर एक हुए और कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ लखनऊ समझौता किया, जिसमें संयुक्त राजनीतिक मांगों के बदले पृथक निर्वाचन स्वीकार किया गया। अगले वर्ष कलकत्ता में एनी बेसेंट कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।

गांधी युग के अधिवेशन

सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की, असहयोग कार्यक्रम स्वीकृत हुआ और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में, सी. विजयराघवाचारियार की अध्यक्षता में, उसकी पुष्टि हुई तथा कांग्रेस का संविधान फिर से लिखा गया। नागपुर ने पंद्रह सदस्यों की कार्य समिति बनाई, प्रांतीय समितियों को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया, सदस्यता शुल्क घटाकर चार आने किया और कांग्रेस का लक्ष्य समस्त वैध तथा शांतिपूर्ण साधनों से स्वराज कर दिया।

वर्षस्थानअध्यक्षक्यों पूछा जाता है
1920नागपुरसी. विजयराघवाचारियारकांग्रेस संविधान में परिवर्तन; असहयोग का अनुमोदन
1922गयाचित्तरंजन दासअपरिवर्तनवादी और परिवर्तनवादी मतभेद; आगे स्वराज पार्टी
1924बेलगाममहात्मा गांधीगांधी का एकमात्र अध्यक्षीय अधिवेशन
1925कानपुरसरोजिनी नायडूपहली भारतीय महिला अध्यक्ष
1927मद्रासएम. ए. अंसारीसाइमन आयोग के बहिष्कार का प्रस्ताव
1928कलकत्तामोतीलाल नेहरूनेहरू रिपोर्ट पर विचार; अखिल भारतीय युवक कांग्रेस की स्थापना
1929लाहौरजवाहरलाल नेहरूपूर्ण स्वराज प्रस्ताव; 26 जनवरी 1930 स्वतंत्रता दिवस
1931कराचीवल्लभभाई पटेलमूल अधिकार तथा राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का प्रस्ताव
1936फैजपुरजवाहरलाल नेहरूकिसी गांव में हुआ पहला अधिवेशन
1938हरिपुरासुभाष चंद्र बोसनेहरू के अधीन राष्ट्रीय योजना समिति का गठन
1939त्रिपुरीसुभाष चंद्र बोसबोस ने पट्टाभि सीतारमैया को हराया, फिर त्यागपत्र
1940रामगढ़अबुल कलाम आजादभारत छोड़ो वर्षों से पहले अंतिम अधिवेशन

याद रखने योग्य प्रथम तथ्य

  • पहले अध्यक्ष: व्योमेश चंद्र बनर्जी, बंबई, 1885; पहले मुस्लिम अध्यक्ष: बदरुद्दीन तैयबजी, मद्रास, 1887।
  • पहले अंग्रेज अध्यक्ष: जॉर्ज यूल, इलाहाबाद, 1888; विलियम वेडरबर्न 1889 तथा 1910 में अध्यक्ष रहे।
  • पहली महिला अध्यक्ष: एनी बेसेंट, कलकत्ता, 1917; पहली भारतीय महिला अध्यक्ष: सरोजिनी नायडू, कानपुर, 1925; तीसरी महिला अध्यक्ष: नेली सेनगुप्ता, कलकत्ता, 1933।
  • सबसे कम आयु के अध्यक्ष: अबुल कलाम आजाद, 1923 के दिल्ली विशेष अधिवेशन में।
  • महात्मा गांधी की अध्यक्षता वाला एकमात्र अधिवेशन: बेलगाम, 1924।
  • ग्रामीण क्षेत्र में पहला अधिवेशन: फैजपुर, 1936, खानदेश में।
  • अध्यक्ष कारागार में और अधिवेशन कार्यवाहक की अध्यक्षता में: 1921 का अहमदाबाद अधिवेशन, जहां चित्तरंजन दास के स्थान पर हकीम अजमल खान ने अध्यक्षता की।

