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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 48

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 48) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 12 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: गांधी युग: असहयोग से भारत छोड़ो तक, स्वतंत्रता संग्राम के व्यक्तित्व और उनकी उपाधियां, क्रांतिकारी आंदोलन और अन्य। इनमें से 13 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 28 Feb, 2024, Shift 4आसान

1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुआ दांडी मार्च किस ब्रिटिश नीति के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण विरोध था?

  1. A.नील की खेती
  2. B.वस्त्र व्यापार संबंधी नियम
  3. C.भू-राजस्व
  4. D.नमक कर
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. नमक कर

व्याख्या

सही उत्तर है D, नमक कर। 1930 का दांडी मार्च नमक पर ब्रिटिश एकाधिकार और उस पर लगे कर के विरुद्ध था, जिसके चलते कोई भी भारतीय स्वतंत्र रूप से नमक नहीं बना या बेच सकता था।

गांधीजी 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के पास साबरमती आश्रम से 78 साथियों के साथ निकले और गुजरात के समुद्रतटीय गाँव दांडी तक लगभग 385 किलोमीटर पैदल चले, जहाँ वे 5 अप्रैल को पहुँचे। 6 अप्रैल की सुबह उन्होंने समुद्र तट से प्राकृतिक नमक की एक मुट्ठी उठाकर नमक कानून तोड़ा, और इसी से सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ। नमक को इसलिए चुना गया कि यह कर अमीर और गरीब, दोनों पर समान रूप से पड़ता था, इसलिए यह विरोध पूरे देश को एक साथ जोड़ सकता था।

A गलत है: नील की खेती 1917 के चंपारण सत्याग्रह का कारण थी। B गलत है: वस्त्र व्यापार के नियम इस मार्च का विषय कभी नहीं थे। C गलत है: भू-राजस्व 1928 के बारदोली सत्याग्रह का मुद्दा था, जिसका नेतृत्व वल्लभभाई पटेल ने किया।

परीक्षा टिप: दांडी मार्च — 12 मार्च 1930 को आरंभ, लगभग 385 किलोमीटर पैदल, और 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून भंग।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 25 November 2020, Shift 2मध्यम

सी. राजगोपालाचारी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?

  1. A.वे भारत के गवर्नर जनरल बनने वाले पहले भारतीय थे
  2. B.वे स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक थे
  3. C.वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे
  4. D.वे पद्म श्री पुरस्कार के प्रथम प्राप्तकर्ता थे
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. वे पद्म श्री पुरस्कार के प्रथम प्राप्तकर्ता थे

व्याख्या

सही उत्तर है D, वे पद्म श्री पुरस्कार के प्रथम प्राप्तकर्ता थे। सी. राजगोपालाचारी को 1954 में सी. वी. रमन तथा एस. राधाकृष्णन के साथ पहले भारत रत्न प्राप्तकर्ताओं में शामिल किया गया था, पद्म श्री में नहीं, इसलिए यह कथन सत्य नहीं है। राजाजी के नाम से प्रसिद्ध वे लॉर्ड माउंटबेटन के जाने के बाद 1948 में भारत के अंतिम गवर्नर जनरल बने और इस पद पर पहुंचने वाले एकमात्र भारतीय रहे। इससे पहले वे मद्रास प्रेसीडेंसी के प्रधान, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री तथा मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री रहे। A सत्य है क्योंकि कोई अन्य भारतीय इस पद पर नहीं रहा। B सत्य है क्योंकि उन्होंने नेहरू की राज्य नियंत्रण तथा भूमि सीमा नीति के विरोध में 1959 में स्वतंत्र पार्टी बनाई। C सत्य है क्योंकि वे गांधीजी के निकट सहयोगी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। परीक्षा टिप: पहला भारत रत्न 1954 में राजाजी, रमन और राधाकृष्णन को मिला।

Q3.भारतीय इतिहासकठिन

हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन 1928 में कहां हुई बैठक में हुआ?

