मध्यकालीन भारत के प्रांतीय राज्य: शासक और राजधानियाँ
मध्यकालीन भारत के प्रांतीय राज्यों के नोट्स: बंगाल, जौनपुर, मालवा, गुजरात और कश्मीर, उनके संस्थापक, राजधानी, उपाधि, स्थापत्य तथा विलय वर्ष सहित।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

दिल्ली सल्तनत का विस्तार मुहम्मद बिन तुगलक के समय सर्वाधिक था और उसके बाद वह बिखरने लगी। 1398 के तैमूर आक्रमण ने दिल्ली की गद्दी को इतना कमजोर कर दिया कि दूर के प्रांत उसके हाथ में नहीं रहे, और एक के बाद एक सूबेदार ने राजस्व भेजना बंद कर दिया तथा अपने नाम के सिक्के ढलवाने आरंभ कर दिए। इन अलगावों से जो राज्य बने, उन्हें मध्यकालीन भारत के प्रांतीय अथवा क्षेत्रीय राज्य कहा जाता है। इनमें पाँच बार-बार पूछे जाते हैं: बंगाल, जौनपुर, मालवा, गुजरात और कश्मीर। प्रत्येक को चार तथ्यों के समूह के रूप में याद रखना चाहिए — संस्थापक और वर्ष, राजधानी, महानतम शासक तथा उसकी उपाधि, और वह वर्ष जब किसी मुगल बादशाह ने उसे मिलाया। इन राज्यों का महत्व केवल राजनीतिक नहीं है। दिल्ली से मुक्त होकर इन्होंने स्थानीय शैलियों में निर्माण किया, क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को संरक्षण दिया और कवियों, संतों तथा शिल्पियों को आश्रय दिया; इसी कारण पंद्रहवीं शताब्दी के प्रांतीय दरबार उत्तर भारत की क्षेत्रीय संस्कृति के निर्माण-स्थल माने जाते हैं।
बंगाल
बंगाल दिल्ली के लिए सदा सबसे कठिन प्रांत रहा, क्योंकि नदियों ने कूच लंबा और मानसून ने उसे धीमा बना दिया; सल्तनत के इतिहासकारों ने इसे बुलगाकपुर अर्थात विद्रोह का नगर कहा। शम्सुद्दीन इलियास शाह ने 1342 में बंगाल को एक किया, इलियास शाही वंश की स्थापना की, शाह-ए-बंगाला की उपाधि ली और पांडुआ से शासन किया। फिरोज शाह तुगलक ने बंगाल पर दो बार आक्रमण किया और दोनों बार उसे पुनः प्राप्त करने में असफल रहा। उसके उत्तराधिकारी सिकंदर शाह ने पांडुआ में अदीना मस्जिद बनवाई, जो मध्यकालीन बंगाल की सबसे बड़ी मस्जिद है। पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभ में सत्ता कुछ समय के लिए राजा गणेश और उनके पुत्र के हाथ आई, जिसने धर्म परिवर्तन के बाद जलालुद्दीन मुहम्मद शाह के नाम से शासन किया। उच्चतम बिंदु आया अलाउद्दीन हुसैन शाह के साथ, जिसने हुसैन शाही वंश की स्थापना की; 1493 से आरंभ उसके शासन को मध्यकालीन बंगाल का स्वर्ण युग कहा जाता है, उसके दरबार में बांग्ला साहित्य को संरक्षण मिला और वह चैतन्य महाप्रभु का समकालीन था। बंगाल की स्वतंत्रता अंततः 1576 में समाप्त हुई, जब करारानी शासक दाऊद खाँ अकबर की सेना से पराजित हुआ।
जौनपुर