अंतिम अधिवेशन और 1947 का मार्ग

सुभाष चंद्र बोस 1939 में त्रिपुरी में गांधीजी के उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को हराकर पुनः अध्यक्ष चुने गए, परंतु कार्य समिति ने उनके अधीन काम करने से मना कर दिया और अप्रैल 1939 में उन्होंने त्यागपत्र दे दिया; शेष वर्ष के लिए राजेंद्र प्रसाद ने अध्यक्षता संभाली और बोस ने 3 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। मौलाना अबुल कलाम आजाद ने 1940 में रामगढ़ में अध्यक्षता की और भारत छोड़ो आंदोलन के वर्षों में कोई अधिवेशन न हो पाने के कारण वे 1946 तक अध्यक्ष बने रहे। भारत छोड़ो प्रस्ताव किसी वार्षिक अधिवेशन में नहीं, बल्कि 8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में पारित हुआ। स्वतंत्रता से पूर्व अंतिम अधिवेशन नवंबर 1946 में मेरठ में आचार्य जे. बी. कृपलानी की अध्यक्षता में हुआ और स्वतंत्र भारत का पहला अधिवेशन 1948 में जयपुर में पट्टाभि सीतारमैया की अध्यक्षता में हुआ।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न सीधे वर्ष, स्थान और अध्यक्ष के मिलान के रूप में आते हैं, तथा किसी अधिवेशन को उसके एक प्रसिद्ध निर्णय से जोड़ने के रूप में। पसंदीदा अधिवेशन हैं पहला अधिवेशन, सूरत 1907, लखनऊ 1916, नागपुर 1920, बेलगाम 1924, लाहौर 1929, कराची 1931, फैजपुर 1936 और त्रिपुरी 1939। जाल ये हैं: पहली महिला अध्यक्ष के रूप में एनी बेसेंट के स्थान पर सरोजिनी नायडू लिख देना, पूर्ण स्वराज प्रस्ताव को लाहौर के बजाय कराची में रख देना, 1942 के भारत छोड़ो प्रस्ताव को वार्षिक अधिवेशन मान लेना, और यह मान लेना कि गांधीजी ने कई अधिवेशनों की अध्यक्षता की, जबकि उन्होंने केवल एक की की।

महत्वपूर्ण तथ्य

पहला अधिवेशनबंबई, 28 से 31 दिसंबर 1885, 72 प्रतिनिधि, अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी
संस्थापकएलन ऑक्टेवियन ह्यूम, सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक
स्वराज की पहली मांगकलकत्ता अधिवेशन, 1906, अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी
सूरत विभाजन1907, अध्यक्ष रास बिहारी घोष; उदारवादी और उग्रवादी अलग हुए
लखनऊ समझौता1916 अधिवेशन, अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार; मुस्लिम लीग के साथ समझौता
संविधान का पुनर्लेखननागपुर अधिवेशन, 1920; पंद्रह सदस्यीय कार्य समिति; भाषाई प्रांतीय समितियां
गांधी की अध्यक्षताबेलगाम अधिवेशन, 1924, उनका एकमात्र अध्यक्ष काल
पूर्ण स्वराजलाहौर अधिवेशन, 1929, अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू; 26 जनवरी 1930 स्वतंत्रता दिवस
मूल अधिकार प्रस्तावकराची अधिवेशन, 1931, अध्यक्ष वल्लभभाई पटेल
पहला ग्रामीण अधिवेशनफैजपुर, 1936, अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू
त्रिपुरी अधिवेशन1939; बोस ने पट्टाभि सीतारमैया को हराया, बाद में त्यागपत्र, राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने
स्वतंत्रता से पूर्व अंतिम अधिवेशनमेरठ, नवंबर 1946, अध्यक्ष आचार्य जे. बी. कृपलानी

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय इतिहासआसान

1885 में बंबई में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?

  1. A.दादाभाई नौरोजी
  2. B.व्योमेश चंद्र बनर्जी
  3. C.ए. ओ. ह्यूम
  4. D.बदरुद्दीन तैयबजी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. व्योमेश चंद्र बनर्जी

व्याख्या

सही उत्तर B, व्योमेश चंद्र बनर्जी है। कलकत्ता के बैरिस्टर व्योमेश चंद्र बनर्जी ने 28 से 31 दिसंबर 1885 तक बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में हुए कांग्रेस के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता की, जिसमें बहत्तर प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। A गलत है, क्योंकि दादाभाई नौरोजी ने 1886 के कलकत्ता अधिवेशन की तथा 1893 और 1906 में भी अध्यक्षता की; वे भारत के वयोवृद्ध पुरुष कहे जाते हैं, पहले अध्यक्ष नहीं। C गलत है, क्योंकि एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ने कांग्रेस की स्थापना की और वर्षों तक महासचिव रहे, किंतु उन्होंने अध्यक्षता बाद में, 1894 के मद्रास अधिवेशन में की। D गलत है, क्योंकि बदरुद्दीन तैयबजी ने 1887 के मद्रास अधिवेशन की अध्यक्षता की और वे कांग्रेस के पहले मुस्लिम अध्यक्ष के रूप में स्मरण किए जाते हैं, जो पहले अधिवेशन से दो वर्ष बाद की बात है।

Q2.भारतीय इतिहासआसान

पूर्ण स्वराज प्रस्ताव भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में स्वीकार किया गया?