  1. A.कानपुर
  2. B.दिल्ली के फिरोजशाह कोटला
  3. C.लाहौर
  4. D.चटगांव
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. दिल्ली के फिरोजशाह कोटला

व्याख्या

सही उत्तर B, दिल्ली के फिरोजशाह कोटला है। संयुक्त प्रांत, पंजाब और अन्य क्षेत्रों के क्रांतिकारी सितंबर 1928 में फिरोजशाह कोटला के खंडहरों में मिले और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का पुनर्गठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के रूप में किया, जिसमें स्वतंत्रता के लक्ष्य के साथ समाजवाद जोड़ा गया; चंद्रशेखर आजाद उसके कमांडर-इन-चीफ बने। विकल्प A गलत है, क्योंकि कानपुर में 1924 में पहले की एचआरए बनी थी। विकल्प C गलत है, क्योंकि लाहौर सांडर्स कार्रवाई, लाहौर षड्यंत्र केस तथा भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी का नगर है। विकल्प D गलत है, क्योंकि चटगांव 1930 में सूर्य सेन के नेतृत्व में हुए शस्त्रागार कांड से जुड़ा है। नाम में समाजवादी शब्द जुड़ना ही वह बिंदु है, जिसे परीक्षक जांचते हैं। एचआरए का नाम बदलना केवल औपचारिकता नहीं थी, क्योंकि इसी बैठक में भगत सिंह और उनके साथियों ने किसानों और श्रमिकों के शोषण के अंत को अपना घोषित उद्देश्य बनाया। इसलिए 1924 कानपुर, 1928 दिल्ली का क्रम याद रखें।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 13 Dec 2022, Shift 3मध्यम

पुहार या कावेरीपट्टिनम निम्नलिखित में से किस राजवंश का बंदरगाह था?

  1. A.चेर
  2. B.चोल
  3. C.पांड्य
  4. D.वाकाटक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चोल

व्याख्या

सही उत्तर है B, चोल। पुहार, जिसे कावेरीपट्टिनम भी कहा जाता है, संगम युग के आरंभिक चोलों का प्रमुख बंदरगाह था।

यह नगर वहाँ बसा था जहाँ कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है, और इसके विकास का श्रेय आरंभिक चोल शासक करिकाल को दिया जाता है। संगम साहित्य तथा तमिल महाकाव्य शिल्पादिकारम में इसके गोदामों, विदेशी व्यापारियों के अलग मोहल्ले और रोम तथा दक्षिण पूर्व एशिया के साथ काली मिर्च, मोती एवं महीन वस्त्रों के व्यापार का वर्णन मिलता है। उरैयूर आरंभिक चोलों की भीतरी राजधानी थी, जबकि पुहार तटवर्ती राजधानी और बंदरगाह के रूप में काम करता था।

A गलत है: केरल तट के चेरों के बंदरगाह मुज़िरिस और तोंडी थे। C गलत है: पांड्य मदुरै से शासन करते थे और उनका बंदरगाह कोरकई था, जो मोतियों के लिए प्रसिद्ध था। D गलत है: वाकाटक दक्कन में शासन करते थे और इस तट पर उनका कोई बंदरगाह नहीं था।

परीक्षा टिप: जोड़ी बनाकर याद रखें, चोल के पुहार और उरैयूर, चेर के मुज़िरिस और वंजी, पांड्य के कोरकई और मदुरै।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

भारत में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल किस अधिनियम ने लागू किया?

  1. A.भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
  2. B.भारतीय परिषद अधिनियम, 1909
  3. C.भारत शासन अधिनियम, 1919
  4. D.भारत शासन अधिनियम, 1935
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारतीय परिषद अधिनियम, 1909

व्याख्या

सही उत्तर है B, भारतीय परिषद अधिनियम, 1909। मॉर्ले-मिंटो सुधारों ने ऐसे पृथक निर्वाचन मंडल बनाए जिनमें मुस्लिम सदस्यों को केवल मुस्लिम मतदाता चुनते थे, और इसी कारण लॉर्ड मिंटो को भारत में सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1892 के अधिनियम में केवल स्थानीय संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और वाणिज्य मंडलों के माध्यम से सीमित तथा अप्रत्यक्ष मनोनयन था, कोई सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1919 के अधिनियम ने यह व्यवस्था शुरू नहीं की, बल्कि उसे सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपीयों तक बढ़ाया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1935 के अधिनियम ने 1932 के सांप्रदायिक पंचाट और पूना पैक्ट के बाद इसे दलित वर्गों, महिलाओं और श्रमिकों तक और बढ़ाया। इसलिए 1909 ने शुरू किया, 1919 ने बढ़ाया और 1935 ने फिर बढ़ाया: यही क्रम स्वयं एक प्रिय प्रश्न है।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 20 Aug 2021, Shift 1आसान

दिल्ली सल्तनत की पहली और अंतिम महिला शासक कौन थी?