गोमती के तट पर जौनपुर नगर की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने मुहम्मद बिन तुगलक की स्मृति में की थी, जिसका व्यक्तिगत नाम जूना खाँ था। 1394 में मलिक सरवर नामक अमीर को मलिक-उस-शर्क अर्थात पूर्व का स्वामी की उपाधि देकर पूर्व भेजा गया, और इसी उपाधि से उसके वंश को शर्की वंश कहा जाता है। इसका महानतम शासक इब्राहीम शाह शर्की था, जिसके समय जौनपुर में इतने विद्वान एकत्र हुए कि उसे पूर्व का शीराज कहा गया। अटाला मस्जिद, अपने विशाल पर्देनुमा प्रवेश-द्वार और मीनारों के अभाव के साथ, विशिष्ट जौनपुर शैली का सर्वोत्तम उदाहरण है, और लाल दरवाजा तथा जामा मस्जिद उसी शैली में बनीं। जौनपुर हिंदुस्तानी संगीत और फारसी विद्या का भी केंद्र था। उसकी स्वतंत्रता अल्पकालिक रही: बहलोल लोदी ने हुसैन शाह शर्की को पराजित कर 1484 में जौनपुर को दिल्ली में मिला लिया।
मालवा
मालवा 1401 में दिलावर खाँ गोरी के नेतृत्व में अलग हुआ, जिसकी राजधानी धार थी। उसके पुत्र होशंग शाह ने राजधानी को मांडू के पहाड़ी किले में स्थानांतरित किया और उसका नाम शादियाबाद अर्थात आनंद नगर रखा। मांडू में होशंग शाह का मकबरा भारत का पहला पूर्णतः संगमरमर से आच्छादित भवन है, और शाहजहाँ ने बाद में अपने शिल्पियों को उसका अध्ययन करने भेजा था। महमूद खिलजी प्रथम ने 1436 में मालवा में खिलजी वंश की स्थापना की और मेवाड़ के राणा कुंभा से दीर्घ युद्ध लड़ा, जिसने अपनी विजय के स्मारक रूप में चित्तौड़ में विजय स्तंभ बनवाया। मांडू में जहाज महल और हिंडोला महल भी हैं। अंतिम शासक बाज बहादुर को मालवा के संगीत और लोककथाओं में रानी रूपमती के साथ स्मरण किया जाता है; अकबर के सेनापति अधम खाँ ने उसे पराजित किया और 1561 में मालवा मुगल साम्राज्य में मिला लिया गया।
गुजरात
पाँचों में सर्वाधिक संपन्न गुजरात था, क्योंकि खंभात और बाद में सूरत के बंदरगाह पश्चिमी हिंद महासागर का व्यापार संभालते थे। फिरोज शाह तुगलक के सूबेदार जफर खाँ ने 1407 में मुजफ्फर शाह प्रथम के नाम से स्वतंत्रता घोषित की। उसके पौत्र अहमद शाह प्रथम ने 1411 में साबरमती के तट पर अहमदाबाद नगर की स्थापना की और उसे अपनी राजधानी बनाया, जहाँ उसने जामा मस्जिद और तीन दरवाजा बनवाए। महानतम शासक महमूद बेगड़ा था, जिसे यह नाम गिरनार और चंपानेर के दो किले जीतने से मिला; उसने गिरनार के पास मुस्तफाबाद और चंपानेर में मुहम्मदाबाद बसाए, और उसके शासन में गुजरात तट पर पुर्तगालियों से पहले सशस्त्र संघर्ष हुए। अकबर ने 1573 में गुजरात को मिलाया, और उसी वर्ष अहमदाबाद की सीदी सैयद मस्जिद की प्रसिद्ध पत्थर की जालियाँ तराशी गईं।
कश्मीर