  1. A.कराची, 1931
  2. B.लाहौर, 1929
  3. C.कलकत्ता, 1928
  4. D.नागपुर, 1920
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लाहौर, 1929

व्याख्या

सही उत्तर B, लाहौर, 1929 है। दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की, पूर्ण स्वतंत्रता को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया गया और देश से 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान किया गया; 31 दिसंबर 1929 को रावी के तट पर तिरंगा फहराया गया। A गलत है, क्योंकि 1931 का कराची अधिवेशन मूल अधिकार तथा राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम के प्रस्ताव और गांधी-इरविन समझौते के अनुमोदन के लिए स्मरण किया जाता है। C गलत है, क्योंकि 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में नेहरू रिपोर्ट पर विचार हुआ, जो पूर्ण स्वतंत्रता के बजाय औपनिवेशिक स्वराज की मांग करती थी। D गलत है, क्योंकि 1920 के नागपुर अधिवेशन में असहयोग स्वीकार हुआ और कांग्रेस का संविधान बदला गया, जहां लक्ष्य वैध तथा शांतिपूर्ण साधनों से स्वराज बताया गया।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: उत्तर प्रदेश · 24 Aug 2021, Shift 1मध्यम

जब सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दिया, तब यह पद किसे दिया गया?

  1. A.जवाहरलाल नेहरू
  2. B.पट्टाभि सीतारमैया
  3. C.डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  4. D.जे. बी. कृपलानी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. डॉ. राजेंद्र प्रसाद

व्याख्या

सही उत्तर C, डॉ. राजेंद्र प्रसाद है। बोस 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में पट्टाभि सीतारमैया को हराकर पुनः अध्यक्ष चुने गए थे, परंतु कार्य समिति ने उनके अधीन काम करने से मना कर दिया; अप्रैल 1939 में उन्होंने त्यागपत्र दे दिया और शेष वर्ष के लिए राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्षता संभालने के लिए कहा गया। A गलत है, क्योंकि जवाहरलाल नेहरू 1929 तथा 1936 में अध्यक्ष रह चुके थे और 1937 तथा 1951 में भी बने, परंतु बोस के त्यागपत्र के बाद उन्होंने पद नहीं संभाला। B गलत है, क्योंकि पट्टाभि सीतारमैया वही उम्मीदवार थे जिन्हें बोस ने चुनाव में हराया था; वे 1948 में जयपुर अधिवेशन में अध्यक्ष बने। D गलत है, क्योंकि आचार्य जे. बी. कृपलानी बहुत बाद में, 1946 के मेरठ अधिवेशन में अध्यक्ष बने, जो स्वतंत्रता से पूर्व अंतिम अधिवेशन था।

Q4.भारतीय इतिहासमध्यम

उदारवादियों और उग्रवादियों के बीच विभाजन कांग्रेस के किस अधिवेशन में हुआ?

  1. A.बनारस, 1905
  2. B.कलकत्ता, 1906
  3. C.सूरत, 1907
  4. D.मद्रास, 1908
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सूरत, 1907

व्याख्या

सही उत्तर C, सूरत, 1907 है। सूरत में कांग्रेस के दोनों धड़े अध्यक्ष के चुनाव तथा इस प्रश्न पर भिड़ गए कि बहिष्कार और स्वदेशी का कार्यक्रम कहां तक ले जाया जाए; अधिवेशन अव्यवस्था में समाप्त हुआ, रास बिहारी घोष अध्यक्ष घोषित किए गए और कांग्रेस 1916 तक बंटी रही। A गलत है, क्योंकि 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में केवल बंग-भंग के विरुद्ध विरोध दर्ज हुआ और दोनों गुट एक ही संगठन में बने रहे। B गलत है, क्योंकि 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्षता में पहली बार स्वराज की मांग हुई और दोनों पक्षों के सम्मानित नेता को अध्यक्ष चुनकर विभाजन टाल दिया गया। D गलत है, क्योंकि 1908 का मद्रास अधिवेशन, जिसमें फिर रास बिहारी घोष अध्यक्ष थे, विभाजन के बाद हुआ और उसमें मुख्यतः उदारवादी सम्मिलित हुए।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किसी अधिवेशन की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला कौन थीं?