  1. A.सुल्ताना चाँद बीबी
  2. B.नूरजहाँ
  3. C.रजिया सुल्ताना
  4. D.रानी दुर्गावती
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रजिया सुल्ताना

व्याख्या

सही उत्तर है C, रजिया सुल्ताना। रजिया दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाली एकमात्र महिला थी, इसलिए वह सल्तनत की पहली और अंतिम महिला शासक दोनों थी। वह इल्तुतमिश की पुत्री थी, जिसने अपने पुत्रों के स्थान पर उसे चुना, और उसने 1236 से 1240 तक शासन किया। वह बिना पर्दा दरबार करती थी, हाथी पर सवारी करती थी और उसने जलालतुद्दीन रजिया की उपाधि ली। चालीसा के तुर्क सरदारों को एक महिला का शासन सहन नहीं हुआ और 1240 में उसे अपदस्थ करके मार डाला गया। A गलत है क्योंकि चाँद बीबी सोलहवीं शताब्दी में दक्कन के अहमदनगर और बीजापुर की संरक्षिका थी, दिल्ली की सुल्तान नहीं। B गलत है क्योंकि नूरजहाँ मुगल बादशाह जहाँगीर की पत्नी थी और उसके माध्यम से प्रभाव रखती थी, पर उसने स्वयं संप्रभु शासक के रूप में शासन नहीं किया। D गलत है क्योंकि रानी दुर्गावती गोंडवाना की शासिका थी और उसने 1564 में अकबर के सेनापति आसफ खान से युद्ध किया। परीक्षा टिप: जोड़ी याद रखें - इल्तुतमिश ने अपनी पुत्री रजिया को उत्तराधिकारी बनाया, जिसने 1236 से 1240 तक दिल्ली पर शासन किया।

Q7.भारतीय इतिहासआसान

8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधान सभा में बम फेंककर गिरफ्तारी देने वाले कौन थे?

  1. A.भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त
  2. B.भगत सिंह और सुखदेव
  3. C.चंद्रशेखर आजाद और राजगुरु
  4. D.सूर्य सेन और कल्पना दत्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त

व्याख्या

सही उत्तर A, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त है। दोनों ने 8 अप्रैल 1929 को, जब पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल पारित कराए जा रहे थे, केंद्रीय विधान सभा की खाली बेंचों पर कम तीव्रता के बम फेंके, नारे लगाए, पर्चे बिखेरे और भागने से इनकार कर दिया, जिससे मुकदमे का उपयोग अपने विचार समझाने के लिए किया जा सके। विकल्प B गलत है, क्योंकि सुखदेव एचएसआरए के प्रमुख संगठक थे और भगत सिंह के साथ फांसी पर चढ़े, किंतु उस दिन सभा में नहीं थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि चंद्रशेखर आजाद ने कभी गिरफ्तारी नहीं दी और राजगुरु सांडर्स कार्रवाई में शामिल थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि सूर्य सेन और कल्पना दत्त बंगाल के चटगांव समूह से थे। बहरों को सुनाने के लिए धमाके की आवश्यकता होती है, यह कथन इसी कार्रवाई से जुड़ा है।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 09 Jul, 2024, Shift 2कठिन

फिरोजशाह मेहता और के टी तेलंग के साथ 1885 में बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन की स्थापना किसने की थी?

  1. A.बदरुद्दीन तैयबजी
  2. B.बेहरामजी एम मलाबारी
  3. C.ए के फज़लुल हक
  4. D.ज़ाकिर हुसैन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बदरुद्दीन तैयबजी

व्याख्या

सही उत्तर है A, बदरुद्दीन तैयबजी। बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन की स्थापना 1885 में बदरुद्दीन तैयबजी, फिरोजशाह मेहता और काशीनाथ त्रिंबक तेलंग ने की थी, जो बॉम्बे के तीन वकील थे और जिन्हें अक्सर बॉम्बे की त्रिमूर्ति कहा जाता है।