कश्मीर में मुस्लिम शासन 1339 में शाहमीर से आरंभ हुआ, जिसने शम्सुद्दीन की उपाधि ली और शाहमीर वंश की स्थापना की। चौदहवीं शताब्दी के अंत में शासन करने वाले सिकंदर शाह को बुतशिकन अर्थात मूर्तिभंजक की कठोर उपाधि से स्मरण किया जाता है। उसके पुत्र जैनुल आबिदीन ने उस नीति को पूरी तरह पलट दिया और वही कश्मीर का वह शासक है जिसके विषय में प्रत्येक परीक्षा प्रश्न पूछती है। बुडशाह अर्थात महान राजा कहे जाने वाले इस शासक ने जजिया समाप्त किया, पलायन कर चुके ब्राह्मणों को वापस बुलाया, महाभारत तथा कल्हण की राजतरंगिणी का फारसी में अनुवाद कराया, और समरकंद से शिल्पी बुलाकर घाटी में कागज निर्माण, शाल बुनाई, कालीन बुनाई तथा काष्ठ नक्काशी की नींव रखी। उसके दरबारी इतिहासकार जोनराज और श्रीवर ने राजतरंगिणी की परंपरा आगे बढ़ाई। इसी व्यापक नीति के कारण उसे कश्मीर का अकबर भी कहा जाता है। घाटी 1586 में अकबर द्वारा मुगल साम्राज्य में मिला ली गई।
पाँच राज्य एक दृष्टि में
| राज्य | संस्थापक और वर्ष | राजधानी | महानतम शासक | विलय |
|---|---|---|---|---|
| बंगाल | शम्सुद्दीन इलियास शाह, 1342 | पांडुआ, बाद में गौड़ | अलाउद्दीन हुसैन शाह | 1576, अकबर द्वारा |
| जौनपुर | मलिक सरवर, 1394 | जौनपुर | इब्राहीम शाह शर्की | 1484, बहलोल लोदी द्वारा |
| मालवा | दिलावर खाँ गोरी, 1401 | धार, बाद में मांडू | महमूद खिलजी प्रथम | 1561, अकबर द्वारा |
| गुजरात | जफर खाँ, 1407 | अन्हिलवाड़ा, बाद में अहमदाबाद | महमूद बेगड़ा | 1573, अकबर द्वारा |
| कश्मीर | शाहमीर, 1339 | श्रीनगर | जैनुल आबिदीन | 1586, अकबर द्वारा |
इन राज्यों का महत्व
इस विघटन के तीन परिणाम उत्तर में लिखने योग्य हैं। पहला, स्थापत्य क्षेत्रीय हो गया: बंगाल में ईंट और टेराकोटा के साथ वक्र कॉर्निस, जौनपुर में मीनारों के बिना विशाल मेहराबी द्वार, मांडू में संगमरमर और हवादार मंडप, तथा गुजरात में मंदिर शिल्पियों से ली गई पत्थर की नक्काशी। दूसरा, क्षेत्रीय भाषाओं को दरबारी संरक्षण मिला — गौड़ में बांग्ला और अहमदाबाद में गुजराती, जबकि प्रशासन की भाषा फारसी बनी रही। तीसरा, इन राज्यों की संपन्नता और आपसी फूट ने मुगलों को आकर्षित किया, जिन्होंने 1561 से 1586 के बीच पाँच में से चार को मिला लिया और इस प्रकार अकबर के समय वह एकीकरण पूरा किया जो दिल्ली ने दो शताब्दी पूर्व खो दिया था।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न चार रूपों में आते हैं। पहला रूप वंश के संस्थापक का है, इसलिए बंगाल के लिए इलियास शाह, जौनपुर के लिए मलिक सरवर, मालवा के लिए दिलावर खाँ गोरी, गुजरात के लिए जफर खाँ और कश्मीर के लिए शाहमीर को सूची के रूप में याद रखना चाहिए। दूसरा रूप उपाधियों का है: जौनपुर के लिए पूर्व का शीराज, जैनुल आबिदीन के लिए बुडशाह, कश्मीर के सिकंदर के लिए बुतशिकन और गुजरात के महमूद के लिए बेगड़ा। तीसरा रूप स्थापत्य का है, जिसमें किसी भवन को उसके निर्माता और स्थान से