  1. A.सरोजिनी नायडू
  2. B.एनी बेसेंट
  3. C.नेली सेनगुप्ता
  4. D.कमलादेवी चट्टोपाध्याय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एनी बेसेंट

व्याख्या

सही उत्तर B, एनी बेसेंट है। उन्होंने 1917 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता की और वे कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थीं; यही वे वर्ष थे जब वे होम रूल लीग का नेतृत्व कर रही थीं। A गलत है, क्योंकि 1925 के कानपुर अधिवेशन की अध्यक्षता करने वाली सरोजिनी नायडू कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष थीं, जो एक भिन्न उपलब्धि है और इस प्रश्न का सबसे सामान्य भ्रम है। C गलत है, क्योंकि नेली सेनगुप्ता ने 1933 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता की और वे यह पद संभालने वाली तीसरी महिला थीं। D गलत है, क्योंकि कमलादेवी चट्टोपाध्याय नमक सत्याग्रह की प्रमुख संगठक और स्वतंत्रता के बाद हस्तशिल्प तथा सहकारिता की अग्रणी रहीं, परंतु उन्होंने कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता कभी नहीं की। दोनों को अलग रखने का सरल उपाय यह है कि बेसेंट किसी भी राष्ट्रीयता की पहली महिला अध्यक्ष थीं, जबकि नायडू पहली भारतीय महिला अध्यक्ष थीं, और 1925 का कानपुर अधिवेशन बेसेंट के 1917 के कलकत्ता अधिवेशन से आठ वर्ष बाद हुआ था।

Q6.भारतीय इतिहासआसान

महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी?

  1. A.बेलगाम, 1924
  2. B.गया, 1922
  3. C.कानपुर, 1925
  4. D.अहमदाबाद, 1921
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बेलगाम, 1924

व्याख्या

सही उत्तर A, बेलगाम, 1924 है। कर्नाटक का बेलगाम अधिवेशन कांग्रेस का एकमात्र ऐसा अधिवेशन है जिसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की, और अपने अध्यक्ष वर्ष में उन्होंने मुख्यतः हिंदू-मुस्लिम एकता, खादी तथा अस्पृश्यता निवारण पर काम किया। B गलत है, क्योंकि 1922 के गया अधिवेशन की अध्यक्षता चित्तरंजन दास ने की और वहीं विधानमंडलों में प्रवेश के प्रश्न पर अपरिवर्तनवादी तथा परिवर्तनवादी बंट गए, जिससे आगे स्वराज पार्टी बनी। C गलत है, क्योंकि 1925 के कानपुर अधिवेशन की अध्यक्षता सरोजिनी नायडू ने की, जो यह पद पाने वाली पहली भारतीय महिला थीं। D गलत है, क्योंकि 1921 के अहमदाबाद अधिवेशन की अध्यक्षता हकीम अजमल खान ने की, जिन्होंने चित्तरंजन दास के कारागार में रहने पर उनके स्थान पर कार्य किया। ध्यान रखें कि गांधीजी 1924 में अध्यक्ष बने और उसके बाद उन्होंने यह पद फिर नहीं लिया, इसलिए परीक्षा में उनके नाम के साथ केवल बेलगाम ही सही उत्तर बनता है।

Q7.भारतीय इतिहासकठिन

मूल अधिकार तथा राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का प्रस्ताव कांग्रेस के किस अधिवेशन में पारित हुआ?

  1. A.लाहौर, 1929
  2. B.कराची, 1931
  3. C.फैजपुर, 1936
  4. D.हरिपुरा, 1938
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कराची, 1931

व्याख्या

सही उत्तर B, कराची, 1931 है। वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता वाले कराची अधिवेशन ने गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया और मूल अधिकार तथा राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का प्रस्ताव स्वीकार किया, जिसमें वाक् स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता, विधि के समक्ष समानता, निर्वाह योग्य मजदूरी तथा प्रमुख उद्योगों पर राज्य के स्वामित्व का वचन था; इसका प्रारूप जवाहरलाल नेहरू का माना जाता है। A गलत है, क्योंकि 1929 के लाहौर अधिवेशन ने पूर्ण स्वराज को लक्ष्य बनाया और स्वतंत्रता दिवस तय किया, अधिकारों का कार्यक्रम नहीं। C गलत है, क्योंकि 1936 का फैजपुर अधिवेशन गांव में हुआ पहला अधिवेशन कहा जाता है, जहां कृषि कार्यक्रम पर चर्चा हुई। D गलत है, क्योंकि 1938 का हरिपुरा अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस ने की, जवाहरलाल नेहरू के अधीन राष्ट्रीय योजना समिति बनाने के लिए स्मरण किया जाता है।

Q8.भारतीय इतिहासकठिन

कांग्रेस के किस अधिवेशन में उसके संविधान में व्यापक परिवर्तन हुआ, जिसमें पंद्रह सदस्यीय कार्य समिति और भाषाई आधार पर प्रांतीय समितियां बनीं?