यह संगठन भारतीय राजनीतिक मांगों को ब्रिटिश संसद के सामने रखने के लिए बना, विशेष रूप से इल्बर्ट बिल से उठे रोष के बाद, और इसी वर्ष भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की भी स्थापना हुई। बदरुद्दीन तैयबजी आगे 1887 के मद्रास अधिवेशन में कांग्रेस के तीसरे अध्यक्ष बने और यह पद सँभालने वाले पहले मुसलमान थे।

विकल्प B, बेहरामजी एम मलाबारी, समाज सुधारक और पत्रकार थे जिन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध अभियान चलाया। विकल्प C, ए के फज़लुल हक, बंगाल के नेता थे जिन्होंने 1940 में लाहौर प्रस्ताव रखा। विकल्प D, ज़ाकिर हुसैन, भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे।

परीक्षा टिप: बॉम्बे त्रिमूर्ति — तैयबजी, मेहता और तेलंग; बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन 1885।

Q9.भारतीय इतिहासकठिन

भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत अवशिष्ट शक्तियाँ किसमें निहित थीं?

  1. A.संघीय विधानमंडल में
  2. B.प्रांतीय विधानमंडलों में
  3. C.गवर्नर-जनरल में
  4. D.संघीय न्यायालय में
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. गवर्नर-जनरल में

व्याख्या

सही उत्तर है C, गवर्नर-जनरल में। 1935 के अधिनियम ने शक्तियों को संघीय सूची, प्रांतीय सूची और समवर्ती सूची में बाँटा और जो विषय इन तीनों में कहीं नहीं थे, वे अवशिष्ट विषय गवर्नर-जनरल यानी वायसराय के विवेक पर छोड़ दिए गए। विकल्प A गलत है क्योंकि संघीय विधानमंडल केवल संघीय सूची पर और प्रांतीय विधानमंडलों के साथ समवर्ती सूची पर कानून बना सकता था। विकल्प B गलत है क्योंकि प्रांत प्रांतीय और समवर्ती सूची तक सीमित थे। विकल्प D गलत है क्योंकि 1937 में स्थापित संघीय न्यायालय अधिनियम की व्याख्या करता था और संघ तथा इकाइयों के विवाद सुलझाता था; उसके पास विधायी शक्ति नहीं थी। इसकी तुलना हमारे संविधान से कीजिए, जहाँ अवशिष्ट शक्तियाँ अनुच्छेद 248 के अंतर्गत संसद के पास हैं, और यह अंतर परीक्षा में सरल अंक बन जाता है।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 8 Aug 2021कठिन

दक्कन सल्तनतों और उनके संबंधित क्षेत्रों के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?

  1. A.निजाम शाही : बीजापुर
  2. B.बरीद शाही : बीदर
  3. C.कुतुब शाही : गोलकुंडा
  4. D.इमाद शाही : बरार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. निजाम शाही : बीजापुर

व्याख्या

सही उत्तर है A, निजाम शाही : बीजापुर, क्योंकि यही युग्म गलत सुमेलित है। निजाम शाही वंश अहमदनगर से शासन करता था, जिसकी नींव 1490 में मलिक अहमद ने रखी थी, जबकि बीजापुर यूसुफ आदिल शाह के आदिल शाही वंश का था। पाँचों दक्कन सल्तनतें लगभग 1490 से 1518 के बीच बहमनी राज्य के विघटन से निकलीं और उनमें से चार ने मिलकर 1565 में तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर को कुचल दिया। बीजापुर गोल गुंबज के लिए, गोलकुंडा अपने किले और हीरों के लिए तथा अहमदनगर मुगलों के विरुद्ध चाँद बीबी की रक्षा के लिए याद किया जाता है। विकल्प B सही युग्म है, क्योंकि बरीद शाही वंश के पास बीदर था, जो बहमनी राज्य की अंतिम राजधानी थी। विकल्प C सही युग्म है, क्योंकि कुली कुतुब शाह के कुतुब शाही वंश ने गोलकुंडा पर शासन किया और बाद में हैदराबाद की नींव रखी। विकल्प D सही युग्म है, क्योंकि इमाद शाही वंश के पास बरार था, जो सबसे पहले अलग हुआ और सबसे पहले अहमदनगर में मिला लिया गया। परीक्षा टिप: अहमदनगर निजाम शाही, बीजापुर आदिल शाही, गोलकुंडा कुतुब शाही, बीदर बरीद शाही, बरार इमाद शाही।

Q11.भारतीय इतिहासमध्यम

18 अप्रैल 1930 के चटगांव शस्त्रागार कांड का नेतृत्व किसने किया?