जोड़ना होता है; अदीना मस्जिद, अटाला मस्जिद, होशंग शाह का मकबरा, जहाज महल और सीदी सैयद की जालियाँ बार-बार आती हैं। चौथा रूप किसी शासक द्वारा बसाए नगर का है, और 1411 में अहमदाबाद इस अध्याय का सर्वाधिक दोहराया गया तथ्य है। सामान्य जाल हैं — धार और मांडू को आपस में बदल देना, शर्की वंश की स्थापना का श्रेय फिरोज शाह तुगलक को देना जबकि उसने केवल नगर बसाया था, तथा यह मान लेना कि अकबर ने पाँचों को मिलाया, जबकि जौनपुर 1484 में ही बहलोल लोदी के हाथ चला गया था।
महत्वपूर्ण तथ्य
| बंगाल का संस्थापक | शम्सुद्दीन इलियास शाह, 1342; उपाधि शाह-ए-बंगाला |
|---|---|
| बंगाल का स्वर्ण युग | अलाउद्दीन हुसैन शाह का शासन, 1493 से |
| अदीना मस्जिद | पांडुआ, बंगाल के सिकंदर शाह द्वारा निर्मित |
| जौनपुर नगर की स्थापना | फिरोज शाह तुगलक, जूना खाँ (मुहम्मद बिन तुगलक) की स्मृति में |
| शर्की वंश का संस्थापक | मलिक सरवर, 1394, उपाधि मलिक-उस-शर्क |
| पूर्व का शीराज | जौनपुर, इब्राहीम शाह शर्की के समय |
| जौनपुर का विलय | बहलोल लोदी, 1484 |
| मालवा के संस्थापक और राजधानियाँ | दिलावर खाँ गोरी, 1401; धार, फिर मांडू (शादियाबाद) |
| भारत का पहला संगमरमर भवन | मांडू में होशंग शाह का मकबरा |
| गुजरात का संस्थापक | जफर खाँ, मुजफ्फर शाह प्रथम के रूप में, 1407 |
| अहमदाबाद की स्थापना | 1411, अहमद शाह प्रथम द्वारा, साबरमती तट पर |
| महमूद बेगड़ा | गिरनार और चंपानेर के दो किलों के कारण यह नाम |
| कश्मीर का संस्थापक | शाहमीर, शम्सुद्दीन के रूप में, 1339 |
| बुडशाह | कश्मीर के जैनुल आबिदीन; दरबारी इतिहासकार जोनराज और श्रीवर |
| मुगल विलय | मालवा 1561, गुजरात 1573, बंगाल 1576, कश्मीर 1586 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
जौनपुर के शर्की वंश की स्थापना किसने की?
- A.मलिक सरवर
- B.इब्राहीम शाह
- C.दिलावर खाँ गोरी
- D.जफर खाँ
उत्तर देखें
परवर्ती तुगलक दरबार का अमीर मलिक सरवर 1394 में मलिक-उस-शर्क अर्थात पूर्व का स्वामी की उपाधि के साथ पूर्व भेजा गया और उसने स्वयं को दिल्ली से स्वतंत्र कर लिया; इसी उपाधि से उसके वंश का नाम शर्की पड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विद्वानों और विद्या के कारण किस मध्यकालीन भारतीय नगर को पूर्व का शीराज कहा जाता था?
- A.मांडू
- B.जौनपुर
- C.गौड़
- D.अहमदाबाद
उत्तर देखें
शर्की सुल्तानों, विशेषकर इब्राहीम शाह शर्की के समय जौनपुर में फारसी तथा अरबी के इतने विद्वान, धर्मशास्त्री और संगीतज्ञ एकत्र हुए कि उसकी तुलना ईरान के विद्या और काव्य नगर शीराज से की गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1411 में साबरमती के तट पर अहमदाबाद नगर की स्थापना किस शासक ने की?