  1. A.लखनऊ, 1916
  2. B.नागपुर, 1920
  3. C.कलकत्ता, 1928
  4. D.मद्रास, 1927
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नागपुर, 1920

व्याख्या

सही उत्तर B, नागपुर, 1920 है। सी. विजयराघवाचारियार की अध्यक्षता वाले नागपुर अधिवेशन ने सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में आरंभ हुए असहयोग कार्यक्रम की पुष्टि की और संगठन को आरंभ से अंत तक नया रूप दिया: पंद्रह सदस्यों की कार्य समिति बनी, प्रांतीय समितियां भाषाई आधार पर पुनर्गठित हुईं, सदस्यता शुल्क घटाकर चार आने किया गया और लक्ष्य समस्त वैध तथा शांतिपूर्ण साधनों से स्वराज कहा गया। A गलत है, क्योंकि 1916 का लखनऊ अधिवेशन पुनर्मिलन और मुस्लिम लीग के साथ समझौते का अधिवेशन है। C गलत है, क्योंकि 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में भारत के लिए औपनिवेशिक संविधान संबंधी नेहरू रिपोर्ट पर विचार हुआ। D गलत है, क्योंकि 1927 के मद्रास अधिवेशन में साइमन आयोग के बहिष्कार तथा स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित हुआ, पार्टी के संविधान को छुआ ही नहीं गया।

Q9.भारतीय इतिहासमध्यम

जन गण मन पहली बार कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में किस वर्ष गाया गया था?

  1. A.1896
  2. B.1906
  3. C.1911
  4. D.1917
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1911

व्याख्या

सही उत्तर C, 1911 है। रवींद्रनाथ टैगोर रचित जन गण मन पहली बार 27 दिसंबर 1911 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया और इसका पहला पद संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया। A गलत है, क्योंकि 1896 के कलकत्ता अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता रहीमतुल्ला सयानी ने की थी, टैगोर ने किसी कांग्रेस सभा में पहली बार वंदे मातरम गाया था। B गलत है, क्योंकि 1906 का कलकत्ता अधिवेशन दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में स्वराज की पहली मांग के लिए स्मरण किया जाता है। D गलत है, क्योंकि 1917 का कलकत्ता अधिवेशन एनी बेसेंट के कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनने के लिए स्मरण किया जाता है, राष्ट्रगान के लिए नहीं। यह भी स्मरण रखें कि यह गीत उस अधिवेशन के दूसरे दिन गाया गया था और संविधान सभा ने उसी दिन वंदे मातरम को राष्ट्रगीत के रूप में भी स्वीकार किया था।

Q10.भारतीय इतिहासमध्यम

कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता कांग्रेस के किस वर्ष के अधिवेशन में हुआ?

  1. A.1909
  2. B.1916
  3. C.1919
  4. D.1923
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1916

व्याख्या

सही उत्तर B, 1916 है। दिसंबर 1916 के लखनऊ अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की, उदारवादी और उग्रवादी फिर एक हुए तथा कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने राजनीतिक सुधार की संयुक्त योजना पर सहमति दी और मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन स्वीकार किया; वही समझौता लखनऊ समझौता है। A गलत है, क्योंकि 1909 मार्ले-मिंटो सुधारों का वर्ष है, जिन्होंने विधि द्वारा पृथक निर्वाचन आरंभ किया और जिन्हें उस समझौते से मिला दिया जाता है जिसने उसे बाद में स्वीकार किया। C गलत है, क्योंकि 1919 मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों, रौलट अधिनियम तथा जलियांवाला बाग का वर्ष है और उस वर्ष कांग्रेस अधिवेशन अमृतसर में हुआ। D गलत है, क्योंकि 1923 में दिल्ली का विशेष अधिवेशन अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में हुआ, जो विधानमंडल चुनाव लड़ने के विवाद को सुलझाने के लिए बुलाया गया था।

Q11.भारतीय इतिहासकठिन

स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अंतिम अधिवेशन 1946 में कहां हुआ था?

  1. A.रामगढ़
  2. B.मेरठ
  3. C.जयपुर
  4. D.त्रिपुरी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मेरठ

व्याख्या

सही उत्तर B, मेरठ है। नवंबर 1946 का मेरठ अधिवेशन, जिसमें आचार्य जे. बी. कृपलानी अध्यक्ष थे, 15 अगस्त 1947 से पूर्व कांग्रेस का अंतिम अधिवेशन था। A गलत है, क्योंकि 1940 का रामगढ़ अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की, भारत छोड़ो वर्षों से पहले अंतिम अधिवेशन था; 1940 से 1946 तक कोई अधिवेशन नहीं हो सका, इसीलिए आजाद इतने समय तक अध्यक्ष बने रहे। C गलत है, क्योंकि जयपुर में स्वतंत्र भारत का पहला अधिवेशन 1948 में पट्टाभि सीतारमैया की अध्यक्षता में हुआ। D गलत है, क्योंकि त्रिपुरी में 1939 का अधिवेशन हुआ, जहां सुभाष चंद्र बोस पुनः निर्वाचित हुए और जिससे कुछ ही समय बाद उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। इसी कारण आजाद कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे अखंड कार्यकाल तक, 1940 से 1946 तक, अध्यक्ष रहे और सत्ता हस्तांतरण के समय कृपलानी अध्यक्ष थे, इसलिए ब्रिटिश भारत के अंतिम कांग्रेस अध्यक्ष से जुड़े प्रश्नों में उनका नाम आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?

व्योमेश चंद्र बनर्जी ने, जो 28 से 31 दिसंबर 1885 तक बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में 72 प्रतिनिधियों के साथ हुआ था। यह अधिवेशन पुणे में होना था, परंतु हैजा फैलने के कारण बंबई में हुआ।

पूर्ण स्वराज प्रस्ताव किस अधिवेशन में पारित हुआ था?

दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की। इसमें पूर्ण स्वतंत्रता को लक्ष्य घोषित किया गया, 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान हुआ और 31 दिसंबर 1929 को रावी के तट पर तिरंगा फहराया गया।

महात्मा गांधी ने कांग्रेस के कितने अधिवेशनों की अध्यक्षता की?

केवल एक की, 1924 के बेलगाम अधिवेशन की। गांधीजी ने लगभग तीन दशक तक कांग्रेस का मार्गदर्शन किया, परंतु फिर कभी अध्यक्ष पद नहीं लिया; वे पद के बजाय अपने प्रभाव से अध्यक्ष और कार्यक्रम तय करते रहे।

किस अधिवेशन को पुनर्मिलन का अधिवेशन कहा जाता है?

1916 के लखनऊ अधिवेशन को, जिसकी अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की। 1907 के सूरत अधिवेशन में बंटे उदारवादी और उग्रवादी यहां फिर एक हुए और इसी अधिवेशन में कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग ने लखनऊ समझौता किया।

कांग्रेस का पहला अधिवेशन किसी गांव में कब हुआ था?

1936 में, वर्तमान महाराष्ट्र के खानदेश स्थित फैजपुर में, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की। अधिवेशन को गांव में रखने का उद्देश्य कांग्रेस को किसानों तक पहुंचाना था और वहां कृषि संबंधी कार्यक्रम पर चर्चा हुई।

त्रिपुरी अधिवेशन के बाद सुभाष चंद्र बोस ने त्यागपत्र क्यों दिया?

बोस 1939 में त्रिपुरी में गांधीजी के उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को हराकर पुनः अध्यक्ष चुने गए, परंतु कार्य समिति के सदस्यों ने उनके अधीन काम करने से मना कर दिया। संगठन को साथ न ले पाने के कारण उन्होंने अप्रैल 1939 में त्यागपत्र दिया, राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने और बोस ने 3 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया।

स्रोत

  • भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 3 (कक्षा 12), राष्ट्रवाद और कांग्रेस संबंधी अध्याय — एनसीईआरटी
  • भारत का स्वतंत्रता संघर्ष, उदारवादी, विभाजन और गांधी युग के अध्याय — पेंगुइन बुक्स
  • भारत का राजपत्र, खंड 2: इतिहास और संस्कृति — प्रकाशन विभाग, भारत सरकार
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