  1. A.सूर्य सेन
  2. B.पुलिन बिहारी दास
  3. C.बारींद्र कुमार घोष
  4. D.जतींद्र नाथ दास
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सूर्य सेन

व्याख्या

सही उत्तर A, सूर्य सेन है। मास्टरदा कहे जाने वाले इस शिक्षक ने अप्रैल 1930 में इंडियन रिपब्लिकन आर्मी के साथ चटगांव के शस्त्रागार पर छापा मारा, राष्ट्रीय ध्वज फहराया और अस्थायी सरकार की घोषणा की, जिसके बाद समूह पहाड़ियों में चला गया। वे 1933 में पकड़े गए और 1934 में फांसी पर चढ़ाए गए, तथा प्रीतिलता वाडेदार और कल्पना दत्त इसी मंडल से थीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि पुलिन बिहारी दास ने शताब्दी के पहले दशक में ढाका अनुशीलन समिति का नेतृत्व किया। विकल्प C गलत है, क्योंकि बारींद्र कुमार घोष 1908 के मानिकतला समूह से थे और अलीपुर षड्यंत्र केस में दंडित हुए। विकल्प D गलत है, क्योंकि जतींद्र नाथ दास ने 1929 में तिरसठ दिन के अनशन के बाद लाहौर जेल में प्राण त्यागे। चटगांव और सूर्य सेन, 1930 का जोड़ा याद रखें।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 18 Jul 2023, Shift 2आसान

मुहम्मद बिन तुगलक ने चाँदी और सोने के सिक्कों के स्थान पर _______ के सिक्कों से सांकेतिक मुद्रा प्रणाली शुरू की।

  1. A.रूपक
  2. B.रुपया
  3. C.काँसा/ताँबा
  4. D.टंका
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. काँसा/ताँबा

व्याख्या

सही उत्तर है C, काँसा/ताँबा। मुहम्मद बिन तुगलक ने 1329-30 में काँसे और ताँबे के सांकेतिक सिक्के चलाए, जो चाँदी के टंका के मूल्य पर चलने थे। विचार स्वयं अच्छा था और चीन तथा फारस में सफल रहा था, पर सुल्तान ने इन सिक्कों की ढलाई राज्य के हाथ में नहीं रखी। साम्राज्य भर के सुनारों ने घरों में ही नकली सिक्के ढाल लिए, खजाना जाली सिक्कों से भर गया और व्यापारियों ने उन्हें लेना बंद कर दिया। सुल्तान को यह मुद्रा वापस लेनी पड़ी और सांकेतिक सिक्कों के बदले चाँदी देनी पड़ी, जिससे खजाना खाली हो गया। A गलत है क्योंकि रूपक प्राचीन काल के सिक्के का नाम था, इस प्रयोग का नहीं। B गलत है क्योंकि रुपया बहुत बाद में शेरशाह सूरी ने चाँदी के सिक्के के रूप में चलाया। D गलत है क्योंकि टंका चाँदी का मानक सिक्का था, जिसका मूल्य सांकेतिक सिक्कों को देना था। परीक्षा टिप: जोड़ी याद रखें - मुहम्मद बिन तुगलक और 1329 की असफल काँसे की सांकेतिक मुद्रा।

Q13.भारतीय इतिहासमध्यम

भारत में विभागीय प्रणाली किस वायसराय ने शुरू की और उसे किस अधिनियम ने मान्यता दी?

  1. A.लॉर्ड कैनिंग, भारतीय परिषद अधिनियम 1861
  2. B.लॉर्ड मिंटो, भारतीय परिषद अधिनियम 1909
  3. C.लॉर्ड चेम्सफोर्ड, भारत शासन अधिनियम 1919
  4. D.लॉर्ड रिपन, भारतीय परिषद अधिनियम 1892
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. लॉर्ड कैनिंग, भारतीय परिषद अधिनियम 1861

व्याख्या

सही उत्तर है A, लॉर्ड कैनिंग और भारतीय परिषद अधिनियम 1861। कैनिंग ने विभागीय प्रणाली शुरू की, जिसमें वायसराय की परिषद के प्रत्येक सदस्य को शासन के एक या अधिक विभागों का प्रभार दिया गया और वह विभागीय मामलों पर अंतिम आदेश दे सकता था; 1861 के अधिनियम ने इस व्यवस्था को सांविधिक मान्यता दी और यह अधिनियम भारतीयों को कानून बनाने से जोड़ने तथा वायसराय को अध्यादेश की शक्ति देने के लिए भी याद किया जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1909 का अधिनियम पृथक निर्वाचन और कार्यकारी परिषद में पहले भारतीय का अधिनियम है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1919 का अधिनियम द्वैध शासन का अधिनियम है, जो बहुत बाद का विकास है। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड रिपन 1882 के स्थानीय स्वशासन से जुड़े हैं और 1892 का अधिनियम बजट चर्चा से, विभागीय प्रणाली से नहीं।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 11 Oct 2021, Shift 3कठिन

विक्रमादित्य VI, जिनके दरबारी कवि बिल्हण ने उनकी जीवनी लिखी, किस राजवंश के शासक थे?

  1. A.चालुक्य
  2. B.पल्लव
  3. C.राष्ट्रकूट
  4. D.गंग
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. चालुक्य

व्याख्या

सही उत्तर है A, चालुक्य। विक्रमादित्य VI कल्याणी के पश्चिमी चालुक्य राज्य के शासक थे और उनके दरबारी कवि बिल्हण ने उनके जीवन पर विक्रमांकदेवचरित लिखा। उन्होंने लगभग 1076 से 1126 ईस्वी तक वर्तमान कर्नाटक के कल्याणी से शासन किया और अपने राज्यारोहण से गिनी जाने वाली चालुक्य-विक्रम संवत् चलाई, जो भारत के बहुत कम शासकों ने किया। उनके दरबार के दूसरे विद्वान विज्ञानेश्वर थे, जिन्होंने याज्ञवल्क्य स्मृति पर मिताक्षरा नाम की प्रसिद्ध टीका लिखी, जो हिंदू विधि का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। B गलत है क्योंकि पल्लव कांची से शासन करते थे और दसवीं शताब्दी तक उनका पतन हो गया था। C गलत है क्योंकि मान्यखेट के राष्ट्रकूटों को 973 ईस्वी में इन्हीं चालुक्यों ने हटाया था। D गलत है क्योंकि पश्चिमी गंग दक्षिण कर्नाटक के तलकाड से शासन करते थे और श्रवणबेलगोला के लिए जाने जाते हैं, बिल्हण के लिए नहीं। परीक्षा टिप: बिल्हण – विक्रमांकदेवचरित – विक्रमादित्य VI; विज्ञानेश्वर – मिताक्षरा – उसी दरबार में।

Q15.भारतीय इतिहासकठिन

युवा क्रांतिकारियों में व्यापक रूप से पढ़ा गया संस्मरण बंदी जीवन किसने लिखा?

  1. A.राम प्रसाद बिस्मिल
  2. B.सचींद्र नाथ सान्याल
  3. C.भगत सिंह
  4. D.अशफाक उल्ला खान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सचींद्र नाथ सान्याल

व्याख्या

सही उत्तर B, सचींद्र नाथ सान्याल है। हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापकों में एक और उसके घोषणापत्र द रिवोल्यूशनरी के लेखक सान्याल ने बंदी जीवन लिखा, जो जेल जीवन और क्रांतिकारी निष्ठा का विवरण है और 1920 के दशक के युवाओं में व्यापक रूप से पढ़ा गया। विकल्प A गलत है, क्योंकि राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी की छाया में लिखी अपनी आत्मकथा और अपने नाम से जुड़ी कविताओं के लिए याद किया जाता है, बंदी जीवन के लिए नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि भगत सिंह ने मैं नास्तिक क्यों हूं निबंध लिखा और प्रसिद्ध जेल नोटबुक रखी। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1927 में काकोरी मामले में फांसी पाए अशफाक उल्ला खान ने पत्र और शेर छोड़े, इस प्रकार का संस्मरण नहीं। इस काल के लेखक और पुस्तक के जोड़े एक अंक के प्रश्नों का नियमित स्रोत हैं।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 9 Nov 2022, Shift 3कठिन

खातोली का युद्ध 1517 में राणा सांगा के नेतृत्व वाले मेवाड़ राज्य और ________ के बीच लड़ा गया था।

  1. A.सिकंदर लोदी
  2. B.बाबर
  3. C.इब्राहीम लोदी
  4. D.महमूद लोदी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. इब्राहीम लोदी

व्याख्या

सही उत्तर है C, इब्राहीम लोदी। वर्तमान राजस्थान में बूंदी के निकट 1517 में लड़ा गया खातोली का युद्ध मेवाड़ के राणा सांगा और दिल्ली की गद्दी पर नव-आसीन इब्राहीम लोदी के बीच पहला संघर्ष था, जिसमें राजपूत विजयी रहे। राणा सांगा अर्थात राणा संग्राम सिंह ने 1509 से 1528 तक मेवाड़ पर शासन किया और उसे अपने समय की सबसे प्रबल राजपूत शक्ति बनाया; उन्होंने 1518 में धौलपुर में लोदियों को तथा 1519 में गागरोन में मालवा की सेना को हराया। उनका सैन्य जीवन 1527 के खानवा युद्ध में समाप्त हुआ, जहां बाबर की तोपों ने उन्हें पराजित किया। A गलत है क्योंकि सिकंदर लोदी की मृत्यु इस युद्ध से पहले 1517 में हो गई थी। B गलत है क्योंकि बाबर भारत 1526 में आया। D गलत है क्योंकि इब्राहीम का भाई महमूद लोदी बाद में 1529 के घाघरा युद्ध में लड़ा। परीक्षा टिप: राणा सांगा का क्रम - खातोली 1517, धौलपुर 1518, गागरोन 1519, खानवा 1527।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 09 May 2023, Shift 1मध्यम

निम्नलिखित में से किस अधिनियम ने प्रांतीय स्तर पर ‘द्वैध शासन’ समाप्त किया और लोकप्रिय ढंग से निर्वाचित प्रांतीय विधानमंडलों का रास्ता खोला?

  1. A.चार्टर अधिनियम, 1793
  2. B.मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (भारत सरकार अधिनियम), 1919
  3. C.भारत सरकार अधिनियम, 1935
  4. D.पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. भारत सरकार अधिनियम, 1935

व्याख्या

सही उत्तर है C, भारत सरकार अधिनियम, 1935। 1935 के अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त किया, प्रांतीय स्वायत्तता दी और पूरे प्रांतीय प्रशासन को निर्वाचित विधानमंडलों के प्रति उत्तरदायी मंत्रियों के अधीन कर दिया। द्वैध शासन 1919 के भारत सरकार अधिनियम से आया था, जिसने प्रांतीय विषयों को भारतीय मंत्रियों के हस्तांतरित विषयों और राज्यपाल के पास रखे आरक्षित विषयों में बाँट दिया था। 1935 के अधिनियम ने यह बँटवारा हटाया, मताधिकार लगभग छठे हिस्से वयस्कों तक बढ़ाया, द्विसदनीय केंद्रीय विधानमंडल वाले संघ की व्यवस्था की, संघीय न्यायालय बनाया और द्वैध शासन केंद्र में लागू कर दिया। इसके अंतर्गत 1937 के चुनावों में अधिकांश प्रांतों में कांग्रेस के मंत्रिमंडल बने। A गलत है क्योंकि 1793 के चार्टर अधिनियम ने मुख्यतः कंपनी के व्यापारिक अधिकार बढ़ाए। B गलत है क्योंकि 1919 के अधिनियम ने द्वैध शासन शुरू किया, समाप्त नहीं। D गलत है क्योंकि 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट ने लंदन में बोर्ड ऑफ कंट्रोल बनाया। परीक्षा टिप: 1919 – प्रांतों में द्वैध शासन, 1935 – प्रांतों से हटा और केंद्र में लागू।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 8 Aug 2021कठिन

निम्नलिखित में से किसने हैदराबाद को अपना केंद्र बनाकर निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह की उपाधि के साथ स्वयं को स्वतंत्र शासक के रूप में स्थापित किया?

  1. A.आसफ जाह द्वितीय
  2. B.बहादुर शाह
  3. C.अलीवर्दी खान
  4. D.चिन किलिच खान
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. चिन किलिच खान

व्याख्या

सही उत्तर है D, चिन किलिच खान। चिन किलिच खान, जो अपनी उपाधि निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह से अधिक याद किए जाते हैं, एक मुगल अमीर थे जिन्हें मुहम्मद शाह ने दक्कन का सूबेदार नियुक्त किया। दिल्ली दरबार की साजिशों से ऊबकर वे दक्षिण लौटे, 1724 में शकर खेड़ा में अपने प्रतिद्वंद्वी मुबारिज खान को हराया और इसके बाद नाम भर के अतिरिक्त हर अर्थ में स्वतंत्र शासक की तरह दक्कन पर राज किया; उन्होंने हैदराबाद के आसफ जाही या निजाम वंश की नींव रखी, जो 1948 तक चला। उन्होंने मुगल निष्ठा का रूप बनाए रखा और बादशाह के नाम से सिक्के ढाले, पर अधिकारी स्वयं नियुक्त किए तथा युद्ध और संधि अपने निर्णय से की। विकल्प A गलत है, क्योंकि आसफ जाह द्वितीय यानी निजाम अली खान इसी वंश के बाद के शासक थे, संस्थापक नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि बहादुर शाह 1707 से 1712 तक शासन करने वाला मुगल बादशाह था। विकल्प C गलत है, क्योंकि अलीवर्दी खान ने बंगाल में स्वतंत्रता कायम की थी, हैदराबाद में नहीं। परीक्षा टिप: हैदराबाद 1724 चिन किलिच खान, अवध 1722 सआदत खान, बंगाल मुर्शिद कुली खान।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 25 November 2020, Shift 2मध्यम

सशस्त्र मार्ग से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए 1925 में काकोरी ट्रेन कांड की योजना ______ के सदस्यों ने बनाई थी।

  1. A.गदर पार्टी
  2. B.हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन
  3. C.आजाद हिंद फौज
  4. D.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन

व्याख्या

सही उत्तर है B, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन। 9 अगस्त 1925 को इस संगठन के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में काकोरी के निकट 8 डाउन ट्रेन रोककर सरकारी खजाने की थैलियां लूट लीं, जिससे वे सशस्त्र संघर्ष के लिए हथियार खरीदना चाहते थे। इस कांड में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी को दिसंबर 1927 में फांसी दी गई, जबकि चंद्रशेखर आजाद पकड़ में नहीं आए। इस संगठन की स्थापना 1924 में बिस्मिल, सचींद्र नाथ सान्याल और जोगेश चंद्र चटर्जी ने की थी, और 1928 में इसका नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन कर दिया गया। A गलत है क्योंकि गदर पार्टी 1913 में अमेरिका में बनी थी। C गलत है क्योंकि आजाद हिंद फौज 1942 में बनी और 1943 से सुभाष चंद्र बोस ने उसका नेतृत्व किया। D गलत है क्योंकि कांग्रेस संवैधानिक तथा अहिंसक मार्ग पर चलती थी। परीक्षा टिप: काकोरी 1925 और लाहौर षड्यंत्र केस 1929 दोनों इसी क्रांतिकारी धारा के हैं।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 13 Oct 2020, Shift 3आसान

मोतीलाल नेहरू (अध्यक्ष) तथा आठ अन्य कांग्रेस नेताओं ने भारत के लिए संविधान का प्रारूप किस वर्ष तैयार किया?

  1. A.1928
  2. B.1925
  3. C.1930
  4. D.1950
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1928

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1928। मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में बनी समिति ने आठ अन्य सदस्यों के साथ 1928 में भारत के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया, जिसे नेहरू रिपोर्ट कहा जाता है।

यह समिति सर्वदलीय सम्मेलन ने बनाई थी, जो साइमन कमीशन के उत्तर में हुआ था; उस कमीशन में कोई भारतीय सदस्य नहीं था और उसका स्वागत 'साइमन वापस जाओ' के नारे से हुआ। रिपोर्ट में पूर्ण स्वतंत्रता के बजाय औपनिवेशिक स्वराज, मूल अधिकारों की सूची, संयुक्त निर्वाचन और केंद्र में उत्तरदायी शासन की मांग की गई। जवाहरलाल नेहरू तथा सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेताओं ने औपनिवेशिक स्वराज को अस्वीकार किया और 1929 में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज अपनाया।

विकल्प B, 1925, कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिया बिल का वर्ष है। विकल्प C, 1930, दांडी यात्रा और पहले गोलमेज सम्मेलन का वर्ष है। विकल्प D, 1950, भारत का संविधान लागू होने का वर्ष है।

परीक्षा टिप: साइमन कमीशन 1927, नेहरू रिपोर्ट 1928, पूर्ण स्वराज 1929।

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