- A.मुजफ्फर शाह प्रथम
- B.महमूद बेगड़ा
- C.अहमद शाह प्रथम
- D.बहादुर शाह
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उसने 1411 में गुजरात की राजधानी अन्हिलवाड़ा पाटन से हटाकर साबरमती तट पर नया नगर बसाया, उसे अपना नाम दिया और वहाँ जामा मस्जिद तथा समारोहिक तीन दरवाजा बनवाए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →गुजरात के महमूद को बेगड़ा उपाधि इसलिए मिली क्योंकि उसने
- A.गिरनार और चंपानेर के दो किले जीते
- B.दिल्ली के दो सुल्तानों को पराजित किया
- C.दो बार अलग-अलग अवधि में शासन किया
- D.तट पर दो राजधानी नगर बसाए
उत्तर देखें
गुजराती में बे गढ़ का अर्थ दो किले है, और महमूद ने जूनागढ़ के गिरनार तथा अपने राज्य के पूर्व में स्थित चंपानेर, दोनों किलों पर अधिकार किया और उनके पास मुस्तफाबाद तथा मुहम्मदाबाद नगर बसाए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्यकालीन कश्मीर के महानतम शासक जैनुल आबिदीन को किस नाम से जाना जाता है?
- A.बुतशिकन
- B.बुडशाह
- C.शाह-ए-बंगाला
- D.मलिक-उस-शर्क
उत्तर देखें
उसने जजिया समाप्त किया, पलायन कर चुके ब्राह्मणों को वापस बुलाया, महाभारत तथा कल्हण की राजतरंगिणी का फारसी अनुवाद कराया और समरकंद से शिल्पी बसाए, जिन्होंने कागज निर्माण, शाल बुनाई तथा कालीन बुनाई आरंभ की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मालवा के किस शासक ने राजधानी धार से मांडू स्थानांतरित कर उसका नाम शादियाबाद रखा?
- A.दिलावर खाँ गोरी
- B.होशंग शाह
- C.महमूद खिलजी प्रथम
- D.बाज बहादुर
उत्तर देखें
दिलावर खाँ गोरी के पुत्र ने शासन का केंद्र मैदानी नगर धार से हटाकर मांडू के पहाड़ी किले में किया, उसका नाम शादियाबाद अर्थात आनंद नगर रखा और वहाँ जामा मस्जिद बनवाई; मांडू में उसका अपना मकबरा भारत का पहला पूर्णतः संगमरमर आच्छादित भवन है, जिसका अध्ययन करने शाहजहाँ ने…
पूरी व्याख्या पढ़ें →1342 में बंगाल को एक करने, इलियास शाही वंश की स्थापना करने और शाह-ए-बंगाला की उपाधि धारण करने वाला शासक कौन था?
- A.शम्सुद्दीन इलियास शाह
- B.अलाउद्दीन हुसैन शाह
- C.जलालुद्दीन मुहम्मद शाह
- D.दाऊद खाँ करारानी
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उसने 1342 में बंगाल के तीनों भागों को एक सत्ता के अधीन किया, अपने नाम पर वंश की स्थापना की, शाह-ए-बंगाला की उपाधि ली और फिरोज शाह तुगलक के दोनों आक्रमणों को विफल किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1484 में जौनपुर को दिल्ली सल्तनत में किस शासक ने मिलाया?
- A.बहलोल लोदी
- B.सिकंदर लोदी
- C.इब्राहीम लोदी
- D.अकबर
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लोदी वंश के संस्थापक ने अपने शासन का बड़ा भाग शर्की राज्य को दबाने में लगाया, हुसैन शाह शर्की को पराजित किया, जो बंगाल भाग गया, और 1484 में जौनपुर को मिला लिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अलाउद्दीन हुसैन शाह, जिसके समय मध्यकालीन बंगाल का स्वर्ण युग आया, किस धार्मिक व्यक्तित्व का समकालीन था?
- A.कबीर
- B.चैतन्य महाप्रभु
- C.गुरु नानक देव
- D.रामानुज
उत्तर देखें
बंगाल में कृष्ण भक्ति के महान प्रचारक अलाउद्दीन हुसैन शाह के शासनकाल में हुए, जिसने बांग्ला साहित्य को संरक्षण दिया और जिसके शासन में वैष्णव भक्ति प्रांत में व्यापक रूप से फैली।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्यकालीन बंगाल की सबसे बड़ी मस्जिद, पांडुआ की अदीना मस्जिद किसने बनवाई?
- A.सिकंदर शाह
- B.होशंग शाह
- C.इब्राहीम शाह शर्की
- D.अहमद शाह प्रथम
उत्तर देखें
सही उत्तर है A, सिकंदर शाह, जो शम्सुद्दीन इलियास शाह का पुत्र और उत्तराधिकारी था और जिसने चौदहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पांडुआ में अदीना मस्जिद ऐसे पैमाने पर बनवाई जो पूर्वी भारत में अद्वितीय है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रांतीय राज्य दिल्ली सल्तनत से अलग क्यों हुए?
सल्तनत एक राजधानी से शासित होने के लिए बहुत विशाल हो गई थी, और 1398 के तैमूर आक्रमण ने दिल्ली की शेष सैन्य प्रतिष्ठा भी नष्ट कर दी। दूर के प्रांतों के सूबेदारों ने राजस्व भेजना बंद कर दिया, अपने नाम के सिक्के ढलवाए और अपने नाम से खुतबा पढ़वाया, जो संप्रभुता के दो सार्वजनिक प्रतीक थे।
अहमदाबाद नगर की स्थापना किसने और कब की?
गुजरात के अहमद शाह प्रथम ने 1411 में साबरमती के तट पर अहमदाबाद बसाया और अन्हिलवाड़ा पाटन के स्थान पर उसे अपनी राजधानी बनाया। वहाँ की जामा मस्जिद और तीन दरवाजा उसके शासनकाल के हैं; नगर का नाम उसी के नाम पर है।
जैनुल आबिदीन को कश्मीर का अकबर क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उसकी नीतियाँ अकबर से सौ वर्ष से भी पहले वैसी ही थीं। उसने जजिया समाप्त किया, घाटी छोड़ चुके ब्राह्मणों को वापस बुलाया, मंदिरों की मरम्मत कराई, महाभारत तथा कल्हण की राजतरंगिणी का फारसी अनुवाद कराया और संस्कृत विद्या को प्रोत्साहन दिया, साथ ही मध्य एशिया से शिल्पी बुलाकर कश्मीर में कागज निर्माण तथा शाल और कालीन बुनाई आरंभ कराई।
गुजरात के महमूद को बेगड़ा क्यों कहा गया?
यह नाम उन दो किलों से आया, गुजराती में बे गढ़, जिन्हें उसने जीता: जूनागढ़ का गिरनार और पूर्वी गुजरात का चंपानेर। इनके निकट उसने क्रमशः मुस्तफाबाद और मुहम्मदाबाद नगर बसाए।
जौनपुर का विलय किसने किया और वह अकबर की विजय क्यों नहीं है?
जौनपुर मुगलों से बहुत पहले समाप्त हो गया। दिल्ली के बहलोल लोदी ने हुसैन शाह शर्की को पराजित कर 1484 में जौनपुर मिला लिया, इसलिए शर्की राज्य उस समय से लगभग सौ वर्ष पूर्व समाप्त हो चुका था जब अकबर ने 1561 से 1586 के बीच मालवा, गुजरात, बंगाल और कश्मीर को मिलाया।
जौनपुर स्थापत्य शैली की विशेषता क्या है?
जौनपुर के भवनों में मीनारें नहीं होतीं। उनके स्थान पर मस्जिद का अग्रभाग एक ऊँचे मेहराबी पर्दे से बनता है, जिसके दोनों ओर ढलवाँ दीवारें होती हैं, और भीतर पहले के मंदिरों के स्तंभ पुनः प्रयुक्त मिलते हैं। अटाला मस्जिद इसका आदर्श है, जिसके बाद लाल दरवाजा और जामा मस्जिद बनीं।
स्रोत
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 2 (कक्षा 12), शासक और इतिवृत्त तथा स्थापत्य संबंधी अध्याय — एनसीईआरटी
- हमारे अतीत 2 (कक्षा 7), अध्याय: दिल्ली के सुल्तान तथा शासक और इमारतें — एनसीईआरटी
- विश्व धरोहर स्थल: मांडू का ऐतिहासिक समूह तथा चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण





